सामान्य ज्ञान

  • दुनिया के तमाम देशों में सरकारें अपने नागरिकों की ज्यादा से ज्यादा जानकारियां जुटाने में लगी हैं।  ज्यादातर इसे प्रभावी कामकाज से जोड़ा जा रहा है।  अब तक किसी दूसरे व्यक्ति या निजी समूहों से अपनी जानकारी बचाने की चिंताएं, अब सरकार से अपनी जानकारियां बचाने पर आ पहुंची हैं।  
     भारत- भारत में नागरिकों के निजता के अधिकार पर छिड़ी बहस अब सर्वोच्च न्यायालय में हो रही है। नौ जजों की बेंच ने इतना साफ किया है कि प्राइवेसी बचाने के लिए सरकार को नागरिकों के लिए बाध्यकारी कानून बनाने से नहीं रोका जा सकता। सर्वोच्य न्यायालय ने   कहा कि निजता का अधिकार संपूर्ण अधिकार नहीं है और इस पर राज्य कुछ हद तक तर्कपूर्ण रोक लगा सकते हैं। पिछले कुछ समय में सुप्रीम कोर्ट में आधार कार्ड की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 20 याचिकाएं दाखिल हुई हैं।
    अमेरिका- विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र वाले देश अमरीका में निजता का अधिकार गंभीर मसला है। हालांकि यह संविधान में उल्लिखित नहीं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कई संशोधनों की व्याख्या इस तरह की, जिससे प्राइवेसी के अधिकार का पता चलता है। संविधान का चौथा संशोधन बिना किसी  संभावित कारण के किसी की तलाशी पर रोक लगाता है। कुछ अन्य संशोधनों में नागरिकों को बिना सरकारी दखलअंदाजी के अपने शरीर और निजी जीवन से जुड़े फैसले लेने का अधिकार है। खास है प्राइवेसी एक्ट, 1974। अमेरिका के इस एक्ट के अंतर्गत सरकारी दस्तावेजों में दर्ज किसी की निजी जानकारियों को बिना उसकी अनुमति के देश की कोई केंद्रीय एजेंसी हासिल नहीं कर सकती। अगर किसी एजेंसी को जानकारी चाहिए तो पहले उसे बताना होता है कि उसे किस काम के लिए उस सूचना की जरूरत है। सोशल सिक्योरिटी नंबर को लेकर यह विवाद है कि इससे सरकारी एजेंसी यह जान जाती है कि कोई व्यक्ति टैक्स भरता है या नहीं या कैसे सरकारी अनुदान लेता है।
      जापान - वर्ष  2015 में जापान में नागरिकों की पहचान से जुड़ा एक नया सिस्टम शुरु हुआ. इसमें टैक्स से जुड़ी जानकारी, सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत मिलने वाले फायदों और आपदा राहत के अंतर्गत मिलने वाली मदद को एक साथ लाया गया। आलोचकों की भारी निंदा के बावजूद सरकार ने इसे शुरु कर दिया। सभी जापानी नागरिकों और वहां के विदेशी निवासियों को 12 अंकों की संख्या माइ नंबर  मिला। सरकार अब इसमें बैंक खातों को भी जोडऩा चाहती है।  जापान में भी निजता के अधिकार को साफ साफ परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन जापानी संविधान में नागरिकों को  जीवन, आजादी और खुशी तलाशने  का अधिकार है। 2003 में निजी सूचना की सुरक्षा का कानून बना, जिसमें लोगों की जानकारी को सुरक्षित रखना अनिवार्य है। जब भी किसी व्यक्ति के डाटा का इस्तेमाल होगा, तो उसे इसके मकसद के बारे में जानकारी दी जाएगी। निजी डाटा को लीक से बचाने के लिए सरकार कानूनी रूप से बाध्य है।
     यूरोपीय देश- पूरे यूरोप में डाटा प्रोटेक्शन डायरेक्टिव लागू होते हैं। इसके अंतर्गत लोगों की सूचना के रखरखाव और इस्तेमाल पर कई तरह की रोक है। ईयू के सदस्य देशों को  ऐसे तकनीकी और संगठनात्मक उपाय लागू करने होते हैं जिससे किसी के डाटा का गलती या गैरकानूनी इस्तेमाल ना हो, ना ही उसे कोई अनाधिकृत व्यक्ति पा सके, बदल सके या किसी तरह का नुकसान पहुंचा सके।  इस नियम का उल्लंघन होने पर न्यायिक उपायों का व्यवस्था है।
    स्वीडन- स्वीडन विश्व का पहला देश था जहां नागरिकों को पहचान संख्या दी गयी। हर सरकारी कामकाज में इसका इस्तेमाल अनिवार्य हुया, लेकिन अगर किसी की सूचना उसकी जानकारी के बिना इस्तेमाल की जाये और उस पर नजर रखी जाये, तो इसके खिलाफ सुरक्षा मिलेगी। स्वीडन जैसे स्कैंडेनेवियाई देशों में सरकार से नागरिकों को इतने भत्ते मिलते हैं, जिनके लिए लोगों का पहचान नंबर देना जरूरी होता है। प्राइवेसी की चिंता यहां बहुत कम है।
    भारत में  चावल अनुसंधान संस्थान का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र स्थापित होगा
     अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान मनीला, फिलीपींस में स्थित है। अब भारत में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए जाने की तैयारी की जा रही है।  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 जुलाई 2017 को वाराणसी स्थित राष्ट्रीय बीज अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र  परिसर में यह केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत वाराणसी में चावल में मूल्य संवर्धन के लिए एक उत्कृष्टता केंद स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है।
    पूर्वी भारत में यह पहला अंतरराष्ट्रीय केंद्र होगा जो इस क्षेत्र में सतत चावल उत्पादन और कौशल विकास के क्षेत्र में वरदान साबित होगा। इसके साथ ही दक्षिण एशिया और अफ्रीकी देशों के लिए भी यह खाद्यान्न उत्पादन और कौशल विकास के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा।
    इस केंद्र का प्रबंधन आईआरआरआई के न्यासी बोर्ड द्वारा संचालित होगा। आईआरआरआई अपने सदस्य को इस केंद्र के निदेशक के तौर पर नियुक्त करेगी। आईआरआरआई के महानिदेशक की अध्यक्षता वाली समन्वय समिति इस केंद्र के अध्यक्ष के तौर पर काम करेगी। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव इस केंद्र के सह अध्यक्ष के रूप में नियुक्त होंगे।

