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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 7 नवंबर। बिलासपुर रेल मंडल में एक ही ट्रैक पर तीन ट्रेनों की घटना को लेकर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह कोई तकनीकी गलती नहीं थी, बल्कि ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली की सामान्य परिचालन प्रक्रिया थी। रेलवे के सीपीआरओ ने बताया कि यह प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित और नियंत्रित कार्यप्रणाली पर आधारित है, जिसे इस रेलखंड पर वर्ष 2023 से लागू किया गया है।
सीपीआरओ विलास राव पुष्कल के अनुसार, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम में लगभग हर किलोमीटर की दूरी पर सिग्नल लगाए जाते हैं, जिससे एक सिग्नल पार करने के बाद दूसरी ट्रेन को आगे बढ़ने की अनुमति मिल जाती है।
रेलवे ने यह भी बताया कि मालगाड़ी और यात्री गाड़ियों के लिए अलग ट्रैक नहीं होते, बल्कि दोनों एक ही ट्रैक पर नियंत्रित रूप से संचालित की जाती हैं। इस प्रणाली का उद्देश्य रेल परिचालन को सुचारू बनाना और ट्रेनों की गति व समयबद्धता को बनाए रखना है।
घटना 6 नवंबर की सुबह कोटमी सोनार और जयरामनगर स्टेशन के बीच घटी थी, जब एक मेमू यात्री ट्रेन के आगे और पीछे, दोनों दिशाओं से मालगाड़ियां उसी ट्रैक पर आ गईं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस दौरान यात्रियों में अफरातफरी मच गई और कई लोग ट्रेन से उतरकर दूर चले गए। बाद में आगे खड़ी मालगाड़ी को आगे बढ़ाया गया, जिसके बाद मेमू ट्रेन को गंतव्य की ओर रवाना किया गया। यात्रियों में दहशत की वजह यह थी क्योंकि इसी रेल लाइन पर दो दिन पहले 5 नवंबर को एक मालगाड़ी से मेमू पैसेंजर ट्रेन की टक्कर हो गई थी, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई और 20 यात्री घायल हो गए थे।
रेल प्रशासन ने इस घटना को लेकर कहा है कि यात्री किसी खतरे में नहीं थे, क्योंकि सिग्नलिंग सिस्टम इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनी रहती है।


