अंतरराष्ट्रीय

तालिबान ने अफगान महिला वॉलीबॉल टीम की सदस्य महजुबिन का सिर कलम किया
21-Oct-2021 9:04 AM (79)

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर| अफगान महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम की सदस्य महजुबिन हकीमी का तालिबान ने काबुल में सिर कलम कर दिया। वह युवा आयु वर्ग टीम की तरफ से खेलती थीं। फारसी इंडिपेंडेंट के साथ एक साक्षात्कार में, अफगान महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम के कोचों में से एक, सुराया अफजाली (छद्म नाम) ने पुष्टि की कि एथलीट की मौत हो गई है। उन्होंने कहा कि महजुबिन के परिवार के अलावा कोई मौत के समय और तरीके के बारे में नहीं जानता।

महजुबिन पिछली अफगान सरकार के पतन से पहले काबुल नगर पालिका वॉलीबॉल क्लब के लिए खेलती थीं और क्लब के सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक थीं।

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि बकौल सुराया अफजाली, महजुबिन हकीमी की हत्या संभवत: अक्टूबर की शुरुआत में हुई थी और यह मुद्दा अब तक छिपा हुआ था, क्योंकि उसके परिवार को धमकी देकर इस बारे में किसी को बताने से मना किया गया था।

अफजाली के अनुसार, पिछली सरकार के पतन के बाद, अफगानिस्तान में महिला एथलीटों को एक गंभीर सुरक्षा खतरे का सामना करना पड़ा और तालिबान ने उनका पीछा किया और विभिन्न शहरों में उनमें से कई के घरों की तलाशी ली।

कई महिला एथलीट, विशेष रूप से अफगान महिला वॉलीबॉल टीम की सदस्य, जिन्होंने विदेशी और घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लिया है और मीडिया कार्यक्रमों में दिखाई दी हैं, गंभीर खतरे में हैं।

अफगान महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम के कोच ने कहा कि टीम के केवल दो खिलाड़ी व्यक्तिगत कार्रवाई के माध्यम से अफगानिस्तान छोड़ने में सक्षम थे और अफगानिस्तान के अंदर टीम के बाकी सदस्य खतरे और आतंक में हैं।

अफजाली ने कहा, "वॉलीबॉल टीम के सभी खिलाड़ी और बाकी महिला एथलीट बुरी स्थिति में हैं और निराशा और डर में हैं।"

रिपोर्ट में कहा गया है, "सभी को पलायन करने और अज्ञात जगहों पर रहने के लिए मजबूर किया गया है। अफगानिस्तान छोड़ने के लिए विदेशी संगठनों और देशों का समर्थन हासिल करने के प्रयास अब तक असफल रहे हैं।"

महजुबिन की मौत ने तालिबान और उन लोगों द्वारा निशाना बनाए जाने की आशंकाओं को हवा दी है, जो लंबे समय से महिलाओं के खेल को बाधित करने की मांग कर रहे हैं।

तालिबान के अफगानिस्तान पर नियंत्रण के साथ खेल, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं की सभी गतिविधियां बंद हो गई हैं और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय महिलाओं के जीवन, काम और सुरक्षा पर जारी प्रतिबंध के बारे में अभी भी चिंताएं हैं। 

हर हफ्ते 10 हज़ार का फास्ट फूड खाकर फूल गई लड़की, 3 महीने के बाद मां भी नहीं पहचान पाई !
21-Oct-2021 9:02 AM (85)

फास्ट फूड-जंक फूड किसे अच्छे नहीं लगते? एक बार खाने के बाद इसे बार-बार खाने का मन करता है. वो बात अलग है कि इसका दुष्प्रभाव शरीर पर ज़बरदस्त तरीके से पड़ता है. ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली कोरा हेंडरसन के भी मुंह McDonald के फूड आइटम्स का ऐसा चस्का लगा कि वो इसे खा-खाकर फूल गई. हद तो तब हो गई, जब लड़की की अपनी मां भी उसे पहचानने में धोखा खा गई.

सिडनी की रहने वाली 22 साल की कोरा 3 महीने बाद अपने परिवार से मिलने के लिए आईं, तो उनका वज़न इतना ज्यादा बढ़ चुका था कि मां भी अपनी बेटी को नहीं पहचान पाईं. दिलचस्प बात तो ये है कि मां अगर कोरा को इस बात का एहसास न दिलातीं कि वो इतनी ज्यादा मोटी हो चुकी है, तो उसे खुद इस बात का एहसास ही नहीं था कि वो मोटी होती जा रही है.

बेतहाशा बढ़ता गया वज़न
कोरा पहले फ्लाइट अटेंडेंट का काम करती थीं. उस दौरान भी लंबी फ्लाइट्स में सफर करने के दौरान वे पीछे बैठकर कुछ न कुछ खाती रहती थीं और फ्लाइट के लैंड करते ही फूड कोर्ट पहुंच जाती थीं. उनकी इस आदत की वजह से भी वजन बढ़ रहा था. महामारी में फ्लाइट्स बंद होने के बाद उनकी नौकरी छूट गई और उनकी हालत और खराब होने लगी. वे पहले से ज्यादा आलसी महसूस करती थीं और उनका कुछ करने का मन ही नहीं होता था. वे बताती हैं कि घर बैठे-बैठे भी वे 2 हज़ार रुपये दिन में मैकडोनल्ड पर खर्च कर देती थीं, यानि हफ्ते में ये बिल 10 हज़ार से ऊपर पहुंच जाता था.

मां की सलाह के बाद घटाया वज़न
जब कोरा ने 3 महीने बाद घर वापसी की, तो मां उन्हें पहचान ही नहीं पाईं. ऐसे में उन्हें अपने मोटापे का एहसास हुा और उन्होंने इस पर ध्यान देना शुरू कर दिया. जिम में जाने के अलावा उन्होंने अपने जंक फूड पर एक महीने के लिए बैन लगा दिया, जबकि लिक्विड के नाम पर वे सिर्फ पानी पीती रहती थीं. उन्होंने पौष्टिक भोजन करना शुरू कर दिया. इसका परिणाम ये हुआ कि उनका वजन तो घटा ही, उनका एनर्जी लेवल भी तेज़ी से बढ़ा. कोरा बताती हैं कि वज़न का घटना आपकी ज़िंदगी को बिल्कुल बदलकर रख देता है. हेल्दी खाना खाने से शरीर को ईंधन मिलता है, जबकि जंक फूड आपकी एनर्जी को खत्म कर देता है. (news18.com)

कश्मीर में दुबई के निवेश से भड़का पाकिस्तान, पूर्व राजदूत बोले- हम मजाक बनकर रह गए
21-Oct-2021 8:35 AM (96)

नई दिल्ली. कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद से लेकर अब तक पाकिस्तान हर मंच पर भारत के खिलाफ जहर उगलता रहा है. लेकिन उसे कहीं भी कामयाबी नहीं मिली. इसके बाद उसने इस्लामी मुल्कों के संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन पर भी कश्मीर को लेकर मदद मांगी. लेकिन उसे चुप करा दिया गया. अब खबर है कि पाकिस्तान के कथित मुस्लिम बरादर मुल्क संयुक्त अरब अमीरात ने कश्मीर को लेकर भारत से डील साइन की है. दुबई जल्द ही कश्मीर में इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में निवेश करने जा रहा है. खबर सामने आने के बाद पाकिस्तान में बवाल मच गया है.

इस नए समझौते के तहत दुबई कश्मीर में IT टावर, औद्योगिक पार्क, लॉजिस्टिक टावर के साथ ही मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी बनाएगा. हालांकि अभी इस बात का खुलासा नहीं हुआ है कि दुबई, कश्मीर में कितना निवेश करेगा. लेकिन दुबई भारत के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर भी कर चुका है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, कश्मीर के विकास के लिए दुनिया हमारे साथ आ रही है. यह करार बताता है कि भारत ग्लोबल पावर के तौर पर सामने आ रहा है.

पाकिस्तान बन गया मजाक: बासित
भारत में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अब्दुल बासित ने कहा कि पाकिस्तान में निरंतरता की कमी के चलते हम दूसरे देशों के लिए मजाक बनकर रह गए हैं. उन्होंने इस फैसले पर भड़कते हुए कहा कि यह पाकिस्तान के लिए डिप्लोमेटिक हार है. पहले ही OIC ने कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान का खुलकर समर्थन नहीं किया है.

दूसरे इस्लामी मुल्क भी करेंगे निवेश
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अंधेरे में हाथ-पैर मार रहा है और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा है. इस हाल के लिए पाकिस्तान की पुरानी सरकारें भी दोषी हैं. ऐसा नहीं है कि कश्मीर का हल नहीं निकाला जा सकता है. लेकिन इच्छाशक्ति की कमी है. वो दिन दूर नहीं जब कश्मीर में दुबई के बाद ईरान और दूसरे मुस्लिम देश भी निवेश करेंगे. (news18.com)

यूनिसेफ: यमन में 2016 से अब तक 10,000 बच्चे मारे गए या अपंग हुए
20-Oct-2021 9:12 PM (77)

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) का कहना है कि यमन में 2016 से अब तक 10,000 बच्चे मारे गए हैं या अपंग हो चुके हैं. युद्ध के कारण देश इस समय दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकट का सामना कर रहा है.

(dw.com)  

यूनिसेफ ने मंगलवार, 19 अक्टूबर को कहा कि युद्धग्रस्त देश यमन में 10,000 से अधिक बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं. एजेंसी के अनुसार यमन हर दिन चार बच्चों के मारे जाने या घायल होने के "शर्मनाक मील के पत्थर" पर पहुंच गया है.

यमन में पिछले पांच वर्षों से युद्ध छिड़ा हुआ है, जिसमें ईरानी समर्थित हूथी विद्रोही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार से लड़ रहे हैं. इस युद्ध में सऊदी अरब और क्षेत्र में उसके सहयोगी भी सरकार का समर्थन कर रहे हैं.