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  • क्या होती है संसदीय रिर्पोटिंग
     संसद के दोनों सदनों का एक आम दृश्य यह है कि सादा पोशाक पहने कुछ व्यक्ति सेन्ट्रल टेबल की तरफ तेज गति से लेकिन सतर्कता पूर्वक आकर अपना स्थान ग्रहण करते हैं, थोड़ी देर तक अपने नोटबुक में कुछ लिखते हैं और फिर जिस तेजी से और निर्बाध रूप से उनका प्रवेश हुआ था, उसी ढंग से बाहर चले जाते हैं। ये संसदीय रिर्पोटर  हैं जो विचार-विमर्श हेतु देश के सर्वोच्च विधायी निकाय में सम्पन्न होने वाले कार्यों का संपूर्ण एवं प्रामाणिक रिकार्ड तैयार करने का महत्वपूर्ण कार्य का निवर्हण करते हैं।
     प्रक्रिया नियमों के अनुसार महासचिव से यह अपेक्षा की जाती है कि वे सदन के प्रत्येक बैठक की कार्यवाही की पूरी रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था करें ।   लोक सभा तथा राज्य सभा में बोले जाने वाले हर शब्द, प्रत्येक प्रश्न, टिप्पणी और भाषण का संसदीय रिर्पोटर   द्वारा जो आशुलिपि लेखन में चरम दक्षता का प्रतिनिधित्व करते हैं, अत्यंत सतर्कता और सटीक ढंग से रिकार्ड किया जाता है ।   कुछ शब्द अथवा अभिव्यक्तियां जिन्हें कार्यवाही वृत्तांत से विशेष रूप से निकाला गया हो, अथवा अध्यक्ष अथवा पीठासीन अधिकारी द्वारा रिकार्ड न करने का आदेश दिया गया हो, रिकार्ड का हिस्सा नहीं बनाया जाता है।
     अपने वर्तमान शब्दश: रूप में पहुंचने के पहले, संसदीय रिपोर्टिंग का तौर-तरीका परिवर्तन के कई दौरों से गुजऱ चुका है । प्रारंभ में अर्थात सन् 1777 से 1835 तक जब विधायिका, कार्यपालिका के एक भाग के रूप में कार्य करती थी, तत्कालीन काउंसिल ऑफ द गवर्नर जनरल ऑफ इण्डिया जो अनन्य रूप से कानूनी मामलों का निपटान करता था, की कार्यवाहियों का रिकार्ड ईस्ट इण्डिया कंपनी के राजस्व विभाग द्वारा तैयार किया जाता था । वर्ष 1835 में विधायी कार्य से संबंधित कार्यवाही का कार्यवाही सारांश के रूप में अलग से रिकार्ड तैयार किया जाने लगा, जिसमें काउंसिल द्वारा विचार-विमर्श किए गए विधानों के केवल शीर्षक का उल्लेख होता था। 1860 से भारत सरकार के राजपत्र में काउंसिल में निष्पादित विधायी कार्यों का संक्षिप्त उल्लेख शामिल किया जाने लगा था।
     वर्ष 1854 में जब तत्कालीन विधायी काउंसिल की कार्यवाही को बाहर वालों के लिए खोल दिया गया, तब प्रकाशन के लिए उसकी कार्यवाहियों की एक प्रामाणिक रिपोर्ट जारी करने का निर्णय लिया गया। 16 मार्च, 1864 से प्रकाशित की जाने वाली कार्यवाही के सारांशों के अलावा कार्यवाही के भाग प्रत्यक्ष कथन शैली रूप में, संक्षेप में, प्रकाशित होने लगे। 
    सारांश की बजाय, कार्यवाही की पूर्ण रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था करने हेतु संबंधित नियमों का वर्ष 1897 में संशोधन किया गया । रिपोर्ट तैयार करने का दायित्व सचिव से हटकर हाई स्पीड आशुलिपिक अथवा रिपोर्टरों के कंधों पर चला गया । परिणामस्वरूप, सारांश लेखन को बंद कर दिया गया और शब्दश: रिपोर्टें जारी की जाने लगीं तथा उसे राजपत्र में भी प्रकाशित किया जाने लगा । तब कार्यवाही में सदस्यों की वैयक्तिक शैली प्रतिबिम्बित होती थी जिससे आधुनिक शब्दश: रिपोर्ट की प्रामाणिकता तथा जीवंतता का आभास मिलता था । वर्ष 1892 में प्रश्न पूछने का अधिकार दिया गया जिससे रिपोर्टों को जीवंतता तथा पठनीयता प्राप्त हुई । 
    चूंकि वर्ष 1920 में, भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अंतर्गत पहला द्विसदनी विधायिका शीघ्र ही अस्तित्व में आने वाली थी, इसलिए इसकी कार्यवाही को पृथक पुस्तक रूप में प्रकाशित किए जाने के प्रस्ताव पर विचार किया गया । यह सोचा गया कि लोकप्रिय विधान मंडल की कार्यवाही की मांग अधिक रहेगी और इसलिए यह निर्णय लिया गया कि इसे जनसाधारण को बिक्री के लिए उपलब्ध कराने हेतु इसे पुस्तक रूप में प्रकाशित किया जाए । साथ ही इसके शीर्षक को  कार्यवाही  से बदलकर  वाद-विवाद   करने का भी निर्णय लिया गया । आज लोक सभा का आधिकारिक प्रतिवेदन  लोक सभा वाद-विवाद के नाम से जारी किया जाता है।

