    
<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>Daily Chhattisgarh National</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com</link><description>Daily Chhattisgarh Feed National</description><item><title>सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की 'कुछ बेरोज़गार युवा कॉकरोच...' वाली टिप्पणी पर छिड़ी बहस</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324693&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324693&path_article=2]]></link><description>सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत शुक्रवार को सीनियर वकील का दर्जा दिए जाने की मांग संबंधी एक वकील की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे.

इस दौरान उन्होंने न्यायपालिका पर बढ़ते अनुचित हमलों को लेकर कड़ी टिप्पणी की.

उन्होंने कहा कि मीडिया, सोशल मीडिया और आरटीआई कार्यकर्ताओं के कुछ वर्ग लगातार न्यायपालिका पर हमला कर रहे हैं.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, समाज में कुछ परजीवी हैं, जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. उन्हें रोज़गार नहीं मिलता और पेशेवर ज़िंदगी में कोई जगह नहीं मिलती. उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं और फिर हर किसी पर हमला शुरू कर देते हैं.
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच वकील के रवैये से नाराज़ दिखी.

यह याचिका वकील संजय दुबे की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली हाई कोर्ट सीनियर वकीलों के नामांकन से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को लागू करने में देरी कर रहा है और इस पर अवमानना कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए.

जस्टिस जॉयमाल्य बागची के साथ सुनवाई कर रही इस बेंच ने याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि सीनियर वकील का दर्जा अदालत से दिया जाता है, यह कोई स्टेटस सिंबल नहीं है.

जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा, समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं. क्या आप भी उनके साथ जुड़ना चाहते हैं? कुछ युवा ऐसे हैं, जो रोज़गार नहीं मिलने और पेशे में जगह न बना पाने के कारण कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं. उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो जाते हैं, कुछ आरटीआई कार्यकर्ता बन जाते हैं, कुछ दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर हर किसी पर हमला शुरू कर देते हैं.

क्या है पूरा मामला

बाद में अदालत ने वकील को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी.

जब वकील ने शिकायत की कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय प्रक्रिया का हाई कोर्ट सही तरीक़े से पालन नहीं कर रहा है, तो बेंच ने पूछा कि क्या उनके पास अपने सीनियर वकील के दर्जे के लिए मुक़दमा लड़ने के अलावा कोई दूसरा मामला नहीं है?

जस्टिस बागची ने कहा, सीनियर का दर्जा दिया जाता है, उसका पीछा नहीं किया जाता.

जब बेंच को बताया गया कि हाई कोर्ट में इस समय सीनियर वकीलों के नामांकन की प्रक्रिया चल रही है, तो मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, पूरी दुनिया शायद सीनियर दर्जे के लिए पात्र हो सकती है, लेकिन कम से कम आप नहीं हैं. अगर हाई कोर्ट आपको सीनियर बना भी देता है, तो हम आपके पेशेवर आचरण को देखते हुए उसे रद्द कर देंगे.

वकीलों के क़ानून की डिग्रियों की जांच प्रक्रिया का ज़िक्र करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ वकीलों की ओर से डाली जाने वाली सामग्री को देखकर उन्हें कई वकीलों की क़ानून की डिग्रियों की प्रामाणिकता पर गंभीर संदेह है.

मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता वकील से कहा, क्या आपको लगता है कि हम देख नहीं रहे हैं?

उन्होंने कहा कि वह किसी उपयुक्त मामले का इंतज़ार कर रहे हैं, जिसमें दिल्ली के कई वकीलों की क़ानून की डिग्रियों की सत्यता की जांच सीबीआई से कराई जा सके, क्योंकि बार काउंसिल ऑफ इंडिया कई कारणों से ऐसा नहीं कर रही है.

वकील संजय दुबे ने क्या कहा

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में याचिकाकर्ता वकील संजय दुबे ने सीनियर दर्जा देने में गड़बड़ियों का आरोप लगाया.

उन्होंनेकहा, असल में यह मामला हाई कोर्ट में सीनियर दर्जे से जुड़ा है. 2014 में सीनियर दर्जे के लिए एक नोटिफ़िकेशन जारी हुआ था और मैं भी उम्मीदवार था. प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ियां थीं. सुधीर नंद्राजोग कमिटी के सदस्य थे और उन्होंने भी गड़बड़ियां देखने के बाद इस्तीफ़ा दे दिया था.

उन्होंने कहा, इसके बाद हमने प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की. जस्टिस ओक ने भी इस मामले में निर्देश जारी किए थे. गड़बड़ी यह थी कि कुछ अयोग्य लोगों को सीनियर दर्जा दे दिया गया जबकि योग्य उम्मीदवारों को नज़रअंदाज़ किया गया. फ़ैसला लेते समय सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और रिकॉर्ड्स को भी अनदेखा किया गया.

उन्होंने कहा कि सीनियर दर्जा देने के दौरान मैरिट को संज्ञान में नहीं लिया गया.

चीफ़ जस्टिस की टिप्पणी पर छिड़ी बहस

सीजेआई की टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर कई प्रतिक्रिया आ रही हैं. राज्यसभा में राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने एक सार्वजनिक चिट्ठी लिख कर मुख्य न्यायाधीश की भाषा को लेकर चिंता जताई गई है.

उन्होंने एक्स पर यह चिट्ठी साझा की जिसमेंलिखाहै, आपकी हालिया टिप्पणियों में कॉकरोच और परजीवी जैसे शब्दों ने देश के अनेक नागरिकों की तरह मुझे भी गहराई से विचलित किया है. चिंता केवल शब्दों के चयन की नहीं है, बल्कि उस दृष्टिकोण की है, जिसकी झलक इन टिप्पणियों में दिखाई देती है.

जब एक संवैधानिक लोकतंत्र के मुख्य न्यायाधीश बेरोज़गार युवाओं, आरटीआई कार्यकर्ताओं, मीडिया कर्मियों और असहमति व्यक्त करने वालों की तुलना कॉकरोच और परजीवी से करते हैं, तो यह केवल व्यक्तिगत आक्रोश का मामला नहीं रह जाता; यह लोकतंत्र की मूल आत्मा और उसकी बुनियादी संवैधानिक संस्कृति को आहत करने लगता है.

उन्होंने लिखा, भारत के बेरोज़गार युवा, आरटीआई कार्यकर्ता, स्वतंत्र पत्रकार और असहमति रखने वाले नागरिक लोकतंत्र में रहने वाले कीड़े-मकोड़े नहीं हैं.

उन्होंने लिखा, ऐसे समय में, जब देश पहले ही राजनीतिक संवाद में गिरती शालीनता का साक्षी बन रहा है, न्यायपालिका से यह उम्मीद थी कि वह संवैधानिक संयम और गरिमा की अंतिम शरणस्थली बनी रहेगी.

आरटीआई एक्टिविस्ट अंजली भारद्वाज ने एक्स पर की गई एक पोस्ट में कहा, परजीवी और कॉकरोच जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना शोभा नहीं देता.

सीजेआई की टिप्पणी को साझा करते हुए अंजलि भारद्वाज नेलिखा, महोदय, सवाल पूछने का अधिकार लोकतंत्र की आत्मा है. सत्ता से जवाब मांगने वाले नागरिक व्यवस्था पर हमला नहीं कर रहे होते बल्कि उसे मज़बूत बनाए रखने में अपनी भूमिका निभा रहे होते हैं.

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मुख्य न्यायाधीश को मीडिया, सोशल मीडिया, आरटीआई और दूसरे एक्टिविस्ट जैसे निगरानी रखने वाले लोगों के लिए परजीवी और कॉकरोच जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना शोभा नहीं देता.

कई किताबों की लेखिका और वरिष्ठ पत्रकारसबा नक़वी ने एक्स पर लिखा, भारत के मुख्य न्यायाधीश ने अभी कहा कि बेरोज़गार युवा कॉकरोच जैसे हैं और मीडिया, आरटीआई एक्टिविस्ट भी कॉकरोच की तरह हैं, ख़ास तौर पर बेरोज़गार लोग. अगर यह बेहद ग़लत तरीके से पेश किया गया बयान नहीं है, तो इसके लिए शब्द नहीं हैं.

वरिष्ठ पत्रकारराजदीप सरदेसाई ने एक्स पर लिखा, जो युवा और आरटीआई एक्टिविस्ट आवाज़ उठाते हैं, कठिन सवाल पूछते हैं और व्यवस्था की कमियां उजागर करते हैं, क्या वे कॉकरोच हैं? सच में, महोदय? क्या हमारे लोकतंत्र की स्थिति अब यही रह गई है? सच में? सोचता हूं कि जस्टिस कृष्ण अय्यर जैसे लोग इस पर क्या कहते.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने एक्स परलिखा, सीजेआई की ओर से युवाओं को लेकर की गई यह टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और कुछ हद तक सामान्यीकृत लगती है. मैं मानता हूं कि उनके सामने मौजूद युवक ग़ैर-ज़िम्मेदार हो सकता है.

लेकिन इस तरह की आम टिप्पणी एक्टिविस्टों के प्रति उनके विरोध को दिखाती है, जो मौजूदा फासीवादी सत्ताधारी व्यवस्था की सोच से भी मेल खाती है. इससे ग़लत संदेश जाता है. उन्हें इस पर माफ़ी मांगनी चाहिए और सफ़ाई देनी चाहिए.

अभिनेता अतुल कुलकर्णी ने एक्स पर तंज़ करते हुए लिखा है, क्या यह सच है कि कॉकरोचों ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल की है? सालों की राष्ट्रीय और पक्षीय नीतियों की नाकामियों में उन्हें घसीटने के लिए?

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित (bbc.com)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778918585ownload.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324693&amp;path_article=2</guid><pubDate>16-May-2026 1:33 PM</pubDate></item><item><title>उधमपुर डियर रेस्क्यू पार्क में गर्मी से बचाव के लिए विशेष इंतजाम, 24 घंटे की जा रही निगरानी </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324687&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324687&path_article=2]]></link><description>उधमपुर, 16 मई । जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में स्थित डियर रेस्क्यू पार्क में गर्मी के मौसम को देखते हुए जानवरों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। यहां वन विभाग की ओर से पूरी कोशिश की जा रही है कि तेज गर्मी का असर हिरणों और अन्य जानवरों पर कम से कम पड़े और वे सुरक्षित व स्वस्थ रहें। वाइल्डलाइफ रेंज ऑफिसर महेश अबरोल ने बताया कि यह एक रेस्क्यू सेंटर है जहां इस समय बड़ी संख्या में हिरण रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे जानवरों की देखभाल और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए यहां कई तरह की व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले पानी की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है। पूरे इलाके में पानी की स्प्रिंकलिंग की जाती है ताकि वातावरण ठंडा रहे और जानवरों को गर्मी से राहत मिले। उन्होंने कहा, पानी के बिना जीवन संभव नहीं है, इसलिए यह सबसे जरूरी सुविधा है। इसके अलावा जानवरों को समय-समय पर साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराया जाता है। महेश अबरोल ने यह भी बताया कि जानवरों की सेहत का पूरा ध्यान रखा जाता है।

हर हफ्ते डॉक्टर यहां आकर सभी जानवरों का चेकअप करते हैं। अगर किसी जानवर को किसी तरह की दिक्कत होती है, तो तुरंत उसका इलाज किया जाता है। गर्मियों में उन्हें खास तरह का आहार भी दिया जाता है, जिसमें ऐसे फल और पोषण वाली चीजें शामिल होती हैं जो शरीर को ठंडा रखने में मदद करती हैं। इसके अलावा उन्हें ग्लूकोज और अन्य जरूरी सप्लीमेंट भी दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि स्पेशल फीड जम्मू और अन्य जगहों से मंगाई जाती है, जिसे वन विभाग उपलब्ध कराता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि जानवरों को संतुलित और पर्याप्त आहार मिले ताकि उनकी सेहत अच्छी बनी रहे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पूरे रेस्क्यू सेंटर में 24 घंटे स्टाफ मौजूद रहता है। कर्मचारी लगातार जानवरों की निगरानी करते हैं ताकि किसी भी समस्या का तुरंत पता चल सके और समय पर कार्रवाई की जा सके। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने बताया, हाल ही में एक हिरण बीमार हो गया था, जिसके बाद तुरंत उसे दवा दी गई और डॉक्टर की मदद से उसका इलाज किया गया। समय पर इलाज मिलने की वजह से उसकी हालत में सुधार हो गया। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778916077.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324687&amp;path_article=2</guid><pubDate>16-May-2026 12:51 PM</pubDate></item><item><title>विश्व उच्च रक्तचाप दिवस : 140/90 से ऊपर बीपी होती है खतरे की घंटी, प्रदूषण भी बढ़ाते हैं ब्लड प्रेशर, हार्टअटैक और स्ट्रोक का खतरा</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324684&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324684&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 16 मई । आज जब हम 17 मई 2026 को 21वां विश्व उच्च रक्तचाप दिवस मना रहे हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल भारत में करीब 11 लाख लोग सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवा देते हैं क्योंकि उनके खून का दबाव नसों में हद से ज्यादा होता है। यह सिर्फ एक बीमारी नहीं बल्कि हमारे दौर की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति बन चुकी है। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस हर साल 17 मई को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसे पहली बार इसी तारीख को साल 2006 में वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग (डब्ल्यूएचएल ) द्वारा स्थापित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को साइलेंट किलर माने जाने वाले उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के खतरों और बचाव के प्रति जागरूक करना है। डॉक्टर इसे साइलेंट किलर (मूक हत्यारा) कहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, अगर आपका ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 एमएमएचजी या उससे ऊपर रहता है, तो आप इसके शिकार हो चुके हैं। इसका सबसे खतरनाक पहलू यह है कि शुरुआत में इसके कोई लक्षण (जैसे सिरदर्द या चक्कर आना) ही दिखाई नहीं देते। शायद यही वजह है कि डब्ल्यूएचओ के 2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में हाई बीपी से जूझ रहे करीब 1.4 बिलियन (140 करोड़) वयस्कों में से लगभग 44 प्रतिशत (करीब 60 करोड़ लोग) इस बात से पूरी तरह अनजान रहते हैं। जब तक वे इसके बारे में जानते, तब तक हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक या किडनी फेलियर जैसी नौबत आ चुकी होती है।

डब्ल्यूएचओ कहता है कि दिन भर में 5 ग्राम (एक चम्मच) से ज्यादा नमक नहीं खाना चाहिए। हालांकि हमारे चटपटे आहार और पैकेटबंद स्नैक्स नसों में सोडियम का सैलाब ला रहे हैं, जिससे बीपी आसमान छूने लगता है। घंटों कुर्सी पर बैठे रहना और लगातार बढ़ता मानसिक तनाव हमारे शरीर में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन भर रहा है। हालिया रिसर्च बताती है कि सिर्फ खराब खाना ही नहीं, बल्कि हवा में मौजूद जहरीले कण (पीएम2.5) भी सीधे हमारी नसों को सिकोड़ कर बीपी बढ़ा रहे हैं। इतनी निराशा के बीच एक अच्छी खबर भी है। हाई बीपी लाइलाज नहीं है। वर्ष 2026 के विश्व उच्च रक्तचाप दिवस की ग्लोबल थीम एक साथ उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करें है। इसका सीधा सा मतलब है कि यह लड़ाई अब सिर्फ डॉक्टर की नहीं है। परिवार को साथ मिलकर खाने में नमक कम करना होगा, साथ में टहलने जाना होगा और दवाइयों का नियम बनाना होगा। भारत सरकार की भारतीय उच्च रक्तचाप नियंत्रण पहल (आईएचसीआई) ने देश के 100 से ज्यादा जिलों में अब सरकारी केंद्रों पर मरीजों को बिल्कुल मुफ्त और सटीक दवाएं (जैसे एम्लोडिपिन) दी जा रही हैं। इस साल मई के महीने को मई मापन माह (एमएमएम) के रूप में मनाया जा रहा है। दिल्ली-एनसीआर में स्वास्थ्य जागरूकता की एक अभूतपूर्व लहर है। अगर आप दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहे हैं, तो मेट्रो स्टेशनों पर लगे विशेष कियोस्क पर आप मुफ्त में अपना बीपी चेक करा सकते हैं। एम्स, सफदरजंग, मैक्स और सर्वोदय जैसे बड़े अस्पताल मेगा स्क्रीनिंग कैंप लगा रहे हैं, जहां जीवनशैली सुधारने के तरीके सिखाए जा रहे हैं। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778915447isw.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324684&amp;path_article=2</guid><pubDate>16-May-2026 12:40 PM</pubDate></item><item><title>'डेंगू को हराने के लिए सामुदायिक प्रयास सबसे अहम,' नड्डा ने लोगों से की भागीदारी की अपील </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324683&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324683&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 16 मई । राष्ट्रीय डेंगू दिवस के मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोगों से डेंगू को लेकर जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई, पानी जमा न होने देना और आसपास का वातावरण सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। सरकार निगरानी, जांच, इलाज और जागरूकता अभियान के जरिए डेंगू नियंत्रण को मजबूत बना रही है। उन्होंने कहा कि डेंगू से लड़ाई में लोगों की भागीदारी सबसे अहम है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर कहा, राष्ट्रीय डेंगू दिवस के अवसर पर, आइए हम सब मिलकर डेंगू की रोकथाम के बारे में जागरूकता फैलाएं और अपने आस-पास के वातावरण को स्वच्छ और सुरक्षित रखें। भारत सरकार बेहतर निगरानी, ​​जांच, उन्नत उपचार और जागरूकता अभियानों के माध्यम से डेंगू नियंत्रण को लगातार सुदृढ़ कर रही है। इस वर्ष की थीम डेंगू नियंत्रण के लिए सामुदायिक भागीदारी: जांचें, साफ करें और ढकें हमें यह याद दिलाती है कि डेंगू को हराने के लिए सामुदायिक प्रयास ही सबसे महत्वपूर्ण हैं। आइए, हम सब मिलकर एक स्वस्थ कल का निर्माण करें। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, सावधानी, स्वच्छता, सजगता और समय पर उपचार से डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। आइए, राष्ट्रीय डेंगू दिवस के अवसर पर संकल्प लें कि अपने घर, आसपास और समाज को स्वच्छ रखें, कहीं भी जलभराव न होने दें। सजग रहें, सुरक्षित रहें।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर कहा, डेंगू को जागरूकता से ही रोका जा सकता है। आइए, हम सभी डेंगू की रोकथाम हेतु जनजागरूकता के प्रसार का संकल्प लें और साथ ही अपने घरों के आसपास स्वच्छता रखें। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, राष्ट्रीय डेंगू दिवस के अवसर पर आइए, हम सभी डेंगू के प्रति जागरूकता बढ़ाने एवं इसकी रोकथाम हेतु सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लें। स्वच्छता, सतर्कता और समय पर उपचार ही डेंगू से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। अपने आसपास पानी जमा न होने दें और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करें। स्वस्थ राजस्थान, सुरक्षित राजस्थान के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर कहा, राष्ट्रीय डेंगू दिवस के अवसर पर आइए हम सभी डेंगू के प्रति जागरूकता फैलाने और स्वच्छता अपनाने का संकल्प लें। अपने आसपास साफ-सफाई रखें, पानी जमा न होने दें और समय पर सावधानी बरतकर स्वयं एवं अपने परिवार को सुरक्षित रखें। जागरूकता और सतर्कता ही डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। मध्य प्रदेश के सीएम डॉ मोहन यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर कहा, डेंगू से बचाव के लिए स्वच्छता, जागरूकता और सतर्कता बहुत जरूरी है। आइए, राष्ट्रीय डेंगू दिवस पर हम सभी संकल्प लें कि अपने आसपास पानी जमा नहीं होने देंगे और जन-जन को डेंगू के प्रति जागरूक करेंगे। स्वच्छ वातावरण ही स्वस्थ जीवन का आधार है। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778914279engu.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324683&amp;path_article=2</guid><pubDate>16-May-2026 12:21 PM</pubDate></item><item><title>ब्रिक्स समिट में विदेश मंत्री जयशंकर ने रिफॉर्म पर दिया जोर, बोले- यह पसंद नहीं, जरूरत का मामला </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324594&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324594&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 15 मई । ब्रिक्स सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने भारत मंडपम में मौजूद अपने समकक्षों और डेलिगेशन को संबोधित किया। ब्रिक्स को संबोधित करते हुए एस जयशंकर ने कहा कि बदलाव पसंद का मामला नहीं बल्कि जरूरत है। तीसरे सेशन के ओपनिंग रिमार्क में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब ग्लोबल गवर्नेंस कितना असरदार है और बहुपक्षवाद कितना भरोसेमंद है, इस पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आज की दुनिया उस समय की तुलना में ज्यादा आपस में जुड़ी हुई, जटिल और मल्टीपोलर है, जब हमारे कई मौजूदा संस्थान बनाए गए थे। फिर भी, ग्लोबल गवर्नेंस को सहारा देने वाले स्ट्रक्चर इन बदलावों के साथ तालमेल नहीं बिठा पाए हैं। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में, रिफॉर्म को लेकर हमारी चर्चा समय पर और जरूरी दोनों है। भरोसे में कमी से लेकर फैसले लेने में कमियों तक, बहुपक्षीय फ्रेमवर्क पर काफी दबाव है।