यूनिसेफ के प्रवक्ता जेम्स एल्डर ने कहा कि उनकी एजेंसी का अनुमान है कि यमन में अब तक 10,000 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है. नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक 2015 में युद्ध में सऊदी गठबंधन के हस्तक्षेप के बाद से हर दिन लगभग चार बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं.

यूनिसेफ ने इसे "शर्मनाक मील का पत्थर" बताया है. संयुक्त राष्ट्र का कहना है मार्च 2015 से इस साल 30 सितंबर के बीच यमन में हुई लड़ाई में 3,455 बच्चे मारे गए और 6,600 घायल हुए.

युद्ध के परिणामस्वरूप अनगिनत यमनी बच्चे अप्रत्यक्ष रूप से घातक तरीकों से प्रभावित हो रहे हैं. यमन वर्तमान में संघर्षों, आर्थिक तबाही, सामाजिक विघटन और कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं से ग्रस्त है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यमन वर्तमान में दुनिया के सबसे खराब मानवीय संकट से जूझ रहा है, जिसमें लगभग दो करोड़ लोग या देश की एक तिहाई आबादी को किसी भी सहायता की सख्त जरूरत है. बच्चे इस स्थिति से बुरी तरह प्रभावित हैं और कुल 1.1 करोड़ लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं. यानी पांच में से चार यमनी बच्चों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है.

इसके अलावा यूनिसेफ के अनुसार लगभग चार लाख बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं. एजेंसी के जेम्स एल्डर ने कहा, "वे भूख से मर रहे हैं क्योंकि वयस्कों ने एक युद्ध शुरू कर दिया है जिसमें बच्चे सबसे ज्यादा पीड़ित हैं."

यमन में गृहयुद्ध के चलते करीब 20 लाख बच्चे अब स्कूल नहीं जा पा रहे हैं जबकि हिंसा ने लगभग 17 लाख बच्चों और उनके परिवारों को विस्थापित कर दिया है. (dw.com)

एए/सीके (डीपीए, एपी)

UK ने फेसबुक पर लगाया 50 मिलियन यूरो से ज्यादा का जुर्माना, जानें क्या है मामला
20-Oct-2021 8:22 PM (77)

ब्रिटेन की कंपटीशन वॉचडॉग कंपटीशन एंड मार्केट अथॉरोटी (CMA) ने सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म फेसबुक पर 50 मिलियन यूरो से ज्यादा (4,35,43,00,000 रुपये से ज्यादा) का जुर्माना लगाया है. फेसबुक पर ये कार्रवाई एनिमेटेड ग्राफिक्स स्टार्टअप Giphy के अधिग्रहण से जुड़े मामले में जानकारी नहीं देने के चलते की गई है.

कंपटीशन एंड मार्केट अथॉरोटी ने कहा कि फेसबुक पर 50.5 मिलियन यूरो का जुर्माना पिछले साल की खरीद से जुड़े मामले में जानबूझकर ज़रूरी जानकारी देने से इनकार करने के चलते लगाया गया है.

सीएमए में मरजर्स के वरिष्ठ निदेशक जोइल बैमफोर्ड ने अपने बयान में कहा, "हमने फेसबुक को चेताया था कि उनका ज़रूरी सूचनाओं को देने से इनकार करना आदेश का उल्लंघन है, लेकिन दो अदालतों में अपील खारिज होने के बावजूद फेसबुक अपनी कानूनी दायित्वों की अवहेलना जारी रखी."

उन्होंने कहा, "इसे उन कंपनियों को चेतावनी की तरह लेना चाहिए जो खुद को कानून से ऊपर समझती हैं." सीएमए ने कहा कि ये पहला मौका है जब कोई कंपनी जानबूझकर ऐसे किसी आदेश का उल्लंघन करती हुई पाई गई है. इसके अलावा सीएमए ने अलग से फेसबुक पर 5 लाख यूरो का जुर्माना भी लगाया है. ये जुर्माना चीफ कंप्लायंस अधिकारी को दो बार बिना मंज़ूरी के बदलने के मामले में लगाया गया है.

आपको बता दें कि फेसबुक ने मई 2020 में Giphy की खरीद का एलान किया था. रिपोर्ट्स की मानें तो ये खरीद 400 मिलियन डॉलर में हुई थी.(abplive)

सुअर की किडनी को मानव शरीर से जोड़ा, करने लगी काम, वैज्ञानिकों का सबसे बड़ा चमत्कार
20-Oct-2021 8:04 PM (118)

न्यूयॉर्क. अमेरिका में वैज्ञानिकों ने अस्थाई रूप से एक सुअर की किडनी को मानव शरीर से जोड़ने में सफलता हासिल की है. इतना ही नहीं, यह किडनी ठीक से काम भी कर रही है. वैज्ञानिकों के इस ट्रांसप्लांट को बड़ी खोजों में से एक देखा जा रहा है. इससे भविष्य में जानवरों के अंगों का मानव शरीर में इस्तेमाल कर जानें बचाए जाने की संभावना बढ़ी है. हालांकि इस केस में विस्तृत रिपोर्ट का अभी इंतजार है.

इस सर्जरी को बेहद चरणबद्ध तरीके से किया गया है.
मामला अमेरिका के न्यूयॉर्क का है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क सिटी में स्थित एनवाईयू लैंगन हेल्थ सेंटर में डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम ने इस सर्जरी अंजाम दिया. इस सर्जरी को बेहद चरणबद्ध तरीके से किया गया है. इसकी तैयारी भी काफी ठोस तरीके से की गई थी. किडनी ट्रांसप्लांट से पहले सुअर के जीन को बदल दिया गया था, ताकि मानव शरीर उसके अंग को तत्काल खारिज न कर पाएं.

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसप्लांट की यह प्रक्रिया एक ब्रेन डेड हो चुके पेशेंट पर की गई. पेशेंट की किडनी ने काम करना बंद कर दिया था, लेकिन उसे लाइफ सपोर्ट से हटाने से पहले डॉक्टरों ने उनके परिवारों से इस टेस्ट की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद उन्होंने यह प्रयोग किया. तीन दिन तक सुअर की किडनी ब्रेन डेड मरीज की रक्त वाहिकाओं से जुड़ा हुआ था. किडनी को शरीर के बाहर ही रखा गया था.

डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की इस पूरी प्रकिया को सामान्य करार दिया है. ऐसा पहली बार हुआ है जब मानव शरीर में किसी दूसरे प्राणी की किडनी का सफल ट्रांसप्लांट किया गया है. हालांकि, इससे पहले भी कई तरह के परीक्षण हो चुके हैं, लेकिन हर बार प्रत्यारोपण असफल रहा. अमेरिकी डॉक्टरों की यह कामयाबी किडनी ट्रांसप्लांट की दिशा में वरदान साबित हो सकती है.

रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि एक किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए औसतन करीब 3 से 5 साल का इंतजार करना पड़ता है. दुनियाभर में एक लाख से ज्यादा लोग ऑर्गन ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हैं. इसमें भी करीब 90 हजार ऐसे लोग हैं, जो सिर्फ किडनी ट्रांसप्लांट कराना चाहते हैं. (news18.com)

खौलते लावा के बीच फंसा आवारा कुत्ता, अब ड्रोन की मदद से पूरा किया आएगा रेस्क्यू ऑपरेशन
20-Oct-2021 7:52 PM (71)

ज्वालमुखी विस्फोट काफी खौफनाक होता है. इसके अंदर से निकलने वाले लावा की चपेट में आने के बाद किसी का जिन्दा बच पाना नामुमकिन ही होता है. बीते दिनों स्पेन के कैनरी आइलैंड में ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था. इससे अभी तक खौलते हुए लावा निकल रहा है. विस्फोट से पहले ही आसपास के लोगों से एरिया को खाली करवा लिया गया था. अब इस ज्वालामुखी के पास फंसे एक कुत्ते को बचाने का काम चल रहा है. ये कुत्ता ज्वालामुखी के मुंह के पास फंसा हुआ है.

स्पेनिश कंपनी ने इस कुत्ते के रेस्क्यू का प्लान बनाया है. इस कुत्ते को ड्रोन के जरिये बचाया जाएगा. किसी जानवर को ड्रोन के जरिये बचाने का ये पहला मामला है. पूरे एरिया को पहले ही खाली करवा लिया गया था. लेकिन ये बेचारा कुत्ता ज्वालामुखी के पास फंस गया. ज्वालामुखी से लगातार लावा निकल रहा है. साथ ही अभी इसके रुकने के कोई आसार नहीं है. ऐसे में अब कुत्ते को ड्रोन के जरिए बचाया जाएगा.

कुत्ते को बचाने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जा सकता था. लेकिन उससे निकल रहे धुंए और गर्म मैग्मा की वजह से हेलीकॉप्टर उसके नजदीक नहीं जा पा रहा है. इस वजह से अब Aerocamaras नाम के ड्रोन ऑपरेटर ने अपने ड्रोन के जरिये कुत्ते को बचाने का प्लान बनाया है. अब लोकल अथॉरिटी द्वारा इस प्लान को अप्रूव करने भर की देरी है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये रेस्क्यू प्लान फेल भी हो सकता है, अगर ड्रोन की बैटरी खत्म हो गई तो ये ऑपरेशन नाकामयाब हो जाएगा.

हालांकि, अगर ऐसा हो गया तो ये दुनिया में किसी जानवर का ड्रोन के जरिये रेस्क्यू करने का पहला मामला होगा. कंपनी के पास इस रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए सिर्फ 4 मिनट होंगे. इसी में उन्हें कुत्ते की जान बचानी होगी. आगे ये भी देखना है कि इतने दिन से ज्वालमुखी के पास फंसा ये कुत्ता कैसे रिस्पॉन्ड करेगा. अब सभी इस रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने का इन्तजार कर रहे हैं. (news18.com)

ब्रिटेन ने Facebook पर 500 करोड़ रुपये से ज्‍यादा का लगाया जुर्माना, जानें वजह
20-Oct-2021 7:15 PM (66)

नई दिल्‍ली. ब्रिटेन ने सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक पर भारी भरकम जुर्माना लगाया है. बताया जा रहा है कि ब्रिटेन ने मार्क जुकरबर्ग की फेसबुक पर ये जुर्माने की कार्रवाई सूचना उल्‍लंघन के मामले में की है. ब्रिटेन ने सोशल मीडिया कंपनी पर 500 करोड़ रुपये (5 करोड़ डॉलर से अधिक) से ज्‍यादा का जुर्माना लगाया है.

