<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>Daily Chhattisgarh - Sthayi Stambh</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh.php</link><description>Daily Chhattisgarh - Sthayi Stambh</description><item><title>राजपथ-जनपथ : शिक्षक हर जिम्मेदारी उठाने में सक्षम!</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15387&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15387&amp;path_article=7 ]]></link><description>शिक्षक हर जिम्मेदारी उठाने में सक्षम!

बीते साल नवंबर महीने में लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश निकाला था कि शिक्षक, विशेषकर प्राचार्य स्कूलों में नोडल अधिकारी होंगे, आवारा कुत्तों को भगाने के लिए। यदि स्कूल परिसर के आसपास कुत्ते घूमते दिखें तो उसके रंग, लिंग की पहचान करनी है। परिसर में घुसने से रोकना है और खतरे की स्थिति पैदा हो जाए तो नगरीय निकाय या पंचायत से डॉग कैचर टीम को सूचित करना है, जो उसे कब्जे में कर लेगी। शिक्षक संगठनों ने इस आदेश का कड़ा विरोध किया था। उनका कहना था कि आवारा कुत्तों पर निगरानी रखना नगरीय प्रशासन या पंचायत का काम है, वे पहले से ही कई गैर-शिक्षकीय कामों में उलझे हुए हैं, उन पर एक और अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। विरोध के बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश को पूरी तरह से वापस तो नहीं लिया लेकिन स्पष्टीकरण दिया कि यह काम केवल देख-रेख तक सीमित रहेगा। शिक्षकों को आवारा कुत्तों को पकडऩा या उसकी पहचान दर्ज करना जरूरी नहीं है, परिसर में आवारा कुत्ते दिखें तो केवल इसकी सूचना नगरीय निकाय या पंचायत को दें। ताकि मिड डे मील सुरक्षित रहे और बच्चों को डॉग बाइट से बचाया जा सके। नया ध्यान इस बात पर केंद्रित किया गया कि स्कूल परिसरों को अधिक सुरक्षित बनाया जाए, जहां बाउंड्रीवाल और गेट दुरुस्त किए जाएं। हालांकि राज्य के सैकड़ों स्कूल हैं, जिनमें गेट बाउंड्रीवाल हैं ही नहीं और जब हैं नहीं तो उनको दुरुस्त कराने का भी सवाल नहीं है।

अब छत्तीसगढ़ के शिक्षकों को चौकन्ना होने की जरूरत पड़ सकती है। उत्तरप्रदेश सरकार ने आवारा कुत्तों की तो नहीं पर आवारा पशुओं की फिक्र करते हुए ऐसा ही एक आदेश जारी किया है। शुरुआत बरेली जिले से हुई है। यहां सरकारी प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों के लिए सर्कुलर निकाला गया है कि शिक्षक आवारा पशुओं- (विशेषकर चिंता गौवंश के लिए) की समस्या के लिए भूसा जुटाएं। लोगों से अपील करें कि वे स्वैच्छिक रूप से भूसा दान करें। एक स्कूल को 46 किलो भूसा इक_ा करने का टागरेट दिया गया है, एक शैक्षणिक ब्लॉक से एक क्विंटल। यहां भी डीएम ने आदेश जारी करने के पीछे मजबूरी बताई है। उनका कहना है कि आवारा पशु बड़ी संख्या में भटक रहे हैं। इन्हें आहार मिल जाए तो भटकना बंद जो जाए। चारा उपलब्ध कराना अकेले सरकार के बस की बात नहीं है, जनसहयोग से ही होगा और शिक्षक इस काम को बखूबी कर सकते हैं। वहां भी शिक्षक विरोध में उतर आए हैं। उनका कहना है कि बस हम पढ़ाएं मत। बाकी सब काम करें। कल को कहेंगे-गोबर उठाओ।

छत्तीसगढ़ में भी आवारा पशुओं की समस्या गंभीर बनी हुई है। सडक़ों पर उनकी वजह से आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं और वे खुद हादसों में जान गंवा रहे हैं। हाईकोर्ट ने कलेक्टर-एसपी, एसडीएम को निगरानी करने के लिए कमेटी बनाने का निर्देश दिया है, बनी भी है। कई बार अफसर सडक़ों से इन जानवरों को खदेड़ते हुए भी दिख जाते हैं। मवेशी मालिक को ढूंढकर उनके खिलाफ एफआईआर भी कराई जा रही है। पर यूपी में तो प्रशासन ने यह काम अपने सिर पर नहीं लिया, जिम्मेदारी शिक्षकों पर डाल दी है। चूंकि आदेश को अभी 10-12 दिन ही हुए हैं, चारा कलेक्शन के प्रयोग का नतीजा सामने नहीं आया है। कहीं सफल हो गया तो क्या पता उस अभियान को मॉडल समझकर यहां भी लागू कर दिया जाए।

वीरू की शपथ में जय-वीरू दोनों

कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व सीएम भूपेश बघेल और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव शामिल हुए। दोनों नेताओं के शिवकुमार से अच्छे संबंध रहे हैं और दोनों ही चाहते थे कि उन्हें सीएम बनाया जाए। बताते हैं कि दोनों ने अपने-अपने स्तर पर पार्टी हाईकमान से भी शिवकुमार के पक्ष में पैरवी की थी।

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि कर्नाटक में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई साल सीएम पद का फॉर्मूला तय हुआ था। सिद्धारमैया को पहले ढाई साल मुख्यमंत्री रहने का अवसर मिला, लेकिन कार्यकाल पूरा होने के बाद वे पद छोडऩे के पक्ष में नहीं थे। अधिकांश विधायकों का समर्थन भी उनके साथ था, जिससे हाईकमान असमंजस की स्थिति में था।

कहा जाता है कि डीके शिवकुमार अपने दावे से पीछे हटने को तैयार नहीं थे। पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव, जो स्वयं छत्तीसगढ़ में ढाई-ढाई साल के फार्मूले को लागू नहीं करवा पाए थे, उन्होंने भी शिवकुमार के समर्थन में हाईकमान से चर्चा की थी। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने भी करीब तीन माह पहले डीके शिवकुमार की मुलाकात कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी से करवाई थी। उस समय छत्तीसगढ़ के पार्टी के जिला अध्यक्ष भी प्रियंका गांधी से मिलने के लिए बाहर प्रतीक्षा कर रहे थे। बाद में भूपेश बघेल ने जिला अध्यक्षों की भी प्रियंका गांधी से मुलाकात करवाई।

दूसरी ओर, शिवकुमार के छत्तीसगढ़ के नेताओं से पुराने और मधुर संबंध रहे हैं। कम लोगों को यह जानकारी है कि वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव परिणाम आने से पहले नवनिर्वाचित विधायकों को बेंगलुरु शिफ्ट करने पर भी विचार हुआ था। उनके ठहरने की व्यवस्था शिवकुमार के रिसॉर्ट में किए जाने की चर्चा थी। पार्टी रणनीतिकारों को आशंका थी कि मामूली बहुमत की स्थिति में विधायक दल में तोडफ़ोड़ की कोशिश हो सकती है। हालांकि कांग्रेस को भारी बहुमत मिलने के कारण ऐसी नौबत नहीं आई। तभी से छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेताओं के बीच शिवकुमार के प्रति विशेष सम्मान का भाव बना हुआ है।

सुशासन तिहार, खाद की चुनौती

प्रदेश में इन दिनों सुशासन तिहार के तहत जनसमस्या निवारण शिविर लगाए जा रहे हैं। शिविरों में मौके पर ही समस्याओं के निराकरण का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इस बार कई स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिल रहा है। इसकी प्रमुख वजह स्थानीय समस्याएं नहीं, बल्कि खाद और बीज की कमी बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, अब तक करीब दर्जनभर जनसमस्या निवारण शिविरों में शोर-शराबा और हंगामे की स्थिति बन चुकी है। इससे शिविरों की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी और कर्मचारी भी दबाव महसूस कर रहे हैं।

बिलासपुर जिले के बिल्हा में आयोजित एक शिविर के दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक और कांग्रेस नेता राजेन्द्र शुक्ला आमने-सामने आ गए। राजेन्द्र शुक्ला खाद की कमी को लेकर शिकायत दर्ज कराने पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई और मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। दोनों पक्षों के बीच जमकर वाकयुद्ध भी हुआ।

इसी प्रकार गरियाबंद, दुर्ग सहित कई अन्य स्थानों पर भी खाद की कमी को लेकर कांग्रेस नेताओं ने शिविरों में विरोध दर्ज कराया है। खाद संकट के कारण किसानों में नाराजगी है और कांग्रेस नेता इस असंतोष को मुखर रूप से सामने ला रहे हैं। जनसमस्या निवारण शिविर 10 जून तक चलेंगे। ऐसे में तब तक अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव बने रहने के आसार हैं।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780662558attle.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15387&amp;path_article=7</guid><pubDate>05-Jun-2026 5:59 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 5 जून 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15386&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15386&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780657558av-Kav_5_Jun_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15386&amp;path_article=2</guid><pubDate>05-Jun-2026 4:35 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 5 जून 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15385&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15385&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780657465eewar_05_June_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15385&amp;path_article=1</guid><pubDate>05-Jun-2026 4:34 PM</pubDate></item><item><title>राजपथ-जनपथ : उपचुनाव में भाजपा-कांग्रेस का प्रदर्शन</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15384&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15384&amp;path_article=7 ]]></link><description>उपचुनाव में भाजपा-कांग्रेस का प्रदर्शन

नगरीय निकाय उपचुनाव में कांग्रेस को अपेक्षाकृत सफलता नहीं मिल पाई। पार्टी पांच में से केवल दो नगर पंचायतों के अध्यक्ष पद जीतने में सफल रही, जबकि भाजपा के तीन नगर पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं। कांग्रेस को उपचुनाव में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। वजह ये है कि पांच में से चार नगर पंचायत, पहले ग्राम पंचायत थी, और वहां कांग्रेस समर्थित सरपंच चुने जाते रहे हैं। मगर नगर पंचायत बनने के बाद चुनाव में स्थिति थोड़ी बदल गई। फिर भी नगरीय निकाय आम चुनाव की तुलना में कांग्रेस का प्रदर्शन संतोषजनक कहा जा सकता है। नगरीय निकाय आम चुनाव में कांग्रेस को बुरी हार का सामना करना पड़ा।

निकाय उपचुनाव में डिप्टी सीएम विजय शर्मा और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की प्रतिष्ठा भी दांव पर थी। इसके अलावा महिला कांग्रेस की अध्यक्ष संगीता सिन्हा, और कांग्रेस विधायक श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल, और बालेश्वर साहू की भी परीक्षा की घड़ी थी।

नगर पंचायतों में कांग्रेस को घुमका और पलारी में जीत हासिल हुई, जबकि भाजपा ने सहसपुर-लोहारा, शिवनंदनपुर और बम्हनीडीह में कब्जा जमाया। सहसपुर-लोहारा नगर पंचायत उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के विधानसभा क्षेत्र कवर्धा में आता है। यहां भाजपा अपना कब्जा बरकरार रखने में सफल रही।

दूसरी तरफ,महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विधानसभा क्षेत्र भटगांव के शिवनंदनपुर नगर पंचायत में भाजपा को उल्लेखनीय सफलता मिली है। शिवनंदनपुर पहले ग्राम पंचायत था और नगर पंचायत बनने के बाद यहां पहली बार चुनाव हुए। यह क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता पर आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बाद यहां भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था। पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज अनशन पर बैठ गए थे। प्रशासन को कांग्रेस नेताओं की मांगें माननी पड़ी थीं।

कांग्रेस के आक्रामक रुख के कारण यहां का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया था। तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी चुनाव हार गए और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने में सफल रहीं। हालांकि यहां कांग्रेस के अधिक पार्षद निर्वाचित हुए हैं।

इसके अलावा बालोद जिले की पलारी नगर पंचायत में महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक संगीता सिन्हा के समर्थक यानेश साहू चुनाव जीतने में सफल रहे। इसी तरह डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र की घुमका नगर पंचायत में कांग्रेस की अध्यक्ष प्रत्याशी श्रीमती फुलवती वर्मा को जीत मिली। इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल करती हैं।

इसके अलावा जांजगीर-चांपा जिले की बम्हनीडीह नगर पंचायत में भाजपा के प्रत्याशी रूपेश डड़सेना करीब 850 वोटों से जीतने में सफल रहे। बम्हनीडीह जैजैपुर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। जैजैपुर से कांग्रेस के बालेश्वर साहू विधायक हैं, जो पिछले दिनों काफी विवादों में रहे हैं और उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज हुआ था।

एल्डरमैन, दिन-महीने-साल घट रहे

मनोनीत पार्षदों (एल्डरमैन) की नियुक्ति को लेकर भाजपा भी पिछली कांग्रेस सरकार की तर्ज पर काम कर रही है। निर्वाचित निकायों में चुनाव हुए 15 माह बीत गए हैं लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं की जा सकी है। कांग्रेस की बघेल सरकार ने भी 2021-22 में नियुक्तियां की थी और 23 में विधानसभा चुनाव में सरकार बदलने के बाद कांग्रेस के सभी एल्डरमैन की नियुक्ति रद्द कर दी गईं थीं।

निकाय चुनाव में भारी बहुमत के बाद मेहनती कार्यकर्ताओं को उपकृत करने वाली इन नियुक्ति न होने से फील्ड का कार्यकर्ता नाराज है। देरी का कारण पूछने पर डिप्टी सीएम नगरीय प्रशासन अरुण साव ने दो दिन पहले ही कहा कि प्रक्रिया चल रही है।

