    
<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>Daily Chhattisgarh Politics</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com</link><description>Daily Chhattisgarh Feed Politics</description><item><title>क्या भारत-विरोध के मुद्दे पर लड़ा जाएगा बांग्लादेश चुनाव?</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=311932&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=311932&path_article=3]]></link><description>बांग्लादेश के छात्र नेताओं और अंतरिम सरकार के सलाहकारों की हाल की तल्ख टिप्पणियां भारत के लिए खतरे की घंटी है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वहां आगामी संसदीय चुनाव भारत विरोध के मुद्दे पर ही लड़ा जाएगा?

डॉयचे वैले पर प्रभाकर मणि तिवारी का लिखा-

बांग्लादेश में बीते साल अगस्त में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद गठित अंतरिम सरकार के सत्ता संभालने के बाद से ही देश में भारत विरोध की लहर उठने लगी थी। लेकिन अब फरवरी में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले छात्र नेताओं और सरकार के सलाहकारों की तल्ख टिप्पणियों ने दोनों देशों के आपसी संबंधों में कड़वाहट और बढ़ा दी है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बांग्लादेश के आगामी चुनाव में भारत विरोध ही सबसे बड़ा मुद्दा बनेगा।

इससे पहले जुलाई एक्यो मंच (जुलाई एकता मंच) नामक एक कट्टरपंथी संगठन ने बुधवार को ढाका स्थित दूतावास के समक्ष प्रदर्शन किया था। उसके बाद भारत ने सुरक्षा का हवाला देते हुए वीजा जारी करने की प्रक्रिया बंद कर दी थी।

हिंसा और आगजनी

वैसे तो बीते साल अगस्त से ही बांग्लादेश लगातार हिंसा और उथल-पुथल का शिकार रहा है। देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीडऩ के कई मामले भी सामने आते रहे हैं। लेकिन अब एक छात्र नेता और इंकलाब मंच के संयोजक शरीफ उस्मान हादी की मौत ने पूरे देश को एक बार हिंसा और आगजनी की चपेट में ले लिया है। उनकी हत्या से नाराज प्रदर्शनकारियों ने राजधानी ढाका में जमकर तोडफ़ोड़ और आगजनी की। उनलोगों ने भारत और हसीना-समर्थक समझे जाने वाले अखबारों के दफ्तरों पर भी धावा बोला और वहां आग लगा दी।

खुलना में तो एक पत्रकार की गोली मार कर हत्या कर दी गई। उग्र प्रदर्शनकारियों ने शेख मुजीब के धान मंडी स्थित आवास, जिसे संग्रहालय में बदला गया था, पर भी हमला किया और आग लगा दी। देश के विभिन्न हिस्सों में हुई हिंसा और प्रदर्शन में शामिल लोग शेख हसीना और भारत विरोधी नारे लगा रहे थे।

बीते साल जुलाई आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे हादी को बीते 12 दिसंबर को ढाका में गोली मार दी गई थी। हालात बिगड़ते देख कर उनको एयर एंबुलेंस से 15 दिसंबर को सिंगापुर ले जाया गया था। लेकिन बृहस्पतिवार को उनकी मौत हो गई। यह खबर फैलते ही प्रदर्शनकारी ढाका में जुटने लगे। कुछ देर में ही हिंसा की यह आग पूरे देश में फैल गई। चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायुक्त के आवास के सामने देर रात तक विरोध प्रदर्शन जारी रहा। स्थानीय पत्रकारों ने डीडब्ल्यू को बताया कि भीड़ ने उच्चायोग पर पथराव भी किया।

हालात बेकाबू होते देख कर अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने देर रात परिस्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेना को सडक़ो पर उतारा और राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने आम लोगों से धैर्य और संयम बनाए रखने और किसी अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की। बावजूद इसके ढाका समेत पूरे देश में भारी तनाव है। युनूस ने शुक्रवार को एक उच्च-स्तरीय बैठक में परिस्थिति की समीक्षा की है। मोहम्मद यूनुस ने हादी की मौत के बाद उनके सम्मान में शनिवार को एक दिन के राजकीय शोक का भी एलान किया है।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1766336942w-1.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=311932&amp;path_article=3</guid><pubDate>21-Dec-2025 10:39 PM</pubDate></item><item><title>भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी नेता चुने गए, उप नेता के लिए विजय सिन्हा के नाम पर मुहर</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=309067&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=309067&path_article=3]]></link><description>पटना, 19 नवंबर । बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिले प्रचंड बहुमत के बाद अब सरकार बनाने की कवायद तेज हो गयी है। इस बीच, बुधवार को बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। बुधवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक हुई। इस बैठक में सर्वसम्मति से सम्राट चौधरी को नेता चुन लिया गया। भाजपा प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद रहे। इस बैठक में सभी नवनिर्वाचित विधायक उपस्थित रहे। बैठक के बाद केशव प्रसाद मौर्य ने इसकी घोषणा की। उन्होंने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि बैठक में सर्वसम्मति से सम्राट चौधरी को नेता चुना गया। इसके अलावा, उप नेता के तौर पर विजय कुमार सिन्हा के नाम का भी प्रस्ताव आया जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। इससे साफ है कि भाजपा की ओर से फिर से इन दोनों नेताओं को दोहराया गया है। बुधवार की शाम को एनडीए विधायक दल की बैठक होगी। इस बैठक में नीतीश कुमार के फिर से नेता चुने जाने की संभावना है। गुरुवार को गांधी मैदान में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा। बिहार चुनाव के परिणाम को लेकर पूरे देश में उत्साह है। शपथ ग्रहण समारोह गांधी मैदान में होना निर्धारित है। इसे लेकर गांधी मैदान में व्यापक तैयारी की जा रही है। इस समारोह में आम से खास लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए उसी तरह की तैयारी की जा रही है। इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार की शाम गांधी मैदान पहुंचकर नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों का निरीक्षण किया। नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 20 नवंबर को प्रस्तावित है। निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री ने मंच पर अतिथियों के बैठने की व्यवस्था एवं अन्य उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली थी। उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनाव में एनडीए को कुल 202 सीटें मिली हैं। भाजपा ने 89 सीटों पर जीत दर्ज की। दूसरे नंबर पर नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) 85 सीटों के साथ है। वहीं, चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति (आर) का स्ट्राइक रेट भी बेहतर रहा। पार्टी ने 29 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 पर जीत दर्ज की, जो एनडीए में तीसरे नंबर की सबसे बड़ी पार्टी और पूरे बिहार में चौथे नंबर की पार्टी रही। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को पांच और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को चार सीटों पर जीत मिली है।(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1763539133lA.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=309067&amp;path_article=3</guid><pubDate>19-Nov-2025 1:28 PM</pubDate></item><item><title>बिहार एग्जि़ट पोल : चुनावी मैदान  से राजनीतिक दल क्या कह रहे हैं?</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=308535&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=308535&path_article=3]]></link><description>बिहार विधानसभा चुनावों के लिए कराए गए लगभग सभी एग़्जिट पोल बीजेपी और जनता दल (यूनाइटेड) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन की जीत दिखा रहे हैं।

एग्जि़ट पोल में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के गठबंधन वाला महागठबंधन पिछड़ता दिख रहा है। वहीं चुनावी राजनीति में पहली बार उतरे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज को ज़्यादा से ज़्यादा दो-तीन सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।

हालांकि कई बार एग्जि़ट पोल और मतदान के नतीजों में अंतर देखा गया है। इसलिए ये इसलिए ये साफ़ करना ज़रूरी है कि ये अंतिम नतीजे नहीं हैं। फिर भी राजनीतिक दलों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है।

राज्य की 243 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में हुई वोटिंग के बाद नतीजे 14 नवंबर को घोषित होंगे। लेकिन एग्जि़ट पोल के नतीजों ने एनडीए में उत्साह भर दिया है।

वहीं महागठबंधन ने इसके नतीजों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है।

एनडीए जीतेगा, जंगलराज आज भी हम सभी को डराता है

बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि एग्जि़ट पोल के नतीजे बता रहे हैं बिहार में किसकी सरकार बन रही है।

उन्होंने कहा, जनता ने प्रधानमंत्री मोदी की गारंटियों और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास मॉडल के पक्ष में मतदान किया है। महागठबंधन में राजद और कांग्रेस के रिश्ते जगजाहिर हैं। राहुल गांधी किसी भी क्षेत्रीय पार्टी को बर्दाश्त नहीं कर सकते। जनता फिर से एनडीए सरकार बना रही है।

बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और कटिहार से बीजेपी उम्मीदवार तारकिशोर प्रसाद ने कहा, ये एग्जि़ट पोल हैरान करने वाले नहीं हैं क्योंकि सीएम नीतीश कुमार ने 2005 से बिहार को बदल दिया है। हमें बिहार के मतदाताओं पर भरोसा है।

बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, एग्जि़ट पोल जनता की भावना और रुझान बताते हैं। ये एक सैंपल होता है। मैं 22-24 विधानसभा क्षेत्रों में गया था और हर जगह एक जैसे रुझान देखने को मिले। इसलिए हम कह रहे थे कि नतीजे चौंकाने वाले होंगे। संभव है कि हमारा प्रदर्शन पहले के स्ट्राइक रेट से भी बेहतर हो। नीतीश जी निश्चित रूप से मुख्यमंत्री बनेंगे। मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई भ्रम या वैकेंसी नहीं है।

उन्होंने कहा, वो (तेजस्वी यादव) अब मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बात नहीं कहेंगे। क्योंकि एग्जि़ट पोल आ चुके हैं। इस बार तेजस्वी एंड पार्टी का आकलन गलत साबित होगा। अब उन्हें और मेहनत करनी चाहिए। यह वोटिंग जंगलराज-2 को रोकने के लिए हुई थी।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि बिहार में सत्ता समर्थक रुझान है।

उन्होंने कहा, एनडीए दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आएगी। विकसित बिहार, प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के विजन की नींव होगा। जंगलराज आज भी हम सभी को डराता है; नीतीश कुमार के शासन के कारण हम निश्चिंत हैं।

उन्होंने यह भी कहा, अगर नतीजों में उनका (प्रशांत किशोर) खाता भी खुलता है तो मुझे आश्चर्य होगा। बिहार में सत्ता समर्थक रुझान है।

एनडीए में शामिल हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, मैं पहले दिन से ही कह रहा हूं कि एनडीए 160 सीटें जीतेगा और सरकार बनाएगा। एग्जि़ट पोल भी बता रहे हैं कि एनडीए को कम से कम 40 सीटें मिलेंगी।

भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि बिहार में पहले चरण के मतदान से यह साफ़ हो गया है कि एनडीए सरकार बना रही है।

उन्होंने कहा, एग्जि़ट पोल से पहले ही पहले चरण के मतदान से यह स्पष्ट हो गया कि एनडीए सरकार बनाएगी। आज़ादी के बाद पहली बार बिहार में इतना ज्यादा मतदान हुआ है।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1762958756258b4d0-bf8f-11f0-8456-eff94716b162.jpg.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=308535&amp;path_article=3</guid><pubDate>12-Nov-2025 8:15 PM</pubDate></item><item><title>बिहार चुनाव : घुसपैठ से लेकर जंगलराज तक, तेज हुई बयानबाजी, सभी दलों ने किए बड़े दावे</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=308108&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=308108&path_article=3]]></link><description>बिहार में गुरुवार को हुए पहले चरण के मतदान में शाम सात बजे तक 64.46 प्रतिशत से अधिक वोट डाले गए। अंतिम आंकड़े आने पर ये प्रतिशत और बढ़ेगा।

सुबह से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत शीर्ष राजनेताओं ने मतदाताओं से बढ़-चढक़र मतदान में हिस्सा लेने की अपील की।

एक तरफ बिहार में 121 सीटों पर मतदान चल रहा था तो वहीं दूसरी तरफ बाक़ी बची 122 सीटों पर 11 नवंबर को होने वाले मतदान के लिए चुनाव प्रचार जोरों पर था।

गुरुवार को चुनावी रैलियों में घुसपैठ, जंगलराज, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों की गूंज रही। बीजेपी नेताओं ने बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल जंगलराज कहकर संबोधित किया और दावा किया कि इस दौरान बिहार में कोई विकास नहीं हुआ।

महागठबंधन के नेताओं ने सत्ताधारी गठबंधन पर बिहार में शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य क्षेत्र में कुछ ना करने के आरोप लगाए।

मोतीहारी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बीजेपी नेता और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि उनकी सरकार बिहार से घुसपैठियों को बाहर करके रहेगी।

अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, राहुल बाबा ने कुछ महीने पहले बिहार में पदयात्रा निकाली। उन्होंने ये यात्रा किसानों, पिछड़ों या युवाओं के लिए नहीं बल्कि घुसपैठियों को बचाने के लिए निकाली। बिहार की मतदाता सूची से घुसपैठियों को निकालना चाहिए या नहीं निकालना चाहिए?

बिहार में घुसपैठिए

बिहार में चुनावों से पहले केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण किया था। इस दौरान बिहार की मतदाता सूची में मौजूद रहे 7.89 करोड़ मतदाताओं में से कऱीब 65 लाख मतदाता हटाए गए थे और 21 लाख से अधिक नए मतदाता जोड़े गए थे।

इस सूची से 3.66 लाख मतदाताओं को अयोग्य कऱार देकर हटाया गया था। हालांकि इनमें से कितने विदेशी नागरिक थे इसे लेकर कोई स्पष्ट डेटा चुनाव आयोग ने जारी नहीं किया है। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी के नेता कई बार बिहार में घुसपैठिए होने का मुद्दा उठाते रहे हैं।

अपने भाषण में अमित शाह ने जोर देकर कहा, लालू और राहुल दोनों बिहार में घुसपैठियों को घुसाना चाहते हैं और ये घुसपैठिये हमारे बिहार के युवाओं के रोजगार छीनते हैं, गरीबों का अनाज छीनते हैं, मैं राहुल और लालू को कहने आया हूं कि हम देश से और बिहार से एक-एक घुसपैठिये को निकाल कर रहेंगे। इस रैली में उन्होंने आरजेडी के दिवंगत नेता शाहबुद्दीन का भी जि़क्र किया और कहा कि आरजेडी ने शाहबुद्दीन के बेटे को चुनाव में उतारा है।

शाह ने कहा, लालू जी, आपकी तीन पीढिय़ां भी आ जाएं, अब बिहार में शाहबुद्दीन जैसे बाहुबली पैदा नहीं हो सकते हैं।

बिहार के सिवान से राष्ट्रीय जनता दल के सांसद रहे शहाबुद्दीन का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड था। अमित शाह ने ये भी कहा कि बिहार की जनता नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी को चाहती है।

दिल्ली से चल रही है बिहार की सरकार : प्रियंका गांधी

बिहार के बेनीपट्टी में एक रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि बिहार की सरकार दिल्ली से चल रही है।

प्रियंका गांधी ने कहा, आपके अपने नीतीश जी ख़ुद सरकार नहीं चला पा रहे हैं क्योंकि मोदी और अमित शाह उन पर हावी हैं। यहां डबल इंजिन की बात करते हैं, असलियत ये है कि ये सिंगल इंजिन सरकार है जिसकी चाबी मोदी जी के पास है।

उन्होंने अपने भाषण में बिहार में औद्योगिक विकास ना हो पाने का सवाल भी उठाया।

प्रियंका गांधी ने चुनावों में वोट चोरी का मुद्दा उठाते हुए कहा, मैं चुनौती देती हूं, निष्पक्ष चुनाव कराएं, देखते हैं कौन जीतता है।

सच्चाई ये है ये सारे डरपोक हैं, आपसे डरते हैं। आप अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करते हैं, आपको पकड़ कर जेल में डाल देते हैं। आपके वोट काट रहे हैं क्योंकि आपके वोट से, आपकी शक्ति से डरते हैं।

जंगलराज में जीरो विकास हुआ : नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी चुनावी रैलियों में बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल को जंगलराज बताया। उन्होंने महिलाओं के खाते में सीधे भेजे जा रहे दस हज़ार रुपए का जिक्र भी बार-बार किया

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, जंगलराज के दौरान बिहार में हुए विकास का रिपोर्ट कार्ड देखा है? पंद्रह साल के जंगलराज में बिहार में ज़ीरो विकास हुआ। मोदी ने कहा, जीरो मतलब निल बटे सन्नाटा। पंद्रह साल के जंगलराज में बिहार में कोसी नदी पर कितने पुल बने- जीरो, पंद्रह साल के जंगलराज कितने टूरिस्ट सर्किट विकसित हुए- जीरो। जीरो मतलब निल बटे सन्नाटा।

उन्होंने कहा, हम सीधे दस-दस हजार रुपए नए-नए रोजग़ार शुरू करने के लिए बहनों के खाते में जमा कर रहे हैं। अभी तक एक करोड़ चालीस लाख बहनों के खाते में ये पैसा पहुंच चुका है। आप कल्पना कीजिए अगर बिहार का सबसे भ्रष्ट परिवार और देश का सबसे भ्रष्ट परिवार, जो ज़मानत पर बाहर है, ये दोनों अगर सत्ता में होते तो ये पैसे बहनों के खाते में नहीं, ये कांग्रेस-आरजेडी के नेताओं की तिजोरी में पहुंच जाते।

असली जंगलराज दिल्ली में-राहुल गांधी

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बिहार के अररिया में एक राजनीतिक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी पार्टी की सरकार आने पर वह दुनिया की सबसे बेहतरीन यूनिवर्सिटी बिहार में खोलेंगे।

राहुल गांधी ने कहा, जिस दिन हिंदुस्तान में इंडिया गठबंधन की सरकार बनेगी और ये दिन बहुत जल्द ही आ सकता है, हमारी गारंटी है कि दुनिया की सबसे बेहतरीन यूनिवर्सिटी, नालंदा जैसी यूनिवर्सिटी, हम बिहार में खोलेंगे, पूरी दुनिया से लोग यहां पढऩे के लिए आएंगे।

राहुल ने कहा, पहले यहां नालंदा यूनिवर्सिटी थी, दुनिया से लोग यहां पढऩे आते थे। दुनिया भर से लोग बिहार में शिक्षा लेने के लिए आते थे, आज बिहार में जो ईमानदारी से पढ़ाई करता है उसके लिए पेपर लीक है, उसे परे कर दिया जाता है। झूठे लोगों को, जिनकी रिश्तेदारी है, जिनकी बीजेपी से जानकारी है उन्हें परीक्षा का पेपर दिया जाता है, हम वादा करते हैं जैसे ही हमारी सरकार बनेगी हमारा पूरा फ़ोकस शिक्षा और रोजग़ार पर होगा।

जंगलराज के आरोपों पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी ने कहा, नीतीश जंगलराज की बात करते हैं, जंगलराज दिल्ली में हैं। नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने देश में जंगलराज लागू कर रखा है, ईडी, सीबीआई, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का राज, धमकी का राज, नफऱत का राज, किसानों का उनसे हक छीनने वाला राज, मजदूरों को कुचलने वाला राज, बेरोजगारी का राज, ये है सच्चा जंगलराज जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह दिल्ली में चला रहे हैं।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1762523154H-1.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=308108&amp;path_article=3</guid><pubDate>07-Nov-2025 7:15 PM</pubDate></item><item><title>बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले जानिए इस राज्य की राजनीति से जुड़ी खास बातें</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=305310&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=305310&path_article=3]]></link><description>बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज़ हैं। पार्टियों के बीच साधे जा रहे सीटों के समीकरण के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग ने एसआईआर यानी गहन मतदाता पुनरीक्षण के आंकड़े भी जारी कर दिए हैं।

इसके मुताबिक़, बिहार में अब 7.42 करोड़ मतदाता हैं।

बिहार में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले चुनाव आयोग ने एसआईआर शुरू किया। इसकी टाइमिंग को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए जबकि चुनाव आयोग ने इसे वोटर लिस्ट को दुरुस्त करने की प्रक्रिया करार दिया।

अब ऐसा माना जा रहा है कि निर्वाचन आयोग जल्द ही चुनाव के तारीखों की घोषणा करेगा और इसके साथ ही राज्य में आचार संहिता लग जाएगी।

बिहार में चुनाव कब होंगे?

