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कोलकाता, 7 नवंबर। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक व्यक्ति को यह देखते हुए सशर्त जमानत दे दी है कि वह लगभग 15 वर्षों से जेल में है और एचआईवी से पीड़ित है, जबकि दोषसिद्धि के विरुद्ध उसकी अपील लंबित है।
न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने ‘निकट भविष्य में अपील पर सुनवाई की नगण्य संभावना’ को देखते हुए अपील के निपटारे तक उसकी सज़ा निलंबित कर दी।
न्यायमूर्ति राय चट्टोपाध्याय की पीठ ने निर्देश दिया कि व्यक्ति को 10,000 रुपये के मुचलके और समान राशि के दो जमानतदारों, जिनमें से एक स्थानीय निवासी होना चाहिए, के बाद जमानत पर रिहा किया जाए।
जलपाईगुड़ी सुधार गृह, जहां अपीलकर्ता बंद है, के अधीक्षक की एक रिपोर्ट के अनुसार, उसने 14 वर्ष, 11 महीने और 24 दिन हिरासत में बिताए हैं।
पीठ ने बृहस्पतिवार को अपने आदेश में यह भी कहा कि कारावास के दौरान अपीलकर्ता का आचरण अच्छा रहा है और उसके विरुद्ध कोई प्रतिकूल आरोप नहीं पाया गया है।
पीठ ने यह भी कहा कि सह-कैदियों ने भी संकेत दिया है कि अपीलकर्ता उनका समर्थन करता है और उन्हें उसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं है।
पीठ ने निर्देश दिया कि दोषी जलपाईगुड़ी जिले के जयगांव पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना अपना अधिकार क्षेत्र नहीं छोड़ेगा और अगले आदेश तक उसे हर महीने पुलिस अधिकारी को रिपोर्ट करना होगा।
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि अपीलकर्ता ने एक कमरा किराए पर लिया था और अगले दिन उसे छोड़ दिया, जिसके बाद उसकी महिला साथी का शव अंदर पाया गया।
जलपाईगुड़ी सत्र न्यायालय ने महिला की हत्या के आरोप में उस व्यक्ति को दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उच्च न्यायालय ने कहा कि सजा के खिलाफ उसकी अपील पर अगले मार्च में सुनवाई होगी। (भाषा)


