राजपथ - जनपथ

छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सत्ता के दिन गए तो...
26-Oct-2020 5:18 PM 272
छत्तीसगढ़ की धड़कन और हलचल पर दैनिक कॉलम : राजपथ-जनपथ : सत्ता के दिन गए तो...

सत्ता के दिन गए तो...

चेंबर चुनाव की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन इसकी हलचल शुरू हो गई है। बड़े व्यापारी नेता अपने एसोसिएशन में पकड़ बनाने की भरसक कोशिश कर रहे हैं, ताकि चुनाव में अहम भूमिका निभा सके। ऐसे ही राईस मिल एसोसिएशन में अपना दबदबा कायम रखने की कोशिश पर योगेश अग्रवाल को काफी कुछ सुनना पड़ गया।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि भाजपा सर्कार रहते हुए योगेश की राईस मिल एसोसिएशन में तूती बोलती थी। भाई के मंत्री पद का रूतबा भी था। मगर जैसे ही भाजपा सरकार बदली, राईस मिल एसोसिएशन में रामगोपाल अग्रवाल समर्थक हावी हो गए। इस पर योगेश ने राईस मिल एसोसिएशन के समानांतर अरवा चावल मिल एसोसिएशन का गठन कर दिया और वे खुद अध्यक्ष बन बैठे।

राइस मिल का कारोबार एफसीआई और नागरिक आपूर्ति निगम से जुड़ा हुआ है। रामगोपाल अग्रवाल, निगम के चेयरमैन हैं। ऐसे में अलग एसोसिएशन भले बना लें, लेकिन कारोबार की अच्छी सेहत के लिए रामगोपाल का आशीर्वाद जरूरी है। सुनते हैं कि पिछले दिनों योगेश उनका आशीर्वाद लेने भी गए, लेकिन रामगोपाल ने आशीर्वाद देना तो दूर, योगेश को बुरी तरह फटकार लगा दी। रामगोपाल ने योगेश को इतनी जोर से डांटा कि इसकी गूंज बाहर तक सुनाई दी, और बात धीरे-धीरे एसोसिएशन के बाकी सदस्यों तक पहुंच गई। रामगोपाल नाराज हैं, तो एसोसिएशन के सदस्य योगेश के साथ जुड़े रहेंगे, यह सोचना भी गलत हैं। कुल मिलाकर राईस मिल एसोसिएशन में वर्चस्व बनाने की कोशिश करना योगेश के लिए भारी पड़ गया। इसीलिये बड़े-बुजुर्ग कह गए हैं कि अपने अच्छे दिनों में ताकत का इस्तेमाल सम्हलकर करना चाहिए, लेकिन पंद्रह बरसों की लगातार सत्ता अच्छे-अच्छे लोगों को बददिमाग कर देती है। 

हाथियों से अलर्ट करते वाट्सएप ग्रुप

गजराज मीडिया, हाथी मित्र दल, वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट, हाथी मेरे साथी, हाथी विचरण। ये कुछ वाट्सअप ग्रुप हैं जो सरगुजा संभाग के सूरजपुर, बलरामपुर जिलों में चल रहे हैं। इन वाट्सअप समूहों को युवाओं ने खुद की प्रेरणा से बनाया है। इनसे सैकड़ों लोग आपस में जुड़ गये हैं। वे ग्रुप में सूचना डालते रहते हैं कि हाथी उनके इलाके में कहां भ्रमण कर रहा है, किस ओर से आया और किस तरफ आगे बढ़ गया है। अब लोगों को किसी रास्ते पर निकलने से पहले पता चल जाता है कि उनका हाथी से सामना तो नहीं होने वाला।

ये ग्रुप वन विभाग के लिये भी काफी मददगार साबित हो रहे हैं। फील्ड पर काम कर रहे अनेक गार्ड्स, अधिकारी, कर्मचारी आदि इससे जुड़ गये हैं जिन्हें हाथियों की मूवमेंट पर वाट्सएप ग्रुपों से मिली सूचना से मदद लेकर ग्रामीणों और फसल की समय पर सुरक्षा करने में मदद मिल रही है। अब तक कुछ हाथियों में रेडियो कॉलर लगाकर, रेडियो के जरिये सूचना देकर लोगों को सतर्क करने का तरीका अपनाया जाता है पर यह नया प्रयोग ज्यादा कारगर साबित हो रहा है।

कुछ दिन पहले कोरबा से खबर आई थी कि युवाओं ने वाट्सएप ग्रुप बना रखे हैं जिससे वे कोरोना के कारण स्कूल नहीं जा पाने वाले, अपने आसपास रहने वालों बच्चों को पढ़ा रहे हैं। ऐसे प्रयोग और भी हो रहे होंगे, छत्तीसगढ़ ही नहीं दूसरे राज्यों में भी हो रहे होंगे। स्मार्टफोन का ऐसा स्मार्ट इस्तेमाल कई समस्याओं को सुलझाने में मदद कर सकता है।

दशहरे में नीलकंठ दिखा क्या?