ब्रिक्स देशों के तौर पर, हमारी साझा जिम्मेदारी है कि हम सबको साथ लेकर चलने वाला, प्रतिनिधि और उत्तरदायी वैश्विक शासन आर्किटेक्चर को आगे बढ़ाएं। इसलिए रिफॉर्म पसंद का मामला नहीं है, बल्कि जरूरत है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आज की चुनौतियों से निपटने में बहुपक्षवाद काम का और असरदार बना रहे। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत ने हमेशा सुधार वाले बहुपक्षवाद की वकालत की है; ऐसा बहुपक्षवाद जो आज की असलियत को दिखाए और उभरते बाजारों और विकासशील देशों की उम्मीदों पर खरा उतरे। संयुक्त राष्ट्र के सदस्य के तौर पर, हम बराबरी के अधिकार के साथ मिलते हैं। यह सिर्फ एक सिद्धांत नहीं है, बल्कि भरोसेमंद बहुपक्षवाद की नींव है। इस बारे में मैं चार बातें कहना चाहता हूं। उन्होंने पहली बात को लेकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र और उसकी सब्सिडियरी बॉडीज में सुधार अभी भी जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता काफी बढ़ी है और इसकी जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। फिर भी, खास स्ट्रक्चर, खासकर सुरक्षा परिषद, पहले के जमाने को दिखाते हैं। बिना किसी मतलब के सुधार के, जिसमें स्थायी और अस्थायी दोनों कैटेगरी में बढ़ोतरी शामिल है, यूएन का प्रभाव और भरोसा कम ही रहेगा। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका का प्रतिनिधित्व जरूरी है। दूसरी बात उन्होंने कही कि हमने असल बातचीत में कुछ तरक्की देखी है। इंटर-गवर्नमेंटल नेगोशिएशन प्रोसेस के काम करने के तरीके बेहतर हुए हैं। अलग-अलग देशों और समूहों को अपने विचार रखने के मौके मिले हैं। इससे आम चर्चा ज्यादा खास हो रही है। अब टेक्स्ट-आधारित बातचीत की ओर बढ़ने का समय है।

ब्रिक्स ने खुद इस मुद्दे पर गहराई से बहस की है, खासकर जोहान्सबर्ग समिट में। हमारे आउटकम डॉक्यूमेंट्स में वह आम सहमति दिखी है। लेकिन सुधार को हकीकत बनाने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। तीसरी बात उन्होंने बताई कि इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम में सुधार की तुरंत जरूरत है। आज की आर्थिक चुनौतियों में सप्लाई चेन में कमजोरियां, खाने और ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव और जरूरी रिसोर्स तक पहुंच में असमानताएं शामिल हैं। बहुपक्षीय विकास बैंकों को ज्यादा मजबूत, ज्यादा रिस्पॉन्सिव और बड़े पैमाने पर रिसोर्स जुटाने के लिए बेहतर तरीके से तैयार होना चाहिए। विकास और जलवायु संबंधित फाइनेंस ज्यादा आसानी से मिलने वाला और राष्ट्रीय प्राथमिकता के हिसाब से होना चाहिए। चौथी बात उन्होंने बताई कि मल्टीलेटरल ट्रेडिंग सिस्टम को मजबूत करना और उसमें सुधार करना होगा। नॉन-मार्केट प्रैक्टिस, सप्लाई चेन का एक जगह होना और मार्केट तक अनिश्चित पहुंच ने ग्लोबल अर्थव्यवस्था को नए जोखिमों के सामने ला दिया है। डब्ल्यूटीओ को मुख्य आधार बनाकर नियमों पर आधारित, निष्पक्ष, खुला और सबको साथ लेकर चलने वाला ट्रेडिंग सिस्टम जरूरी है। साथ ही, इसे कमियों को दूर करना होगा और विकासशील देशों की चिंताओं को दिखाना होगा। आखिर में उन्होंने कहा, हमारे समय का मैसेज साफ है। सहयोग जरूरी है। बातचीत जरूरी है। रिफॉर्म की बहुत जरूरत है। हमें न सिर्फ ग्लोबल चुनौतियों को मैनेज करने के लिए, बल्कि एक ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्व और बराबरी वाला इंटरनेशनल ऑर्डर बनाने के लिए भी मिलकर काम करना चाहिए। भारत रिफॉर्म्ड और असरदार बहुपक्षीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए सभी साझेदारों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778831072rik.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324594&amp;path_article=2</guid><pubDate>15-May-2026 1:14 PM</pubDate></item><item><title>नासा की नई एलईएसटीआर तकनीक, जो करेगी चंद्रमा के -388 फारेनहाइट तापमान का परीक्षण</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324593&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324593&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 15 मई । चंद्रमा पर दिन में चिलचिलाती गर्मी और रात में कड़ाके की ठंड पड़ती है। ऐसे में अब चंद्रमा, मंगल और अन्य ग्रहों पर भविष्य के मिशनों के लिए सामग्रियों को तैयार करने की दिशा में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। नासा ने चंद्रमा की रात की कड़ाके की ठंड की नकल करने वाली नई तकनीक विकसित की है, जो बिना किसी तरल गैस के सामग्रियों और उपकरणों का परीक्षण कर सकेगी। नासा के ग्लेन रिसर्च सेंटर (क्लीवलैंड) के इंजीनियरों ने लूनर एनवायरनमेंट स्ट्रक्चरल टेस्ट रिग (एलईएसटीआर) नामक एक मशीन बनाई है। यह मशीन 40 केल्विन यानी लगभग -388 डिग्री फारेनहाइट तक के अत्यधिक ठंडे तापमान पर सामग्रियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्पेस हार्डवेयर का परीक्षण कर सकती है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर नासा चंद्र बेस बनाने की योजना बना रहा है। वहां तापमान दिन और रात में काफी बदलता रहता है। ऐसी स्थिति में सामान्य रबर कांच की तरह टूट सकता है, सर्किट खराब हो सकते हैं और बिजली के कनेक्शन जमकर टूट सकते हैं।

इसलिए चरम तापमान में सामग्रियों की स्थिति को समझना बेहद जरूरी है। पहले नासा तरल क्रायोजेन यानी तरल नाइट्रोजन, हाइड्रोजन और हीलियम का इस्तेमाल करके परीक्षण करता था। ये अत्यधिक ठंडे तरल पदार्थ विशेष टैंकों में रखे जाते थे। अब एलईएसटीआर इस पुरानी विधि की जगह ले सकेगा। एलईएसटीआर की खासियत यह है कि यह पूरी तरह ड्राई सिस्टम है। इसमें किसी तरल पदार्थ का इस्तेमाल नहीं होता। यह हाई-पावर क्रायोकूलर का उपयोग करके गर्मी को दूर करता है। एलईएसटीआर के तकनीकी प्रमुख एरियल डिमस्टन ने बताया, जिस प्रकार बिना सामग्री की सही जानकारी के कोई इमारत नहीं बनाई जा सकती, उसी प्रकार बिना सामग्रियों के सही व्यवहार को जाने बिना कोई स्पेस मिशन सफल नहीं हो सकता। डिमस्टन के अनुसार, एलईएसटीआर पारंपरिक तरीकों की तुलना में ज्यादा सुरक्षित, सस्ता और आसान है। इसमें तरल क्रायोजेन से जुड़ी जटिलताएं, सुरक्षा उपकरण, विशेष वाल्व और सेंसर की जरूरत नहीं पड़ती। इससे समय, लागत और जोखिम तीनों कम हो जाते हैं। यह नई तकनीक कई क्षेत्रों में काम आएगी। साथ ही, नासा की टीम इससे अगली पीढ़ी के स्पेससूट के लिए कपड़ों, रोवर के टायरों के लिए नई सामग्रियों और शेप मेमोरी अलॉय यानी आकार याद रखने वाली धातु का परीक्षण कर रही है। यह धातु मुड़ने, खिंचने या ठंडी होने के बाद भी अपने मूल आकार में वापस आ जाती है, जो चंद्रमा और मंगल की ऊबड़-खाबड़ सतह पर रोवर के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। --(आईएएनएस
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778830911asa.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324593&amp;path_article=2</guid><pubDate>15-May-2026 1:11 PM</pubDate></item><item><title>आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक स्कैम मामले में सीबीआई ने चंडीगढ़ और पंचकुला में सात जगहों पर मारे छापे </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324592&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324592&path_article=2]]></link><description>चंडीगढ़, 15 मई । सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक एवं एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक स्कैम मामले में गुरुवार को चंडीगढ़ और पंचकुला में सात जगहों पर छापे मारे, जिससे घोटाले में गबन किए गए धन का पता लगाया जा सके। यह जानकारी एक आधिकारिक बयान में शुक्रवार को दी गई। सीबीआई ने जिन जगहों पर छापेमारी की है, उनमें आवासीय परिसर, वाणिज्यिक परिसर/ज्वेलर्स शोरूम, सरकारी धन के गबन के संदिग्ध लाभार्थियों के परिसर और जांच से जुड़े अन्य निजी संस्थाओं के परिसर शामिल हैं। तलाशी के दौरान, धोखाधड़ी और संदिग्ध गबन से संबंधित कई आपत्तिजनक दस्तावेज और वस्तुएं बरामद और जब्त की गईं। इनमें वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं। इस मामले में अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

सीबीआई ने एक बयान में कहा, जांच में तेजी लाई गई है और कई सुरागों पर काम किया जा रहा है। सीबीआई इस मामले में जल्द से जल्द व्यापक जांच करने के लिए प्रतिबद्ध है। हरियाणा सरकार ने इस मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंप दी है। आरोप है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों के सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके धोखाधड़ी के माध्यम से सरकारी धन का गबन किया। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी का मामला सबसे पहले इस साल फरवरी में सामने आया, जब हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग के एक अधिकारी ने अपना खाता बंद करने और शेष राशि को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का प्रयास किया। इसी छोटे से बैंकिंग लेनदेन के दौरान इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ, जिसमें रिकॉर्ड और वास्तविक शेष राशि में भारी विसंगतियां पाई गईं। हरियाणा के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज की, लेकिन राज्य सरकार ने बाद में इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया। इसके बाद ईडी ने भी समानांतर जांच शुरू की। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का कहना है कि उसने संबंधित राज्य सरकारी विभागों को 557 करोड़ रुपए लौटा दिए हैं। हालांकि, जांच अभी भी जारी है। -(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778830757dbi.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324592&amp;path_article=2</guid><pubDate>15-May-2026 1:09 PM</pubDate></item><item><title>उन्नाव रेप केस : सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप की सजा पर रोक लगाने वाला आदेश किया रद्द, नए सिरे से फैसले के निर्देश </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324591&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324591&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 15 मई । सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उन्नाव रेप केस में सजा काट रहे पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ी राहत देने वाले दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को मामले की दोबारा नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया है। दरअसल, दिसंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दे दी थी। इस फैसले के बाद देशभर में काफी नाराजगी और बहस देखने को मिली थी। इसके खिलाफ सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कई ऐसे पहलू हैं, जिन पर हाईकोर्ट को फिर से गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि या तो वह सेंगर की सजा के खिलाफ दाखिल अपील पर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाए या फिर सजा पर रोक लगाने की अर्जी पर नया आदेश जारी करे। इससे पहले, दिसंबर 2025 में ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी और सेंगर व उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था। कुलदीप सेंगर को वर्ष 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराया था। उन्हें नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना था। पीड़िता और उसके परिवार ने सेंगर और उसके सहयोगियों पर लगातार धमकाने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। सेंगर पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े एक अलग मामले में भी 10 साल की सजा काट रहे हैं। जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उस मामले में भी उनकी सजा पर रोक लगाने की दूसरी याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि सेंगर का आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर है और मामले में कोई नया आधार सामने नहीं आया है। -(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778830494nnav.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324591&amp;path_article=2</guid><pubDate>15-May-2026 1:04 PM</pubDate></item><item><title>ओमान तट पर भारतीय झंडे वाले जहाज पर हमला 'नामंजूर': विदेश मंत्रालय</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324495&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324495&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 14 मई । भारत ने बुधवार को ओमान के तट पर भारतीय झंडे वाले जहाज पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक बयान जारी कर रहा कि ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। एमईए के आधिकारिक बयान अनुसार, बुधवार (13 मई) को ओमान के तट पर भारतीय झंडे वाले जहाज पर हुआ हमला किसी भी हालत में मंजूर नहीं है। हम इस बात की निंदा करते हैं कि व्यावसायिक जहाजों और आम नाविकों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने सभी भारतीय चालक दल के सुरक्षित होने की पुष्टि करते हुए ओमानी अधिकारियों का आभार जताया। लिखा कि जहाज पर सवार भारतीय क्रू सुरक्षित हैं और हम उन्हें बचाने के लिए ओमानी अधिकारियों को धन्यवाद देते हैं। अंत में एक बार फिर इस कृत्य की आलोचना करते हुए कहा गया कि भारत फिर से कहता है कि कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाने और बेगुनाह आम क्रू सदस्यों को खतरे में डालने, या किसी और तरह से नौवहन और कॉमर्स की आजादी में रुकावट डालने से बचने की जरूरत है।

ईरान जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट में गुजरात का एक और मालवाहक जहाज डूब गया। हाजी अली नाम का जहाज 13 मई की सुबह ओमान के समुद्री क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी उससे कोई ड्रोन या मिसाइल जैसा हथियार टकरा गया। हादसे के बाद जहाज में आग लग गई, हालांकि ओमान कोस्टगार्ड ने सभी 14 क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 मई की सुबह गुजरात के द्वारका निवासी और जहाज मालिक सुलतान अहमद अंसार के एमएसवी हाजी अली जहाज पानी में डूब गया। यह जहाज बेरबेरा पोर्ट से शारजाह जा रहा था। सुबह करीब 3:30 बजे ओमान के समुद्री तट के पास जहाज हादसे का शिकार हुआ। चालक दल ने बाद में बताया कि जहाज से किसी विस्फोटक जैसी चीज के टकराने की आवाज सुनाई दी थी। इसके बाद जहाज में आग लग गई। हालात बिगड़ते देख 14 क्रू मेंबर्स ने लाइफ बोट पहनी और जहाज छोड़ा। इस दौरान ओमानी अधिकारियों ने आगे बढ़कर भारतीय दल की मदद की। -(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778748463man.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324495&amp;path_article=2</guid><pubDate>14-May-2026 2:17 PM</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी की अपील के बाद छोटे हुए काफिले, साइकिल और ट्रेन से सफर कर रहे बीजेपी नेता</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324489&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324489&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 14 मई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने की अपील का असर अब देशभर में देखने को मिल रहा है। बीजेपी के कई नेता और पदाधिकारी अलग-अलग तरीकों से लोगों को संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि पेट्रोल-डीजल की बचत सिर्फ पैसे बचाने का मामला नहीं बल्कि देशहित और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना लखनऊ में साइकिल चलाकर अपने दफ्तर पहुंचे। उन्होंने कहा, हमारी राष्ट्रीय जिम्मेदारी यह भी है कि हम ईंधन बचाएं क्योंकि इसे आयात करने में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। हमारी ईंधन की लगभग 8586 प्रतिशत जरूरतें आयात से ही पूरी होती हैं, जिससे विदेशी मुद्रा पर काफी खर्च होता है। मौजूदा वैश्विक हालात और अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियां बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और चुनौतीपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री ने कई प्रयास किए हैं और उन्होंने बातचीत के जरिए भी इन मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की है लेकिन अब तक उन्हें बहुत ज़्यादा सफलता नहीं मिली है।

ऐसे समय में हर नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह ईंधन की बचत करे। दिल्ली में बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी भी साइकिल से बीजेपी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद देशभर में मोर्चा कार्यकर्ता छोटी-छोटी दूरी तय करने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करेंगे और लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी बल्कि लोगों की सेहत भी बेहतर रहेगी। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर से बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ट्रेन से यात्रा करते हुए खंडवा पहुंचे। उन्होंने लोगों से अपील की कि जहां संभव हो, वहां सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें ताकि पर्यावरण को बचाया जा सके। वहीं, हरियाणा में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत अपनी पत्नी के साथ ट्रेन से कुरुक्षेत्र पहुंचे और वहां से साइकिल से गुरुकुल गए। उन्होंने भी इसे ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक जरूरी कदम बताया। हरियाणा के मंत्री रणबीर सिंह गंगवा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद अपने काफिले को छोटा करके एक उदाहरण पेश किया है और अब हरियाणा के मंत्री भी उसी रास्ते पर चलेंगे। इसी तरह हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी है। उधर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मुंबई में विधान भवन पहुंचने के लिए बाइक चलाते नजर आए। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सिर्फ दो गाड़ियों के छोटे काफिले के साथ दरभंगा के लिए रवाना हुए। वहीं, बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल किया। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778747812.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324489&amp;path_article=2</guid><pubDate>14-May-2026 2:06 PM</pubDate></item><item><title>15 दिन तक मलेशिया फंसा जालंधर का आकाश लौटा भारत, संत बलबीर सिंह सीचेवाल का जताया आभार </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324488&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324488&path_article=2]]></link><description>कपूरथला, 14 मई । मलेशिया में पिछले करीब 15 दिनों से फंसा जालंधर का युवक आकाश आखिरकार सुरक्षित भारत लौट आया है। उसकी वापसी राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल के प्रयासों से संभव हो सकी। भारत पहुंचने के बाद आकाश के परिवार ने राज्यसभा सांसद सीचेवाल से मुलाकात कर उनका धन्यवाद किया और कहा कि उन्होंने मुश्किल समय में परिवार का साथ निभाया। जानकारी के अनुसार आकाश न्यूजीलैंड से भारत लौट रहा था, लेकिन यात्रा के दौरान दस्तावेजी प्रक्रिया में आई परेशानियों के चलते वह मलेशिया पहुंच गया, जहां उसे कई दिनों तक एयरपोर्ट पर ही रुकना पड़ा। बाद में उसे डिटेंशन सेंटर में भी रखा गया। बलबीर सिंह सीचेवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हर नौजवान की दौड़ बाहर जाने के लिए लगी हुई है, लेकिन कुछ नौजवान इस कारण विदेश में फंस भी जाते हैं। फिर पता नहीं लगता है कि आखिर क्या करना होगा। जालंधर के रहने वाले आकाश की भी कुछ ऐसी ही हालत थी। उन्होंने बताया कि आकाश 13 साल पहले न्यूजीलैंड गया था।

24 अप्रैल को आकाश भारत वापस लौटा। यहां से उसे वापस मलेशिया भेज दिया गया था, क्योंकि वह मलेशिया की एयरलाइन से ही दिल्ली पहुंचा था। कोई विवाद में आकाश का नाम होने पर इमिग्रेशन विभाग ने आकाश को भारत से वापस लौटा दिया था। फिर मलेशिया का प्रशासन आकाश को अपने मुल्क में एंट्री नहीं दे रहा था। इसी कारण आकाश कुछ दिन एयरपोर्ट पर रहा और फिर उसे कैंप में रखा गया था। आकाश के माता-पिता मेरे पास आए थे। इसके बाद हमने उनकी मदद की। भारत लौटने के बाद आकाश और उसके परिवार ने बलबीर सिंह सीचेवाल से मुलाकात के दौरान उन्हें नोटों की माला भी पहनाई और आभार व्यक्त किया। आकाश ने सीचेवाल के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया। परिवार ने बताया कि कई दिनों तक बेटे के विदेश में फंसे रहने से घर का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया था। उन्हें उम्मीद कम होती जा रही थी, लेकिन सीचेवाल की पहल और लगातार प्रयासों के चलते आखिरकार उनका बेटा सुरक्षित घर लौट आया। आकाश ने बताया कि उसने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उसने कई दिन एयरपोर्ट पर गुजारे और मानसिक रूप से काफी परेशान रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए व्यवस्था और अधिक मजबूत होनी चाहिए ताकि किसी को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े। परिवार ने केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से भी अपील की कि विदेशों में संकट में फंसे भारतीयों की सहायता के लिए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। -(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778747634h.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324488&amp;path_article=2</guid><pubDate>14-May-2026 2:03 PM</pubDate></item><item><title>केरल के नए मुख्यमंत्री होगे वीडी सतीशन, हाईकमान ने लगाई मुहर</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324480&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324480&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, 14 मई । आखिरकार लंबे समय तक ऊहापोह के बाद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने केरल के मुख्यमंत्री के चेहरे का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने इस पद के लिए वीडी सतीशन का नाम फाइनल किया है। वो प्रदेश के 13वें मुख्यमंत्री होंगे। पार्टी में लोग इसे नई पीढ़ी के औपचारिक आगमन के रूप में देख रहे हैं। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने यह ऐलान दिल्ली में किया, जिसमें प्रमुख रूप से दीपा दासमुंशी, मुकुल वासनिक और अजय माकन शामिल रहें। यह फैसला, जिसे काफी समय तक टाला गया था, कांग्रेस ने अपने खास नाटकीय अंदाज़ में घोषित किया। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल अंतिम दौर की चर्चाओं के दौरान दिल्ली में मौजूद थे। नेतृत्व का फैसला बताने से पहले उन्हें राहुल गांधी के साथ बैठक के लिए बुलाया गया। इस बीच, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला को राहुल गांधी का निजी फोन आया, जिसमें उन्हें बताया गया कि अब फैसला हो चुका है और सतीशन को मंजूरी मिल गई है। सतीशन के लिए यह पद उनकी राजनीतिक यात्रा की बड़ी उपलब्धि है। यह फैसला केरल में लंबे समय से चली आ रही गुटबाज़ी और चुनावी हार के बाद कांग्रेस के खुद को नए तरीके से तैयार करने की कोशिश को भी दिखाता है।