बिहार विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को ख़त्म हो रहा है। ऐसे में राज्य में चुनाव नवंबर तक होने हैं।

पिछला विधानसभा चुनाव (2020) कोरोना महामारी के साये में तीन चरणों में 28 अक्तूबर से 7 नवंबर के बीच हुआ था।

भारत में कोरोना महामारी के दौरान का ये पहला बड़ा चुनाव था और कई तरह के दिशानिर्देश इसको लेकर जारी किए गए थे।

2020 के बाद की राजनीति में क्या हुआ?

राज्य में 2020 के चुनाव के बाद एनडीए की सरकार बनी, लेकिन अगस्त 2022 में बीजेपी से रिश्ता तोड़ते हुए नीतीश कुमार ने महागठबंधन का दामन थाम लिया।

बीजेपी और जेडीयू के रिश्ते इतने तल्ख़ हो गए थे कि नीतीश कुमार ने ये बयान तक दिया कि वो मरना पसंद करेंगे लेकिन बीजेपी के साथ कभी नहीं जाएंगे।

वहीं, दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि नीतीश कुमार के लिए एनडीए के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए हैं।

लेकिन जैसा कि राजनीति में कुछ भी अंतिम सत्य नहीं होता है, उसी क्रम में चीजें एक बार फिर बदल गईं।

2024 के लोकसभा चुनाव से पहले इंडिया गठबंधन तैयार करने की कोशिश में जुटे चेहरों में नीतीश कुमार अहम नेता माने जा रहे थे।

लेकिन जनवरी, 2024 में वो एक बार फिर एनडीए में शामिल हो गए और आरजेडी से अपनी राहें अलग कर लीं।

साल 2015 का विधानसभा चुनाव जेडीयू और राष्ट्रीय जनता दल ने मिलकर लड़ा था और बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। तब ये गठजोड़ 2017 में टूट गया था।

बिहार विधानसभा की स्थिति क्या है?

बिहार में विधानसभा की कुल 243 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए किसी दल या गठबंधन के पास 122 सीटें होना जरूरी है।

बिहार में फि़लहाल जेडीयू और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के घटक दलों वाली एनडीए सरकार है और आरजेडी के तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं।

बिहार विधानसभा में अभी बीजेपी के 80 विधायक हैं, आरजेडी के 77, जेडी(यू) के 45 और कांग्रेस के 19 विधायक हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट) (लिबरेशन) के 11, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के 4, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) के 2, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के 2, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के 1 और 2 निर्दलीय विधायक हैं।

कौन-कौन से गठबंधन मैदान में हैं?

राज्य में इस बार भी अहम मुक़ाबला एनडीए बनाम महागठबंधन के बीच माना जा रहा है।

एनडीए में जेडीयू, बीजेपी, एलजेपी (आर), जीतनराम मांझी की हम (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे दल हैं।

वहीं महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस, सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई (माले), विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), जेएमएम और राष्ट्रीय एलजेपी शामिल हैं।

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम इन दोनों गठबंधन में से किसी का भी हिस्सा नहीं है। 2020 के चुनाव में उनकी पार्टी पांच सीटों पर चुनाव जीतने में सफल रही थी, लेकिन बाद में उनकी पार्टी के चार विधायक आरजेडी में शामिल हो गए थे।

सीट बंटवारा और नए खिलाड़ी कौन हैं?

अभी तक न तो एनडीए ने और न ही महागठबंधन ने सीट बंटवारे के आंकड़े जारी किए हैं। दोनों प्रमुख गठबंधनों में सीट शेयरिंग पर पेच फंसता दिख रहा है।

सीट बंटवारे को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। दोनों गठबंधनों में शामिल छोटे दल सम्मानजनक सीटों के लिए अपना दावा पेश कर रहे हैं।

नीतीश कुमार की खऱाब सेहत की ख़बरों, जेडीयू में उत्तराधिकारी पर अटकलों और प्रशांत किशोर की एंट्री और रह-रह कर चिराग पासवान के चुनाव लडऩे की ख़बरों से चुनाव और दिलचस्प होता जा रहा है।

नीतीश कुमार से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले प्रशांत किशोर से बीबीसी ने एक इंटरव्यू में जब ये सवाल किया था कि उनको कितनी सीटों पर जीत का भरोसा है तो उनका कहना था कि या तो उनकी पार्टी अर्श पर होगी या फर्श पर।

उनकी पार्टी सभी 243 सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारेगी और वो बेरोजगारी, पलायन और शिक्षा के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी।

इसके अलावा बिहार में एक और नई पार्टी का उदय हुआ है। तीन महीने पहले आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को उनकी एक फ़ेसबुक पोस्ट के बाद पार्टी से निकाल दिया था। अब उन्होंने अपनी एक नई पार्टी बना ली और इसका नाम रखा है जनशक्ति जनता दल।

श्री कृष्ण सिन्हा बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने थे। (बीबीसी)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1759509195VC.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=305310&amp;path_article=3</guid><pubDate>03-Oct-2025 10:03 PM</pubDate></item><item><title>केरल कांग्रेस ने बीड़ी की तुलना बिहार से करने पर मांगी माफी</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=302952&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=302952&path_article=3]]></link><description>5 सितंबर। बिहार में अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इससे पहले केरल कांग्रेस द्वारा बीड़ी की तुलना बिहार से करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में कांग्रेस ने माफी मांग ली। केरल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि हम देख रहे हैं कि जीएसटी दरों को लेकर पीएम मोदी के चुनावी हथकंडे पर हमारे कटाक्ष को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। अगर आपको ठेस पहुंची हो तो हमें खेद है। इससे पहले केरल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि बीड़ी और बिहार शब्द बी से शुरू होते हैं। अब इसे पाप नहीं माना जा सकता। 

साथ ही उन्होंने जीएसटी का स्लैब भी शेयर किया था, जिसमें तंबाकू, सिगार और सिगरेट पर जीएसटी 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि बीडी पर टैक्स 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद केरल कांग्रेस ने पोस्ट डिलीट कर दिया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) इस मुद्दे पर कांग्रेस पर हमलावर है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केरल कांग्रेस के पोस्ट को शेयर करते हुए कहा, पहले हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान और अब पूरे बिहार का अपमान, यही है कांग्रेस का असली चरित्र, जो बार-बार देश के सामने उजागर हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि बिहार की जनता का घोर अपमान। कांग्रेस बिहारियों की तुलना बीड़ी से करती है। पहले भी तेजस्वी यादव और राहुल गांधी रेवंत रेड्डी जैसे लोगों का साथ देते रहे हैं, जिन्होंने बिहार और बिहारियों को गाली दी थी। कांग्रेस बिहार विरोधी है। राजद बिहार विरोधी है। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1757063967onngress.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=302952&amp;path_article=3</guid><pubDate>05-Sep-2025 2:49 PM</pubDate></item><item><title>दिल्ली चुनाव में कैसे गिरा आम आदमी पार्टी का वोट शेयर, कांग्रेस ने कहां बिगाड़ा 'खेल'</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=280648&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=280648&path_article=3]]></link><description>जैस्मिन निहालानी

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 27 साल बाद जीत हासिल कर वापसी की है. पार्टी ने विधानसभा की 70 सीटों में से 48 पर जीत दर्ज की है.

बीजेपी ने लगातार चौथी बार दिल्ली की कुर्सी पर बैठने का आम आदमी पार्टी का सपना पूरा नहीं होने दिया. बाकी 22 सीटें आम आदमी पार्टी (आप) को मिलीं.

इससे पहले साल 2015 में आप ने 67 और 2020 में 62 सीटें जीती थीं.

साल 1998 से 2013 तक यानी 15 साल तक दिल्ली की सत्ता पर काबिज रही कांग्रेस लगातार तीसरे विधानसभा चुनाव में भी कोई सीट नहीं जीत पाई.

दिल्ली में बीजेपी ने पिछले कुछ वर्षों से 34 से 38 फ़ीसदी का एक स्थिर वोट शेयर बनाए रखा था, लेकिन इस बार वो इसे बढ़ाकर 45.6 फ़ीसदी तक ले गई है.

जबकि आम आम आदमी पार्टी का वोट शेयर 10 फ़ीसदी गिरकर 53.6 से 43.6 फ़ीसदी पर पहुंच गया है.



वहीं कांग्रेस का वोट शेयर 2020 के 4.3 फ़ीसदी से बढ़ कर 6.3 फ़ीसदी पर पहुंच गया है.

किस सीट पर किसका कैसा प्रदर्शन

लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों में आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़ों से तुलना करें तो इस बार आप को 65 सीटों पर वोट शेयर का नुक़सान हुआ. वहीं पार्टी को सिर्फ़ पांच सीटों पर वोट शेयर में बढ़ोतरी हासिल हो सकी.

दूसरी ओर बीजेपी 59 सीटों पर अपना वोट शेयर बढ़ाने में कामयाब रही. सिर्फ़ सात सीटों पर इसके वोट शेयर में गिरावट दर्ज की गई है.

आप के वोट शेयर में सबसे ज़्यादा गिरावट ओखला, संगम विहार और मुस्तफ़ाबाद सीटों पर दिखाई दी. पार्टी ने इन सभी तीन सीटों पर साल 2020 में 50 फ़ीसदी से अधिक वोट हासिल किए थे.

जिन सीटों पर इसका वोट शेयर बढ़ा उनमें बदरपुर, गांधीनगर और सीलमपुर शामिल हैं.

आप को साल 2020 में 48 सीटों पर 50 फ़ीसदी से अधिक वोट मिला था. इस चुनाव में उसे सिर्फ 12 सीटों पर ही 50 फ़ीसदी से अधिक वोट मिल सके हैं.



झुग्गी-झोपड़ियों की अधिकता वाली सीटों पर वोटिंग पैटर्न

दिल्ली विधानसभा की जिन सीटों पर सबसे ज़्यादा झुग्गी झोपड़ियां हैं वहां साल 2020 में आम आदमी पार्टी के सबसे ज़्यादा वोट मिले थे. लेकिन इस विधानसभा चुनाव में यह तस्वीर बदल गई.



दिल्ली में 675 स्लम कॉलोनियां हैं, जहां तीन लाख परिवार रहते हैं. ये स्लम कॉलोनियां 62 विधानसभा क्षेत्रों में फैली हुई हैं.

इन 62 में से दस विधानसभा सीटों पर इस आबादी का क़रीब 40 फ़ीसदी हिस्सा रहता है. इन सभी दस सीटों पर 2020 में आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल की थी.

2025 में बीजेपी ने इनमें से सात सीटें जीत लीं. सबसे अधिक झुग्गी झोपड़ियों वाली जिन सीटों पर बीजेपी को जीत मिली हैं उनमें मोती नगर, वजीरपुर और मॉडल टाउन भी शामिल हैं.

इन सीटों पर कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी का खेल बिगाड़ा



कांग्रेस 67 सीटों पर अपनी ज़मानत गंवाने के बावजूद 14 सीटों पर आप का खेल बिगाड़ने में कामयाब रही.

आसान शब्दों में कहें तो जिन 14 सीटों पर आप दूसरे और कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही (एक सीट पर कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही और आप तीसरे नंबर पर), वहां इसका वोट शेयर विजेता उम्मीदवारों की जीत के अंतर से ज़्यादा था.

इनमें तीन प्रमुख सीटें शामिल हैं. ये हैं- नई दिल्ली, जंगपुरा और ग्रेटर कैलाश. यहां आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता बीजेपी उम्मीदवारों से हार गए.

नई दिल्ली सीट पर प्रवेश वर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को 6.6 परसेंटेज वोटों के अंतर से हराया. यहां कांग्रेस के संदीप दीक्षित का वोट शेयर 7.4 फ़ीसदी था.

जंगपुरा में मनीष सिसोदिया बीजेपी के उम्मीदवार से 0.8 परसेंटेज प्वाइंट वोट के अंतर से हार गए. यहां कांग्रेस का वोट शेयर 8.6 फ़ीसदी रहा.

ग्रेटर कैलाश में, सौरभ भारद्वाज बीजेपी की शिखा रॉय से तीन फ़ीसदी वोटों के अंतर से हार गए. यहां कांग्रेस का वोट 6.4 फ़ीसदी रहा.

मुस्लिमों की ख़ासी आबादी वाली सीट मुस्तफ़ाबाद में बीजेपी के मोहन सिंह बिष्ट ने 42 फ़ीसदी वोट शेयर हासिल किया.

यहां आम आदमी पार्टी के आदिल अहमद ख़ान दूसरे नंबर पर रहे और एआईएमआईएम के ताहिर हुसैन (आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद) ने 16.6 फ़ीसदी वोट हासिल किए. जबकि इस सीट पर जीत का अंतर 8.7 फ़ीसदी ही है. यानी ताहिर हुसैन ने इससे क़रीब दोगुना ज़्यादा वोट हासिल किया.

इंडिया गठबंधन के कुछ नेताओं ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की हार पर कहा है कि पार्टी को कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए था.

वहीं कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक्स पर पार्टी का बचाव करते हुए लिखा, कथित लिबरल समुदाय के एक वर्ग का भावनाओं में बह जाना अनोखा है. उन्होंने विपक्षी एकता पर आप को ये लेक्चर तब नहीं दिया था, जब वो चुनाव लड़ने और सांप्रदायिक विरोधी और धर्मनिरपेक्ष वोटों को कमज़ोर करने के लिए गोवा, गुजरात और हरियाणा पहुंच गई थी.

पवन खेड़ा ने दावा किया है कि बीजेपी का मुक़ाबला करने और उसे हराने के लिए कांग्रेस पार्टी ज़्यादा ताक़तवर होकर उभर सकती है. (bbc.com/hindi)

(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1739114720BC-1.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=280648&amp;path_article=3</guid><pubDate>09-Feb-2025 8:55 PM</pubDate></item><item><title>एनसीआर में छाई स्मॉग की चादर, पारे में आई गिरावट, दिल्ली में औसत एक्यूआई 349</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=267626&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=267626&path_article=3]]></link><description>नोएडा, 13 नवंबर। दिल्ली एनसीआर के मौसम में आज सुबह से ही काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। पूरे एनसीआर को धुंध की एक चादर ने ढक रखा है। स्मॉग के चलते पारे में भी गिरावट दर्ज की गई है और सुबह के वक्त लोगों को ठंड का एहसास भी हो रहा है। मौसम विभाग की माने तो आने वाले कुछ दिनों तक मौसम ऐसा ही बना रहेगा और लोगों को स्मॉग और प्रदूषण की दोहरी मार झेलने को मिलेगी।

दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद में सुबह के समय स्मॉग की घनी चादर देखने को मिली। अगर तापमान की बात करे तो पिछले 24 घंटों में न्यूनतम तापमान आज 17.0 डिग्री सेल्सियस और कल सुबह 0.9 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के साथ 17.9 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग का मानना है कि दिन के कुछ समय तक धुंध छाए रहने से और सूर्य की रोशनी बंद होने से अधिकतम तापमान में गिरावट हो सकती है।

वही अब स्मॉग के साथ बढ़ते प्रदूषण की दोहरी मार भी लोगों को झेलनी पड़ सकती है। केंद्रीय प्रदूषण एवं नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार राजधानी दिल्ली में बुधवार सुबह 6 बजे तक औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक 349 अंक बना हुआ है। जबकि गाजियाबाद में 276, ग्रेटर नोएडा में 289 और नोएडा में 269 अंक बना हुआ है। दिल्ली के आया नगर में सबसे अधिक 406 एक्यूआई इस समय बना हुआ है। मौसम विभाग के मुताबिक राजधानी दिल्ली के अधिकतर इलाकों में सुबह 6 बजे तक एक्यूआई लेवल 300 से ऊपर और 400 के बीच में बना हुआ है।

दिल्ली के आया नगर में सबसे अधिक 406 एक्यूआई लेवल इस समय बना हुआ है। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में धुंध की चादर से एनसीआर के लोगों का सामना होगा। हवा की गति में भी गिरावट आने से सुबह से लेकर काफी देर तक यह स्मॉग वातावरण में बना रहेगा।(आईएएनएस)

</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1731481203ans3.PNG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=267626&amp;path_article=3</guid><pubDate>13-Nov-2024 12:30 PM</pubDate></item><item><title>पहले जेल फिर बेल और अब राजनीतिक खेल खेलने वाले सीएम हो गए हैं केजरीवाल : आरपी सिंह </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=259795&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=259795&path_article=3]]></link><description>जम्मू, 15 सितंबर । दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को ऐलान किया है कि वह दो दिन के बाद सीएम पद से इस्तीफा दे देंगे। उनके इस ऐलान पर भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि कोर्ट का आदेश ही ऐसा है कि उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, वह पहले मुख्यमंत्री हैं, जो पहले जेल वाले सीएम थे, फिर बेल वाले सीएम हुए और अब राजनीति के खेल वाले सीएम हो गए हैं। केजरीवाल राजनीति कर रहे हैं और लोगों की सहानुभूति लेना चाहते हैं, इसलिए वह ऐसे बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, वह जेल में रहकर सीएम पद पर बने रहे, इसके बाद जब वह बेल पर बाहर आए, तब भी सीएम बनने की बात करते रहे। कोर्ट के आदेश के बाद आज उन्हें लगा कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ सकता है। ये उनकी मजबूरी है, क्योंकि कोर्ट ने कहा है कि वे किसी भी कागज पर साइन नहीं कर सकते, कैबिनेट मीटिंग नहीं बुला सकते और मुख्यमंत्री कार्यालय में नहीं जा सकते, इसलिए अब वह यह खेल खेल रहे हैं और लोगों की सहानुभूति चाहते हैं। भाजपा नेता ने आम आदमी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा, दिल्ली और देश की जनता उनके खेल से बखूबी वाकिफ है। काठ की हांडी एक बार चढ़ती है, बार-बार नहीं। भाजपा प्रवक्ता आरपी सिंह ने हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के चुनाव अभियान को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, जम्मू-कश्मीर की जनता सबसे पहले अरविंद केजरीवाल से यह पूछेगी कि उनका आर्टिकल 370 और 35ए पर क्या रुख है। नेशनल कॉन्फ्रेंस उनकी सहयोगी पार्टी है और उसे अपने घोषणापत्र में कहा है कि वे राज्य में 1953 की स्थिति को बहाल करेंगे और एक अलग प्रधानमंत्री बनाएंगे। इसके बार में केजरीवाल का क्या कहना है?

