राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : स्टेट बैंक की ग्राहक सेवा..
29-Sep-2021 6:09 PM (362)
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : स्टेट बैंक की ग्राहक सेवा..

स्टेट बैंक की ग्राहक सेवा..  
छत्तीसगढ़ के सबसे वरिष्ठ वकील, और भूतपूर्व महाधिवक्ता कनक तिवारी ने आज फेसबुक पर पोस्ट किया है - स्टेट बैंक की ग्राहक सेवाओं से बहुत खुश होकर आज मैं अपना खाता वहां बंद कर रहा हूं।

इस पर एक कार्टूनिस्ट काजल कुमार ने किसी हाईवे पर लगे इस पोस्टर की फोटो पोस्ट की है जो कि स्टेट बैंक के कर्मचारियों के बर्ताव से दुखी लोगों का छपवाया हुआ है.

सोशल मीडिया वैसे भी स्टेट बैंक के लोगों के बर्ताव के खिलाफ जनता के दुख-दर्द से भरे रहता है, और कनक तिवारी की पोस्ट पर दर्जनों लोगों ने स्टेट बैंक से अपनी तकलीफ का जिक्र किया है। एक ने लिखा कि उन्होंने वहां की सेवाओं से खुश होकर 25 साल पहले अपने अपना खाता बंद कर दिया था जो कि उनके जीवन का पहला खाता था और उससे उन्हें भावनात्मक लगाव भी था।

एक दूसरे व्यक्ति ने लिखा कि कनक तिवारीजी का खाता बंद करने पर एसबीआई को बधाई, एक सम्माननीय ग्राहक का विकेट गिरा दिया, मैं जब इस बैंक में जाता हूं तब बड़े सहमे और विनीत भाव लिए कि कहीं अपमानित होकर बाहर ना आना पड़े।

एक ने लिखा कि सच ही स्टेट बैंक में ग्राहक सुविधाओं का बहुत बुरा हाल है।

एक ने लिखा कि यह खुशी के आंसू हैं, जिसे और लोग भी बहाना चाहते हैं।

एक बुजुर्ग पेंशनर ने लिखा कि स्टेट बैंक का खाता तो मैं भी बंद करना चाहता हूं लेकिन मजबूर हूं कि पेंशन उसी खाते से मिलती है। उनकी सेवाएं इतनी प्रशंसनीय है कि मुझ जैसे 88 बरस के वृद्ध को भी पेंशन के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है।

एक का कहना है कि इस बैंक को सबसे पहले प्राइवेट सेक्टर में डालना चाहिए।

एक अन्य व्यक्ति ने लिखा कि मैं दो बार खाता खुलवाने स्टेट बैंक का गया लेकिन उन्हें प्यार की भाषा नहीं आती, कुछ समझ नहीं आता, इनके लिए ग्राहक भगवान नहीं इरिटेशन है।

एक व्यक्ति ने लिखा- यह काम आपने बहुत देर से किया मैं 14 वर्ष पहले कर चुका हूं।

एक व्यक्ति का कहना है यह तो पता है कि आदमी देखकर व्यवहार करते हैं, लेकिन आप जैसे व्यक्तित्व के साथ ऐसा कुछ किया है यह स्टेट बैंक के लिए धब्बा है। मैंने

गांव देहात के लोगों के साथ बहुत बदतमीजी और बुरा बर्ताव करते हुए देखा है जबकि सरकारी अफसरों और सेठ लोगों से अलग व्यवहार किया जाता है। जिनका कद काठी रंग रूप उजला हो उनसे अलग व्यवहार करते हैं।

एक ने कनक तिवारी को लिखा कि सर यह पोस्ट हटा दीजिए मोदी की नजर पड़ गई तो शिकायत का निवारण करने के नाम पर इसको बेच देगा।

बिलासपुर के एक व्यक्ति ने लिखा कि वहां पर स्टेट बैंक की अलग-अलग ब्रांच का अलग-अलग अनुभव है, मेन ब्रांच सबसे खराब है।

एक और व्यक्ति ने लिखा कि मेरा खाता बैंक ऑफ महाराष्ट्र में है लेकिन यहां की भी खराब सेवा देखकर खाता बंद करने की इच्छा हो रही है।

एक और ने शंका जताई कि इतने बड़े पैमाने पर इतने लंबे समय से सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक से जुड़े लोगों की शिकायतों पर काम न होना एक साजिश लगती है यही सब बातें उसे बेचने का आधार बनेगी।

एक और ने लिखा हम लोग भी उनकी सेवाओं से बहुत खुश हैं इतना खुश हैं कि कोई विकल्प मिलते ही उन से मुक्त हो जाएं।

