    
<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>Daily Chhattisgarh International</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com</link><description>Daily Chhattisgarh Feed International</description><item><title>पाकिस्तान के लोगों पर और बढ़ेगा टैक्स का बोझ, आईएमएफ ने 1.73 लाख करोड़ रुपए तय किया लेवी टारगेट </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324689&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324689&path_article=1]]></link><description>नई दिल्ली, 16 मई । पाकिस्तान के आम नागरिकों पर टैक्स का बोझ और अधिक बढ़ने जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए पेट्रोलियम लेवी का टारगेट 1 लाख 73 हजार करोड़ रुपए तय किया है। यह मौजूदा बजट लक्ष्य से 25 हजार 900 करोड़ रुपए अधिक है। इसके अलावा, आईएमएफ ने फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) को अपना रेवेन्यू टारगेट हासिल करने के लिए शर्तें और कड़ी कर दी हैं। पाकिस्तान की जनता पहले ही महंगाई की मार झेल रही है। ऐसे में आईएमएफ के इस फैसले से आम लोगों की परेशानियां और बढ़ने की आशंका है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने फंड की स्टाफ-लेवल रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र और राज्य सरकारें 86 हजार करोड़ रुपए के बराबर अतिरिक्त रेवेन्यू जुटाने की कोशिश करेंगी। इसके लिए केंद्र सरकार आधे कदम उठाएगी, जिन्हें नए टैक्स उपायों और उनके प्रभावी क्रियान्वयन में बांटा जाएगा। वहीं, राज्य सरकारें सेवाओं पर सेल्स टैक्स बढ़ाएंगी और 43 हजार करोड़ रुपए का अपना हिस्सा जुटाने के लिए कृषि आयकर (एग्रीकल्चर इनकम टैक्स) वसूलेंगी।

केंद्रीय बजट का आकार 17 लाख 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा रहने का अनुमान है। यह चालू वित्तीय वर्ष के संशोधित बजट से लगभग 9 फीसदी अधिक है। डिफेंस बजट 2 लाख 66 हजार 500 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो मौजूदा बजट से 10 हजार 100 करोड़ रुपए ज्यादा है। पाकिस्तान ने 21 हजार 500 करोड़ रुपए के अतिरिक्त टैक्स लगाने के लिए आईएमएफ की शर्तें मान ली हैं। वहीं, 21 हजार 500 करोड़ रुपए बिलियन ऑडिट, प्रोडक्शन मॉनिटरिंग और अन्य प्रवर्तन (एनफोर्समेंट) उपायों के जरिए जुटाए जाएंगे। आईएमएफ ने एफबीआर के लिए अगले वित्तीय वर्ष का 15 लाख 27 हजार करोड़ रुपए का रेवेन्यू टारगेट हासिल करने हेतु शर्तें और सख्त कर दी हैं। पाकिस्तान लगातार दो वर्षों तक यह लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया है। इसी वजह से आईएमएफ ने निगरानी और शर्तों को और कड़ा किया है। मौजूदा इंडिकेटिव टारगेट के उलट, आईएमएफ ने अब एक क्वांटिटेटिव परफॉर्मेंस क्राइटेरिया लागू किया है। अगर एफबीआर तय टारगेट पूरा नहीं कर पाता, तो उसे आईएमएफ के एग्जीक्यूटिव बोर्ड से छूट लेनी होगी। पाकिस्तान ने यह शर्त स्वीकार कर ली है। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778916886ak.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324689&amp;path_article=1</guid><pubDate>16-May-2026 1:04 PM</pubDate></item><item><title>सूडान में लगभग 1.95 करोड़ लोग के सामने गंभीर खाद्य संकट: यूएन </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324678&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324678&path_article=1]]></link><description>संयुक्त राष्ट्र, 16 मई । संयुक्त राष्ट्र महासचिव के उप प्रवक्ता फरहान हक ने बताया कि सूडान में लगभग 1.95 करोड़ लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इसके लिए खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ), विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनीसेफ) के आंकड़ों का हवाला दिया। उप प्रवक्ता फरहान हक ने दैनिक ब्रीफिंग में बताया कि जहां ग्रेटर दारफुर और ग्रेटर कोर्डोफान के 14 क्षेत्रों में अकाल का खतरा बना हुआ है, वहीं जून और सितंबर के बीच आने वाले कठिन मौसम (लीन सीजन) के दौरान हालात और बिगड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इस बीच जरूरतों की तुलना में मानवीय सहायता अभी भी बेहद अपर्याप्त बनी हुई है। हक ने बताया कि फरवरी और मई के बीच मानवीय सहायता देने वाले संगठनों ने हर महीने 4.8 मिलियन लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा था, लेकिन फरवरी में अनुमानित तौर पर सिर्फ 3.13 मिलियन लोगों को ही सहायता मिल पाई। प्रवक्ता ने आगे बताया कि एफएओ, डब्ल्यूएफपी और यूनीसेफ ने शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को तत्काल रोकने का आह्वान किया है।

साथ ही, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया है कि वे भोजन, आपातकालीन खाद्य उत्पादन, पोषण, स्वास्थ्य, और जल व स्वच्छता सेवाओं के लिए व आजीविका को फिर से खड़ा करने के प्रयासों के लिए फंडिंग को तत्काल बढ़ाएं। इससे पहले, 13 मई को संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता अधिकारियों ने बताया था कि युद्धग्रस्त दक्षिण-पश्चिमी सूडान में राहत सामग्री वितरित की जा रही है, जबकि दक्षिण सूडान में अकाल राहत के लिए 1.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर की सहायता का लक्ष्य रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (ओसीएचए) ने कहा, संयुक्त राष्ट्र और उसके मानवीय साझेदार पूरे सूडान में मानवीय जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। कार्यालय ने बताया कि कोर्डोफान क्षेत्र में सहायता संगठन विस्थापित लोगों, शरणार्थियों और स्थानीय समुदायों को जीवन रक्षक सहायता प्रदान कर रहे हैं। इसके तहत, उत्तरी कोर्डोफान राज्य के शीकान और अर रहाद इलाकों में लगभग 85,000 लोगों तक जल और स्वच्छता संबंधी सहायता पहुंचाई गई है। वहीं, मानवीय सहायता कर्मियों ने शेकान में 2,000 विस्थापित परिवारों को कंबल, मच्छरदानी और घर-गृहस्थी की अन्य जरूरी चीजें वितरित कीं। कार्यालय ने बताया कि दक्षिण कोर्डोफान राज्य में, दक्षिण सूडानी शरणार्थियों, विस्थापित लोगों और स्थानीय समुदायों सहित लगभग 88,000 लोगों को जल और स्वच्छता संबंधी सहायता प्राप्त हुई। हालांकि, कार्यालय ने कहा कि उसे इस बात पर चिंता है कि लड़ाई जारी रहने से आम नागरिकों की जान को गंभीर खतरा बना हुआ है। (आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778913881udaan.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324678&amp;path_article=1</guid><pubDate>16-May-2026 12:14 PM</pubDate></item><item><title>चीन से लौटते हुए ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर क्या बोले डोनाल्ड ट्रंप</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324660&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324660&path_article=1]]></link><description>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि उन्हें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को 20 साल के लिए निलंबित करने पर कोई आपत्ति नहीं है.

एयर फ़ोर्स वन विमान से, चीन से अमेरिका वापस लौटते वक़्त, शुक्रवार को उन्होंने यह भी कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने का समर्थन करते हैं.

ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पूरा विश्वास है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हैं और शी चाहते हैं कि ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट खोल दे.

चीन की यात्रा से लौटने के बाद अमेरिकी पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वे कुछ ही दिनों में ईरान से तेल खरीदने वाली चीनी तेल कंपनियों पर लगे प्रतिबंध हटाने का फैसला करेंगे.

उन्होंने यह भी कहा कि चीन अमेरिका से अरबों डॉलर मूल्य की सोयाबीन खरीदेगा, जो किसानों के लिए अच्छी खबर है.

ताइवान से जुड़े सवालों पर ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अभी तक ताइवान को हथियार मुहैया कराने की मंज़ूरी नहीं दी है, और वह ऐसा कर भी सकते हैं और नहीं भी.

उन्होंने कहा, ताइवान के प्रति अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है.

ट्रंप ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने ताइवान मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की है. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ताइवान को लेकर कोई संघर्ष होगा.

उन्होंने चीन को, ताइवान से जुड़ा कोई आश्वासन नहीं दिया.

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे राष्ट्रपति शी को तानाशाह मानते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, मैं उन्हें चीन का राष्ट्रपति मानता हूं और उनका सम्मान करता हूं.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778904147ownload_(36).jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324660&amp;path_article=1</guid><pubDate>16-May-2026 9:32 AM</pubDate></item><item><title>पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर से रोके गए जहाज़ों के लोगों को वापस लाने पर क्या कहा?</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324658&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324658&path_article=1]]></link><description>पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक़, 11 पाकिस्तानी और 20 ईरानी नागरिकों को सुरक्षित वापस पाकिस्तान लाया जा रहा है.

ये लोग उन जहाज़ों पर सवार थे जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में रोका था.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इसहाक डार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि सभी लोगों को सिंगापुर के रास्ते सुरक्षित निकाला गया.

वहां से उन्हें बैंकॉक ले जाया गया, जहां से वे इस्लामाबाद जाने वाली फ्लाइट में सवार हो चुके हैं. उम्मीद है कि ये लोग आज रात इस्लामाबाद पहुंच जाएंगे.

वहीं ईरानी नागरिकों को बाद में उनके देश वापस भेजा जाएगा.

बयान में कहा गया है कि सभी लोग स्वस्थ हैं और उनका मनोबल अच्छा है.

अधिकारियों ने कहा कि विदेश में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों की सुरक्षा और मदद करना सरकार की पहली प्राथमिकता है, खासकर उन लोगों की जो मुश्किल में फंसे हों.

इस पूरे अभियान में मदद के लिए इसहाक डार ने सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन, सिंगापुर के प्रधानमंत्री और वहां की सरकार का धन्यवाद किया.

उन्होंने ईरानी नागरिकों की वापसी के लिए पाकिस्तान पर भरोसा करने के लिए विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची का भी शुक्रिया अदा किया.

इसहाक डार ने अमेरिका और थाईलैंड की भी तारीफ की, जिन्होंने 31 लोगों की वापसी में सहयोग किया और बैंकॉक के रास्ते ट्रांजिट की सुविधा दी.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और सिंगापुर,थाईलैंड में मौजूद पाकिस्तानी दूतावासों की संयुक्त कोशिशों की वजह से यह अभियान सुरक्षित और सफल तरीके से पूरा हो सका.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778903987ownload_-_2026-05-16T093240.819.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324658&amp;path_article=1</guid><pubDate>16-May-2026 9:29 AM</pubDate></item><item><title>इसराइल और लेबनान के बीच अमेरिका ने की अहम समझौते की घोषणा</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324656&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324656&path_article=1]]></link><description>-ब्रैंडन ड्रेनन और यांग तियान

इसराइल और लेबनान के बीच एक बार फिर अमेरिका ने युद्धविराम करवाया है. अमेरिका ने एलान किया है कि दोनों देशों ने 45 दिन के सीज़फ़ायर पर सहमति जताई है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि वॉशिंगटन डीसी में दो दिन की बातचीत के बाद इसराइल और लेबनान युद्धविराम को बढ़ाने पर सहमत हुए हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बताया, 29 मई को पेंटागन में सुरक्षा को लेकर बातचीत शुरू होगी, जिसमें दोनों देशों की सैन्य टीमें शामिल होंगी.

हालांकि, इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 16 अप्रैल को युद्धविराम का एलान किया था, लेकिन इसके बाद भी इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच गोलीबारी जारी रही.

गौरतलब है कि बुधवार को ही लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि इसराइली हवाई हमलों में दक्षिणी इलाकों में 22 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें आठ बच्चे भी शामिल थे.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778901621ownload_-_2026-05-16T085316.436.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324656&amp;path_article=1</guid><pubDate>16-May-2026 8:50 AM</pubDate></item><item><title>चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने के बाद ट्रंप ने ताइवान को लेकर क्या कहा?</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324654&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324654&path_article=1]]></link><description>-इयान ऐकमैन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान को चेताया है कि वो चीन से अलग होकर औपचारिक रूप से आज़ादी का एलान न करे.

चीन की राजधानी बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने शुक्रवार को फ़ॉक्स न्यूज़ से कहा, मैं नहीं चाहता कि कोई अलग होकर आज़ादी ले.