फेसबुक ने जानबूझकर उल्‍लंघन किया: CMA
फेसबुक पर यह जुर्माना जीआईएफ प्लेटफॉर्म जिफी की खरीद के बाद जांच के दौरान नियामक के आदेश का उल्लंघन करने के लिए लगाया गया है. प्रतिस्पर्धा और बाजार प्राधिकरण ने कहा कि फेसबुक ने जानबूझकर ऐसा किया है. लिहाजा, उस जुर्माना लगाना जरूरी हो गया है. सीएमए ने कहा कि कोई भी कंपनी कानून से बढ़कर नहीं हो सकती है. नियामक का कहना है कि फेसबुक जिफी के अधिग्रहण के बारे में पूरी जानकारी देने में असफल रही है. इसके अलावा फेसबुक जांच के दौरान जिफी का अपने प्लेटफॉर्म के साथ संचालन करने में भी नाकाम हुई है.

नियामक ने बार-बार दी थी फेसबुक को चेतावनी
नियामक ने कहा है कि फेसबुक ने जिफी के अधिग्रहण के बारे में जरूरी सूचनाएं नहीं दी हैं. नियामक की ओर से इसे लेकर उसे कई बार चेतावनी भी दी गई. रिपोर्ट के मुताबिक फेसबुक अपनी री-ब्रांडिंग की तैयारी कर रहा है. अगले हफ्ते फेसबुक के नए नाम की घोषणा की जा सकती है. फेसबुक के सीईओ मार्क जुकगरबर्ग 28 अक्‍टूबर को होने वाले इवेंट में कंपनी के नए नाम की घोषणा कर सकते हैं. फेसबुक ऐप के अलावा कंपनी इंस्‍टाग्राम , वॉट्सऐप, Oculus के नए नामों को लेकर भी ऐलान कर सकती है. हालांकि इस बारे में फेसबुक ने अब तक कोई जानकारी साझा नहीं की है. (news18.com)

‘जिंदगी आसान बनाने के लिए’ 4,000 फलस्तीनियों को पहचान पत्र देगा इस्राएल
20-Oct-2021 4:42 PM (83)

वेस्ट बैंक में रहने वाले फलस्तीनी इस्राएल के चेक नाकों पर बेरोकटोक जा सकेंगे. इस्राएल उन्हें पहचान पत्र जारी करेगा. 1967 से वेस्ट बैंक पर इस्राएल का कब्जा है.

    (dw.com)  

इस्राएल ने कहा है कि वेस्ट बैंक में रहने वाले 4,000 फलस्तीनियों को पहचान पत्र जारी किए जाएंगे जिसके बाद वे चेक नाकों से बेरोक टोक आ जा सकेंगे. आधिकारिक पंजीकरण का यह अभियान बरसों से बंद पड़ा था.

इस्राएल की सरकार का यह कदम उन 2,800 लोगों के लिए खासतौर पर फायदेमंद होगा जो गजा पट्टी के पूर्व नागरिक हैं. सरकार ने उन्हें कानूनी दर्जा देने का फैसला किया है. ये लोग 2007 में गजा पट्टी से भागकर तब वेस्ट बैंक आ गए थे जब हमास के साथ आंतरिक संघर्ष चल रहा था.
क्यों चाहिए पहचान पत्र?

फलस्तीनी जनता का पंजीकरण होने पर वेस्ट बैंक के नागरिकों को इलाके में बने इस्राएली सेना के नाकों से आने जाने में सुविधा हो जाएगी. इस्राएल ने छह दिन चले युद्ध में इस इलाके पर कब्जा कर लिया था और तब से यहां रहने वाले लोगों के साथ इस्राएली सेना की झड़पें होती रहती हैं.

इस्राएल की सरकार ने इन सैन्य नाकों को सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है. लेकिन फलस्तीनी और मानवाधिकार कार्यकर्ता इन नाकों से असहमत हैं और कहते रहे हैं कि इस कारण लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई है.

इस्राएली सेना की नागरिक मामले देखने वाली शाखा COGAT ने कहा है कि पहचान पत्र देने से गजा पट्टी के 2,800 पूर्व बाशिंदों के अलावा 1,200 उन लोगों को भी लाभ पहुंचेगा जो पंजीकृत नहीं हैं. इनमें वेस्ट बैंक के लोगों के रिश्तेदार आदि शामिल हैं.

इस्राएल ने शांति समझौते के तहत पहचान पत्र देने की यह योजना बनाई थी. इन पहचान पत्रों को हर साल नवीनीकृत किया जाना था. लेकिन साल 2,000 में यह योजना तब ठंडे बस्ते में चली गई जब कथित दूसरे इंतिफादा के तहत लोगों ने संघर्ष किया.

2008-09 में इस्राएल ने 32 हजार लोगों को परिवारों के पुनर्मिलन योजना के तहत परमिट दिए थे लेकिन कुछेक मामलों को छोड़कर ज्यादातर के लिए यह योजना लागू नहीं हो पाई.
क्या बोले नेता?

पहचान पत्र देने की योजना फिर से शुरू करने को लेकर देश के रक्षा मंत्री बेनी गांत्स ने ट्विटर पर लिखा कि यह एक मानवतावादी कदम है. उन्होंने सात हफ्ते पहले ही वेस्ट बैंक के शहर रामल्लाह में फलस्तीनी नैशनल अथॉरिटी के राष्ट्रपति महमूद अब्बास से मुलाकात की थी.

ट्वटिर पर उन्होंने कहा कि यह कदम उनकी "देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और फलस्तीनियों की जिंदगी बेहतर बनाने की कोशिशों का हिस्सा है.”

फलस्तीनी अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारी हुसैन अल-शेख ने भी इस कदम पर ट्वीट किया. उन्होंने कहा, "आज चार हजार लोगों के नामों का ऐलान किया जाएगा, जिन्होंने नागरिकता का अधिकार हासिल किया है. उन्हें फलस्तीनी पहचान के साथ-साथ अपने निवास स्थान का पता भी मिलेगा.”

वेस्ट बैंक में चार लाख 75 हजार इस्राएली यहूदी रहते हैं, जिनकी रिहायश को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध माना जाता है. इस्राएल के प्रधानमंत्री ने फलस्तीनी अथॉरिटी के साथ औपचारिक शांति वार्ता की संभावना से इनकार कर दिया है.

वीके/सीके (रॉयटर्स, एएफपी)

 

ब्रिटेन जाने की ऐसी दीवानगी: ट्रकों पर छलांग लगा रहे आप्रवासी
20-Oct-2021 4:41 PM (68)

ब्रिटिश और फ्रांसीसी नेता आव्रजन संकट पर बहस कर रहे हैं. दोनों देश एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. कई आप्रवासी बेहद खतरनाक तरीकों से ब्रिटेन पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.

(dw.com)  

फ्रांस के कलै क्षेत्र में फंसे कई आप्रवासी या शरण चाहने वाले हर कीमत पर यूके पहुंचना चाहते हैं. कुछ के लिए आर्थिक संकट उन्हें सबसे खतरनाक रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर रहा है, जबकि अन्य गहरे पारिवारिक या सामुदायिक संबंधों पर भरोसा करते हुए यूके की ओर रुख करना चाहते हैं. फ्रांस के अधिकारियों का कहना है कि प्रवासियों की चिंताजनक स्थिति और इंग्लिश चैनल को पार करने की खतरनाक कोशिशें लंदन सरकार के कमजोर नियमों के कारण अवैध रूप से या कानूनी दस्तावेजों के बिना ब्रिटेन जाने वाले प्रवासियों के संबंध में हैं.
यूके आकर्षक क्यों है

ब्रेक्जिट के बाद से ब्रिटेन यूरोप का एक अनूठा देश बन गया है. ब्रिटेन के कई कानून यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों से अलग हैं. इन दिनों यूरोपीय स्तर पर चर्चा के तहत कुछ सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और कानूनी मुद्दों में आव्रजन का मुद्दा सबसे आगे है, खासकर अफगानिस्तान की स्थिति के संदर्भ में. इंग्लिश चैनल के दोनों तरफ के नेता एक-दूसरे पर इमिग्रेशन संकट पैदा करने का आरोप लगा रहे हैं. सबसे कठिन सवाल यह है कि इंग्लिश चैनल को पार करने और ब्रिटिश मुख्य भूमि में प्रवेश करने वाले प्रवासियों की बाढ़ को कैसे रोका जाए. पिछले कुछ महीनों में हजारों शरण चाहने वालों ने विभिन्न तरीकों और साधनों का इस्तेमाल करके यूके में प्रवेश किया है और इससे आप्रवासियों या शरण चाहने वालों के खिलाफ बयानबाजी में तेजी हुई है.

मोहम्मद और जाबेर एक ट्रक के लिए कई दिनों से इंतजार कर रहे थे कि वे उसपर सवार हो सके और किसी तरह इंग्लिश चैनल पार कर ब्रिटेन में दाखिल हो सके. वे इस वक्त फ्रांस के कलै इलाके में मौजूद हैं. उन्हें यह एहसास हुआ कि वह आज अपने अभियान में सफल हो सकते हैं. उन्होंने एक ट्रक चुना. विशेष रूप से मालवाहक ट्रक, ये वो ट्रक होते हैं जिसपर आप्रवासी चुपके से सवार हो जाते हैं और ब्रिटेन में दाखिल हो जाते हैं. कई बार वे चलते हुए ट्रक से दूसरे ट्रक पर छलांग भी लगाते हैं. अब इस तरह का जोखिम भरा काम कई और लोग कर रहे हैं.