एल्डरमैन पद के लिए पार्टी उन्हीं को तरजीह देती है जो दावेदारी के बाद भी टिकट न मिलने पर विरोध नहीं करते, चुनाव में अच्छी मेहनत से काम किया हो और बड़े नेताओं के शागिर्द हों। यह एक तरह से मनोनीत सांसदों की तरह राजनीति की पहली सीढ़ी में बिना चुनाव लड़े सरकारी पद पाने जैसा है।

प्रदेश के 194 निकायों में करीब 700 एल्डरमैन नियुक्त किए जाने हैं। इनमें 14 निगमों में 5 से 11, 56 पालिकाओं में 6-6, और 124 नगर पंचायतों में 4-4 एल्डरमैन नियुक्त किए जाने हैं। इस महीने नियुक्ति हो जाती है तो इन्हें 2028 तक ढाई साल का कार्यकाल मिलेगा। वर्ना जितनी देर होगी उतने दिन महीने साल कम होते जाएंगे। निगमों के इन एल्डरमैन को हर माह 75 सौ रू मानदेय, 1.50 लाख तक की पार्षद निधि में से बोनस अलग मिलता है। वहीं पालिका और पंचायतों के एल्डरमैन को केवल 2500 रुपए मानदेय। जहां तक इनके अधिकारों की बात है तो निगम एक्ट के तहत एल्डरमैन को नगर निगम-पालिका की सामान्य बैठकों और सत्रों में भाग लेने, चर्चा करने और अपने सुझाव रखने का पूरा अधिकार होता है। इन्हें निर्वाचित पार्षदों की तरह ही प्रश्नकाल के दौरान सदन में सवाल पूछने का अधिकार होता है। एल्डरमैन विभिन्न निगम समितियों के सदस्य बन सकते हैं । वैसे बता दें कि छत्तीसगढ़ की तरह मप्र में भी इनकी नियुक्ति में देरी की गई। वहां मार्च अंत में की गई थी। यहां भी अगले कुछ दिनों में नियुक्ति के संकेत हैं।

स्वास्थ्य सेवा की हकीकत

कोंडागांव जिले के केशकाल में डॉक्टर शैलेंद्र भोयर शराब के नशे में ड्यूटी पर थे। लाचार मरीज उनको इस हालत में देखकर भी इलाज कराना चाह रहे थे लेकिन वे मना कर रहे थे। विरोध करने पर उन्होंने न केवल मरीज और उनके परिजनों से दुर्व्यहार किया बल्कि खबर लेने के लिए पहुंचे पत्रकारों के साथ भी हाथापाई की।

बस्तर संभाग के जिले हों या सरगुजा के दूरस्थ आदिवासी इलाके। यहां स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट राज्य बनने के 26 साल बाद भी बना हुआ है। डॉक्टर इन स्थानों पर पोस्टिंग से बचते हैं, तबादला करा लेते हैं, जिनका तबादला नहीं रुक पाता वे अस्पताल से गायब रहते हैं और जो डॉक्टर पहुंच रहे हैं, उनमें से कई भोयर की तरह। कुल मिलाकर इन इलाकों में मरीज भगवान भरोसे है। इस स्थिति में सुधार के लिए कोई इच्छा शक्ति भी जिम्मेदारों में नहीं दिखती। हर पंद्रह दिन, महीने भर में लचर स्वास्थ्य सेवाओं की खबरें आती हैं, पर हर एक मामले को अलग-अलग करके देखा जाता है और उसी पर कार्रवाई कर बताने की कोशिश की जाती है कि सब ठीक चल रहा है। गर्भाशय कांड, अंखफोड़वा कांड, नसबंदी कांड सब छत्तीसगढ़ के खाते में दर्ज हैं। कुपोषण, एनीमिया, मलेरिया और डायरिया से इन इलाकों में होने वाली मौतों पर भी कोई नियंत्रण नहीं हो पाया है। इन दिनों खरीदी और आउटसोर्सिंग की नियुक्तियों में भ्रष्टाचार की खबरें रह-रह कर बाहर आ रही हैं।

सन् 2024 में आई कैग की रिपोर्ट में बताया गया था कि छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों की भारी कमी है, दवाओं की खरीद अनियमित तरीके से हो रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर की हालत खस्ता है। बस्तर संभाग को लेकर इस रिपोर्ट में बताया गया था कि स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के 93 प्रतिशत पद खाली हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि आदिवासी इलाकों में एनीमिया की दर 70 से 80 प्रतिशत तक है। प्रसव संबंधी जटिलताएं आम बात है। अस्पताल पहुंचने के लिए लोगों को कई-कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। किसी भी पार्टी की सरकार हो, विशेषज्ञ डॉक्टर बस्तर से जल्दी से जल्दी निकालकर राजधानी आ जाना चाहते हैं, और फिर किसी प्रशासनिक कुर्सी पर लपकते हैं। राज्य के 25 बरस हो गए हैं, लेकिन पोस्टिंग और ट्रांसफर में राजनीतिक दखल कभी कम ही नहीं हुई।

एक सरकार ने ऐसी मशीनें खऱीद लीं जिनको चलाने के लिए भी कंपनी का मोहताज रहना रहता है, तो ये मशीनें अगली सरकार की छाती पर भी बोझ बनी रहती हैं।

दरअसल, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी दूसरे इंफ्राक्ट्रचर से जुड़े हुए हैं। दूरस्थ गांवों तक अब तक पक्की सडक़ें नहीं हैं। उनके लिए बेहतर आवास, स्कूल और सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। इन सबको वे बर्दाश्त भी कर लें अगर वेतन के साथ अच्छा इंसेंटिव भी दिया जाए, पर वह भी नहीं है। शीर्ष पर बैठे अफसरों को पता है कि ज्यादा कठोर कार्रवाई करने पर, जो स्टाफ अभी अस्पतालों में दिख रहे हैं, वे भी आगे काम करने से कतराएंगे। इसलिये ज्यादातर शिकायतों में शुरुआती निलंबन और नोटिस जैसी कार्रवाई तो की जाती है पर आगे रफा-दफा कर दिया जाता है।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780577093hadhi_Chauk_NEW_1.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15384&amp;path_article=7</guid><pubDate>04-Jun-2026 6:14 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 4 जून 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15383&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15383&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780576268av-Kav_4_Jun_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15383&amp;path_article=2</guid><pubDate>04-Jun-2026 6:01 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 4 जून 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15382&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15382&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780576175eewar_04_June_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15382&amp;path_article=1</guid><pubDate>04-Jun-2026 5:59 PM</pubDate></item><item><title>फन कॉर्नर</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15381&amp;path_article=10</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15381&amp;path_article=10 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780498213un_corner.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15381&amp;path_article=10</guid><pubDate>03-Jun-2026 8:20 PM</pubDate></item><item><title>राजपथ-जनपथ : एक और रस्म निभाई साइकिल ने</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15380&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15380&amp;path_article=7 ]]></link><description>एक और रस्म निभाई साइकिल ने

विश्व साइकिल दिवस के मौके पर आज जगह-जगह साइकिल रैलियां निकाली गई। चूंकि कलेक्टर, एसपी और बड़े प्रशासनिक अधिकारी उनमें शामिल हुए, सडक़ें खाली रखी गईं और वाहनों को रैली के दौरान डायवर्ट किया गया। इसका मतलब यह है कि सडक़ों पर साइकिलों को तभी दौड़ाया जा सकता है, जब दूसरी गाडिय़ों का दबाव नहीं हों, वरना साइकिल चलाना खतरे से खाली नहीं है।

इस बार जब पश्चिम एशिया में युद्ध के हालात बनने के बाद पेट्रोल-डीजल का संकट आया तो गाडिय़ों का काफिला कम करने के अलावा साइकिल पर चलने का संदेश दिया गया। नेताओं और अफसरों ने कम से कम एक दिन साइकिल से दफ्तर जाकर इस रस्म को पूरा किया, तस्वीरें खिंचाई और पेट्रोल-डीजल बचाने का संदेश दिया। मगर, उसके बाद लोगों ने देखा कि फिर गाडिय़ों का काफिला निकल पड़ा है। ऐसे में याद आती है स्मार्ट सिटी मिशन के तहत पब्लिक बाइसिकल शेयरिंग योजना। छत्तीसगढ़ में तीन शहरों बिलासपुर, रायपुर और नवा रायपुर को स्मार्ट सिटी के अंतर्गत लिया गया था। बिलासपुर में इस योजना पर 68 लाख रुपये खर्च किए गए। रायपुर में इससे अधिक। योजना का उद्देश्य यह बताया गया था कि शहरों में ट्रैफिक कम किया जा सकेगा, प्रदूषण कम होगा, आटो-रिक्शा, बस या टैक्सी का किराया बचेगा। रायपुर और बिलासपुर में जितनी तेजी से यह योजना लाई गई। तेजी साइकिल रखने के स्थल के निर्माण में और साइकिलों की खरीदी में थी- उतनी ही तेजी से यह धूल खाने लगी। कोई रखरखाव नहीं हुआ, उपयोग करने वाले भी नहीं मिले। स्मार्ट सिटी योजना ज्यादातर शहरों में अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाई है। इनमें साइकिल वाली योजना तो स्मारक की तरह हो गई। दो चार मुख्य सडक़ों को छोड़ दें तो बाकी की हालत खराब है। कार, आटो रिक्शा में इन गड्ढों से मिलने वाले हिचकोलों को तो बर्दाश्त किया जा सकता है पर साइकिल चलाते वक्त ऐसा मुश्किल है। शहर के प्रमुख स्थानों, जैसे जय स्तंभ या नेहरू चौक से स्टेशन को जोडऩे वाली सडक़ में साइकिल चलाना जोखिम भरा काम है। लोगों से बात करने पर मालूम होता है कि साइकिल के लिए सडक़ों पर कोई ट्रैक ही नहीं। जहां बने हैं, वहां गाडिय़ां या ठेले पार्क किए गए हैं। जिन साइकिलों को बीच चौराहे पर सजाकर रख दिया गया, उसके पार्ट्स गायब हो गए। धूप-पानी में धूल में वे खराब होते गए-उनकी सुरक्षा के लिए किसी को तैनात नहीं किया गया। स्मार्ट सिटी के अफसरों की दिलचस्पी केवल योजनाओं पर खर्च करने में दिखी, लेकिन रखरखाव पर नहीं, जमीन पर योजना लागू हों, इसके प्रयास नहीं किए गए। प्रधानमंत्री की अपील के बाद अफसरों ने एक दो दिन दफ्तर जाने के लिए साइकिलों का इस्तेमाल किया लेकिन स्मार्ट सिटी की साइकिलों को चलन में लाने के लिए उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। इसे गरीबों की गाड़ी मानने की मानसिकता को बदलने में उनकी भूमिका हो सकती थी, जन प्रतिनिधियों की भी हो सकती थी। तो, फिलहाल दोनों जगह रायपुर और बिलासपुर में ये योजनाएं बंद हो चुकी हैं। लोग शहर और आसपास के इलाकों में आने-जाने के लिए सस्ते विकल्प की तलाश कर रहे हैं, मगर सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की गति भी धीमी है। लंबे समय से इलेक्ट्रिक सिटी बसों की योजना की बात हो रही है पर वह जमीन पर नहीं उतर पाई है। वैसे देश के कुछ शहरों में साइकिल की ये योजनाएं संतोषजनक तरीके से काम कर रही हैं। भोपाल में करीब 500 साइकिलों का रोजाना उपयोग हो रहा है। इसके लिए ट्रैक सिटी बस के रास्ते के बगल में बनाए गए हैं। मैसूर ऐसा शहर है जहां सबसे पहले पब्लिक बाइसिकल शेयरिंग का अच्छा परिणाम देखने को मिला। पुणे के कुछ इलाकों में यह योजना ठीक तरह से काम कर रही है। चंडीगढ़, सूरत, रांची में भी कुछ हद तक सफलता मिली है। इनमें से ज्यादातर स्मार्ट सिटी ही हैं। नीदरलैंड का एम्स्टर्डम, चीन के शहर शंघाई और बीजिंग, फ्रांस की राजधानी पेरिस, अमेरिका के न्यूयॉर्क और यूके के लंदन में बहुत सालों से साइकिल के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हैं और कामयाब हैं। साइकिल चालकों के लिए डेडिकेटेड लेन है। साइकिल ट्रैक व साइकिलों का अच्छा रखरखाव है और वे अतिक्रमण मुक्त हैं। भारी वाहनों को साइकिल वालों के लिए रास्ता छोडऩा पड़ता है। इनमें से कई देश ऐसे हैं जहां पेट्रोल डीजल का संकट भी नहीं है।

छोटे चुनाव को लेकर हलचल तेज

नगरीय निकाय और पंचायत उपचुनाव के नतीजे गुरुवार को घोषित किए जाएंगे। पंचायतों में मतगणना पूरी हो चुकी है और चुनाव परिणामों का औपचारिक ऐलान निकायों के नतीजों के साथ किया जाएगा। दुर्ग जिले के पाटन में जनपद सदस्य की रिक्त सीट के लिए हुई मतगणना में भाजपा को झटका लगने के संकेत मिले हैं।