लेकिन एक और व्यक्ति का यह कहना है कि यह सेंट्रल बैंक से तो फिर भी अच्छा है।

कितनी मौतों का होगा इंतजार?
छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में हाथी-मानव के बीच जिस तेजी से संघर्ष बढ़ रहा है उसका स्थायी समाधान नहीं निकला तो स्थिति भयावह हो सकती है। लोग अब हाथियों के हमले के विरोध में सडक़ पर उतरकर आंदोलन कर रहे हैं जिसे संभालना वन और पुलिस विभाग के मैदानी अमले के बस में नजर नहीं आता। सरगुजा संभाग के प्रतापपुर फॉरेस्ट रेंज में हाल के दिनों में हाथियों के हमले से 4 मौतें हो चुकी हैं। आज फिर एक युवक को हाथी दल ने पटक-पटक कर मार डाला। लगातार होने वाली घटनाओं से पेरशान हो चुके ग्रामीणों ने शव के साथ सडक़ जमा कर दिया। वे रेंजर, फारेस्ट गार्ड पर हमला करने जा रहे थे। पुलिस की मदद से वे जान बचाकर भागे। आंदोलन हर एक मृतक के परिवार को एक नौकरी तथा 15 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग पर किया गया है। हाथी प्रभावितों की ऐसी भारी मांग अब तक नहीं सुनी गई। वे अपने इलाके में हाथियों के विचरण को सहज-सामान्य क्रियाकलाप के रूप में लेने के लिये तैयार नहीं हैं। उन्हें लग रहा हो कि जंगल नष्ट करने, अंधाधुंध खनन के चलते समस्या गहराती जा रही है। मौजूदा हालात से तो लगता है कि समय रहते कोई कारगर कदम उठाना ही होगा।  

इससे अच्छी तो भाजपा सरकार थी...
कोरबा में जो कुछ हो रहा है, उसके मुकाबले में सिंहदेव समर्थकों का बिलासपुर सिटी कोतवाली में किया गया प्रदर्शन तो कुछ भी नहीं है। जुलाई महीने में जब यहां से एसपी अभिषेक मीणा का रायगढ़ तबादला हो गया तो इसके तीन दिन बाद ही जिला कांग्रेस कमेटी शहर ने ईओडब्ल्यू से उनकी शिकायत की। शिकायत में कहा गया है कि पूर्व एसपी ने गाढ़ी कमाई की है। मीणा के कार्यकाल में कबाड़ का बंद धंधा चालू हो गया। जुआ, सट्टा और दूसरे कारोबार पनपने लगे, अवैध उगाही, जमीन खाली कराने के नाम पर पैसे वसूले गये देशी, विदेशी शराब का कारोबार, झूठी शिकायत के आधार पर ब्लैकमेलिंग, रेत का अवैध उत्खनन अकूत कमाई का जरिया था। खास बात यह है कि यह शिकायत तो उनके तबादले के तुरंत बाद की गई थी लेकिन इसे अब उजागर किया गया है।

इसकी पृष्ठभूमि में है मंत्री जयसिंह अग्रवाल के समर्थक विकास सिंह को पुलिस द्वारा गुंडा सूची में डालने की कार्रवाई। शहर कांग्रेस ने चार दिन पहले बकायदा बैठक ली जिसमें शहर अध्यक्ष, मेयर, सभापति सहित 150 से ज्यादा कार्यकर्ता शामिल हुए। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जबरन झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाते हुए पुलिस और प्रशासन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। कहा-कोरबा में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रताडि़त किये जा रहे हैं। इससे अच्छी तो भाजपा सरकार थी, उस समय कांग्रेस इतने प्रताडि़त नहीं हुआ करते थे।

कांग्रेस के बारे में कहा जाता था कि उन्हें सरकार चलाना आता है पर यहां तो मंत्रियों के समर्थकों, करीबियों का यह हाल है कि उन्हें भाजपा की गवर्नेंस अच्छी लगने लगी है।

संविदा कर्मचारी का झुलसकर जान गंवाना
बीते दिनों रायपुर में बिजली विभाग के एक संविदा कर्मचारी की मौत तब हो गई जब उसे खंभे पर बिना सुरक्षा उपकरणों के मरम्मत के काम पर लगा दिया गया था।  जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक इन संविदा कर्मचारियों को सिर्फ 8 हजार रुपये दिये जाते हैं। वेतन अपनी जगह लेकिन इन्हें सुरक्षा के मामूली उपकरण भी नहीं  दिये गये हैं, जिससे वे झुलसकर जान गंवाने से बच सकें। वैसे कांग्रेस ने घोषणा पत्र में ऐसे सब संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था। चूंकि नियुक्ति नियमित नहीं है इसलिये पर्याप्त मुआवजा और परिवार के किसी व्यक्ति को अनुकम्पा नौकरी मिलने की उम्मीद भी नहीं की जा सकती। इस तरह के ज्यादातर काम बिजली विभाग ने ठेके पर दे रखे हैं। विद्युत वितरण कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी संवेदनहीन ठेकेदारों के सिर पर डाल रखी है, जिससे कम खर्च में काम हो और सीधी नियुक्ति का बोझ न पड़े। इसके बावजूद इस बार बिजली की दरें बढ़ाई गई हैं। साथ ही आये दिन अघोषित बिजली कटौती हो रही है। उद्योगपतियों को अलग शिकायत है कि बिजली कटौती के कारण उत्पादन पर असर पड़ रहा है। (rajpathjanpath@gmail.com)

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