सबसे कठिन और खतरनाक तरीके को अपनाने की हिम्मत केवल सबसे कम उम्र के और सेहतमंद आप्रवासी ही कर सकते हैं और ऐसा करने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता. मोहम्मद और जाबेर सूडानी युवक हैं. दोनों ट्रक में छिप गए. मौका पाकर एक निश्चित स्थान पर चलते ट्रक से कूदने की कोशिश कर रहे एक युवक ने दूसरे पर चिल्लाकर उसे कूदने का निर्देश दिया. ट्रक नहीं रुका यानी ड्राइवर को पता नहीं चला. कुछ ही समय बाद ट्रक चालक और ट्रक दोनों फ्रांसीसी राजमार्ग से गायब हो गए और इंग्लिश चैनल की ओर मुड़ गए. सूडानी लोगों को उम्मीद थी कि वे अपने गंतव्य ब्रिटेन तक पहुंच जाएंगे.
मोहम्मद और जाबेर दोनों अपने-अपने देशों में युद्ध से बच निकल कर आए हैं. लीबिया में पिटाई और अपहरण को सहने के बाद, उन्होंने इटली पहुंचने के प्रयास में भूमध्यसागरीय पार एक घातक यात्रा का अनुभव किया है और अब क्लै के उत्तरी फ्रांसीसी क्षेत्र में है. वहीं मोहम्मद सूडान का रहने वाला है और वह अपने देश से भाग निकला है. वह और पूर्वी अफ्रीका और मध्य पूर्व के सैकड़ों अन्य प्रवासी ट्रकों में छिपकर ब्रिटेन में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं. यह शरण चाहने वालों के लिए एक बहुत ही खतरनाक और संभावित घातक तरीका भी है.

दो तरह के आप्रवासी हैं जो यूके जाना चाहते हैं. ऐसे लोग हैं जिनके पास कुछ पैसे हैं और वे काम चलाऊ नावों में पैसे लगाने से नहीं हिचकिचाते जबकि उनकी नावें बहुत कमजोर और अस्थिर होती हैं और अपनी क्षमता से कई गुना अधिक यात्रियों को ले जाती हैं. प्रवासियों से भरी नावें अक्सर डूब जाती हैं या पलट जाती हैं.

दूसरी ओर आप्रवासी जिनके पास परिभ्रमण का जोखिम उठाने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, वे अंग्रेजी चैनल के आसपास के राजमार्गों पर भारी माल से लदे वाणिज्यिक ट्रकों का पीछा कर रहे हैं. जहां से चालक और उसकी आगे की सीट समाप्त होती है, ये प्रवासी किसी तरह ट्रक के पिछले हिस्से में चढ़ जाते हैं और सामान के बीच में छिप जाते हैं और उपयुक्त स्थान पर ट्रक से कूद जाते हैं. वे किसी भी कीमत पर ब्रिटेन में घुसने की कोशिश करते हैं. सिर्फ युवा और ऊर्जावान लोग ही इस खतरनाक साहसिक काम को करने का साहस करते हैं. ट्रक से कूदने की कोशिश हमेशा एक टीम या समूह के रूप में किया जाता है.

एए/सीके (एपी)

बांग्लादेश: सत्तारूढ़ अवामी लीग ने अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए निकाली रैली
20-Oct-2021 4:40 PM (61)

बांग्लादेश में साम्प्रदायिक हिंसा के एक बुरे दौर के बाद सत्तारूढ़ पार्टी अवामी लीग ने अल्पसंख्यक हिंदुओं के समर्थन में रैली निकाली है. रैली में "सांप्रदायिक हिंसा बंद करो" का नारा लगाते हुए हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए.

  (dw.com)  


बीते कुछ दिनों में मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश में हुई साम्प्रदायिक हिंसा में कम से कम छह लोग मारे गए और दर्जनों घर नष्ट कर दिए गए. पुलिस ने कहा है कि 450 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

हमले शुक्रवार 15 अक्टूबर को दक्षिणपूर्वी जिले नोआखली में शुरू हुए थे. मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों ने हिंदुओं पर कुरान से सम्बंधित ईशनिंदात्मक कार्य करने का आरोप लगाया था और उसका विरोध किया था. विरोध प्रदर्शन ही बाद में हिंसा में बदल गया. हिंदुओं के कई घरों और पवित्र स्थलों पर हमले हुए और वहां तोड़ फोड़ की गई.
अवामी लीग की अपील

इसी हिंसा के विरोध में प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी ने राजधानी ढाका में रैली का आयोजन किया. शहर के केंद्र में पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं ने चार किलोमीटर लंबी रैली निकाली और हिंसा को रोकने की मांग की.

कुछ महिला समर्थकों द्वारा हाथ में लिए हुए एक बैनर पर लिखा था, "इस साम्प्रदायिक दुष्टता को बंद करो, बांग्लादेश." ढाका में कुछ दूसरे इलाकों में सैकड़ों लेखक हाथों से लिखे हुए सन्देश और पोस्टर लेकर इकठ्ठा हुए. एक संदेश में लिखा था, "अपने बच्चों को प्रेम करना सिखाइए, मारना नहीं."

अवामी लीग के सांसद और संयुक्त महासचिव महबूबूल आलम हनीफ ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अगले दो सप्ताह में पूरे देश में कई रैलियां निकालने की योजना बनाई है. उन्होंने कहा, "इस भय को हटाना ही होगा." सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि दुर्गा पूजा के दौरान हुई हिंसा के संबंध में 71 मामले दर्ज किए गए हैं.
पंथनिरपेक्षता का समर्थन

संयुक्त राष्ट्र ने भी हाल ही में हुई हिंसा को रोकने की मांग की है. संयुक्त राष्ट्र की रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर मिया सेप्पो ने ट्वीट किया, "सोशल मीडिया पर हेट स्पीच की वजह से भड़के बांग्लादेश के हिंदुओं पर हाल ही में हुए हमले संविधान के मूल्यों के खिलाफ हैं और इनका रुकना जरूरी है."

मानवाधिकार समूह एम्नेस्टी इंटरनैशनल ने जांच की और दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है. बांग्लादेश की करीब 17 करोड़ आबादी में लगभग 10 प्रतिशत हिंदू हैं. देश में सांप्रदायिक तनाव लंबे समय से रहा है. देश का संविधान इस्लाम को "स्टेट रिलिजन" की मान्यता देता है लेकिन पंथनिरपेक्षता के सिद्धांत का समर्थन भी करता है.

सीके/एए (रॉयटर्स)

फेसबुक अपना नाम बदल सकती हैः रिपोर्ट
20-Oct-2021 4:37 PM (78)

फेसबुक अपना नाम बदल सकती है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक द वर्ज नामक वेबसाइट ने इस बारे में खबर दी है. नया नाम छवि बदलने की कोशिश हो सकती है.

(dw.com)  

सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक इंक का नाम बदला जा सकता है. ऐसी खबरें हैं कि कंपनी अपनी छवि में बदलाव लाने के प्रयास कर रही है और इसी के तहत नया नाम रखा जा सकता है.

वेबसाइट द वर्ज ने मंगलवार को मामले से सीधे तौर पर जुड़े एक सूत्र के हवाले से यह खबर दी है. वर्ज का कहना है फेसबुक चूंकि अब मेटावर्स पर ध्यान देना चाहती है तो नया नाम उसी कड़ी का हो सकता है.

रिपोर्ट कहती है कि फेसबुक के सीईओ मार्क जकरबर्ग की योजना 28 अक्टूबर को होने वाली कंपनी की सालाना कॉन्फ्रेंस में नए नाम के बारे में बात करने की योजना है. हालांकि नया नाम उससे पहले भी उजागर किया जा सकता है.

द वर्ज की रिपोर्ट कहती है कि फेसबुक की रीब्रैंडिंग के जरिए विभिन्न सोशल मीडिया ऐप जैसे इंस्टाग्राम, वॉट्सऐप और ऑक्युलस आदि को एक छतरी के नीचे लाया जा सकता है.

इस बारे में जब फेसबुक से सवाल पूछा गया तो उसने कहा कि वह अटकलों या अफवाहों पर टिप्पणी नहीं करती.
छवि सुधारने की कोशिश

फेसबुक एक के बाद एक कई संकटों से जूझ रही है. हाल ही में कई बार उसकी सेवाएं कई घंटों तक ठप्प रहीं, जिस कारण उसे अरबों का नुकसान उठाना पड़ा. कंपनी के पूर्व कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे खुलासों ने भी फेसबुक की छवि को नुकसान पहुंचाया है.

पूर्व कर्मचारी फ्रांसिस हॉगेन ने कुछ दस्तावेज लीक करते हुए बताया था कि फेसबुक जानती थी कि उसकी वेबसाइट युवा लोगों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है. इसके अलावा, कई देशों में फेसबुक के बढ़ते प्रभाव पर नियंत्रण की मांग तेज हो रही है.

पिछले महीने अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट ने एक रिपोर्ट में ऐसे संकेत दिए थे कि मेटावर्स की घोषणा के जरिए फेसबुक अपनी छवि को सुधारने की कोशिश कर सकती है. वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा था कि मेटावर्स में कंपनी की दिलचस्पी "नीति-निर्मातओं के बीच कंपनी की छवि को फिर स्थापित करने और फेसबुक को इंटरनेट तकनीकों की अगली लहर के लिए तैयार करने की कोशिशों का हिस्सा हो सकती है."
मेटावर्स पर केंद्रित भविष्य

इसी हफ्ते फेसबुक ने भविष्य के इंटरनेट ‘मेटावर्स' पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही थी. यूरोप में मेटावर्स टीम के लिए दस हजार लोगों को भर्ती का ऐलान करते हुए कंपनी ने एक ब्लॉग में लिखा था कि मेटावर्स भविष्य है.

फेसबुक ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, "मेटावर्स में रचनात्मक, सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर नए आयाम खोलने की संभावना है. यूरोपीय संघ के लोग इसके लिए बिल्कुल शुरुआत से तैयारी करेंगे. आज हम यूरोपीय संघ में 10,000 लोगों को भर्ती करने की योजना का ऐलान कर रहे हैं जिसे अगले 5 साल के दौरान अंजाम दिया जाएगा."