प्रदेश में जनपद सदस्य के 10 रिक्त पदों के लिए चुनाव हुए थे। मतदान के तुरंत बाद पंचायतों में मतगणना शुरू हो गई थी और देर रात तक गिनती पूरी कर ली गई। हालांकि अधिकृत नतीजे गुरुवार को घोषित किए जाएंगे। जनपद सदस्य के चुनावों में पड़ोसी दुर्ग जिले के पाटन की एक सीट को लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता रही। चुनाव भले ही दलीय आधार पर नहीं हुआ, लेकिन कांग्रेस और भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। यहां कांग्रेस की उर्वशी साहू, भाजपा समर्थित सुरेन्द्र साहू और छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के भूपेंद्र साहू मैदान में थे। भाजपा समर्थित प्रत्याशी के प्रचार में सरकार के मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और जिले के कई बड़े पदाधिकारी सक्रिय थे। इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी उर्वशी साहू ने एक हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की है। छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के भूपेंद्र साहू दूसरे स्थान पर रहे। हालांकि उर्वशी के पति शैलेश साहू जनपद सदस्य थे। उनके निधन के रिक्त सीट पर चुनाव हुए, और कहा जा रहा कि पत्नी उर्वशी के पक्ष में सहानुभूति का माहौल था। अन्य जनपदों में मिले-जुले नतीजे सामने आए हैं।

अब निगाहें नगरीय निकाय अध्यक्ष पदों के नतीजों पर टिकी हुई हैं। इस छोटे चुनाव के नतीजों के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो सकती है। देखना है आगे क्या कुछ होता है।

निलंबित सीईओ के तेवर

दुर्ग जिले में पिछले दिनों जनसमस्या निवारण शिविर में विधायक ललित चंद्राकर की मौजूदगी में भाजपा मंडल अध्यक्ष के साथ दुर्व्यवहार पर जनपद सीईओ रूपेश पांडेय को निलंबित कर दिया गया। पांडेय के तेवर काफी चर्चा में रहे। उनके खिलाफ विभागीय जांच की तैयारी चल रही है।

यह बात उभरकर सामने आई कि जनपद सीईओ रूपेश पांडेय ने आज तक पदोन्नति नहीं ली है, जबकि उनके बैचमेट पंचायत विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर तक पहुंच चुके हैं। निलंबन के बाद पांडेय ने पूर्व सीएम भूपेश बघेल से पूर्व विधायक अरुण वोरा के निवास पर मुलाकात की।

भूपेश, पूर्व विधायक अरुण वोरा की माता से मिलने उनके निवास गए थे।

निलंबित जनपद सीईओ ने पूर्व सीएम से कुछ देर चर्चा भी की। इसका वीडियो भी वायरल हुआ है। जनपद सीईओ पांडेय निलंबन को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। सरकार उन पर कड़ी कार्रवाई कर सकती है। देखना है आगे क्या कुछ होता है।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780491186okhan-Sahu-CYCLE.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15380&amp;path_article=7</guid><pubDate>03-Jun-2026 6:23 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 3 जून 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15379&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15379&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780490040av-Kav_3_Jun_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15379&amp;path_article=2</guid><pubDate>03-Jun-2026 6:04 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 3 जून 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15378&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15378&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780489895eewar_03_June_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15378&amp;path_article=1</guid><pubDate>03-Jun-2026 6:01 PM</pubDate></item><item><title> इतिहास में 3 जून</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15377&amp;path_article=5</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15377&amp;path_article=5 ]]></link><description>तीन जून : लॉर्ड माउंटबेटन ने किया भारत के बंटवारे का ऐलान

नयी दिल्ली, 3 जून। तीन जून का दिन भारत के इतिहास और भूगोल को बदलने वाले दिन के तौर पर इतिहास में दर्ज है। वर्ष 1947 में आज ही के दिन ब्रिटिश राज में भारत के अंतिम वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन ने देश के बंटवारे का ऐलान किया था।

भारत के बंटवारे की इस घटना को तीन जून योजना या माउंटबेटन योजना के तौर पर जाना जाता है। देश में दंगे हो रहे थे और केंद्र में कांग्रेस की अंतरिम सरकार हालात को काबू में नहीं कर पा रही थी, क्योंकि कानून एवं व्यवस्था का मामला प्रांतों के पास था। लिहाजा, राजनीतिक और सांप्रदायिक गतिरोध को खत्म करने के लिए तीन जून योजना आई जिसमें भारत के विभाजन और भारत तथा पाकिस्तान को सत्ता के हस्तांतरण का विवरण था।

देश दुनिया के इतिहास में तीन जून की तारीख पर दर्ज अन्य प्रमुख घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-


	1867 : भारत के प्रसिद्ध शिक्षाविद, राजनेता, समाज सुधारक, न्यायविद और लेखक हरविलास शारदा का जन्म।
	1901 : ज्ञानपीठ पुरस्कार के प्रथम विजेता महाकवि जी शंकर कुरूप का जन्म।
	1915 : ब्रिटिश सरकार ने रवींद्रनाथ टैगोर को नाइटहुड की उपाधि से नवाजा।
	1918 : महात्मा गांधी की अध्यक्षता में इंदौर में हिन्दी साहित्य सम्मेलन का आयोजन।
	1924 : तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे एम करुणानिधि का जन्म।
	1930 : पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का जन्म।
	1943 : संयुक्त राष्ट्र संघ ने राहत और पुनर्वास प्रशासन की स्थापना की।
	1947 : ब्रिटिश राज में भारत के आखिरी वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत के बंटवारे का ऐलान किया।
	1959 : सिंगापुर को सेल्फ गवर्निंग स्टेट घोषित किया गया।
	1972 : देश के पहले आधुनिक युद्धपोत नीलगिरि को देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जलावतरित किया।
	1974: स्वतंत्रता सेनानी कृष्ण बल्लभ सहाय का निधन।
	1985 : भारत सरकार ने पांच दिन का कार्य दिवस सप्ताह शुरू किया।
	1999 : हावरक्राफ़्ट विमानों के आविष्कारक क्रिस्टोफ़र काकरैल का निधन।
	2005 : फ्रांस ने सुरक्षा परिषद में भारत की दावेदारी का समर्थन दोहराया।
	2014 : पूर्व केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे का सड़क हादसे में निधन।
	2019 : सूडान के सैन्य शासकों ने सेना मुख्यालय के बाहर कई सप्ताह से धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए गोलीबारी की जिसमें 30 प्रदर्शनकारी मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए।
	2020 : मशहूर गीतकार अनवर सागर का 70 वर्ष की उम्र में निधन। अनवर ने 80 और 90 के दशक की कई फिल्मों के गीत लिखे, जिनमें डेविड धवन की याराना, जैकी श्रॉफ की सपने साजन के, खिलाड़ी, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, अजय देवगन की विजयपथ समेत कई फिल्में शामिल हैं।
	2024 : पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा के बाहर संजादी कोयला खदान में दम घुटने से 11 श्रमिकों की मौत। इसी दिन मेक्सिको में क्लॉडिया शीनबाम देश की पहली महिला राष्ट्रपति निर्वाचित।
	2025 : नाइजीरिया के बेन्यू राज्य में कई समुदायों पर हमलों में 20 लोगों की मौत।(भाषा)

</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780468373ownload_-_2026-06-03T120755.682.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15377&amp;path_article=5</guid><pubDate>03-Jun-2026 12:02 PM</pubDate></item><item><title>राजपथ-जनपथ : दिग्गजों के दिल्ली से हलचल</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15376&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15376&amp;path_article=7 ]]></link><description>दिग्गजों के दिल्ली से हलचल

प्रदेश भाजपा के अंदरखाने में हलचल है। बताते हैं कि हाईकमान के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, क्षेत्रीय महामंत्री अजय जम्वाल और महामंत्री (संगठन) पवन साय दिल्ली गए हैं।

तीनों नेताओं की राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष और राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री शिवप्रकाश से चर्चा की खबर है।

दरअसल, भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन होना है। ऐसे में प्रदेश के तीनों नेताओं की हाईकमान से चर्चा के मायने तलाशे जा रहे हैं। प्रदेश संगठन में तमाम नियुक्तियां हो चुकी हैं।

अब निगम-मंडलों में कुछ और नियुक्तियां होनी हैं, लेकिन इसकी ज्यादा चर्चा नहीं है। अलबत्ता, राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए उपयुक्त नामों पर चर्चा की खबर है।

एक खबर यह है कि प्रदेश से राष्ट्रीय महामंत्री अथवा कोषाध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त नामों पर चर्चा हो सकती है। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। वे पिछले छह साल से पार्टी का कोष संभाल रहे हैं। अब उनके काफी सीनियर होने की वजह से नए कोषाध्यक्ष की तलाश किए जाने की चर्चा है। छत्तीसगढ़ में कोष प्रबंधन से जुड़े नेताओं पर हाईकमान की नजर है। देखना है कि हाईकमान प्रदेश के नेताओं को क्या जिम्मेदारी सौंपता है।

नक्सली आजाद, सहयोगी जेल में



जब नक्सलवाद के खिलाफ सरकार ने सफलता हासिल कर ली है, तब इसके कई परोक्ष प्रभावों पर नीतिगत फैसला जल्दी लेने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ में जिन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, वे खुली हवा में सांस ले रहे हैं, पुनर्वास पैकेज और योजनाओं का लाभ उठाने लगे हैं, पर हजारों की संख्या में वे लोग जेलों में बंद हैं, जिन पर इनका सहयोग करने का आरोप है।

बस्तर संभाग की जेलों में बंद बड़ी संख्या उन आदिवासियों की है जिन पर नक्सलियों की मदद करने, उन्हें भोजन देने, रास्ता बताने या अन्य किसी तरीके के सहयोग का आरोप है। दूसरी ओर, नक्सलियों के कई समूह, संगठन छोडक़र मुख्यधारा में लौट चुके हैं। उन्हें पुनर्वास योजनाओं का लाभ मिल रहा है, आर्थिक सहायता दी जा रही है, कौशल प्रशिक्षण और समाज में फिर से जगह बनाने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उठता है कि यदि हथियार उठाने वाले लोगों को मौका मिल सकता है, तो केवल सहयोग के आरोप में जेलों में बंद आदिवासियों के लिए ऐसा क्यों नहीं सोचा जा रहा है?

राज्य की जेलों में 16 हजार से अधिक आदिवासी बंद हैं, जिनमें पांच हजार से ज्यादा पर नक्सलवाद से जुड़े होने के आरोप हैं। ज्यादातर मामलों में आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं और विचाराधीन कैदी बने हुए हैं। कई मामले 10-10 साल से लंबित हैं।

पूर्ववर्ती सरकार ने सन् 2019 में न्यायमूर्ति ए. के. पटनायक की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर सैकड़ों मामलों को वापस लिया गया और एक हजार से अधिक आदिवासियों को राहत मिली। गंभीर अपराधों, जैसे हत्या और हत्या के प्रयास, के मामलों को अलग रखा गया, जबकि अपेक्षाकृत मामूली आरोपों वाले मामलों में छोड़ दिया गया, हालांकि वह पहल भी पर्याप्त नहीं थी, लेकिन इससे इच्छाशक्ति तो साबित हुई ही थी। उसके बाद से अब तक कोई व्यापक समीक्षा अभियान दिखाई नहीं दे रहा है। नक्सलवाद से बस्तर को मुक्त करने के लिए निर्णायक लड़ाई शुरू की गई तब भी इस पहलू की तरफ ध्यान किसी ने नहीं दिया।

जेलों में बंद ज्यादातर आदिवासी आर्थिक संसाधनों की कमी, कानूनी सहायता के अभाव, जमानत के लिए जरूरी शर्तें पूरी न कर पाने की समस्या से घिरे हैं। लंबे समय से जेलों में बंद होने के कारण उनके परिवारों को गरीबी, मानसिक तनाव और सामाजिक अलगाव को बस महसूस ही किया जा सकता है। अब जब नक्सलवाद खत्म हो चुका है, सरकार चाहे तो मामलों की समीक्षा कर सकती है और मामलों मुकदमों की स्थिति का परीक्षण कर उन्हें वापस लेने की अदालतों से सिफारिश भी कर सकती है। बस्तर में न्याय, विकास और विश्वास बहाली के लिए प्रशासन नए सिरे से जुट गया है। बहुत से कार्य तेजी से चल रहे हैं, जो आज तक नक्सलियों की खौफ के चलते नहीं हो पाए। ऐसे में सवाल बना हुआ है कि क्या न्याय का तराजू संतुलित है?

अब ट्रेनें लेट लतीफ नहीं कहलाएंगी...



