राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अफसर और अतिथि
28-Feb-2021 6:19 PM 290
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : अफसर और अतिथि

अफसर और अतिथि

पिछले दिनों दादा साहब फाल्के इंटरनेशनल फिल्म अवॉर्ड फंक्शन में फिल्मी हस्तियों को अवॉर्ड बांटकर टूरिज्म बोर्ड की एमडी रानू साहू सुर्खियों में आ गईं। अवॉर्ड फंक्शन में रानू साहू बतौर अतिथि मौजूद थीं। उन्होंने अभिनेत्री सुष्मिता सेन और राधिका मदान को अवॉर्ड प्रदान किया। अब कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विधिवत अनुमति ली है अथवा नहीं, इसको लेकर प्रशासनिक हल्कों में कानाफूसी शुरू हो गई है।

कार्यक्रम का वीडियो क्लिप वायरल होने के बाद यह भी पता लगाया जा रहा है कि बोर्ड की तरफ से कोई अनुदान तो नहीं दिया गया है। क्योंकि बोर्ड तकरीबन दिवालिया होने के कगार पर है। कुछ साल पहले इंडोर स्टेडियम में आयोजित केबीसी के कार्यक्रम में दो अफसरों ने अमिताभ बच्चन के साथ ठुमके क्या लगा दिए थे, उन्हें नोटिस थमा दिया गया था। रानू साहू के मामले में क्या होता है, यह देखना है।

जोगी पार्टी एनडीए की...

 खबर है कि जोगी पार्टी एनडीए का हिस्सा बनना चाहती है। अमित जोगी इसके लिए कोशिश भी कर रहे हैं। अमित की इस सिलसिले में केन्द्रीय मंत्री रामदास आठवले से बात भी हुई है। वैसे तो एनडीए का हिस्सा न होने के बावजूद जोगी पार्टी और भाजपा के बीच बेहतर तालमेल है। विधानसभा में दोनों ही एक-दूसरे के साथ खड़े नजर आते हैं।

नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में भी जोगी पार्टी ने कई जगह भाजपा को सपोर्ट किया था। जोगी परिवार जब कांग्रेस में था, तब भी उन पर भाजपा के साथ सांठ-गांठ कर कांग्रेस के लोगों को हराने का आरोप लगता था। अब जब भाजपा के साथ खुलकर दिख रहे हैं, ऐसे में देर सवेर एनडीए का हिस्सा बन जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

धान के बोनस पर ग्रहण तो नहीं लगेगा?

धान खरीदी पर किसानों को 2500 रुपये का भुगतान करने का पेंच फंसता जा रहा है। केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ मुख्यमंत्री की बातचीत उन्हीं के शब्दों में ‘निराशाजनक’ रही है। केन्द्र को समर्थन मूल्य से अधिक कीमत पर धान खरीदने पर आपत्ति है। इससे छत्तीसगढ़ से खरीदा गया धान और उससे बने चावल का एफसीआई में समायोजन नहीं हो पा रहा है। यदि केन्द्र का रुख नरम नहीं होता है तो छत्तीसगढ़ को भारी आर्थिक नुकसान होना तय है।

केन्द्र ने राज्य सरकार की इस दलील को मानने से इंकार कर दिया है कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना, केन्द्र की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना जैसी ही है। इसे धान पर ही समर्थन मूल्य के अतिरिक्त दी जाने वाली राशि के तौर पर देखा जा रहा है, जो सच भी है। राजीव न्याय योजना को जब तक धान से अलग नहीं किया जायेगा, धान के उठाव में केन्द्र के साथ तनातनी चलती रहेगी। सरकार को ऐसे रास्ते ढूंढने की जरूरत पड़ेगी जिसमें किसानों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिले पर वह केवल धान की बिक्री की वजह से न हो। वैसे भी राजीव न्याय योजना की राशि की अंतिम चौथी किस्त मार्च 2021 तक देने की घोषणा तो सरकार ने कर दी है, पर इस साल खरीदे गये धान की अतिरिक्त राशि कब दी जायेगी, इस पर कोई घोषणा नहीं की गई है।

