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जलवायु परिवर्तन के साथ इंसान ने खुद को 3 लाख साल पहले कैसे ढाला था?
26-Oct-2020 9:46 AM 56
जलवायु परिवर्तन के साथ इंसान ने खुद को 3 लाख साल पहले कैसे ढाला था?

पृथ्वी (Earth) पर यूं तो जीवों (Organisms) का आपस में संबंध ऐसा ही की वही जीवित रहेगा जो फिट रहेगा. लेकिन जीवों को संघर्ष का सामना दूसरे जीवों  से प्रतिस्पर्धा के ही लिहाज से नहीं करना पड़ा है. जीवों को पृथ्वी की जलवायु के बदलाव (Climate change) के मुताबिक ढलने की क्षमता का भी बार बार इम्तिहान देना पड़ा है. एक बार तो ऐसी घटनाएं हुईं थी जिसकी वजह से हुए बदलावों के कारण पृथ्वी ज्यादातर आबादी विलुप्त हो गई थी. ऐसे में इंसान (Humans) को इस तरह के इम्तिहानों से गुजरना पड़ा था, लेकिन आज जो इंसान दुनिया के हर तरह के तापमान और भूभागों में जीवित रह पाता है. उसमें ऐसा कर पाने की क्षमता यूं ही विकसित नहीं हो गई.

समय के साथ बदलाव

साइंस एडवांस जर्नल में इस बात का विश्लेषण प्रकाशित हुआ है कि कैसे इंसान ने न केवल खुद को बदलात वातावरण के अनुकूल ढाला बल्कि कौन से तकनीकी बदलावों से उसने यह संभव बनाया. शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकला कि होमो सेपियन्स की बदलाव के मुताबिक ढलने की क्षमता का इसमें अहम योगदान रहा.

पुरातन काल के क्षेत्र का अध्ययन

शोधकर्ताओं ने इसके लिए पुरातन काल के उन क्षेत्रों का विशेष अध्ययन किया जहां हजारों साल पुराने इंसानों के अवशेष और जीवाश्म मिलते रहे हैं. ऐसे ही एक इलाके ओलोर्गेसैली में शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक का पता लगाया जिसने 50 लाख साल पहले के मानव को नए बदलावों में ढलने में मदद की. इस तकनीक में शामिल थे हाथ की कुल्हाड़ी और अन्य उपकरण जो पाषाण युग में एक्यूलियन पाषाण तकनीक के नाम से जानी जाती है.

तकनीकों में बदलाव

इस तकनीक का उपयोग सात लाख सालों तक अफ्रीका में रहने वाले होमो इरेक्टस और होमो हेडिलहर्जेनिससि प्रजातियों ने किया. इसके बाद 32 लाख साल पहले मध्य पाषाण युग की तकनीकें आईं जो पूर्वी अफ्रीका के शुरुआती होमोसेपियन्स से जुड़ी थीं. जिसके और थोड़े छोटे थे लेकिन ज्यादा सक्षम और कारगर थे. इस दौरान मानवों ने ऑब्सीडियन पदार्थ के काले रंग के तीखे हथियारों का उपयोग शुरू किया और साथ ही रंगों का भी.

बड़े बदलावों का दौर

इसके बाद शोधकर्ताओं का दस लाख साल पहले से पांच लाख साल पहले साफ पानी ज्यादा उपलब्ध था लेकिन चार लाख साल पहले पर्यावरण में अहम बदलाव होना शुरू हुए. इसी दौरान एक फिर शिकारी और खाना जमाकरने वाले लोगों ने अपना समय और ऊर्जा तकनीकी बदलावों में लगाया.

एकदम से होने लगे इतने सारे बदलाव

उस युग में मानव ने खुद को कई सामाजिक समूहों बांटा 3 लाख 60 हजार साल पहले से तीन लाख साल पहले तक जलवायु और जीवों में भी कई तरह के बदलाव आए तो पृथ्वी की टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण ज्वालामुखी राख आसमान में छाने लगी थी.

दो डायनासोर प्रजातियों के चमगादड़ जैसे पंख थे, फिर भी उड़ने में होती थी दिक्कत

यही वह समय था जब इंसान की खुद को हालात के हिसाब से ढाल पाने की सबसे ज्यादा परीक्षा हुई. शोधकर्ताओं के मुताबिक उस दौर में किए बदलावों से इंसान आज के समय में सबक ले सकता है जब जलवायु परिवर्तन एक बार फिर से उसका इम्तिहान ले रहा है.(news18)

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