सामान्य ज्ञान

क्या है इवोमाउस
26-Nov-2020 12:05 PM 49
 क्या है इवोमाउस

टच स्क्रीन की वजह से बदलती आदतों ने कंप्यूटर पर काम करने के तौर-तरीकों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इवोमाउस जैसे उत्पाद इसी का नतीजा है। 
इवो माउस चौकोर आकार का एक छोटा सा गैजेट है, आपके अंगूठे के आकार से थोड़ा ही बड़ा। वास्तव में यह एक वर्चुअल माउस है, जो इन्फ्रा रेड किरणों के जरिए काम करता है। जब आप इसे अपने पर्सनल कंप्यूटर या लैपटॉप से जोड़ते हैं तो उसके सामने की सामान्य सतह ही टच स्क्रीन का रूप ले लेती है। अगर यह टेबल पर रखा है तो टेबल की सतह और फर्श पर रखा है तो सामने का फर्श उसी तरह बर्ताव करने लगता है जैसे किसी टैबलेट की स्क्रीन हो। सतह पर अपनी तर्जनी उंगली को बाईं तरफ बढ़ाएंगे तो कंप्यूटर की  स्क्रीन पर माउस करसर बाईं तरफ बढ़ेगा। इसी तरह उंगली को दाएं, ऊपर, नीचे आदि दिशाओं में ड्रैग करने पर माउस करसर भी इन दिशाओं में घूमता दिखाई देता है। उंगली को किसी सर्कल के आकार में गोल घुमाइए तो   स्क्रीन  पर भी माउस करसर गोलाकार ढंग से घूमता हुआ दिखेगा। सतह पर दो बार टैप करेंगे तो वह माउस क्लिक का काम करेगा। आश्चर्य की बात यह है कि इस वर्चुअल माउस के जरिए आप राइट क्लिक और स्क्रोल भी कर सकते हैं। और तो और, एक से अधिक उंगलियों का एक साथ प्रयोग भी संभव है और इस तरह आप कंप्यूटर  स्क्रीन पर लगभग उसी तरह काम कर सकते हैं जैसे टैबलेट या स्मार्टफोन पर। मिसाल के तौर पर दो उंगलियों को सतह पर एक दूसरे से दूर ले जाने पर सामने मौजूद चित्र, वेब पेज या फाइल का आकार बड़ा (ज़ूम इन) या फिर छोटा (ज़ूम आउट) हो जाना। ड्रैग एंड ड्रॉप जैसी गतिविधियां भी आराम से होती हैं।
 इस गैजेट में एक इन्फ्रा रेड पल्स एमिटर लगा है जो   उंगलियों की मुद्राओं और उनकी पोजीशन को नोट करता रहता है। उसके बाद वह इन संकेतों को माउस जैसे संकेतों में बदलकर कंप्यूटर को भेज देता है। इसे कंप्यूटर में जोडऩे के लिए यूएसबी पोर्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

किसी दवा की एक्सपायरी डेट कैसे तय की जाती है?
किसी भी दवा की समय सीमा एक वैज्ञानिक पद्धति से तय की जाती है। इन दवाइयों को सामान्य से कठिन परिस्थितियों में रखा जाता है। जैसे 75 आर एच से अधिक आद्र्रता  या 40 डिग्री से अधिक तापमान।  फिर हर महीने या हर हफ्ते उनकी प्रभावशीलता की जांच की जाती है इस आधार पर यह तय किया जाता है कि अमुक दवा की समय सीमा डेढ़ साल या दो साल या फिर तीन साल है। जब दवा बाजार में आ जाती है तो फिर उसका अध्ययन किया जाता है और उसकी प्रभावशीलता के अनुसार ही उसकी समय सीमा बढ़ाई जाती है।
 

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