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नयी दिल्ली, 26 जनवरी। मौखिक परंपराओं से लेकर भारत के आधुनिक, तकनीक आधारित और वैश्विक मीडिया शक्ति बनने तक के उभार को दर्शाती सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की झांकी ने प्राचीन काल से वर्तमान तक भारत की कहानी कहने की परंपराओं को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
‘‘भारत कथा: श्रुति, कृति, दृष्टि’’ विषय पर आधारित यह झांकी सोमवार को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कर्तव्य पथ से गुज़री और इसमें भारत की सभ्यतागत विरासत तथा समकालीन रचनात्मक नवाचार के बीच निरंतरता को दर्शाया गया। यह झांकी इस बात को रेखांकित करती है कि किस तरह परंपरा और तकनीक मिलकर राष्ट्रीय पहचान को आकार देती हैं।
झांकी की शुरुआत ‘ओम’ की ब्रह्मांडीय ध्वनि से हुई, जो नाद, ज्ञान और सृष्टि की उत्पत्ति का प्रतीक है। पहला खंड ‘श्रुति’ भारत की समृद्ध मौखिक परंपराओं को दर्शाता है, जिसमें पीपल के वृक्ष के नीचे गुरु शिष्यों को ज्ञान प्रदान करते हुए दिखाए गए हैं। बहती हुई ध्वनि-तरंग आकृतियां बोले गए शब्दों के माध्यम से ज्ञान के संप्रेषण को दर्शाती हैं।
यह खंड भारत की बौद्धिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की नींव को प्रतिबिंबित करता है।
दूसरा खंड ‘कृति’ मौखिक से लिखित अभिव्यक्ति की ओर परिवर्तन को दर्शाता है। इसमें भगवान गणेश को महाभारत लिखते हुए दिखाया गया है, जो पवित्र लेखन और ज्ञान के संरक्षण का प्रतीक है।
प्राचीन पांडुलिपियों, शास्त्रीय ललित कलाओं और प्रारंभिक संचार परंपराओं के दृश्य संरचित साहित्य, कला रूपों और सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण के विकास को उजागर करते हैं।
अंतिम खंड ‘दृष्टि’ भारत के आधुनिक मीडिया परिदृश्य को प्रस्तुत करता है। इसमें पुराने कैमरे, फिल्म रील, उपग्रह प्रतीक, समाचार पत्र और बॉक्स-ऑफिस चित्रण के माध्यम से सिनेमा, प्रसारण और प्रिंट मीडिया के विकास को दर्शाया गया।
डंडोरा कलाकारों, शास्त्रीय नर्तकों और लोक समूहों सहित अन्य कलाकारों ने झांकी को सजीव बना दिया। (भाषा)


