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‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
बिलासपुर, 2 नवंबर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महिला प्रशिक्षण अधिकारी के तबादले पर रोक लगाते हुए राज्य शासन को आदेश दिया है कि उन्हें तत्काल उनके पुराने पदस्थापना स्थल पर वापस पदस्थ किया जाए। यह आदेश आईटीआई दुर्ग में पदस्थ महिला प्रशिक्षण अधिकारी की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया।
याचिकाकर्ता के. अरुंधती दुर्ग स्थित महिला आईटीआई कॉलेज में प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। हाल ही में विभाग ने उनका तबादला दुर्ग से बीजापुर कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने अधिवक्ताओं अभिषेक पांडेय और वर्षा शर्मा के माध्यम से हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने दलील दी कि अरुंधती का पुत्र दुर्ग में कक्षा चौथी में पढ़ता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया गया जिसमें कहा गया था कि किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के बच्चों के स्कूल में अध्ययनरत होने की स्थिति में मिड सेशन के दौरान स्थानांतरण नहीं किया जा सकता।
इसके साथ ही अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की मां की उम्र 77 वर्ष है और वे मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं, जिनका इलाज दुर्ग में ही चल रहा है। इन परिस्थितियों में महिला अधिकारी पर बीमार मां और छोटे बेटे दोनों की जिम्मेदारी है। ऐसे में दुर्ग से बीजापुर तबादला नियमों के विपरीत और मानवीय दृष्टि से अनुचित है।
हाई कोर्ट ने सभी तथ्यों पर विचार करते हुए स्थानांतरण आदेश पर रोक लगाई और राज्य शासन को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता महिला प्रशिक्षण अधिकारी को तत्काल उनके पूर्व पदस्थापना स्थल पर पदस्थ किया जाए।