(आईएएनएस)

</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/17264043061.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=259795&amp;path_article=3</guid><pubDate>15-Sep-2024 6:15 PM</pubDate></item><item><title>कैसी है यूपी सरकार की सोशल मीडिया पॉलिसी</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=257269&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=257269&path_article=3]]></link><description>उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने अपनी न्यू डिजिटल मीडिया पॉलिसी को मंजूरी दे दी है. इस नीति के तहत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर इन्फ्लुएंसर्स के प्रोत्साहन के कई प्रावधान हैं.

डॉयचे वैले पर समीरात्मज मिश्र की रिपोर्ट-

उत्तर प्रदेश सरकार की नई सोशल मीडिया पॉलिसी कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही चर्चा में आ गई. चर्चा में आने के दो कारण हैं. एक तो उन सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को खुले तौर पर सरकार की ओर से लाखों रुपये देने का प्रावधान किया गया है जो सरकार के पक्ष में पोस्ट डालेंगे. साथ ही अभद्र, आपत्तिजनक और राष्ट्र-विरोधी कंटेंट पोस्ट करने वालों के लिए दंड का प्रावधान किया गया है. यह दंड छोटा-मोटा नहीं बल्कि उम्र कैद की सजा तक हो सकती है.

यूपी के सूचना विभाग के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में लिखा है, किसी भी स्थिति में सामग्री अभद्र, अश्लील या राष्ट्रविरोधी नहीं होनी चाहिए.

इसमें कहा गया है, प्रदेश में विकास की विभिन्न विकासपरक, जन कल्याणकारी/ लाभकारी योजनाओं/ उपलब्धियों की जानकारी एवं उससे होने वाले लाभ को प्रदेश की जनता तक डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म्स एवं इसी प्रकार के अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के माध्यम से पहुंचाए जाने हेतु उत्तर प्रदेश डिजिटल मीडिया नीति, 2024 तैयार की गई है.

कंटेंट बनाने वालों को सरकार कैसे देगी प्रोत्साहन
राज्य मंत्रिमंडल ने 27 अगस्त को इस न्यू डिजिटल मीडिया पॉलिसी, 2024 को मंजूरी दे दी है. इसके तहत अब डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म और इन्फ्लुएंसर्स सरकार के विकास कार्यों और योजनाओं की उपलब्धियों का प्रचार करने वाले वीडियो या अन्य कंटेंट बनाकर हर महीने आठ लाख रुपये तक कमा सकते हैं.

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, डिजिटल माध्यम जैसे एक्स (पूर्व में ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम एवं यूट्यूब पर भी प्रदेश सरकार की योजनाओं/ उपलब्धियों पर आधारित कंटेंट/ वीडियो/ ट्वीट/ पोस्ट/ रील्स को प्रदर्शित किए जाने के लिए इनसे संबंधित एजेंसी/ फर्म को सूचीबद्ध कर विज्ञापन निर्गत किए जाने हेतु प्रोत्साहन दिया जायेगा.

सरकार का मानना है कि इस नीति से देश के विभिन्न भागों या विदेशों में रहने वाले राज्य के निवासियों को बड़ी संख्या में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी. किसे कितने पैसे मिलेंगे, यह तय करने के लिए सरकार ने एक्स (पूर्व में ट्विटर), फेसबुक, इंस्टाग्राम एवं यूट्यूब में से प्रत्येक को सब्सक्राइबर/ फॉलोअर्स के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है और उसी के अनुसार भुगतान की राशि तय की गई है.

किसे माना जाएगा इंफ्लुएंसर
डिजिटल इंफ्लुएंसर उन लोगों को कहा जाता है जिनके सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर होते हैं या जिनके यूट्यूब चैनल के काफी ज्यादा सब्सक्राइबर होते हैं. ये लोग अपनी पहुंच का इस्तेमाल तमाम तरह के उत्पादों, विचारों और राजनीतिक मान्यताओं को समर्थन देने या उनसे पैसा कमाने के लिए करते हैं. इस नीति के जरिए अब यूपी सरकार भी इनकी पहुंच का फायदा लेने और उन्हें उपकृत करने की योजना पर काम करने जा रही है.

लेकिन इस नीति को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं वो ये कि सरकार के कामकाज को प्रोत्साहित करने के एवज में सरकार भले ही पैसा दे लेकिन जिस तरह के कंटेंट को लेकर सजा के प्रावधान किए गए हैं, वो क्या उचित हैं?

हालांकि सोशल मीडिया में अनुचित कंटेंट या आपत्तिजनक कंटेंट की स्थिति में अभी भी आईटी एक्ट की धारा 66 (ई) और 66 (एफ) के तहत कार्रवाई की जाती है लेकिन अब राज्य सरकार पहली बार ऐसे मामलों पर नियंत्रण के लिए नीति ला रही है जिसके तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल से लेकर उम्र कैद (राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में) तक की सजा का प्रावधान है.

इसके अलावा अभद्र और अश्लील सामग्री पोस्ट करने पर आपराधिक मानहानि के मुकदमे का सामना भी करना पड़ सकता है. केंद्र सरकार ने ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए तीन साल पहले इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड जारी किए थे.

विपक्ष को इसमें क्या समस्या दिख रही है
कांग्रेस पार्टी ने इस नई नीति के माध्यम से बीजेपी सरकार पर डिजिटल मीडिया पर कब्जा करने का आरोप लगाया है. यूपी कांग्रेस ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा है, यूपी सरकार सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के लिए नई स्कीम लेकर आई है. इसके मुताबिक सरकार के काम का प्रचारप्रसार करने वाले को महीने के 8 लाख रुपये तक मिल सकते हैं और इनका विरोध करने वालों को सजा भी भुगतना पड़ सकता है. यानी, डिजिटल मीडिया पर सरेआम कब्जा. सरकार अब बिना किसी डर या संकोच के सरेआम मीडिया को गोद लेने पर उतारू हो गई है. यह लोकतंत्र के लिए खतरा नहीं तो और क्या है?

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शायराना अंदाज में ट्वीट करते हुए लिखा है, हम बांट रहे हैं दाने, गाओ हमारे गाने, जेल तुम्हारा घर है, अगर हुए बेगाने! अखिलेश यादव इसे तरफदारी के लिए दी जाने वाली भाजपाई घूस और जनता के टैक्स के पैसे से आत्मप्रचार को एक नए तरीके का भ्रष्टाचार बता रही है.

पहले भी सोशल मीडिया पोस्ट के कारण हुई है कार्रवाई
इस नीति पर सवाल ये भी उठ रहे हैं कि जब सरकारें छोटी-छोटी बातों को आपत्तिजनक, अपमानजनक मानते हुए पहले ही एफआईआर दर्ज कर रही हैं, लोगों को गिरफ्तार कर ही रही हैं तो फिर यह कानून बनाने की जरूरत क्यों पड़ गई? पिछले कुछ सालों में हजारों ऐसे मामले आए हैं जिनमें सरकारों की आलोचना करने की वजह से लोगों के खिलाफ और यहां तक कि पत्रकारों के खिलाफ भी मामले दर्ज हुए, उन्हें गिरफ्तार किया गया. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अकेले उत्तर प्रदेश में यह संख्या हजार से ऊपर है. ये बात अलग है कि कोर्ट में ऐसे मामलों को अहमियत नहीं मिली.

हालांकि यह स्थिति केवल यूपी में ही या बीजेपी शासित राज्यों में ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी है. पहले भी इस तरह के कई उदाहरण देखने में आए हैं. साल 2012 में मुंबई में एक कार्टून बनाने के कारण असीम त्रिवेदी को गिरफ्तार किया गया था और उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह की धाराएं लगाई गई थीं.

यूपी सरकार की नई सोशल मीडिया पॉलिसी पर वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह कहते हैं, यह तो एक तरह से लोगों को धमकी देना है कि यदि सरकार के खिलाफ कुछ लिखा तो खैर नहीं. क्योंकि अभद्र, आपत्तिजनक, राष्ट्रविरोधी जैसी बातें कौन तय करेगा, ये अफसर ही तय करेंगे. और ये सरकार या उनके खिलाफ कुछ लिखने पर, वीडियो बनाने पर, कार्टून बनाने पर ऐसे आरोप लगा सकते हैं, एफआईआर कर सकते हैं, जेल में डाल सकते हैं. उम्र कैद जैसी बात तो सीधे तौर पर डराने के लिए ही है. बिल्कुल वही है जो अठारहवीं सदी में ब्रिटिश लाए थे - वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट. लेकिन उस जमाने में उसका विरोध हुआ, एक्ट वापस लेना पड़ा.

शीतल पी सिंह कुछ साल पहले मिर्जापुर की घटना का जिक्र करते हुए कहते हैं कि स्कूल में मिड डे मील के नाम पर बच्चों को नमक रोटी खिलाने की खबर छापने पर पत्रकार पवन जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया गया था. वो कहते हैं, हाथरस की घटना कवर करने वाले पत्रकार सिद्दीक कप्पन को करीब ढाई साल बात जमानत मिली. किसी घटना को कवर करने आए पत्रकार को किस तरह आतंकवादी बनाने की कोशिश की गई. तो यह नियम सरकार के हाथ में एक और हथियार दे देगा.

सोशल मीडिया पर कई लोग ऐसे भी हैं जो किसी राजनीतिक विचारधारा से संबंध नहीं रखते लेकिन अकसर सरकारी मशीनरी और प्रशासनिक गड़बड़ियों को उजागर करते हैं. ऐसे लोगों के लिए भी मुसीबत खड़ी हो सकती है. इसके नतीजातन सोशल मीडिया पर सरकार के पक्ष में ही कंटेंट की भरमार हो सकती है. क्योंकि ऐसा करने वालों को फॉलोवर भी मिलेंगे और सरकार से पैसा भी. (dw.com)

</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1725000644w.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=257269&amp;path_article=3</guid><pubDate>30-Aug-2024 12:20 PM</pubDate></item><item><title>हरियाणा में सीएम फेस की रेस में भूपेंद्र हुड्डा, कुमारी शैलजा के बीच खींचतान : भाजपा</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=256535&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=256535&path_article=3]]></link><description>नई दिल्ली, 25 अगस्त। हरियाणा में विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। राज्य में कांग्रेस का मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा यह अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं, भाजपा का कहना है कि कांग्रेस में भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी शैलजा के बीच मुख्यमंत्री का चेहरा बनने की खींचतान चल रही है।

भाजपा नेता आर.पी. सिंह ने कहा कि कांग्रेस में अंदरूनी फूट है। मुख्यमंत्री की दौड़ में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुमारी शैलजा के बीच खींचतान चल रही है। उन्होंने कहा, हरियाणा में कांग्रेस पार्टी दो खेमों में बंट चुकी है। राहुल गांधी के लिए अब खुली चुनौती है कि क्या वह दलित चेहरा कुमारी शैलजा को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाते हैं या फिर हुड्डा के साथ जाएंगे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी हमेशा दलितों के हक की बात करते रहते हैं। वह कहते हैं कि कांग्रेस पार्टी दलितों, पिछड़ों और वंचितों को आगे बढ़ाएगी। अब वह एक दलित व्यक्ति को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करेंगे या नहीं यह फैसला उनकी पार्टी को करना है। लेकिन एक बात तो एकदम स्पष्ट है कि कांग्रेस के अंदर फूट है। कांग्रेस चाहे किसी को भी मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट करे, जनता एक बार फिर हरियाणा में भाजपा की सरकार बनाएगी।

दरअसल, कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा से मीडिया ने पूछा था कि क्या आप हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं? इस पर उन्होंने कहा था, क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर लोगों की महत्वाकांक्षा होती है और वह प्रदेश स्तर पर काम करना चाहती हैं। वहीं, साल 2005 से 2014 तक हरियाणा के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा सीएम चेहरे के रूप में सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं।