जल्द ही रेलवे वीआईपी कहे जाने वाली मेल, राजधानी, वंदे भारत जैसी ट्रेनों को लाइन क्लीयर देने सामान्य यात्री ट्रेनों को रोकना बंद करेगा।इन प्रीमियम ट्रेनों को समूह में एक के पीछे एक चलाने टाइम टेबल में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। इसे कंबाइंड स्लॉट आपरेशन कहा जा रहा है।

रायपुर रेल मंडल के लोको पायलट्स ने बताया इसके लिए टाइम स्लॉट पर मंथन जारी है। ऐसा देश भर में बढ़ती तीसरी रेल लाइन के आपरेशन और नान इंटरलाकिंग सिग्नलिंग की वजह से संभव हो पा रहा है।अभी ऐसी वीआईपी ट्रेनों को रास्ता देने सामान्य ट्रेनों को लूप लाइन या बीच के किसी स्टेशन पर रोक दिया जाता है। इससे आम पैसेंजर ट्रेन तय समय पर गंतव्य पर नहीं पहुंच पातीं। इन ट्रेनों के यात्रियों को भी राइट टाइम पहुंच देने की योजना बनाई जा रही है।

नई व्यवस्था के तहत दोनों श्रेणियों की ट्रेनों का समय ऐसे व्यवस्थित किया जाएगा कि वे एक-दूसरे के रास्ते में बाधा न बनें। दोनों को निर्धारित समयांतर पर चलाया जाएगा।

रेलवे की समय सारिणी में अभी वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी जैसी ट्रेनों को प्राथमिकता में है । रेल बोर्ड के नए प्रस्ताव के मुताबिक ऐसी प्रीमियम ट्रेनों को समूह कंबाइंड स्लॉट में चलाया जाएगा। इससे वीआईपी ट्रेन निर्बाध दौड़ेंगी, जबकि आम पैसेंजर , लोकल शटल ट्रेन के लेट होने का समय भी घटकर 10 मिनट तक किया जा रहा है।

130-160 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार वाली वंदेभारत , राजधानी जैसी इन प्रीमियम ट्रेनों को पांच से 10 मिनट के अंतराल (सेफ्टी गैप) पर चलाया जाएगा। 110 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति वाली ट्रेनों को दूसरे स्लॉट में चलाया जाएगा। समान गति पर यह ट्रेन पूरे रास्ते आगे-पीछे चलेंगी। इससे किसी ट्रेन को लूप लाइन पर खड़ा नहीं होना पड़ेगा। नागपुर-हावड़ा मार्ग पर

अभी रोजाना औसतन 110- 120 से अधिक ट्रेनें चलती हैं। इससे पैसेंजर ट्रेन अमूमन 15-20 मिनट लेट चलती है जबकि लंबी दूरी की ट्रेनें 45 मिनट से 1 घंटे देर से। अब आने वाले दिनों में लेट लतीफ नहीं कहा जा सकेगा।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780403101hadhi_Chauk_NEW_1.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15376&amp;path_article=7</guid><pubDate>02-Jun-2026 5:55 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 2 जून 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15375&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15375&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780399211eewar_02_June_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15375&amp;path_article=1</guid><pubDate>02-Jun-2026 4:50 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 2 जून 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15374&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15374&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780399120av-Kav_2_Jun_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15374&amp;path_article=2</guid><pubDate>02-Jun-2026 4:48 PM</pubDate></item><item><title>राजपथ-जनपथ : कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्षों की चर्चा</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15373&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15373&amp;path_article=7 ]]></link><description>कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्षों की चर्चा

चर्चा है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ तीन कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति हो सकती है। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल 10 जून को पूरा हो रहा है। कहा जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस में नियुक्तियां गोवा मॉडल की तर्ज पर की जा सकती हैं और इस पर पार्टी स्तर पर मंथन चल रहा है।

हाल ही में गोवा प्रदेश कांग्रेस में अध्यक्ष के साथ तीन कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। इनमें एम.के. शेख, अल्टोन डीकोस्टा और एडवोकेट कार्लोस अल्वारेस फेरिएरा शामिल हैं। इसके अलावा प्रचार समिति, घोषणा पत्र समिति और कोषाध्यक्ष पद पर भी नियुक्तियां की गई हैं। चर्चा है कि छत्तीसगढ़ में भी कुछ इसी तरह का संगठनात्मक ढांचा बनाया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में पहले भी कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जा चुके हैं। वर्ष 2018 में भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन मरकाम को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन उनके कार्यकाल में कार्यकारी अध्यक्ष नहीं बनाए गए। दीपक बैज के कार्यकाल में भी कोई कार्यकारी अध्यक्ष नहीं है। अब फिर से कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति की चर्चा है और इसमें सामाजिक तथा क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखा जा सकता है। माना जा रहा है कि यदि अध्यक्ष सामान्य वर्ग से होता है तो कार्यकारी अध्यक्षों में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।

खबर यह भी है कि प्रदेश कांग्रेस में कोषाध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त नाम की तलाश चल रही है। मौजूदा कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल फरार चल रहे हैं। ऐसे में कुछ कारोबारी पृष्ठभूमि वाले कांग्रेस नेताओं से भी चर्चा किए जाने की खबर है, लेकिन कुछ ने तो अनिच्छा जाहिर कर दी है।

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि नए कोषाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद ईडी उनसे पुराने संगठनात्मक और वित्तीय दस्तावेजों के संबंध में जानकारी मांगी जा सकती है। यही वजह है कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी नेता इस जिम्मेदारी को लेने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रदेश कांग्रेस का नया संगठनात्मक ढांचा किस रूप में सामने आता है।

...24 छत्तीसगढ़ कैडर के लिए ज़ीरो ईयर

केन्द्र सरकार ने सिविल सर्विसेज़ एग्जामिनेशन (सीएसई) 2024 के ज़रिए सीधी भर्ती आईपीएस में भरी जाने वाली वैकेंसी का कैटेगरी-वाइज़, कैडर-वाइज़ और इनसाइडर/आउटसाइडर डिस्ट्रीब्यूशन नोटिफ़ाई कर दिया है। इसके बाद अब पास आउट आफिसर्स को राज्य कैडर अलाट होंगे। देश में हमसे भी छोटे राज्यों ने अपनी वैकेंसी दी है लेकिन छत्तीसगढ़ ने अपनी रिक्तियां नहीं भेजा है। इसके चलते कहीं ऐसा न हो कि छत्तीसगढ़ को 24 बैच के आईपीएस न मिले। इस पर यहां पीएचक्यू और गृह विभाग के अधिकारी कहते हैं कि अगले एक साल कोई रिटायरमेंट न होने से रिक्तियां भी नहीं बन रही हैं। हो सकता है अगले वर्ष भी छत्तीसगढ़ से नो वेकेंसी हो। क्योंकि 27 में एक ही रिटायरमेंट है। वैसे इससे आरआर (सीधी भर्ती) का पूरा कैडर मैनेजमेंट ही गड़बड़ाएगा। अफसर चुटकी भी ले रहे हैं कि 26 साल में कैडर फुल हो गया है।

वैसे जनवरी 26 के अनुसार छत्तीसगढ़ का आईपीएस कैडर 142 पदों का है। इनमें से 31 पद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के हैं और इनमें से 11-12 डेपुटेशन पर हैं शेष सभी राज्य में। अब नए बैच को कैडर अलाटमेंट से पहले राज्य ने विशेष प्रयास कर वैकेंसी न शामिल नहीं कराया तो 24 बैच के नए अफसर नहीं मिलेंगे। और यह ज़ीरो ईयर हो जाएगा।

बहरहाल यूपीएससी ने अलग-अलग स्टेट कैडर में कुल 147 आईपीएस वैकेंसी नोटिफ़ाई की गई हैं। इसमें 49 इनसाइडर, 98 आउटसाइडर वैकेंसी हैं। इनमें से 74 वैकेंसी अनरिज़र्व्ड के लिए, 41 ओबीसी के लिए, 22 एससी के लिए और 10 एसटी के लिए रिज़र्व हैं।

एजीएमटी कैडर में 4 वैकेंसी नोटिफाई की गई हैं, जिनमें 3 अनारक्षित और 1 ओबीसी शामिल हैं। आंध्र प्रदेश में, 14 नोटिफाई की गई वैकेंसी में 6 अनारक्षित, 5 ओबीसी, 2 एससी और 1 एसटी शामिल हैं। असम-मेघालय की 11 नोटिफाई की गई वैकेंसी इनमें 7 यूआर, 2 ओबीसी और एससी व एसटी के लिए 1-1 पद शामिल हैं। बिहार की 8 अधिसूचित रिक्तियों में 5 यूआर और ओबीसी, एससी और एसटी के लिए 1-1 पद शामिल हैं। गुजरात की 2 रिक्तियों में ओबीसी और एससी के लिए 1-1 पद शामिल हैं।

इसी तरह, झारखंड की 6 अधिसूचित रिक्तियों में 5 यूआर और 1 एससी शामिल हैं। कर्नाटक की 7 रिक्तियों में 3 यूआर, 2 ओबीसी और एससी व एसटी के लिए 1-1 पद शामिल हैं। केरल की 6 अधिसूचित रिक्तियों में 2 यूआर, 3 ओबीसी और एससी के लिए 1 पद शामिल हैं। मध्य प्रदेश की 11 अधिसूचित रिक्तियों में 4 यूआर, 3 ओबीसी, एससी के लिए 3 और एसटी के लिए 1 पद शामिल हैं। महाराष्ट्र की 10 रिक्तियों में 4 यूआर, 3 ओबीसी, 2 एससी और 1 एसटी शामिल हैं। मणिपुर की 4 अधिसूचित रिक्तियों में 2 यूआरपंजाब की 4 वैकेंसी में 2 यूआर, 1-1 ओबीसी और 1 एससी शामिल हैं। सिक्किम की 2 नोटिफाइड वैकेंसी में 1 यूआर और 1 ओबीसी शामिल हैं। तमिलनाडु की 9 वैकेंसी में 5 यूआर, 2 ओबीसी और 1 एससी और एसटी शामिल हैं। त्रिपुरा की 2 वैकेंसी यूआर के लिए हैं। तेलंगाना की 2 वैकेंसी में 1 यूआर और 1 ओबीसी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश की 12 नोटिफाइड वैकेंसी में 7 यूआर, 3 ओबीसी और 2 एससी शामिल हैं। उत्तराखंड की 2 नोटिफाइड वैकेंसी यूआर और महिला के लिए हैं। बंगाल की 15 नोटिफाइड वैकेंसी में 8 यूआ र, 5 ओबीसी और 1-1 एससी एसटी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश के लिए कोई वैकेंसी नोटिफाई नहीं की गई है।

नसबंदी रिवर्सल के जरिये मुख्यधारा की तलाश

बीते 31 मार्च को बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया। इसके साथ उन हजारों लोगों के लिए नए जीवन की शुरुआत हुई है, जो वर्षों तक बीहड़ जंगलों में बंदूक लेकर भटकते रहे, अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं, सपनों और पारिवारिक जीवन से दूर रहते हुए। अब उनका एक नया संघर्ष शुरू हुआ है। सरकार का पैकेज जो भी हो परिवार बसाने और समाज से जुडक़र जीवन की नई पारी शुरू करने का संघर्ष। महारानी अस्पताल जगदलपुर में पूर्व नक्सलियों की उमड़ती भीड़ इसी बदलाव की एक मार्मिक तस्वीर है। ये नक्सली वहां रिवर्सल नसंबदी के लिए पहुंच रहे हैं। जब वे नक्सली संगठन का हिस्सा बने तो एक शर्त यह भी जुड़ जाती थी कि वे बच्चे पैदा नहीं करेंगे। भले ही महिला-पुरुष सदस्य आपस में विवाह कर लें। उन्हें नसबंदी कराना पड़ता था। परिवार और बच्चों के अधिकारों से वे वंचित रहते थे क्योंकि उन्हें समाज के बीच रहना भी नहीं है। पर अब जब वे मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं तो उन्हें परिवार और बच्चों की जरूरत महसूस हो रही है। हो सकता है यह मानना हो कि इससे उनका अकेलापन दूर होगा, गांव में उसकी स्वीकार्यता अधिक बढ़ जाएगी। वे पिता बनना चाहते हैं। इसके लिए उन्हें नसबंदी का रिवर्सल प्रोसेस कराना जरूरी है। यह उतना आसान काम नहीं है, जितना आसान नसबंदी कराना है। रिवर्सल की प्रक्रिया जटिल होती है। काफी सावधानी से इसे पूरा करना होता है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में ही माइक्रोसर्जरी की जाती है। इसकी सफलता की दर भी 30 से 70 प्रतिशत तक ही है। यानि जिसकी सर्जरी होगी, जरूरी नहीं कि अपेक्षित परिणाम मिले और सबमें संतान पैदा करने की क्षमता लौट जाए।

फिर भी इतनी संख्या में नक्सली महारानी अस्पताल पहुंच रहे हैं कि छत्तीसगढ़ के विशेषज्ञ डॉक्टरों से काम नहीं चल पा रहा है। इस काम में मदद के लिए गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के चिकित्सकों को भी बुलाया गया है। सब यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के सदस्य हैं। स्थानीय पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के लोग भी लक्ष्य पूरा करने में लगे हैं। कोशिश की जा रही है कि जो भी पूर्व नक्सली नसबंदी रिवर्सल कराना चाहता है, यदि स्वस्थ है तो ऐसा कर दिया जाए। नक्सल पुनर्वास का यह अत्यंत मानवीय पक्ष दिखता है। यदि कोई पूर्व नक्सली परिवार नहीं बसा पाया और संतान पैदा नहीं कर सका तो भी उसे कमी महसूस नहीं हो। इसके लिए समुदाय को आगे आने की जरूरत है।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780317126hadhi_Chauk_NEW_1.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15373&amp;path_article=7</guid><pubDate>01-Jun-2026 6:02 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 1 जून 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15372&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15372&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780313486av-Kav_1_Jun_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15372&amp;path_article=2</guid><pubDate>01-Jun-2026 5:01 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 1 जून 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15371&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15371&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780313369eewar_01_June_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15371&amp;path_article=1</guid><pubDate>01-Jun-2026 4:59 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 31 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15370&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15370&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780232667av-Kav_31_May_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15370&amp;path_article=2</guid><pubDate>31-May-2026 6:34 PM</pubDate></item><item><title>राजपथ-जनपथ : कैसे लगी आग...</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15369&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15369&amp;path_article=7 ]]></link><description>कैसे लगी आग...

