खैरागढ़-छुईखदान-गंडई
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
खैरागढ़, 16 मार्च। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय से राज्य स्तरीय गौ-धाम योजना (सुरभि गौधाम) का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत राज्य के 11 जिलों में 29 गौधामों का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के ग्राम चकनार स्थित मां नर्मदा गौधाम समिति में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर सहित जनप्रतिनिधियों, जिला एवं विकासखंड स्तरीय गौधाम समिति के सदस्यों तथा ग्रामीणों ने गाय को तिलक लगाकर, माला पहनाकर तथा फल और गुड़ खिलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल ने कहा कि गौवंशों का संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती रही है। सडक़ों पर घूमने वाले मवेशियों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका रहती है और किसानों की फसलें भी प्रभावित होती हैं। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने गौ-धाम योजना शुरू की है।
उन्होंने बताया कि जिले में पांच गौ-धामों के प्रशासनिक अनुमोदन के बाद उनका संचालन स्थानीय समितियों के माध्यम से किया जाएगा तथा उन्हें अनुदान राशि भी प्रदान की जाएगी। साथ ही गौ-धामों में पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम द्वारा उन्नत नस्त की बछियों से दुग्ध उत्पादन मे वृद्धि करने एवं पशु चिकित्सा की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कलेक्टर ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि वे योजना को सफल बनाने के लिए अधिक से अधिक सहयोग करें और पैरादान के माध्यम से गौ-धामों के संचालन तथा पशु संरक्षण में सहभागिता निभाएं।
इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल, सांसद प्रतिनिधि खम्हन ताम्रकार, नगर पंचायत गंडई के अध्यक्ष लाल तारकेश्वर शाह खुशरो, जिला एवं विकासखंड स्तरीय गौधाम समिति के अध्यक्ष व सदस्य, मां नर्मदा गौधाम समिति के सदस्य, ग्रामवासी तथा पशुधन विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे
गौधाम योजना का मुख्य उद्देश्य गौवंशीय पशुओं का संरक्षण एवं संवर्धन करना है। इसके साथ ही गौ-उत्पादों को बढ़ावा देना, चारा विकास कार्यक्रम को प्रोत्साहित करना, गौधामों को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित करना तथा ग्रामीणों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना भी इस योजना के प्रमुख लक्ष्य हैं। साथ ही फसलों को होने वाले नुकसान और सडक़ों पर होने वाली दुर्घटनाओं में पशु एवं जनहानि से बचाव सुनिश्चित करना भी योजना का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
योजना के अंतर्गत प्रत्येक गौधाम को प्रशिक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां संचालनकर्ता समिति या संस्था ग्रामीणों को गौ-उत्पादों से जुड़े विभिन्न कार्यों का प्रशिक्षण देगी और उन्हें गौ-आधारित खेती के लिए प्रेरित करेगी। इससे ग्रामीणों को स्वावलंबन की दिशा में आगे बढऩे का अवसर मिलेगा।
इसके अलावा गौधामों के माध्यम से गोबर और गौमूत्र से केंचुआ खाद, जैविक कीट नियंत्रक, गौ-काष्ठ, गोनोइल, दीया, अगरबत्ती आदि उत्पादों के निर्माण, उत्पादन और बिक्री का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहे जाने के पीछे गौवंश का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह योजना पशुधन और कृषि दोनों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।