हरियाणा में नई सरकार के गठन के लिए 1 अक्टूबर को सभी 90 सीटों पर मतदान होगा। वहीं, 4 अक्टूबर को चुनावी नतीजे घोषित किए जाएंगे। चुनावों के लिए अधिसूचना 5 सितंबर को जारी की जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 12 सितंबर और नामांकन पत्रों की जांच की अंतिम तिथि 13 सितंबर है। नाम वापसी की अंतिम तिथि 16 सितंबर होगी।(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/172460331502408253211809.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=256535&amp;path_article=3</guid><pubDate>25-Aug-2024 9:58 PM</pubDate></item><item><title>बिहार में अपराधियों की बहार है, डबल इंजन की सरकार है : राजद </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255401&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255401&path_article=3]]></link><description>पटना, 18 अगस्त। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को आदेश दिया है कि वह अपने राज्य की कानून व्यवस्था की जानकारी हर दो घंटे पर भेंजे। गृह मंत्रालय के इस आदेश पर राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने प्रतिक्रिया दी। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने रविवार को कहा है कि गृह मंत्रालय को पहले उन राज्यों से रिपोर्ट मंगानी चाहिए, जहां डबल इंजन की सरकार है। जहां-जहां डबल इंजन की सरकार है, वहां की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को एक-एक घंटे पर मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को विपक्षी राज्यों में लॉ एंड ऑर्डर की समस्या दिखती है। मणिपुर के समय इनको नहीं दिखा, लेकिन बंगाल में इनको खूब लॉ एंड ऑर्डर की समस्या दिख रही है। यह दोहरी नीति है। उन्होंने कहा कि नया कानून बना देने से समस्या का समाधान नहीं है, इससे अपराध कम नहीं होता। गृह मंत्री को लॉ एंड ऑर्डर से ज्यादा चिंता अपनी सियासत की चिंता है। उनकी प्राथमिकता विपक्ष के नेताओं को फंसाने और बदनाम करने की है, उन्हें लॉ एंड ऑर्डर की समस्या का समाधान करने से मतलब नहीं है। वह विपक्ष की सरकार को गिराना चाहते हैं। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर है। शासन-प्रशासन का इकबाल खत्म हो गया। तेजस्वी यादव हर रोज क्राइम बुलेटिन जारी कर रहे हैं। बिहार में अपराध-भ्रष्टाचार चरम पर है। बिहार में अपराधियों की बहार है, डबल इंजन की सरकार है। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार रात एक आदेश जारी कर कहा था, अब से देश के सभी राज्यों को हर 2 घंटे में केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपने यहां की कानून-व्यवस्था की जानकारी देनी होगी। यह आदेश कोलकाता में महिला ट्रेनी डॉक्टर की हत्या मामले को देखते हुए काफी अहम माना जा रहा है। आदेश में कहा गया है कि अब से हर राज्य को अपने यहां की कानून व्यवस्था की रिपोर्ट देनी होगी। यह आदेश राज्यों में बढ़ रहे अपराध को देखते हुए जारी किया गया है।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1723971152ajat.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255401&amp;path_article=3</guid><pubDate>18-Aug-2024 2:22 PM</pubDate></item><item><title>दिल्ली में चंपई सोरेन ने भाजपा में शामिल होने पर तोड़ी चुप्पी, एक्स हैंडल से हटाया पार्टी का नाम </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255396&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255396&path_article=3]]></link><description>नई दिल्ली, 18 अगस्त । झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री चंपई सोरेन के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चा तेज है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह जेएमएम के 6 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इन्हीं चर्चाओं के बीच चंपई सोरेन रविवार को राजधानी दिल्ली पहुंचे। पूर्व सीएम चंपई सोरेन से पत्रकारों ने जब भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने से जुड़ा सवाल किया तो उन्होंने बताया, मैं अपने निजी काम के लिए दिल्ली आया हूं। मेरे बच्चे यहां रहते हैं, उनसे मिलने आया हूं। इसलिए दिल्ली आना-जाना लगा रहता है। इसी वजह से आज भी दिल्ली आया हूं। भाजपा में शामिल होने के सवाल पर चंपई सोरेन ने मीडिया के सामने एक बार फिर दोहराया, अभी मैं जहां पर हूं, वहीं हूं। कोलकाता में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के सवाल पर चंपई सोरेन ने कहा , मेरी कोलकाता में किसी से मुलाकात नहीं हुई है। मैं निजी काम से दिल्ली आया हूं। बाद में आप लोगों को बताउंगा। दूसरी ओर चंपई सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स अपनी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का नाम हटा दिया है। वहीं, उनके पैतृक गांव स्थित घर से भी पार्टी का झंडा हटाया गया है। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और जेएमएम नेता चंपई सोरेन के भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि झारखंड सरकार को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। संजय राउत ने सवालिया लहजे में पूछा, झारखंड से जो खबरें आ रही है, वहां क्या हो रहा है? हेमंत सोरेन को तकलीफ में लाने के लिए एक बार फिर से वहां पर कोशिश की जा रही है। उनकी एक मजबूत सरकार है, लेकिन, उसमें से कुछ लोगों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। अगर चुनाव घोषित कर देते तो मॉडल कोर्ड ऑफ कंडक्ट लागू हो जाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद चंपई सोरेन 2 फरवरी 2024 से 3 जुलाई 2024 तक झारखंड के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। हालांकि, हेमंत सोरेन ने जमानत पर जेल से बाहर निकलने के बाद फिर से सीएम की कुर्सी संभाली थी। उस समय भी चंपई सोरेन की सीएम पद से विदाई के बाद नाराजगी की खबरें सामने आई थी। दावा तो यहां तक किया गया था कि काफी मनाने के बाद चंपई सोरेन ने हेमंत सोरेन के मंत्रिमंडल में शामिल होने का प्रस्ताव स्वीकार किया था।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1723970280hampai_Soren.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255396&amp;path_article=3</guid><pubDate>18-Aug-2024 2:08 PM</pubDate></item><item><title>आर्टिकल 370 पर उमर अबदुल्ला के बयान पर भाजपा को आपत्ति, पूर्व उप मुख्यमंत्री बोले- गुमराह कर रहे नेशनल कॉन्फ्रेंस उपाध्यक्ष </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255390&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255390&path_article=3]]></link><description>जम्मू, 18 अगस्त । नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला के 370 को हटाने का वादा करते बयान पर भाजपा ने घोर आपत्ति जताई है। पूर्व उप मुख्यमंत्री कविन्दर गुप्ता ने इसे गुमराह करने की कोशिश करार दिया है। उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद आर्टिकल 370 को खत्म करने के संबंध में विधानसभा में प्रस्ताव लाया जाएगा। ये बयान भारतीय चुनाव आयोग के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद सामने आया था। इस पर ही कविन्दर गुप्ता ने कहा, लोगों को गुमराह करने का एक नया तरीका है। अनुच्छेद 370 हटाने से पहले कई तरह के दावे किए गए। इस प्रकार का प्रावधान विधानसभा में नहीं होगा। वहीं, गुप्ता जम्मू में भारतीय जनता पार्टी की आगामी चुनावों को लेकर बुलाई गई बैठक में पहुंचे थे। इस बैठक में जी. किशन रेड्डी, तरुण चुघ और आशीष सूद शामिल हुए। बैठक में चुनाव को लेकर विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। बता दें कि जम्मू कश्मीर का विधानसभा चुनाव तीन चरणों में होगा। चुनाव का पहला चरण 18 सितंबर, दूसरा चरण 25 सितंबर और तीसरे चरण का मतदान एक अक्टूबर को होगा। मतगणना चार अक्टूबर को होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उम्मीदवारों व राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों को समुचित सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दे दिए गए हैं। जम्मू-कश्मीर में कुल 90 निर्वाचन क्षेत्र हैं। इसमें से 74 जनरल, 9 एसटी और 7 एससी हैं। मतदाताओं की संख्या 87.09 लाख है। इसमें 44.46 लाख पुरुष और 42.62 लाख महिला मतदाता हैं। जम्मू-कश्मीर में युवा मतदाताओं की संख्या 20 लाख है। चुनाव आयोग ने बताया था कि जम्मू कश्मीर में 87.09 लाख मतदाता हैं। इनमें पहली बार वोट देने वाले युवा मतदाताओं की संख्या 3.71 लाख है। जबकि कुल 20.7 लाख युवा मतदाता हैं, जिनकी आयु 20 से 29 वर्ष के बीच है। मतदाता सूची बनाने का काम जारी है। 19 अगस्त को अमरनाथ यात्रा समाप्त होगी और 20 अगस्त को फाइनल मतदाता सूची तैयार हो जाएगी। सभी राजनीतिक दलों को इसकी कॉपी भिजवाई जाएगी।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1723969115ash.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255390&amp;path_article=3</guid><pubDate>18-Aug-2024 1:48 PM</pubDate></item><item><title>झारखंड और महाराष्ट्र केंद्र सरकार के लिए महत्वपूर्ण नहीं : संजय राउत </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255275&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255275&path_article=3]]></link><description>नई दिल्ली, 17 अगस्त । जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने महाराष्ट्र और झारखंड के लिए तारीखें तय न करने पर केंद्र पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने चुनाव टाल दिए हैं। झारखंड और महाराष्ट्र उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री 15 अगस्त को लाल किले से एक राष्ट्र एक चुनाव की बात करते हैं और पीएम नरेंद्र मोदी चार राज्यों में एक साथ चुनाव नहीं करा सकते। जब उनसे इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इसका कारण बारिश और त्यौहार है। उन्होंने आगे कहा कि शिवसेना ने महाराष्ट्र को तीन मुख्यमंत्री दिए हैं और यहां की राजनीतिक परंपरा बहुत शानदार रही है। देवेंद्र फडणवीस को यह बात समझनी चाहिए। फडणवीस ने सूद (बदले) की राजनीति शुरू की है, लेकिन शिवसेना ऐसी राजनीति में विश्वास नहीं करती। बता दें कि हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों का ऐलान हो चुका है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में मतदान होगा, जबकि हरियाणा में एक ही चरण में मतदान होगा। दोनों के चुनाव नतीजे 4 अक्टूबर को एक साथ घोषित किए जाएंगे। जम्मू-कश्मीर में पहले चरण की अधिसूचना 20 तारीख को जारी होगी और 18 सितंबर को मतदान होगा। दूसरे चरण का मतदान 25 सितंबर और तीसरे चरण का मतदान 1 अक्टूबर को होगा। हरियाणा की बात करें तो यहां एक ही राउंड में 1 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 4 तारीख को जम्मू-कश्मीर के साथ नतीजे घोषित किए जाएंगे। हरियाणा में मतदाताओं की अंतिम सूची 27 अगस्त को जारी की जाएगी। राज्य में 2.1 करोड़ मतदाता वोट डालेंगे। राज्य में कुल 20 हजार 629 पोलिंग बूथ होंगे। सीईसी राजीव कुमार ने कहा कि इस बार हम बहुमंजिला इमारतों में भी पोलिंग बूथ बनाएंगे। इसके अलावा झुग्गी-झोपड़ियों वाले इलाकों में भी ऐसा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत में ऐसा करने की जरूरत थी, जिसका ध्यान रखा गया है। सभी बूथों पर पानी, शौचालय, रैंप, व्हीलचेयर जैसी चीजों की व्यवस्था की जाएगी।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1723883648anjay_RAUT.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255275&amp;path_article=3</guid><pubDate>17-Aug-2024 2:04 PM</pubDate></item><item><title>अपराधियों को बचाने के लिए है ममता बनर्जी का धरना प्रदर्शन : मुख्तार अब्बास नकवी </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255274&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255274&path_article=3]]></link><description>नई दिल्ली, 17 अगस्त । पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के धरना प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उनका विरोध मार्च अपराधियों के खिलाफ नहीं, बल्कि अपराधियों को बचाने के लिए अधिक लगता है। उन्होंने कहा कि अपराध के गटर में अहंकार का स्वेटर पहनकर यह सफल नहीं होगा। काम करना उनकी जिम्मेदारी है। काम करने की बजाय ममता बनर्जी धरने पर बैठने की कोशिश कर रही हैं। लोगों ने उन्हें जो जनादेश दिया है, वह अपराध के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए है, न कि विरोध करने के लिए। जो कानून पहले से बने हुए हैं, उनका पालन करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही है, इसकी वजह से ऐसे अपराध हो रहे हैं। अगर राज्य सरकार कानून लागू करने की बजाय कानून तोड़ने लगे तो क्या होगा? मुझे लगता है कि ममता बनर्जी चाहे जितने भी कानून बना लें, उसका कोई फायदा नहीं होगा। मुख्तार अब्बास नकवी ने जम्मू-कश्मीर के चुनावों को लेकर कहा है कि जम्मू-कश्मीर के चुनावों में जनता की भागीदारी सिर्फ एक परिवार के जागीरदारों तक सीमित नहीं है। एक दशक के बाद हो रहे चुनाव में जनता की भागीदारी को महत्व दिया जाएगा। इस बार जम्मू-कश्मीर में जनता की सरकार बनेगी। पहलवान विनेश फोगाट की भारत वापसी पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि वह देश की बेटी है और देश को उस पर गर्व है। पूरे जोश और जुनून के साथ उसने भारत के लिए पदक जीतने की सफल कोशिश भी की, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से ऐसा नहीं हो सका। उस पर हमें बहुत गर्व है। इस पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। बता दें कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने शुक्रवार को कोलकाता में महिला डॉक्टर से बलात्कार और हत्या के मामले में न्याय की मांग करते हुए विरोध मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने कहा, हम दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग करते हैं। भाजपा के राज्य में तो कुछ नहीं होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीपीएम और भाजपा ने आरजी कर अस्पताल में तोड़फोड़ की है।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1723883374ukhtar_Abbas.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255274&amp;path_article=3</guid><pubDate>17-Aug-2024 1:59 PM</pubDate></item><item><title>‘भाजपा कभी कानून तोड़कर कार्रवाई नहीं करती’, अनिल विज ने ऐसा क्यों कहा? </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255268&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255268&path_article=3]]></link><description>अंबाला, 17 अगस्त । हरियाणा में पिछले 10 साल से भाजपा सत्ता में है। इस दौरान इसने कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को जेल भेजने की बात कही। इस पर हरियाणा के पूर्व गृहमंत्री अनिल विज से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि भाजपा कभी कानून तोड़कर कार्रवाई नहीं करती, मामला कोर्ट में विचाराधीन है। हरियाणा में आम आदमी पार्टी भी मैदान में उतर रही है। पंजाब व दिल्ली से नेता कमान संभाल रहे हैं। इस पर अनिल विज ने कहा आप का दिया बुझ चुका है। पंजाब और दिल्ली में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा है। विज ने कहा कि बुझा हुआ दीपक कभी जल नहीं सकता। दूसरे दीपक को जल रहा दीपक ही जला सकता है। ये बुझी हुई शमा है। बता दें कि चुनाव आयोग ने शुक्रवार को हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव का ऐलान कर दिया। हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों के लिए एक चरण में ही एक अक्टूबर को चुनाव होंगे और नतीजों की घोषणा 4 अक्टूबर को होगी। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, 90 में 73 सीटें सामान्य और 17 सीटें आरक्षित हैं। हरियाणा में 27 अगस्त को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 2 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। 20 हजार 629 पोलिंग बूथ हैं। 150 मॉडल पोलिंग बूथ हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि लोकसभा का चुनाव दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक ताकत का प्रमाण है। इससे पहले, 2019 में हरियाणा में एक ही चरण में चुनाव हुआ था। 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में 68.20 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1723882826nil_Wiz.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255268&amp;path_article=3</guid><pubDate>17-Aug-2024 1:50 PM</pubDate></item><item><title>यूपी में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के मामले में विपक्ष ने सरकार को घेरा </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255263&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255263&path_article=3]]></link><description>लखनऊ, 17 अगस्त । 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय पर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा है। मायावती ने कहा कि सरकार ने अपना काम निष्पक्ष व ईमानदारी से नहीं किया। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि यूपी में सन 2019 में चयनित 69,000 शिक्षक अभ्यर्थियों की चयन सूची को रद्द कर तीन महीने के अन्दर नई सूची बनाने के हाईकोर्ट के फैसले से साबित है कि सरकार ने अपना काम निष्पक्षता व ईमानदारी से नहीं किया है। इस मामले में खासकर आरक्षण वर्ग के पीड़ितों को न्याय मिलना सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा, वैसे भी सरकारी नौकरियों की भर्तियों में पेपर लीक आदि के मामले में यूपी सरकार का रिकार्ड भी पाक-साफ नहीं होने पर यह काफी चर्चाओं में रहा है। अब सहायक शिक्षकों की सही बहाली नहीं होने से शिक्षा व्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ना स्वाभाविक है। सरकार इस ओर जरूर ध्यान दे। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि 69000 शिक्षक भर्ती भी आखिरकार भाजपाई घपले, घोटाले और भ्रष्टाचार की शिकार साबित हुई। यही हमारी मांग है कि नये सिरे से न्यायपूर्ण नयी सूची बने, जिससे पारदर्शी और निष्पक्ष नियुक्तियां संभव हो सके और प्रदेश में भाजपा काल में बाधित हुई शिक्षा-व्यवस्था पुनः पटरी पर आ सके। हम नयी सूची पर लगातार निगाह रखेंगे और किसी भी अभ्यर्थी के साथ कोई हकमारी या नाइंसाफ़ी न हो, ये सुनिश्चित करवाने में कंधे-से-कंधा मिलाकर अभ्यर्थियों का साथ निभाएँगे। यह अभ्यर्थियों की संयुक्त शक्ति की जीत है। सभी को इस संघर्ष में मिली जीत की बधाई और नव नियुक्तियों की शुभकामनाएं। ज्ञात हो कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2019 में हुई 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के चयनित अभ्यर्थियों की सूची नए सिरे से जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने 1 जून 2020 और 5 जनवरी 2022 की चयन सूचियां को दरकिनार कर नियमों के तहत तीन माह में नई चयन सूची बनाने के निर्देश दिए। कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है। वहीं पिछली सूची के आधार पर नौकरी कर रहे शिक्षकों की सेवा पर भी संकट खड़ा हो गया है।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1723882080ayawati.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255263&amp;path_article=3</guid><pubDate>17-Aug-2024 1:38 PM</pubDate></item><item><title>रेलवे की सुरक्षा और सुविधाओं पर नहीं है सरकार का ध्यान : पवन खेड़ा</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255260&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255260&path_article=3]]></link><description>नई दिल्ली, 17 अगस्त । कानपुर में साबरमती एक्सप्रेस के 22 डिब्बे पटरी से उतरने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने लगातार हो रहे रेल हादसों को लेकर सवाल उठाए हैं। पवन खेड़ा ने आईएएनएस से बातचीत में रेल हादसों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, रेल हादसे लगातार बढ़ते जा रहे हैं, बार-बार हमें कहा जाता है कि एक कवच लगा रखा है, अगर रेल गाड़ियों पर कवच लगा है तो ये क्या काम करता है, कौन सी कंपनी ने यह कवच दिया है। क्या सभी ट्रेन पर कवच लगा हुआ है। उन्होंने कहा, रेल की सुरक्षा और सुविधा लगातार घटती जा रही है और रेल यात्रियों की चिंता बढ़ती जा रही है। इस दिशा में मुझे नहीं लगता कि सरकार गंभीर है। अभी पिछले ही हफ्ते रेलवे पर सीएजी रिपोर्ट आई, जिस तरह से फंड का दुरुपयोग किया गया है, वह उसमें दिखाई दे रहा है। ये देखकर समझ में आता है कि रेलवे की सुरक्षा और सुविधाओं पर कोई ध्यान नहीं है। पवन खेड़ा ने डॉक्टरों की हड़ताल पर भी बात की। उन्होंने कहा, अस्पतालों की हड़ताल तोड़फोड़ की वजह से नहीं, बल्कि कोलकाता में हुए रेप और हत्या की वजह से हो रही है। तोड़फोड़ करने वालों को सरकार चिन्हित करेगी और पुलिस उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। डॉक्टर्स अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता में हैं और हम उनकी चिंता के समय उनके साथ खड़े हैं। अगर हम डॉक्टर्स को सुरक्षा नहीं दे पा रहे हैं तो जाहिर है कि वह अपनी ड्यूटी सही ढंग से नहीं कर पाएंगे। उन्होंने बांग्लादेश के हालात पर दिए सैम पित्रोदा के बयान पर बात करते हुए कहा, बांग्लादेश से भारत की तुलना नहीं की जा सकती। भारत के लोकतंत्र की नींव पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और महात्मा गांधी जैसे नेताओं ने रखी है। और इसे कोई हिला नहीं सकता। पवन खेड़ा ने उदयपुर की घटना का जिक्र करते हुए कहा, उदयपुर की घटना को लेकर मैंने कलेक्टर से बात की। उदयपुर मेरा शहर है, स्थिति अभी शांत है और पूरी तरह से नियंत्रण में है। हम भी सभी नौजवानों से अपील करना चाहेंगे कि वो इस तरह की घटनाओं से बाहर दूर रहें और शहर में शांति बनाए रखें। बता दें कि उदयपुर में शुक्रवार को दो छात्रों में हुई चाकूबाजी के बाद शहर में हिंसा फैल गई थी लेकिन शनिवार को यहां शांति है।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1723881477awan_Kheda.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255260&amp;path_article=3</guid><pubDate>17-Aug-2024 1:27 PM</pubDate></item><item><title>वीर सावरकर के योगदान का अध्ययन किया जाना चाहिए : इंदर सिंह परमार</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255136&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255136&path_article=3]]></link><description>भोपाल, 16 अगस्त । मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने शुक्रवार को कहा कि वीर सावरकर के योगदान का अध्ययन किया जाना चाहिए और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को उसके उचित संदर्भ में जनता के सामने पेश किया जाना चाहिए। मंत्री ने यहां एक प्रेस वार्ता में कहा कि देश के लिए जिन लोगों ने कुर्बानी दी है, उनका इतिहास भी पढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति, 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा पर काम हो रहा है। खुशी की बात है कि उसमें मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य बनने जा रहा है। राज्य ने विचार की प्रक्रिया तेज की है। सभी विश्वविद्यालयों में ज्ञान परंपरा का प्रकोष्ठ बनाया है। परमार ने कहा, भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर बहुत से लोगों को संशय था। हम सेमिनार के माध्यम से उन संशयों को दूर करने का काम कर रहे हैं। इसलिए, कमेटी के माध्यम से हमने तय किया है कि सभी महाविद्यालयों में किताबों का भंडार बने। हमारे पुस्तकालय समृद्ध बनें, जहां अच्छा लिखने वाले लेखकों की किताबों का भंडार हो। उन्होंने कहा कि कुछ किताबों में गलत बातें लिखी गई हैं, जैसे कि रावण का वध भगवान राम ने नहीं, बल्कि लक्ष्मण ने किया था। हमारे धर्म को लेकर जो अन्य भ्रांतियां हैं, जो गलत बातें किताबों में लिखी हैं, उन्हें दूर करने का काम कर रहे हैं। मंत्री ने कहा, भारतीय ज्ञान परंपरा किसी राजनीतिक दल की विचारधारा का एजेंडा नहीं है। क्या संघ का कार्यकर्ता देश की सेना में नहीं जा सकता है? क्या वह प्रोफेसर नहीं बन सकता है? क्या वह किसान नहीं बन सकता है?