यह इस तरह की तकनीक है जिसके तहत मनुष्य डिजिटल जगत में वर्चुअली प्रवेश कर सकेगा. जानकार बताते हैं कि यह कुछ ऐसा महसूस होगा जैसे आप किसी से बात कर रहे हैं तो वह आपके सामने ही बैठा है जबकि असल में दोनों लोग इंटरनेट के जरिए मीलों दूर से जुड़े हुए हैं.

वीके/सीके (रॉयटर्स)
 

तालिबान को मलाला का खतः लड़कियों के स्कूल तुरंत खोले जाएं
20-Oct-2021 4:36 PM (54)

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने तालिबान से अफगानिस्तान में लड़कियों को तुरंत स्कूल लौटने की अनुमति देने का आह्वान किया है.

(dw.com)  

अफगानिस्तान में कट्टरपंथी इस्लामी तालिबान के सत्ता में आने के लगभग दो महीने बाद नई सरकार ने लड़कियों के माध्यमिक विद्यालय में लौटने पर रोक लगा दी है और लड़कों को कक्षा में लौटने की इजाजत है.

तालिबान ने दावा किया है कि वे सुरक्षा सुनिश्चित करने और इस्लामी कानून की व्याख्या के तहत छात्रों को सख्ती से अलग करने के बाद लड़कियों को स्कूल लौटने की अनुमति देंगे. अधिकतर लोगों को तालिबान के इस आश्वासन पर संदेह है.
तालिबान को खुला पत्र

नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई और कई अफगान महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने एक खुले पत्र में लिखा, "तालिबान अधिकारियों के लिए...लड़कियों की शिक्षा पर वास्तविक प्रतिबंध को हटा दें और लड़कियों के माध्यमिक विद्यालयों को तुरंत फिर से खोलें."

उन्होंने मुस्लिम देशों के नेताओं से तालिबान शासकों को यह स्पष्ट करने का भी आह्वान किया कि "लड़कियों को स्कूल जाने से रोकना धार्मिक रूप से उचित नहीं है."

खत पर हस्ताक्षर करने वालों में शहजाद अकबर भी शामिल थे, जो अमेरिका समर्थित पूर्व अशरफ गनी सरकार में अफगान मानवाधिकार आयोग के प्रमुख थे. तालिबान सरकार से अपील करने वालों का कहना है, "दुनिया में इस समय अफगानिस्तान अकेला ऐसा देश है जहां लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध है.''

खत पर हस्ताक्षर करने वालों ने जी20 नेताओं से अफगान बच्चों की शिक्षा परियोजना के लिए तत्काल धन उपलब्ध कराने की अपील की है. इस पत्र के साथ एक याचिका भी दाखिल की गई है जिस पर सोमवार तक 6,40,000 से अधिक हस्ताक्षर हो चुके थे.

शिक्षा में सक्रिय पाकिस्तानी छात्रा मलाला यूसुफजई को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों ने 2012 में स्वात घाटी में गोली मारकर घायल कर दिया था, जब वह स्कूल बस से घर लौट रही थी.

मलाला अब 24 साल की हो गई हैं और खासतौर पर लड़कियों को शिक्षित करने में सक्रिय हैं. इस बीच अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने मीडिया से कहा, "जहां तक ​​मुझे पता है स्कूल और विश्वविद्यालय जल्द ही खोले जाएंगे और लड़कियां और महिलाएं स्कूल जा सकेंगी और शिक्षण सेवाएं प्रदान कर सकेंगी. इजाजत दी जाएगी."

तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि अभी लड़कियों को स्कूल जाने से रोका जा रहा है क्योंकि अभी पर्यावरण सुरक्षित नहीं है.

एए/वीके (एएफपी)

गूगल ने पेश किया नया फोन पिक्सल-6
20-Oct-2021 4:34 PM (49)

गूगल ने अपना नया फोन पिक्सल 6 बाजार में उतार दिया है. स्मार्टफोन के बाजार के सबसे बड़े खिलाड़ी माने जाने वाले एप्पल और सैमसंग का मुकाबला करने की कोशिश कंपनी कई साल से कर रही है.

  डॉयचे वैले पर विवेक कुमार की रिपोर्ट

मंगलवार को गूगल ने अपना नया फोन पिक्सल 6 पेश किया. ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड पर आधारित यह फोन गूगल की स्मार्टफोन बाजार में बड़े खिलाड़ियों को टक्कर देने की नई कोशिश है.

कंपनी ने अपने नए फोन के बारे में कहा कि इसे एकदम पूरी तरह से नई सोच के साथ तैयार किया गया है. गूगल ने कहा कि यह फोन सुरक्षा, स्पीड, स्टाइल और सॉफ्टवेयर, हर लिहाज से नई सोच पर आधारित है. कंपनी के सीनियर वाइस प्रेजीडेंट रिक ऑस्टरलो ने कहा, "यह साल काफी लिहाज से अलग है.”

पिक्सल फोन को गूगल अपने एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम की खूबियों को दिखाने के लिए भी इस्तेमाल करता रहा है. एंड्रॉयड एक मुफ्त मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम है और जिसे दुनियाभर की फोन कंपनियां इस्तेमाल करती हैं. लेकिन खुद गूगल के एंड्रॉयड फोन अब तक बहुत ज्यादा नाम नहीं कमा पाए हैं.
क्यों कम कामयाब है पिक्सल?

विश्लेषक ब्रैड एक्यूज कहते हैं कि पिक्सल की मध्यम दर्जे की सफलता की एक वजह इसके पिछले कुछ मॉडल में पाई गईं खामियां हैं. इसके अलावा अमेरिका की मोबाइल सर्विस कंपनियां ग्राहकों को दूसरे ब्रैंड के फोन खरीदने के लिए बेहतर ऑफर देती रही हैं.

एक्यूज ने कहा, "एक क्षेत्र है जहां पिक्सल ने बेहतरीन काम किया है और वो है सॉफ्टवेयर. लेकिन और कुछ अलग देने में यह नाकाम रहा है.”

पिक्सल 6 के रूप में जो नया फोन गूगल ने बाजार में उतारा है उसमें एप्पल जैसे कुछ फीचर भी शामिल हैं. एप्पल अपने आई-फोन के जरिए महंगे फोन खरीदने वाले ग्राहकों को लुभाता रहा है लेकिन उसका सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर दोनों ही कंपनी ने अपने नियंत्रण में रखे हैं.

ऑस्टरलो कहते हैं, "हमारे पास आधुनिकतम हार्डवेयर है यानी पिक्सल और ज्यादा बेहतर तरीके से काम कर सकता है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ऐसा अनुभव है जो अब से पहले कभी संभव नहीं था.”
कैसा है नया पिक्सल?

पिक्सल 6 के मॉडल 5जी क्षमता के साथ आए हैं. गूगल ने अपना नया टेंसर चिप भी इसमें प्रयोग किया है जो और ज्यादा क्षमता के साथ इंसान की तरह सोच सकता है. ऑस्टरलो के मुताबिक हार्डवेयर और सॉफ्वेयर का यह ऐसा मिश्रण है जो भविष्य की ‘एंबिएंट कंप्यूटिंग' की ओर एक बड़ा कदम है.

‘एंबिएंट कंप्यूटिंग' इंटरनेट का इस्तेमाल बातचीत के जरिए करने की क्षमता को कहा जाता है. 2013 की साइंस फिक्शन फिल्म ‘हर' में ऐसा ही कुछ दिखाया गया था.

पिक्सल 6 के कैमरे में कई तरह के सेंसर लगाए गए हैं. इसका बेस मॉडल 6.4 इंच का है जबकि प्रो मॉडल का साइज कुछ बड़ा है. कैमरे में त्वचा के रंग को और ज्यादा सटीकता के साथ फोटो खींचने की खासियत के अलावा ‘मैजिक इरेजर' नाम का एक फीचर भी दिया गया है जो गैरजरूरी चीजों और लोगों को फोटो से हटा सकता है.

अमेरिका में पिक्सल 6 फोन की कीमत $599 डॉलर (लगभग 45 हजार रुपये) रखी गई है जबकि पिक्सल 6 प्रो 899 डॉलर (करीब 68 हजार रुपये) में मिलेगा. गूगल का कहना है कि 28 अक्टूबर से फोन ग्राहकों को भेजना शुरू कर दिया जाएगा.
 

काबुल के नजदीक धमाका देहमाजांग चौक पर विस्फोट के बाद मची भगदड़
20-Oct-2021 2:08 PM (53)

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक धमाका हुआ है. यह धमाका देहमाजांग चौक के नजदीक हुआ. प्रत्यक्षदर्शियों ने जानकारी दी है कि घटना सुबह घटी. इस घटना में कितने लोग घायल हुए हैं इस बात की जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है. तुलु न्यूज के मुताबिक ब्लास्ट के बाद वहां भगदड़ मच गई. माना जा रहा है कि सुबह का वक्त होने के कारण वहां पर लोग कम संख्या में मौजूद थे. ब्लास्ट की आवाज सुनते ही लोग वहां से इधर-ऊधर भागने लगे. धमाके को लेकर अभी तक ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, पुलिस मामले की जांच में जुट गई है.

धमाके वाली जगह की घरेबंदी कर दी गई है और आम लोगों को घटनास्थल के नजदीक जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. पुलिस मामले की जांच में जुट गई है. ब्लास्ट से होने वाले नुकसान का जायजा लिया जा रहा है. पुलिस की कोशिश है कि जल्द से जल्द यह पता लगा लिया जाए कि धमाके में किस संगठन के हाथ हैं.

पुलिस को अभी तक धमाके से जुड़ी कोई भी जानकारी हाथ नहीं लगी है. ब्लास्ट के बाद घटना स्थल के आसपास के इलाके को लोगों ने खाली कर दिया है. सभी लोग इस बात की जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं कि आखिर धमाके में किसका हाथ है. (abplive)
 

बच्चों के खिलौने खरीदना फिज़ूलखर्ची मानता है कपल, त्योहारों पर ऐसे गिफ्ट देकर कर देते हैं खुश !
20-Oct-2021 12:48 PM (66)

घर में बच्चे हों और उनके ढेर सारे खिलौने न भरे हुए हैं, इस बात की कल्पना भी मुश्किल है. खास तौर पर बर्थडे और तीज-त्यौहारों पर बच्चों के लिए महंगे-महंगे खिलौने खरीदे जाते हैं, भले ही वे फिर घर के किसी कोने में धूल खाते रहें. इंग्लैंड के सरे में रहने वाली रेहाने ने इस बात को समझते हुए अपने 3 बच्चों के लिए खिलौने खरीदने की आदत पर लगाम लगाई और साल भर में ही 4 लाख रुपये बचा लिए.

