दुर्ग

नेशनल लोक अदालत में 7.92 लाख मामलों का निराकरण
10-May-2026 6:06 PM
नेशनल लोक अदालत में 7.92 लाख मामलों का निराकरण

‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता

दुर्ग, 10 मई। वर्ष 2026 की द्वितीय नेशनल लोक अदालत में 7,92,401 मामलों का निराकरण किया गया। इनमें न्यायालयीन एवं प्री-लिटिगेशन प्रकरण शामिल रहे। कुल अवार्ड एवं समझौता राशि 521 करोड़ 46 लाख 70 हजार 9 रुपये 16 पैसे दर्ज की गई।

नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में हुआ। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति वर्चुअल माध्यम से जुड़े और सभी जिलों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोक अदालत को न्याय तक आसान पहुंच का माध्यम बताते हुए न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और विभागों से समन्वय के साथ कार्य करने की बात कही।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देशानुसार तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के मार्गदर्शन में जिला न्यायालय दुर्ग, कुटुंब न्यायालय, व्यवहार न्यायालय भिलाई-3, पाटन, धमधा, किशोर न्याय बोर्ड, श्रम न्यायालय, स्थायी लोक अदालत, राजस्व न्यायालय और उपभोक्ता फोरम में लोक अदालत आयोजित की गई।

लोक अदालत में राजीनामा योग्य दांडिक, सिविल, पारिवारिक, मोटर दुर्घटना दावा, बैंकिंग, विद्युत एवं दूरसंचार से संबंधित प्रकरणों का निराकरण किया गया। आंकड़ों के अनुसार, 17,906 न्यायालयीन और 7,75,129 प्री-लिटिगेशन मामलों का निपटारा हुआ। बैंकिंग, विद्युत और दूरभाष से जुड़े कुल 8,213 मामलों में लगभग 70 लाख 78 हजार 899 रुपये की समझौता राशि तय हुई।

 मोटर दुर्घटना मामले में 1.80 लाख रुपये का अवार्ड

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के एक मामले में आवेदक सुनील कुमार इलमकार ने बस दुर्घटना में घायल होने पर क्षतिपूर्ति की मांग की थी। मामला नेशनल लोक अदालत में रखा गया, जहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्षकारों से चर्चा की गई। इसके बाद आवेदक के पक्ष में 1 लाख 80 हजार रुपये का अवार्ड पारित किया गया।

आपराधिक मामलों

में भी समझौते

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत की खंडपीठ में एक मारपीट और धमकी से जुड़े मामले में दोनों पक्षों ने समझौता कर विवाद समाप्त किया।

इसी तरह न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी भगवान दास पनिका की खंडपीठ में लंबित एक आपराधिक मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समझौता कराया गया। मामले में प्रार्थी जिला जेल बेमेतरा में निरुद्ध था।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्वेता पटेल की खंडपीठ में भी कई आपराधिक मामलों का आपसी सहमति से निराकरण किया गया। इनमें मारपीट, धमकी, चोरी और संपत्ति विवाद से जुड़े प्रकरण शामिल थे। न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों को समझाइश देने के बाद मामलों का निपटारा किया गया।


अन्य पोस्ट