वॉशिंगटन लौटते समय विमान में ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने और राष्ट्रपति जिनपिंग ने ताइवान पर काफ़ी बात की.

उन्होंने कहा, देखो, हमें 9,500 मील (15,289 किलोमीटर) दूर जाकर लड़ाई करनी है. मैं ऐसा नहीं चाहता. मैं चाहता हूं कि वो (ताइवान) शांत रहे. मैं चाहता हूं कि चीन शांत रहे.

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्हें ताइवान को लेकर चीन से टकराव दिखता है, तो उन्होंने कहा, नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता. मुझे लगता है सब ठीक रहेगा. जिनपिंग युद्ध नहीं देखना चाहते.

दूसरी ओर चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक़, बातचीत के दौरान शी जिनपिंग ने चेतावनी दी, ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका रिश्तों में सबसे अहम है. अगर इसे ग़लत तरीके से संभाला गया तो दोनों देशों में टकराव या संघर्ष हो सकता है.

हालांकि, ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई पहले ही कह चुके हैं कि ताइवान को औपचारिक आज़ादी घोषित करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि वह ख़ुद को पहले से ही एक स्वतंत्र देश मानता है.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778901394ownload_-_2026-05-14T121350.191.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324654&amp;path_article=1</guid><pubDate>16-May-2026 8:46 AM</pubDate></item><item><title>पाकिस्तान में पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में प्रति लीटर पांच-पांच रुपये की कटौती</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324653&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324653&path_article=1]]></link><description>पाकिस्तान में पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में पांच-पांच रुपये घटाए गए हैं.

पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय की घोषणा के मुताबिक़, अब पेट्रोल की क़ीमत 409.78 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर, जबकि हाई-स्पीड डीज़ल की क़ीमत 409.58 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है.

हालांकि, पिछले हफ़्ते ही पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें क़रीब 15 पाकिस्तानी रुपये बढ़ाई गई थीं.

पाकिस्तान में मार्च से अब तक पेट्रोलियम उत्पादों की क़ीमतें पांच बार बढ़ाई गई हैं. इस दौरान तीन बार इन्हें घटाया भी गया है.

मार्च में पहली दफ़ा पेट्रोल की क़ीमत में इज़ाफ़े से पहले इसकी क़ीमत 255 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर थी.

गौरतलब है कि भारत में शुक्रवार को ही पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई. सीएनजी की क़ीमत में भी दो रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778901326mages_(41).jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324653&amp;path_article=1</guid><pubDate>16-May-2026 8:45 AM</pubDate></item><item><title>क्या अमेरिका के पास है ईरान का यूरेनियम हटाने का कोई प्लान?</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324639&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324639&path_article=1]]></link><description>एरफान कासरेई, डार्को जानजेविच

माना जा रहा है कि ईरान के पास 440 किलो से ज्यादा संवर्धित यूरेनियम है, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है. डॉनल्ड ट्रंप ने वादा किया है कि वे परमाणु खतरे को पूरी तरह खत्म कर देंगे, लेकिन कैसे? देखिए.

ईरान का परमाणु कार्यक्रम दशकों से विवादों का कारण रहा है. आज कई ईरानी नागरिक येलोकेक, सेंट्रीफ्यूज और संवर्धन जैसे शब्दों को संकट, अस्थिरता और युद्ध से जोड़कर देखते हैं. यूरेनियम संवर्धन पर सरकार की जिद के कारण देश पर कड़े प्रतिबंध लगे हैं. कुछ अनुमानों के मुताबिक, इससे देश को लगभग 3.5 ट्रिलियन डॉलर का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है.

ईरान और अमेरिका के बीच हालिया सैन्य संघर्षों और अस्थिर संघर्ष-विरामों के दौरान, परमाणु कार्यक्रम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है. अमेरिका का पूरा ध्यान विशेष रूप से ईरान के परमाणु भंडार पर है. माना जाता है कि ईरान के पास 440 किलोग्राम से अधिक ऐसा यूरेनियम है जो 60 फीसदी तक संवर्धित हो चुका है. नागरिक ऊर्जा जरूरतों, जैसे कि परमाणु संयंत्रों से बिजली उत्पादन के लिए इतनी शुद्धता की जरूरत नहीं होती है. सैद्धांतिक रूप से, इस सामग्री को बहुत कम समय में 90 फीसदी तक संवर्धित किया जा सकता है, जो परमाणु बम बनाने के लिए काफी है.

क्या अमेरिका और ईरान मिलकर ये काम करेंगे?
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप इस यूरेनियम भंडार के लिए अक्सर न्यूक्लियर डस्ट शब्द का इस्तेमाल करते हैं. यह जून 2025 के उस सैन्य हमले की ओर इशारा है, जिसके बारे में ट्रंप का मानना है कि उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षमताओं को जड़ से खत्म कर दिया था.

ट्रंप ने बार-बार कहा है कि अमेरिका इस परमाणु सामग्री पर कब्जा कर लेगा, लेकिन यह कैसे किया जाएगा, इसके बारे में उन्होंने विरोधाभासी बयान भी दिए हैं. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ईरान के साथ मिलकर ढेर सारी खुदाई मशीनों के साथ मलबे के नीचे से इसे खोदकर निकालेगा, शायद किसी शांति समझौते के बाद. अप्रैल में, ट्रंप ने कहा था कि ईरान अपना भंडार सौंपने को तैयार है, जबकि पिछले हफ्ते उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका को नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि परमाणु हथियार लेने के लिए हमें ईरान तक का सफर तय करना होगा.

समुद्री रास्ते बनेंगे ताकत का अखाड़ा?

ईरान ने अभी तक यूरेनियम भंडार से संबंधित किसी भी समझौते की पुष्टि नहीं की है. मार्च में अमेरिकी ब्रॉडकास्टर सीबीएस से बात करते हुए, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि पिछले साल के हमले के बाद यह सामग्री अभी भी मलबे के नीचे दबी हुई है. ईरान के पास इसे बाहर निकालने का कोई कार्यक्रम या कोई योजना नहीं है. हालांकि, अराघची ने इस बात का भी ध्यान रखा कि भविष्य में अमेरिका के साथ किसी समझौते के तहत अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम की गुणवत्ता कम करने की संभावना को पूरी तरह खारिज न किया जाए.

ईरान के परमाणु भंडार का ठिकाना स्पष्ट नहीं
हालिया मीडिया रिपोर्टों से यह भी संकेत मिले हैं कि ईरान अपने भंडार के एक हिस्से की गुणवत्ता कम करने और बाकी बचे हिस्से को किसी तीसरे देश को सौंपने के लिए तैयार था. इसी बीच, पिछले हफ्ते के आखिर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि उनका देश ईरान के संवर्धित यूरेनियम को सुरक्षित रखने के लिए तैयार है. हालांकि, अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि यह सामग्री असल में कहां रखी हुई है. इसे हासिल करने के लिए किन तकनीकी चुनौतियों को दूर करने की जरूरत होगी.

ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्र इस्फहान, फोर्डो और नतांज पिछले साल हुए ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के दौरान भारी नुकसान झेल चुके हैं. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने अप्रैल 2026 के आखिर में कहा था कि ईरान का अधिकांश अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम संभवतः अभी भी इस्फहान परमाणु परिसर में ही मौजूद है. उनके मुताबिक, नीले रंग के 18 कंटेनर में लगभग 200 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम होने का अनुमान था, जो 9 जून 2025 को इस्फहान परमाणु प्रौद्योगिकी केंद्र की एक सुरंग में ले जाए गए थे. यह घटना 12 दिवसीय युद्ध शुरू होने से ठीक चार दिन पहले की है.

क्या ईरान युद्ध से पश्चिम एशिया में शुरू हो जाएगी परमाणु हथियार बनाने की होड़?

हालांकि, परमाणु भंडार को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है. ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि यह सामग्री अब फोर्डो या ईरान के बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र में जमा कर के रखी गई है.

ईरान ने संकेत दिया है कि वह केवल अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की देखरेख में ही इस सामग्री को वापस निकालेगा. मेडिकल फिजिक्स और रेडिएशन सुरक्षा के विशेषज्ञ रोलैंड वोल्फ ने कहा, ईरान से इस सामग्री को हटाना तकनीकी रूप से असंभव नहीं है, लेकिन यह कई अन्य बातों पर भी निर्भर करता है. आईएईए की कड़ी निगरानी में, इस सामग्री को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है और देश से बाहर पहुंचाया जा सकता है. वह आगे बताते हैं, इसके लिए विशेष सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा. चूंकि ईरान संवर्धित यूरेनियम को फोर्डो जैसे भूमिगत स्थानों पर जमा करके रखता है. इसलिए, वहां तक पहुंचने और सामग्री को सुरक्षित बाहर निकालने का काम तकनीकी और भौतिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

क्या लीबिया एक रोल मॉडल बन सकता है?
ईरान से 440 किलोग्राम से अधिक संवर्धित यूरेनियम को हटाने में शामिल तकनीकी चुनौतियां इस पूरी समस्या का केवल एक पहलू हैं. सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शायद ज्यादा अहमियत रखेंगे.

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के पूर्व राजदूत रहे जॉन बोल्टन ने ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर काम किया था. उन्होंने 2000 के दशक की शुरुआत में लीबिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम को खत्म किए जाने का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि वह कार्यक्रम काफी छोटा था. 2003 और 2004 में परमाणु सामग्री को हटाने की पहल किसी संघर्ष के बीच नहीं, बल्कि एक अनुकूल माहौल में हुई थी.

बोल्टन ने डीडब्ल्यू को बताया, अमेरिका और ब्रिटेन के अधिकारी लीबिया गए. उन्होंने सब कुछ पैक किया और उसे ओक रिज, टेनेसी ले आए, जहां वह आज भी मौजूद है. मुझे लगता है कि हम ईरान के कार्यक्रम के साथ भी ऐसा ही कुछ कर सकते हैं, बशर्ते वहां का माहौल अनुकूल हो, लेकिन इसमें बहुत अधिक समय लगेगा क्योंकि ईरान का कार्यक्रम काफी आगे बढ़ चुका है. बतौर बोल्टन, सबसे जरूरी बात यह है कि अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम या कार्यक्रम के अन्य पहलुओं को आतंकवादियों या अन्य दुष्ट देशों के हाथों में न पड़ने दिया जाए.

बोल्टन ने ईरान के शासन की विचारधारा को कट्टर बताया
बोल्टन ने डीडब्ल्यू को यह भी बताया कि जब तक ईरान में अयातोल्लाहों की सत्ता और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का वर्चस्व है, तब तक परमाणु खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता. उनके अनुसार, ईरान के परमाणु हथियारों के सपने को स्थायी रूप से रोकने के लिए वहां के शासन को जड़ से उखाड़ना ही एकमात्र विकल्प है.