बीजापुर के एक गोदाम में आग लगने से 18 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता खाक हो गया। इसकी कीमत करीब 12 करोड़ रुपये आंकी गई है। खास बात यह है कि बीजापुर में तेंदूपत्ता संग्रहण का काम लघु वनोपज संघ के माध्यम से हो रहा था और आगजनी से सीधे-सीधे संघ को नुकसान उठाना पड़ा है। हालांकि वन विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। सिर्फ डीएफओ रमेश कुमार जांगड़े को हटाकर मुख्यालय में अटैच किया गया है। मगर आगजनी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

बताते हैं कि तेंदूपत्ता संग्रहण के बाद आगजनी की घटनाएं पहले भी होती रही हैं, मगर पूरा नुकसान नहीं होता था। आग लगने की सूचना मिलते ही तेंदूपत्ता ठेकेदार सक्रिय हो जाते थे और मजदूरों को काम में लगाकर आग बुझाने की कोशिश करते थे। इससे काफी नुकसान बच जाता था। इस बार आगजनी में गोदाम में रखा पूरा तेंदूपत्ता खाक हो गया। चूंकि वन अमला खुद संग्रहण करा रहा था, तो पूरा 18 हजार मानक बोरा तेंदूपत्ता कैसे खाक हो गया? यह भी बताया जा रहा है कि बड़ी मात्रा में हरा तेंदूपत्ता भी था, जो आसानी से जलता नहीं है। संग्रहण कार्य से जुड़े वन अधिकारी-कर्मचारी यह कह रहे हैं कि मजदूर उपलब्ध नहीं थे, इसलिए गोदाम से तेंदूपत्ता नहीं निकाल पाए। आग कैसे लगी, इसका भी कोई स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाया है।

हल्ला है कि तेंदूपत्ता की फर्जी खरीद भी हुई थी। ऐसे में मामले को दबाने के लिए आग लगाई गई है। फिलहाल तो आगजनी को लेकर जितने मुंह, उतनी बातें हो रही हैं। वन मंत्री केदार कश्यप और लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूप सिंह सलाम जिम्मेदारों को नहीं बख्शने की बात कह रहे हैं। एमडी अनिल साहू भी चार दिन तक बीजापुर में डेरा डाले हुए थे। मगर एक बात साफ है कि यह मामला आसानी से किसी के गले नहीं उतर रहा है। पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। देखना है कि आगे क्या कुछ निकलकर बाहर आता है।

अब बाउंसर रिकवरी एजेंट नहीं

कोई भी बैंक अब निजी सुरक्षा एजेंसी और सिक्स पैक, डोले-शोले वाले बाउंसर्स को लोन रिकवरी एजेंट नहीं बना सकेंगे। इतना ही नहीं टाइम बे-टाइम कॉल भी नहीं कर सकेंगे। इसके लिए रिकवरी एजेंट का पढ़ा लिखा बैंकों से ट्रेनिंग वह भी इंस्टीट्यूट आफ बैंकिंग एंड फाइनेंस से पास आउट होना जरूरी है। यह प्रोटोकॉल आरबीआई ने तय कर दिया है।

आरबीआई ने ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लोन रिकवरी के नियमों में बदलाव किया है। बैंक अब उन्हीं लोगों को लोन रिकवरी एजेंट बना सकेंगे जिन्होंने इंस्टीट्यूट आफ बैंकिंग एंड फाइनेंस (आईआईबीएफ) से प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। लोन रिकवरी एजेंट के लिए आईआईबीएफ प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाता है। इसके अलावा बैंकों को लोन लेने वाले ग्राहकों को अपनी रिकवरी एजेंसी और एजेंट की पूरी जानकारी भी देगा।

रिकवरी एजेंसी में बैंक अगर कोई बदलाव करता है तो बदलाव के बारे में भी उधार लेने वालों को सूचित करना होगा। नए नियम अक्टूबर से लागू होंगे। बैंक की तरफ से नियुक्त रिकवरी एजेंसी को इस बात की गारंटी देनी होगी कि उनके एजेंट लोन रिकवरी के लिए निर्धारित सभी नियमों का पालन करेंगे। बैंक के कर्मचारी या रिकवरी एजेंट किसी भी ग्राहक को रिकवरी संबंधित फोन कॉल सुबह आठ बजे से शाम सात बजे के बीच ही कर सकेंगे।

लोन रिकवरी एजेंट को ग्राहक के घर भेजने से पहले बैंक कम से कम एक दिन पहले ई-मेल या फोन मैसेज के जरिये एजेंट की पूरी जानकारी देगा। अगर ग्राहक का ई-मेल या फोन नंबर नहीं है तो तीन दिन पहले ग्राहक के पते पर नोटिस भेजा जाना चाहिए। नए नियमों के मुताबिक, अगर लोन लेने वाले ने उधार से संबंधित कोई शिकायत बैंक में दर्ज करा रखी है तो उस शिकायत के निपटान तक लोन लेने वाले के पास बैंक किसी कर्मचारी या रिकवरी एजेंट को नहीं भेज सकता है।

कर्ज लेने वाले के पास बैंक कर्मचारी या रिकवरी एजेंट की तरफ से किए जाने वाले सभी कॉल की तारीख और समय दर्ज किए जाएंगे। अगर कॉल के दौरान बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है तो इसकी जानकारी भी ग्राहकों को दी जाएगी। इस रिकॉर्डिंग को छह माह तक रखा जा सकेगा। बैंक को कॉल रिकॉर्ड करने का कारण भी बताना होगा। लोन की रिकवरी के लिए बैंक ग्राहक के मोबाइल या टैबलेट में किसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं करेगा। अगर मोबाइल फोन बैंक से उधार लेकर नहीं खरीदा गया है तो बैंक फोन को लोन रिकवरी के नाम पर सीज नहीं कर सकेंगे।

छत्तीसगढ़ में सेहत का हाल

हाल ही में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की ताजा रिपोर्ट-एनएफएचएस-6 जारी की गई है। इसमें छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य, पोषण, परिवार कल्याण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़े कई बिंदु शामिल हैं। राज्य स्तर के विस्तृत आंकड़े फैक्टशीट में उपलब्ध हैं, लेकिन कुल मिलाकर राज्य में कई सकारात्मक बदलाव दिखे हैं।

पहले कुछ अच्छी बातों की जानकारी दें। राज्य में संस्थागत प्रसव की दर काफी अच्छी है एनएफएचएस-5 में पहले से ही 85 प्रतिशत से अधिक थी। अब यह 90.6 प्रतिशत हो चुका है जो राष्ट्रीय औसत 88.6 से ज्यादा है। इसके चलते मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं को एंटीनेटल केयर मिलने में सुधार हुआ है। 12 से 23 महीने तक के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कवरेज 87.1 प्रतिशत तक बढ़ा है। स्टंटिंग यानि ऊंचाई के हिसाब से कम वजन की दर 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत रह गया है। टोटल फर्टिलिटी रेट अर्थात टीएफआर नियंत्रण में है। गर्भनिरोधकों के उपयोग में भी वृद्धि हुई है। महिलाओं में स्वास्थ्य बीमा कवरेज के लिए भी जागरूकता बढ़ी है।

मगर, कुछ क्षेत्रों में चुनौतियां बनी हुई हैं। जैसे अपने राज्य में 15 से 49 वर्ष के बच्चों और महिलाओं में एनीमिया की दर पहले से ही ऊंची थी। एनएफएचएस-5 में बच्चों में 67 प्रतिशत थी। एनएफएचएस-6 में भी यह एक बड़ी समस्या बनी हुई है, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में।

इधर, हालांकि बच्चों में स्टंटिंग घटी है, लेकिन वेस्टिंग, अंडरवेट और डाइट की में अभी भी कमी है। एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग में भी गिरावट देखी गई है। इसके अलावा वयस्कों, विशेषकर महिलाओं में ओवरवेट यानि मोटापे की समस्या बढ़ रही है। हाई ब्लड शुगर और हाइपरटेंशन के मामले भी बढ़ रहे हैं।

सर्वे में कहा गया है कि अनावश्यक सिजेरियन डिलीवरी बढ़ रही है। यह पूरे देश का हाल है और छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है। यह 27.2 प्रतिशत तक है, जो कि प्राइवेट अस्पतालों में अधिक है। छत्तीसगढ़ में इस पर नजर रखने की जरूरत है।

स्टंटिंग, एनीमिया आदि की जो समस्या पाई है वह बस्तर जैसे आदिवासी इलाकों में अधिक है, क्योंकि वहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में कमी है। आयुष्मान भारत और नेशनल हेल्थ मिशन योजनाओं का अधिक लाभ दूरस्थ स्थानों में पहुंचाने की जरूरत है।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780232536ijapur-3.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15369&amp;path_article=7</guid><pubDate>31-May-2026 6:32 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 31 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15368&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15368&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780229399eewar_31_May_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15368&amp;path_article=1</guid><pubDate>31-May-2026 5:39 PM</pubDate></item><item><title>राजपथ-जनपथ : भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में छत्तीसगढ़ की  हिस्सेदारी?</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15367&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15367&amp;path_article=7 ]]></link><description>भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में छत्तीसगढ़ की हिस्सेदारी?

भाजपा की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी हाईकमान राज्यों से नामों पर मंथन कर रहा है और छत्तीसगढ़ से भी आधा दर्जन नेताओं को जगह मिल सकती है। सीएम विष्णुदेव साय की हालिया दिल्ली यात्रा के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से हुई मुलाकात को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। बताया जाता है कि दोनों नेताओं के बीच प्रदेश से संभावित नामों पर चर्चा हुई। इसके बाद राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री शिवप्रकाश की साय से हुई लंबी मुलाकात ने अटकलों को और बल दिया है।

चर्चा है कि इस बार संगठन में नए चेहरों को प्राथमिकता मिल सकती है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लता उसेंडी को यथावत रखा जा सकता है, जबकि प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वित्त मंत्री ओपी चौधरी के नाम भी चर्चा में हैं। इन चारों नेताओं का पहली बार विधायक बनना और कोर कमेटी में शामिल होना उनके पक्ष में माना जा रहा है। बस्तर सांसद महेश कश्यप को राष्ट्रीय पदाधिकारी बनाए जाने की भी चर्चा है।

प्रदेश भाजपा की निगाहें नए प्रभारी की नियुक्ति पर भी टिकी हैं। सीएम विष्णु देव साय, प्रदेश अध्यक्ष किरण देव और दोनों डिप्टी सीएम 10 तारीख को दिल्ली में रहेंगे। इस दौरान संगठन में नियुक्ति, और अन्य विषयों पर पार्टी हाईकमान से चर्चा हो सकती है।माना जा रहा है कि संगठन से जुड़े अहम फैसले 14-15 जून के आसपास सामने आ सकते हैं।

युवक कांग्रेस चुनाव को लेकर जोड़ तोड़

युवक कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव ने कांग्रेस के भीतर नई हलचल पैदा कर दी है। इस बीच भिलाई विधायक देवेन्द्र यादव और वर्तमान युवक कांग्रेस अध्यक्ष आकाश शर्मा ने एक ऐसा दांव चला है, जिसने पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया है। दोनों नेताओं ने बलौदाबाजार-भाटापारा युवक कांग्रेस अध्यक्ष और जिला पंचायत सदस्य शैलेन्द्र बंजारे के नाम को आगे बढ़ाया है और उनके समर्थन में सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।

शैलेन्द्र बंजारे का नाम बलौदाबाजार आगजनी कांड में भी सामने आया था और वे जेल भी जा चुके हैं। बावजूद इसके उन्हें कांग्रेस के कुछ राष्ट्रीय नेताओं का समर्थन मिलने की चर्चा है। बंजारे अनुसूचित जाति वर्ग से हैं। यह कहा जा रहा है कि बंजारे युवक कांग्रेस अध्यक्ष बनते हैं, तो अजा वर्ग में कांग्रेस की पकड़ मजबूत होगी और इसका सीधा फायदा विधानसभा चुनाव में मिल सकता है।

दूसरी ओर, पूर्व सीएम भूपेश बघेल, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। अध्यक्ष पद के कई दावेदार इन वरिष्ठ नेताओं से लगातार संपर्क साध रहे हैं। ऐसे में यदि देवेन्द्र यादव और आकाश शर्मा की रणनीति सफल होती है, तो शैलेन्द्र बंजारे की दावेदारी को मजबूत समर्थन मिलना तय माना जा रहा है।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780144914JP-Bhawan.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15367&amp;path_article=7</guid><pubDate>30-May-2026 6:11 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 30 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15366&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15366&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780137570av-Kav_30_May_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15366&amp;path_article=2</guid><pubDate>30-May-2026 4:09 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 30 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15365&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15365&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780137482eewar_30_May_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15365&amp;path_article=1</guid><pubDate>30-May-2026 4:08 PM</pubDate></item><item><title>राजपथ-जनपथ : दिलचस्प हुआ मुकाबला</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15364&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15364&amp;path_article=7 ]]></link><description>दिलचस्प हुआ मुकाबला

सूरजपुर जिले की शिवनंदनपुर नगर पंचायत का चुनाव कांग्रेस और भाजपा के बीच प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है। दो दिन पहले कांग्रेस के दो प्रमुख नेता टीएस सिंहदेव और प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने पार्टी के जिले के महामंत्री नरेंद्र जैन के खिलाफ आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज होने पर अनशन किया था, और उनकी मांगें कुछ हद तक पूरी भी हुईं। कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के धरना-प्रदर्शन से कार्यकर्ताओं में जोश आया है, लेकिन भाजपा भी इसका जवाब देने में जुटी है।