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1723808416ajn2.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255136&amp;path_article=3</guid><pubDate>16-Aug-2024 5:10 PM</pubDate></item><item><title>सत्ता के नशे में मां, माटी और मानुष को भूल गई हैं ममता बनर्जी : गिरिराज सिंह </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255135&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255135&path_article=3]]></link><description>नई दिल्ली, 16 अगस्त । पश्चिम बंगाल के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के बाद से देशभर में आक्रोश का माहौल है। देशभर में जूनियर डॉक्टर, मेडिकल छात्रा और चिकित्सक तक सड़क पर उतरकर रोष व्यक्त कर रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने बंगाल की घटना को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। शुक्रवार को आईएएनएस से खास बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कोलकाता रेप और मर्डर केस में कहा कि ममता बनर्जी सत्ता की मद में भूल गई हैं कि मां, माटी और मानुष,आज उनके और उनकी पार्टी की शह पर फलने-फूलने वाली गुंडों की पार्टी है, जिसने वहां की बेटी के साथ दरिंदगी की। जिसने दिल्ली के निर्भया कांड की याद दिला दी और आज ममता बनर्जी चोरी और सीनाजोरी कर रही हैं, भगवान राम को गाली दे रही हैं। रात में डॉक्टर को पीटने के लिए गुंडे को किसने भेजे? बंगाल में बिना ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता है, उनके आदेश के बगैर वहां लोग सांस भी नहीं लेते हैं। हालत यह है कि वो गुंडे हजारों की संख्या बिना पुलिस की जानकारी के पहुंच गए, किसको बुड़बक (मूर्ख) बनाना चाहती हैं। शांति मार्च निकालती हैं, घड़ियाली आंसू बहाती हैं, मैं कहता हूं कि वो गुंडे को पकड़ना चाहती तो 12 घंटा कौन कहता है, 1 घंटे में पकड़ लेती। लेकिन, इन्होंने तो साक्ष्य को मिटाने के लिए गुंडों को भेजा, तोड़फोड़ करवा रही हैं, अब शांति मार्च निकाल रही हैं। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लड़की हूं लड़ सकती हूं का स्लोगन दिया था। आज तीन हफ्ते राहुल गांधी को बयान देने में नहीं लगते और वो भी बयान क्या दिया? वहां के कर्मी दोषी हैं, डूब के मर जाएं, हाथरस पहुंच जाते हैं। लेकिन, बंगाल पर जुबान नहीं खुलता है, मुंह में बर्फ जम जाता है, क्योंकि ममता बनर्जी के खिलाफ बोल नहीं सकते हैं। वो (राहुल गांधी) प्रधानमंत्री बनने के ख्वाब में सच बोल नहीं सकते हैं, न्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते। यही है राहुल गांधी का सच। पीएम नरेंद्र मोदी के सेकुलर सिविल कोड के बयान पर गिरिराज सिंह ने कहा कि उन्होंने कौन सा गलत कहा। कॉमन सिविल कोड, जहां आजादी के बाद हिंदुओं ने तो अपना मैरिज एक्ट एक कर लिया, लेकिन, शरिया कानून और तीन तलाक चलता ही रहा। पीएम मोदी ने इसे हटाया। यह सेकुलर सिविल कोड जब होगा तभी एक देश, एक कानून होगा।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1723808166ajn.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=255135&amp;path_article=3</guid><pubDate>16-Aug-2024 5:06 PM</pubDate></item><item><title>जम्मू कश्मीर में गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल व्यक्ति पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=252584&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=252584&path_article=3]]></link><description>जम्मू, 30 जुलाई जम्मू कश्मीर के राजौरी जिले में गैरकानूनी गतिविधियों में कथित रूप से शामिल एक व्यक्ति को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि आरोपी मोहम्मद असलम उर्फ कारी को राजौरी के जिला मजिस्ट्रेट आदेश पर पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया और जिला जेल में रखा गया।

असलम मूल रूप से खोरीवाली-दरहाल गांव का निवासी है और इससे पहले 2012 में थानामंडी पुलिस थाने में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और सीआरपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एक आपराधिक मामले में उसका नाम दर्ज किया गया था।

उन्होंने कहा, अपने शत्रुतापूर्ण कृत्यों के लिए मामला दर्ज होने और उसे जिलाबदर किए जाने के बावजूद वह अपने तौर-तरीकों में सुधार नहीं कर रहा है और लगातार गैरकानूनी कृत्यों में संलिप्त है। इस दौरान वह शांति और व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।

प्रवक्ता ने बताया कि जिला पुलिस कार्यालय, राजौरी द्वारा एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिला मजिस्ट्रेट को सौंप दी गई है। उन्होंने पीएसए के तहत उसकी नजरबंदी का आदेश जारी किया है।(भाषा)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1722328872rime.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=252584&amp;path_article=3</guid><pubDate>30-Jul-2024 2:11 PM</pubDate></item><item><title>प्रतियोगी परीक्षाओं की पुरानी पद्धति को बहाल करे सरकार: रामगोपाल यादव</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=252415&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=252415&path_article=3]]></link><description>नयी दिल्ली, 29 जुलाई समाजवादी पार्टी (सपा) के रामगोपाल यादव ने सोमवार को राज्यसभा में मांग की कि सरकार संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विषय आधारित प्रश्न पत्र के पारंपरिक प्रारूप पर वापस लौटे।

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए यादव ने इसे गंभीर करार दिया और तर्क दिया कि शिक्षा का उद्देश्य मुख्य रूप से व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास से जुड़ा होता है।

उन्होंने परीक्षा की पुरानी पद्धति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने देश को शिक्षाविद, अधिवक्ता और वैज्ञानिक दिए हैं।

यादव ने कहा, हालांकि, प्रतियोगी परीक्षाओं ने पुरानी पद्धति को छोड़ दिया है।

यादव ने सुझाव दिया कि वर्तमान वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रारूप ही परीक्षा में अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों में वृद्धि का सबसे बड़ा कारण है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी व्यक्ति की तर्क क्षमताओं का आकलन करने के लिए व्यक्तिपरक प्रश्न महत्वपूर्ण होते हैं।

सपा नेता ने चयनित उम्मीदवारों की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, परिणामस्वरूप, ऐसे उम्मीदवार चयन के बाद एक पत्र का सही मसौदा भी नहीं लिख पाते हैं।

उन्होंने अपील की, इसलिए मेरा सरकार से अनुरोध है कि इस पद्धति को बदलें और उस पुरानी पद्धति को अपनाएं जिसने डॉक्टर राधाकृष्णन और होमी जहांगीर भाभा जैसे विद्वान और वैज्ञानिक देश को दिए। अब कोई ऐसा विद्वान कहां पैदा हो रहा है देश में। पुरानी व्यवस्था पर आइए, ताकि फिर कुछ विद्वान देश में पैदा हो सकें। देश में वर्तमान पद्धति को बदलने की जरूरत है। पुरानी व्यवस्था को वापस लाइए।

सभापति ने यादव को एक अपवाद के तहत इस मुद्दे को उठाने की अनुमति दी थी क्योंकि उन्होंने आवश्यक ऑनलाइन माध्यम के बजाय भौतिक रूप से इस संबंध में नोटिस दिया था।

सभापति ने कहा, एक अपवाद के रूप में, मैं उन्हें इस मुद्दे को उठाने की अनुमति दे रहा हूं।

उन्होंने सदस्यों से ऑनलाइन प्रक्रिया का लाभ उठाने और तकनीकी रूप से उन्नत होने के आह्वान भी किया।(भाषा)


</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1722241274mages.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=252415&amp;path_article=3</guid><pubDate>29-Jul-2024 1:51 PM</pubDate></item><item><title>राजस्थान कांग्रेस विधायक ने कहा, जनसंख्या नियंत्रण पर कानून का हम स्वागत करेंगे </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250510&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250510&path_article=3]]></link><description>जयपुर, 16 जुलाई। भजन लाल शर्मा के नेतृत्व वाली बीजेपी शासित राजस्थान में विधानसभा सत्र चल रहा है। इस दौरान सदन के बाहर कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने कहा कि अगर कोई जनसंख्या नियंत्रण पर कानून लेकर आएगा तो हम उसका स्वागत करेंगे। कांग्रेस विधायक हरिमोहन शर्मा ने कहा, जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए सरकार दो या तीन बच्चों का कानून लाए, लेकिन बीजेपी सरकार की मंशा कानून लाने के बजाय, अल्पसंख्यक समुदाय को टारगेट करना है। उन्होंने आगे कहा कि संजय गांधी ने जनसंख्या नियंत्रण को लेकर एक बहुत बड़ा अभियान चलाया था। उस समय भैरों सिंह शेखावत जैसे बड़े नेता ने ये भाषण दिया था कि ये योजना गलत है। लेकिन बाद में वही भैरों सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान विधानसभा में अपने पुराने बयान को लेकर खेद प्रकट किया था। कांग्रेस विधायक ने आगे कहा, भाजपा की वर्तमान सरकार राजनीतिक दृष्टिकोण से किसी वर्ग विशेष को टारगेट करने की बात करती है। आज भी मुख्यमंत्री ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर चिंता प्रकट की और अप्रत्यक्ष रूप से किसी एक समुदाय को टारगेट किया। उन्होंने आगे कहा कि आप इसको लेकर कानून लाइए लेकिन जो हिंदू अपने बच्चों को सात-सात हजार में बेच रहे हैं, मेहरबानी करके उनको तो बचा लीजिए। उन्होंने कहा, अगर कोई जनसंख्या नियंत्रण का कानून लाता है, तो हम उसका स्वागत करेंगे। लेकिन इनकी मुख्य भावना जनसंख्या नियंत्रण से किसी समुदाय विशेष को टारगेट करने की है। ये कानून को जातिगत आधार पर मोड़ देना चाहते हैं, जो कि निंदनीय है। मैं मुख्यमंत्री से आग्रह करूंगा कि पहले हिंदू समाज और गरीब तबके के जो लोग हैं, जिनको दो वक्त की रोटी नहीं मिल पाती, उनकी चिंता करें। जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, विधायक बालमुकुंद आचार्य नफरत फैला रहे हैं। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर भाजपा मंत्रियों के बयान में ही विरोधाभास है। मंत्री खर्रा कह रहे हैं कि दो बच्चों का कानून ला रहे हैं, जबकि कानून मंत्री कह रहे हैं ऐसा कोई कानून नहीं ला रहे हैं।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1721131137df.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250510&amp;path_article=3</guid><pubDate>16-Jul-2024 5:28 PM</pubDate></item><item><title>बंगाल विधानसभा का मानसून सत्र होगा हंगामेदार; तृणमूल नीट पर लाएगी प्रस्ताव </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250476&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250476&path_article=3]]></link><description>कोलकाता, 16 जुलाई । पश्चिम बंगाल विधानसभा का मानसून सत्र 22 जुलाई से शुरू होने वाला है। इसके काफी हंगामेदार रहने की संभावना है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सत्र के दौरान सदन में दो विशेष प्रस्ताव पेश कर सकती है। पहला प्रस्ताव नीट को खत्म करने और अलग-अलग राज्य सरकारों द्वारा प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की पुरानी प्रणाली को बहाल करने की मांग पर होगा। हाल ही में नीट-यूजी पेपर लीक और इसमें कई तरह की अनियमितताओं का मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 24 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर यही मांग उठाई थी। तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, दूसरा प्रस्ताव तीन नए आपराधिक कानूनों के लागू करने को लेकर है। पार्टी का कहना है कि इसे जल्दबाजी में लागू किया गया और इस पर संसद में बहस भी नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने पिछले महीने इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा था। दूसरी ओर, भाजपा राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा और कंगारू कोर्ट में सजा देने के मामलों पर चर्चा के लिए प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है। हालांकि सत्र 22 जुलाई से शुरू होगा, लेकिन पहले दिन यह श्रद्धांजलि के बाद दिन भर के लिए स्थगित कर दिया जाएगा। विधानसभा सचिवालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस बार मानसून सत्र दस दिनों का होने की उम्मीद है। उपचुनाव में चार नवनिर्वाचित विधायक उत्तर 24 परगना के बागदा से मधुपर्णा ठाकुर, नादिया के राणाघाट-दक्षिण से डॉ. मुकुट मणि अधिकारी, उत्तर दिनाजपुर के रायगंज से कृष्णा कल्याणी और कोलकाता के मानिकतला से सुप्ति पांडे के भी मानसून सत्र के दौरान शपथ लेने की उम्मीद है।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1721126795ajsd.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250476&amp;path_article=3</guid><pubDate>16-Jul-2024 4:16 PM</pubDate></item><item><title>सेना ने कैप्टन बृजेश थापा समेत चारों शहीदों के जज्बे को किया सलाम </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250474&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250474&path_article=3]]></link><description>जम्मू, 16 जुलाई । जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद अपने चारों जवानों की बहादुरी को भारतीय सेना ने सलाम किया है और उनके परिवारों के साथ होने की बात कही है। सोमवार शाम शुरू हुई इस मुठभेड़ में एक अधिकारी सहित सेना के चार जवान और एक स्थानीय पुलिसकर्मी शहीद हो गया था। सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और भारतीय सेना के सभी जवान कैप्टन बृजेश थापा, नायक डी. राजेश, सिपाही बिजेंद्र और सिपाही अजय के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं, जिन्होंने क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करने के लिए डोडा में आतंकवाद के खिलाफ अभियान में अपने कर्तव्य का पालन करते हुए प्राणों की आहुति दे दी। भारतीय सेना इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ी है। जानकारी के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) से जुड़े कश्मीर टाइगर्स ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से बात की और जमीनी हालात तथा चल रहे अभियान के बारे में जानकारी ली। राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा, डोडा (जम्मू-कश्मीर) के उरारबागी में आतंकवाद के खिलाफ अभियान में भारतीय सेना के हमारे बहादुर जवानों की शहादत पर काफी शोकाकुल हूं। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवार के साथ हैं। अपने कर्तव्य के निर्वहन में जान न्यौछावर करने वाले सैनिकों के परिवारों के साथ पूरा देश खड़ा है। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी है। हमारे सैनिक क्षेत्र में आतंकवाद को समाप्त करने और शांति-व्यवस्था कायम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सोमवार देर शाम यह मुठभेड़ उस समय हुई जब राष्ट्रीय राइफल्स और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह ने डोडा शहर से 55 किलोमीटर दूर देसा वन क्षेत्र के धारी गोटे उरारबागी में संयुक्त घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। कुछ देर तक गोलीबारी के बाद आतंकवादियों ने भागने की कोशिश की लेकिन सैनिकों ने उनका पीछा किया। अधिकारियों ने बताया कि रात करीब 9 बजे जंगल में फिर से गोलीबारी शुरू हो गई। पहले मुठभेड़ में सेना और पुलिस के पांच सुरक्षाकर्मियों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर आई थी। बाद में मंगलवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1721126623ajna.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250474&amp;path_article=3</guid><pubDate>16-Jul-2024 4:13 PM</pubDate></item><item><title>हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनी तो मुसलमानों को आरक्षण देगी : अमित शाह </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250473&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250473&path_article=3]]></link><description>महेंद्रगढ़, 16 जुलाई । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक में पिछड़े वर्गों से आरक्षण छीनकर मुसलमानों को दे दिया। अगर वो हरियाणा में सत्ता में आती है तो यहां भी ऐसा ही करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से ही पिछड़े वर्गों के खिलाफ रही है। 1957 में ओबीसी आरक्षण के लिए काका कालेलकर आयोग का गठन किया गया था, लेकिन कांग्रेस ने इसे सालों तक लागू नहीं किया। 1980 में इंदिरा गांधी ने मंडल आयोग को ठंडे बस्ते में डाल दिया। 1990 में जब इसे पेश किया गया तो राजीव गांधी ने दो घंटे 43 मिनट का भाषण देकर ओबीसी आरक्षण का विरोध किया। उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने ही पूरे देश को बताया कि उनकी सरकार दलितों, गरीबों और पिछड़ों की सरकार है। अमित शाह ने कहा, भाजपा ने देश को पहला सशक्त पिछड़ा वर्ग का प्रधानमंत्री देने का काम किया है। केंद्र में 71 में से 27 मंत्री पिछड़ा वर्ग से हैं। गृह मंत्री ने ओबीसी समुदाय के लिए प्रधानमंत्री के कामों को गिनाया और कहा कि उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में उनके लिए आरक्षण सुनिश्चित किया। उन्होंने कहा, मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम हरियाणा में मुस्लिम आरक्षण नहीं होने देंगे। उन्होंने कांग्रेस नेता और दो बार मुख्यमंत्री रह चुके भूपेंद्र हुड्डा को चुनौती देते हुए कहा, मैं एक-एक पाई का हिसाब लेकर आया हूं, आंकड़ों के साथ मैदान में आएं। हरियाणा में अक्टूबर में चुनाव हो सकते हैं। भाजपा यहां अकेले चुनाव लड़ने वाली है। उसकी नजर पिछड़े वर्ग को लुभाने पर है, जिनकी राज्य में 27 फीसदी हिस्सेदारी है। तीन सप्ताह से भी कम समय में अमित शाह का यह दूसरा हरियाणा दौरा है। इससे पहले गृह मंत्री का स्वागत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उनके कैबिनेट सहयोगियों ने किया।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1721126460mit.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250473&amp;path_article=3</guid><pubDate>16-Jul-2024 4:11 PM</pubDate></item><item><title>कांग्रेस का हरियाणा में वजूद खत्म, भाजपा तीसरी बार बनाएगी सरकार : रणजीत चौटाला </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250465&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250465&path_article=3]]></link><description>सिरसा, 16 जुलाई । हरियाणा के बिजली मंत्री चौधरी रणजीत सिंह चौटाला ने मंगलवार को पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात की। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए चौटाला ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा और कहा कि हरियाणा में कांग्रेस का सत्ता में वापसी करना मुश्किल है। सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा की ओर से हरियाणा में कांग्रेस की यात्रा निकाले जाने को लेकर चौधरी ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की यात्रा से कोई फर्क नहीं पड़ा तो दीपेंद्र हुड्डा की यात्रा से क्या फर्क पड़ेगा। हरियाणा में कांग्रेस अपना वजूद खत्म कर चुकी है। जिस भी प्रदेश में कांग्रेस 10 साल लगातार सत्ता से बाहर रही है उस प्रदेश में कांग्रेस वापस नहीं लौट पाई है। रणजीत सिंह चौटाला ने रनिया विधानसभा में चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा टिकट देती है तो मैं रनिया से चुनाव लड़ूंगा और जीतूंगा। मंत्री रणजीत सिंह चौटाला ने सैनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि पिछले साढ़े 9 साल में भाजपा ने प्रदेश और देश में बेहतरीन काम किया। विधानसभा चुनाव में मैनेजमेंट और कैंडिडेट का अहम रोल होता है। वहीं भाजपा के पास मजबूत संगठन है लेकिन कांग्रेस अभी तक पिछले 10 सालों में अपना संगठन ही नहीं बना पाई। उन्होंने कहा कि हरियाणा प्रदेश में कांग्रेस की गुटबाजी सार्वजनिक होने के चलते कांग्रेस खत्म हो चुकी है। ऐसे सभी बड़े नेता अब कांग्रेस को छोड़कर जा रहे हैं। कांग्रेस अब एक ऐसी पार्टी है जिसमें केवल चापलूस करने वाले लोग बचे हैं। कांग्रेस पार्टी का प्रदेश में जनाधार नहीं बचा है। आगामी विधानसभा चुनाव में हरियाणा में भाजपा बहुमत से सरकार बनाएगी। हरियाणा सरकार ने आम जन के हित में कार्य किए हैं। ऐसे में भाजपा का तीसरी बार सत्ता में आना तय है।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1721124873ajn.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=250465&amp;path_article=3</guid><pubDate>16-Jul-2024 3:44 PM</pubDate></item><item><title>उप्र : दलित किशोर को पेशाब पिलाने के प्रयास के मामले में तीन गिरफ्तार</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=249830&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=249830&path_article=3]]></link><description>गोंडा (उप्र) 12 जुलाईश्रावस्ती जिले में एक दलित किशोर को बोतल में भरकर कथित तौर पर पेशाब पिलाने के प्रयास के मामले में पुलिस ने तीन अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया है।

प्रभारी निरीक्षक महिमा नाथ उपाध्याय ने शुक्रवार को पीटीआई-भाषा को बताया कि जिले के गिलौला थाने के रामपुर त्रिभौना निवासी एक युवक ने नौ जुलाई 2024 को पुलिस अधीक्षक से मिलकर कथित घटना की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि गांव के निवासी किशन उर्फ भूरे तिवारी ने बीती एक जुलाई को उसके 15 वर्षीय छोटे भाई से एक वाहन पर डीजे रखवाने को कहा था। उसे डीजे रखवाने के बाद जेनरेटर भी लदवाने को कहा गया।

किशोर के मना करने पर गांव के ही निवासी दिलीप मिश्रा व सत्यम तिवारी ने उसे रोक कर कहा कि जनरेटर लदवाने बाद ही उसे वहां से जाने दिया जाएगा।

शिकायत के अनुसार, इसी दौरान दिलीप मिश्रा ने शराब की बोतल में पेशाब कर उसे जबरन पिलाने का प्रयास किया। किशोर के विरोध करने पर उसे मारा पीटा गया और तमंचा दिखाते हुए जान से मारने की धमकी दी गई।

पीड़ित द्वारा मामले की शिकायत श्रावस्ती के पुलिस अधीक्षक से किए जाने पर स्थानीय पुलिस ने तहरीर के आधार पर अभियोग पंजीकृत कर तीनों आरोपियों किशन उर्फ भूरे तिवारी, दिलीप मिश्रा व सत्यम तिवारी को गिरफ्तार किया है।

उन्होंने बताया कि मामले की विवेचना क्षेत्राधिकारी, इकौना द्वारा की जा रही है।(भाषा)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1720770633iraftar.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=249830&amp;path_article=3</guid><pubDate>12-Jul-2024 1:20 PM</pubDate></item><item><title>ईसाई बहुल राज्य में आयुष्मान केंद्र को 'मंदिर' कहने का विरोध</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=247749&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=247749&path_article=3]]></link><description>अंग्रेजी के मशहूर कवि और नाटककार विलियम शेक्सपियर ने कहा था कि नाम में क्या रखा है? अगर हम गुलाब को किसी दूसरे नाम से भी बुलाएं तो वह सुगंध ही देगा. लेकिन पूर्वोत्तर के दो ईसाई बहुल राज्यों में नाम पर ही विवाद हो रहा है.