कोच्चि जिले में जन्मे सतीशन इस महीने के आखिर में 62 साल के हो जाएंगे। उन्होंने अपनी पहचान गुटबाज़ी की राजनीति से नहीं बल्कि विधानसभा में अच्छे प्रदर्शन और संगठन में लगातार काम करके बनाई है। पेशे से वकील सतीशन ने 2001 में परावुर से विधानसभा चुनाव जीतकर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के तेज़ और प्रभावशाली वक्ताओं में अपनी पहचान बनाई। आंकड़ों, तीखे व्यंग्य और दमदार बोलने के अंदाज़ के कारण सतीशन वामपंथी दलों के लिए बड़ी चुनौती बन गए। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें सबसे बड़ी सफलता ऐसे समय में मिली जब कांग्रेस अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही थी। 2021 के विधानसभा चुनाव में यूडीएफ की बड़ी हार के बाद सतीशन को अचानक विपक्ष का नेता चुना गया। शुरुआत में कई लोगों ने उन्हें अंदरूनी खींचतान के बीच एक समझौता उम्मीदवार माना था। सतीशन ने इस जिम्मेदारी को अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने का बड़ा मौका बना लिया। सोने की तस्करी का मामला हो, एआई कैमरे से जुड़े आरोप हों या कानून-व्यवस्था को लेकर विजयन सरकार पर लगातार हमले सतीशन ने खुद को केरल में वामपंथी सरकार के खिलाफ सबसे प्रमुख और आक्रामक नेता के रूप में स्थापित किया।

कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के विपरीत सतीशन को कभी भी पूरी तरह से ए या आई गुटों में से किसी का हिस्सा नहीं माना गया, जिन्होंने दशकों तक केरल की कांग्रेस राजनीति पर दबदबा बनाए रखा। इस तरह की अपेक्षाकृत स्वतंत्र स्थिति ने उन्हें उन युवा विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं का समर्थन दिलाने में मदद की, जो नेतृत्व में बदलाव चाहते थे। पार्टी के भीतर उनके आलोचक उन पर फैसले लेने की शक्ति अपने पास रखने और कभी-कभी जल्दबाजी में राजनीतिक फैसले लेने का आरोप लगाते हैं। फिर भी, उनके विरोधी भी मानते हैं कि कांग्रेस नेतृत्व में इस समय सतीशन का जनता से सबसे मजबूत जुड़ाव है। सतीशन गुरुवार सुबह अपने परिवार के साथ राज्य की राजधानी के लिए रवाना हुए और विपक्ष के नेता के रूप में पिछले पांच वर्षों से जिस सरकारी आवास में रह रहे थे, वहां पहुंचे। एआईसीसी की घोषणा होने से कुछ मिनट पहले ही वह वहां पहुंच गए। इसके बाद वे बिना कुछ बोले, अपने सरकारी आवास पर जमा हुई बड़ी भीड़ के बीच से होते हुए आगे बढ़ गए। अब जब वह विपक्ष की बेंचों से हटकर मुख्यमंत्री बनने की तैयारी कर रहे हैं, तो सतीशन के सामने केवल सरकार चलाने से कहीं बड़ी जिम्मेदारियां और उम्मीदें हैं। उनका उदय कांग्रेस पार्टी के उस प्रयास को दिखाता है, जिसमें वह केरल की राजनीति की जिम्मेदारी एक युवा, अधिक सक्रिय और मीडिया को समझने वाली पीढ़ी को सौंपना चाहती है, जो मौजूदा मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की मजबूत राजनीतिक विरासत का मुकाबला करने के लिए तैयार है। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778743073eral.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324480&amp;path_article=2</guid><pubDate>14-May-2026 12:47 PM</pubDate></item><item><title>तमिलनाडु में विजय ने हासिल किया विश्वास मत, 144 विधायकों का मिला साथ</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324381&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324381&path_article=2]]></link><description>चेन्नई, 13 मई । तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को फ्लोर टेस्ट में विजय सरकार पास हो गई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया। सीएम को 144 विधायकों का साथ मिला है जबकि विरोध में सिर्फ 22 वोट पड़े। दूसरी ओर, तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को विश्वास मत की कार्यवाही के दौरान भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके ने सदन से वॉकआउट कर दिया। उदयनिधि ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर तीखा हमला बोला और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार के बहुमत की वैधता पर सवाल उठाए। विश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान बोलते हुए, उदयनिधि स्टालिन ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी गठबंधन के पास 234 सदस्यों वाली विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए जरूरी 118 सदस्यों की संख्या नहीं है। सदन के पटल पर उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि आपके पास बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटें नहीं हैं। जीतने का भरोसा न होने के कारण मुख्यमंत्री ने दो सीटों से चुनाव लड़ा और बाद में एक सीट से इस्तीफा दे दिया।

उन्होंने अभी तक जनता का शुक्रिया भी अदा नहीं किया है। डीएमके नेता ने बताया कि मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपत्तूर के विधायक को विश्वास मत की कार्यवाही में हिस्सा लेने से रोक दिया था जिससे सत्ताधारी पक्ष की प्रभावी संख्या कम हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेश के कारण, सत्ताधारी पार्टी के पास असल में सिर्फ 106 सदस्य ही बचे हैं। यह सरकार सिर्फ उन पार्टियों के समर्थन से चल रही है, जिन्होंने हमारे गठबंधन के हिस्से के तौर पर चुनाव लड़ा और जीता था। उदयनिधि स्टालिन ने नई सरकार के काम करने के तरीके पर भी तंज कसा और उस पर शासन-प्रशासन के बजाय अपनी छवि चमकाने को ज़्यादा अहमियत देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम रील्स के जरिए शासन करने के बजाय कुछ असली शासन करके दिखाइए। उदयनिधि ने मुख्यमंत्री विजय की भी आलोचना की, जिन्होंने कथित तौर पर विश्वास मत से पहले एआईएडीएमके के बागी नेताओं से मुलाकात की थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ये घटनाक्रम बदलाव या सौदेबाजी की राजनीति को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि लोग पूछ रहे हैं कि क्या यही वह साफ-सुथरा शासन है, जिसका वादा किया गया था। उन्होंने घोषणा की कि विश्वास मत के दौरान डीएमके के विधायक विधानसभा से वॉकआउट करेंगे। वहीं, एआईएडीएमके के महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री ए पलानीस्वामी ने पार्टी के बागी विधायकों से मुख्यमंत्री द्वारा मुलाकात को लेकर सवाल उठाए और विश्वास प्रस्ताव का विरोध करने की बात कही। हालांकि एसपी वेलुमणि के नेतृत्व वाले गुट ने विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया। इस बीच, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द किए जाने का मुद्दा भी इस बहस में प्रमुखता से उठा। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778659727mil.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324381&amp;path_article=2</guid><pubDate>13-May-2026 1:38 PM</pubDate></item><item><title>सुप्रीम कोर्ट पहुंचा नीट यूजी 2026 विवाद, एफएआईएमए ने दाखिल की याचिका </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324380&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324380&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 13 मई । नीट यूजी 2026 परीक्षा को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) ने कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कई बड़े सुधारों की मांग की है। एफएआईएमए का कहना है कि पिछले कुछ समय से नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की विश्वसनीयता पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। खासकर पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों और पारदर्शिता की कमी जैसी शिकायतों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है। इसी वजह से संगठन ने मांग की है कि नीट यूजी 2026 की पूरी प्रक्रिया को या तो दोबारा कराया जाए या फिर इसे न्यायिक निगरानी में कराया जाए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे। याचिका में सबसे बड़ा मुद्दा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को लेकर उठाया गया है। एफएआईएमए का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में एनटीए की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

इसलिए या तो इसे पूरी तरह हटाया जाए या फिर इसका पुनर्गठन करके एक नई, ज्यादा पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और स्वायत्त संस्था बनाई जाए। इसके अलावा याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक नई स्वतंत्र परीक्षा संस्था (एनईआईसी) की व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक नीट यूजी 2026 की परीक्षा और उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया एक हाई-पावर्ड कमेटी की निगरानी में हो। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें और इसमें एक साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक साइंटिस्ट को भी शामिल किया जाए। एफएआईएमए ने यह भी सुझाव दिया है कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए डिजिटल लॉकिंग सिस्टम, कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए। साथ ही पारंपरिक ऑफलाइन परीक्षा के बजाय कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मॉडल को अपनाने पर भी जोर दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि सीबीआई चार हफ्तों के अंदर सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। इस रिपोर्ट में अब तक की जांच, पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क, गिरफ्तारियां, आरोपियों की जानकारी और आगे की कार्रवाई का पूरा विवरण शामिल होना चाहिए। इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि नीट यूजी 2026 के सेंटर-वाइज रिजल्ट सार्वजनिक किए जाएं, ताकि किसी भी तरह की असामान्यता या गड़बड़ी को आसानी से पहचाना जा सके और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा सके। -(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778658537c.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324380&amp;path_article=2</guid><pubDate>13-May-2026 1:18 PM</pubDate></item><item><title>पंजाब में फिर बम की धमकी से हड़कंप, सीएम भगवंत मान और सुनील जाखड़ निशाने पर </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324379&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324379&path_article=2]]></link><description>चंडीगढ़, 13 मई । पंजाब में एक बार फिर बम की धमकी ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस बार मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ को निशाना बनाने की बात कही गई है। बताया जा रहा है कि यह धमकी एक ईमेल के जरिए भेजी गई, जिसके बाद पूरे प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। जानकारी के मुताबिक, बुधवार को एक धमकी भर ईमेल मिला, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान के ऑफिस निशाना बनाने की बात कही गई है। साथ ही पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ को भी 6 जून तक जान से मारने की धमकी दी गई है। इसके साथ ही चंडीगढ़ स्थित भाजपा मुख्यालय और दिल्ली में मौजूद पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय का भी जिक्र किया गया है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हो गई हैं। धमकी सामने आने के तुरंत बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गईं। मुख्यमंत्री आवास, बीजेपी कार्यालयों और अन्य संवेदनशील सरकारी इमारतों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

कई जगहों पर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा बलों को हर स्तर पर सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। साइबर सेल भी इस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। ईमेल कहां से भेजा गया, किसने भेजा और इसके पीछे कौन लोग हो सकते हैं, इस बारे में तकनीकी जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में फिलहाल किसी भी जगह से कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक मिलने की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन एहतियात के तौर पर पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यह पहली बार नहीं है जब पंजाब में इस तरह की धमकी भरे ईमेल सामने आए हों। इससे पहले 7 मई को जालंधर के कई स्कूलों को भी इसी तरह के धमकी भरे ईमेल मिले थे, जिनमें बम धमाकों और आत्मघाती हमलों की बात कही गई थी। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को जान से मारने की धमकी मिलने की खबरें भी सामने आई थीं। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778658091;anjab.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324379&amp;path_article=2</guid><pubDate>13-May-2026 1:11 PM</pubDate></item><item><title>नीट पेपर लीक की सीबीआई जांच केरल तक पहुंची </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324378&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324378&path_article=2]]></link><description>तिरुवनंतपुरम, 13 मई । नीट प्रश्न पत्र लीक मामले में जांच का दायरा अब केरल तक पहुंच गया है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) राज्य के दो जिलों के छात्रों की संभावित संलिप्तता की जांच कर रही है। जांचकर्ताओं को शक है कि एक मॉडल प्रश्न पत्र जिसे कथित तौर पर लीक हुए असली नीट पेपर से तैयार किया गया था। परीक्षा से कुछ दिन पहले ही केरल के कई छात्रों तक पहुंच गया था। केरल से जुड़ा यह मामला तब सामने आया, जब राजस्थान पुलिस ने लगभग 200 ऐसे छात्रों का विवरण सीबीआई को सौंपा, जिनके पास कथित तौर पर लीक हुआ पेपर पहुंचा था। इनमें से कुछ छात्र केरल से जुड़े हैं जबकि जांचकर्ता राजस्थान के चुरू के एक मेडिकल छात्र की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं, जो फिलहाल केरल में ही पढ़ाई कर रहा है। अधिकारियों को शक है कि इस छात्र ने केरल में परीक्षा देने वाले छात्रों के बीच पेपर पहुंचाने में एक अहम कड़ी का काम किया। सीबीआई ने अब अपनी जांच का दायरा बढ़ाकर 10 राज्यों तक कर दिया है। इसके लिए एक विशेष जांच दल (एसआईआटी) का गठन किया गया है, जिसमें चार अलग-अलग टीमें शामिल हैं।

ये टीमें उस पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं, जो हाल के वर्षों में सामने आए सबसे बड़े प्रवेश परीक्षा घोटालों में से एक के पीछे काम कर रहा है। शुरुआती जांच के नतीजों से पता चलता है कि पेपर लीक की शुरुआत, पिछले घोटालों की तरह, प्रश्न पत्रों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के दौरान नहीं हुई बल्कि सीधे महाराष्ट्र के नासिक स्थित उस प्रिंटिंग प्रेस से हुई, जहां इस साल का नीट पेपर छापा गया था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि शुभम करनियार नाम के एक मेडिकल छात्र ने प्रिंटिंग प्रेस से असली पेपर हासिल किया और हरियाणा में मौजूद बिचौलियों के जरिए उसे आगे बढ़ाया। वहां से, यह पेपर कथित तौर पर सीकर से अपना रैकेट चला रहे सरगनाओं तक पहुंचा। शक से बचने के लिए, लीक हुए असली पेपर को कथित तौर पर एक मॉडल प्रश्न पत्र का रूप दे दिया गया। इसके बाद, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में फैले नेटवर्क के जरिए इसे छात्रों तक पहुंचाया गया। जांचकर्ताओं ने पाया कि इस मॉडल पेपर में जीव विज्ञान के 90 प्रश्न और रसायन विज्ञान के 45 में से 35 प्रश्न, असली परीक्षा के पेपर से हूबहू मेल खाते थे। अधिकारियों के अनुसार, इन पेपरों को टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए 25,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की कीमतों में बेचा गया। इस घटना ने एक ऐसे बेहद संगठित अंतरराज्यीय परीक्षा रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो कई राज्यों में सक्रिय था। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778657859eet.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324378&amp;path_article=2</guid><pubDate>13-May-2026 1:07 PM</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी की अपील के बाद केंद्रीय मंत्रियों-कई सीएम ने काफिले का आकार घटाया, मेट्रो-इलेक्ट्रिक वाहनों का किया इस्तेमाल </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324377&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324377&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 13 मई । पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने की अपील के बाद देश भर के राजनीतिक नेताओं और सरकारों ने ईंधन बचाने के उपाय अपनाने शुरू कर दिए हैं। प्रधानमंत्री की अपील के बाद कई नेताओं ने ईंधन बचाने और ऊर्जा बचत प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए मेट्रो यात्रा, इलेक्ट्रिक वाहनों और काफिले का आकार घटाने जैसे विकल्पों को चुना। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को प्रधानमंत्री के ईंधन उपयोग कम करने के आह्वान के अनुरूप अपने-अपने आवासों से काफी छोटे काफिले के साथ रवाना हुए। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिकों से ईंधन बचाने और ऊर्जा कुशल प्रथाओं को अपनाकर प्रधानमंत्री के संदेश का पालन करने का आग्रह किया। यूपी सरकार ने आधिकारिक काफिलों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी करने का निर्देश दिया और अधिकारियों को जहां भी संभव हो, घर से काम करने और वर्चुअल बैठकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री योगी ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने की अपील की और साप्ताहिक वाहन निषेध दिवस ​​मनाने के विचार को बढ़ावा दिया। इस बीच, प्रधानमंत्री की अपील के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर दी।

मध्य प्रदेश सरकार ने वाहन रैलियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है और मंत्रियों और अधिकारियों को वाहनों का कम से कम उपयोग करने और बड़े औपचारिक जुलूसों से बचने का निर्देश दिया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी घोषणा की कि सरकार द्वारा आधिकारिक कार्यों के लिए कम से कम वाहनों का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह कैबिनेट मंत्रियों, भाजपा विधायकों, जन प्रतिनिधियों, दिल्ली सरकार के अधिकारियों और सभी विभागों के साथ मिलकर कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देंगी और आधिकारिक कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले वाहनों की संख्या कम करेंगी। इस घोषणा के बाद, दिल्ली के मंत्री आशीष सूद और कपिल मिश्रा दिल्ली मेट्रो का इस्तेमाल करते हुए अपने कार्यालयों तक गए। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को काफिले के वाहनों का कम से कम उपयोग करने और अनावश्यक वाहनों की तैनाती से बचने का निर्देश दिया, विशेषकर सुरक्षा व्यवस्था के लिए। उन्होंने मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को सभी विभागों में इसी तरह की प्रक्रियाओं को लागू करने का निर्देश दिया। महाराष्ट्र में, सरकार ने गैर-जरूरी हवाई यात्रा पर अंकुश लगाने के लिए सरकारी विमानों के उपयोग हेतु मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यालय से पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी है। भाजपा विधायक संजय उपाध्याय अपने साथियों के साथ मुंबई से चिपलुन तक ट्रेन से यात्रा की। भाजपा विधायक ने कहा कि राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए, वे पेट्रोल की खपत कम करने के लिए भविष्य में भी मुंबई में लोकल ट्रेनों से ही यात्रा करेंगे। गुजरात में, राज्यपाल ने घोषणा की कि ईंधन संरक्षण पहल के तहत वे राज्य के भीतर यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज के बजाय ट्रेनों, राज्य परिवहन बसों और सार्वजनिक परिवहन के अन्य साधनों का उपयोग करेंगे।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि सरकारी काफिलों का आकार कम किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के काफिले में गाड़ियों की संख्या कम की गई और अब काफिले में सिर्फ़ 3 गाड़ियां रहेंगी। वहीं, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा कम करने और ईंधन बचाने की अपील के बाद अपनी अमेरिका यात्रा रद्द कर दी। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। बिहार के कई मंत्रियों और सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने भी ईंधन बचाने की इस पहल का समर्थन किया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी ने घोषणा की कि उन्होंने अपने वाहनों की संख्या आधी कर दी है और वे केवल आवश्यकता पड़ने पर ही आधिकारिक यात्रा करेंगे। बिहार के भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह ने भी इस पहल का समर्थन किया और विश्वास जताया कि बिहार भर के लोग प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करेंगे। राजनीतिक नेताओं की यह राष्ट्रव्यापी प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है। --(आईएएनएस). 4
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778656776m.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324377&amp;path_article=2</guid><pubDate>13-May-2026 12:49 PM</pubDate></item><item><title>एस जयशंकर ने चिली के विदेश मंत्री से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324376&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324376&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 13 मई । विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को चिली के अपने समकक्ष फ्रांसिस्को पेरेज मैकेना से मुलाकात की। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी। उन्होंने लिखा, सुबह चिली के विदेश मंत्री फ्रांसिस्को पेरेज मैकेना से मुलाकात सकारात्मक रही। दोनों देशों ने बाजारों और आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने, प्राथमिकता वाले उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और सर्विस इकोनॉमी को सुगम बनाने पर चर्चा की। उन्होंने आगे कहा, हमने बहुपक्षीय और बहु-देशीय मंचों पर मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई। मैकेना 9 मई से भारत की सात दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। पहले दिन ही नई दिल्ली पहुंचने पर उन्होंने एक्स पर लिखा, यह यात्रा चिली और भारत के बीच संबंधों को और मजबूत करने का शानदार अवसर होगी। हम अपनी साझेदारी को गहरा करने, व्यापार और निवेश के अवसरों का विस्तार करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।

मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने चिली के विदेश मंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ नाश्ते पर चर्चा की। बैठक के बाद गोयल ने कहा कि भारत और चिली ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर चल रही वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की और द्विपक्षीय व्यापार, निवेश तथा रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। गोयल ने कहा, चिली गणराज्य के विदेश मंत्री फ्रांसिस्को पेरेज मैकेना और चिली प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ नाश्ते पर अच्छी चर्चा हुई। उन्होंने कहा, हमने सीईपीए वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की और व्यापार, निवेश तथा रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चिली के साथ अपनी लंबे समय से चली आ रही मैत्रीपूर्ण साझेदारी को भारत पूरा महत्व देता है और साझा विकास एवं समृद्धि के लिए आर्थिक संबंधों और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, भारत चिली के साथ अपने संबंधों को महत्व देता है। हम साझा विकास और समृद्धि के लिए आर्थिक जुड़ाव और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने को प्रतिबद्ध है। यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब भारत वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निर्यात बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के उद्देश्य से प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ कई समझौतों को आगे बढ़ा रहा है। बाद में मैकेना ने भारतीय और चिली के कारोबारी नेताओं के साथ एक गोलमेज चर्चा में भी हिस्सा लिया था, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया। -(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778655681ai.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324376&amp;path_article=2</guid><pubDate>13-May-2026 12:31 PM</pubDate></item><item><title>मणिपुर में दो बड़े नेताओं समेत आठ उग्रवादी गिरफ्तार, हथियारों का जखीरा जब्त</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324295&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324295&path_article=2]]></link><description>इंफाल, 12 मई । सुरक्षा बलों ने मणिपुर में प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े दो बड़े उग्रवादी नेताओं समेत आठ उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को जानकारी दी कि आरोपियों के पास से हथियारों और गोला-बारूद का जखीरा बरामद किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आठ उग्रवादियों में जोगम लिबरेशन फ्रंट का खुद को कमांडर-इन-चीफ बताने वाला विंसेंट पुमजामांग ताइथुल और कांगलीपाक कम्युनिस्ट पार्टी का खुद को सलाहकार बताने वाला खुम्बोंगमयुम आनंद मेइतेई उर्फ ​​लाम्फेल उर्फ ​​इबोमचा शामिल हैं। आठ उग्रवादियों को चुराचांदपुर, इंफाल वेस्ट, काकचिंग और इंफाल ईस्ट समेत अलग-अलग जिलों से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार उग्रवादियों के पास से कई हथियार बरामद किए गए। इनमें कुछ एडवांस हथियार और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद शामिल है। इसके साथ ही कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज और मोबाइल फोन भी बरामद किए गए। अधिकारी ने बताया कि इंफाल ईस्ट जिले के लामलाई पुलिस स्टेशन इलाके से बैन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और उसके सहयोगी संगठन रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट के चार सदस्यों को भी पकड़ा गया। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए पीएलए/आरपीएफ मिलिटेंट्स ने तीन बेगुनाह नौजवानों को बैन संगठन में भर्ती होने के लिए मजबूर कर बंधक बना लिया था।

उन्हें भी सुरक्षा बलों ने बचा लिया है। पुलिस अधिकारी ने आगे कहा कि राज्य में किडनैपिंग, एक्सटॉर्शन और दूसरी गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए अलग-अलग जिलों में इंटेलिजेंस के आधार पर बड़े पैमाने पर कॉम्बिंग, कॉर्डन और सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। इंफाल घाटी और पहाड़ी जिलों के कई बाहरी इलाकों में केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों की ओर से सर्च ऑपरेशन और एरिया डॉमिनेशन एक्सरसाइज की जा रही हैं। गैर-कानूनी लोगों और संदिग्ध गाड़ियों की आवाजाही को रोकने के लिए, मणिपुर में घाटी और पहाड़ी दोनों जिलों में कुल 114 नाके (चेकपॉइंट) बनाए गए हैं। सुरक्षा वाले इंफाल-जिरीबाम नेशनल हाईवे (एनएच-37) पर अनाज और जरूरी सामान ले जाने वाले ट्रकों समेत गाड़ियों को एस्कॉर्ट भी दे रहे हैं। अलग-अलग गाड़ियों की सुरक्षित आवाजाही पक्का करने के लिए संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम और काफिले की सुरक्षा के उपाय किए गए हैं। इस बीच, मणिपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर चल रहे फर्जी वीडियो से सावधान रहें। पुलिस के एक बयान में चेतावनी दी गई है कि किसी भी सर्कुलेटेड वीडियो या ऑडियो क्लिप की सच्चाई सेंट्रल कंट्रोल रूम से कन्फर्म की जा सकती है। सोशल मीडिया पर फर्जी पोस्ट अपलोड या शेयर करने पर कानूनी कार्रवाई होगी। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778579164l.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324295&amp;path_article=2</guid><pubDate>12-May-2026 3:16 PM</pubDate></item><item><title>आईआरसीटीसी भर्ती अलर्ट: हॉस्पिटैलिटी मॉनिटर के 49 पदों पर वैकेंसी, इस दिन वॉक-इन इंटरव्यू </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324293&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324293&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 12 मई । भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम लिमिटेड (आईआरसीटीसी), पूर्वी क्षेत्र ने संविदा के आधार पर हॉस्पिटैलिटी मॉनिटर के कुल 49 पदों पर भर्ती के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। इन पदों पर योग्य अभ्यर्थियों का चयन वॉक-इन इंटरव्यू, मेडिकल फिटनेस, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, आदि चरणों के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 30,000 रुपए प्रति माह होगी। इसी के साथ कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास संबंधित पद अनुसार राष्ट्रीय होटल प्रबंधन एवं खानपान प्रौद्योगिकी परिषद/यूजीसी/एआईसीटीई/भारत सरकार से संबद्ध केंद्रीय या राज्य होटल प्रबंधन संस्थान (सीआईएचएम/एसआईएचएम/पीआईएचएम) से आतिथ्य एवं होटल प्रशासन में पूर्णकालिक बीएससी; या पर्यटन मंत्रालय के अधीन भारतीय पाक कला संस्थानों से बीबीए/एमबीए (पाक कला); या यूजीसी/एआईसीटीई/भारत सरकार/राज्य सरकार से संबद्ध सरकारी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से होटल प्रबंधन एवं खानपान विज्ञान में बीएससी; या पर्यटन एवं होटल प्रबंधन में एमबीए की डिग्री होनी चाहिए। उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 27 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 27 अप्रैल के आधार पर की जाएगी।

वहीं, आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। वॉक-इन इंटरव्यू 18, 19, और 20 मई को सुबह 10:30 बजे से शाम 04:30 बजे तक आईआरसीटीसी क्षेत्रीय कार्यालय, 3, कोइलाघाट स्ट्रीट, ग्राउंड फ्लोर कोलकाता-700 001 पते पर आयोजित किया जाएगा। ऐसे में जो उम्मीदवार इंटरव्यू में शामिल होने वाले हैं, उन्हें समय से केंद्र पर पहुंचने के अलावा अपने साथ आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी, संबंधित सभी डॉक्यूमेंट्स की मूल कॉपी के साथ उनके फोटो कॉपी, नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो, आदि को साथ ले जाने की सलाह दी जाती है। आवेदन पत्र डाउनलोड करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर जाने के बाद संबंधित पद के लिए जारी नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद अधिसूचना में दिए गए एप्लीकेशन फॉर्म को डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट निकाल लें। फिर फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को दर्ज करें और इंटरव्यू के दिन याद से केंद्र पर अपने साथ ले जाएं। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778578904rt.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324293&amp;path_article=2</guid><pubDate>12-May-2026 3:11 PM</pubDate></item><item><title>दिल्ली हाईकोर्ट: न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर क्या व्यवस्था हो, इस पर 7 जुलाई को होगी सुनवाई </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324291&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324291&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 12 मई । दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जजों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि जजों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हुई बैठक की पूरी कार्यवाही यानी मिनट्स ऑफ मीटिंग हलफनामे के साथ कोर्ट में दाखिल की जाए। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि कोर्ट के पहले के आदेश के बाद इस मुद्दे पर बैठक हो चुकी है, लेकिन उसकी रिपोर्ट अब तक रिकॉर्ड पर नहीं लाई गई है। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि क्या सभी न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षा देना संभव नहीं है। इस पर पुलिस की ओर से कहा गया कि सुरक्षा व्यवस्था खतरे के आकलन यानी थ्रेट परसेप्शन के आधार पर तय की जाती है।

पुलिस ने अदालत को बताया कि फिलहाल 12 जज ऐसे हैं जिन्हें सुरक्षा दी जा रही है, क्योंकि उनके खिलाफ संभावित खतरे का आकलन किया गया है। इस पर अदालत ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को खतरा है तो उसे सुरक्षा देना स्वाभाविक और जरूरी है, लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या सभी न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा की मांग वैध है और क्या उन्हें नियमित रूप से व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी यानी पीएसओ और अतिरिक्त सुरक्षा दी जानी चाहिए। अदालत ने साफ कहा कि जब इस विषय पर बैठक हो चुकी है तो उसकी पूरी जानकारी रिकॉर्ड पर लाई जानी चाहिए ताकि मामले को ठीक तरीके से समझा जा सके। यह पूरा मामला ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन ऑफ दिल्ली की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली के जजों को उनके घरों पर व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी और अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कई मामलों में जज संवेदनशील फैसले सुनाते हैं, जिसके चलते उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को बैठक की रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई तय की है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में अदालत इस बात पर विस्तार से विचार करेगी कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर भविष्य में क्या व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778578418h.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324291&amp;path_article=2</guid><pubDate>12-May-2026 3:03 PM</pubDate></item><item><title>सीबीआई का पंजाब विजिलेंस ब्यूरो पर छापा, 25 लाख रुपये की रिश्वत के आरोप में 'बिचौलिया' गिरफ्तार</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324283&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324283&path_article=2]]></link><description>चंडीगढ, 12 मई । केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की टीम ने मोहाली स्थित पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के दफ्तर पर छापा मारा। छापे के दौरान पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के डायरेक्टर एस.एस. चौहान के रीडर को हिरासत में लिया गया, जिन पर 25 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा है। सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले, एक और बड़ी कार्रवाई में सीबीआई ने चंडीगढ़ के एक फाइव स्टार होटल में भी छापा मारा, जहां एक कथित डील चल रही थी। यहां इंस्पेक्टर ओ.पी. राणा, जो विजिलेंस चीफ के रीडर बताए जा रहे हैं और एक बिचौलिए राघव गोयल को कथित रूप से रिश्वत की डील करते हुए पकड़ा गया। इस दौरान करीब 13 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। राघव गोयल को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि ओ.पी. राणा मौके से फरार हो गए।

इस पूरी कार्रवाई को लेकर शिरोमणि अकाली दल के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, आईपीएस भुल्लर से 7.5 करोड़ की रिकवरी याद है? अब भगवंत मान के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। एक केंद्रीय एजेंसी ने कथित रिश्वतखोरी के मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो और विजिलेंस चीफ के दफ्तर पर छापा मारा है। कथित तौर पर 20 लाख रुपये की रिश्वत का सौदा जांच के दायरे में है। केंद्रीय एजेंसी ने इस कार्रवाई के दौरान कथित रूप से 13 लाख रुपये बरामद किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह सौदा एक पांच-सितारा होटल में गोयल नाम के एक बिचौलिए के ज़रिए तय हुआ था। जल्द ही और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है। विजिलेंस चीफ के रीडर (सहायक), ओपी राणा को कथित तौर पर केंद्रीय एजेंसी ने हिरासत में ले लिया है, क्योंकि रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के इस कथित नेटवर्क की जांच अब तेज हो गई है। उन्होंने कहा, पंजाब की आप सरकार और भगवंत मान के राज में, पंजाब विजिलेंस का दफ्तर कथित तौर पर लोगों को परेशान करने का अड्डा बन गया है। पंजाब में भ्रष्टाचार की परतें अब ऊपर से नीचे तक, एक-एक करके खुल रही हैं। भगवंत मान को अब मुख्यमंत्री और गृह मंत्री के पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। पंजाब एक पारदर्शी शासन का हकदार है, न कि डर, धमकियों और भ्रष्टाचार से चलने वाले प्रशासन का। (आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778571077bi.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324283&amp;path_article=2</guid><pubDate>12-May-2026 1:01 PM</pubDate></item><item><title>हंता वायरस संकट: एमवी होंडियस क्रूज यात्रियों की निकासी, आखिरी दो फ्लाइट्स पहुंचीं नीदरलैंड </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324277&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324277&path_article=2]]></link><description>आइंडहोवन, 12 मई। एमवी होंडियस सवार यात्रियों और चालक दल को लेकर अंतिम दो निकासी उड़ानें मंगलवार को नीदरलैंड के आइंडहोवन एयर बेस पर उतरीं। डच विदेश मंत्रालय के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की ओर से भेजी गई पहली उड़ान में छह यात्री सवार थे। दूसरी उड़ान का संचालन डच सरकार की ओर से किया गया था, जो 22 चालक दल के सदस्यों को लेकर आई। इनमें एक डच नागरिक और 21 अन्य देशों के नागरिक शामिल थे। पहला विमान स्थानीय समयानुसार लगभग रात 12:30 बजे (सोमवार को 2330 जीएमटी) उतरा। दूसरी डच उड़ान लगभग 15 मिनट बाद उतरी। डच नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एंड द एनवायरनमेंट ने रविवार को कहा कि सभी यात्रियों की गहन चिकित्सीय जांच की जाएगी। प्रयोगशाला परीक्षण के लिए हवाई अड्डे पर सभी के नमूने लिए जाएंगे। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, एजेंसी ने कहा कि ऐसे चालक दल के सदस्यों और विदेशी यात्रियों के लिए क्वारंटीन होटल की व्यवस्था की गई है। नियमानुसार फिलहाल ये लोग अपने घर नहीं लौट सकते। इस बीच, एमवी होंडियस के डच संचालक ओशनवाइड एक्सपीडिशन्स ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि जहाज स्पेन के टेनेरिफ द्वीप से रवाना हो चुका है और नीदरलैंड्स के रॉटरडैम की ओर जा रहा है।

जहाज को यह यात्रा पूरी करने में लगभग छह दिन लगने की उम्मीद है और इसके इस रविवार तक पहुंचने की संभावना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हंता वायरस जूनोटिक वायरस हैं, जो प्राकृतिक रूप से रोडेन्ट्स (चूहों आदि) को संक्रमित करते हैं और कभी-कभी इंसानों में भी फैल जाते हैं। इंसानों में संक्रमण गंभीर बीमारी और कई बार मौत का कारण बन सकता है, हालांकि बीमारी का प्रकार वायरस और भौगोलिक क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होता है। अमेरिका महाद्वीप में यह संक्रमण हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम (एचसीपीएस) का कारण बन सकता है, जो फेफड़ों और हृदय को तेजी से प्रभावित करता है। वहीं यूरोप और एशिया में यह हेमरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (एचएफआरएस) का कारण बनता है, जो मुख्य रूप से गुर्दों और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है। हालांकि हंता वायरस रोगों का कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन शुरुआती सहायक चिकित्सा देखभाल जीवित रहने की संभावना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसमें श्वसन, हृदय और गुर्दे संबंधी जटिलताओं की करीबी निगरानी और प्रबंधन शामिल है। बचाव का मुख्य तरीका लोगों और संक्रमित चूहों के बीच संपर्क को कम करना है। हंता वायरस संक्रमित कृन्तकों (रोडेन्ट्स) के दूषित मूत्र, मल या लार के संपर्क से इंसानों में फैलता है। कुछ मामलों में इन जीवों के काटने से भी संक्रमण हो सकता है, हालांकि ऐसा कम ही होता है। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778569094t.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324277&amp;path_article=2</guid><pubDate>12-May-2026 12:28 PM</pubDate></item><item><title>असम में लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंता सरमा, राज्यपाल ने दिलाई शपथ</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324274&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324274&path_article=2]]></link><description>दिसपुर, 12 मई । असम की राजनीति में मंगलवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब हिमंता बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही वह असम में लगातार दो कार्यकाल तक मुख्यमंत्री बनने वाले पहले गैर-कांग्रेसी नेता बन गए। गुवाहाटी में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। राज्यपाल ने रविवार को उन्हें एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री नियुक्त किया था। असम में यह एनडीए सरकार का लगातार तीसरा कार्यकाल भी है। इससे पहले 2016 में भाजपा के नेतृत्व में पहली बार सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने थे, जबकि 2021 में हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य की कमान संभाली थी। शपथ ग्रहण समारोह को बेहद खास माना गया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के अलावा एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री शामिल हुए। हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। 2015 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर अमित शाह की पहल पर भाजपा का दामन थामा था। उस समय असम में कांग्रेस का दबदबा था और भाजपा के पास केवल पांच विधायक थे, लेकिन हिमंता सरमा ने भाजपा को पूर्वोत्तर में मजबूत करने के लिए रणनीतिक तरीके से काम किया। 2016 में भाजपा ने उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) का संयोजक बनाया।

इसके बाद उन्होंने पूर्वोत्तर के क्षेत्रीय दलों को भाजपा के साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पूर्वोत्तर में भाजपा के तेजी से बढ़ते प्रभाव के पीछे हिमंता बिस्वा सरमा की रणनीति सबसे बड़ा कारण रही। सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की शिक्षा भी पूरी तरह गुवाहाटी में हुई। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई कामरूप अकादमी से की। इसके बाद प्रतिष्ठित कॉटन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में बीए और एमए की डिग्री हासिल की। फिर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई पूरी कर कुछ समय तक गुवाहाटी हाईकोर्ट में वकालत भी की। साल 2006 में उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध विषय नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल: ए स्ट्रक्चरल एंड फंक्शनल एनालिसिस था, जिसमें पूर्वोत्तर भारत के विकास में परिषद की भूमिका का अध्ययन किया गया था। उनका राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। 1991-92 में वह कॉटन कॉलेज छात्र संघ के महासचिव रहे और बाद में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (एएएसयू) से जुड़े। 1990 के दशक में उन्होंने कांग्रेस में प्रवेश किया और 2001 में जालुकबारी सीट से पहली बार विधायक बने। खास बात यह है कि वह इस सीट से अब तक लगातार जीतते आ रहे हैं। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778568589sm.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324274&amp;path_article=2</guid><pubDate>12-May-2026 12:19 PM</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी की अपील पर शरद पवार ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324270&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324270&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 12 मई । राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कटौती वाली अपील पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इन घोषणाओं के देश की अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना है। पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, मध्य पूर्व में अस्थिर और युद्धग्रस्त हालात को देखते हुए, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिन पहले कुछ घोषणाएं कीं। इन घोषणाओं के देश की अर्थव्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना है। चूंकि ये घोषणाएं अचानक की गईं, इसलिए आम जनता-व्यापार और औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ निवेशकों के बीच भी बेचैनी का माहौल पैदा कर दिया है। यह निस्संदेह रूप से चिंता का विषय है। उन्होंने पीएम मोदी से अपील करते हुए कहा कि इस मुद्दे की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री को अपनी अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर सभी दलों के नेताओं को विश्वास में लेकर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लागू करना देश के हित में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति को देखते हुए, केंद्र सरकार को अधिक संवेदनशीलता और व्यापक परामर्श को प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। शरद पवार ने आगे लिखा, इसके साथ ही, प्रधानमंत्री को देश के प्रख्यात अर्थशास्त्रियों, उद्योग प्रतिनिधियों और संबंधित विशेषज्ञों की तत्काल बैठक बुलाकर स्थिति की गहन समीक्षा करनी चाहिए। आगे की नीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए। हमारा दृढ़ विश्वास है कि देश की जनता के बीच विश्वास और स्थिरता का निर्माण करना इस समय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने हैदराबाद के सिकंदराबाद परेड ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए देशवासियों से अपील की थी कि वे अगले एक साल तक सोने की खरीद कम करें, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत किया जा सके। इसके अलावा पीएम मोदी ने ईंधन की खपत कम करने के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा था कि जहां संभव हो, वहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए कार्यकुशल उपायों को दोबारा लागू करने का सुझाव दिया था। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778568373ard.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324270&amp;path_article=2</guid><pubDate>12-May-2026 12:16 PM</pubDate></item><item><title>तमिलनाडु: विजय लंबे-चौड़े वादे कर क्या ख़ुद को मुश्किल में डाल चुके हैं?</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324262&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324262&path_article=2]]></link><description>तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) अध्यक्ष सी जोसेफ विजय ने 10 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शपथ लेते ही उन्होंने समारोह स्थल से मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले तीन आदेश जारी किए.

पहला, दो महीने में 500 यूनिट से कम बिजली इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली. दूसरा, हर ज़िले में ड्रग्स पर काबू पाने के लिए एक विशेष बल का गठन और तीसरा महिलाओं की सुरक्षा के लिए लायन वुमन टास्क फोर्स की स्थापना.

इसके बाद मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले संबोधन में विजय ने तमिलनाडु के क़र्ज़ और वित्तीय स्थिति को लेकर पिछली सरकार की आलोचना की.

यह अब एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डीएमके नेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने कहा, इस साल फ़रवरी के बजट में हमने तमिलनाडु सरकार की वित्तीय स्थिति को स्पष्ट रूप से बताया था. जिन्होंने आपको वोट दिया है, उन्हें गुमराह और भ्रमित मत कीजिए.

इसी तरह विदुथलाई चिरुथैगल काची के नेता थिरुमावलवन ने भी कहा, सिर्फ़ यह कहना कि तमिलनाडु पर 10 लाख करोड़ रुपये का क़र्ज है, लोगों के बीच ग़लतफ़हमी पैदा करेगा.

क्या वास्तव में मुख्यमंत्री विजय यह कह सकते हैं कि सरकारी ख़ज़ाना ख़ाली है? पिछली डीएमके सरकार तमिलनाडु की कैसी वित्तीय स्थिति छोड़कर गई है? क्या टीवीके सरकार राज्य के क़र्ज़ को कम कर पाएगी और उसे और बढ़ने से रोक सकेगी?