यह बात सामने आई है कि जिस नरेन्द्र जैन के समर्थन में कांग्रेस नेताओं ने धरना-प्रदर्शन और अनशन किया था, उनके सगे भाई राजेश जैन शिवनंदनपुर के एक वार्ड से भाजपा पार्षद प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं। भाजपा इसे आधार बनाकर यह बताने की कोशिश कर रही है कि कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित नहीं थी। साथ ही यह भी प्रचारित किया जा रहा है कि कांग्रेस नेताओं की आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते यहां का माहौल गरमाया।

प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने पहले एक दिन की भूख हड़ताल की घोषणा की थी, लेकिन जैसे ही टीएस सिंहदेव ने आमरण अनशन का ऐलान किया, बैज ने भी अनशन पर बैठने की घोषणा कर दी। वैसे तो शिवनंदनपुर कांग्रेस का गढ़ रहा है। पहले यह ग्राम पंचायत था, और यहां के ज्यादातर सरपंच कांग्रेस समर्थित ही रहे हैं। मगर इस बार यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

धूप से नहीं उड़ा कमल का रंग



(फोटो-प्राण चड्ढा)​

पहली नजर में इसे देखकर किसी को लग सकता है कि तेज धूप के कारण कमल का रंग उड़ गया है, लेकिन वास्तव में यह दुर्लभ श्वेत कमल है, जो सामान्यत: दिखाई देने वाले गुलाबी कमलों की तुलना में कम मिलता है। बिलासपुर से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित कोपरा जलाशय की जैव विविधता का यह एक आकर्षण है।

दिसंबर 2025 में कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में रामसर साइट का दर्जा मिला। इसके साथ ही यह छत्तीसगढ़ की पहली और फिलहाल एकमात्र रामसर साइट बन गई। यहां प्रवासी पक्षियों, जलीय वनस्पतियों, मछलियों और विविध पारिस्थितिक तंत्र का समृद्ध संसार है। श्वेत कमल इसी प्राकृतिक धरोहर का जीवंत हिस्सा है, जो जलाशय की शांत सतह पर खिलकर तालाब की शोभा बढ़ाता है। एक स्थानीय बच्ची अपने हाथों में श्वेत कमल थामे मुस्कुराती दिखाई दे रही है। बच्ची के हाथों में सजा यह कमल मानो बता रहा है कि स्थानीय लोगों का इस जगह से कितना लगाव है।


</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780058075hadhi_Chauk_NEW_1.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15364&amp;path_article=7</guid><pubDate>29-May-2026 6:04 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 29 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15363&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15363&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780057459av-Kav_29_May_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15363&amp;path_article=2</guid><pubDate>29-May-2026 5:54 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 29 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15362&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15362&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1780057191eewar_29_May_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15362&amp;path_article=1</guid><pubDate>29-May-2026 5:49 PM</pubDate></item><item><title>राजपथ-जनपथ : कर्नाटक में अमल में आया 36गढ़ का फार्मूला</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15361&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15361&amp;path_article=7 ]]></link><description>कर्नाटक में अमल में आया 36गढ़ का फार्मूला

कर्नाटक में कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के इस्तीफे की चर्चाओं के बीच एक बार फिर ढाई-ढाई साल के सीएम फार्मूले पर चर्चा तेज हो गई है।

छत्तीसगढ़ में वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर ढाई-ढाई साल के फार्मूले की खूब चर्चा हुई थी, लेकिन यह फार्मूला अमल में नहीं आ पाया।कर्नाटक में भी कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद इसी तरह का फार्मूला लागू किया। इसके तहत सिद्धरमैया को तीन साल बाद कुर्सी छोडऩी पड़ी और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया।

कर्नाटक में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते डीके शिवकुमार सीएम पद के स्वाभाविक दावेदार थे। मगर पार्टी हाईकमान ने विधायकों की राय और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद डीके शिवकुमार को डिप्टी सीएम पद के लिए राजी किया गया और उन्हें ढाई साल बाद सीएम बनाने का भरोसा दिया गया।

बहुत कम लोगों को मालूम है कि डीके शिवकुमार, छत्तीसगढ़ में ढाई-ढाई साल के फार्मूले का हश्र देखकर शुरुआत में तैयार नहीं थे। उन्होंने इस फार्मूले को लेकर विस्तार से जानकारी ली और दिल्ली में टीएस सिंहदेव को लंच पर आमंत्रित किया। सिंहदेव ने उन्हें उस समय की पूरी परिस्थितियों से अवगत कराया। बाद में शिवकुमार, पार्टी की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के हस्तक्षेप के बाद डिप्टी सीएम पद के लिए तैयार हुए।

खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ में सीएम पद के लिए ढाई-ढाई साल के फार्मूले से सोनिया गांधी अलग थीं। यह फार्मूला खुद भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव तत्कालीन कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया को लेकर राहुल गांधी के पास पहुंचे थे। वजह यह थी कि हाईकमान की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए ताम्रध्वज साहू का नाम तय किया गया था, जिसके लिए भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव और डॉ. चरणदास महंत तैयार नहीं थे। राहुल गांधी ने भूपेश और सिंहदेव के फार्मूले को मंजूरी दी और भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बन गए।

बाद में ढाई साल पूरे होने पर भूपेश समर्थक 53 विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाल दिया। इससे हाईकमान पर दबाव बढ़ा और अंतत: भूपेश बघेल पूरे पांच साल सीएम बने रहे।

दिलचस्प यह भी है कि सरकार बनने के समय सिंहदेव समर्थक विधायकों की संख्या सबसे ज्यादा मानी जाती थी, लेकिन सीएम बनने के बाद अधिकांश विधायक भूपेश बघेल के साथ चले गए। हाईकमान को भूपेश बघेल की राजनीतिक ताकत के आगे झुकना पड़ा। कर्नाटक में भी इस बार कमोबेश ऐसी ही स्थिति रही, लेकिन वहां हाईकमान ने सख्ती दिखाई और डीके शिवकुमार के सीएम बनने का रास्ता साफ कर दिया।

बीन बजाएं बाहर आ जाएगा....



बुधवार को मंत्रालय के श्रम विभाग में सांप घुस आया था। यह विभाग पांच मंजिला भवन के ग्राउंड पर डी गेट के पास है। इसके ठीक बगल के नगरीय प्रशासन विभाग में भी पिछले माह एक सांप घुसा था। अलमारी के नीचे घुसे इस सांप 29 अप्रैल को मार दिया गया था। कल का सांप फाइलों के बीच मुड़ कर सोया, फंसा हुआ था। पता नहीं कब से, फाइलों के बीच था, कल एक फाइल को खोजते समय दिखाई दिया। यह ख़बर फैलते ही कर्मचारी के वाट्सएप ग्रुप तरह तरह की रोचक टिप्पणियों से भर गया।

पहली ही सूचना पर जवाब आया कि-बीन बजाएं बाहर आ जाएगा। तो जवाब आया श्रम विभाग में आया है और फाइल में छिपा है कहीं फाइल सक्ती के वेदांता ब्लास्ट मामले की तो नहीं।

एक ने कहा - मंत्रालय में सेटअप स्वीकृति की खबर सुनकर सांप भी काम करने आ गया लगता है। या फिर इसका भी आई कार्ड बन गया होगा भंडारे का।

करीब एक-पौन घंटे की मशक्कत के बाद जंगल सफारी के स्नेक कैचर बुलाकर सांप को पकड़ा गया। पूरे खेत खलिहान में बने महानदी इंद्रावती भवन में बीते वर्षों में भी कई बार सांप घुसते रहे हैं। एक बारगी इंद्रावती भवन के तीसरे फ्लोर में घुसा था।

इन वाकयों को याद करते हुए टिप्पणी हुई कि मंत्रालय में सर्प मित्र की पदस्थापना होनी चाहिए। जवाब मिला-खुद के यहां सांप घुसा तो ही सर्पमित्र भर्ती की याद आई। वैसे भी बहुत सांप मंत्रालय में हैं जिनका रंग काला है। इनमें दुध नाग भी होगें । किसी ने कहा ढोढिय़ा है। तब स्नेक कैचर के हवाले से बताया कि कल का सांप धामन था। चलो इसी बहाने सांप की प्रजाति की पहचान हो गई और यह भी कि कौन से सांप से बचना चाहिए।

इंद्रधनुषी झबरी शेकरू बारनवापारा में



छत्तीसगढ़ के बारनवापारा अभयारण्य के देवपुर जंगल में दुर्लभ जायंट मालाबार स्क्विरल देखने को मिला है। रंग-बिरंगे शरीर और लंबी झबरी पूंछ वाली यह विशाल गिलहरी अपने आप में प्रकृति का अद्भुत नमूना है।

इसका वैज्ञानिक नाम रतूफा इंडिका है। प्राणी विज्ञान के छात्र और वन विभाग के अफसर इसे इंडियन जायंट स्क्विरल, मालाबार जायंट स्क्विरल कहते हैं। महाराष्ट्र में शेकरू जैसा आसान नाम चलता है, क्योंकि इसे वहां राजकीय वन्यजीव का दर्जा मिला हुआ है।

माना जाता है, भारत में पाई जाने वाली गिलहरियों में यह सबसे बड़ी प्रजाति है। पूंछ सहित इसकी लंबाई लगभग तीन फीट तक पहुंच जाती है। मगर, इसका सबसे रिझा देने वाली बात इसका बहुरंगी शरीर है। बैंगनी-भूरा, गहरा लाल, क्रीम, पीला और काला रंग। ये सब मिलाकर इसे किसी चित्रकार की बनाई कलाकृति जैसी शक्ल देती है। सामान्य तौर पर हम भूरे रंग की गिलहरियों से ही परिचित हैं, जो आंगन, गार्डन में दिख जाती हैं। इसका रूप उनसे बहुत अलग है।

यह जीव पूरी तरह वृक्षों पर रहने वाला यानी आर्बोरियल या कहें, वृक्षवासी है। बंदर और लंगूर की तरह कभी-कभी ही जमीन पर उतरते हैं। ऊंचे पेड़ों की शाखाओं पर तेजी से दौड लेते हैं। एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक 15 से 20 फीट तक छलांग लगा लेते हैं। इसकी लंबी और घनी पूंछ हवा में संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। खतरा महसूस होने पर यह पेड़ के तने से चिपककर खुद को छिपा लेती है।

शेकरू की और विशेषता बताएं तो यह मोटे तौर पर फल, बीज, फूल, पेड़ों की छाल और पत्तियां खाती हैं। कभी-कभी कीड़े-मकोड़े और पक्षियों के अंडे भी इसका भोजन बनते हैं। वन पारिस्थितिकी में इसकी भूमिका जरूरी होती है, क्योंकि यह बीजों को जंगल में फैलाकर नए पौधों के उगाने में मदद करती है। इस वजह से इसे जंगलों के प्राकृतिक पुनर्जीवन का सहयोगी जीव भी कहते हैं।

आम तौर पर शेकरू पश्चिमी घाट, सतपुड़ा क्षेत्र, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के घने जंगलों में पाई जाती है। छत्तीसगढ़ के बार नवापारा में इसका दिखना इसलिए खास माना जा सकता है क्योंकि यह केवल उन्हीं क्षेत्रों में जीवित रह पाती है जहां जंगल अपेक्षाकृत शांत हो और घना हो। बता दें, वन्यजीव वैज्ञानिक इसे इंडिकेटर स्पीशीज- यानी स्वस्थ वन वातावरण का संकेत देने वाली प्रजाति मानते हैं।

यह जानकर आपको अच्छा लग सकता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ-आईयूसीएन ने इसे लीस्ट कंसर्न श्रेणी में रखा है। यानि इनके जल्दी लुप्त होने का खतरा नहीं है। मगर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में भी लगातार घटते जंगल, वन कटाई से इनकी जीने की क्षमता प्रभावित हो रही है।

बार नवापारा अभयारण्य को लेकर और बात करें तो यहां पहले से ही गौर, तेंदुआ, स्लॉथ बियर, चार सींगी हिरण, सांभर, चीतल और 250 से अधिक पक्षी प्रजातियों का ठिकाना है। ऐसे में जायंट मालाबार स्क्विरल की मौजूदगी यह बताती है कि छत्तीसगढ़ के जंगल अभी भी देश की महत्वपूर्ण जैव-विविधता धरोहरों में शामिल हैं।

टेबल के नीचे फसल लहलहा रही...