वह कहते हैं, उनकी विचारधारा कट्टरपंथी है. इस्लामिक समुदाय के भीतर अपना दबदबा बनाने तथा भौगोलिक रूप से मध्य-पूर्व में अपना वर्चस्व स्थापित करने की आकांक्षाओं पर आधारित है. वे अस्थायी रूप से रियायतें दे सकते हैं. मुझे उन पर भरोसा नहीं है कि वे लंबे समय तक अपने वादों पर टिके रहेंगे, लेकिन ऐसा लग रहा है कि हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778862342ownload_-_2026-05-15T215824.799.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324639&amp;path_article=1</guid><pubDate>15-May-2026 9:55 PM</pubDate></item><item><title>जिनपिंग के साथ मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा- अमेरिका और चीन ने शानदार ट्रेड डील की </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324590&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324590&path_article=1]]></link><description>बीजिंग, 15 मई । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चीन दौरे का आज आखिरी दिन है। राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन के दौरे पर प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं के बीच तकनीक, व्यापार समेत कई मुद्दों पर गंभीर बातचीत हुई। राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि बीजिंग में हुई मीटिंग के दौरान उनके और शी के बीच शानदार ट्रेड डील हुईं। आज ट्रंप अमेरिका वापस लौट जाएंगे। ट्रंप के वाशिंगटन के लिए रवाना होने से पहले दोनों नेताओं ने बीजिंग के झोंगनानहाई लीडरशिप कंपाउंड में द्विपक्षीय मीटिंग और लंच किया। ट्रंप और जिनपिंग गार्डन में घूमते और चाय पीते हुए नजर आए। इस ट्रिप को अविश्वसनीय दौरा बताते हुए ट्रंप ने कहा, इससे बहुत कुछ अच्छा हुआ है।

ईरान पर अमेरिका और चीन के विचार एक जैसे हैं और दोनों चाहते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोला जाए। ट्रंप ने कहा, ईरान को लेकर हमारी सोच एक जैसी है। दोनों देश रणनीतिक समुद्री रास्ते के जरिए शिपिंग एक्सेस बहाल करने का समर्थन करते हैं, जिससे आम तौर पर दुनिया की लगभग 20 फीसदी तेल सप्लाई गुजरती है। ट्रंप ने यह भी बताया कि शी के सितंबर में अमेरिका आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, संबंध बहुत मजबूत है और हमने सच में कुछ बहुत अच्छे काम किए हैं। इससे पहले दोनों नेताओं ने गुरुवार को दो घंटे से ज्यादा समय तक बंद कमरे में मीटिंग की थी, जिसमें व्यापार, ईरान और ताइवान पर चर्चा हुई। बाद में ट्रंप ने बातचीत को बहुत बढ़िया बताया। मीटिंग के बाद फॉक्स न्यूज से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि शी ने उनसे कहा कि चीन ईरान को सैन्य उपकरण नहीं देगा। ट्रंप ने इसे बड़ा बयान बताया और यह भी कहा कि शी होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद करना चाहते थे, जो ईरान से जुड़े चल रहे झगड़े के बीच असल में बंद है। चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार बना हुआ है। -(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778830372apture.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324590&amp;path_article=1</guid><pubDate>15-May-2026 1:02 PM</pubDate></item><item><title>ट्रंप के चीन दौरे का दूसरा दिन, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा- 'मैं चीन से बहुत प्रभावित हुआ'</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324584&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324584&path_article=1]]></link><description>अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और चीन की सोच काफ़ी मिलती-जुलती है.

अपने दौरे के दूसरे दिन बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही.

चीन के सरकारी परिसर झोंगनानहाई में दोनों नेताओं की मुलाक़ात के बाद ट्रंप ने कहा कि बातचीत में व्यापार, ईरान और कई दूसरे मुद्दों पर चर्चा हुई.

उन्होंने कहा, हमने कई ऐसी समस्याएं सुलझाईं जिन्हें दूसरे लोग शायद हल नहीं कर पाते.

ईरान के मुद्दे पर ट्रंप ने कहा, हम नहीं चाहते कि उनके पास परमाणु हथियार हों. उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश चाहते हैं कि समुद्री रास्ते खुले रहें.

माना जा रहा है कि उनका इशारा वैश्विक व्यापार के लिए अहम समुद्री मार्गों की तरफ़ था.

ट्रंप ने कहा कि वो चीन से बहुत प्रभावित हुए हैं.

ट्रंप ने शी जिनपिंग की 24 सितंबर को संभावित अमेरिकी यात्रा का भी ज़िक्र किया.

ट्रंप ने कहा, जैसे व्यापार में पारस्परिकता होती है, वैसे ही यह यात्रा भी पारस्परिक होगी. हम पूरी तैयारी करेंगे और उम्मीद है कि आप वहां से उसी तरह प्रभावित होकर लौटेंगे, जैसे मैं चीन से प्रभावित हूं.

ट्रंप ने शी जिनपिंग का धन्यवाद करते हुए कहा कि बीजिंग आना उनके लिए सम्मान की बात है. उन्होंने बताया कि दोनों नेता 24 सितंबर को फिर मुलाक़ात करेंगे, जब शी जिनपिंग अमेरिका के दौरे पर जाएंगे.

शी जिनपिंग ने शुक्रवार को झोंगनानहाई परिसर में डोनाल्ड ट्रंप की मेज़बानी की.

शी जिनपिंग ने कहा, यह वह जगह है जहां चीन की केंद्रीय सरकार के नेता काम करते हैं और रहते हैं, जिनमें मैं भी शामिल हूं.

उन्होंने कहा, यह जगह कभी शाही बाग़ का हिस्सा हुआ करती थी. इस परिसर में काफ़ी इतिहास मौजूद है.

शी जिनपिंग ने यह भी बताया कि सैर के दौरान जिस पेड़ को दोनों नेताओं ने देखा, वह क़रीब 490 साल पुराना है.

उन्होंने कहा कि वह गुलाब की चीनी प्रजाति के बीज ट्रंप को गिफ़्ट के तौर पर भेजेंगे.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778828346ownload_-_2026-05-15T123151.352.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324584&amp;path_article=1</guid><pubDate>15-May-2026 12:29 PM</pubDate></item><item><title>यूएई और ईरान के मंत्री नई दिल्ली में बैठक के दौरान आपस में भिड़े, जानिए पूरा मामला</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324571&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324571&path_article=1]]></link><description>ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान यूएई पर अपने देश के ख़िलाफ़ सैन्य अभियानों में सीधे शामिल होने का आरोप लगाया.

एक दिन पहले ही इसराइल ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ईरान से युद्ध के बीच में यूएई का गोपनीय दौरा किया था.

हालांकि यूएई ने इसराइल के दावे को ख़ारिज कर दिया था. जब ये सब हो रहा था तो ईरान के विदेश मंत्री नई दिल्ली में थे. इसी दौरान ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि इसराइल से मिलीभगत का हिसाब लिया जाएगा.

ब्रिक्स गुट के सदस्य ईरान और यूएई दोनों हैं. दोनों देशों के प्रतिनिधि नई दिल्ली में थे और बैठक के दौरान दोनों के बीच तल्खी साफ़ दिखी.

ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार, अराग़ची ने गुरुवार को यूएई की प्रतिनिधि की टिप्पणियों के जवाब में कहा, मैंने ब्रिक्स में एकता बनाए रखने के लिए अपने बयान में यूएई का नाम नहीं लिया. लेकिन सच्चाई यह है कि यूएई ईरान के ख़िलाफ़ आक्रमण में सीधे शामिल था. जब (ईरान पर) हमले शुरू हुए, तब उन्होंने उसकी निंदा तक नहीं की.

भारत में ईरानी दूतावास के आधिकारिक एक्स अकाउंट से पूरे वाक़ये की जानकारी दी गई है. ईरानी दूतावास ने कहा, ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दूसरे सत्र में, ईरान के क़ानून और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री डॉ. काज़ेम ग़रीबाबादी ने यूएई की विदेश राज्य मंत्री के आरोपों का कड़ा जवाब दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने यूएई पर हमला किया था.

ईरान का यूएई पर सीधा हमला
काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा, यूएई ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य आक्रमण को समर्थन और सुविधा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसलिए जो तनाव पैदा करने और उसे बढ़ाने में शामिल रहा हो, उसे ईरान के ख़िलाफ़ राजनीतिक आरोप लगाने या दावा करने का कोई नैतिक या क़ानूनी अधिकार नहीं है. हम एक शक्तिशाली और महान देश हैं. हम चुपचाप यह नहीं देख सकते थे कि आक्रमणकारी हमारे लोगों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएं, ख़ासकर तब जब हमारे पड़ोसी देशों में से एक यूएई की इसमें भागीदारी हो.

ग़रीबाबादी ने कहा, हमारे पास कोई विकल्प नहीं था सिवाय इसके कि यूएई में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की सभी सुविधाओं या उन प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाए, जिनमें अमेरिका की भूमिका या भागीदारी थी. यह एक युद्ध था और उस युद्ध में हमने अपने देश की रक्षा की. यूएई एक आक्रमणकारी है. आप झूठे और खोखले आरोपों के पीछे नहीं छिप सकते. अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत जवाबदेही निभाने की ज़िम्मेदारी केवल यूएई की है.

ईरान ने कहा, मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि आक्रमण शुरू होने से कई दिन पहले यूएई को आधिकारिक संदेश भेजे गए थे. हमने चेतावनी दी थी कि अगर आक्रमणकारियों की मदद की और अपनी ज़मीन उपलब्ध कराई, तो ईरान के पास आत्मरक्षा के अधिकार का उपयोग करते हुए उन सुविधाओं को निशाना बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.

ईरान ने कहा, अब आप झूठे दावों और ज़मीनी हक़ीक़त से अलग कहानियों के पीछे नहीं छिप सकते. आप आक्रमणकारी हैं, इसलिए ईरान पर आक्रमण का आरोप नहीं लगा सकते. हमने यूएई से उड़ान भरने वाले हर फाइटर जेट का रिकॉर्ड तैयार किया है, जिसमें सटीक समय, तारीख़ और रूट शामिल हैं.

28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे और तब से कई हफ़्तों यह जंग चली. इसराइल और अमेरिका के हमले के जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों और अन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए थे.

यूएई और ईरान में तनाव के बीच पीएम मोदी का दौरा
अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सोमवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें कहा गया था कि यूएई ने अप्रैल की शुरुआत में ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान चलाए थे.

पश्चिमी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, सऊदी अरब ने भी ईरान के ख़िलाफ़ कई ऐसे हमले किए हैं, जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया.

ईरानी मीडिया ने यह भी संदेह जताया है कि भारत में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के प्रतिभागी ईरान और यूएई के बीच मतभेदों के कारण कोई साझा बयान जारी करना मुश्किल है.

ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी के हवाले से कहा गया है कि यूएई की मौजूदगी के कारण स्थिति जटिल हो गई है.

ईरान और यूएई में बढ़े तनाव के बीच भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को यूएई पहुँच रहे हैं. शुक्रवार को अबू धाबी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख़ मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाह्यान से मुलाक़ात करेंगे. भारत और यूएई के द्विपक्षीय संबंध पहले से ही काफ़ी मज़बूत हैं. यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और वहां 45 लाख से अधिक भारतीय रहते हैं.

जनवरी में भारत ने यूएई के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत भारत अमीरात का सबसे बड़ा एलएनजी ग्राहक बन जाएगा.

तीन अरब डॉलर के इस समझौते के तहत यूएई की एडीएनओसी गैस वर्ष 2028 से शुरू होकर दस वर्षों तक हर साल 0.5 मिलियन टन एलएनजी भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को आपूर्ति करेगी.

दूसरी तरफ़ गुरुवार को ओमान की खाड़ी में भारत के एक जहाज पर हमला हुआ और वह डूब गया. भारत ने इस घटना को अस्वीकार्य बताया है.

शिपिंग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने नई दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि मैकेनाइज्ड सेलिंग वेसल हाजी अली सोमालिया से शारजाह जाते समय हमले का शिकार हुआ.

उन्होंने कहा, सभी 14 चालक दल के सदस्यों को ओमान कोस्ट गार्ड ने सुरक्षित बचा लिया. भारतीय अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि इस हमले के लिए कौन ज़िम्मेदार था या हमला कहाँ से किया गया था.

इसराइल के दावे से असहज ईरान
इसराइल ने अपने प्रधानमंत्री के यूएई के कथित गोपनीय दौरे का दावा किया तो ईरान और आक्रामक हो गया. ईरान ने कहना शुरू कर दिया कि वह पहले से ही कहता था कि इसराइल के साथ मिलीभगत है.

पूरे मामले में यूएई असहज दिखा और उसने इसराइल के दावे को ख़ारिज किया.

मध्य-पूर्व मामलों के विशेषज्ञ और अमेरिकी की जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर वली नस्र ने इसराइल के दावों पर कहा है, सवाल यह है कि जब यूएई स्पष्ट रूप से इस यात्रा को स्वीकार नहीं करना चाहता, तो इसराइल ने सार्वजनिक क्यों किया? रिश्ते को दिखाने से इसराइल को फ़ायदा हो सकता है, लेकिन क्या यह यूएई को मुश्किल में डालने की क़ीमत पर नहीं होगा?

इराक़ और ईरान केंद्रित ख़बरों का विश्लेषण करने वाली वेबसाइट अमवाज मीडिया के संपादक मोहम्मद अली शबानी ने इसराइल के दावों पर लिखा है, हाल में इसराइल-यूएई सहयोग को लेकर सामने आईं कई चीज़ें, चाहे वह युद्ध से पहले, युद्ध के दौरान या उसके बाद की हों, ने इस बहस को और तेज़ कर दिया है कि ईरान ने जिन लक्ष्यों को चुना, क्या उन्हें वह उचित मानता था.

लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि अब आगे क्या होने वाला है. अगर युद्ध फिर शुरू होता है, तो ऐसा लगता है कि माहौल पहले से इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यूएई को उसमें एक केंद्रीय भूमिका निभाने वाले पक्ष के रूप में देखा जाए.