मुख्यमंत्री विजय का भाषण और स्टालिन की आलोचना

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले भाषण में विजय ने कहा, पिछली सरकार ख़ज़ाना ख़ाली करके चली गई. वे ऐसा बोझ छोड़ गए हैं, जिसे संभालना मुश्किल है. ऐसी स्थिति में हमने यह ज़िम्मेदारी संभाली है. स्थिति को ठीक से समझने पर ही पता चलेगा कि क्या है और क्या नहीं है. मेरा मानना है कि इसे एक श्वेत पत्र के रूप में प्रकाशित किया जाना चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा, अगर लोग मुझे थोड़ा समय दें, तो यह मददगार और सहयोगपूर्ण होगा.

इसके बाद डीएमके नेता एम. के. स्टालिन ने राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर विजय की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, सत्ता में आते ही यह कहना शुरू मत कर दीजिए कि सरकार के पास पैसा नहीं है. सब कुछ मौजूद है. ज़रूरत सिर्फ़ लोगों को देने की इच्छा और शासन चलाने की क्षमता की है.

अपने एक्स पेज पर जारी बयान में स्टालिन ने कहा, पांच वर्षों तक हमने कोविड, बाढ़ और केंद्र की बीजेपी सरकार की बेईमानी जैसी कई समस्याओं से उबरते हुए अनगिनत कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं. लेकिन आपने अपने पहले ही भाषण में आरोप लगा दिया कि पिछली सरकार 10 लाख करोड़ रुपये का क़र्ज़ छोड़कर गई और ख़ज़ाना ख़ाली कर गई.

उन्होंने कहा, तमिलनाडु का क़र्ज़ सीमा के भीतर है. पिछले फ़रवरी के बजट में हमने तमिलनाडु सरकार की वित्तीय स्थिति स्पष्ट रूप से बताई थी. क्या आपको यह नहीं पता था? इसके बावजूद आपने इतने सारे वादे किए? जिन्होंने आपको वोट दिया है, उन्हें गुमराह और भ्रमित मत कीजिए.

वाक़ई तमिलनाडु का ख़ज़ाना ख़ाली है?

अर्थशास्त्री कृष्णमूर्ति प्रभाकरण का कहना है कि राज्य की वित्तीय स्थिति उतनी ख़राब नहीं है, जैसा मुख्यमंत्री विजय दावा कर रहे हैं. उनके अनुसार, ख़ज़ाना ख़ाली है कहना निराधार है और वास्तविकता के उलट है.

हालांकि, यह भी नहीं कहा जा सकता कि तमिलनाडु का क़र्ज़ प्रबंधन पूरी तरह से चुनौती मुक्त है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि लगातार बढ़ता ब्याज भुगतान, बिजली बोर्ड का घाटा, कल्याणकारी योजनाओं पर ख़र्च, वेतन और पेंशन ख़र्च राज्य के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव बना रहे हैं.

लेकिन कृष्णमूर्ति प्रभाकरण ने कहा कि मूल रूप से राज्य के ख़र्चों पर बजट में चर्चा होती है और धन का उचित नियोजन के साथ आवंटन किया जाता है. इतना ही नहीं, तमिलनाडु सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 28.5 प्रतिशत तक क़र्ज़ ले सकता है. अब तक कुल क़र्ज़ उसी सीमा के भीतर रहा है.

मद्रास विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के सेवानिवृत्त प्रमुख ज्योति शिवज्ञानम का कहना है कि अगर किसी को सरकार की वित्तीय व्यवस्था की बुनियादी समझ हो, तो वह समझ जाएगा कि विजय का बयान तर्कसंगत नहीं है.

उन्होंने कहा, वित्त व्यवस्था आय और व्यय की निरंतरता पर आधारित होती है. राज्य के हर ख़र्च के लिए विधानसभा में बजट पारित किया जाता है. उसमें से एक रुपया भी खर्च करना हो, तो विधानसभा की मंज़ूरी ज़रूरी होती है. अगर केंद्र सरकार की बात हो तो संसद की मंज़ूरी लेनी पड़ती है.

उन्होंने कहा, इन सबका पूरा विवरण बजट दस्तावेज़ों में होता है. उसमें पिछले वर्ष की वित्तीय स्थिति, मौजूदा और अगले वर्ष के अनुमान, योजनाएं और उनके लिए वित्तीय आवंटन का उल्लेख रहता है. इन सबकी मंज़ूरी के बाद ही राज्य ख़र्च कर सकता है.

ज्योति शिवज्ञानम ने कहा, भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) बाद में इन खातों का ऑडिट भी करते हैं ताकि यह जांचा जा सके कि सब कुछ सही है या नहीं. ऐसे में मुख्यमंत्री का यह बयान वित्तीय प्रक्रियाओं के पूरे संदर्भ को नज़रअंदाज करता हुआ लगता है.

तमिलनाडु की वर्तमान वित्तीय स्थिति क्या है?

पिछले 15 वर्षों में विभिन्न सरकारों के दौरान तमिलनाडु का क़र्ज़ लगातार बढ़ा है. 2011 से 2021 के बीच इसमें विशेष रूप से तेज़ वृद्धि हुई.

बाद में कोविड संकट के दौरान कल्याणकारी ख़र्च बढ़ने, लॉकडाउन में राजस्व घटने और बुनियादी ढांचा में निवेश बढ़ने के कारण इसका आकार और बढ़ गया. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसी अवधि में राज्य की अर्थव्यवस्था में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.

इसके अलावा, किसी राज्य की वित्तीय स्थिति का आकलन करते समय केवल कुल क़र्ज़ नहीं देखा जाता, बल्कि ब्याज़ भुगतान और क़र्ज़ चुकाने की क्षमता को भी ध्यान में रखा जाता है.

तमिलनाडु के 2026-27 के अंतरिम बजट के अनुसार, राज्य का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 40 लाख करोड़ रुपए से 40.6 लाख करोड़ रुपये के बीच आंका गया है.

अंतरिम बजट अनुमान के अनुसार, तमिलनाडु सरकार का कुल बकाया क़र्ज़ 10.71 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचने की उम्मीद है. वहीं, वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान के मुताबिक़ राज्य का कुल क़र्ज़ 9.52 लाख करोड़ रुपये आंका गया है.

राज्य सरकार ने 2026-27 में 1.79 लाख करोड़ रुपये उधार लेने और 60,413 करोड़ रुपये चुकाने की योजना बनाई थी.

अंतरिम बजट अनुमान के अनुसार, 2026-27 के लिए राजस्व घाटा 48,696.32 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. 2025-26 के अनुमान में यह घाटा 41,635 करोड़ रुपये था, लेकिन उसी वर्ष के संशोधित अनुमान में यह बढ़कर 69,219 करोड़ रुपये हो गया.

पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु ने कहा था कि इस बढ़ोतरी के पीछे जीएसटी दरों में कटौती, केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता योजनाओं के तहत मिलने वाले धन को रोके जाने और तमिलनाडु बिजली वितरण निगम के घाटे को पूरा करने के लिए बढ़े ख़र्च जैसे कारण हैं.

पिछले फरवरी में अंतरिम बजट भाषण के दौरान उन्होंने कहा था, अगर केंद्र सरकार की वजह से पैदा हुई वित्तीय चुनौतियां नहीं होतीं, तो चालू वर्ष का राजस्व घाटा बजट अनुमान के भीतर रखा जा सकता था.

अंतरिम बजट अनुमान में राज्य का राजकोषीय घाटा 1.21 लाख करोड़ रुपये आंका गया है. वहीं 2025-26 के संशोधित अनुमान के अनुसार, यह घाटा 1.24 लाख करोड़ रुपये था.

दरअसल, क़र्ज़ राज्य की अर्थव्यवस्था से जुड़ा होता है. यानी कोई राज्य अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के एक निश्चित प्रतिशत तक ही क़र्ज़ ले सकता है. तमिलनाडु के मामले में यह सीमा 28.5 प्रतिशत है. लेकिन 2025-26 तक राज्य का क़र्ज़ इससे कम यानी 26.43 प्रतिशत है.

ज्योति शिवज्ञानम कहते हैं, राज्य का क़र्ज़ बढ़ा है. लेकिन जब क़र्ज़ पांच लाख करोड़ रुपये था, तब राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का आकार क़रीब 20 लाख करोड़ रुपये था. अब यह बढ़कर लगभग 40 लाख करोड़ रुपये हो गया है, यानी दोगुना. अगर क़र्ज़ की तुलना अर्थव्यवस्था के आकार से की जाए, तो ज़्यादा अंतर नजर नहीं आता.

उनके अनुसार, जब अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना होता है, तो क़र्ज़ की राशि भी बढ़ती है. लेकिन क़र्ज़ और सकल घरेलू उत्पाद के बीच का अनुपात लगभग समान बना रहता है.

क्या केवल क़र्ज़ के स्तर से वित्तीय स्थिति तय की जा सकती है?

ऐतिहासिक रूप से तमिलनाडु ने शिक्षा के विस्तार और हर ज़िले में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने वाली कल्याणकारी योजनाओं में निवेश किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसी वजह से राज्य की विकास दर लगातार बढ़ती रही है.

उदाहरण के लिए, 2005-06 से 2011-12 के बीच तमिलनाडु ने 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की. इसके बाद 2012-13 से 2021-22 के दौरान यह वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रही. वहीं 2024-25 वित्तीय वर्ष में तमिलनाडु की विकास दर 11.2 प्रतिशत दर्ज की गई.

ज्योति शिवज्ञानम कहते हैं, दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले कई देशों पर भी भारी क़र्ज़ है. इसमें अमेरिका और चीन जैसे देश शामिल हैं. लगभग हर देश का जीडीपी हर साल बढ़ता है और उसी के साथ कुल क़र्ज़ का स्तर भी बढ़ता है.

इसलिए किसी देश या राज्य के क़र्ज़ का आकलन केवल उसके कुल क़र्ज़ से नहीं, बल्कि जीडीपी, राजस्व, आर्थिक विकास दर और भविष्य की विकास क्षमता के आधार पर किया जाता है.

क्या केवल क़र्ज़ के स्तर से वित्तीय स्थिति तय की जा सकती है?

ऐतिहासिक रूप से तमिलनाडु ने शिक्षा के विस्तार और हर ज़िले में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने वाली कल्याणकारी योजनाओं में निवेश किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसी वजह से राज्य की विकास दर लगातार बढ़ती रही है.

उदाहरण के लिए, 2005-06 से 2011-12 के बीच तमिलनाडु ने 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की. इसके बाद 2012-13 से 2021-22 के दौरान यह वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रही. वहीं 2024-25 वित्तीय वर्ष में तमिलनाडु की विकास दर 11.2 प्रतिशत दर्ज की गई.

ज्योति शिवज्ञानम कहते हैं, दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले कई देशों पर भी भारी क़र्ज़ है. इसमें अमेरिका और चीन जैसे देश शामिल हैं. लगभग हर देश का जीडीपी हर साल बढ़ता है और उसी के साथ कुल क़र्ज़ का स्तर भी बढ़ता है.

इसलिए किसी देश या राज्य के क़र्ज़ का आकलन केवल उसके कुल क़र्ज़ से नहीं, बल्कि जीडीपी, राजस्व, आर्थिक विकास दर और भविष्य की विकास क्षमता के आधार पर किया जाता है.

क्या तमिलनाडु का कुल क़र्ज़ बोझ बन चुका है?

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, किसी राज्य के कुल क़र्ज़ और उसके सकल घरेलू उत्पाद के बीच गहरा संबंध होता है.

इसी के साथ, राज्यों के ज़्यादा कर्ज लेने पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से संसद ने 2004 में वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (एफ़आरबीएम) लागू किया था.

इस क़ानून के अनुसार, जिन राज्यों पर पहले से केंद्र सरकार का क़र्ज़ बकाया है, उन्हें बाज़ार से नया क़र्ज़ लेने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंज़ूरी लेनी होती है.

ज्योति शिवज्ञानम ने कहा, तमिलनाडु सरकार कितना क़र्ज़ ले सकती है, इसकी मंज़ूरी केंद्रीय वित्त मंत्रालय और भारतीय रिज़र्व बैंक देते हैं. इसका मतलब यह है कि कोई भी राज्य तय सीमा से अधिक क़र्ज़ नहीं ले सकता. केंद्र सरकार ने एफ़आरबीएम क़ानून इस उद्देश्य से लागू किया था कि राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत से अधिक न हो.

उन्होंने कहा, यह सीमा हर राज्य की आर्थिक क्षमता के अनुसार, अलग-अलग होती है. तमिलनाडु भारत के बड़े आर्थिक राज्यों में से एक है, ऐसे में उसके लिए क़र्ज़ लेने की सीमा भी उसी आधार पर तय की जाती है.

इसीलिए अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह कहना तर्कसंगत नहीं है कि राज्य का ख़ज़ाना पूरी तरह ख़ाली हो गया है या क़र्ज़ बहुत बड़ा बोझ बन चुका है.

इस पर बात करते हुए कृष्णमूर्ति प्रभाकरण ने कहा, निवेश लगातार जारी रखने के लिए क़र्ज़ का निरंतर प्रवाह ज़रूरी होता है. इसे एक तरह की चक्रीय प्रक्रिया कहा जा सकता है. उदाहरण के तौर पर, छोटे व्यवसाय को भी निवेश बनाए रखने के लिए ऋण की ज़रूरत होती है.

उन्होंने कहा कि इसी तरह राज्य प्रशासन में भी बुनियादी ढांचे, कल्याणकारी योजनाओं और औद्योगिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए क़र्ज़ की आवश्यकता होती है. राज्य प्रशासन में विभिन्न प्रकार के निवेश ज़रूरी होते हैं, इसलिए वित्तीय घाटा भी रहता है. लेकिन यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि यह घाटा एक निश्चित सीमा से अधिक न हो. इन पहलुओं को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि तमिलनाडु भारी क़र्ज़ के बोझ तले दबा हुआ है या गंभीर वित्तीय संकट में है.

जब बीबीसी तमिल ने पूर्व वित्त मंत्री थंगम थेन्नारासु से मुख्यमंत्री विजय की वित्तीय स्थिति संबंधी आलोचना पर सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा, एम. के. स्टालिन ने वित्तीय संकटों और आपदाओं का प्रभावी ढंग से सामना किया और राज्य की अर्थव्यवस्था को दोहरे अंक की विकास दर तक पहुंचाया.

उन्होंने कहा, इसे सबूत के तौर पर देखते हुए यह समझना चाहिए कि राज्य का क़र्ज़ स्तर सीमा के भीतर है. पैसा नहीं है जैसे कारण ढूंढने के बजाय रचनात्मक प्रशासन और तमिलनाडु के विकास पर ध्यान देना चाहिए.

लंबे चौड़े वादों की मुश्किलें

विजय ने अपने चुनावी वादों में कई कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की थी. इनमें से एक वादा, योग्य परिवारों को हर महीने 200 यूनिट मुफ़्त बिजली, उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने पहले हस्ताक्षर से पूरा किया.

इसके तहत सरकार ने आदेश जारी किया कि दो महीने में 500 यूनिट से कम बिजली खपत करने वाले परिवारों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी.

इसके अलावा, चुनावी घोषणापत्र में सम्मानित महिला योजना के तहत हर परिवार की महिला मुखिया के बैंक खाते में 60 वर्ष की आयु तक हर महीने 2,500 रुपये जमा करने का वादा किया गया था.

इसी तरह हर परिवार को छह रसोई गैस सिलिंडर ख़रीदने के लिए सीधे बैंक खाते में राशि देने, वेत्री पयान योजना के तहत महिलाओं के लिए राज्यभर की सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा, अन्नन सीर योजना के तहत विवाह में दुल्हन को 8 ग्राम सोना और रेशम की साड़ी देने के अलावा थाई मामन गोल्ड रिंग योजना के तहत सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले हर बच्चे को सोने की अंगूठी और आवश्यक वस्तुओं का बॉक्स देने जैसे वादे भी किए गए थे.

इसके अलावा विजय ने बेरोज़गार स्नातकों को हर महीने 4,000 रुपये भत्ता देने और पाँच एकड़ से कम ज़मीन वाले किसानों के कृषि ऋण माफ़ करने का भी वादा किया था.

वरिष्ठ पत्रकार शिवप्रियन का कहना है कि इन वादों को पूरा करने के लिए कम से कम लगभग एक लाख करोड़ रुपये की ज़रूरत पड़ सकती है. विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह इतना पैसा कहां से लाएंगे.

लेकिन अर्थशास्त्री कृष्णमूर्ति प्रभाकरण का कहना है, अगर उनकी हर घोषणा लागू की जाती है, तो इससे वित्तीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत तय सीमाओं पर दबाव पड़ सकता है. केवल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि भारतीय रिज़र्व बैंक भी इसकी अनुमति नहीं देगा. अगर इस मामले में कोई अदालत जाता है, तो सुप्रीम कोर्ट भी इसकी अनुमति नहीं देगा.

उन्होंने आगे कहा, विजय पिछले छह महीनों से राज्य के क़र्ज़ स्तर की बात कर रहे थे. यह सब जानते हुए भी उन्होंने इतने सारे वादे किए. अगर वास्तव में वैसा वित्तीय संकट है, जैसा वह बता रहे हैं, तो उन्हें पहले सोचना चाहिए था कि उस स्थिति में इन वादों को पूरा करना संभव होगा या नहीं.

वरिष्ठ पत्रकार एलंगोवन राजशेखरन कहते हैं कि किसी भी सरकार के लिए पूरी तरह क़र्ज़-मुक्त होकर शासन चलाना व्यावहारिक नहीं है. उन्होंने कहा, विजय को अपने वादे पूरे करने के लिए भारी मात्रा में धन जुटाना पड़ेगा.

उन्होंने यह भी कहा, अगर इसके लिए वह केंद्र की बीजेपी सरकार के साथ सहयोगात्मक रवैया अपनाना चाहते हैं, तो राज्यों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर डीएमके सरकार जैसा आक्रामक रुख़ बनाए रखना उनके लिए मुश्किल हो सकता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778567763-6.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324262&amp;path_article=2</guid><pubDate>12-May-2026 12:06 PM</pubDate></item><item><title>हिमंता बिस्वा सरमा के शपथ समारोह में शामिल होने पहुंचे देशभर के नेता</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324260&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324260&path_article=2]]></link><description>गुवाहाटी, 12 मई । असम विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद मंगलवार को हिमंता बिस्वा सरमा दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। गुवाहाटी में होने वाले इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी पहुंच रहे हैं। हिमंता बिस्वा सरमा के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रवाना हो चुके हैं। सभी नेता विवंता होटल के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकले। इसके अलावा, मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टिनसोंग और अन्य नेता भी समारोह में हिस्सा लेने के लिए पहुंच रहे हैं।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने शपथ ग्रहण से पहले मां कामाख्या मंदिर में दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। इस पूरे आयोजन को लेकर गुवाहाटी में काफी उत्साह का माहौल है। समारोह में भाजपा के कई बड़े नेता शामिल होने वाले हैं, इसलिए सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं। होटल से लेकर आयोजन स्थल तक सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर खास ध्यान दिया गया है। समर्थकों की भीड़ और नेताओं की मौजूदगी के कारण यह शपथ ग्रहण समारोह राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शपथ ग्रहण समारोह से पहले, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने विश्व प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इसको लेकर सीएम रेखा गुप्ता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर कहा, मां कामाख्या के पावन धाम में सपरिवार दर्शन एवं पूजा-अर्चना कर समस्त देशवासियों के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। पूर्वोत्तर भारत अष्टलक्ष्मी के रूप में आस्था, संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और विकास की अद्भुत शक्ति का प्रतीक है। मां कामाख्या की यह पुण्यभूमि सदियों से शक्ति, साधना और सनातन परंपरा की दिव्य धारा से पूरे राष्ट्र को प्रेरित करती रही है। मां कामाख्या से प्रार्थना है कि उनका आशीर्वाद सभी देशवासियों पर सदैव बना रहे और भारत निरंतर प्रगति, समृद्धि और गौरव के पथ पर आगे बढ़ता रहे।(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778566878apture.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324260&amp;path_article=2</guid><pubDate>12-May-2026 11:51 AM</pubDate></item><item><title>पीएम मोदी क्यों चाहते हैं कि लोग एक साल तक गोल्ड ना ख़रीदें?</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324199&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324199&path_article=2]]></link><description>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को तेलंगाना के दौरे पर थे. सिकंदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने देश के लोगों से कई अपीलें कीं इनमें से एक अपील एक साल तक सोना ख़रीदने से बचने की थी.

पीएम मोदी की यह अपील पहली नज़र में असामान्य लग सकती है- खासकर ऐसे देश में जहां सोना परंपरा, बचत और पारिवारिक समारोहों से गहराई से जुड़ा हुआ है.