 डॉयचे वैले पर प्रभाकर मणि तिवारी का लिखा-


पूर्वोत्तर के इन राज्यों में केंद्र सरकार के भारत आयुष्मान केंद्र का नाम बदलने पर आम लोगों में नाराजगी बढ़ रही है. यही वजह है कि मिजोरम और नागालैंड ने स्थानीय आबादी और चर्च की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए आयुष्मान भारत केंद्रों के नाम बदल कर आयुष्मान आरोग्य मंदिर नहीं करने का अनुरोध किया है. दोनों राज्यों ने केंद्र को इस बारे में पत्र लिखा है.

क्या है मामला?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीते साल देश भर में फैले 1.60 लाख आयुष्मान भारत स्वास्थ्य केंद्रों का नाम बदलने का फैसला किया था. इन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अब आयुष्मान आरोग्य मंदिर कहा जाता है. इसकी टैगलाइन है आरोग्यम परमम धनम यानी स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक एल. एस. चांगशान ने बीते साल नवंबर में तमाम राज्यों को पत्र के जरिए इस फैसले की सूचना दी थी. केंद्र ने अपनी वेबसाइट में जरूरी बदलाव भी कर दिए थे. उस समय इस मुद्दे का कहीं ज्यादा प्रचार नहीं किया गया था. उसके बाद इस साल जनवरी में मिजोरम ने राज्य में यह बदलाव नहीं करने की अपील की थी. राज्य के प्रमुख सचिव ई. ए. रू. आतकिमी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा था कि मौजूदा आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के नाम बदल कर आयुष्मान आरोग्य मंदिर रखने के निर्देश पर राज्य में कुछ चिंताएं हैं. मिजोरम की 90 फीसदी से ज्यादा आबादी ईसाई समुदाय की है. लेकिन केंद्र का नाम बदल कर उसमें मंदिर जोड़ने से आम लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं. इसलिए मिजोरम में यह कवायद रोक दी जानी चाहिए.

लेकिन केंद्र की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर राज्य सरकार ने फरवरी और मार्च में भी पत्र भेज कर यही अनुरोध दोहराया था.

पहले भी उठी है मांग

बीते मार्च में इलाके के एक अन्य ईसाई-बहुल राज्य नागालैंड ने भी केंद्र को पत्र भेज कर यही अनुरोध किया था. राज्य के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण सचिव वी. केजो डीडब्ल्यू से कहते हैं, स्वास्थ्य केंद्रों के नाम में मंदिर जोड़ने से राज्य के ईसाई समुदाय की भावनाएं आहत होने की आशंका है. चर्च और सामाजिक संगठन पहले से ही इस पर आपत्ति जता रहे हैं. ऐसे में राज्य को नाम बदलने से छूट दी जानी चाहिए.

एक सवाल पर केजो बताते हैं, केंद्र की ओर से अब तक इस मामले में कोई जवाब नहीं मिला है. लेकिन हम राज्य में इन स्वास्थ्य केंद्रों के पुराने नाम का ही इस्तेमाल कर रहे हैं.

मिजोरम स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि केंद्र ने अब तक राज्य सरकार की ओर से भेजे गए पत्रों का कोई जवाब नहीं दिया है.

बीती नौ फरवरी को तत्कालीन स्वास्थ्य व परिवार कल्याण कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती पवार ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि सरकार ने स्वस्थ भारत का सपना साकार करने के लिए आरोग्यम परमम धनम की टैगलाइन के साथ देशभर में फैले आयुष्मान भारत स्वास्थ्य केंद्रों का नाम बदल कर आयुष्मान आरोग्य मंदिर करने का फैसला किया है.

क्या खास परिस्थियां हैं इन दो राज्यों में

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पूर्वोत्तर के इन दोनों राज्यों के ईसाई-बहुल होने के कारण यहां रहन-सहन, खानपान और रीति-रिवाज देश के बाकी राज्यों के मुकाबले काफी अलग हैं. उनके मुताबिक, नाम पर विवाद खड़ा करने की जगह इन स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर सेवाएं मुहैया कराने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

नागालैंड की राजधानी कोहिमा में रहने वाले एक विश्लेषक एल. के. चिशी कहते हैं, नाम बदलने और खासकर इसमें मंदिर शब्द जोड़ने पर चर्च और ईसाई संगठनों के लोग पहले से ही आपत्ति जताते रहे हैं. इसलिए इस मुद्दे पर बेवजह विवाद बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं हैं. इन दोनों राज्यों में पहले से ही कई समस्याएं हैं.केंद्र सरकार को उन पर ध्यान देना चाहिए

वो कहते हैं कि नागालैंड में उग्रवाद की दशकों पुरानी समस्या हो या फिर मिजोरम में सीमा पार म्यांमार और बांग्लादेश के हजारों शरणार्थियों का मुद्दा, पहले इन ज्वलंत मुद्दों के समाधान की दिशा में ठोस पहल की जानी चाहिए. महज मंदिर शब्द के कारण कोई नई समस्या पैदा करना न तो केंद्र के हित में होगा और न ही राज्य सरकार के. (dw.com/hi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1719642555W-2.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=247749&amp;path_article=3</guid><pubDate>29-Jun-2024 11:59 AM</pubDate></item><item><title>बनारस में नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर इतना कम कैसे हुआ, क्या कह रहे हैं बनारसी</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=245941&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=245941&path_article=3]]></link><description>रजनीश कुमार

बनारस से, 14 जून। बनारस में नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर महज़ एक लाख 52 हज़ार पर सिमट जाने की चर्चा थम नहीं रही है.

मोदी की जीत का अंतर इतना कम तब रहा जब दर्जन भर केंद्रीय मंत्रियों ने बनारस में डेरा डाल दिया था.

2019 में मोदी बनारस से लगभग चार लाख 80 हज़ार मतों के अंतर से जीते थे.

कई लोग मानते हैं कि इस बार अगर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी बनारस में और अधिक गंभीरता से चुनाव लड़तीं तो मोदी हार भी सकते थे.

ख़ुद राहुल गांधी ने भी मंगलवार को रायबरेली में कहा कि अगर बनारस में नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ उनकी बहन प्रियंका गांधी होतीं तो वह चुनाव दो से तीन लाख के अंतर से जीत जातीं.

यानी कांग्रेस भी इस बात को मान रही है कि उसने बनारस में मोदी के कद की तुलना में ठीक उम्मीदवार नहीं उतारा था.

बनारस में कांग्रेस ने मोदी के ख़िलाफ़ 2014, 2019 और 2024 में तीनों बार अजय राय को उतारा. ज़ाहिर है तीनों बार हार मिली है.

अजय राय 2019 और 2014 में तो बुरी तरह से हारे थे. इसके अलावा, अजय राय 2009 में भी बनारस से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े थे और हार मिली थी.

2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में अजय राय पिंडरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार थे और वह तीसरे नंबर पर रहे थे. यानी पिछले कई बार से अजय राय चुनाव हार रहे थे और कांग्रेस ने चौथी बार भी उन्हीं पर दांव लगाया.

अजय राय से पूछा कि राहुल गांधी क्या यह कहना चाह रहे हैं कि कांग्रेस ने बनारस में मोदी के ख़िलाफ़ दमदार उम्मीदवार नहीं उतारा?

राय इस सवाल के जवाब में कहते हैं, हमने तो प्रियंका गांधी से अनुरोध किया था कि वह बनारस से चुनाव लड़ें. मैं भी राहुल गांधी से सहमत हूँ कि प्रियंका गांधी बनारस से मोदी को हरा सकती थीं.

अजय राय की राजनीतिक पृष्ठभूमि बीजेपी वाली भी रही है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में आने से पहले राय बनारस ज़िले के कोलसला विधानसभा क्षेत्र से 1996, 2002 और 2007 में बीजेपी से विधायक चुने गए थे.

2009 में बनारस लोकसभा क्षेत्र से अजय राय बीजेपी का टिकट चाहते थे लेकिन पार्टी ने मुरली मनोहर जोशी को उतारा था. इसी से नाराज़ होकर वह बीजेपी छोड़ समाजवादी पार्टी में चले गए थे और 2012 में कांग्रेस में शामिल हो गए.

बनारस में मोदी की जीत का अंतर कैसे बिगड़ा?

ढलती दोपहर के साथ निषादराज घाट की सीढ़ियों से चिलचिलाती धूप गंगा नदी की तरफ़ ढल रही है.

बनारस के इस गंगा घाट की सीढ़ियों पर जैसे-जैसे छाया पसर रही है, वैसे-वैसे आसपास के मल्लाह अपने-अपने घरों से निकलकर सीढ़ियों पर बैठ रहे हैं.

इन्हें इंतज़ार है कि लोग आएंगे और नाव से गंगा नदी की सैर कराने के लिए कहेंगे. गौरीशंकर निषाद पिछले दो घंटे से बैठे हैं लेकिन कोई भी नहीं आया.

ढलती शाम के साथ गौरीशंकर निषाद की निराशा और बढ़ने लगती है. सुबह से उनकी कोई कमाई नहीं हुई है. उन्हें चिंता सता रही है कि आज घर का राशन-पानी कहाँ से आएगा.

गौरीशंकर निषाद बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में बनारस के मल्लाहों की कमाई पर सुनियोजित तरीक़े से चोट की गई है.

निषाद कहते हैं, नरेंद्र मोदी 2014 में गुजरात से बनारस आए तो हमने बहुत उत्साह से उनका साथ दिया था. हमें लगा था कि चीज़ें बेहतर होंगी. लेकिन सच्चाई अब सामने आ रही है कि उनका एजेंडा क्या था. 2019 में भी हमने उम्मीद नहीं छोड़ी और उन्हीं को वोट किया था लेकिन 2024 में कांग्रेस को वोट किया और मोदी से अब कोई उम्मीद नहीं है.

गौरीशंकर निषाद कहते हैं, गंगा नदी में ये क्रूज चलवा रहे हैं. इसकी ऑनलाइन बुकिंग हो रही है. ऑनलाइन बुकिंग से सरकार को टैक्स मिल रहा है. जब से क्रूज आया है, तब से हमारी कमाई न के बराबर रह गई है. भला हम क्रूज से मुक़ाबला कहाँ से कर पाएंगे.

2018 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बनारस की गंगा नदी में फाइव स्टार लग्ज़री क्रूज़ लॉन्च किया था. इस क्रूज से गंगा की 82 घाटों की सैर होती है और प्रति व्यक्ति 750 रुपए का टिकट लगता है. 30 मीटर लंबे इस डबल डेकर क्रूज़ में एक साथ 110 लोग बैठ सकते हैं.

मल्लाहों की नाराज़गी

गौरी शंकर निषाद कहते हैं, बात केवल क्रूज की नहीं है. मणिकर्णिका घाट से इन्होंने बाबा विश्वनाथ मंदिर तक कॉरिडोर बनाया. हमलोग मणिकर्णिका घाट पर अपनी दुकान लगाकर मछली बेचते थे. कॉरिडोर बनने लगा तो इन्होंने कहा कि अपनी दुकानें हटा लो और कॉरोडिर बनने के बाद सबको एक-एक नई दुकान मिलेगी.

जब दुकान बन गई तो हमसे कहा कि एक दुकान के लिए 25 लाख रुपए देने होंगे. भला हम ग़रीब 25 लाख रुपए कहाँ से लाते. मणिकर्णिका घाट से ग़रीबों को इस तरह बेदख़ल किया गया. अब आप मणिकर्णिका घाट पर जाइए तो अमूल डेयरी का बूथ है, ब्रैंडेड शोरूम हैं. मोदी जी को बनारस में भी गुजरात का ही भला चाहिए. अमूल गुजरात की डेयरी है. यूपी की पराग डेयरी कहाँ गई? क्रूज भी गुजरात से ही मंगवाए गए हैं.

बीजेपी के काशी क्षेत्र के अध्यक्ष दिलीप पटेल कहते हैं, विकास का काम होगा तो कुछ लोगों को तकलीफ़ हो सकती है लेकिन हम विकास के काम को लंबे समय तक रोक नहीं सकते. जिनकी दुकान वैध थी, उन्हें मुआवजा भी मिला है.

अमित सहनी भी गंगा नदी में नाव चलाते हैं. गंगा नदी में क्रूज चलाने से वह भी नाराज़ हैं. अमित कहते हैं, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आते हैं तो हमलोग की नाव गंगा नदी में नहीं चलने दी जाती है जबकि क्रूज चलता रहता है. ऐसा इसलिए है कि क्रूज चलवाने वाले गुजराती हैं.

नरेंद्र मोदी को लेकर निराशा केवल मल्हाओं तक ही सीमित नहीं है. बुनकर भी खुलकर नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना करते हैं.

बुनकरों की नाराज़गी

लक्ष्मीशंकर राजभर पहले पावरलूम मशीन से बनारसी साड़ी बनाते थे लेकिन अब वह पिछले पाँच सालों से रिक्शा चला रहे हैं. ग़रीबी और हाड़तोड़ मेहनत के कारण राजभर 55 की उम्र में 85 साल के लगते हैं.

राजभर कहते हैं, बनारसी साड़ी अब सूरत में बन रही है और वहीं से बनकर बनारस में आ रही है. यहां के कारीगर बेकार हो गए. हमारा हुनर जंग खा रहा है और बनारसी साड़ी कभी ब्रैंड के रूप में जानी जाती थी, उसे गुजरातियों ने हड़प लिया.

जलालीपुरा लाल कुआँ बनारस में बुनकरों का इलाक़ा है. इस इलाक़े की गलियों से गुज़रिए तो घरों में पावरलूम मशीन चलने की आवाज़ अब भी सुनाई देती है.

हालांकि यह आवाज़ अब धीमी पड़ गई है. पारवरलूम मशीनें अब धूल खा रही हैं. जिन घरों में पावरलूम मशीनें चलती थीं, वहाँ अब चाय और कॉफी की दुकानें खुल गई हैं. यहाँ के बुनकर कहते हैं कि साड़ी बनाकर हर दिन 200 रुपए कमाना भी मुश्किल है.

लल्लू अंसारी के घर में चार पावरलूम मशीन चलती थी लेकिन अब वहाँ चाय की दुकान खुल गई है. लल्लू कहते हैं, मेरे घर के कई मर्द सूरत चले गए और अब वहीं बनारसी साड़ी बना रहे हैं. आमदनी से ज़्यादा जीएसटी लग रही है. जिस घर में पावरलूम मशीन है, उस घर का कॉमर्शियल टैक्स लगता है. आमदनी ही नहीं है तो टैक्स कहाँ से देंगे. बिजली भी आती-जाती रहती है और इस पर सब्सिडी मिलने की कोई गारंटी नहीं है. घाटे के सौदे में फँसने से ज़्यादा अच्छा यही है कि चलकर सूरत में ही कमा लिया जाए.

नरेंद्र मोदी जब 2014 में बनारस से चुनाव लड़ने आए तो उन्होंने बुनकरों की स्थिति सुधारने का वादा किया था. मोदी ने 27 जून 2014 को पहली बार टेक्स्टाइल सेक्टर पर रिव्यू मीटिंग बुलाई थी.

मोदी ने नौकरशाहों से कहा था कि हैंडलूम को फैशन से जोड़ने का कोई तरीक़ा निकालें. नौकरशाह कोई तरीक़ा आज तक नहीं निकाल पाए. अब हाल यह है कि बुनकर अब अपने इस हुनर से दूर हो रहे हैं और रिक्शा चलाने के लिए मजबूर हैं.

बनारस में नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर कम होने का सवाल बनारस के लोगों से पूछिए तो ज़्यादातर लोग कहते हैं कि रोड और कॉरिडोर से पेट नहीं भरेगा.

बढ़ती महंगाई और बेरोज़गारी को लेकर ग़ुस्सा

बीजेपी विरोधी और बीजेपी समर्थक दोनों इस बात को मानते हैं कि बनारस में इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर काम हुआ है.

अब शहर से एयरपोर्ट जाने में 40 मिनट का वक़्त लगता है जबकि पहले जाम के कारण 35 किलोमीटर जाने में दो घंटे का समय लग जाता था.

विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर और घाटों की साफ़-सफ़ाई बढ़ गई है. लेकिन इसके साथ ही लोग पूछते हैं, रोज़गार कहाँ है? महंगाई आसमान छू रही है. हर महीने पेपर लीक हो रहा है और पुलिस की मनमानी बढ़ गई है.

बनारस के लोगों का कहना है कि शहर का करोबार और विकास का काम पूरी तरह से गुजरातियों के हाथ में आ गया है. हमने बनारस ज़िला के बीजेपी अध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा से पूछा कि शहर के लोग ऐसा क्यों कह रहे हैं कि कारोबार और कॉन्ट्रैक्ट गुजरातियों के हाथ में आ गया है?