थिंक टैंक क्विंसी इंस्टीट्यूट के वाइस प्रेसिडेंट त्रिता पारसी को लगता है कि यूएई इसराइल के मामले में फँस चुका है.

उन्होंने एक्स पर लिखा है, संयुक्त अरब अमीरात ने अकॉर्ड में शामिल होकर एक बड़ी रणनीतिक ग़लती की थी. इस समझौते का मूल मक़सद ईरान के ख़िलाफ़ एक अरब-इसराइल गठबंधन बनाना था. इसराइल और अमेरिका के ईरान पर युद्ध के बाद यह बात अब पूरी तरह स्पष्ट हो गई है.

यूएई के लिए यह इसलिए भी बड़ी भूल थी, क्योंकि इससे अमीरात ख़ुद को इसराइल की ईरान-विरोधी नीति से जोड़ बैठा. जबकि हक़ीक़त यह है कि ईरान के साथ अमीरात का तनाव उतना गहरा नहीं था, जितनी इसराइल की दुश्मनी है. ख़ास बात यह भी है कि यूएई ईरान का पड़ोसी है, जबकि इसराइल ईरान से लगभग 1,000 किलोमीटर दूर है.

लेकिन अब अबू धाबी एक तरह से फँस चुका है. कुछ हद तक ऐसा भी लगता है कि ईरान युद्ध का मक़सद जीसीसी देशों को सुरक्षा के नाम पर इसराइल के और करीब धकेलना था.

इसी संदर्भ में युद्ध के दौरान नेतन्याहू ने कथित तौर पर गुप्त रूप से अबू धाबी का दौरा किया और यूएई को आयरन डोम सुरक्षा देने की पेशकश की. इसराइल इसे दोनों देशों के संबंधों में बड़ी सफलता के रूप में देखता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778822051ownload_-_2026-05-15T104642.270.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324571&amp;path_article=1</guid><pubDate>15-May-2026 10:44 AM</pubDate></item><item><title>ट्रंप और शी जिनपिंग की बातचीत, ट्रेड डील पर नहीं बनी सहमति</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324560&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324560&path_article=1]]></link><description>-सुरंजना तिवारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत में कोई बड़ा व्यापार समझौता नहीं हो सका है.

अमेरिका और चीन के बीच पिछले साल अक्तूबर में ट्रेड वॉर रोकने पर सहमति बनी थी. अक्तूबर मैं हुए समझौते के तहत अमेरिका ने चीनी सामानों पर प्रस्तावित भारी टैरिफ़ बढ़ोतरी रोक रखी है. वहीं चीन ने रेयर अर्थ एक्सपोर्ट पर सख़्ती कम की थी.

व्हाइट हाउस के मुताबिक़ दोनों नेताओं ने बोर्ड ऑफ़ ट्रेड बनाने पर सहमति जताई है. इसका मक़सद व्यापार संबंधों को संभालना है ताकि बार-बार टैरिफ़ पर बातचीत की ज़रूरत न पड़े.

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने में अभी काफी काम बाकी है.

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इस दौरे के दौरान बोइंग के बड़े ऑर्डर और अमेरिकी ऊर्जा व कृषि उत्पादों की चीनी खरीद से जुड़े एलान हो सकते हैं.

बुधवार को शुरू हुए ट्रंप के इस दौरे में कारोबारी जगत की मौजूदगी भी चर्चा में रही.

ट्रंप ने ख़ुद कहा कि वो अमेरिका के दर्जनों शीर्ष व्यवसायियों के प्रतिनिधिमंडल भी साथ लाए हैं, जिसमें टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और एनवीडिया के सीईओ जेनसेन हुआंग शामिल हैं.

ये दोनों ही कंपनियां अमेरिका-चीन आर्थिक रिश्तों की सबसे संवेदनशील कड़ी हैं. टेस्ला की चीन के शंघाई प्लांट और वहां के ग्राहकों पर बड़ी निर्भरता है. वहीं एनवीडिया के माइक्रोचिप्स वैश्विक एआई रेस के केंद्र में हैं.

अमेरिका ने पहले ही चीन को एडवांस कंप्यूटिंग तकनीक की पहुंच सीमित करने के लिए एक्सपोर्ट नियंत्रण को लेकर कई कदम उठाए हैं.

जेनसन हुआंग की मौजूदगी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि उनका नाम प्रतिनिधिमंडल की शुरुआती सूची में नहीं था. इससे यह अटकलें तेज़ हुई हैं कि एआई और सेमीकंडक्टर चिप्स तक चीन की पहुंच बातचीत का अहम हिस्सा हो सकती है.

आज शुक्रवार को ट्रंप के दौरे का दूसरा दिन है. और उम्मीद लगाई जा रही है कि कुछ अन्य मुद्दों पर दोनों राष्ट्रपतियों के बीच बातचीत हो सकती है.

व्हाइट हाउस ने उन कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों की पूरी सूची जारी की है जो इस दौरे में शामिल हैं.

टिम कुक (एप्पल) स्टीफन श्वार्ज़मैन (ब्लैकस्टोन) केली ऑर्टबर्ग (बोइंग) ब्रायन साइक्स (कारगिल) जेन फ्रेजर (सिटीग्रुप) हेनरी लॉरेंस कल्प (जीई एयरोस्पेस) डेविड सोलोमन (गोल्डमैन सैक्स) जैकब थायसेन (इल्यूमिना) माइकल मीबाख (मास्टरकार्ड) संजय मेहरोत्रा (माइक्रों टेक्नोलॉजी) जेनसन हुआंग (एनवीडिया) क्रिस्टियानो एमन (क्वालकॉम) एलन मस्क (स्पेसएक्स और टेस्ला) रयान मैकइनर्नी (वीज़ा)

उम्मीद है कि दिन में बाद में और भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778817918ownload_-_2026-05-14T121513.074.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324560&amp;path_article=1</guid><pubDate>15-May-2026 9:35 AM</pubDate></item><item><title>ब्रिक्स : क्या ईरान और इसराइल के बीच फंस गया है भारत?</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324553&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324553&path_article=1]]></link><description>ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए बुधवार शाम नई दिल्ली पहुँचे हैं।

अराग़ची के भारत आने के कुछ घंटे बाद ही इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि फऱवरी के अंत में ईरान के ख़िलाफ़ इसराइली और अमेरिकी हमले के दौरान बिन्यामिन नेतन्याहू ने यूएई का गोपनीय दौरा किया था। ईरानी विदेश मंत्री ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि इसराइल के साथ मिलीभगत माफ़ी के लायक नहीं है।

ऐसे समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को यूएई के दौरे पर जा रहे हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में चीन के पहले दौरे पर बुधवार को बीजिंग पहुंचे हैं।

दूसरी तरफ नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक गुरुवार से शुरू हो रही है।

ट्रंप ब्रिक्स देशों को कई बार धमकी दे चुके हैं। सबसे दिलचस्प हैं कि ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य चीन के विदेश मंत्री नई दिल्ली नहीं आ रहे हैं। ऐसा तब है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल एससीओ समिट में शामिल होने चीन गए थे।

2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है और सितंबर महीने में समिट होने वाली है। ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन के विदेश मंत्री के शामिल नहीं होने से उस आशंका को बल मिलेगा कि चीनी राष्ट्रपति सितंबर में आयोजित होने वाले ब्रिक्स समिट में भारत आएंगे या नहीं।

ब्रिक्स में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्ऱीका हैं। लेकिन 2024 में रूस के कज़ान में आयोजित ब्रिक्स समिट में इसके सदस्यों की संख्या बढ़ी थी। ब्रिक्स में नए सदस्यों के रूप में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हुए थे।

संतुलन का संकट

2023 में जी-20 समिट का आयोजन नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में हुआ था और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नहीं आए थे। मई में क्वॉड के विदेश मंत्रियों की बैठक भी नई दिल्ली में होने वाली है। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी शरीक होंगे।

क्वॉड को रूस और चीन अपने ख़िलाफ़ देखते हैं जबकि ब्रिक्स को अमेरिका अपने ख़िलाफ़ देखता है। ऐसे में भारत के लिए ब्रिक्स और क्वॉड के बीच संतुलन बनाना चुनौती भरा होता है।

भारत के पास ब्रिक्स की अध्यक्षता तब है, एक सदस्य देश ईरान को अमेरिका और इसराइल के हमलों का सामना करना पड़ा है।

ईरान चाहेगा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स अमेरिका और इसराइल की कड़े शब्दों में निंदा करे। भारत ईरान के मामले में पहले से ही निशाने पर है। ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले से ठीक पहले भारतीय प्रधानमंत्री ने तेल अवीव का दौरा किया था। उसके बाद वहां के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की मौत के बाद भी भारत के बहुत देर से प्रतिक्रिया देने पर भी भारत सवालों के घेरे में था।

इसराइल पिछले डेढ़ दशक में भारत का अहम रक्षा सहयोगी बनकर उभरा है। ऐसे में भारत के लिए यह आसान नहीं होगा कि ईरान को भी नाराज़ ना करे और इसराइल से भी सोहबत बनी रहे।

भारत और यूएई को छोड़ ब्रिक्स के सारे सदस्य देश इसराइल की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों में बहुमत का समर्थन ईरान के साथ है। ये चुनौती तो अभी विदेश मंत्रियों की बैठक में है लेकिन जब सितंबर में शिखर सम्मेलन होगा तो चीज़ें और जटिल हो सकती हैं।

अमेरिका और इसराइल के ईरान पर हवाई हमले शुरू किए जाने के बाद ब्रिक्स समूह युद्ध पर कोई साझा रुख़ नहीं ले पाया है। इन हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व की मौत हुई थी और इसके बाद वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया।
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778777417BC-1.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324553&amp;path_article=1</guid><pubDate>14-May-2026 10:20 PM</pubDate></item><item><title>‘ताइवान’ चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा: चिनफिंग ने ट्रंप से मुलाकात के बाद कहा</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324543&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324543&path_article=1]]></link><description>(के जे एम वर्मा)

बीजिंग, 14 मई। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने बृहस्पतिवार को अपने अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता के पहले दौर के बाद कहा कि चीन और अमेरिका रचनात्मक द्विपक्षीय संबंधों के निर्माण के लिए एक नए दृष्टिकोण पर सहमत हुए हैं। इसके साथ ही उन्होंने आगाह किया कि ताइवान को लेकर तनाव संबंधों को खतरे में डाल सकता है और संघर्षों को जन्म दे सकता है।

बीजिंग में हुई बैठक के बाद चिनफिंग ने कहा, मैंने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ रणनीतिक स्थिरता के रचनात्मक चीन-अमेरिका संबंधों के निर्माण के एक नए दृष्टिकोण पर सहमति व्यक्त की है।

सरकारी मीडिया के अनुसार, चिनफिंग ने कहा कि यह नया दृष्टिकोण अगले तीन वर्षों और उससे आगे द्विपक्षीय संबंधों के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा तथा दोनों देशों के लोगों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा इसका स्वागत किया जाना चाहिए।

हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ताइवान का मुद्दा चीन-अमेरिका संबंधों में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, चिनफिंग ने कहा कि अगर स्थिति को सही ढंग से संभाला गया तो द्विपक्षीय संबंध कुल मिलाकर स्थिर रहेंगे, अन्यथा, दोनों देशों को टकराव और यहां तक कि संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है, जिससे द्विपक्षीय संबंध गंभीर खतरे में पड़ जाएंगे।

उन्होंने अमेरिका से ताइवान मुद्दे को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने का आग्रह किया।

चिनफिंग ने कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखना बीजिंग और वाशिंगटन के बीच स्थिर संबंधों के लिए प्रमुख महत्व रखता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ताइवान की स्वतंत्रता के लिए समर्थन जलडमरूमध्य में शांति की बात से मेल नहीं खाता।

स्वशासित ताइवान को चीन एक विद्रोही प्रांत मानता है। वह उन देशों को ताइपे के साथ औपचारिक संबंध रखने से रोकता है जिनके साथ उसके राजनयिक संबंध हैं।

वर्ष 1979 में आधुनिक चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने के बाद से, अमेरिका ताइवान को अनौपचारिक समर्थन देते हुए और उसे हथियार मुहैया कराते हुए बीजिंग की मांगों के दायरे में रहने में कामयाब रहा है। वाशिंगटन ताइवान को चीन का हिस्सा मानने के बीजिंग के रुख को स्वीकार करता है, लेकिन स्पष्ट रूप से इसका समर्थन नहीं करता।