3 बच्चों की मां होते हुए भी वे खिलौने पर होने वाले खर्चे पर लगाम लगा लेती हैं, ये बड़ी बात है. उनके तीनों बच्चों की उम्र – 5 साल, 3 साल और 1 साल है. जब रेहाने ने देखा की बार्बी, हॉट व्हील्स, हार्सब्रो और मोनोपोली जैसे महंगे गेम्स के दाम दिन पर दिन बढ़ते ही जा रहे हैं, तो उन्होंने एक ऐसा आइडिया निकाला- जिससे उनका खर्च भी कम हुआ और बच्चे भी खुश हैं.

किराये पर ले लेती हैं खिलौने
32 साल की रिहाने Pass And Play स्पोर्ट्स कोचिंग एकेडमी चलाती हैं, जबकि उनके पति टेयो प्रोफेशनल बास्केटबॉल प्लेयर हैं. The Sun की रिपोर्ट के मुताबिक इस कपल ने पिछले एक साल से बच्चों के खिलौनों पर पैसे बर्बाद करने के बजाय इन्हें किराये पर लेना शुरू कर दिया है. क्रिसमस के मौके पर भी जब बच्चों की विशलिस्ट तैयार होती है, तो रेहाने इन खिलौनों को रेंट पर ले लेती हैं. चूंकि बच्चे खिलौनों से जल्दी ही बोर हो जाते हैं, इसलिए उनका ये आइडिया हिट है. कुछ हफ्तों पर उनके घर में खिलौनों की डिलीवरी होती रहती है, ऐसे में बच्चे भी खूब खुश रहते हैं. Whirli नाम की रेंटेड टॉयज़ सर्विस से उनके खिलौने आते हैं.

खिलौनों के दाम से कहीं कम लगता है रेंट
£19.99 यानि करीब 190 रुपये प्रति महीने से सब्सक्रिप्शन से उन्हें किराये पर हज़ारों खिलौने मिल सकते हैं. हर खिलौने का अलग-अलग किराया है, जबकि 60 रुपये उनका डिलीवरी चार्ज. बड़े खिलौनों को खरीदना कपल टोटल फिज़ूलखर्ची मानता है, क्योंकि ये महंगे होते हैं और बच्चे ज्यादा दिन एक खिलौना खेलना नहीं चाहते. रेंटल सर्विस में हायर करने के लिए कुल 1000 खिलौने हैं, जिनमें से वो महीने में अनलिमिटेड खिलौने चेंज़ कर सकती हैं. नए-नए खिलौने पाकर बच्चों की भी दिलचस्पी खेलने में बनी रहती है और रिहाने का टेंशन में कम रहता है. (news18.com)

84 साल की बुजुर्ग महिला ने प्लेन उड़ाकर पूरी की अपनी ख्वाहिश, वीडियो हुआ वायरल
20-Oct-2021 12:27 PM (42)

नई दिल्ली. एक 84 साल की बुजुर्ग महिला ने लोगों को हैरत में डाल दिया है. दरअसल, इस उम्र में उन्होंने ‘विमान को उड़ाने’ का कारनामा किया है. उनके इस काम पर लोगों को यकीन नहीं हो रहा है, लेकिन यह सच है. विमान उड़ाते हुए बुजुर्ग महिला का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर आया है, जो देखते-ही-देखते वायरल हो गया है और लोग इसे काफी पसंद भी कर रहे हैं.

दरअसल इस बुजुर्ग महिला का नाम है मार्टा गेज और वे पार्किंसंस बीमारी से ग्रसित हैं. जब महिला को पता चला कि उन्हें पार्किंसंस बीमारी हैं, तो ऐसे उन्होंने सोचा क्यों ना अपनी ख्वाहिश पूरी की जाए. अपनी युवावस्था में महिला पायलट थी और इसीलिए उन्होंने फिर से प्लेन उड़ाने की अपनी हसरत पूरी करनी चाही.

फिर क्या था महिला की इस ख्वाहिश को पूरा किया उनके बेटे ने और कॉकपिट में पायलट की सीट पर बैठकर उन्होंने विमान को उड़ाया. मार्टा ने जैसे ही कॉकपिट में दाखिल हुईं, तो उनकी पुरानी खूबसूरत यादें फिर ताजा हो गईं. (news18.com)

इस देश में कोरोना विस्फोट, एक महीने का लॉकडाउन लगाया, जानें क्याें आई नौबत
20-Oct-2021 12:24 PM (104)

हेल्सिंकी. यूरोपियन देश लातविया में संक्रमण से बिगड़ते हालात को देखते हुए गुरुवार से एक महीने का लॉकडाउन लागू किया जाएगा.

यूरोपीय संघ के सबसे कम टीकाकरण दर वाले देशों में लातविया भी शामिल है. सोमवार देर रात को सरकार की आपात बैठक के बाद लातविया के प्रधानमंत्री क्रिसजानिस कैरिन्स ने कहा कि 21 अक्टूबर से 15 नवंबर तक लॉकडाउन लगाया जाएगा.

इसके साथ ही तेजी से फैल रहे संक्रमण से निपटने के लिए कड़े उपाय लागू किए जाने की आवश्यकता है.

लातविया की केवल आधी आबादी ने अभी कोविड-19 रोधी टीके की पूरी तरह खुराक ली है. कैरिन्स ने माना कि उनकी सरकार नागरिकों को टीका लगावाने के लिए मनाने में विफल हुई है.

करीब 19 लाख की आबादी वाले बाल्टिक देश में कोरोना वायरस के 1,90,000 मामले आए और करीब 2,900 लोगों की मौत हुई है. (एजेंसी से इनपुट)(news18.com)

जिनपिंग सरकार का तालिबानी फरमान, माता-पिता को दी जाएगी बच्चों की गलती की सजा
20-Oct-2021 12:23 PM (77)

बीजिंग. चीन की शी जिनपिंग सरकार जल्द ही ऐसा कानून लाने की तैयारी कर रही है जिसमें बच्चों की गलतियों की सजा उनके माता-पिता को दी जाएगी. चीन की संसद ऐसे एक कानून पर विचार कर रही है जिसके अंतर्गत वह माता-पिता को बच्चों के कसूर के लिए जिम्मेदार और जवाबदेह ठहराएगी.

चीन की सरकार की ओर से तैयार किए गए फैमिली एजुकेशन प्रमोशन लॉ के अंतर्गत अगर अभियोजकों की देखरेख में बच्चे बहुत बुरा या आपराधिक व्यवहार करते पाए जाते हैं, तो अभिभावकों को फटकार लगाई जाएगी और उन्हें फैमिली एजुकेशन गाइडेंस कार्यक्रमों में शामिल होने का आदेश दिया जाएगा.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के तहत विधायी मामलों के आयोग के प्रवक्ता जांग तिवेई ने कहा किशोरों के दुर्व्यवहार करने के कई कारण होते हैं, जिसमें पारिवारिक शिक्षा का अभाव या अनुपयुक्त पारिवारिक शिक्षा इसका प्रमुख कारण है.

हाल ही में कई कड़े नियम लागू कर चुका है चीन
फैमिली एजुकेशन प्रमोशन लॉ के ड्राफ्ट  जिसे इस सप्ताह एनपीसी की स्थायी समिति समीक्षा करेगी ने अभिभावकों से यह अनुरोध भी किया है कि वह अपने बच्चों के आराम, खेल और व्यायाम के लिए भी समय निकालें.

बीजिंग ने इस साल ही युवाओं में ऑनलाइन गेमिंग की बढ़ती लत पर काबू पाने के लिए सख्त नियम लागू किए थे. हाल के महीनों में, शिक्षा मंत्रालय ने नाबालिगों के लिए ऑनलाइन गेम खेलने घंटे सीमित कर दिए हैं. नए समय के मुताबिक उन्हें केवल शुक्रवार, शनिवार और रविवार को एक घंटे के लिए ऑनलाइन गेम खेलने की अनुमति मिलती है.

इसके साथ ही बच्चों पर बढ़ते पढ़ाई के बोझ से परेशान चीनी सरकार ने होमवर्क पर भी कटौती की है और वीकेंड और छुट्टियों के दौरान प्रमुख विषयों के लिए स्कूल के बाद ट्यूशन पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसके साथ ही चीन ने चीनी युवकों से और अधिक मर्दाना होने का आग्रह भी किया है. (news18.com)

बांग्लादेश का वो कौन सा संगठन है, जो हिंदुओं पर कर रहा है हमला
20-Oct-2021 12:21 PM (56)

बीते करीब 10 दिनों से बांग्लादेश में लगातार हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा से भारत में रह रही बहुसंख्यक आबादी चिंतित है. वैसे तो बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का इतिहास उसकी स्थापना के साथ ही शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार की हिंसा ने एक बार फिर बांग्लादेश और भारत में एक सवाल पैदा कर दिया है कि क्या पड़ोसी देश में बेहद कट्टरपंथी सोच रखने वाले जमात संगठन पर वहां की सरकार लगाम लगाने में विफल है? या फिर इसके पीछे कोई राजनीतिक साजिश है जो समय-समय पर जमात को उभरने का मौका देता है.

दरअसल, बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हिंसा हमेशा से एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा रही है. इसके पीछे एक बड़ी राजनीतिक साजिश चलती रही है. माना जा रहा है कि इन हमलों के पीछे जमात संगठन का हाथ है. दरअसल, हिंसा की शुरुआत कोमिल्ला से हुई. जहां कुछ घंटा पहले जमात ने एक बड़ी रैली की थी.

हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के पीछे की राजनीति
हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्टफोस्ट पर छपी अभिजीत मजूमदार की रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री शेख हसीना खुद तो यह दिखाती रहती हैं कि उनको देश के कट्टरपंथियों से कुछ लेना देना नहीं है. लेकिन राजनीति के जानकार इससे पूरी तरह इत्तेफाक नहीं रखते. उनका कहना है कि बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नेता शेख मुजीबुर रहमान की बेटी शेख हसीना कट्टरवाद की लगाम अपने हाथ में रखना चाहती हैं. वह जब चाहती हैं तो इसे थोड़ा ढीला कर देती हैं और फिर अपने हिसाब से उसे खींच देती हैं.

दरअसल, इससे शेख हसीना को दोहरा फायदा होता है. वह सत्ता में रहते हुए विपक्ष का भी काम कर लेती हैं. शेख हसीना को 1971 के मुक्ति संग्राम में पाकिस्तान के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों और अपने पिता के हत्यारों को सजा दिलाने का क्रेडिट दिया जाता है. उन्हें भारत में पसंद किया जाता है, क्योंकि वह अपने देश में जिहाद की आग पर काबू पाने और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने में सफल रहीं. एक इस्लामिक देश में वह खुद एक धर्मनिरपेक्ष नेता की छवि बनाने में सफल रहीं. इस छवि की वजह से उन्हें काफी फायदा मिलता है.

प्रशासन की ढिलाई और साजिश का नतीजा?
अपनी खुद की बेहद सख्त छवि रखने वाली शेख हसीन के शासन में हाल के दिनों में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा से कई सवाल उठे हैं. यह वही शेख हसीना हैं जो देश में अपने विरोधियों से बेहद कड़ाई के निपटती हैं, लेकिन हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़कने से नहीं रोक पा रही हैं. जानकारों का कहना है कि हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मसले पर बांग्लादेश का प्रशासन कहीं न कहीं थोड़ी लापरवाही दिखाता है.

जमात की रैली के बाद हिंसा
इसे केवल एक इत्तेफाक ही कहा जाएगा या फिर कुछ और कि कोमिल्ला में जमात की एक बड़ी रैली के बाद यह हिंसा भड़की. बांग्लादेश का जमात संगठन मुख्य रूप से भूमिगत है. शेख हसीना की सरकार इनके साथ कड़ाई से पेश आती है. लेकिन अचानक जमात के आईटी सेल के सक्रिय होने को इत्तेफाक नहीं कहा जा सकता. इससे कई सवाल खड़े होते हैं.

आवामी लीग का गढ़ है कोमिल्ला
कोमिल्ला आवामी लीग का गढ़ है. यहां के स्थानीय सांसद एकेएम बहाउद्दीन बहर अभी सऊदी अरब में हज करने गए हैं. वह यहां के कद्दावर नेता हैं. उनको बड़ी संख्या में हिंदू वोट करते हैं, लेकिन उनके गढ़ में हिंदू विरोधी हिंसा का भड़कना किसी को समझ में नहीं आ रहा है. कोमिल्ला में कहा जाता है कि उनकी जानकारी के बिना ऐसी कोई घटना घट ही नहीं सकती. (news18.com)

मलाला यूसुफजई ने अफगान तालिबान से छात्राओं के स्कूल फिर से खोलने का आह्वान किया
19-Oct-2021 9:18 PM (33)

हमजा अमीर
 इस्लामाबाद, 19 अक्टूबर | पाकिस्तान की नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने अफगानिस्तान में तालिबान नेतृत्व से लड़कियों के लिए तत्काल प्रभाव से माध्यमिक विद्यालयों को फिर से खोलने का आह्वान किया है।

उन्होंने इस मांग को युद्धग्रस्त राष्ट्र के नए शासकों को संबोधित एक खुले पत्र में रखा है।

यूसुफजई और अन्य अफगान महिला अधिकार कार्यकतार्यओं ने खुले पत्र में लिखा, "तालिबान अधिकारियों के लिए.. लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध हटाओ और लड़कियों के माध्यमिक विद्यालयों को तुरंत फिर से खोलो।"'

पाकिस्तानी कार्यकर्ता को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों ने 2012 में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्वात घाटी के उनके गृहनगर में सिर में गोली मार दी थी, क्योंकि वह महिला शिक्षा की प्रचारक और समर्थक थीं।

उनका खुला पत्र अफगानिस्तान में तालिबान द्वारा सत्ता हथियाने के एक महीने बाद सामने आया है। तालिबान नेताओं ने पहले कहा था कि वे देश में बालिका शिक्षा की अनुमति देंगे।

हालांकि, तालिबान ने केवल लड़कों के शिक्षण संस्थानों को खोलने की अनुमति दी है और लड़कियों के स्कूलों को फिर से खोलने की अनदेखी की है।

भले ही तालिबान नेतृत्व शिक्षा सहित देश में महिलाओं को शिक्षा के सभी अधिकार प्रदान करने का वादा करता है, लेकिन कई लोग अनिश्चित हैं कि क्या वह वादा पूरा होगा।

यूसुफजई की मांग को वैश्विक मान्यता और वैल्यू मिल सकती है, लेकिन इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि तालिबान इसे अनदेखा कर सकता है।

तालिबान ने युसुफजई और उसके परिवार को बार-बार धमकी दी थी और जब संभव हो तो उसे मारने की कसम खाई थी और उन पर महिलाओं को शिक्षा के लिए अपने घरों से बाहर जाने के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया था, जो उनका दावा है कि यह इस्लाम की शिक्षाओं के खिलाफ है।

अफगानिस्तान में महिला शिक्षा का भविष्य तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार की स्थापना के खिलाफ दुनिया की प्रमुख चिंताओं में से एक है।

वैश्विक शक्तियों ने तालिबान से महिलाओं को उनके बुनियादी मानवाधिकार, स्वतंत्रता और शिक्षा सहित पूर्ण अधिकारों का प्रावधान सुनिश्चित करने की मांग की है।

तालिबान ने भले ही प्रतिबद्धताओं में वैश्विक मांग को पूरा किया हो, लेकिन जमीन पर ऐसा कोई प्रतिबिंब नहीं देखा जा सकता है, क्योंकि देश महिलाओं के घर छोड़ने की अनुमति के खिलाफ सख्त और कठोर है।

अफगान सरकार अपनी बिगड़ती वित्तीय और आर्थिक स्थिति को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता को फिर से खोलने के लिए वैश्विक मान्यता चाहती है।

हालांकि, वैश्विक समुदाय ने यह सुनिश्चित किया है कि तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार जब तक बातचीत नहीं करती और अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करती है, तब तक कोई मान्यता प्रदान नहीं की जा सकती है, जिसमें अफगानिस्तान में महिलाओं के लिए शिक्षा और बुनियादी अधिकारों की मुफ्त पहुंच शामिल है।(आईएएनएस)

इंस्टाग्राम पर फीड पोस्ट को क्रॉस-पोस्ट करने के लिए नए फीचर का परीक्षण कर रहा फेसबुक
19-Oct-2021 9:12 PM (40)

सैन फ्रांसिस्को, 19 अक्टूबर | सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी फेसबुक एक ऐसे फीचर का परीक्षण कर रही है, जो यूजर्स को इसके प्लेटफॉर्म पर फोटो या वीडियो सहित अपने पोस्ट को अपने इंस्टाग्राम पर क्रॉस-पोस्ट करने की अनुमति देगा। टेकक्रंच की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने नोट किया कि विकल्प वर्तमान में एक वैश्विक परीक्षण है जो केवल उन लोगों के एक छोटे समूह के लिए उपलब्ध है, जिनके पास पहले से ही इंस्टाग्राम पर एक व्यक्तिगत, निर्माता या व्यावसायिक खाते से उनकी फेसबुक प्रोफाइल जुड़ी हुई है।

फेसबुक पहले से ही उपयोगकर्ताओं को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज और रील को फेसबुक पर क्रॉस-पोस्ट करने की अनुमति देता है।

उपलब्ध होने पर, फेसबुक के कंपोज बॉक्स में यह फीचर दिखाई देगा जहां कोई पोस्ट बना सकता है। पोस्ट के लिए दर्शकों को संपादित करने और एक नया एल्बम बनाने के अलावा नया टॉगल दिखाई देगा।

जब टैप किया जाता है, तो उपयोगकर्ता को एक नई स्क्रीन पर ले जाया जाएगा, जहां कोई भी व्यक्तिगत फेसबुक पोस्ट को कनेक्टेड इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा करना चुन सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यूजर्स इंस्टाग्राम पर सिंगल फोटो, सिंगल वीडियो या मल्टी फोटो एलबम में 10 फोटो तक क्रॉस-पोस्ट कर सकेंगे।

वर्तमान में, अन्य प्रारूप, जैसे जीआईएफ, पोल, 10 से अधिक फोटो वाले फोटो एल्बम, वर्तमान में क्रॉस-पोस्टिंग के लिए योग्य नहीं हैं।

इससे पहले फेसबुक ने इंस्टाग्राम डायरेक्ट मैसेज (डीएम) को मैसेंजर ऐप के साथ मर्ज कर दिया था। इसके साथ, इंस्टाग्राम उपयोगकर्ता ऐप को छोड़े बिना फेसबुक मैसेंजर पर संपर्को को संदेश भेजने में सक्षम हैं।

इंस्टाग्राम से मैसेंजर कॉन्टेक्टस को संदेश भेजने के लिए, इंस्टाग्राम के एंड्रॉइड और आईओएस उपयोगकर्ताओं को पहले गूगल प्ले स्टोर (संस्करण 164.0.0.46.123) और एप्पल ऐप स्टोर (संस्करण 165.0) से ऐप्स के नवीनतम संस्करण को अपडेट या डाउनलोड करना होगा।

इस महीने की शुरुआत में छह घंटे के लंबे वैश्विक आउटेज से त्रस्त, इंस्टाग्राम अब एक ऐसी सुविधा का परीक्षण कर रहा है जो उपयोगकर्ताओं को तब सचेत करेगा जब प्लेटफॉर्म प्रमुख तकनीकी गड़बड़ियों से गुजर रहा हो।

फोटो-मैसेजिंग प्लेटफॉर्म यूजर्स को उनकी एक्टिविटी फीड में तब सूचित करेगा जब सेवा में कोई खराबी या तकनीकी समस्या आती है, और जब इसका समाधान हो जाता है।(आईएएनएस)

'दुनिया के सबसे उदास चिड़ियाघर' में 38 साल से कैद है गोरिल्ला, कई बार छिड़ चुकी है बचाने की मुहिम!
19-Oct-2021 8:17 PM (32)

बड़ों से लेकर बच्चों तक को जू जाना बेहद पसंद है मगर उन चिड़ियाघरों में जानवरों की कैसी स्थिति है वो तो बस जानवर खुद जानते हैं. कई चिड़ियाघर इतने बड़े होते हैं कि उनमें जानवरों को उनके प्राकृतिक निवास जैसा महसूस होता है मगर छोटे जू में जानवरों की बुरी हालत हो जाती है. उन्हें छोटे से पिंजड़े में ही अपना ज्यादातर जीवन गुजार देना पड़ता है. ऐसे में उन्हें शारीरिक ही नहीं, मानसिक तकलीफों से भी गुजरना पड़ता है. इसी प्रकार की मानसिक तकलीफ से एक गोरिल्ला भी गुजर रहा है जो पिछले 38 साल से एक चिड़ियाघर के पिंजड़े में बंद है.

