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भारतीय संस्कृति में संगीत की शास्त्री परंपरा - कुलपति
18-Mar-2023 3:06 PM
भारतीय संस्कृति में संगीत की शास्त्री परंपरा - कुलपति

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
खैरागढ़, 18 मार्च।
इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत गायन व तंत्री विभाग के संयुक्त तत्वाधान में ख्याल गायकी एवं स्वर वाद्य वादन शैलियों पर ध़ुपत का प्रभाव विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ।
राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ कुलपति पद्मश्री से सम्मानित डॉ. ममता चंद्राकर ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुल सचिव प्रोफेसर डॉ. आईडी तिवारी ने की।संगोष्ठी में पंडित नित्यानंद हल्दीपुर मुंबई (बांसुरी) पंडित पुष्पराज कोष्टि मुंबई (,बांसुरी) पंडित पुष्पराज कोष्ठी मुंबई, (सूरबहार) डॉ. विकास कशालकर पुणे (गायन)और डॉ. राम देशपांडे मुंबई ( गायन)समेत चार विद्वान विशेषज्ञ वक्ता के रूप में प्रतिभागियों से रूबरू हुए। मुख्य अतिथि चंद्राकर ने कहा कि हमारी भारतीय संस्कृति में संगीत की शास्त्री परंपरा हमें जड़ों से जोडऩे में मदद करती है। जड़ों को जाने बिना नए प्रयोग नहीं किए जा सकते हैं।  अध्यक्षता कर रहे कुलसचिव प्रो.डॉ. तिवारी ने विश्वविद्यालय के द्वारा नियमित रूप से संपन्न कराई जा रही प्रायोगिक और सैद्धांतिक गतिविधियों की जानकारी दी।

विश्वविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता और वायलिग प्रो. डॉ हिमांशु विश्वरूप ने आधार व्यक्तव्य दिया। स्वागत उद्बोधन संगीत संकाय के अधिष्ठाता प्रो. डॉ.नमन दत्त ने दिये। कार्यक्रम का संचालन गायन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ लीकेश्वर कश्यप और डॉ. दिवाकर कश्यप ने किया।

संगीत संकाय की असिस्टेंट प्रो. डॉ विवेक ने आभार प्रदर्शन किया। दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रो. डॉ. काशीनाथ तिवारी ,डॉ राजन यादव, डॉ.योगेंद्र चौबे, डॉ. हरी ओम हरी ,डॉ श्रुति दिवाकर, निशांत दुबे तथा समस्त अधिष्ठाता शिक्षक शिक्षिकाएं प्रतिभागी विद्यार्थी, शोधार्थी समेत विश्व विद्यालय परिवार मौजूद था।


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