चिनफिंग ने कहा कि रचनात्मक रणनीतिक स्थिरता सहयोग, प्रबंधनीय प्रतिस्पर्धा और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह ढांचा महज एक नारा बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि दोनों पक्षों द्वारा ठोस कार्रवाई में तब्दील होना चाहिए।

चिनफिंग ने कहा, जहां असहमति और टकराव मौजूद हैं, वहां समान स्तर पर परामर्श ही एकमात्र सही विकल्प है।

यह नौ वर्षों में किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की पहली चीन यात्रा है। इससे पहले ट्रंप ने ही अपने पहले कार्यकाल के दौरान 2017 में चीन की यात्रा की थी।

ट्रंप बुधवार को व्यापारिक नेताओं के एक समूह के साथ बीजिंग पहुंचे। उनके साथ अमेरिका के कई बड़े कारोबारी नेता भी आए हैं, जिनमें एनवीडिया के जेन्सन हुआंग, एप्पल के टिम कुक, टेस्ला और स्पेसएक्स के एलन मस्क और ब्लैक रॉक के लैरी फिंक सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।

व्यापार वार्ता पर चिनफिंग ने कहा कि दोनों पक्षों की आर्थिक और व्यापार टीमों ने आम तौर पर संतुलित और सकारात्मक परिणाम दिए हैं।

यह उल्लेख करते हुए कि चीन अपने दरवाजे व्यापक रूप से खोलेगा, चिनफिंग ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां लंबे समय से देश के आर्थिक सुधारों में शामिल रही हैं और अमेरिका का पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग का विस्तार करने के लिए स्वागत है।

चिनफिंग ने कहा, दोनों पक्षों को उस महत्वपूर्ण सहमति को लागू करना चाहिए जिस पर हम पहुंचे हैं, और राजनीतिक, राजनयिक तथा सैन्य-से-सैन्य क्षेत्रों में संचार चैनलों का बेहतर उपयोग करना चाहिए।

चीनी नेता ने कहा कि दोनों देशों को अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, लोगों के बीच संबंधों और कानून प्रवर्तन जैसे क्षेत्रों में भी आदान-प्रदान तथा सहयोग का विस्तार करना चाहिए।

इससे पहले, ट्रंप ने शी चिनफिंग के साथ अपनी बातचीत को शायद अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन बताया, क्योंकि दोनों नेताओं ने ईरान युद्ध, व्यापार तनाव, टैरिफ, प्रौद्योगिकी और ताइवान पर चर्चा की।

चिनफिंग को महान नेता बताते हुए ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों का एक साथ शानदार भविष्य होगा, जबकि चिनफिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका को प्रतिद्वंद्वी होने के बजाय साझेदार होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि व्यापार युद्ध में कोई विजेता नहीं होता।

ट्रंप की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया संघर्ष और उसके बाद पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण आर्थिक एवं भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बढ़ गई हैं, जिसका असर खासकर एशिया पर पड़ा है।

इस शिखर बैठक में दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या इससे अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी खत्म करने की दिशा में कोई ठोस परिणाम निकलता है या नहीं ?(भाषा)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778774710ownload_-_2026-05-14T121350.191.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324543&amp;path_article=1</guid><pubDate>14-May-2026 9:35 PM</pubDate></item><item><title>ट्रंप और शी जिनपिंग ने शुरुआती संबोधन में क्या कहा?</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324477&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324477&path_article=1]]></link><description>चीन पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने शुरुआती संबोधन में शी जिनपिंग से मुलाक़ात को सम्मान की बात बताया, वहीं चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार बनना चाहिए.

आज ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता हो रही है और उससे पहले दोनों राष्ट्रपतियों ने शुरुआती संबोधन में कई बातें कहीं.

ट्रंप ने कहा, हमारे संबंध अच्छे रहे हैं. जब भी कोई मुश्किल आई, हमने उसे मिलकर सुलझाया. मैं आपको फ़ोन करता था और आप मुझे फ़ोन करते थे. लोगों को नहीं पता, लेकिन जब भी कोई समस्या हुई, हमने उसे बहुत जल्दी हल किया.

उन्होंने कहा, मैं हर किसी से कहता हूं कि आप एक महान नेता हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह इस दौरे पर दुनिया के सबसे बेहतरीन कारोबारी नेताओं को अपने साथ लाए हैं. उन्होंने कहा, आज यहां सिर्फ शीर्ष लोग मौजूद हैं जो आपका सम्मान करने आए हैं.

उन्होंने कहा, आपके साथ होना सम्मान की बात है और आपका दोस्त होना भी सम्मान की बात है.

ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका और चीन के संबंध पहले से कहीं बेहतर होने जा रहे हैं.

शी जिनपिंग ने क्या कहा?

ट्रंप और उनके प्रतिनिधिमंडल के सामने शुरुआती संबोधन में शी जिनपिंग ने कहा, हमें प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार होना चाहिए. हमें एक-दूसरे की सफलता और समृद्धि में सहयोग करना चाहिए और नए दौर में बड़े देशों के आपसी संबंधों का सही रास्ता तलाशना चाहिए.

शी जिनपिंग ने कहा कि वह ट्रंप के साथ चर्चा और मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं ताकि चीन-अमेरिका संबंधों की विशाल नौका को सही दिशा दी जा सके और 2026 को ऐसा ऐतिहासिक साल बनाया जा सके जो संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत करे.

उन्होंने अमेरिका की आजादी के 250वें वर्ष पर ट्रंप और अमेरिकी जनता को बधाई भी दी.

शी ने कहा, पूरी दुनिया हमारी इस मुलाक़ात को देख रही है. इस समय दुनिया में ऐसा बदलाव तेज़ हो रहा है जैसा पिछले सौ सालों में नहीं देखा गया और अंतरराष्ट्रीय स्थिति लगातार बदलती और अस्थिर बनी हुई है.

उन्होंने कहा, दुनिया एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. क्या चीन और अमेरिका थ्यूसीडाइड्स ट्रैप से बाहर निकलकर संबंधों का नया मॉडल बना सकते हैं? क्या हम वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना कर दुनिया को ज्यादा स्थिरता दे सकते हैं? क्या हम अपने दोनों देशों की जनता और मानवता के भविष्य के हित में द्विपक्षीय संबंधों के लिए बेहतर भविष्य बना सकते हैं?

शी जिनपिंग ने कहा, ये ऐसे सवाल हैं जो इतिहास, दुनिया और जनता के लिए अहम हैं. बड़े देशों के नेताओं के तौर पर ये हमारे समय के सवाल हैं, जिनका जवाब आपको और मुझे देना है.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778740953ownload_-_2026-05-14T121513.074.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324477&amp;path_article=1</guid><pubDate>14-May-2026 12:12 PM</pubDate></item><item><title>शी जिनपिंग ने ताइवान पर अमेरिका को दी चेतावनी- चीनी सरकारी मीडिया</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324476&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324476&path_article=1]]></link><description>चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक़ राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान मुद्दे को लेकर अमेरिका के साथ संभावित टकराव की चेतावनी दी है.

उन्होंने इसे चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे अहम मुद्दा बताया.

शी जिनपिंग ने कहा, अगर इस मुद्दे को सही तरीके से संभाला गया तो द्विपक्षीय संबंध सामान्य रूप से स्थिर रह सकते हैं. लेकिन अगर इसे ठीक से नहीं संभाला गया तो दोनों देश टकराव या यहां तक कि संघर्ष की स्थिति में पहुंच सकते हैं, जिससे पूरे चीन-अमेरिका संबंध बेहद ख़तरनाक मोड़ पर पहुंच जाएंगे.

उन्होंने कहा कि ताइवान की स्वतंत्रता ताइवान स्ट्रेट में शांति के बिल्कुल उलट है.

साथ ही उन्होंने कहा कि इस इलाक़े में शांति बनाए रखना चीन और अमेरिका के बीच सबसे बड़ा साझा हित है.

ताइवान एक स्वशासित द्वीप है, जिस पर चीन अपना दावा करता है और उसे बलपूर्वक अपने नियंत्रण में लेने की संभावना से भी इनकार नहीं करता.

हाल के सालों में चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास बढ़ाए हैं, जिनमें नाकाबंदी जैसे युद्धाभ्यास भी शामिल हैं.

इससे ताइवान प्रशासन और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ी है.

पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने ताइवान को 11 अरब डॉलर के हथियार बेचने का एलान किया था.

चीन ने उस समय इसकी आलोचना की थी और आज की बैठक से पहले भी इसे लेकर चेतावनी दी थी.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778740871ownload_-_2026-05-14T121350.191.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324476&amp;path_article=1</guid><pubDate>14-May-2026 12:11 PM</pubDate></item><item><title>डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच तय समय से एक घंटे ज़्यादा चली बातचीत</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324475&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324475&path_article=1]]></link><description>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता खत्म हो गई है. यह बातचीत करीब दो घंटे तक चली, जो पहले तय समय से लगभग एक घंटे ज़्यादा चली.

आज शाम डोनाल्ड ट्रंप के सम्मान में आयोजित राजकीय भोज में भी उनकी मौजूदगी रहेगी.

उधर, ताइवान ने अमेरिका के समर्थन पर आभार जताया है.

ताइवान सरकार की प्रवक्ता मिशेल ली ने बीजिंग में ट्रंप-शी शिखर बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका की ओर से ताइवान के समर्थन को बार-बार दोहराए जाने के लिए हम उनके आभारी हैं.

ताइवान मुद्दा इस बैठक में दोनों महाशक्तियों के बीच चर्चा का अहम विषय बना हुआ है और ताइवान इस मुलाक़ात पर क़रीबी नज़र रखे हुए है.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778740790ownload_-_2026-05-14T121224.576.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324475&amp;path_article=1</guid><pubDate>14-May-2026 12:09 PM</pubDate></item><item><title>अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पहुंचे चीन, हुआ स्वागत</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324452&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324452&path_article=1]]></link><description>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिन के अहम दौरे पर बुधवार शाम बीजिंग पहुंचे. हालांकि मुख्य आयोजन गुरुवार और शुक्रवार को होने हैं.

गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति का पहला आधिकारिक कार्यक्रम बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ स्वागत समारोह से होगा.

दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी, जिसके बाद शाम को राजकीय भोज रखा गया है.

ट्रंप के प्रतिनिधिमंडल में टेस्ला के एलन मस्क और एनवीडिया के जेनसन हुआंग समेत कई टेक कंपनियों के सीईओ भी मौजूद हैं.

राष्ट्रपति के काफिले तक पहुंचने के दौरान ट्रंप का स्वागत ब्रास बैंड की धुनों और झंडे लहराते लोगों की प्रस्तुति के साथ किया गया.

इस दौरान लोग वेलकम वेलकम, अ वॉर्म वेलकम के नारे लगा रहे थे.

अमेरिका और चीन के झंडे भी वहां लगाए गए थे, जिसे दो दिन की अहम बैठक से पहले एकता के प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.

राष्ट्रपति ट्रंप और उनके प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के लिए रेड कार्पेट बिछाया गया था.

उपराष्ट्रपति हान झेंग एयर फोर्स वन से उतरने के बाद ट्रंप के स्वागत के लिए रनवे पर मौजूद थे.

हान झेंग चीन के शीर्ष नेताओं में शामिल हैं और उनके स्वागत के लिए भेजे जाने को बीजिंग की तरफ से ट्रंप को सम्मान देने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

इससे पहले 2017 के दौरे के दौरान चीन ने ट्रंप के स्वागत के लिए अपेक्षाकृत निचले स्तर के नेता और स्टेट काउंसलर यांग जिएची को भेजा था.

हान झेंग पिछले साल ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में भी शामिल हुए थे.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778729279ownload_-_2026-05-14T090037.186.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324452&amp;path_article=1</guid><pubDate>14-May-2026 8:57 AM</pubDate></item><item><title>न्यूयॉर्क में चल रहा था चीन का सीक्रेट पुलिस स्टेशन, एक अमेरिकी नागरिक दोषी करार</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324451&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324451&path_article=1]]></link><description>-नारडीन साद

एक अमेरिकी नागरिक को अमेरिका में चीन का पहला सीक्रेट पुलिस स्टेशन चलाने का दोषी पाया गया है.