लेकिन आर्थिक जानकारों का कहना है कि इस बयान के पीछे एक बड़ी आर्थिक चिंता छिपी है, वो है ईरान युद्ध के कारण लगातार बढ़ता वैश्विक ऊर्जा संकट. इस संकट का बड़ा असर भारत पर भी पड़ रहा है. भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और डॉलर के मुक़ाबले रुपये की कमज़ोरी बढ़ रही है.

प्रधानमंत्री मोदी ने सप्लाई चेन का हवाला देते हुए कहा, सप्लाई चेन पर लगातार संकट बना रहे तो हम कितने भी उपाय कर लें, मुश्किलें बढ़ती ही जाती हैं. इसलिए अब देश को सबसे पहले रखते हुए, हमें एकजुट होकर लड़ना होगा. देश के लिए मरना ही देशभक्ति नहीं होती है, देश के लिए जीना और देश के लिए अपने कर्तव्यों को निभाना, वो भी देशभक्ति होती है.

उन्होंने कहा, सोने की ख़रीद एक और पहलू है जिसमें विदेशी मुद्रा बहुत खर्च होती है. एक समय था जब संकट आता था तब लोग देशहित में सोना दान दे देते थे. आज दान की ज़रूरत नहीं है लेकिन देशहित में हमें यह तय करना होगा कि सालभर तक घर में कोई कार्यक्रम हो, हम सोने के गहने नहीं ख़रीदेंगे.

सोना नहीं ख़रीदेंगे. विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें यह स्वीकार करके विदेशी मुद्रा बचानी होगी.

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सोना इतना अहम क्यों है?

भारत में सोना घरेलू बचत और खर्च का अहम हिस्सा है, इसलिए यह दुनिया के सबसे बड़े बाज़ारों में से एक है.

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट अहमदाबाद के इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर की प्रमुख प्रोफे़सर सुंदरावल्ली ने बीबीसी को बताया था, हर साल 600 से 700 टन सोना आयात होता है और निर्यात बहुत कम है, इसलिए यह सोना घरों में जमा हो गया है.

उन्होंने कहा कि, भारतीय घरों में बहुत सारा सोना है. घरों में मौजूद सोने को लेकर अलग-अलग अनुमान हैं, लेकिन आमतौर पर इसे 25 हज़ार से 27 हज़ार टन माना जाता है.,

सुंदरावल्ली कहते हैं, देश हर साल लगभग 700800 टन सोने की खपत करता है, लेकिन घरेलू उत्पादन केवल 12 टन के आसपास ही है. यानी भारत अपनी जरूरत का 90 फ़ीसदी से अधिक सोना आयात करता है.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, फ़रवरी 2026 तक भारत के पास करीब 880 टन आधिकारिक सोना था. इस मामले में भारत दुनिया में नौवें स्थान पर है. अमेरिका, जर्मनी, आईएमएफ, इटली, फ्रांस, रूस, चीन और स्विट्ज़रलैंड भारत से आगे हैं.

कई दूसरी चीज़ों के विपरीत, सोने का आयात बड़े स्तर पर औद्योगिक उत्पादन में सीधे योगदान नहीं देता. इसके बावजूद, इसके लिए भारी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (चालू खाता घाटा) और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है.

यह चिंता तब और बढ़ जाती है जब कच्चे तेल की कीमतें ऊंची होती हैं, क्योंकि भारत अपनी लगभग 80 से 85 फ़ीसद तेल ज़रूरतों के लिए भी आयात पर निर्भर है. यहाँ यह बताना ज़रूरी है कि ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है और प्रति बैरल कच्चे तेल के दाम 75 डॉलर से बढ़कर 110 डॉलर तक पहुँच गए हैं.

मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण ऊर्जा और उर्वरक की लागत बढ़ने के बीच, नीति निर्माता ऐसे गैर-ज़रूरी आयातों को नियंत्रित करने पर ध्यान दे रहे हैं जो आयात बिल बढ़ाते हैं. भारत के कुल आयात बिल में सोने की हिस्सेदारी लगभग 9% है. आयात होने वाली चीज़ों में कच्चे तेल के बाद गोल्ड दूसरे स्थान पर है.

सप्लाई संकट

प्रधानमंत्री की अपील ऐसे समय में आई है जब भारत का सोना बाज़ार पहले से ही सप्लाई संकट का सामना कर रहा है.

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी-मार्च (2026) तिमाही में भारत में ज्वैलरी डिमांड पिछले साल की इसी तिमाही के दौरान से 19 फ़ीसदी कम है.

2025 की पहली तिमाही में जहां यह 82 टन थी, वहीं इस साल की पहली तिमाही में यह घटकर करीब 66 टन रह गई.

इस गिरावट की वजह सिर्फ़ ऊंची कीमतों के कारण मांग में कमी नहीं मानी जा रही, बल्कि आयात प्रक्रिया में प्रशासनिक और परिचालन संबंधी कुछ बाधाओं को भी इसके लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है.

तेल संकट के दौरान सोना क्यों बन जाता है समस्या

आर्थिक नज़रिये से देखें तो भारत के लिए सोना और कच्चे तेल में एक बड़ी समानता है, दोनों का अधिकांश हिस्सा आयात किया जाता है और भुगतान अमेरिकी डॉलर में करना होता है.

इसका मतलब यह है कि जब कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से बढ़ती हैं और सोने का आयात ऊंचा बना रहता है तो भारत को इस आयात का भुगतान करने के लिए बहुत ज़्यादा डॉलर की ज़रूरत पड़ती है.

इससे मुद्रा बाज़ार में डॉलर की माँग बढ़ जाती है और रुपये पर दबाव पड़ता है. यही वजह है कि इस साल रुपया डॉलर के मुक़ाबले अब तक 5 फ़ीसदी तक टूट गया है और अपने सबसे निचले स्तर के करीब है.

सोने की खरीदारी रुपये पर कैसे असर डालती है?

अर्थशास्त्री गोल्ड को सामान्य उपभोक्ता वस्तु की तरह नहीं देखते. क्योंकि तेल यानी ईंधन जहां परिवहन, बिजली और औद्योगिक गतिविधियों के लिए ज़रूरी है, वहीं गोल्ड के इंपोर्ट को डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग (वैकल्पिक खर्च) या निवेश का विकल्प मानते हैं.

जब परिवार बड़ी मात्रा में सोना या ज्वैलरी ख़रीदते हैं तो गोल्ड के इंपोर्ट के लिए अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इससे चालू खाता घाटा यानी करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ जाता है. करंट अकाउंट डेफिसिट आयात और निर्यात के बीच अंतर को दिखाता है.

बढ़ता चालू खाता घाटा अक्सर रुपये को कमज़ोर करता है, क्योंकि देश जितनी विदेशी मुद्रा कमा रहा होता है, उससे ज्यादा खर्च कर रहा होता है. यही वजह है कि सरकारें अक्सर इन परिस्थितियों में सोने के आयात को लेकर सतर्क हो जाती हैं.

आर्थिक दबाव के दौर में भारत पहले भी अत्यधिक सोना आयात को हतोत्साहित करने के कदम उठा चुका है.

अतीत में सरकारों ने सोने पर आयात शुल्क बढ़ाया है और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ़) जैसे विकल्पों को बढ़ावा दिया है. इन सभी कदमों का मक़सद विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और रुपये को स्थिर रखना था.

क्या एक परिवार के सोना खरीदने से सचमुच फर्क पड़ता है?

ये सही है कि किसी एक परिवार के गहनों की खरीद टाल देने से रुपये की कीमत पर सीधा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन करोड़ों परिवारों की कुल मांग और हर साल सैकड़ों टन सोने के आयात को देखते हुए ये असर बड़ा दिख सकता है.

शादी के मौसम और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सोने की मांग अक्सर और बढ़ जाती है, क्योंकि भारतीय परिवारों में आज भी सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है.

सोना किसी देश की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करता है और इसका सीधा असर उसकी मुद्रा पर पड़ता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778491819ewellery.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324199&amp;path_article=2</guid><pubDate>11-May-2026 3:00 PM</pubDate></item><item><title>सोमनाथ अमृत महोत्सव भारत की आस्था, पुनर्जागरण और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक : पीएम मोदी गिर</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324191&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324191&path_article=2]]></link><description>सोमनाथ, 11 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात के सोमनाथ में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव सहित कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने भगवान सोमनाथ मंदिर से जुड़ा एक स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया। इसके साथ ही उन्होंने विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सोमनाथ धाम के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के बारे में बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, आज भारत विकास के साथ-साथ अपनी विरासत को भी आगे बढ़ा रहा है। आजादी के बाद सोमनाथ का पुनर्निर्माण भारत के स्वाभिमान के उदय का प्रतीक था। भगवान महादेव शाश्वत हैं, समय से परे हैं और स्वयं समय का स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि आज भगवान सोमनाथ की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने इसे भारत की आस्था, पुनर्जागरण और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि वह सोमनाथ के एक समर्पित भक्त के रूप में कई बार यहां आ चुके हैं। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस पवित्र धाम से जुड़ना उनके लिए सदैव विशेष और भावनात्मक अनुभव रहा है। उन्होंने कहा, दादा सोमनाथ के अनन्य भक्त के रूप में मैं कई बार यहां आया हूं और अनेक बार उनके सामने नतमस्तक हुआ हूं। लेकिन आज जब मैं यहां आ रहा था, तो समय की यह यात्रा एक सुखद अनुभूति दे रही थी। अभी कुछ ही महीने पहले मैं यहां आया था, तब हम सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मना रहे थे। प्रथम विध्वंस के 1,000 वर्ष बाद भी सोमनाथ के अविनाशी होने का गर्व और आज इस आधुनिक स्वरूप की प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष, हम केवल दो आयोजनों का हिस्सा भर नहीं बने हैं, बल्कि हमें हजार वर्षों की इस अमृत यात्रा को अनुभव करने का शिवजी ने अवसर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, समय स्वयं जिनकी इच्छा से प्रकट होता है, जो स्वयं कालातीत हैं और स्वयं कालस्वरूप हैं, आज उन देवाधिदेव महादेव की विग्रह-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष हम मना रहे हैं। यह सृष्टि जिनसे उत्पन्न होती है और जिनमें विलय हो जाती है, आज हम उनके धाम के पुनर्निर्माण का उत्सव मना रहे हैं। जो हलाहल पीकर नीलकंठ बने, आज उन्हीं की शरण में यहां सोमनाथ अमृत महोत्सव आयोजित हो रहा है। यह सब भगवान सदाशिव की ही लीला है। पीएम मोदी ने कहा, आज प्रभास पाटन का यह पवित्र क्षेत्र एक अद्भुत आभा से भरा हुआ है। महादेव का यह साक्षात्कार, सौंदर्य, धरती और आसमान से हुई पुष्पवर्षा, भगवा ध्वजों की आभा, कला, संगीत और नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियां, वेद मंत्रों का उच्चारण, गर्भगृह में हो रहा शिव पंचाक्षरी का अखंड पाठ और इसके साथ सागर की लहरों का जयघोष... ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो पूरी सृष्टि एक स्वर में बोल रही हो - जय सोमनाथ।

प्रधानमंत्री ने कहा, इस भव्य उत्सव के अवसर पर मैं देश के सभी नागरिकों और सोमनाथ के असंख्य भक्तों को अपनी हार्दिक बधाई देता हूं। आज का दिन एक और कारण से भी महत्वपूर्ण है। 11 मई 1998 को भारत ने पोखरण में अपने परमाणु परीक्षण किए थे। इसी दिन राष्ट्र ने तीन परमाणु परीक्षण किए और हमारे वैज्ञानिकों ने दुनिया के सामने भारत की शक्ति और क्षमता का प्रदर्शन किया। इससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई थी। पीएम मोदी ने कहा, 75 साल पहले आज ही के दिन सोमनाथ मंदिर की पुनर्स्थापना हुई थी। यह कोई साधारण अवसर नहीं था। यदि 1947 में भारत आजाद हुआ था, तो 1951 में सोमनाथ की प्राण-प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था। आजादी के समय सरदार वल्लभभाई पटेल ने 500 से अधिक रियासतों को जोड़कर एक भारत का स्वरूप गढ़ा था। साथ ही, सोमनाथ के पुनर्निर्माण के जरिए उन्होंने दुनिया को यह संदेश दिया था कि भारत केवल आजाद ही नहीं हुआ है, बल्कि वह अपने प्राचीन गौरव को पुनः प्राप्त करने के मार्ग पर भी आगे बढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि 11 मई के बाद दुनिया ने भारत के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। 11 मई को वैज्ञानिकों ने अपना काम पूरा कर लिया था, लेकिन 13 मई को दो और परमाणु परीक्षण किए गए। इससे दुनिया को भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति की मजबूती का एहसास हुआ। उस समय पूरी दुनिया भारत पर दबाव डाल रही थी, लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने यह साबित कर दिया कि हमारे लिए देश सर्वोपरि है। दुनिया की कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती और न ही उस पर दबाव बना सकती है। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778487995omnath.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324191&amp;path_article=2</guid><pubDate>11-May-2026 1:56 PM</pubDate></item><item><title>'सोमनाथ अमृत महोत्सव' कार्यक्रम में शामिल हुए प्रधानमंत्री मोदी गिर</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324190&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324190&path_article=2]]></link><description>सोमनाथ, 11 मई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में सोमनाथ अमृत महोत्सव में हिस्सा लिया। यह महोत्सव भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया गया। ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में आयोजित इन समारोहों में मंदिर के जीर्णोद्धार और 1951 में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा किए गए इसके उद्घाटन को याद किया गया। धार्मिक समारोहों से पहले पीएम मोदी ने जामनगर से सोमनाथ पहुंचने के बाद एक रोड शो किया। पीएम रविवार रात गुजरात पहुंचने के बाद जामनगर में ही रुके थे। इस रोड शो में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए हेलीपैड से लेकर मंदिर के पास स्थित वीर हमीरजी सर्कल तक लगभग 1.5 किलोमीटर लंबे रास्ते पर हजारों लोग जमा हो गए। जब प्रधानमंत्री का काफिला उस इलाके से गुजरा, तो समर्थकों ने झंडे लहराए और नारे लगाए।

वहीं, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के कलाकारों ने रास्ते में तय जगहों पर पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुत किए। बाद में प्रधानमंत्री मंदिर परिसर में आयोजित समारोहों में शामिल हुए, जहां उत्सव के हिस्से के तौर पर विशेष अनुष्ठान और प्रार्थनाएं आयोजित की गईं। देशभर के 11 पवित्र तीर्थस्थलों से लाए गए पवित्र जल का उपयोग करके एक कुंभाभिषेक समारोह संपन्न किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और भक्तिपूर्ण प्रार्थनाओं के बीच, औपचारिक रूप से ध्वजारोहण और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान भी किए गए। पीएम मोदी ने ने मंदिर में जलाभिषेक, ध्वज पूजा और महापूजा जैसे अनुष्ठान किए। समारोहों के दौरान हेलीकॉप्टरों से मंदिर पर फूलों की वर्षा भी की गई। इस अवसर के लिए मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था और बड़ी संख्या में श्रद्धालु व गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रधानमंत्री की यात्रा और लोगों की संभावित भीड़ को देखते हुए, पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। यह समारोह स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पुनर्निर्मित मंदिर के औपचारिक उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किए गए हैं। प्रधानमंत्री सोमनाथ के सद्भावना मैदान में एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778487766odi.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324190&amp;path_article=2</guid><pubDate>11-May-2026 1:52 PM</pubDate></item><item><title>मोबाइल डेटा जैसी क्रांति लाएगा एआई, ऊर्जा खपत में होगी बड़ी वृद्धि : गौतम अदाणी </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324189&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324189&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 11 मई । अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने सोमवार को कहा कि एआई मोबाइल डेटा विस्फोट जैसी क्रांति लाएगा और इससे ऊर्जा की खपत में तेज वृद्धि होगी। राष्ट्रीय राजधानी में सीआईआई वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित करते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि एक दशक पहले, कुछ ही लोगों ने भारत में मोबाइल डेटा के विस्फोट के पैमाने की कल्पना की थी, लेकिन जैसे ही स्मार्टफोन किफायती हुए, नेटवर्क का विस्तार हुआ, डेटा की कीमतें गिरीं और खपत में जबरदस्त उछाल आया। अदाणी समूह के चेयरमैन ने कहा,एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) भी इसी तरह की वृद्धि लाएगा, लेकिन यह वृद्धि कहीं अधिक ऊर्जा खपत करने वाली होगी।

डेटा सेंटर की क्षमता, जिसके 2030 तक 5 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है, 2047 तक लगभग 75 गीगावाट तक बढ़ सकती है, इसीलिए भारत को अभी से तैयारी करनी होगी। उन्होंने आगे कहा कि भारत आम परिवारों, फैलते शहरों, सक्रिय कारखानों, इलेक्ट्रिक वाहनों और विस्तार की प्रतीक्षा कर रहे लाखों छोटे व्यवसायों के लिए विकास कर रहा है। अदाणी समूह के प्रमुख ने कहा, भारत में एक बड़ा फायदा यह है कि हम जो कुछ भी बनाएंगे, उसकी मांग पहले से ही मौजूद होगी। हमारे सामने चुनौती है ऐसी क्षमता का निर्माण करना जो मांग के साथ तालमेल बिठा सके। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने एनर्जी सेक्टर में असाधारण प्रगति की है और मार्च 2026 में स्थापित ऊर्जा क्षमता 500 गीगावाट से अधिक हो गई है। बीते 10 वर्षों में स्थापित क्षमता में 53 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई है।

गौतम अदाणी ने आगे कहा कि भारत अपनी इस क्षमता को 4 गुना तक बढ़ाने के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले दो दशक यानी 2047 तक यह 2,000 गीगावाट तक पहुंच जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि हमारी जीडीपी की वृद्धि दिशा देश की ग्रोथ स्टोरी को स्पष्ट रूप से दिखाती है। देश को दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में 67 वर्ष का समय लगा, लेकिन अगले दो ट्रिलियन डॉलर अगले 12 वर्षों में ही जोड़े गए। गौतम अदाणी के मुताबिक,भारत तेजी से विकास कर रहा है। हर सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डा, कारखाना, ऊर्जा संसाधन और डेटा सेंटर विकास के अगले स्तर को बढ़ा रहा है। इस रफ्तार से, भारत हर दशक में अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में एक नई यूरोपीय अर्थव्यवस्था के बराबर वृद्धि करेगा। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778487354dni.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324189&amp;path_article=2</guid><pubDate>11-May-2026 1:45 PM</pubDate></item><item><title>सोमनाथ मंदिर में वैदिक मंत्रों और भजनों के बीच पहली बार कुंभाभिषेक संपन्न </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324186&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324186&path_article=2]]></link><description>गिर सोमनाथ, 11 मई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव के दौरान सोमनाथ मंदिर में ऐतिहासिक कुंभाभिषेक समारोह में भाग लिया। कुंभाभिषेक समारोह गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी के साथ-साथ मंदिर के ट्रस्टियों, संतों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित किया गया। यह आयोजन सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया। मंदिर के पुनर्निर्माण का उद्घाटन भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1951 में सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में हुए पुनर्निर्माण प्रयासों के बाद किया था। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ में रोड शो किया और उसके बाद मंदिर पहुंचे। इस दौरान रास्ते में बड़ी संख्या में लोग उनके स्वागत के लिए जुटे थे। प्रधानमंत्री के काफिले के मंदिर परिसर की ओर बढ़ने के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मंदिर में प्रधानमंत्री ने जलाभिषेक, महापूजा और ध्वज पूजा समेत विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया।

कुंभाभिषेक देश के 11 तीर्थ स्थलों से एकत्रित पवित्र जल से किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस अनुष्ठान के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए 1,860 किलोग्राम वजनी अनुष्ठानिक पात्र को 90 मीटर लंबी क्रेन की मदद से मंदिर के शिखर तक पहुंचाया गया। आयोजकों ने इसे मंदिर के शीर्ष पर आयोजित पहला ऐसा समारोह बताया। मंदिर में प्रवेश करने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर परिसर स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। समारोह के दौरान वैदिक मंत्रों और धार्मिक भजनों का जाप किया गया, जबकि हेलीकॉप्टरों से मंदिर पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गईं। हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माने जाने वाले सोमनाथ मंदिर को इस अवसर के लिए व्यापक रूप से सजाया गया था। गिर सोमनाथ जिले भर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने समारोह में भाग लिया। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा और इस कार्यक्रम के लिए 2,000 से अधिक पुलिसकर्मियों, होम गार्ड और अन्य सुरक्षा कर्मचारियों को तैनात किया गया था। सोमनाथ अमृत महोत्सव का आयोजन पुनर्निर्मित मंदिर की प्रतिष्ठा की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में किया गया है, जिसे लंबे समय से आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में माना जाता रहा है। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778485873omnth.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324186&amp;path_article=2</guid><pubDate>11-May-2026 1:21 PM</pubDate></item><item><title>कानून और कोर्ट के आदेशों के बावजूद भारत में नहीं थमी रैगिंग</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324184&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324184&path_article=2]]></link><description>2009 में रैगिंग के कारण 19 वर्षीय मेडिकल छात्र की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था. जिसके बाद यूजीसी गाइडलाइंस, एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन और कई नियम लागू किए गए. बावजूद इनके रैगिंग की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं
डॉयचे वैले परशिवांगी सक्सेनाकीरिपोर्ट

हाल ही में ग्रेटर नोएडा की बेनेट यूनिवर्सिटी में कथित रैगिंग और मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया. वीडियो यूनिवर्सिटी के हॉस्टल रूम का बताया जा रहा है. कुछ छात्राएं एक लड़की को घेरकर खड़ी हैं. छात्राएं उससे बार-बार सॉरी बोलने को कहती हैं. इसी दौरान एक छात्रा उसे थप्पड़ मारती और अपशब्द बोलते हुए नजर आती है.सोशल मीडिया पर इस घटना को रैगिंग से जोड़कर देखा जा रहा है. पुलिस के अनुसार यह घटना दो हफ्ते पुरानी है. मामले पर विश्वविद्यालय ने शुरुआती तौर पर इसे छात्रों के बीच आपसी विवाद बताया जबकि दादरी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

दिल्ली स्थित एंटी-रैगिंग संगठन, सोसाइटी अगेंस्ट वायलेंस इन एजुकेशन, (सेव) की रिपोर्ट के अनुसार साल 2022 से 2024 के बीच देश में रैगिंग से जुड़ी मौतों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. साल 2022 में रैगिंग से संबंधित 14 मौतें हुईं. अगले ही साल 2023 में यह बढ़कर 17 हो गई, जबकि 2024 में ऐसे मामलों की संख्या 20 तक पहुंच गई. यानी कुल 51 मौतें.

