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हई कोर्ट ने कहा जनहित के मुद्दे की अनदेखी हो रही, सरकार व विभागों को रुचि नहीं, 24 नवंबर तय की अगली सुनवाई
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 7 नवंबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में गुरुवार को बिलासपुर हवाई सुविधा विस्तार से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र और राज्य सरकार के बीच भूमि वापसी और धनराशि को लेकर चल रहे मतभेद एक बार फिर सामने आए।
केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित उप सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने अदालत को बताया कि रक्षा मंत्रालय ने राज्य सरकार से 290 एकड़ जमीन लौटाने के बदले 50 करोड़ रुपए की मांग की है। पहले यह राशि करीब 72 करोड़ रुपए थी, लेकिन जनहित को ध्यान में रखते हुए इसे घटाया गया। यह मांग पत्र 3 नवंबर को राज्य सरकार को भेजा गया है।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने इस पर सरकार का पक्ष रखने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। खंडपीठ ने कहा कि अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी, तब तक राज्य सरकार को रक्षा मंत्रालय के पत्र और नाइट लैंडिंग से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
मुख्य सचिव द्वारा दाखिल शपथपत्र में बताया गया कि डीवीओआर की स्थापना और उसकी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली गई है। अब एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया का निरीक्षण और आवश्यक दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया शेष है। यह दौरा 10 से 12 नवंबर के बीच प्रस्तावित है, जिसके बाद राज्य सरकार डीजीसीए के समक्ष 3 सी नाइट लैंडिंग लाइसेंस के लिए आवेदन करेगी।
सुनवाई के दौरान एलाइंस एयर के अधिवक्ता शोभित कोष्टा ने दावा किया कि उड़ानें एमओयू के अनुरूप चलाई जा रही हैं और तकनीकी कारणों से सप्ताह में तीन दिन उड़ानें नहीं चल रहीं। इस पर बार एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कहा कि पहले दिल्ली-बिलासपुर के बीच छह दिन उड़ानें चलती थीं, जिन्हें अब घटाकर तीन दिन कर दिया गया है, जबकि बिलासपुर-जगदलपुर मार्ग पर उड़ानें पूरी तरह बंद हैं। उन्होंने कहा कि एलाइंस एयर कोर्ट को गुमराह कर रही है। खंडपीठ ने इस पर टिप्पणी की कि यदि उड़ानें तकनीकी कारणों से घटाई गई हैं तो एयरलाइन को अतिरिक्त उड़ानें चलाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि बिलासपुर जैसे प्रमुख शहर में हवाई सुविधा विस्तार में लगातार देरी जनहित के विरुद्ध है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित विभागों या सरकारों में इस दिशा में कोई गंभीर रुचि नहीं है। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों को अदालत में आने की नौबत ही नहीं आनी चाहिए। सरकारों को जनहित में स्वयं आगे बढ़कर निर्णय लेना चाहिए। निर्वाचित प्रतिनिधियों को भी इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, परंतु ऐसा नहीं हो रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बिलासपुर के नागरिक आज भी सीमित हवाई सेवाओं के कारण कठिनाई झेल रहे हैं, जबकि यह शहर राज्य का महत्वपूर्ण केंद्र है।