64 साल के लू जियानवांग पर आरोप था कि उन्होंने 2022 की शुरुआत में न्यूयॉर्क के मैनहटन स्थित चाइनाटाउन इलाके में चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय (एमपीएस) के लिए यह स्टेशन खोला और संचालित किया.

उन्हें चीन सरकार के अवैध एजेंट के तौर पर काम करने और मामले से जुड़े सबूत नष्ट कर न्याय में बाधा डालने के आरोपों में दोषी ठहराया गया.

यह फ़ैसला ऐसे समय आया है, जब इसी सप्ताह कैलिफ़ोर्निया की एक मेयर ने चीन के अवैध एजेंट के रूप में काम करने के आरोप लगने के बाद इस्तीफ़ा दिया था.

यह फै़सला न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में एक सप्ताह तक चली जूरी सुनवाई के बाद आया.

न्यूयॉर्क निवासी लू जियानवांग, जिन्हें हैरी लू के नाम से भी जाना जाता है, को अब अधिकतम 30 साल तक की जेल हो सकती है. अभियोजकों ने यह जानकारी दी.

उनके सह-आरोपी चेन जिनपिंग ने दिसंबर 2024 में चीन जनवादी गणराज्य (पीआरसी) के एजेंट के रूप में साज़िश करने का दोष स्वीकार कर लिया था. वह इस विदेशी पुलिस स्टेशन से जुड़े मामले में सज़ा सुनाए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं.

एफ़बीआई के सहायक निदेशक जेम्स सी. बार्नेकल जूनियर ने कहा, लू जियानवांग ने न्यूयॉर्क शहर में मौजूद इस पुलिस स्टेशन का इस्तेमाल चीन सरकार के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने और पीआरसी के विरोधियों को निशाना बनाने के लिए किया.

कम से कम 53 देशों में ऐसे 100 से अधिक केंद्रों की मौजूदगी की खबरें सामने आई हैं. मानवाधिकार संगठनों ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह इन ठिकानों का इस्तेमाल विदेशों में रहने वाले चीनी नागरिकों को धमकाने और उन पर निगरानी रखने के लिए करता है.

चीन ने इन ठिकानों को पुलिस स्टेशन मानने से इनकार किया है. उसका कहना है कि ये सेवा केंद्र हैं, जो विदेशों में रहने वाले चीनी नागरिकों को प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराते हैं.

चीन के मुताबिक, इन सेवाओं में महामारी के दौरान सहायता और ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण जैसी सुविधाएं शामिल थीं. (bbc.com/hindi)



</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778729191ownload_-_2026-05-14T085859.395.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324451&amp;path_article=1</guid><pubDate>14-May-2026 8:56 AM</pubDate></item><item><title>ईरान के पास अब भी 70 प्रतिशत मिसाइल क्षमता बरकरार: रिपोर्ट</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324418&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324418&path_article=1]]></link><description>ईरान अभी भी अपने मोबाइल मिसाइल लॉन्चरों और मिसाइलों के बड़े हिस्से को बनाए हुए है, ऐसा हालिया अमेरिकी खुफिया आकलनों में सामने आया है. न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के पास युद्ध से पहले के लगभग 70 प्रतिशत मिसाइल भंडार और मोबाइल लॉन्चर अब भी मौजूद हैं. इसके अलावा, लगभग 90 प्रतिशत भूमिगत मिसाइल भंडारण और लॉन्च सुविधाएं फिर से आंशिक या पूरी तरह चालू हो चुकी हैं, जिससे उसकी सैन्य क्षमता अभी भी काफी मजबूत मानी जा रही है.

रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास स्थित अपने अधिकांश अहम मिसाइल ठिकानों तक दोबारा पहुंच हासिल कर ली है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है. कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है, क्योंकि यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. खुफिया जानकारी के अनुसार, ईरान ने ना केवल अपने ठिकानों को फिर से सक्रिय किया है, बल्कि कुछ क्षतिग्रस्त मिसाइलों की मरम्मत और नई मिसाइलों का निर्माण भी शुरू कर दिया है.

वहीं, इस मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन और मीडिया के बीच मतभेद भी सामने आए हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने मीडिया रिपोर्टों को फेक न्यूज बताते हुए कहा कि ईरान की सैन्य स्थिति को मजबूत दिखाना देश के खिलाफ है. दूसरी तरफ, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यह दावा खारिज किया कि ईरान युद्ध के कारण अमेरिकी हथियार भंडार कम हो गए हैं और कहा कि अमेरिका के पास पर्याप्त हथियार मौजूद है.(dw.com/hi)


</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/17786782406617678_905.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324418&amp;path_article=1</guid><pubDate>13-May-2026 6:47 PM</pubDate></item><item><title>चीन ने पाकिस्तान से कहा, अमेरिका-ईरान का तनाव सुलझाने के लिए मध्यस्थता प्रयास तेज करें</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324413&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324413&path_article=1]]></link><description>चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने पाकिस्तान से अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता प्रयास तेज करने का आग्रह किया है. उन्होंने पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत में कहा कि इस संकट को सुलझाने के लिए संवाद को आगे बढ़ाना जरूरी है. वांग ने यह भी कहा कि चीन इस प्रक्रिया में पाकिस्तान का पूरी तरह समर्थन करेगा और खुद भी क्षेत्रीय शांति बहाल करने में योगदान देगा.

चीन ने खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के मुद्दे पर ध्यान देने को कहा है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है. वांग यी ने पाकिस्तान से कहा कि वह इस संवेदनशील मुद्दे का उचित समाधान निकालने में भूमिका निभाए.

माना जा रहा है कि इस जलमार्ग के बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है, इसलिए इसे फिर से खोलना बातचीत का प्रमुख एजेंडा है. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप चीन दौरे पर हैं और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत होने वाली है.(dw.com/hi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/17786778616935957_905.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324413&amp;path_article=1</guid><pubDate>13-May-2026 6:41 PM</pubDate></item><item><title>शी जिनपिंग से बातचीत के लिए चीन पहुंचे डॉनल्ड ट्रंप</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324412&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324412&path_article=1]]></link><description>अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप बुधवार को चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे, जहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है. यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार, ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने वाली है. ट्रंप का चीन में भव्य तरीके से स्वागत हुआ, जिसमें रेड कार्पेट, सैन्य सम्मान और सैकड़ों युवाओं द्वारा झंडे लहराते हुए उनका अभिनंदन करना शामिल था.

व्हाइट हाउस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग, वॉशिंगटन में चीन के राजदूत शिए फेंग, विदेश मंत्रालय के कार्यकारी उपमंत्री मा झाओशू और बीजिंग में अमेरिकी दूत डेविड पर्ड्यू ने किया. स्वागत समारोह में सैन्य सम्मान गार्ड, सैन्य बैंड और करीब 300 चीनी युवाओं ने हिस्सा लिया, जो चीनी और अमेरिकी झंडे लहराते हुए स्वागत है, स्वागत है के नारे लगा रहे थे.

गुरुवार को होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में ट्रंप विशेष रूप से व्यापार पर जोर देने की योजना बना रहे हैं. वे चीन से अमेरिकी उत्पादों जैसे सोयाबीन, बीफ और विमानों की खरीद बढ़ाने के लिए समझौते करना चाहते हैं. साथ ही, ट्रंप प्रशासन दोनों देशों के बीच मतभेद कम करने के लिए बोर्ड ऑफ ट्रेड की स्थापना की दिशा में भी काम करना चाहता है, जिससे हाल के वर्षों में चले व्यापारिक तनाव को कम किया जा सके.(dw.com/hi)










</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778677781apture.PNG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324412&amp;path_article=1</guid><pubDate>13-May-2026 6:38 PM</pubDate></item><item><title>ट्रंप ने ईरान के जवाब को 'कचरा' बताया, समझौते की उम्मीदें कमजोर पड़ीं</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324361&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324361&path_article=1]]></link><description>अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की उम्मीदें मंगलवार को कमजोर पड़ गईं, जब डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम लाइफ सपोर्ट पर है. ट्रंप ने ईरान के जवाब को खारिज करते हुए उसे कचरा बताया और कहा कि उन्होंने इसे पूरा पढ़ना भी जरूरी नहीं समझा. दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के चलते 7 अप्रैल से लागू संघर्षविराम पर खतरा मंडराने लगा है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं.

ईरान ने संघर्ष खत्म करने के लिए कई शर्तें रखी हैं, जिनमें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उसकी संप्रभुता को मान्यता देना, युद्ध के नुकसान की भरपाई और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शामिल है. दूसरी ओर, अमेरिका चाहता है कि पहले लड़ाई रोकी जाए और बाद में परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दों पर बातचीत हो. इसी बीच, अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात को रोकने के लिए नए प्रतिबंध भी लगाए हैं.

संघर्ष का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की आपूर्ति होती है. युद्ध के कारण यहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे तेल की कीमतें 104.50 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं. वैश्विक आपूर्ति बाधित होने से ओपेक का उत्पादन भी दो दशक के निचले स्तर पर आ गया है.(dw.com/hi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778649848ownload_(63).jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324361&amp;path_article=1</guid><pubDate>13-May-2026 10:54 AM</pubDate></item><item><title>हॉर्मुज संकट के बीच पाकिस्तान रूस से बढ़ाएगा तेल आयात</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324359&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324359&path_article=1]]></link><description>पाकिस्तान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी संकट के बीच रूस से तेल आयात बढ़ाने की योजना बनाई है. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, मॉस्को में पाकिस्तान के राजदूत फैसल नियाज तिर्मिजी ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए इस्लामाबाद वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश कर रहा है. उन्होंने बताया कि देश अपनी जरूरतों का केवल लगभग 10 प्रतिशत ही घरेलू स्तर पर पूरा करता है, जबकि बाकी तेल आयात पर निर्भर है, जो अब संकट के कारण प्रभावित हो रहा है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जहां से करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है. क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है, जिससे तेल की सप्लाई और कीमतों पर दबाव पड़ा है. इस स्थिति ने पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि उनका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आने वाले तेल पर निर्भर करता है.

ऐसे में पाकिस्तान रूस के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है और उसे एक भरोसेमंद वैकल्पिक सप्लायर के रूप में देख रहा है.(dw.com/hi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/17786496407119803_905.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324359&amp;path_article=1</guid><pubDate>13-May-2026 10:50 AM</pubDate></item><item><title>अफगान प्रवासियों की वापसी के मुद्दे पर ईयू–तालिबान के बीच बातचीत की तैयारी</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324355&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324355&path_article=1]]></link><description>यूरोपीय संघ (ईयू) अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के अधिकारियों को ब्रसेल्स बुलाने की योजना बना रहा है. यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा हो सकती है, जिसमें यूरोप में रह रहे कुछ अफगान प्रवासियों को वापस अफगानिस्तान भेजने के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी. हालांकि, ईयू ने साफ किया है कि इस बैठक का मतलब तालिबान को आधिकारिक मान्यता देना नहीं होगा.

यह बैठक कुछ सदस्य देशों के अनुरोध पर आयोजित की जा रही है और अभी इसकी तारीख तय नहीं हुई है. ईयू के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह बातचीत तकनीकी स्तर पर होगी और इससे पहले ईयू के अधिकारी जनवरी में काबुल जाकर तालिबान से मुलाकात कर चुके हैं. स्वीडन इस प्रस्तावित बैठक के समन्वय में मदद कर रहा है.

तालिबान के 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से बड़ी संख्या में अफगान नागरिक यूरोप में शरण मांग चुके हैं. यूरोपीय कानून के अनुसार, अपराध करने वाले या सुरक्षा के लिए खतरा माने जाने वाले प्रवासियों को वापस भेजा जा सकता है, लेकिन तालिबान के साथ कूटनीतिक संबंध न होने के कारण यह प्रक्रिया मुश्किल रही है. ऐसे में यह प्रस्तावित बैठक इस समस्या का समाधान खोजने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है.(dw.com/hi)






</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/17786493276889463_905.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324355&amp;path_article=1</guid><pubDate>13-May-2026 10:45 AM</pubDate></item><item><title>ब्रिटेन: किएर स्टार्मर सरकार से तीन मंत्रियों का इस्तीफ़ा</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324348&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324348&path_article=1]]></link><description>ब्रिटेन की किएर स्टार्मर सरकार से तीसरे मंत्री ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

मंत्री एलेक्स डेविस-जोन्स ने एक्स पर एक पोस्ट में अपने इस्तीफ़े की चिट्ठी शेयर की है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से देश के हित में काम करने और अपनी विदाई का टाइमटेबल तय करने की अपील की है.