इसके जवाब में विश्वकर्मा कहते हैं, गुजरात के कॉन्ट्रैक्टर गौरव सिंह पटेल ने बनारस में केवल टीएफ़सी (ट्रेड फैसिलिटी सेंटर) और बाबतपुर वाली सड़क का निर्माण कराया था. इसके अलावा मुझे किसी और कॉन्ट्रैक्ट के बारे में जानकारी नहीं है, जो गुजरातियों को मिला है. क्रूज के मालिक गुजराती नहीं हैं.

विश्वकर्मा कहते हैं, बनारस के लोगों ने मोदी जी को कम वोट से जिता कर बेवकूफ़ी की है. अगर हरा भी देते तो पीएम वही बनते. लेकिन हमारे लिए यह बहुत शर्मिंदगी भरा रहा. पीएम मोदी को यहाँ से कम से कम पाँच लाख मतों से जीत मिलनी चाहिए थी.

हंसराज विश्वकर्मा कहते हैं, बेवकूफ़ी की हद ये देखिए कि जिस कंचनपुर वॉर्ड में मैं रहता हूँ, वहाँ क़रीब 3500 वोट पड़े और 1100 वोट अजय राय को मिले. यादव, कुशवाहा, पटेल और मुसलमानों ने अजय राय को वोट किया है. जो तोड़फोड़ की शिकायत करते हैं, उन्हें समझना होगा कि विकास के लिए ये सब करना पड़ता है. हम इसका मुआवजा भी तो दे रहे हैं.

ऐसा नहीं है कि बीजेपी और नरेंद्र मोदी को लेकर निराशा केवल पिछड़े, दलितों और मुसलमानों में ही है.

कॉरिडोर के लिए सैकड़ों घर तोड़ने की तैयारी

जयनाराण मिश्र अस्सी घाट पर रहने वाले उन क़रीब 300 लोगों में शामिल हैं, जिनका घर जगन्नाथ कॉरिडोर में जा सकता है. मिश्र कहते हैं, क़रीब 300 लोगों को ज़िला प्रशासन ने बता दिया है कि उनका घर सरकारी ज़मीन पर है.

जयनारायण मिश्र कहते हैं, जिस घर में हम आज़ादी के पहले से रह रहे हैं. जिस घर का हम प्रॉपर्टी टैक्स देते हैं, उसे अब बता दिया कि सरकारी ज़मीन पर है. जगन्नाथ कॉरिडोर बनाने का आइडिया गुजरात के बीजेपी नेता सुनील ओझा का था. जिस जगन्नाथ मंदिर के लिए कॉरिडोर बना रहे हैं, वह कोई प्राचीन मंदिर नहीं है लेकिन जिसको विकास के नाम पर विनाश करना है, उसे कौन रोक सकता है.

जयनरायण मिश्र कहते हैं, मैंने अपने इलाक़े (वाराणसी दक्षिणी) के बीजेपी विधायक सौरभ श्रीवास्तव से कहा कि इस कॉरिडोर को रोकिए और लोगों के घर बचा लीजिए तो उन्होंने कहा कि हमें आपका वोट नहीं चाहिए.

उसके बाद मैंने कहा था कि अगर मोदी 2019 की तुलना में एक वोट भी कम पाते हैं तो मेरी जीत होगी. लेकिन महादेव की कृपा से उन्हें इस बार दो लाख 27 हज़ार कम वोट मिले. बीजेपी वालों का घमंड इतना बढ़ गया है कि उसका जवाब देना बहुत ज़रूरी हो गया है. मोदी को बीजेपी वाले ही हराएंगे. जिन 300 घरों को तोड़ा जाएगा, उनमें 99 प्रतिशत घर उनके हैं, जो मोदी-मोदी करते रहते हैं.

दिलीप पटेल बीजेपी के काशी क्षेत्र के अध्यक्ष हैं. पटेल इस बात को मानते हैं कि शहर में विकास के काम के कारण लोगों में थोड़ा बहुत ग़ुस्सा है लेकिन विकास तो करना होगा. वह कहते हैं, जिन 300 घरों को तोड़ने की बात है, वे वैध नहीं हैं.

पटेल बनारस में गुजरातियों के बढ़ते प्रभाव के आरोप पर कहते हैं, यह विपक्षियों की चाल है ताकि स्थानीय लोगों को बीजेपी के ख़िलाफ़ भड़काया जा सके.

दिलीप पटेल कहते हैं कि पेपर लीक के कारण भी बीजेपी को लोगों का ग़ुस्सा झेलना पड़ना है.

दिलीप पटेल यह बात मानते हैं कि टीएफ़सी और बाबतपुर सड़क का निर्माण गुजरात के कॉन्ट्रैक्टर गौरव सिंह पटेल ने कराया था और विश्वनाथ कॉरिडोर की डिजाइनिंग के लिए भी गुजरात के लोग ही आए थे. पटेल कहते हैं, मामला गुजराती और मराठी का नहीं है बल्कि दक्षता का है. जो अच्छा काम करेगा, उसे ज़िम्मेदारी मिलती है.

बनारस में छोटी जीत के मायने

नरेंद्र मोदी का बनारस से चुनाव लड़ना बीजेपी का एक रणनीतिक फ़ैसला था.

बनारस जहाँ है, वहाँ से मोदी की जीत का असर उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार में भी पड़ता है. इन दोनों राज्यों में लोकसभा की कुल 120 सीटें हैं. इन दोनों राज्यों की अधिकतम सीटें जीतने के बाद ही कोई पार्टी केंद्र में सरकार बना पाती है.

इसके साथ ही बनारस की सांस्कृतिक अहमियत भी है. बनारस को भगवान शिव की नगरी के रूप में देखा जाता है. यहाँ ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद भी जुड़ा है. अयोध्या और मथुरा की तरह बनारस में भी मंदिर-मस्जिद विवाद है.

ज्ञानवापी का मुद्दा दशकों से ठंडे बस्ते में था लेकिन अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद यह मामला भी अदालत में पहुँच चुका है. लेकिन इस बार बीजेपी को हर तरफ़ से निराशा हाथ लगी.

न तो मोदी की जीत बड़ी रही और पूर्वांचल में भी बीजेपी औंधे मुँह गिरी. पूर्वांचल की 13 में से 10 सीटें बीजेपी हार गई और बनारस के आसपास बिहार में भी बीजेपी को हार मिली.

हालांकि, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने गढ़ गोरखपुर के आसपास की सीटें बचाने में कामयाब रहे हैं. गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर और बाँसगाँव में बीजेपी को जीत मिली है.

क्या नरेंद्र मोदी अपना असर खो रहे हैं?

दिलीप पटेल कहते हैं, मैं मानता हूं कि प्रधानमंत्री का डेढ़ लाख वोट से जीतना हमारे लिए शर्मिंदगी की बात है लेकिन ऐसा विपक्ष की उस अफ़वाह के कारण हुआ कि हम सत्ता में आए तो संविधान बदल देंगे. इस अफ़वाह के कारण दलित कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के पाले में चले गए. समाजवादी पार्टी के कारण यादव भी हमारे ख़िलाफ़ गए और मुसलमान तो पहले से ही उनके साथ थे.

शुरुआती रुझान में तो नरेंद्र मोदी कांग्रेस उम्मीदवार अजय राय से पीछे चल रहे थे. लालचंद्र कुशवाहा बनारस में बीजेपी के पुराने नेता हैं. इस बार नरेंद्र मोदी ने अपने नामांकन में कुशवाहा को प्रस्तावक बनाया था.

जब मोदी मतगणना में चलने लगे पीछे

मोदी के शुरुआती रुझान में पीछे चलने पर लालचंद्र कुशवाहा हँसते हुए कहते हैं, मेरी तो तबीयत बिगड़ने लगी थी. फिर मैंने पता किया कि ऐसा क्यों हो रहा है. पार्टी कार्यकर्ताओं ने बताया कि अभी मुस्लिम इलाक़ों की ईवीएम खुली है. तब जाकर राहत की सांस ले पाया. बीजेपी के लोग अतिउत्साह में थे. उन्हें लग रहा था कि मोदी के नाम पर चुनाव जीत जाएंगे. उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि विपक्ष एकजुट है और वोट भी उसी हिसाब से जाएगा. ये हमारे लिए दुखद है कि मोदी जी की जीत केवल डेढ़ लाख वोट से हुई है.

यह बात सही है कि पिछले दो चुनावों से बीजेपी विरोधी वोट बँट जाता था. ऐसे में पीएम मोदी की जीत का अंतर बढ़ जाता था. लेकिन इस बार बनारस में मुक़ाबला पूरी तरह से दोतरफ़ा था. इस चुनाव में क़रीब 95 फ़ीसदी वोट नरेंद्र मोदी और अजय राय के बीच बँट गया और बाक़ी पाँच फ़ीसदी में नोटा समेत अन्य पाँच उम्मीदवार थे.

तीसरे नंबर पर रहे बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार अतहर जमाल लारी को केवल 33 हज़ार वोट मिले. यानी मुसलमानों ने भी इन्हें वोट नहीं किया. बनारस में मुसलमानों के क़रीब साढ़े तीन लाख वोट हैं.

2019 में समाजवादी पार्टी की शालिनी यादव को एक लाख 95 हज़ार 159 वोट मिले थे और कांग्रेस के अजय राय को एक लाख 52 हज़ार 548 वोट मिले थे. 2019 में बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी में गठबंधन था. शालिनी यादव का वोट शेयर 18.40 प्रतिशत था और अजय राय का 14.38 प्रतिशत.

बीजेपी के स्टूडेंट विंग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पतंजलि पांडे कहते हैं कि इस बार मुसलमानों और यादवों ने मोदी जी की जीत का अंतर मिलकर कम किया है. पांडे कहते हैं, मोदी जी मुसलमानों को अपना कलेजा भी निकालकर दे दें तब भी वे वोट नहीं करेंगे.

हाजी वक़ास अंसारी बनारस में जलालीपुरा के काउंसलर हैं. वह पतंजलि पांडे की कलेजे वाली टिप्पणी पर कहते हैं कि मुसलमानों को मोदी जी का कलेजा नहीं बल्कि सम्मान चाहिए. अंसारी कहते हैं, मोदी जी मुसलमानों को टिकट देना शुरू कर दें, हमें प्यार भरी नज़रों से देखें और अपनी कैबिनेट में कुछ मुसलमानों को शामिल कर लें. इसके बाद कोई मुसलमान वोट ना करे तब ऐसी शिकायत ज़्यादा ठीक लगेगी.

क्या कांग्रेस ने ग़लत उम्मीदवार का चयन किया?

सुरेंद्र सिंह पटेल बनारस में समाजवादी पार्टी के पुराने नेता हैं. वह बनारस में सेवापुरी से 2002 से 2017 तक समाजवादी पार्टी के विधायक रहे. मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव सरकार में मंत्री भी रहे.

सुरेंद्र पटेल कहते हैं कि इस बार नरेंद्र मोदी को बनारस से हराने का अच्छा मौक़ा था लेकिन कांग्रेस ने यह मौक़ा गँवा दिया.

पटेल कहते हैं, जब राहुल गांधी और अखिलेश यादव बनारस में रैली करने आए थे तब मेरे सामने ही अखिलेश ने राहुल से अजय राय को लेकर कहा था कि आपने ठीक उम्मीदवार नहीं उतारा है. अखिलेश ने कहा कि यहाँ से समाजवादी पार्टी अपना उम्मीदवार उतारती तो नतीजे कुछ और होते. इस पर राहुल गांधी मुस्कुराने लगे थे. अगर कांग्रेस को बनारस से मोदी को हराना था तो अजय राय को उम्मीदवार नहीं बनाती. लेकिन कई स्टार उम्मीदवारों के मामले में आपसी समझ भी होती है. मोदी भी अमेठी और रायबरेली में चुनाव प्रचार करने नहीं गए थे.

कहा जाता है कि अखिलेश यादव भी अजय राय को पसंद नहीं करते हैं.

पिछले साल मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव और अजय राय के बीच कहासुनी भी हुई थी. अखिलेश यादव मध्य प्रदेश में इंडिया गठबंधन के तहत कुछ विधानसभा सीटों पर लड़ना चाहते थे लेकिन कांग्रेस ने कोई भी सीट देने से इनकार कर दिया था. इसी कहासुनी में अखिलेश के निशाने पर अजय राय भी आ गए थे.

अखिलेश यादव ने अजय राय को चिरकुट कहा था. दरअसल दारा सिंह चौहान के बीजेपी में जाने के बाद पिछले साल यूपी की घोसी विधानसभा सीट पर उपचुनाव था और इसमें समाजवादी पार्टी की जीत हुई थी. इसी पर अजय राय ने कहा था कि अगर घोसी में कांग्रेस उम्मीदवार उतारती तो समाजवादी पार्टी की हार होती.

अखिलेश यादव ने अजय राय की इसी टिप्पणी पर कहा था, उनकी कोई हैसियत नहीं है. वह इंडिया गठबंधन की किसी बैठक में शामिल नहीं थे. उन्हें इसके बारे में कुछ भी पता नहीं है. कांग्रेस से मेरा अनुरोध है कि अपने किसी चिरकुट और छोटे नेता को टिप्पणी करने से रोके.

अखिलेश यादव को अजय राय पसंद नहीं

अखिलेश की इस टिप्पणी के बाद अजय राय ने कहा था कि जो अपने पिता की इज़्ज़त नहीं कर पाया वो मेरे जैसे छोटे कार्यकर्ता की इज़्ज़त क्या करेगा.

उत्तर प्रदेश में जब लोकसभा चुनाव के लिए मतदान हो रहा था तभी अखिलेश से पत्रकारों ने पूछा था कि यूपी में इंडिया गठबंधन कितनी सीटों पर जीत रहा है?

जवाब में अखिलेश यादव ने कहा था- क्योटो छोड़कर यूपी की सभी 79 सीटों पर. अखिलेश यादव तंज़ में बनारस को क्योटो कह रहे थे क्योंकि 2014 में नरेंद्र मोदी ने बनारस को जापान के शहर क्योटो की तरह बनाने का वादा किया था.

यानी अखिलेश यादव भी मानकर चल रहे थे कि बनारस में हारना ही है.

काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में लॉ फैकेल्टी के डीन रहे प्रोफ़ेसर महेंद्र प्रताप सिंह पूर्वांचल की राजनीति पर गहरी नज़र रखते हैं.

महेंद्र प्रताप सिंह भी मानते हैं कि अजय राय की उम्मीदवारी को लेकर अखिलेश यादव बहुत ख़ुश नहीं थे.

महेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं, अगर बनारस से सुरेंद्र सिंह पटेल उम्मीदवार होते तो मोदी हार जाते. यहाँ पटेलों का वोट साढ़े तीन लाख है. इतने ही मुस्लिम वोटर्स हैं. यादव एक लाख के क़रीब हैं और दलित भी डेढ़ लाख हैं. जिस भूमिहार जाति से अजय राय हैं, उनका वोट एक लाख भी नहीं है. ऐसे में दिलीप पटेल मोदी को हराने के लिए सबसे माकूल उम्मीदवार थे.

नरेंद्र मोदी बनाम अजय राय

बनारस में कुल 19 लाख 97 हज़ार 578 मतदाता हैं. एक जून को हुए मतदान में बनारस में 56.35 फ़ीसदी मतदाताओं ने मतदान किया. यानी कुल 11 लाख 30 हज़ार 143 मतदाताओं ने ही मतदान किया और इनमें से नरेंद्र मोदी को 54.24 प्रतिशत यानी छह लाख 12 हज़ार 970 वोट मिले. दूसरी तरफ़ कांग्रेस के अजय राय को 40.74 फ़ीसदी यानी चार लाख 60 हज़ार 457 वोट मिले. यानी नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर महज़ एक लाख 52 हज़ार 513 मतों का रहा.

वहीं 2019 के चुनाव में बनारस में मोदी का वोट शेयर 63.6 फ़ीसदी था और 2014 में 56.4 प्रतिशत था. 2019 में नरेंद्र मोदी को जीत चार लाख 79 हज़ार 505 मतों से मिली थी. मोदी की 2024 की जीत न केवल 2019 से छोटी है बल्कि 2014 से भी छोटी है. 2014 में नरेंद्र मोदी को तीन लाख 71 हज़ार 784 मतों से जीत मिली थी.

बनारस में 2014 की तुलना में नरेंद्र मोदी का वोट शेयर 2019 में 7.25 प्रतिशत बढ़ा था जबकि 2019 की तुलना में पीएम मोदी का वोट शेयर 2024 में 9 प्रतिशत से ज़्यादा कम हो गया है.

2014 से लेकर 2024 तक बनारस में नरेंद्र मोदी का सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी हर बार बदलता रहा है.

2014 में बनारस में नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज़्यादा वोट हासिल करने वाले आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल थे. 2019 में दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी की शालिनी यादव थीं और 2024 में कांग्रेस के अजय राय रहे.

2014 में आम आदमी पार्टी अपने दम पर बनारस में चुनावी मैदान में थी. 2019 में समाजवादी पार्टी का बहुजन समाज पार्टी और आरएलडी से गठबंधन था. 2024 में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़े.

आँकड़ों से स्पष्ट है कि 2024 में मोदी के ख़िलाफ़ बनारस में विपक्षी वोट बिल्कुल नहीं बँटा और इसका सीधा असर मोदी की जीत के अंतर पर पड़ा.

2014 में बनारस में मोदी के ख़िलाफ़ नोटा को मिलकार कुल 42 उम्मीदवार थे, 2019 में 26 और इस बार यानी 2024 में महज सात उम्मीदवार थे.

वोट शेयर के हिसाब से देखें तो इस बार दूसरे नंबर पर रहने वाले उम्मीदवार को 2014 और 2019 की तुलना में सबसे ज़्यादा 40.4 प्रतिशत वोट मिला जबकि 2014 में अरविंद केजरीवाल दूसरे नंबर पर थे और उनका वोट शेयर 20.3 फ़ीसदी था. 2019 में शालिनी यादव दूसरे नंबर पर थीं और उनका वोट शेयर 18.4 प्रतिशत था.

बनारस में पाँच विधानसभा क्षेत्र हैं- रोहनिया, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी कैंट और सेवापुरी. इन सभी विधानसभा क्षेत्रों में 2019 की तुलना में नरेंद्र मोदी का वोट कम हुआ है और अजय राय का वोट बढ़ा है.

इस बार विपक्षी वोट एकजुट होकर कांग्रेस उम्मीदवार अजय राय के साथ रहा और इसका सीधा असर मोदी की जीत के अंतर पर पड़ा.