कांग्रेस पदाधिकारियों की लम्बी सूची

हाल ही में भाजपा ने अनेक मोर्चा पदाधिकारियों, कार्यकारिणी की सूची जारी की। प्रदेश स्तर से जारी सूची में कई विवाद खड़े हुए। कुछ जिलों में अब तक नियुक्तियां आम सहमति नहीं बन पाने की वजह से ही नहीं हो पा रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस में इस तरह का कोई झंझट ही नहीं। सबको संतुष्ट करना हो तो एक पद पर दस, बीस, तीस लोगों को बिठा दो। जिले से नाम कट गया तो प्रदेश से जुड़वा लो। नये बने जिले गौरेला-पेन्ड्रा-मरवाही में ऐसा ही हुआ। जिला कांग्रेस कमेटी ने बीते दिनों जिले के कार्यकारिणी की एक सूची अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अनुमोदन व प्रदेश कांग्रेस की सहमति लेकर जारी कर दी। इसमें बहुत से लोग छूट गये। छूटे हुए लोग नाराज हो गये। वे सीधे प्रदेश कार्यालय पहुंच गये। वहां वे महामंत्री रवि घोष से मिले। महामंत्री ने कहा, कोई बात नहीं, बताइये किनका नाम जोडऩा है। उन्होंने नाम दिये और एक अतिरिक्त सूची फिर जारी कर दी गई। अब जिला इकाई हैरान है। उनकी जानकारी या अनुशंसा के बगैर प्रदेश से यह अतिरिक्त सूची कैसे जारी हो गई। वे इन नये नामों को मानने के लिये तैयार नहीं हैं। कहा है कि वे ही पदाधिकारी काम करेंगे जिनका नाम पहली सूची में है। अतिरिक्त नाम जुड़वाने वालों को शायद ऐतराज न हो, क्योंकि काम करने के लिये पद लेता ही कौन है?  प्रदेश कांग्रेस से जारी लेटर पैड में उनका नाम है, उनका लेटर पैड, विजिटिंग कार्ड भी इसी के सहारे बन जायेगा।

स्वामी आत्मानंद स्कूलों के लिये सेल

निजी स्कूलों में बच्चों को दाखिला दिलाने का एक बड़ा कारण होता है, पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी होना। पर यदि कोई सर्वे किया जाये तो मालूम होगा कि कोर्स की तकनीकी अंग्रेजी के अलावा व्यावहारिक अंग्रेजी का ज्ञान उन्हें बहुत कम स्कूलों से मिल पाता है। हिंदी से उनका नाता तो टूट ही चुका रहता है, अंग्रेजी में भी निपुण नहीं होते।

अब छत्तीसगढ़ सरकार ने निजी स्कूलों की ही टक्कर में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल खोल दिये हैं। अब तक 50 से अधिक स्कूल खुल चुके हैं, जबकि कुल 118 खोले जाने हैं। प्रवेश के लिये बड़ी संख्या में आवेदन आये। वजह यह है कि एक तो इसका माध्यम अंग्रेजी है, दूसरा कम फीस पर यहां उपलब्ध कराई सुविधायें किसी अच्छे प्राइवेट स्कूल से कम नहीं। पर, इन स्कूलों की लोकप्रियता आगे तभी बनी रह सकती है जब शैक्षणिक स्तर भी ऊंचा बनाकर रखा जाये।

पहली बार स्कूलों में पढ़ाई के स्तर पर निगरानी के लिये अलग से सेल राज्य स्तर पर बना दिया गया है। इसमें संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी को प्रमुख बनाया गया है। ये स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर निगरानी रखेंगे और आवश्यकता अनुसार शोध कर उसमें सुधार लायेंगे। विशेषकर अंग्रेजी ज्ञान व्यवहारिक और आम जीवन में भी उपयोगी हो, इस पर बल दिया जायेगा। इन स्कूलों के परिणाम को लेकर शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों में बड़ी जिज्ञासा है। क्या दिल्ली की तरह छत्तीसगढ़ में ऐसा हो पायेगा कि सरकारी स्कूलों के परिणाम निजी से बेहतर आये।

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