इससे पहले स्टार्मर सरकार में मंत्री जेस फ़िलिप्स और मिआटा फ़ानबुल्लेह ने भी इस्तीफ़ा दे दिया है.

ख़बर है कि लेबर पार्टी के 100 से ज़्यादा सांसदों ने प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के समर्थन में एक बयान पर दस्तख़त किए हैं.

बयान में कहा गया है, पिछले हफ़्ते हमें चुनावों में बेहद निराशाजनक नतीजे मिले. इससे पता चलता है कि वोटरों का भरोसा फिर से जीतने के लिए हमारे सामने एक मुश्किल काम है.

यह काम आज से ही शुरू होना चाहिए - हम सभी को मिलकर उस बदलाव को लाने के लिए काम करना होगा जिसकी देश को ज़रूरत है. यह बयान लेबर पार्टी के सांसदों से आग्रह करता है कि वे इस पर ध्यान दें. यह लीडरशिप की होड़ का समय नहीं है.

इस बीच स्टार्मर से इस्तीफ़ा देने या इस्तीफ़े के लिए एक समयसीमा तय करने की मांग करने वाले लेबर सांसदों की कुल संख्या 86 तक पहुँच गई है.

पिछले हफ़्ते ब्रिटेन में स्थानीय चुनाव हुए थे, जिसमें लेबर पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था.

किएर स्टार्मर के नेतृत्व वाली लेबर पार्टी को साल 2024 के आम चुनाव में भारी बहुमत से जीत मिली थी और 14 साल बाद कंज़र्वेटिव पार्टी को सत्ता से बाहर होना पड़ा था.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778648166ownload_-_2026-05-13T102839.944.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324348&amp;path_article=1</guid><pubDate>13-May-2026 10:26 AM</pubDate></item><item><title>डोनाल्ड ट्रंप बोले- ईरान युद्ध ख़त्म करने के लिए चीन की ज़रूरत नहीं</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324344&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324344&path_article=1]]></link><description>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन की यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं. इससे ठीक पहले उन्होंने कहा कि ईरान के साथ युद्ध ख़त्म करने के लिए चीन की मदद की ज़रूरत नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि वह चीन दौरे पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग से विस्तार से बातचीत करेंगे.

ट्रंप ने कहा, हमारे पास बात करने के लिए बहुत सारी चीज़ें हैं. सच कहूं तो, ईरान हमारे एजेंडे में नहीं है, क्योंकि ईरान पहले से ही हमारे नियंत्रण में है.

उन्होंने ईरान के लिए चेतावनी भरे शब्दों में कहा, या तो हम समझौते पर पहुंचेंगे या फिर वे (ईरान) तबाह हो जाएंगे.

गौरतलब है कि चीन के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की राजकीय यात्रा पर रहेंगे.

यह लगभग नौ साल बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की चीन यात्रा होगी. ट्रंप की यह यात्रा मार्च में होनी थी, लेकिन मध्य पूर्व में चल रहे तनाव की वजह से टाल दी गई थी.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778644285romp.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324344&amp;path_article=1</guid><pubDate>13-May-2026 9:21 AM</pubDate></item><item><title>इन देशों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों का किया समर्थन</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324342&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324342&path_article=1]]></link><description>क़तर और तुर्की ने पाकिस्तान की उन कोशिशों का समर्थन किया है, जो ईरान युद्ध को ख़त्म करने के लिए की जा रही हैं.

क़तर के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, क़तर और तुर्की मिलकर पाकिस्तान की कोशिशों का समर्थन करते हैं, जिनका मक़सद युद्धविराम समझौते तक पहुंचना, इस युद्ध को जल्द से जल्द ख़त्म करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलकर समुद्री यातायात को सामान्य करना है.

यह बयान मंगलवार को दोहा में हुई बैठक के बाद आया. बैठक में क़तर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी और तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फ़िदान शामिल हुए.

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में क़तर और तुर्की ने चेतावनी दी कि अगर क्षेत्र में फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू होती है तो इसका गंभीर असर वैश्विक सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा.

ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान मध्यस्थता के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. दोनों देशों के बीच इस्लामबाद में वार्ता भी हुई थी, लेकिन यह बेनतीजा रही थी.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778644150ownload_-_2026-05-07T094056.329.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324342&amp;path_article=1</guid><pubDate>13-May-2026 9:19 AM</pubDate></item><item><title>ईरान में जासूसी के आरोप में छात्र को दी गई फांसी: एनजीओ</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324311&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324311&path_article=1]]></link><description>ईरान ने एक और विवादास्पद कदम उठाते हुए तेहरान की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के 29 वर्षीय छात्र एरफान शकूरजादेह को जासूसी के आरोप में फांसी दे दी. ईरानी न्यायपालिका की वेबसाइट मिजान के अनुसार, उसे अमेरिकी जासूसी एजेंसी सीआईए और इस्राएल की खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ सहयोग करने का दोषी पाया गया था. अधिकारियों ने दावा किया कि वह सैटेलाइट तकनीक से जुड़ी संवेदनशील जानकारी विदेशी एजेंसियों को दे रहा था और उसके कथित कबूलनामे को राज्य टीवी पर प्रसारित करने की बात भी कही गई.

हालांकि, नॉर्वे स्थित मानवाधिकार संगठनों ईरान ह्यूमन राइट्स (आईएचआर) और हेंगॉ ने इस मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनके अनुसार शकूरजादेह एक प्रतिभाशाली छात्र था, जिसे महीनों तक एकांत कारावास में रखा गया और उसे शारीरिक तथा मानसिक यातनाएं दी गईं. संगठनों ने कहा कि उससे जबरन झूठे कबूलनामे लिए गए. फांसी से पहले अपने संदेश में शकूरजादेह ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि उसे यातना देकर कबूलनामा देने पर मजबूर किया गया.

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान में हाल के महीनों में फांसी की सजा में तेजी आई है. फरवरी के अंत से शुरू हुए तनावपूर्ण माहौल के बाद जासूसी के आरोप में यह पांचवीं फांसी है. इसके अलावा, विरोध प्रदर्शनों और विपक्षी संगठनों से जुड़े कई लोगों को भी मौत की सजा दी गई है.

मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ईरान इन सजाओं का इस्तेमाल समाज में डर का माहौल बनाने के लिए कर रहा है, जबकि देश पहले ही दुनिया में सबसे अधिक फांसी देने वाले देशों में शामिल है. एनजीओ का कहना है कि इस साल ईरान में अब तक 190 लोगों को फांसी दी गई है.(dw.com/hi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/17785907545627953_905.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324311&amp;path_article=1</guid><pubDate>12-May-2026 6:29 PM</pubDate></item><item><title>जर्मन प्रवासियों की पहली पसंद बना स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया दूसरे स्थान पर</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324310&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324310&path_article=1]]></link><description>यूरोप में जर्मन नागरिकों के बीच स्विट्जरलैंड सबसे पसंदीदा प्रवासन गंतव्य बन गया है. जर्मनी के संघीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, 2025 की शुरुआत में करीब 3.3 लाख जर्मन नागरिक स्विट्जरलैंड में रह रहे थे. पिछले 10 वर्षों में वहां रहने वाले जर्मनों की संख्या में लगभग 10.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. इस बढ़ोतरी के पीछे भौगोलिक नजदीकी और भाषा की समानता को मुख्य कारण माना जा रहा है.

स्विट्जरलैंड के बाद ऑस्ट्रिया जर्मन प्रवासियों के लिए दूसरा सबसे लोकप्रिय देश है. 2025 की शुरुआत तक वहां करीब 2.4 लाख जर्मन नागरिक रह रहे थे, जो ऑस्ट्रिया में सबसे बड़ा विदेशी समुदाय बनाते हैं. जर्मन भाषा दोनों देशों में प्रचलित होने से लोगों को यहां बसने और काम करने में आसानी होती है, जिससे इन देशों की ओर रुझान लगातार बढ़ रहा है.

इसके विपरीत, दक्षिणी यूरोप में स्पेन खासतौर पर बुजुर्ग जर्मनों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक, स्पेन में लगभग 1.32 लाख जर्मन नागरिक रह रहे हैं. बेहतर मौसम, आरामदायक जीवनशैली और रिटायरमेंट के लिए अनुकूल माहौल होने के कारण ज्यादा उम्र के लोग स्पेन की ओर पलायन करना पसंद कर रहे हैं.(dw.com/hi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/17785906846215702_905.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324310&amp;path_article=1</guid><pubDate>12-May-2026 6:28 PM</pubDate></item><item><title>रेगिस्तान में कमाल: 123 घंटे में 600 किमी दौड़कर सुर्खियों में आर्दा सात्शी</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324308&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324308&path_article=1]]></link><description>जर्मनी के 28 वर्षीय धावक आर्दा सात्शी ने एक अद्भुत कारनामा करते हुए 600 किलोमीटर की दौड़ लगभग 123 घंटे में पूरी कर ली. उन्होंने यह लंबी दौड़ अमेरिका के रेगिस्तान में पूरी की और रविवार को लॉस एंजेलेस के सांता मोनिका पियर पर पहुंचकर अपनी यात्रा समाप्त की.

भले ही यह उपलब्धि बेहद प्रभावशाली है, फिर भी सात्शी इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे क्योंकि उनका लक्ष्य इस दूरी को 96 घंटे में पूरा करने का था. दौड़ के अंतिम चरण में भी उनका प्रदर्शन मजबूत रहा. कई बार उन्होंने 6 मिनट प्रति किलोमीटर की रफ्तार बनाए रखी, जबकि औसत गति 12 मिनट प्रति किलोमीटर से थोड़ी अधिक रही.

इस मैराथन को ऑनलाइन भी जबरदस्त लोकप्रियता मिली. लाखों लोगों ने लाइवस्ट्रीम के जरिए इस दौड़ को देखा. सोशल मीडिया पर भी सात्शी की बड़ी फैन फॉलोइंग है, जहां उनके यूट्यूब पर करीब 15 लाख और इंस्टाग्राम पर लगभग 20 लाख फॉलोअर्स हैं.(dw.com/hi)


</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/17785902317117483_905.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324308&amp;path_article=1</guid><pubDate>12-May-2026 6:20 PM</pubDate></item><item><title>चीन में दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंची शादियों की संख्या</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324307&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324307&path_article=1]]></link><description>साल 2026 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच चीन में करीब 17 लाख शादियां रजिस्टर हुईं. 1.4 अरब की आबादी वाले चीन के लिए यह संख्या काफी कम है. साल 2025 की पहली तिमाही की तुलना में यह 6.2 फीसदी कम है, जबकि साल 2017 की पहली तिमाही की तुलना में यह लगभग आधी है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने आधिकारिक डेटा के हवाले से यह जानकारी दी है.

रॉयटर्स के मुताबिक, यह गिरावट चीन के सामने बढ़ती जनसांख्यिकी चुनौतियों का संकेत है. दरअसल, चीन में परंपरागत रूप से शादियां और जन्म दर एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. ऐसे में अगर शादियां ही कम होंगी तो जन्म दर में गिरावट आना स्वाभाविक है. चीन में जन्म दर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है और विशेषज्ञ इसके और गिरने की चेतावनी दे रहे हैं.