सरकार के कुछ मंत्रियों के पीए को लेकर काफी कुछ बातें हो रही हैं। कई को तो बदला भी जा चुका है। ऐसे ही भाजपा के अंदरूनी मामलों के एक जानकार ने फेसबुक पर एक मंत्री के पीए का फोटो पोस्ट किया है। पोस्ट में मंत्रीजी के पीए पर तंज कसते हुए लिखा है कि उनकी मेहनत की फसल टेबल के नीचे लहलहाती है। जैसे ही फसल पककर तैयार होती है, साहब दो-तीन महीने में अपना हिस्सा समेटते हैं, और सीधे गोवा उड़ जाते हैं। वहां भी बीच समंदर में खड़ी केसिनो जहाज में वे नोटों के ऐसे बीच बोते हैं कि पूछो ही मत। इस पोस्ट की पार्टी के अंदरखाने में काफी चर्चा हो रही है।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779974123hadhi_Chauk_NEW_1.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15361&amp;path_article=7</guid><pubDate>28-May-2026 6:45 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 28 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15360&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15360&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779973249eewar_28_May_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15360&amp;path_article=1</guid><pubDate>28-May-2026 6:30 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 28 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15359&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15359&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779973131av-Kav_28_May_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15359&amp;path_article=2</guid><pubDate>28-May-2026 6:28 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 27 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15358&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15358&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779887722av-Kav_27_May_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15358&amp;path_article=2</guid><pubDate>27-May-2026 6:45 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 27 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15357&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15357&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779887691eewar_27_May_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15357&amp;path_article=1</guid><pubDate>27-May-2026 6:44 PM</pubDate></item><item><title>राजपथ-जनपथ : संघर्ष साथ ला देता है</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15356&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15356&amp;path_article=7 ]]></link><description>संघर्ष साथ ला देता है

नगर पंचायत उपचुनाव के बहाने कांग्रेस में एकजुटता देखने को मिल रही है। ऐसी एकता विधानसभा, लोकसभा और स्थानीय चुनावों के दौरान नजर नहीं आई थी, जिसका खामियाजा पार्टी को हार के रूप में भुगतना पड़ा। अब जबकि विधानसभा चुनाव में करीब ढाई साल का समय बचा है, पार्टी के दिग्गज नेता आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आते दिखाई दे रहे हैं।

एकजुटता का यह नजारा उस वक्त देखने को मिला, जब सूरजपुर जिले की शिवनंदनपुर नगर पंचायत चुनाव के दौरान कांग्रेस के एक महामंत्री के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। यहां कांग्रेस चुनाव के प्रभारी डॉ. प्रेमसाय सिंह और अमरजीत भगत हैं। कांग्रेस ने भाजपा नेताओं के दबाव में पुलिस पर झूठा प्रकरण दर्ज करने का आरोप लगाया। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव भी मौके पर पहुंच गए।

दोनों नेता धरने पर बैठ गए। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी उनके साथ रहे। इससे पहले टी.एस. सिंहदेव और भूपेश बघेल एक ही कार में दिखाई दिए, जिसकी स्टेयरिंग टी.एस. सिंहदेव संभाल रहे थे। यही नहीं, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत की रामभद्राचार्य को लेकर की गई टिप्पणी पर भी भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव उनके समर्थन में सामने आए।

पहली नजर में दिग्गज नेताओं के बीच दूरियां कम होती दिख रही हैं। इसका असर यह है कि छोटे से नगर पंचायत चुनाव में कांग्रेस बेहतर स्थिति में नजर आ रही है, जबकि भाजपा को यहां कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दे रहा है और आने वाले दिनों में सरकार के खिलाफ अभियान तेज करने की रणनीति पर काम शुरू हो गया है। देखना है कि आगे क्या कुछ होता है।

बाहर रहते हुए ही इंपैनल

केन्द्र सरकार ने देशभर के वर्ष-2001 से लेकर वर्ष-08 बैच तक के 68 अफसरों आईजी पद के लिए इंपैनल किया है। छत्तीसगढ़ कैडर से दो अफसर नीथू कमल और डी श्रवण भी इंपैनल हुए हैं। खास बात ये है कि दोनों अफसर केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं।

नीथू कमल सीबीआई, तो डी श्रवण एनआईए में पदस्थ हैं। तीन अफसर इंपैनल होने से रह गए, इनमें आईजी प्रशांत अग्रवाल, पारूल माथुर, और बालाजी सोमावार हैं। पारूल माथुर के खिलाफ विभागीय जांच चल रही है, तो बालाजी राव को लेकर कहा जा रहा है कि उनका एक साल का सीआर जमा नहीं हो पाया था। ऐसे में तीनों के लिए फिलहाल केंद्रीय एजेंसियों में जाने के इंतजार करना पड़ सकता है।

चमगादड़ों की इंसानों को चेतावनी

इस बार की गर्मी केवल तापमान के आंकड़े नहीं तोड़ रही, बल्कि भविष्य के लिए बड़ी चेतावनी भी बनकर आ रही है। कोरबा के पाली में नौकोनिया तालाब के किनारे हाल ही में जो दृश्य दिखा, उसने सबको चिंतित कर दिया। सैकड़ों चमगादड़ पेड़ों से नीचे गिर पड़े। कई पेड़ों पर उल्टे लटके-लटके ही मर गए। इसी तरह से सैकड़ों चमगादड़ों की कांकेर में जान चली गई। शुरुआती जांच में वन विभाग के अफसरों और जानकारों ने उनकी मौत का कारण भीषण गर्मी और लू को माना है।

चमगादड़ अपनी जान की कीमत चुका कर हमें आगाह कर रहे हैं कि राज्य तेजी से पर्यावरणीय असंतुलन की चपेट में आ रहा है। रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, महासमुंद और राजनांदगांव जैसे शहर इस वर्ष कई बार देश के सबसे गर्म शहरों की सूची में शामिल रहे। मौसम विभाग ने लगातार लू की चेतावनी जारी की है। कई जिलों में दिन का तापमान 45 डिग्री से ऊपर पहुंच गया, जबकि रात में भी राहत नहीं मिल रही है।

चमगादड़ बेहद संवेदनशील जीवों में से हैं। वे वातावरण में बदलाव का असर जल्दी झेलते हैं। उनका शरीर अधिक गर्मी सहन नहीं कर पाता। जब तापमान 42 डिग्री के पार पहुंचता है तो वे हीट स्ट्रोक का शिकार होने लगते हैं। कोरबा के पाली और बस्तर के कांकेर इलाके में भी यही हुआ। वहां लोगों ने लगातार कई दिनों तक चमगादड़ों को पेड़ों से गिरते देखा, पर बेबस थे। बचाने का कोई उपाय उनके पास नहीं था।

गौर करने की बात है कि चमगादड़ पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा होते है। वे खेतों में नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को खाते हैं, कई पेड़ों और फूलों के परागण में मदद करते हैं और बीज फैलाकर जंगलों के विस्तार में भूमिका निभाते हैं। यदि ऐसे काम के जीव बड़ी संख्या में मरने लगें तो इसका असर खेती, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन पर पड़ता है।

पृथ्वी के बढ़ते तापमान के चलते संवेदनशील शारीरिक क्षमता वाले जीवों पर शामत दुनियाभर में आने लगी है। इसी साल ऑस्ट्रेलिया में भीषण गर्मी के दौरान हजारों फ्रूट बैट्स की मौत हो चुकी है। यूरोप और अफ्रीका के कई हिस्सों में भी गर्मी का असर वन्यजीवों पर दर्ज किया जा चुका है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव पहले से ज्यादा लंबी और घातक होती जा रही हैं।

छत्तीसगढ़ की बात करें तो पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर जंगल कटे हैं। कोरबा में हसदेव अरण्य तबाह होने जा रहा है। रायगढ़ जिले में भी कोयला खदानों, ताप विद्युत संयंत्रों और औद्योगिक परियोजनाओं का विस्तार हुआ है। जंगल कम होने से जमीन की नमी घट रही है। इसका नतीजा गर्म हवाओं का प्रकोप बढ़ जाना होता है। इधर तालाब, नदियां और छोटे जल स्रोत भी तो सिकुड़ते ही जा रहे हैं। शहरों में तेजी से बढ़ती कंक्रीट की इमारतों ने हीट आइलैंड प्रभाव को बढ़ाया है। इसके चलते रायपुर जैसे शहरों का तापमान दुनिया के सर्वाधिक गर्म इलाकों में शामिल हो चुका है।

वैसे वन विभाग ने पाली क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई है। चमगादड़ों के बसेरे वाले पेड़ों पर और आसपास पानी का छिडक़ाव किया जा रहा है। पर ये अस्थायी और सीमित उपाय हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि अस्थायी उपायों से काम नहीं चलेगा। बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, जल स्रोतों का संरक्षण, बेतरतीब उद्योगों और अव्यावहारिक खनन पर नियंत्रण जरूरी है। शहरों में खाली पड़े जगहों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण होना चाहिए। चमगादड़ों की सामूहिक आहूति हम इंसानों को संदेश दे रहा है कि प्रकृति से अधिक खिलवाड़ मत करिये। जंगल और पानी बचाकर रखिए, जैव विविधता की जरूरत को नजरअंदाज मत करिये। अभी तो लू से एक दो मौतों की ही खबर आई है, आज चमगादड़ ही गिर रहे हैं। हालात नहीं सुधरे तो इंसानों की बारी आने में देर नहीं लगेगी।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779884538hadhi_Chauk_NEW_1.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15356&amp;path_article=7</guid><pubDate>27-May-2026 5:52 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 26 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15355&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15355&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779800074eewar_25_May_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15355&amp;path_article=1</guid><pubDate>26-May-2026 6:24 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 26 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15354&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15354&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779799980av-Kav_26_May_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15354&amp;path_article=2</guid><pubDate>26-May-2026 6:23 PM</pubDate></item><item><title>राजपथ-जनपथ : साहब की चुनावी तैयारी</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15353&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15353&amp;path_article=7 ]]></link><description>साहब की चुनावी तैयारी

छठवीं विधानसभा का आधा कार्यकाल लगभग बीत चुका है। सत्तारूढ़ भाजपा संगठन ने पिछले दिनों प्रदेश कार्यसमिति की बैठक कर अगले चुनाव में तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस में फिलहाल वैसी हलचल नहीं है। वहां प्रदेश अध्यक्ष का भविष्य तय होने के बाद कमर कसी जाएगी। दोनों प्रमुख दलों की ऐसी हलचल के बीच कुछ नौकरशाह भी माननीय बनने की जुगत बिछाने लगे हैं। छत्तीसगढ़ में नौकरशाहों का नेता बनने का स्ट्राइक रेट अच्छा है। स्व. अजीत जोगी के बाद, डीएसपी आर के राय, श्याम लाल कंवर,आईएएस ओपी चौधरी, नीलकंठ टेकाम प्रमुख हैं ही।

कुछ कृषि अधिकारी, पटवारी, हवलदार, टीआई भी विधायक चुने गए। इनमें से कुछ को एक ही बार अवसर मिला। बहरहाल अगले चुनाव को लेकर ताजा नाम एक टेक्नोक्रेट का हलचल में है। साहब अपने साथ साथ पत्नी के लिए भी सक्रिय हो गए हैं। टिकट चाहे जिसे मिल जाए। ये टिकट भाजपा, कांग्रेस किसी की भी चलेगी। साहब अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं और उनकी जाति के लोग कोरबा जिले की सीट से पहले भी चुने जा चुके हैं। वैसे साहब सेवा स्थल पर विस्तार (एक्सटेंशन) के लिए भी सक्रिय हैं। इनके दो समकक्षों को दो दो बार मिल चुका है। सो उम्मीद बढ़ गई है। और मातहत दावेदार अभी उतने वरिष्ठ नहीं है। एक्सटेंशन मिला तो अगले एक साल सेवा भावना का विस्तार तेजी से होगा। साहब और मैडम की सक्रियता चर्चा में है। देखना होगा आगे क्या नतीजे आते हैं।

बैज के लिए आखिरी मौका ?

नगरीय निकाय और पंचायतों के उपचुनाव चल रहे हैं। इनमें नगरीय निकाय के चुनाव दलीय आधार पर हो रहे हैं। वैसे तो चुनाव को लेकर ज्यादा बातें नहीं हो रही हैं, लेकिन कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पूरी गंभीरता से चुनाव लड़ रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के कार्यकाल का आखिरी चुनाव है। लिहाजा, उन्होंने पार्टी के तमाम प्रमुख नेताओं को प्रचार में लगा दिया है।

पांच नगर पंचायत अध्यक्ष और पार्षदों के कुल 71 पदों के लिए 1 जून को वोटिंग होगी। नगरीय निकायों के चुनाव ईवीएम से होंगे, जबकि पंचायतों के चुनाव में मतपत्रों का उपयोग होगा। जिन पांच नगर पंचायतों में अध्यक्ष के चुनाव हो रहे हैं, उनमें सूरजपुर जिले की शिवनंदनपुर, जांजगीर-चांपा जिले की बम्हनीडीह, राजनांदगांव जिले की घुमका नगर पंचायत, बलौदाबाजार जिले की पलारी और कवर्धा जिले की सहसपुर लोहारा सीट शामिल हैं।

कांग्रेस ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, विधायक रामकुमार यादव, राघवेंद्र सिंह, बालेश्वर साहू और व्यास कश्यप को बम्हनीडीह चुनाव की कमान सौंपी है। खुद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत चुनाव प्रचार पर नजर रखे हुए हैं।

सूरजपुर जिले की नगर पंचायत शिवनंदनपुर के चुनाव प्रचार की कमान पूर्व मंत्री अमरजीत भगत और डॉ. प्रेमसाय सिंह संभाल रहे हैं। यह नगर पंचायत महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विधानसभा क्षेत्र भटगांव का हिस्सा है। लिहाजा, उनकी भी प्रतिष्ठा दांव पर है। इसी तरह कवर्धा जिले की सहसपुर लोहारा सीट पर कांग्रेस के प्रचार की कमान राजनांदगांव ग्रामीण विधायक इंदरशाह मंडावी और विधायक भोलाराम साहू संभाल रहे हैं। गृहमंत्री विजय शर्मा का विधानसभा क्षेत्र होने के कारण यहां मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। बलौदाबाजार जिले की पलारी नगर पंचायत में पूर्व मंत्री अनिला भेडिय़ा कांग्रेस प्रत्याशी का प्रचार कर रही हैं, तो भाजपा ने पर्यटन बोर्ड की अध्यक्ष नीलू शर्मा को प्रभारी बनाया है।