     

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  • दिल्ली। दिल्ली में लगातार घना कोहरा छाये रहने के कारण आज भी रेल और सड़क यातायात प्रभावित रहा। कोहरे के कारण दृश्यता का स्तर बेहद कम होने के कारण 52 रेलगाड़ियां देरी से चल रही है और पांच के समय में परिवर्तन किया गया है एवं एक को रद्द कर दिया गया है।

    कोहरे के कारण हालांकि विमानन सेवाओं पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट होने के कारण दिल्लीवासियों को ऐसी ही ठंड और कोहरे का सामना करना पड़ेगा। शहर का न्यूनतम तापमान कल 7.8 डिग्री सेल्सियस था जबकि आज 8.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अधिकारियों के अनुसार शहर का अधिकतम तापमान 24.0 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

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  • गाजियाबाद। कवि नगर पुलिस ने मुठभेड़ के बाद विद्युत तार चोर अंतरराज्यीय गिरोह के चार चोरों को दबोचा है। इनसे 950 मीटर तार, तार कटिंग के उपकरण, तमंचा और चाकू बरामद हुए हैं। शुक्रवार को एसएसपी दीपक कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि पकड़े गए चोरों में गिरोह सरगना फिरोज निवासी बाबूगढ़, मोहित चौधरी निवासी पिलखुवा, योगेंद्र निवासी याद नगर हापुड़ और छोटू उर्फ सुरेंद्र बीबीनगर बुलंदशहर है।

    इन्होंने चोरी का तार स्वर्णजयंतीपुरम से मटियाला गांव जाने वाले रास्ते पर बनी पानी की टंकी के पास अर्द्घ निर्मित खंडहरनुमा भवन में छिपाया हुआ था, जिसे गुरुवार रात वाहन में भरकर बेचने की फिराक में थे।

    मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दबिश दी तो चोरों ने उन पर फायरिंग कर दी। जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की और घेराबंदी कर आरोपियों को दबोच लिया। इनकी निशानदेही पर विद्युत खंभों से काट कर चोरी किया हुआ 70 हजार रुपए कीमत का करीब 140 किलोग्राम एल्युमीनियम तार (950 मीटर) बरामद हुआ, जो इन्होंने गुलावठी बुलंदशहर, मुरादनगर, शामली, बागपत, मेरठ आदि स्थानों से चोरी किया था। इनके खिलाफ बुलंदशहर, गाजियाबाद, मेरठ और एटा में पहले भी केस दर्ज हैं। इसके अलावा एटा, बुलंदशहर और मेरठ से चारों पहले भी जेल गए हैं। एसएसपी ने बताया कि इनके खिलाफ एनएसए के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।

    साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि विद्युत विभाग के कर्मचारी तो इनके साथ नहीं मिले हुए हैं। यह गिरोह नए-नए क्षेत्रों में चोरी करता था, जहां विद्युतीकरण हो रहा हो। रेकी करने के बाद वारदात करते थे। चोरी के बाद दोबारा उन स्थानों पर नहीं जाते थे।

    यह लोग करंट चलती हुई लाइनों के तारों पर चेन और रस्सा फेंक कर शट डाउन कराते थे, इसके बाद खंभों पर चढ़ कर मोटे व असरदार उपकरणों से कनेक्शन को काटकर तारों को चोरी करते थे। गिरोह के अन्य सदस्य जो चोरी किए गए तारों को संभल, मेरठ और दिल्ली में ठिकाने लगाते हैं, उनकी तलाश की जा रही है।

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  • ग्रेटर नोएडा। नेफोवा के नेतृत्व में शुक्रवार  को सैकड़ों फ्लैट खरीदारों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय के सामने  प्राधिकरण और बिल्डर्स के खिलाफ  जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। फ्लैट्स के कब्जे में हो रही देरी की वजह से ग्रेटर नोएडा वेस्ट में घर बुक कराए लोग काफी गुस्से में है और प्राधिकरण द्वारा इस सम्बन्ध में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाये जाने से क्षुब्ध हैं। 

    प्रदर्शन में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के अलग-अलग बिल्डर्स के तमाम प्रोजेक्ट्स के फ्लैट खरीदार शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान फ्लैट खरीदारों ने लगभग एक किलोमीटर तक मार्च भी निकाला। सुमित सक्सेना, सागर चौधरी, चन्दन कुमार, संजय साहनी, बीएन गुप्ता, बीएस. त्रिपाठी, रविन्द्र जैन इत्यादि के अलावा सैकड़ों फ्लैट खरीदारों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

    इस प्रदर्शन का नेतृत्व अध्यक्ष अभिषेक कुमार ने किया। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी जब फ्लैट खरीदारों से मिलने आए तो उन्हें  इस सम्बन्ध में ज्ञापन भी सौंपा गया। नेफोवा ने ये चेतावनी भी दी कि कब्जे में हो रही देरी के मुद्दे पर प्राधिकरण तमाम बिल्डर्स के खिलाफ  यदि तुरंत कोई कारवाई नहीं करता है, तो नेफोवा अगले महीने फिर से बिल्डर्स और प्राधिकरण के खिलाफ  बड़ा आन्दोलन खड़ा करेगी।  

    साल दर साल बीतते जा रहे हैं, लेकिन कुछेक प्रॉजेक्ट को छोड़कर अभी तक ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) में ज्यादातर हाउसिंग में निर्माण कार्य तय समय से काफी पीछे चल रहा है। कुछ प्रोजेक्ट्स में तो काम महीनों से बंद पड़ा है। कई प्रोजेक्ट का भविष्य अभी भी अधर में लटका है और बिल्डर कब्जे की रोज नई नई तारीख देकर फ्लैट खरीदारों को ऊल्लू बनाने में लगे हैं।

     यहां 6-7 साल पहले घर बुक कराए खरीदारों का सब्र अब टूट चुका है। अपने अपने बिल्डर से शिकायत करके जब खरीदार थक गए तब उन्होंने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का दरवाजा खटखटाया। हजारों की संख्या में मेल भेजे गए। नेफोवा की तरफ से अनगिनत पत्र लिखे गए। लेकिन, प्राधिकरण तो, बिल्डरों के खिलाफ  कोई शिकायत मिलते ही जैसे कान में रुई डालकर सो जाता है।

    के्रडाई, बिल्डर और प्राधिकरण सभी ने जल्द से जल्द काम पूरा कर कब्जा दिए जाने का आश्वासन तो दिया, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए। लोग महंगे रेंट और इएमआई दे देकर परेशान हो चुके हैं। 

    नेफोवा द्वारा मुख्यमंत्री अखिलेश को ट्विटर अभियान द्वारा कब्जे में देरी को लेकर उचित कारवाई की जाने की अपील भी की गयी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्राधिकरण को इस सम्बन्ध में कार्रवाई की जाने के आदेश के बावजूद ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सोता रहा। प्राधिकरण के उदासीन रवैये से लोगों में खासी नाराजगी है।

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