हम बात कर रहे हैं थाइलैंड के पाटा जू में कैद बुआ नोई गुरिल्ले की. ये एक मादा गोरिल्ला है जो पिछले 38 साल इस यहां के एक जू में कैद है. हैरानी की बात तो ये है कि इस गोरिल्ले को छुड़ाने के लिए कई बार मुहिम चलाई गई. पेटा वालों से लेकर कई सेलेब्स ने इसे इसके प्राकृतिक निवास में छोड़ने की वकालत की मगर ये सारी कोशिशें बेनतीजा ही निकलीं. साल 2012 से पेटा ने गोरिल्ला को छुड़ाने की मुहिम शुरी की थी. संस्था के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट जेसन बेकर ने कहा कि जनता को इस जू में नहीं जाना चाहिए जिससे गोरिल्ला और अन्य जानवरों को छुड़ाने की पहले में तेजी लाई जा सकती है. डेली स्टार वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक साल 1983 से ये गोरिल्ला जू के पिंजड़े में बंद है. पिंजड़ा इतना छोटा है कि वो खुलकर घूम-टहल भी नहीं पाती है.

सिर्फ गोरिल्ला ही नहीं, इस जू में कई और भी ऐसे जानवर हैं जो पिछले लंबे वक्त से जू में बंद हैं. इन सभी को जू से छुड़ाने के लिए कई लोग और संस्थाएं प्रयास कर रही हैं. आपको बता दें कि थाइलैंड के जू को ‘दुनिया का सबसे उदास चिड़ियाघर’ (world’s saddest zoo) का दर्जा मिला हुआ है. ये जू बैंगकॉक के एक डिपार्टमेंटल स्टोर की 7वीं मंजिल पर स्थित है और इसकी देख-रेख भी ठीक से नहीं की जाती है. कई बार ऐसे वीडियोज सामने आए हैं जिसके जरिए पता चला है कि जानवरों को गंदगी में रहना पड़ता है. वहां गए पर्यटकों के अनुसार जानवरों को भर पेट खाना भी नहीं दिया जाता जिसके कारण गोरिल्ला समेत अन्य जानवर उन लोगों के सामने खाने की भीख मांगते हैं. (news18.com)

लंदन के आसमान में मंडराता दिखा 'दमपिशाच'! काले कपड़ों में उड़ते हुए कैमरे में हो गया कैद
19-Oct-2021 8:17 PM (59)

सोशल मीडिया पर कई तरह के वीडियोज वायरल होते रहते हैं. इनमें से कुछ वीडियोज फेक होते हैं तो कुछ एडिटेड होते हैं. इनमें से कुछ की सच्चाई कभी सामने नहीं आ पाती हैं तो कुछ लोगों को कन्फ्यूज कर देता है. सोशल मीडिया पर ऐसा ही एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसे लंदन में कैद किया गया. इस वीडियो में काले रंग के कपड़े में उड़ती एक चीज नजर आई. आसमान में चार पैरों वाली इस चीज को किसी ने एलियन बताया तो किसी ने दमपिशाच. हालांकि, ये साफ़ नहीं हो पाया कि ये चीज क्या थी?

वायरल हुए इस वीडियो ने सभी को कन्फ्यूज कर दिया. कई लोगों ने इस काली परछाई को जे के रोलिंग की किताब, हैरी पॉटर के किरदार दमपिशाच से कंपेयर कर दिया. भूत जैसे दिखने वाले इस फिगर के चार पैर दिखाई दिए. इसे लंदन में रहने वाली एक महिला ने कैद किया. महिला ने बताया कि वो अपना रोज का काम कर रही थी. तभी उसे आसमान में काले रंग की ये अजीबोगरीब चीज नजर आई. वो पहले तो समझ ही नहीं पाई कि ये क्या है. उसने फटाक से अपना मोबाइल उठाया और वीडियो बनाने लगी. इसके बाद उसने वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया, जहां से ये वायरल हो गया.

वीडियो में देखा जा सकता है कि ये काली चीज बहुत आराम से बहे जा रही थी. लोगों ने जब ये वीडियो देखा तो उन्हें हैरी पॉटर मूवी की याद आ गई. उसमें मौजूद कैरक्टर दमपिशाच कुछ इसी तरह हवा में फ्लोट करते थे. इस वीडियो को रेडिट पर u/ErykahBeeh नाम के अकाउंट पर शेयर किया गया. इसमें शख्स ने लिखा कि क्या लंदन में यूएफओ दिखाई दिया? इसके बाद वीडियो पर लोगों ने कई तरह के कमेंट्स किये. कई लोगों ने इसे दुबारा शेयर किया और अचरज जताया.

एक शख्स ने लिखा कि ऐसा लगता है कि बेकर स्ट्रीट में मौजूद दमपिशाच है जो लंदन में आ गया है. वहीं कई ने इसे अलग-अलग फिल्म के भूतहा किरदारों से कंपेयर कर दिया. हालांकि, ज्यादातर लोगों ने इसे हैरी पॉटर मूवी से ही जोड़ा. वहीं कई लोगों का कहना है कि हो सकता है कि ये प्लास्टिक की कोई डॉल हो जो हवा में उड़ती हुई जा रही थी. दूर से देखने के कारण ये यूएफओ या दमपिशाच का भ्रम पैदा कर रहा था. अब असलियत जो भी हो, ये वीडियो को लाखों बार देखा जा चुका है. (news18.com)

दुनिया का ऐसा गांव जहां हर शख्स को आता है रस्सी पर चलने का हुनर! पिछले 100 सालों से जारी है प्रथा
19-Oct-2021 8:16 PM (45)

रस्सी पर किसी को चलते देखना जितना मजेदार लग सकता है उतना ही ये खतरनाक भी होता है. एक छोटी सी चूक हो जाने पर जान भी जा सकती है. यूं तो हर किसी के बस की बात नहीं है कि वो ऐसे करतब को कर सके मगर दुनिया में एक ऐसा गांव है जहां का रहने वाला हर शख्स इस अनोखी कला में महारथ हासिल किए हुए है. हम बात कर रहे हैं रूस के एक गांव की जहां का हर नागरिक रस्सी पर चलने की कला जानता है.

रूस में पहाड़ों के बीच स्थित छोटा सा गांव सोवाक्रा-1 दुनिया में काफी फेमस है. वो इसलिए कि यहां का हर एक शख्स रस्सी पर चलने का हुनर जानता है. जानकारी के लिए बता दें कि गांव के नाम के आगे ‘1’ अंक इसलिए लगा है क्योंकि इसी नाम से रूस में एक और गांव भी है. हैरानी की बात ये है कि कोई भी नहीं जानता है कि रस्सी पर चलने की प्रथा कब से यहां शुरू हुई है मगर गांव में शरीर से स्वस्थ हर आदमी अनोखा करतब कर सकता है. माना जाता है कि गांव के लोगों में रस्सी पर चलने की प्रथा पिछले 100 साल से जारी है. पुरुष, स्त्री, बच्चे समेत बूढ़े भी इस कला के बारे में जानते हैं. इस गांव के कई लोग तो सर्कस में भी काम करते हैं.

आपको बता दें कि साल 1980 के दशक तक इस गांव की आबादी 3000 थी मगर अब वो घटकर महज 400 हो चुकी है. यहां पर फैली अफवाहों पर विश्वास करें तो गांव का हर पुरुष पुराने वक्त में टाइट रोप वॉकिंग की कला इसलिए सीखता था जिससे वो अपनी प्रेमिका तक जल्दी पहुंच जाए. जबकि कुछ लोगों का मानना है कि रस्सी पर चलने की कला गांव में इसलिए हर किसी को आती है क्योंकि पहाड़ पर स्थित होने के कारण गांव के रास्ते दुर्गम इलाकों से होकर गुजरते हैं. कहीं भी जल्द पहुंचने के लिए रस्सी से जाना बेहतर विकल्प साबित होता है. यही नहीं, तूफानों में कई बार अस्थायी पुल और रास्ते टूट जाते हैं जिसके बाद नदी को पार कर पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में रस्सी ही एक मात्र रास्ता बनती है. रिपोर्ट्स के अनुसार गांव में कोई खेती नहीं होती इसलिए यहां के लोग रस्सी पर चलने की कला का इस्तेमाल कर के ही पैसे कमाते हैं. ऑडिटी सेंट्रेल वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार रस्सी पर चलने का करतब दिखाने से अब ज्यादा पैसे नहीं मिलते इसलिए गांव के कई युवा रूस के अन्य शहरों में जाकर नौकरियां करने लगे हैं. जबकि बुजुर्ग अपनी खराब सेहत के कारण ये जानलेवा करतब नहीं करते हैं. (news18.com)