प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज की बतौर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उपलब्धियां लगभग शून्य रही हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी को विधानसभा, लोकसभा और फिर नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। अब बैज का कार्यकाल 10 जून को खत्म हो रहा है। ऐसे में उपचुनाव के बहाने उन्हें खुद को साबित करने का आखिरी मौका माना जा रहा है। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि यदि चुनाव में कांग्रेस को सफलता मिलती है, तो बैज को बदलना आसान नहीं रहेगा। यही वजह है कि बैज पूरा जोर लगा रहे हैं। देखना है आगे क्या होता है।

उदंती-सीतानदी में रहस्यमयी बाघिन



छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक रहस्यमयी बाघिन की मौजूदगी ने इन दिनों वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों को हैरान कर रखा है। करीब चार साल उम्र की यह बाघिन अचानक कैमरा ट्रैप में नजर आई, लेकिन देश के किसी भी टाइगर डेटाबेस में उसके पंजों या शरीर की धारियों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

अप्रैल और मई में मिले ताजा कैमरा ट्रैप फोटो से पुष्टि हुई है कि यह बाघिन अब भी उदंती-सीतानदी के जंगलों में सक्रिय है। इससे पहले जनवरी में उसकी पहली तस्वीर सामने आई थी। इसके बाद वन विभाग ने उसकी पहचान के लिए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को तस्वीरें भेजीं, लेकिन देश के किसी भी दर्ज टाइगर रिकॉर्ड से उसकी धारियां मेल नहीं खाईं।

जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख वेटरनरी साइंस यूनिवर्सिटी में जांच के दौरान उसके मल के नमूनों से पुष्टि हुई कि वह मादा बाघ है। हालांकि वह कहां से आई, यह अब भी रहस्य बना हुआ है। आसपास के राज्यों ओडिशा, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के जंगलों में भी इस बाघिन का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर मादा बाघिनें अपने जन्म क्षेत्र से बहुत दूर नहीं जातीं, जबकि नर बाघ लंबी दूरी तय करते हैं। ऐसे में बिना किसी रिकॉर्ड के इस बाघिन का यहां तक पहुंचना बेहद असामान्य माना जा रहा है।

कभी बाघों के लिए पहचाने जाने वाले उदंती-सीतानदी रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों से बाघों की संख्या लगातार घट रही थी। 2014 में यहां तीन बाघ दर्ज किए गए थे, लेकिन 2018 तक केवल एक बाघ बचा था। इसके बाद यहां केवल गुजरने वाले नर बाघ ही कभी-कभार दिखाई देते रहे।

वन विभाग उदंती में बाघों के पुनर्वास की योजना बना रहा था और इसके लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को प्रस्ताव भी भेजा गया था। अब इस बाघिन की मौजूदगी ने उम्मीद जगा दी है कि शायद प्रकृति खुद इस जंगल को फिर से बाघों का घर बनाने लगी है।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779797173hadhi_Chauk_NEW_1.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15353&amp;path_article=7</guid><pubDate>26-May-2026 5:36 PM</pubDate></item><item><title> इतिहास में 26 मई </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15352&amp;path_article=5</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15352&amp;path_article=5 ]]></link><description>26 मई : नरेन्द्र मोदी ने 15वें प्रधानमंत्री के रूप में 2014 में संभाली देश की बागडोर

नयी दिल्ली, 26 मई। देश के लोकतांत्रिक इतिहास में 26 मई का विशेष महत्व है, क्योंकि 2014 में शानदार चुनावी जीत के बाद नरेन्द्र मोदी ने आज ही के दिन देश के प्रधानमंत्री के तौर पर पहली बार शपथ ली थी। नरेन्द्र मोदी ने 2019 में लगातार दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला और इस बार भी 26 मई की तारीख का एक खास महत्व था। दरअसल 26 मई 2019 को ही राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई थी कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 30 मई को मोदी को राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। मोदी 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री बने।

26 मई 2024 को रूस के ताशकंद में शीर्ष भारतीय जिमनास्ट दीपा करमाकर महिला वॉल्ट स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया और एशियाई सीनियर चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली देश की पहली जिमनास्ट बन गयीं।

देश दुनिया के इतिहास में 26 मई की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा इस प्रकार है:-


	1739 : एक समय अफगानिस्तान भारत का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन मुगल बादशाह मोहम्मद शाह ने ईरान के नादिर शाह के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जिससे यह भारतीय साम्राज्य से अलग हो गया।
	1822 : नार्वे में गिरिजाघर में आग लगने से 122 लोगों की मौत।
	1926 : लेबनान ने संविधान अपनाया।
	1957 : बम्बई (अब मुंबई) में जनता बीमा पॉलिसी की शुरूआत हुई।
	1969 : अपोलो यान 10 के अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर लौटे।
	1973 : बहरीन ने संविधान अपनाया।
	1983 : जापान में आये 7.7 की तीव्रता वाले भूकंप से 104 लोगों की मौत।
	1987 : श्रीलंका ने जाफना में तमिल विद्रोहियों के खिलाफ अभियान छेड़ा।
	1991 : थाईलैंड में बैंकाक के निकट एक विमान हादसे में 223 लोगों की मौत।
	1999 : इसरो ने भारत, जर्मनी और दक्षिण कोरिया के तीन उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया।
	1999 : सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने श्रीलंका के खिलाफ एक दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में 318 रन की भागीदारी का विश्व रिकॉर्ड बनाया।
	2000 : हिज्बुल्ला ने घोषणा की कि उसके लड़ाके दक्षिणी लेबनान से चले जायेंगे।
	2014 : नरेन्द्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
	2018 : उत्तरी युगांडा में एक अनियंत्रित बस के एक ट्रैक्टर और ट्रक से टकरा जाने से 16 बच्चों सहित 48 लोगों की मौत।
	2022 : आंकड़ों की गोपनीयता की रक्षा करने में विफल रहने पर सोशल मीडिया मंच टि्वटर (अब एक्स) पर लगा 15 करोड़ डॉलर का जुर्माना। इसी दिन सेनेगल के एक अस्पताल में आग लगने से 11 शिशुओं की मौत।
	2023 : कैमरून में ट्रक से टकराई बस, 19 यात्रियों की मौत।
	2024 : दीपा करमाकर ने इतिहास रचा, एशियाई सीनियर चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।
	2025 : भारत के महेंद्र गुर्जर ने स्विट्जरलैंड में नॉटविल विश्व पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में पुरुषों की भाला फेंक एफ42 श्रेणी में 61.17 मीटर के प्रयास से विश्व रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। इसी दिन गाजा में इजराइली हमलों में स्कूल में शरण लेने वाले 36 लोगों सहित 52 लोगों की मौत।(भाषा)

</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779778346m_ji.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15352&amp;path_article=5</guid><pubDate>26-May-2026 12:22 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 25 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15351&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15351&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779713304av-Kav_25_May_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15351&amp;path_article=2</guid><pubDate>25-May-2026 6:18 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का दीवारों पर लिक्खा है, 25 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15350&amp;path_article=1</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15350&amp;path_article=1 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779713148eewar_25_May_2026.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15350&amp;path_article=1</guid><pubDate>25-May-2026 6:15 PM</pubDate></item><item><title>राजपथ-जनपथ : कड़वाहट के बाद कदमबोशी</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15349&amp;path_article=7</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15349&amp;path_article=7 ]]></link><description>कड़वाहट के बाद कदमबोशी

कांग्रेस पार्टी में अक्सर घर का झगड़ा चौक-चौराहों में फैल जाता है। सत्ता से दूर होने के बाद भी यह संघर्ष खत्म नहीं होता। इन दिनों प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की संभावित नई नियुक्ति को लेकर यही हो रहा है।

पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के बयानों से साफ है कि वे हाईकमान का आदेश मिलते ही इस पद को संभालने के लिये राजी हैं, वहीं वर्तमान अध्यक्ष दीपक बैज को लगता है कि लगातार पार्टी की हार के बावजूद उनके लिए कोई शक्ति हाईकमान में मौजूद है, जिससे एक कार्यकाल उनको फिर मिल जाएगा। कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष या नेता प्रतिपक्ष प्राय: मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो ही जाते हैं, ऐसा मध्यप्रदेश के जमाने से चला आ रहा है और दूसरे कई राज्यों में भी ऐसा देखा जा रहा है।

बैज और सिंहदेव के बीच बयानों में कड़वाहट के बीच रविवार 24 मई को आदिवासी मछुआरों के सम्मेलन में इन दोनों नेताओं की आपस में पहली मुलाकात हुई। बैज, सिंहदेव का पैर छूते देखे गए लेकिन उससे ज्यादा राजनीतिक शिष्टाचार का संदेश डॉ. चरण दास महंत ने दिया। बुका में सम्मेलन के दौरान जब लंच का मौका आया तो महंत ने अपनी जगह छोड़ी और बैज तथा सिंहदेव को एक साथ अगल-बगल बिठा दिया। वे इसके पहले अलग-अलग बैठने के लिए जगह ढूंढ चुके थे। डॉ. महंत ने कहा आप दोनों एक साथ बैठकर लंच करें, मैं आप दोनों के बीच में नहीं आऊँगा। डॉ. महंत की यह तरकीब काम आई और फिर दोनों नेता हंस-हंसकर बात करते हुए भी दिखे। कांग्रेस के भीतर मौजूद अंदरूनी कलह को थोड़ा शांत करने में इससे मदद मिली। देखना होगा, कि अध्यक्ष पद की रेस में इससे क्या फर्क पड़ेगा।

पंजे की असली पसंद?



पांच राज्यों के चुनाव निपटने के बाद कांग्रेस में राष्ट्रीय स्तर पर फेरबदल की चर्चा चल रही है। कुछ राज्यों में अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म हो रहा है, वहां भी नियुक्तियां होनी हैं। इनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज का कार्यकाल 10 जून को खत्म हो रहा है। उनकी जगह पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव का नाम प्रमुखता से उछला है। इन सबके बीच किसी आदिवासी को ही प्रदेश की कमान सौंपने की वकालत भी की गई है।

हालांकि प्रदेश अध्यक्ष बदलने की चर्चाओं पर प्रदेश कांग्रेस के दो बड़े नेता पूर्व सीएम भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत खुले तौर पर कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं। मगर दोनों की पसंद अलग-अलग बताई जा रही है। चर्चा है कि डॉ. महंत, सिंहदेव के पक्ष में बताए जाते हैं। जबकि पूर्व सीएम भूपेश बघेल खेमे से किसी आदिवासी को ही प्रदेश की कमान सौंपने के पक्षधर बताए जाते हैं।

यह तर्क दिया जा रहा है कि महिला कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष का पद ओबीसी से लिया गया है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष का पद आदिवासी वर्ग से होना चाहिए। इसके लिए पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के अलावा मोहला-मानपुर के विधायक इंदरशाह मंडावी का नाम भी उछला है।

प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू की दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की भी खबर है। साहू के खरगे से मधुर संबंध हैं। उन्होंने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। एक खबर यह भी है कि प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर विवाद जारी रहता है, तो नियुक्ति कुछ समय के लिए टल भी सकती है। वैसे भी जून के आखिरी हफ्ते में जिला अध्यक्षों का प्रशिक्षण शिविर बस्तर में होने जा रहा है। इसमें खरगे के अलावा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शिरकत करेंगे। देखना है आगे क्या कुछ होता है।

पार्टी के भीतर नोटिसबाजी

सरगुजा संभाग के एक जिले में भाजपा के जिलाध्यक्ष ने युवा मोर्चा के पदाधिकारी को नोटिस जारी किया है। युवा मोर्चा पदाधिकारी ने सार्वजनिक तौर पर मंच से पार्टी के विधायक की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे।

बताते हैं कि भाजयुमो नेता, महिला विधायक के करीबी रहे हैं, लेकिन ठेका-सप्लाई को लेकर दबाव बनाने पर विधायक ने भाजयुमो नेता को किनारे कर दिया। इसके बाद से भाजयुमो नेता विधायक के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। एक-दो ऑडियो भी वायरल हुए हैं, जिनमें कथित तौर पर विधायक निजी चर्चा में अपनी ही पार्टी के नेताओं पर नाराजगी जाहिर कर रही हैं।

वायरल ऑडियो के पीछे भी भाजयुमो नेता का हाथ माना जा रहा है। बताते हैं कि विधायक ने पारिवारिक सदस्य की बीमारी की वजह से चुप्पी साध रखी है, लेकिन वे कानूनी कार्रवाई भी कर सकती हैं। पार्टी के लोगों के बीच झगड़ा चल रहा है, तो कांग्रेस के लोग मजे ले रहे हैं। देखना है आगे क्या होता है।



राजधानी रायपुर में एक कार की नंबरप्लेट पर लगी ये लाइट जलती होंगी, तो नंबरप्लेट कौन पढ़ पाते होंगे?
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779712104ahant-Baij-Singhdev.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15349&amp;path_article=7</guid><pubDate>25-May-2026 5:58 PM</pubDate></item><item><title>दैनिक 'छत्तीसगढ़' का काँव-काँव, 24 मई 2026</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15348&amp;path_article=2</link><link> <![CDATA[ https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15348&amp;path_article=2 ]]></link><description></description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/sthayi_stambh/1779626086av-Kav_24_May_26_Page_6_copy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/sthayi-stambh-details.php?article=15348&amp;path_article=2</guid><pubDate>24-May-2026 6:04 PM</pubDate></item></channel></rss>