वाट्स अप का सबसे ज्यादा इस्तेमाल गुड मार्निंग, गुडनाइट और पर्वों पर शुभकामना संदेश भेजने में होता है। नवरात्रि के पहले दिन से चला आ रहा यह दौर आज दशहरे पर खत्म हुआ है, कुछ दिन रुककर फिर शुरू हो जायेगा क्योंकि दीपावली भी आगे है। दशहरे के कई शुभकामना संदेशों में खूबसूरत नीलकंठ की तस्वीरें भी हैं।

हम जिन पक्षियों को तेजी से विलुप्त होते देख रहे हैं उनमें गिद्ध और कौवों की तरह नीलकंठ को भी शामिल कर लेना चाहिये। कुछ वर्षों तक रावण दहन देखने के लिये निकलने से पहले नीलकंठ के दर्शन हो जाते थे। इसके बिना दशहरा अधूरा भी माना जाता था। हम इसे स्थानीय बोली में टेहर्रा चिरई कहते हैं। छत्तीसगढ़ धान की फसल लेने वाला इलाका है पर यहां भी नीलकंठ के दर्शन दुर्लभ हो गये हैं। धान की बालियां चुगना और फसलों में मौजूद कीड़ों को खाना नीलकंठ को प्रिय है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नीलकंठ का यही प्रिय आहार उनके विलुप्त होने की वजह बनता जा रहा है। वे भोजन के साथ फसलों में डाले गये कीटनाशक और उससे मरने वाले कीड़ों को निगल रहे हैं जिससे उनकी संख्या घट रही है। 40 फीसदी वनों से आच्छादित होने के बावजूद छत्तीसगढ़ में वन्य प्राणियों, पक्षियों को विलुप्त होने से बचाना हमारी प्राथमिकता में नहीं है। बेमेतरा के गिधवा बांध में पक्षी विहार बनाने की योजना आज से सात-आठ साल पहले बनाई गई थी, पर आज उसे सब भूल चुके हैं। 

छत्तीसगढ़ में स्थानीय पक्षी तो हैं पक्षी विशेषज्ञ बताते हैं कि लगभग 140 तरह के प्रवासी पक्षी भी आते हैं। इसके कई पहचाने हुए डेरे हैं पर वहां पर्यटकों से ज्यादा शिकारी पहुंचते हैं। शिकारियों के डर से कई ठिकानों पर प्रवासी पक्षियों ने डेरा डालना बंद भी कर दिया है। राम गमन मार्ग पर तेजी से काम कर रही सरकार को उस काल के प्रिय पात्र नीलकंठ और विलप्त होते दूसरे पक्षियों को बचाने के लिये कुछ करना चाहिये।

मरवाही में माहौल भक्तिभाव का...

चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशी और प्रचार में जुटे नेता कार्यकर्ता विनम्र हो जाते हैं। स्वर में कोमलता आ जाती है, हाथ जुड़े हुए रहते हैं। बुजुर्गों का चरण स्पर्श करते हैं। सब माताएं, बहनें और चाचा, काका, मामा दिखाई देते हैं। अद्भुत दृश्य होता है। मतदाताओं में ईश्वर दिखाई पड़ता है। आम वोटर सोचता है कि काश ऐसा पूरे पांच साल होता। लोकतंत्र में दरअसल नेता सेवक होता है और जनता उसकी मालिक। पर चुनाव खत्म होते ही ऊंट करवट बदल लेता है। इन दिनों मरवाही में चल रहे उप-चुनाव के दौरान मतदाताओं के प्रति तो भक्तिभाव दिख ही रहा है मंदिरों और धार्मिक समारोहों में नेताओं की उपस्थिति दर्ज हो रही है। प्रभारी मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने दुर्गोत्सव के दौरान दुर्गा पूजा पंडाल में ही माइक संभाल ली और कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में वोट मांगे।

मरवाही इलाके के कुछ इलाकों में दो बार गणेश उत्सव मनाया जाता है। इस समय भी कुछ स्थानों पर गणेश प्रतिमायें स्थापित की गई हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु देव साय वहां पहुंच गये। गणेश जी के पंडाल पर उन्होंने चुनावी सभा ले ली। गुंडरदेही के विधायक कुंवर सिंह निषाद ने एक जवारा यात्रा के दौरान खप्पर लेकर नृत्य किया। वैसे निषाद नृत्य करना पसंद करते हैं। उनकी पहले भी इस पर वीडियो वायरल हो चुकी है।

आम तौर पर मतदाता धार्मिक स्वभाव का होता है। नेता जब उनके आराध्य की पूजा करते  हैं तो एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव छोड़ जाते हैं। इससे उनके वोट हासिल करने में मदद मिलती है। यह बात अलग है कि चुनाव अभियान के दौरान प्रचार के लिये धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल करना विधि के विरुद्ध है पर शिकायत कौन करे, सब इस गंगा में नहा रहे हैं।  

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