यह रिपोर्ट नेशनल एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर दर्ज 3,156 शिकायतों और 1,946 कॉलेजों से आए मामलों के आधार पर तैयार की गई है. मेडिकल कॉलेजों से रैगिंग की सबसे ज्यादा शिकायतें सामने आई हैं. कुल शिकायतों में 38.6 प्रतिशत मामले इन्हीं कॉलेजों से जुड़े हैं.

रैगिंग को लेकर क्या हैं नियम?

नोएडा के कॉलेज में जो हुआ, वह चर्चा में आया पहला मामला नहीं है. लगभग 17 साल पहले 2009 में अमन काचरू की रैगिंग से मौत ने देशभर में आक्रोश पैदा कर दिया था. वह हिमाचल प्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई करने गए थे.नवंबर 2024 में गुजरात के एक मेडिकल कॉलेज में 18 वर्षीय छात्र अनिल मेथानिया की हार्ट फेल होने से मौत हो गई. आरोप था कि रैगिंग के दौरान उन्हें लगातार तीन घंटे तक खड़ा रखा गया.

इसी साल 8 अप्रैल को तमिल नाडु के इंदिरा मेडिकल कॉलेज के छात्र एशर इमैनुएल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई. परिवार का आरोप है कि घटना वाले दिन उसके साथ मारपीट की गई थी. एशर ने अपने भाई अभिषेक को दोपहर 2 बजे मैसेज भेजा था, मुझे मदद चाहिए. सीनियर्स आज शाम मुझे पीटने वाले हैं. उसने नेशनल एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर भी शिकायत की थी.

शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग की समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने साल 2006 में केंद्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व निदेशक आर. के. राघवन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था. समिति ने 2007 में अपनी रिपोर्ट सौंपी. उन्होंने रैगिंग को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया. जिसके बाद नेशनल एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन की शुरुआत हुई.

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इसी समिति की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आधार पर 2009 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नियम जारी किए. इस ढांचे में 24x7 हेल्पलाइन नंबर, प्रशिक्षित रिस्पॉन्डर्स, रियल-टाइम केस ट्रैकिंग, गुमनाम शिकायत की सुविधा, अभिभावकों को रोजाना ईमेल अपडेट और कॉलेजों में वार्षिक सर्वे जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं. साथ ही कॉलेजों में एंटी-रैगिंग समिति, एंटी-रैगिंग स्क्वॉड और छात्रों से एंटी-रैगिंग शपथ पत्र जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य की गईं. पिछले साल यूजीसी ने एंटी-रैगिंग नियमों का पालन न करने पर 89 विश्वविद्यालयों को नोटिस भी जारी किया था.

रैगिंग के बढ़ते आंकड़े

रैगिंग का आसान शब्दों में अर्थ है: किसी स्टूडेंट के साथ मजाक, बदसलूकी, अपशब्द, डराने-धमकाने या जबरदस्ती ऐसा काम करवाना, जिससे उसे शर्मिंदगी, डर, मानसिक तनाव या शारीरिक तकलीफ महसूस हो. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2016 में 515 और 2017 में 901 शिकायतें दर्ज की गईं. 2018 में भी रैगिंग से जुड़ी शिकायतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा और कुल 1,016 शिकायतें मिलीं. वहीं, 2019 में शिकायतों की संख्या बढ़कर 1,070 तक पहुंच गई.

कोविड-19 के दौरान कॉलेज बंद रहने की वजह से 2020 में इस संख्या में 79.5 प्रतिशत गिरावट आई. उस साल 219 शिकायतें दर्ज हुई. हालांकि संस्थान खुलने के बाद मामलों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली. 2021 में 532 शिकायतें आईं. यह 2020 की तुलना में 143 प्रतिशत अधिक थी.

साल 2022 में 883 और 2023 में 962 शिकायतें सामने आईं. 2024 में शिकायतों की संख्या 1,084 तक पहुंच गई. ये आंकड़े नेशनल एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के आधार पर है. इसके अलावा कई शिकायतें सीधे कॉलेजों और गंभीर मामलों में पुलिस के पास भी दर्ज होती हैं.

सरकारी आंकड़ें यह भी बताते हैं कि 2019-20 से 2023-24 के बीच विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों में भी इजाफा देखने को मिला है. 2019-20 में 173, 2020-21 में 182 और 2021-22 में 186 शिकायतें रिकॉर्ड की गईं.

एंटी-रैगिंग कानून के बावजूद कई कॉलेजों में होती है लापरवाही

सेव फाउंडेशन की लीगल हेड और सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता मीरा कौरा पटेल डीडब्ल्यू हिन्दी से बातचीत में कहती हैं कि रैगिंग के सबसे आम रूपों में अक्सर नए और जूनियर छात्रों से जबरदस्ती नाचने या गाने के लिए कहा जाता है. वह बताती हैं, आजकल कई मामलों में छात्रों को अश्लील तरीके से व्यवहार करने के लिए मजबूर किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं. जब किसी छात्र के साथ मारपीट, अपशब्द या जातिसूचक टिप्पणी की जाती है, तो वह न सिर्फ रैगिंग बल्कि आपराधिक मामला भी बन जाता है. उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में रैगिंग संज्ञेय अपराध (कॉग्निजिबल ऑफेंस) है. लेकिन हर राज्य में ऐसा नहीं है. इसी वजह से हर जगह रैगिंग के मामलों में एफआईआर दर्ज करना आसान नहीं होता.

भारत में रैगिंग को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर यूजीसी के नियम लागू हैं. कई राज्यों में अपने अलग एंटी-रैगिंग कानून मौजूद हैं. त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल समेत 12 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में रैगिंग को लेकर विशेष कानून और सख्त प्रावधान हैं.

छात्रों को एडमिशन लेते समयएंटी-रैगिंग शपथपत्र पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जाता है. मीरा कौरा का कहना है कि इसके बावजूद कॉलेज प्रशासन की ओर से सख्त निगरानी की कमी देखने को मिलती है. वे बताती हैं, अपनी छवि को बचाकर रखने के लिए अक्सर रैगिंग के मामलों को आपसी मतभेद बताकर दबा दिया जाता है. कई हॉस्टलों में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे होते. कई हॉस्टल वार्डन भी ध्यान नहीं देते. हमारे सामने ऐसे बहुत कम मामले हैं जहां रैगिंग के लिए सजा सुनाई गई हो. इससे छात्रों का हौसला बढ़ जाता है.
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778485560w_2.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324184&amp;path_article=2</guid><pubDate>11-May-2026 1:16 PM</pubDate></item><item><title>कैसे जानलेवा गर्मी में काम करते हैं नमक बनाने वाले श्रमिक</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324181&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324181&path_article=2]]></link><description>गुजरात के कच्छ में नमक के मैदान में काम करने वाले हजारों मजदूर झुलसाने वाली गर्मी में काम करते हैं, वह भी बिना बुनियादी सुविधाओं के. ऐसे में घरेलू नुस्खे के सहारे वे यहां जिंदा रहने की कोशिश में लगे हुए हैं.

डॉयचे वैले पररीतिकाकीरिपोर्ट

चिलचिलाती, बर्दाश्त ना होने पाने वाली गर्मी और जानलेवा हीटवेव अब भारत के लिए कोई नई बात नहीं रह गई है. हर साल बढ़ते गर्मियों में भारत के अधिकतर इलाके मुश्किल हालात का सामना करते हैं. लेकिन देश के पश्चिमी रेगिस्तानी नमक के मैदानों में इंसानों को झुलसा देने वाली गर्मी बहुत कम जगहों पर होती है. फिर भी यहां के मजदूर इस असहनीय तापमान में जिंदा रहने के लिए आसान तकनीकों पर भरोसा करते हैं.

गुजरात में लगभग 50,000 मजदूर बिना बिजली या स्वास्थ्य सेवा के दूरदराज के नमक के मैदानों में आठ महीने बिताते हैं, और पीने और नहाने-धोने के पानी के लिए हर 25 दिनों में आने वाले टैंकर पर निर्भर रहते हैं. इस तापमान में वे जिंदा रहने के लिए आराम के लिए छायादार जगहों, कपड़े से ठंडी की गई पानी की बोतलों और काम के घंटों में बदलाव जैसे उपायों का इस्तेमाल करते हैं.

गुजरात के लिटिल रन ऑफ कच्छ में गर्मियों का तापमान आमतौर पर 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाता है और ये कभी कभी तो 47-48 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है. तपती गर्मी जो यहां के मजदूरों के जीवन को कष्टदायक बनाती है, वही गर्मी रेगिस्तान में नमक के उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है. गुजरात भारत के कुल नमक उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा पैदा करता है.

गर्मी से बचने के लिए मजदूरों के अनोखे तरीके

नमक के मैदान में काम करने वाले 42 वर्षीय बाबूलाल नारायण कहते हैं, हम अलग-अलग समय पर काम करते हैं, सुबह जल्दी और शाम को सूरज ढलने के बाद अपना काम करते हैं. दिन के सबसे गर्म घंटों के दौरान, कई लोग अस्थायी झोपड़ियों में शरण लेते हैं. ये झोपड़ियां लकड़ियों के ढांचे पर मोटे कपड़े से ढक कर बनाई जाती हैं और इन्हें जंगली गधे के गोबर से लीपा जाता है.

यहां काम करने वाली 17 साल की भावना राठौर बताती हैं, हम यहां हर दो से तीन घंटे में बैठते हैं, ताकि हमें कमजोरी या चक्कर महसूस ना हो. साथ ही उन्होंने बताया कि गोबर सूरज की रोशनी को रोकता है और गर्मी को बाहर निकलने देता है, जबकि खुरदरा कपड़ा हवा को आर-पार होने देता है. इस इलाके में ना तो पेड़ हैं और न ही प्राकृतिक छाया, और यहां सफेद नमक की परत से सूरज की रोशनी बहुत तेजी से रिफ्लेक्ट होती है. ऐसे में ये झोपड़ियां यहां काम करने वाले लोगों के लिए जीवन रेखा के जैसी हैं.

काली चाय से लेकर कपड़ों में लिपटी बोतल तक

44 वर्षीय कंचन नारायण रस्सी पर लटकी और गीले कपड़े में लिपटी बोतल का इस्तेमाल करती हैं, जो वाष्पीकरण के जरिये से भीतर के पीने के पानी को ठंडा करती है. वह कहती हैं कि हवा पानी को ठंडा करने में मदद करती है. वहीं, गर्मी से बचने के लिए पूर्णिमा दिन में काली चाय पीती हैं. उनका कहना है कि गर्म पेय कच्छ की सूखी गर्मी में पसीना लाता है जिससे शरीर ठंडा रहता है.

नमक बनाने के लिए मजदूर यहां क्रिस्टलाइजेशन की प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए हर दिन सतह को खुरचते हैं. हफ्तों बाद, नमक की एक मोटी परत बन जाती है, जिसे श्रमिक तोड़कर नमक के ढेरों में जमा कर देते हैं. यह काम हमेशा से ही बेहद मुश्किल परिस्थितियों वाला रहा है, लेकिन इस साल भारत के मौसम विज्ञान विभाग ने गुजरात सहित कई इलाकों में सामान्य से अधिक लू वाले दिनों का अनुमान लगाया है.

मजदूर पहले की तुलना में अब काम के दौरान अधिक समय तक गर्मी के संपर्क में रहते हैं. पहले, वे खारे पानी को सतह पर लाने के लिए महंगे डीजल पंपों पर निर्भर थे. लेकिन सौर ऊर्जा अपनाने से लागत कम हो गई है और परिवारों को लंबे समय तक काम करने की सुविधा मिली है. इसका मतलब है कि नमक बनाने का जो काम पहले मार्च में खत्म हो जाता था, वह अब सबसे गर्म महीनों तक जारी रहता है.
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778484206w.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324181&amp;path_article=2</guid><pubDate>11-May-2026 12:53 PM</pubDate></item><item><title>यूपीएससी भर्ती अपडेट: असिस्टेंट प्रोफेसर सहित कई पदों पर आवेदन प्रक्रिया जारी, 15 मई तक फॉर्म जमा करने का मौका</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324025&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324025&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 9 मई। सरकारी कर्मचारी बनने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने विभिन्न विभागों में असिस्टेंट प्रोफेसर सहित कुल 5 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। आयोग ने जिन विभागों में वैकेंसी निकाली है, उनमें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपभोक्ता मामलों के विभाग के राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र में वैज्ञानिक-बी (यांत्रिक) का 1 पद; उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपभोक्ता मामलों के विभाग के राष्ट्रीय परीक्षण गृह में वैज्ञानिक अधिकारी (गैर-विनाशकारी) का 1 पद, संस्कृति मंत्रालय के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में अधीक्षण पुरातत्व अभियंता (सुपरिटेंडिंग आर्कियोलॉजिकल इंजीनियर) के 2 पद, और पुणे स्थित सैन्य इंजीनियरिंग महाविद्यालय में सिविल इंजीनियरिंग (सर्वेक्षण) के असिस्टेंट प्रोफेसर का 1 पद शामिल है।

इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 25 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 मई तय की गई है। ऐसे में जो योग्य और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर आवेदन करना चाहते हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अंतिम तिथि की शाम 6 बजे तक या उससे पहले अपना आवेदन पत्र जमा कर सकते हैं। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से संबंधित पद के अनुसार भौतिकी में मास्टर डिग्री, मैकेनिकल/मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बीई/बीटेक, इलेक्ट्रिकल/मैकेनिकल/मेटलर्जी इंजीनियरिंग में बीई/बीटेक, सिविल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री, या सिविल इंजीनियरिंग में बीई/बीटेक के साथ सिविल इंजीनियरिंग (जियोइन्फॉर्मेटिक्स/जियोइन्फॉर्मेटिक्स एवं सर्वेइंग टेक्नोलॉजी) में एमई/एमटेक की डिग्री होना आवश्यक है। इसके साथ ही उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में निर्धारित वर्षों का अनुभव तथा अन्य आवश्यक पात्रताएं और कौशल होना भी अनिवार्य है। उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा पद के अनुसार 33 से 40 वर्ष के बीच तय की गई है।

आयु की गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी। योग्य अभ्यर्थियों का चयन योग्यता और अनुभव के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग, भर्ती परीक्षा (यदि यूपीएससी द्वारा आयोजित की जाए), इंटरव्यू और अंतिम मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार 7वें सीपीसी के तहत वेतन मैट्रिक्स के लेवल-8, 10 और 11, तथा शैक्षणिक स्तर-10 के अनुसार वेतन प्रदान किया जाएगा। एप्लीकेशन फॉर्म भरते समय उम्मीदवारों को अपनी श्रेणी के अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करना होगा। सामान्य/ओबीसी वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 25 रुपये तय किया गया है। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और महिला अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क में छूट दी गई है। ऑनलाइन आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर संबंधित पद के लिए दिए गए सक्रिय आवेदन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन करें। फिर आवेदन पत्र में मांगी गई सभी जानकारियां दर्ज करें। मांगे गए सभी दस्तावेज सही आकार में अपलोड करें। इसके बाद आवेदन शुल्क का भुगतान कर फॉर्म सबमिट कर दें। अंत में आवेदन पत्र की एक प्रति भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रख लें। उम्मीदवारों को भर्ती से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए यूपीएससी द्वारा जारी विस्तृत अधिसूचना को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पढ़ने की सलाह दी जाती है। -क(आईएएस)नए
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778322130psc.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324025&amp;path_article=2</guid><pubDate>09-May-2026 3:52 PM</pubDate></item><item><title>कालीघाट में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घर के बाहर लगे 'जय श्री राम' के नारे</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324023&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324023&path_article=2]]></link><description>कोलकाता, 9 मई । पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शनिवार को कोलकाता के कालीघाट इलाके में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने जा रहे भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर जय श्रीराम के नारे लगाए। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद शनिवार को कोलकाता के कालीघाट इलाके में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने जा रहे भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर जय श्रीराम के नारे लगाए। यह घटनाक्रम कालीघाट की हरीश चटर्जी स्ट्रीट स्थित ममता बनर्जी के घर के बाहर देखने को मिला। तृणमूल कांग्रेस की चुनावी हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री के आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में कम कर दी गई है। शनिवार को वहां केवल कुछ पुलिसकर्मी और सीआरपीएफ जवान तैनात दिखाई दिए। सड़क भी सामान्य दिनों की तुलना में काफी शांत और लगभग सुनसान नजर आई।

दरअसल, भाजपा कार्यकर्ताओं का एक छोटा जुलूस हरीश चटर्जी स्ट्रीट से होकर ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में जा रहा था। इसी दौरान जब वे ममता बनर्जी के आवास के सामने पहुंचे तो उन्होंने जय श्रीराम के नारे लगाए। नारेबाजी के बाद भाजपा समर्थक वहां से आगे बढ़ गए। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता भी ममता बनर्जी के घर के बाहर पहुंचे और उन्होंने पार्टी प्रमुख के समर्थन में जय बंगला के नारे लगाए। हालांकि, पूरे घटनाक्रम के दौरान माहौल शांतिपूर्ण बना रहा और किसी भी तरह की अप्रिय घटना की खबर सामने नहीं आई। उधर, ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित भव्य समारोह में सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, नव-निर्वाचित विधायक और हजारों भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। करीब 15 साल बाद पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ है। 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। वहीं, 2021 में 215 सीटें जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस इस बार घटकर 80 सीटों पर सिमट गई। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778321499amta.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324023&amp;path_article=2</guid><pubDate>09-May-2026 3:41 PM</pubDate></item><item><title>विजय ने फिर किया सरकार बनाने का दावा पेश, राज्यपाल से तीसरी बार की मुलाक़ात</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324005&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324005&path_article=2]]></link><description>टीवीके चीफ़ विजय ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाक़ात करके सरकार बनाने का दावा पेश किया है. विजय की राज्यपाल से यह तीसरी मुलाक़ात है.

राज्यपाल से मुलाक़ात के बाद, टीवीके नेता विजय ने व्यक्तिगत रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) के कार्यालयों का दौरा किया और पार्टी नेताओं से मुलाक़ात की.

इससे पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) ने तमिलनाडु में सरकार के गठन के लिए टीवीके का समर्थन किया था.

टीवीके को सीपीआई-सीपीएम और कांग्रेस के समर्थन दिए जाने के बाद सरकार बनाने के लिए 116 विधायकों का समर्थन मिल गया है.

234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं, चूंकि विजय, जिन्होंने दो सीटें जीती हैं, उनको एक सीट से इस्तीफ़ा देना होगा, इसलिए टीवीके की संख्या 107 रह जाएगी. उस समय सदन की संख्या घटकर 233 हो जाएगी, इसलिए बहुमत के लिए 117 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता होगी.

इस स्थिति में टीवीके ने वीसीके से भी समर्थन मांगा है, जिसके पास दो विधायक हैं.

सीपीआई नेता डी राजा ने कहा है कि वो तमिलनाडु में धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने के लिए टीवीके का समर्थन करेंगे.

ऐसी ख़बरें हैं कि सीपीआई-सीपीएम के अलावा वीसीके भी टीवीके को समर्थन दे सकती है. इस पार्टी ने चुनावों में दो सीटों पर जीत हासिल की है.

इसके बाद पांच सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने डीएमके से गठबंधन तोड़ते हुए टीवीके को समर्थन का एलान कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इस बीचबार एंड बेंचऔरलाइव लॉके मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशन दाख़िल की गई है. याचिका में अपील की गई है कि गवर्नर को निर्देश दिए जाएं कि वो तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) नेता सी जोसेफ़ विजय को राज्य में सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें.