(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1718372577BC-1.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=245941&amp;path_article=3</guid><pubDate>14-Jun-2024 7:15 PM</pubDate></item><item><title>वायरल संदेशखाली वीडियो : भाजपा नेता ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, याचिका मंजूर</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240711&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240711&path_article=3]]></link><description>कोलकाता, 10 मई । पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में एक स्थानीय भाजपा नेता गंगाधर कयाल ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने दावा किया कि उनसे जुड़ा एक फर्जी स्टिंग-ऑपरेशन का वीडियो प्रसारित किया जा रहा है।

गंगाधर कयाल ने कहा, वीडियो में उन्हें यह दावा करते हुए देखा और सुना गया कि स्थानीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेताओं ने कथित यौन उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन भाजपा ने आयोजित किया था।

न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता की एकल-न्यायाधीश पीठ ने याचिका स्वीकार कर ली है। इस मामले की सुनवाई लोकसभा चुनाव के चौथे चरण के मतदान के अगले दिन 14 मई को होने की संभावना है।

वीडियो 4 मई को सामने आया था। संदेशखाली में भाजपा के मंडल अध्यक्ष कयाल ने सीबीआई से संपर्क किया और दावा किया कि वीडियो में उनकी आवाज का मॉड्यूलेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग के माध्यम से किया गया था।

पर्यवेक्षकों का मानना ​​है कि अब जब मामला कलकत्ता हाईकोर्ट तक पहुंच गया है, तो वीडियो की प्रामाणिकता पर भ्रम जल्द ही सुलझने की संभावना है।

ज्ञात हो कि कि संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के एक वर्ग द्वारा यौन उत्पीड़न, अवैध जमीन पर कब्जा और जबरन वसूली की शिकायतों के मामले की जांच पहले से ही सीबीआई कर रही है।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1715339431ANGADHAR_KAYAL.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240711&amp;path_article=3</guid><pubDate>10-May-2024 4:40 PM</pubDate></item><item><title>सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को 1 जून तक दी अंतरिम जमानत (लीड-1)</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240703&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240703&path_article=3]]></link><description>नई दिल्ली, 10 मई । दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उन्हें शराब घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 1 जून तक अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आप सुप्रीमो को 2 जून को आत्मसमर्पण करना होगा।

पीठ ने कहा कि अंतरिम जमानत क्यों दी गई, इसके बारे में विस्तार से एक आदेश शाम को अपलोड किया जाएगा।

इससे पहले गुरुवार को, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अंतरिम राहत देने का विरोध करते हुए कहा था कि एक राजनेता एक सामान्य नागरिक से अधिक विशेष दर्जे का दावा नहीं कर सकता और अपराध करने पर उसे किसी अन्य नागरिक की तरह ही गिरफ्तार और हिरासत में लिया जा सकता है।

ईडी के उप निदेशक के हलफनामे में कहा गया है कि ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है जो एक किसान या एक व्यवसायी को अपना काम करने के लिए जमानत दी जाय। चुनाव प्रचार करने के लिए एक नेता को अलग छूट देना उचित नहीं है।

हलफनामे में कहा गया है कि इससे पहले किसी भी नेता को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी गई है। केजरीवाल चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। अगर कोई चुनाव लड़ भी रहा है तो उसे भी प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी जाती है।

ईडी ने तर्क दिया कि पिछले पांच साल में लगभग 123 चुनाव हुए हैं और यदि चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी जानी है, तो किसी भी राजनेता को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है या न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा जा सकता।

पिछली सुनवाई में शीर्ष अदालत ने संकेत दिया था कि वह आम चुनाव के मद्देनजर आप नेता को अंतरिम जमानत देने पर विचार कर सकती है।

केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1715337804EJRIWW.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240703&amp;path_article=3</guid><pubDate>10-May-2024 4:13 PM</pubDate></item><item><title>केजरीवाल को अंतरिम जमानत मिलने पर बोली भाजपा, 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले से स्पष्ट हुआ कि वह घोटाले में लिप्त हैं'</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240700&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240700&path_article=3]]></link><description>नई दिल्ली, 10 मई । भाजपा के राष्ट्रीय सचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के बाद यह साफ हो गया है कि अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में लिप्त हैं।

उन्होंने कहा कि अदालत ने अरविंद केजरीवाल को चुनाव के लिए सिर्फ 1 जून तक के लिए जमानत दी है और चुनाव के बाद उन्हें फिर से जेल जाना होगा।

सिरसा ने आम आदमी पार्टी और केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि आज दिल्ली के लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि अगर अरविंद केजरीवाल ने कोई घोटाला नहीं किया है, भ्रष्टाचार नहीं किया है और वह वाकई ईमानदार हैं तो फिर उन्हें 1 जून के बाद दोबारा जेल क्यों जाना होगा ?

भाजपा नेता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने इतना बड़ा भ्रष्टाचार और घोटाला किया है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चुनाव के लिए सिर्फ 1 जून तक की ही अंतरिम जमानत दी है।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1715337047as.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240700&amp;path_article=3</guid><pubDate>10-May-2024 4:00 PM</pubDate></item><item><title>चिराग पासवान ने मणिशंकर अय्यर को दी भारत छोड़ने की हिदायत</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240698&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240698&path_article=3]]></link><description>पटना, 10 मई । लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर को भारत छोड़कर जाने की हिदायत देते हुए कहा कि उनके लिए हिंदुस्तान में कोई जगह नहीं है।

दरअसल, चिराग पासवान ने मणिशंकर अय्यर के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत को पाकिस्तान का सम्मान करना चाहिए क्योंकि उनके पास परमाणु बम है। चिराग पासवान ने अय्यर पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी ही एंट्री का इंतजार था।

उन्होंने कहा कि जब-जब उनकी एंट्री होती है तब-तब हमलोगों का चुनाव और मजबूत हो जाता है। इनके बयान इनके लिए ही कितने सेल्फ गोल कर देते हैं, इन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं होता। अगर इनके मन में पाकिस्तान के लिए इतना ही प्यार और सम्मान है तो मुझे लगता है कि हिंदुस्तान में उनके लिए जगह नहीं है।

वहीं, विपक्ष की ओर से जारी बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वह बिना सिर-पैर की बातें कर रहे हैं। ऐसे बयानों से उनका इरिटेसन दिखता है। यह दिखाता है कि आप कितना चिढ़े हुए हैं हमारे प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता से।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और एनडीए को मिल रहे समर्थन से विपक्ष के लोग इतना ज्यादा चिढ़ गए हैं कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा बयानों का चुनाव से क्या लेना देना है। इस बयान से सिर्फ उनकी बौखलाहट दिखती है।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1715336278hirag.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=240698&amp;path_article=3</guid><pubDate>10-May-2024 3:47 PM</pubDate></item><item><title>कांग्रेस, द्रमुक ने कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंपने के लिए मिलीभगत की : तमिलनाडु भाजपा प्रमुख</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234178&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234178&path_article=3]]></link><description>चेन्नई, मार्च 31 । तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने रविवार को कांग्रेस और द्रमुक पर साठगांठ कर कच्चातिवु द्वीप श्रीलंका को सौंपने का आरोप लगाया।

श्रीलंकाई नौसेना द्वारा तमिलनाडु के मछुआरों की गिरफ्तारी पर इंडिया गठबंधन के विरोध पर अन्नामलाई ने एक्स पर कहा कि उन्हें कच्चातिवु मुद्दे पर उनके आरटीआई आवेदन के अनुसार दस्तावेज प्राप्त हुए थे और उन्होंने पाया कि कांग्रेस पार्टी ने कितनी बेरहमी से श्रीलंका के हाथों भारत के हिस्से को छिन जाने दिया था।

भाजपा नेता ने कहा कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 10 मई, 1961 को इस मुद्दे को अप्रासंगिक बताते हुए खारिज कर दिया था और कहा था कि उन्हें द्वीप पर दावा छोड़ने में कोई हिचकिचाहट नहीं है।

अन्नामलाई ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, नेहरू ने तब लिखा था, मुझे इस पर अपना दावा छोड़ने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी। मुझे यह पसंद नहीं है कि यह अनिश्चित काल तक लंबित रहे और इसे संसद में दोबारा उठाया जाए।

भाजपा नेता ने कहा कि भारत के एक अत्यधिक सम्मानित कानूनविद और तत्कालीन अटॉर्नी जनरल सी.एस. सीतलवाड ने 1960 में कहा था कि भारत का इस द्वीप पर अधिक मजबूत दावा है और दावा किया था कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने द्वीप के जमींदारी अधिकार रामनाद (रामनाथपुरम) के राजा को दिए थे।

अन्नामलाई ने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय (कानून और संधि) के तत्कालीन संयुक्त सचिव कृष्ण राव ने भी कहा था कि भारत के पास एक अच्छा कानूनी मामला है और उस पर काफी मजबूती से बहस की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि तत्कालीन विपक्ष ने श्रीलंका (तत्कालीन सीलोन) की संसद में वहां के प्रधानमंत्री डी.एस. सेनानायके और स्थानीय पदाधिकारियों के इन बयानों का विरोध नहीं करने के लिए भारत सरकार को फटकार लगाई थी जिनमें उन्होंने कच्चातिवु को श्रीलंका का हिस्सा बताया था।

भाजपा नेता ने कहा कि 1973 में कोलंबो में विदेश सचिव स्तर की वार्ता के बाद जून 1974 में भारतीय विदेश सचिव केवल सिंह ने तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि को भारत के दावों को छोड़ने के निर्णय से अवगत कराया गया था। अन्नामलाई ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार, करुणानिधि ने भी सहमति दी थी।

भाजपा नेता ने कहा कि समझौते में एक खंड था कि तमिलनाडु के भारतीय मछुआरे कच्चातिवु का उपयोग कर सकते हैं और वे वहां अपना जाल सुखा सकते हैं। अन्नामलाई के अनुसार, यह मछुआरा समुदाय के संभावित विद्रोह को रोकने के लिए था, लेकिन उन्होंने कहा कि एक साल बाद इस अनुच्छेद को रद्द कर दिया गया था।

अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और द्रमुक ने मिलीभगत करके जमीन का एक टुकड़ा श्रीलंका को दे दिया और उसे खोने से रोकने के लिए कोई उपाय भी नहीं किया।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1711884630nnamalai.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234178&amp;path_article=3</guid><pubDate>31-Mar-2024 5:00 PM</pubDate></item><item><title>गुजरात : जूनागढ़ में भाजपा को मिला नया पार्टी कार्यालय</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234175&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234175&path_article=3]]></link><description>अहमदाबाद, 31 मार्च । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गुजरात प्रमुख सी.आर. पाटिल ने रविवार को राज्य के जूनागढ़ में पार्टी के श्री गिरनार कमलम नामक नए स्थानीय कार्यालय का उद्घाटन किया और एक बूथ कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि चुनाव में सफलता के लिए बूथ नेताओं का योगदान अपरिहार्य है और पार्टी उनके अथक प्रयासों के कारण चुनाव जीत रही है।

पाटिल ने संगठनात्मक ताकत के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए भाजपा की विस्तार योजनाओं के बारे में बताया, जिसमें पार्टी की उपस्थिति मजबूत करने और लोगों के साथ निरंतर जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए गुजरात के हर जिले में कार्यालयों की स्थापना पर जोर दिया गया।

पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना करते हुए दावा किया कि उनके कार्यकाल में 25 करोड़ लोगों को बिना किसी शोर-शराबे के गरीबी से बाहर निकाला गया है।

इस अवसर पर जूनागढ़ के जिला प्रमुख पुनित शर्मा और लोकसभा उम्मीदवार राजेश चुडासमा भी उपस्थित थे।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1711884145hartiy.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234175&amp;path_article=3</guid><pubDate>31-Mar-2024 4:52 PM</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी आज मेरठ से लगातार तीसरी बार करेंगे चुनावी शंखनाद</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234166&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234166&path_article=3]]></link><description>मेरठ, 31 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे महत्वपूर्ण लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार का शंखनाद आज पश्चिमी यूपी की धरती मेरठ से कर रहे हैं। यह तीसरा मौका है जब नरेंद्र मोदी ने मेरठ को ही चुनावी आगाज के लिए चुना है। 2014 की रैली दिल्ली रोड स्थित परतापुर के मैदान पर की गई, तो 2019 की रैली का शुभारंभ देश के सबसे बड़े आलू अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम मेरठ के पास किया गया, और आज भी वही स्थल रखा गया है।

आज रैली स्थल पर मंच का कुछ माहौल बदला हुआ है। भारत रत्न दिए जाने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का यहां लगा कट आउट इस बात के संकेत दे रहा है, कि पीएम मोदी पश्चिमी यूपी में सबसे अधिक जाटों को साधने का प्रयास कर रहे हैं।

मंच पर लगे बैकड्रॉप पर केवल पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी की फोटो है। मंच पर पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह की फोटो अलग से रखी गई है, इसके सामने पीएम मोदी दीप जलायेंगे। रातोंरात रैली का नाम बदलकर इसे भारत रत्न चौधरी चरण सिंह जी गौरव रत्न समारोह किया गया है।

गौरतलब है कि मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, आगरा अलीगढ़ मंडल की 26 लोकसभा सीटों की 72 विधानसभा ऐसी हैं, जहां जाट वोट प्रभावित करता है। माना जाता है कि वेस्ट यूपी में 16.9 प्रतिशत आबादी जाट समुदाय की है। एक और खास बात यह रही है कि 2013 में हुए मुजफ्फरनगर दंगों ने पूरे देश का राजनीतिक माहौल बदल दिया, और भाजपा को इसको सीधा सीधा फायदा मिला। यही वजह रही है कि देशभर में या फिर पश्चिमी यूपी में जब-जब चुनावी रैलियां हुई हैंं, मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र हुआ है। इससे सियासी माहौल को हवा दी गई है, और इसी के सहारे भाजपा अपने वोट बैंक को सबसे ज्यादा मजबूत कर रही है।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1711882286pm.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234166&amp;path_article=3</guid><pubDate>31-Mar-2024 4:21 PM</pubDate></item><item><title>केजरीवाल कस्टडी में, पत्नी राजनीतिक मंच पर, लोगों से कर रहीं हैं अपील</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234164&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234164&path_article=3]]></link><description>नई दिल्ली, 31 मार्च । दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल पार्टी की ओर से राजनीतिक मंच सांझा कर रही हैं। रविवार को वह दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित इंडिया ब्लॉक की रैली लोकतंत्र बचाओ में शामिल हुईं। इस दौरान अरविंद केजरीवाल का संदेश पार्टी के किसी मंत्री या वरिष्ठ नेता की बजाए, उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल ने ही पढ़ा। यह भी एक कारण है कि बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच उनके राजनीति में प्रवेश की अटकलें तेज हो गई हैं।

इससे पहले उन्होंने केजरीवाल के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस व समर्थन अभियान की भी शुरुआत की है। राजनीति के विशेषज्ञ इसे सुनीता केजरीवाल की राजनीति में एंट्री के तौर पर भी देख रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, उद्धव ठाकरे और शरद पवार, सीपीआई नेता सीताराम येचुरी, कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे सहित शीर्ष विपक्षी नेताओं के साथ मंच साझा करते हुए सभा में अपना संबोधन एक प्रश्न पूछकर शुरू किया।

उन्होंने अपने पति की गिरफ्तारी में केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल किया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कथित एक्साइज पॉलिसी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया है। फिलहाल वह वित्तीय जांच एजेंसी की हिरासत में हैं। विपक्षी नेताओं की रैली में सुनीता केजरीवाल ने कहा, मैं एक प्रश्न पूछना चाहती हूं। क्या यह उचित है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरे पति को जेल में डाल दिया है। क्या आप केजरीवाल की ईमानदारी और देशभक्ति में विश्वास करते हैं। उनकी गिरफ्तारी के कारण उनके इस्तीफे के लिए भाजपा के दबाव के बावजूद, क्या आपको लगता है कि उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।

उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा भेजे गए पत्र को पढ़ने से पहले कहा। याद रखें, आपका केजरीवाल शेर की तरह है, वे उन्हें लंबे समय तक कैद में नहीं रख सकते। रैली में केजरीवाल का पत्र पढ़ते हुए, सुनीता केजरीवाल ने देश के आध्यात्मिक मूल्यों को विश्व स्तर पर फैलाने, भारत के भीतर एकता को बढ़ावा देने और देश भर में 24 घंटे बिजली की पहुंच की गारंटी देने का इरादा व्यक्त किया।

गौरतलब है कि इंडिया ब्लॉक का प्रतिनिधित्व करने वाले नेता, दिल्ली शराब नीति से संबंधित कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में रैली कर रहे हैं। रैली का आह्वान आम आदमी पार्टी (आप) ने किया है, जो इंडिया ब्लॉक का हिस्सा है।

रैली में मौजूद नेताओं में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और शरद पवार, सीपीआई नेता सीताराम येचुरी, कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, कल्पना सोरेन (हेमंत की पत्नी) शामिल हैं। इनके अलावा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव और आप नेता गोपाल राय भी विपक्षी दलों की इस रैली में शामिल हुए हैं।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1711882015unita_kejri.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234164&amp;path_article=3</guid><pubDate>31-Mar-2024 4:16 PM</pubDate></item><item><title>मध्यप्रदेश में मतदान का प्रतिशत बढ़ाने की कवायद</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234159&amp;path_article=3</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234159&path_article=3]]></link><description>भोपाल, 31 मार्च। मध्य प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए अभियान जारी है। इसी क्रम में राजधानी में मतदाताओं में जागरुकता के लिए वाहन रैली निकाली गई।

राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी अनुपम राजन ने रविवार को मतदाताओं को जागरूक करने के उद्देश्य से मतदाता जागरूकता वाहन रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने सात मई को भोपाल लोकसभा सीट के लिए होने वाले मतदान में सभी नागरिकों से बढ़ चढ़कर मतदान की अपील की।

उन्होंने प्रदेश के सभी मतदाताओं से आग्रह किया है कि वे खुद मतदान करें और परिवार, आस पड़ोस के नागरिकों को भी मतदान के लिए प्रेरित करें। ज्ञात हो कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में राजधानी में 65 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ था।

इस बार चुनाव आयोग की कोशिश है कि मतदान के प्रतिशत में बढ़ोतरी की जाए। मतदाता जागरूकता वाहन रैली का लालघाटी चौराहे से शुभारंभ हुआ। यह रैली वीआईपी रोड, गौहर महल, जहांगीराबाद होते हुए शौर्य स्मारक, अरेरा हिल्स पहुंची। शौर्य स्मारक पर रैली का समापन हुआ। रैली में शामिल बाइकर्स ग्रुप, क्लब के सदस्यों सहित 2500 से अधिक नागरिकों ने मतदाता जागरूकता का संदेश दिया।

(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1711881054p_loksabha_chunav.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=234159&amp;path_article=3</guid><pubDate>31-Mar-2024 4:00 PM</pubDate></item></channel></rss>