यह याचिका के एज़िलारसी ने दाखिल की है, जिन्होंने खुद को वकील और टीवीके का सक्रिय सदस्य बताया है.

याचिका में कहा गया है कि 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जिसके चलते त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनी. चुनाव में 108 सीट जीतकर टीवीके सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है.

सीपीआई ने समर्थन का किया एलान

सीपीएम नेता के. बालाकृष्णन ने कहा है कि तमिलनाडु की जनता की ओर से टीवीके को मिले जनादेश का सम्मान किया जाना चाहिए.

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, भले ही उन्हें बहुमत नहीं मिला हो, लेकिन टीवीके सबसे बड़ी पार्टी है. हम नहीं चाहते कि तमिलनाडु पर राष्ट्रपति शासन या राज्यपाल के ज़रिए शासन हो. इसलिए इस समय जनता की चुनी हुई सरकार की ज़रूरत है. ऐसी स्थिति में टीवीके का समर्थन करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. इसलिए हमने यह फैसला लिया है.

यह पूछे जाने पर कि क्या टीवीके को समर्थन देने के बारे में डीएमके से कोई बात हुई है, बालाकृष्णन ने कहा, हर पार्टी को अपना फैसला लेने का अधिकार है. हमें मौजूदा राजनीतिक स्थिति का आकलन करके अहम फैसला लेना होता है. उसी आधार पर हमने यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है. इसके लिए डीएमके या किसी सहयोगी दल की सहमति ज़रूरी नहीं है. सबसे ज़रूरी बात यह है कि जनता की सरकार बने.

सीपीआई नेता डी राजा ने पार्टी के फ़ैसले की जानकारी पत्रकारों को दी है.

उन्होंनेकहा, हमारी पार्टी की तमिलनाडु यूनिट ने राष्ट्रीय नेतृत्व की सलाह पर फ़ैसला किया है कि हम टीवीके का समर्थन करेंगे.

हमने राज्यपाल से भी राज्य में सबसे बड़े दल के नेता को सरकार बनाने के लिए निमंत्रण देने की गुज़ारिश की है.

इससे पहले टीवीके ने वीसीके और वामपंथी दलों से समर्थन मांगा था. वहीं सीपीएम के महासचिव बेबी ने पहले ही संकेत दिया था कि ये पार्टियां विजय का समर्थन कर सकती हैं.

पत्रकारों से बात करते हुए बेबी ने कहा था, नई पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. बहुमत के लिए पार्टी को केवल कुछ सीटों की ज़रूरत है. राज्यपाल को उस पार्टी को आमंत्रित करना चाहिए था.

कुछ रहस्यमय कारणों से तमिलनाडु के राज्यपाल ने सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया. राज्यपाल को उस पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए था.

उन्होंने कहा, जब वाजपेयी सरकार बनी, जो सिर्फ़ 13 दिन चली, तब राष्ट्रपति ने यह नहीं पूछा कि सदन में बहुमत साबित करने के लिए उसके पास पर्याप्त संख्या है या नहीं. तब वाजपेयी को एक महीने का समय दिया गया था. यहां टीवीके नेता विजय ने अपना बहुमत साबित करने के लिए सिर्फ दो सप्ताह का समय मांगा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्यपाल ने केंद्र और कई राज्यों में अपनाई जाने वाली परंपरा का पालन नहीं किया है.

राज्यपाल की ओर से नहीं मिला न्योता

दूसरी ओर विजय की टीवीके को सरकार बनाने के लिए राज्यपाल की ओर से आमंत्रित न किए जाने को लेकर भी विवाद है.

ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि विजय शुक्रवार शाम को राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मिलने जा रहे हैं.

वहीं दिन में तमिलनाडु कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार और राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के ख़िलाफ़ राजधानी चेन्नई में विरोध प्रदर्शन किया था.

कांग्रेस की मांग है कि विजय को सरकार बनाने का न्योता मिलना चाहिए.

स्टालिन ने भी राज्यपाल से गुज़ारिश की

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके नेता एमके स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट कर जल्द से जल्द सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है.

एमके स्टालिन ने एक्स पर लिखा, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं और चुनाव आयोग ने चुने गए विधायकों की सूची जारी कर दी है, जिन्हें जनता ने चुना है.

मौजूदा विधानसभा पहले ही भंग की जा चुकी है और इस संबंध में महामहिम राज्यपाल अधिसूचना जारी कर चुके हैं.

उन्होंने आगे लिखा, ऐसे में निर्वाचित विधायकों के शपथ ग्रहण करने और राज्य के कल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए नई सरकार का गठन होना न सिर्फ समय की मांग है, बल्कि लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण दायित्व भी है.

इस संदर्भ में, डीएमके की ओर से, मैं महामहिम राज्यपाल से अनुरोध करता हूं कि सरकार गठन में किसी भी तरह की देरी से बचने के लिए संविधान के मुताबिक फौरन नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू की जाए.

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है. अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को सबसे ज़्यादा 108 सीटें मिली हैं. कांग्रेस और वामापंथी दलों ने अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778311779ijay.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324005&amp;path_article=2</guid><pubDate>09-May-2026 12:59 PM</pubDate></item><item><title>मिलिए मुंह में कलम दबाकर लिखने वाले फ़ैज़ानउल्ला से, जो बने 10वीं बोर्ड के 'टॉपर'</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324003&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324003&path_article=2]]></link><description>सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित मोहम्मद फ़ैज़ानउल्ला का जब 10वीं बोर्ड का रिज़ल्ट आया तो उनके एक वीडियो ने लोगों के दिल को छू लिया.

वो उस वीडियो में दांत के बीच कलम दबाकर कॉपी पर लिख रहे थे. दरअसल सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित फ़ैज़ानउल्ला के हाथ-पैर बचपन से ही काम नहीं करते थे. लेकिन वो खुद और उनका परिवार चाहता था कि वो खूब पढ़ाई करें.

उन्होंने झारखंड में 10वीं की स्टेट बोर्ड परीक्षा में 93 प्रतिशत अंक हासिल किए और वो इस परीक्षा में दिव्यांग कैटेगरी में टॉपर बने. उन्होंने परीक्षा में राइटर की उपलब्धता के बाद भी ज़्यादातर कॉपी खुद ही लिखी.

सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित गोड्डा टाउन के रहने वाले फ़ैज़ानउल्ला अपनी बीमारी की वजह से दूसरे बच्चों की तरह कभी स्कूल नहीं जा सके, लेकिन उनके परिवार ने और उनके शिक्षक ने पूरा सहयोग भी किया.

मोहम्मद फ़ैज़ानउल्ला ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में कहा, मैं कभी स्कूल की कक्षाओं में नहीं पढ़ सका. अब इस बात का मुझे मलाल नहीं है, क्योंकि मेरे अंक ख़ुद ही ज़ाहिर करते हैं कि मैं कम से कम पढ़ाई के मामले में सामान्य वर्ग के बच्चों से कम नहीं हूं.

फ़ैजानउल्ला का परिवार शिवाजी नगर में दो कमरे के घर में रहता है .

इनमें से एक छोटे कमरे का इस्तेमाल दुकान चलाने के लिए किया जाता है. वहीं, दूसरे एक छोटे से कमरे में पूरा परिवार रहता है.

परिवार को फ़ैज़ानउल्ला की बीमारी का अहसास तब हुआ जब वो छह महीने के थे. उनकी दादी को लगने लगा था कि बच्चे के शरीर में बिल्कुल भी मूवमेंट नहीं है. उस समय को याद करते हुए फ़ैज़ानउल्ला के पिता मोहम्मद अनवार आलम ग़मगीन लहजे में कहते हैं, स्थानीय डॉक्टर ने हमें बताया कि मेरा बेटा सेरेब्रल पाल्सी नाम की बीमारी से पीड़ित है.

मोहम्मद अनवार आलम उस वक़्त इस बीमारी से बिल्कुल अनजान थे. लेकिन डॉक्टर की बात से ये ज़ाहिर हो गया था कि उनके बेटे फ़ैज़ानउल्ला जन्म से एक बड़ी बीमारी की चपेट में आ गए हैं. रिश्तेदारों की सलाह पर अनवार आलम बेटे का इलाज कोलकाता में करवाते रहे. लेकिन साल गुज़रता गया और कोई बड़ा सुधार नज़र नहीं आया.

इस बारे में उनकी मां नज़मा कहती हैं कि उनके लिए उम्मीद की किरण वो थी जब फ़ैज़ानउल्ला किसी भी दूसरे स्वस्थ बच्चे की तरह सही उम्र में बोलने लगे थे.

वो कहती हैं, न फ़ैज़ान खुद से हिल सकते थे, न उठ सकते थे, न बैठ सकते थे. उम्र के साथ सुधार के नाम पर बस वह बातचीत करने लगे थे. फ़ैज़ान का सामान्य बच्चों की तरह बातचीत करना हम लोगों के लिए भविष्य की एक उम्मीद बन गया.

फ़ैज़ानउल्ला का बोलना उनके माता-पिता के लिए उम्मीद की तरह था और अनवार ने पांच साल की उम्र से उन्हें मौखिक तौर पर धीरे-धीरे पढ़ाना शुरू किया. मोहम्मद अनवार एक प्राइवेट मदरसे में बतौर शिक्षक के तौर पर काम करते हैं.

उन्होंने मौखिक तौर पर अपने पुत्र फै़ज़ानउल्ला को उर्दू, अरबी, हिंदी, अंग्रेज़ी और गणित की शुरुआती तालीम घर पर ही देनी शुरू की.

जब फ़ैज़ानउल्ला आठ साल के हुए तो उनका दाख़िला स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में करवा दिया गया. लेकिन हाथ-पैर के काम नहीं करने की वजह से वो रोज़ाना स्कूल नहीं जा पाए.

इसके बाद घर पर ही एक स्थानीय शिक्षक आदिल हुसैन ने उन्हें पढ़ाना शुरू किया.

बतौर शिक्षक मोहम्मद अनवार आलम ये जानते थे कि सिर्फ़ मौखिक शिक्षा काफी नहीं थी. लेकिन तरह-तरह के प्रयासों के बावजूद भी वो फै़ज़ानउल्ला को लिखना नहीं सिखा पा रहे थे.

वह बताते हैं, फै़ज़ानउल्ला का दाखिला जब छठी कक्षा में उच्च उत्क्रमित विद्यालय शिवाजी नगर में हुआ तो शिक्षक जितेंद्र कुमार भगत एक फ़रिश्ता बनकर सामने आए.

दरअसल झारखंड शिक्षा परियोजना के अंतर्गत प्रखंड संसाधन केंद्र गोड्डा में विकलांग बच्चों को शिक्षित करने के लिए विशेष शिक्षा विशेषज्ञ के तौर पर शिक्षक जितेंद्र कुमार भगत की भर्ती हुई थी.

जितेंद्र कुमार कहते हैं, जब मुझे फै़ज़ानउल्ला के स्कूल नहीं आने की वजह का पता चला तो मैं खुद उसके घर चला गया. फै़ज़ानउल्ला का आईक्यू लेवल, आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति से मैं बहुत प्रभावित हुआ.

वो कहते हैं, मैंने ठान लिया कि फै़ज़ानउल्ला को हर हाल में शिक्षित करूंगा और इस संकल्प को पूरा करने के लिए मैंने उसे घर जाकर ही पढ़ाना शुरू किया.

उनके अनुसार, फ़ैज़ानउल्ला का बिल्कुल न लिख पाना सबसे बड़ी समस्या थी.

शुरुआत में उन्होंने कलम को धागे से बांधकर भी लिखवाने की कोशिश की लेकिन वो इस प्रयास में लगातार असफल रहे.

वह कहते हैं, साल 2022 में मैंने एक कलम फ़ैज़ानउल्ला के मुंह में दातों के बीच पकड़ा कर लकीर खिंचवाने की कोशिश शुरू की.

धीरे-धीरे ये कोशिश कामयाब होती दिखी और फ़ैज़ानउल्ला लिखने में समर्थ होते गए और उनकी लिखावट भी अच्छी हो गई.

फ़ैज़ानउल्ला कहते हैं, आठवीं कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते मेरी लिखावट इतनी अच्छी हो गई कि अगर दो कॉपी की तुलना की जाए तो कोई अंतर नहीं बता सकता है कि कौन सी मेरी लिखी कॉपी है और कौन सी सामान्य बच्चे की.

आठवीं बोर्ड परीक्षा में स्कूल टॉपर

शिक्षक जितेंद्र कुमार भगत की कड़ी मेहनत और फ़ैज़ानउल्ला की लगन का नतीजा ये रहा कि उन्होंने आठवीं की बोर्ड परीक्षा और नौवीं की परीक्षा खुद लिखकर स्कूल के हर कैटेगरी के स्टूडेंट्स के बीच टॉपर बन गए.

इन परिणामों के बाद फै़ज़ानउल्ला के बढ़े हौसले को और बल तब मिला जब साल 2025 की फ़रवरी में उन्होंने शिक्षा के महत्व पर ज़िला शिक्षा विभाग के द्वारा आयोजित भाषण प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया और पुरस्कार में उन्हें लैपटॉप मिला.

फै़ज़ानउल्ला कहते हैं, मेरी उंगलियां इधर-उधर नहीं होती हैं, लेकिन मेरी दो उंगलियां टच कर सकती हैं, जो लैपटॉप के कीबोर्ड को इस्तेमाल करने के लिए काफ़ी हैं.

ऐसे में लैपटॉप मिलने के बाद फ़ैज़ानउल्ला ने एमएस एक्सेल, पावर प्वाइंट और एआई का इस्तेमाल करना भी सीख लिया.

अब उनकी पढ़ाई में तकनीक की मदद मिलनी शुरू हुई.

इस बारे में वो कहते हैं, मैं एनसीईआरटी के हर एक अध्याय की पीडीएफ़ को चैटजीपीटी पर अपलोड कर प्रोम्प्ट देता कि इससे जुड़े सभी प्रश्न उपलब्ध करें. फिर मैं उन प्रश्नों को खुद ही हल करता.

इस बारे में उनके शिक्षक कहते हैं, ये कुछ ऐसा तरीका निकला जिससे वो दिन प्रतिदिन आगे बढ़ता गया.

कुछ इस तरह तैयारियां कर फै़ज़ानउल्ला को 10वीं कक्षा के बीच में ये अहसास होने लगा कि वह बोर्ड परीक्षा अच्छे नंबर से पास कर सकते हैं.

वो बताते हैं, जितेंद्र सर लगातार रिवीज़न पर ज़ोर देते और याद किए हुए जवाबों को मुझ से दस-दस बार लिखवाते ताकि मैं भूल न जाऊं.

इस तरह की परीक्षा में वो लोग जो लिख पाने में असमर्थ होते हैं उनके लिए राइटर की व्यवस्था होती है लेकिन फ़ैज़ानउल्ला ने खुद को पूरी तरह से उस पर निर्भर नहीं रखा.

वो बताते हैं कि कई विषयों जब वो मुंह से लिखकर थक जाते थे तो थोड़ी देर के लिए राइटर का इस्तेमाल करते.

आख़िर उन्होंने ये फ़ैसला क्यों किया, इस पर वो कहते हैं, बोल-बोलकर लिखवाने में वह संतुष्टि नहीं मिलती जो खुद लिखने में है. उदाहरण के लिए गणित विषय को लीजिए, इस पेपर को बोलकर मैं कैसे लिखवाता, इसलिए गणित का पेपर मैंने खुद ही लिखा.

गणित विषय में 98 अंक लाने वाले फै़ज़ानउल्ला की आंखों में अब एक तरफ़ झारखंड के मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री से मिलने की हसरत, तो दूसरी तरफ़ सिविल सर्विस की परीक्षा पास करने की तमन्ना है.

फै़ज़ानउल्ला की इस सफलता पर उनके स्कूल उच्च उत्क्रमित विद्यालय शिवाजी नगर की प्रधानाचार्या एलएफ़ मरांडी कहती हैं, ये गर्व का क्षण है कि एक तरफ़ फै़ज़ानउल्ला जैसे छात्र हमें मिले तो दूसरी तरफ़ उनको पांच सालों में निखारने वाले शिक्षक जितेंद्र कुमार भगत की सेवा मिली. दोनों ही अनमोल हैं, दोनों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778311221.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324003&amp;path_article=2</guid><pubDate>09-May-2026 12:50 PM</pubDate></item><item><title>पश्चिम बंगाल में सुवेंदु सरकार: भाजपा नेता बोले- आज से आम लोगों की आशा, आकांक्षा और विकास का सूर्योदय </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324000&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324000&path_article=2]]></link><description>नई दिल्ली, 9 मई । पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने शनिवार को कहा कि आज पश्चिम बंगाल में एक नया सूर्योदय हुआ है। इस दौरान, भाजपा नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बेगूसराय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, यह सच है कि बंगाल की धरती सनातन परंपरा का सांस्कृतिक केंद्र रही है। यहां विधर्मी लोगों ने अपनी सरकार चलाई और खासकर तृणमूल कांग्रेस लगातार अतिवादी हो गई। उन्होंने हिंदुओं को निशाना बनाया, गुंडागर्दी को बढ़ावा दिया, अराजकता फैलाई और बांग्लादेशी मुसलमानों के समर्थन से राजनीति की। जब यह अति पर पहुंच गया, तो वहां के लोगों ने भाजपा को चुना और उस पर भरोसा किया।

उन्होंने कहा कि तीन-चार दिन तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने नौटंकी की। वहां गुंडों ने अराजकता का माहौल बनाया। सारे गुंडों को सजा मिलेगी। सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने पर मंत्री संजय कुमार सिंह ने कहा, मेरी ओर से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई। कहीं न कहीं, उनके आने से पश्चिम बंगाल में एक मजबूत और सशक्त सरकार का गठन होगा। आने वाले समय में, यदि राज्य में एक मजबूत सरकार होगी, तो विकास कार्य भी होंगे। झारखंड के रांची में आईएएनएस से बातचीत में भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा, आज पश्चिम बंगाल में नया सूर्योदय हुआ है। यह आशा, आकांक्षा, विकास और आम लोगों की सरकार का सूर्योदय है। शुक्रवार को सूर्यास्त के साथ बंगाल में कांग्रेस-वामपंथ का अन्यायपूर्ण शासन और टीएमसी की तानाशाही का भी सूर्यास्त हो गया। भाजपा को मिला यह जनादेश आम जनता की महत्वाकांक्षाओं से जुड़ा हुआ है। प्रतुल शाह देव ने कहा कि सुवेंदु अधिकारी जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति हैं। वे हर व्यक्ति के सुख-दुख में साथ रहते हैं। राज्य में आज आम जनता की सरकार बनी है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री के रूप में चुना। शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर उनके नाम की घोषणा की गई। शनिवार को कोलकाता में आयोजित समारोह में सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778310823apture.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324000&amp;path_article=2</guid><pubDate>09-May-2026 12:43 PM</pubDate></item><item><title>सुवेंदु दा ने इस बार 'दीदी' के घर में घुसकर उनको हराया : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=323952&amp;path_article=2</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=323952&path_article=2]]></link><description>कोलकाता, 8 मई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कोलकाता में भाजपा विधायक दल की बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं हाथ जोड़कर बंगाल की जनता का कोटि-कोटि धन्यवाद करना चाहता हूं।

उन्होंने कहा कि कम्युनिस्टों के समय से जिस प्रकार का माहौल बनाया जाता था, ममता बनर्जी ने इसे और गहरे तरीके से भय में परिवर्तित किया। वहां मत की अभिव्यक्ति लगभग असंभव थी। हिंसा और क्रूरता के सैकड़ों उदाहरण उसके प्रमाण हैं। उसके बीच भाजपा और हमारे नेता नरेंद्र मोदी पर भरोसा कर बंगाल की जनता ने जो प्रचंड विजय हमें दी है, उसके लिए मैं बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कम्युनिस्ट शासन के दौरान बंगाल में जो माहौल था, ममता के शासनकाल में वह और भी बदतर हो गया है, और अब डर का माहौल छा गया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लगभग नामुमकिन हो गई है। हिंसा और बर्बरता की कई घटनाओं के बावजूद, जनता ने भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी को भारी जनादेश दिया है, जिसके लिए मैं अत्यंत आभारी हूं।

उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता ने हमसे जो अपेक्षा रखी और जिन आशाओं के साथ हमें बहुमत दिया है, हम पूरा प्रयास करेंगे कि आपके विश्वास को तनिक भी ठेस न पहुंचे, इसमें कोई कमी न हो। हम सभी भाजपा कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि सोनार बंगला के लक्ष्य को लेकर हम चलें और बंगाल की जनता की अपेक्षाओं को हम पूर्ण करें।

अमित शाह ने कहा कि आज बंगाल की विजय अनेक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है। 100 साल की वैचारिक यात्रा के बाद आज गंगोत्री से गंगासागर तक हर जगह भाजपा की सरकार बनी है, यह हम सभी के लिए बहुत आनंद का विषय है। 1950 से जिस विचार की यात्रा लेकर हम निकले और जिनके नेतृत्व में हम चले, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि पर 1950 के बाद आज 2026 में उन्हीं की पार्टी की सरकार बन रही है।


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