इस वजह से चीन में साल 2025 में लगातार चौथे साल जनसंख्या में गिरावट दर्ज की गई. चीन में सरकार अब युवाओं को शादी और बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. इसके लिए सरकार ने परिवारों को सब्सिडी देने और बच्चों के पालन-पोषण के लिए आर्थिक मदद करने की शुरुआत की है. चीन बच्चों के जन्म के दौरान होने वाले मेडिकल खर्च को कम करने का भी प्रयास कर रहा है.(dw.com/hi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/17785901686414552_905.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324307&amp;path_article=1</guid><pubDate>12-May-2026 6:19 PM</pubDate></item><item><title>ट्रंप के ‘51वां अमेरिकी राज्य’ वाले बयान को वेनेजुएला ने खारिज किया</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324280&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324280&path_article=1]]></link><description>द हेग, 12 मई।वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उनके देश की अमेरिका का 51वां राज्य बनने की कोई योजना नहीं है।

उन्होंने यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर सोमवार को की, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह इस संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

रोड्रिगेज द हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में वेनेजुएला और पड़ोसी देश गुयाना के बीच खनिज और तेल संपन्न एसेक्विबो क्षेत्र को लेकर विवाद पर सुनवाई के अंतिम दिन, पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं।

उन्होंने कहा, हम अपनी क्षेत्रीय अखंडता, संप्रभुता, स्वतंत्रता और इतिहास की रक्षा करते रहेंगे।

जनवरी में अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के सत्ता से हटने के बाद रोड्रिगेज ने कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद संभाला था। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला कोई उपनिवेश नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र देश है।

इससे पहले सोमवार को ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा था कि वह वेनेजुएला को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। व्हाइट हाउस ने इस मुद्दे पर टिप्पणी के अनुरोध का तत्काल जवाब नहीं दिया।

ट्रंप इससे पहले कनाडा को लेकर भी इसी तरह की टिप्पणी कर चुके हैं।

रोड्रिगेज ने कहा कि वेनेजुएला और अमेरिका के अधिकारियों के बीच संपर्क बना हुआ है और दोनों पक्ष सहयोग तथा समझ की दिशा में काम कर रहे हैं।

उन्होंने ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया देने से पहले अदालत में एसेक्विबो क्षेत्र पर अपने देश के दावे का बचाव करते हुए कहा कि इस एक सदी पुराने क्षेत्रीय विवाद का समाधान न्यायिक फैसले से नहीं, बल्कि राजनीतिक वार्ता से होगा।

करीब 62,000 वर्ग मील में फैला एसेक्विबो क्षेत्र गुयाना के कुल क्षेत्रफल का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है। यह इलाका सोना, हीरा, लकड़ी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। इसके अलावा इसके तट के पास विशाल अपतटीय तेल भंडार हैं, जहां से वर्तमान में प्रतिदिन औसतन नौ लाख बैरल तेल का उत्पादन हो रहा है।

यह उत्पादन वेनेजुएला के लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन के उत्पादन के करीब है और इससे दक्षिण अमेरिका के छोटे देशों में शामिल वेनेजुएला को एक महत्वपूर्ण ऊर्जा उत्पादक बन गया है।

वेनेजुएला स्पेनिश औपनिवेशिक काल से एसेक्विबो को अपना हिस्सा मानता रहा है। हालांकि 1899 में ब्रिटेन, रूस और अमेरिका के मध्यस्थों के फैसले में सीमा एसेक्विबो नदी के आधार पर तय की गई थी, जो काफी हद तक गुयाना के पक्ष में थी।

वेनेजुएला का कहना है कि विवाद सुलझाने के लिए 1966 में जिनेवा में हुए समझौते ने 19वीं सदी के मध्यस्थता फैसले को प्रभावहीन कर दिया था। हालांकि 2018 में, एसेक्विबो तट के पास एक्सॉन मोबिल कंपनी द्वारा बड़े तेल भंडार की खोज की घोषणा के तीन साल बाद, गुयाना सरकार ने अंतरराष्ट्रीय अदालत से 1899 के फैसले को बरकरार रखने की मांग की थी।

दोनों देशों के बीच तनाव 2023 में और बढ़ गया था, जब मादुरो ने जनमत संग्रह कराने के बाद इस क्षेत्र को बलपूर्वक वेनेजुएला में मिलाने की धमकी दी थी। जनमत संग्रह में मतदाताओं से पूछा गया था कि क्या एसेक्विबो को वेनेजुएला का राज्य बनाया जाना चाहिए।

मादुरो को तीन जनवरी को कराकास में अमेरिकी सैन्य अभियान के दौरान गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया गया था, जहां उन पर मादक पदार्थों की तस्करी के आरोपों में मुकदमा चल रहा है। उन्होंने खुद को निर्दोष बताया है।

रोड्रिगेज ने जनमत संग्रह पर सीधे टिप्पणी नहीं की, लेकिन अदालत से कहा कि 1966 का समझौता वेनेजुएला और गुयाना के बीच बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने के लिए बनाया गया था। उन्होंने गुयाना सरकार पर अदालत का रुख कर समझौते को कमजोर करने का आरोप लगाया।

पिछले सप्ताह सुनवाई शुरू होने पर गुयाना के विदेश मंत्री ह्यूज हिल्टन टॉड ने न्यायाधीशों से कहा था कि यह विवाद संप्रभु राष्ट्र के रूप में हमारे अस्तित्व पर शुरू से ही एक दाग रहा है। उन्होंने कहा कि गुयाना का 70 प्रतिशत क्षेत्र दांव पर लगा है।

अदालत द्वारा इस मामले में अंतिम और कानूनी रूप से बाध्यकारी फैसला आने में कई महीने लग सकते हैं।

वेनेजुएला पहले ही कह चुका है कि सुनवाई में उसकी भागीदारी का अर्थ अदालत के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करना या उसे मान्यता देना नहीं है।(एपी)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778569635romp.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324280&amp;path_article=1</guid><pubDate>12-May-2026 12:37 PM</pubDate></item><item><title>चीन दौरे से पहले ट्रंप ने जताई 'अच्छी चीजें' होने की उम्मीद, 17 बड़े बिजनेसमैन के साथ पहुंचेंगे बीजिंग</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324276&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324276&path_article=1]]></link><description>वाशिंगटन, 12 मई । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन के दौरे पर रहने वाले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दौरे पर ईरान के साथ ताजा हालात पर भी चर्चा हो सकती है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात अच्छी रहेगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, मैं चीन के अपने दौरे का बहुत इंतजार कर रहा हूं, यह एक शानदार देश है, जहां के नेता राष्ट्रपति शी हैं, जिनका सभी सम्मान करते हैं। दोनों देशों के लिए बहुत अच्छी चीजें होंगी! बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अमेरिका के कई बड़ी बिजनेस हस्तियां भी इस दौरे पर पहुंचने वाली हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बड़ी अमेरिकी कंपनियों के 17 बड़े कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव भी होंगे।

ट्रंप स्थानीय समयानुसार, मंगलवार को वाशिंगटन से निकलेंगे। राष्ट्रपति ट्रंप के डेलिगेशन में एप्पल के सीईओ टिम कुक और टेस्ला और स्पेसएक्स के चीफ एलन मस्क के साथ-साथ ब्लैकरॉक, ब्लैकस्टोन, बोइंग, कारगिल, सिटी, सिस्को, कोहेरेंट, जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) एयरोस्पेस, गोल्डमैन सैक्स, इलुमिना, मास्टरकार्ड, मेटा, माइक्रोन, क्वालकॉम और वीजा के सीनियर एग्जीक्यूटिव शामिल होंगे। व्हाइट हाउस की लिस्ट में शामिल एग्जीक्यूटिव के तौर पर ब्लैकरॉक के लैरी फिंक, ब्लैकस्टोन के स्टीफन श्वार्जमैन, बोइंग की केली ऑर्टबर्ग, कारगिल के ब्रायन साइक्स, सिटी की जेन फ्रेजर, सिस्को के चक रॉबिंस, कोहेरेंट के जिम एंडरसन, जीई एयरोस्पेस के एच. लॉरेंस कल्प, गोल्डमैन सैक्स के डेविड सोलोमन, इलुमिना के जैकब थायसेन, मास्टरकार्ड के माइकल मिबैक, मेटा की डिना पॉवेल मैककॉर्मिक, माइक्रोन के संजय मेहरोत्रा, क्वालकॉम के क्रिस्टियानो अमोन और वीजी के रयान मैकइनर्नी शामिल हैं।

इससे पहले सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति की जमकर सराहना की। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनकी जल्द होने वाली चीन यात्रा में ताइवान और ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़े मुद्दे होंगे। ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार अब चीन के साथ बहुत अच्छा काम कर रही है। उन्होंने पिछली अमेरिकी सरकारों पर आरोप लगाया कि उन्होंने चीन को अमेरिका का फायदा उठाने दिया। उन्होंने कहा कि हम बहुत कारोबार कर रहे हैं, लेकिन यह समझदारी वाला कारोबार है। पहले के राष्ट्रपति के समय हमसे कई वर्षों तक फायदा उठाया गया, अब हम चीन के साथ अच्छा काम कर रहे हैं। बातचीत के दौरान ट्रंप ने कई बार शी जिनपिंग की तारीफ की। उन्होंने कहा कि मेरे राष्ट्रपति शी के साथ अच्छे संबंध हैं। मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं और उम्मीद है कि वह भी मेरा सम्मान करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि प्रेसिडेंट शी हमारी पिछली सरकार का सम्मान नहीं करते थे और उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की भी आलोचना की। ट्रंप ने कहा कि वे (बाइडेन) ठीक से बात भी नहीं कर पाते थे। -(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778568868ine.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324276&amp;path_article=1</guid><pubDate>12-May-2026 12:24 PM</pubDate></item><item><title>इजरायली हमले में लेबनान के 6 लोगों की मौत और 7 घायल</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324267&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324267&path_article=1]]></link><description>बेरूत, 12 मई । लेबनान के दक्षिणी हिस्से पर इजरायली हमले जारी हैं। एक कस्बे पर इजरायल की ओर से किए गए हवाई हमलों में छह लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए। लेबनान की सरकारी समाचार एजेंसी एनएनए ने इसकी जानकारी दी। नेशनल न्यूज एजेंसी (एनएनए) के अनुसार पश्चिम बेका में दुश्मन सेना की ओर से निकासी चेतावनी जारी करने के कुछ ही घंटों बाद, दुश्मन के युद्धक विमानों ने पश्चिम बेका के सहमार कस्बे को निशाना बनाया। एनएनए के अनुसार, सोमवार रात इजरायली हमलों ने कफर डूनिन में एक घर को निशाना बनाया। यह कस्बा बेरूत से लगभग 95 किलोमीटर (59 मील) दूर स्थित है। एनएनए के मुताबिक, घायलों को तटीय शहर टायर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

दक्षिणी लेबनान के बिंत जुबैल इलाके में भी इजरायली बलों ने ऐन अल-सगीरा मोहल्ले में कई मकानों को ध्वस्त कर दिया। इस घटना पर इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई है। हालांकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आईडीएफ ने सोहमोर पर हमले को लेकर चेतावनी जरूर दी थी। इलाके के लोगों को शहर को खाली करने की धमकी दी गई थी। सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा कि यह निवासियों के लिए तत्काल चेतावनी है कि वे बेका घाटी स्थित इस शहर को खाली कर दें और कम से कम 1,000 मीटर (0.6 मील) दूर खुले इलाकों में चले जाएं। यह आदेश इजरायली सेना द्वारा हाल के महीनों में जारी किए गए ऐसे कई आदेशों में से एक है। इजरायली हमलों की वजह से दक्षिणी लेबनान में, लोग जबरन विस्थापित हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में करीब 2,869 लोगों की मौत हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, लेबनान के सामाजिक मामलों के मंत्रालय ने बताया है कि इजरायली हमलों और सैन्य कार्रवाई के कारण देश में 11 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। --(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778568159jr.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324267&amp;path_article=1</guid><pubDate>12-May-2026 12:12 PM</pubDate></item><item><title>मलेशिया के पीएम ने विजय के तमिलनाडु का सीएम बनने पर क्या कहा?</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324258&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324258&path_article=1]]></link><description>मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने जोसेफ़ विजय को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने पर बधाई दी है. उन्होंने कहा है कि तमिलनाडु की जनता ने विजय को बड़ी ज़िम्मेदारी दी है.

अनवर इब्राहिम ने एक्स पर लिखा, मैं अपने दोस्त विजय को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री चुने जाने पर दिल से बधाई देता हूं.

उन्होंने लिखा कई सालों तक उनके चाहने वालों ने देखा कि वह भ्रष्ट नेताओं और ख़लनायकों को तीन घंटे में हरा देते थे, अक्सर इंटरवल के बाद. अब तमिलनाडु की जनता ने विजय को स्क्रीन पर निभाई गई किसी भी भूमिका से कहीं बड़ी ज़िम्मेदारी दी है.

अनवर इब्राहिम ने लिखा, मलेशिया और तमिलनाडु के बीच पीढ़ियों से गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं. मैं आने वाले सालों में मुख्यमंत्री विजय के साथ मिलकर काम करने की उम्मीद करता हूं.

मलेशिया में बड़ी संख्या में दक्षिण भारतीय लोग रहते है.

गौरलतब है कि जोसेफ़ विजय ने रविवार को सीएम पद की शपथ ली थी. अब उन्हें कल यानी 13 मई को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश करना होगा.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778564131ownload_-_2026-05-12T110757.401.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324258&amp;path_article=1</guid><pubDate>12-May-2026 11:05 AM</pubDate></item><item><title>ट्रंप ने शांति प्रस्ताव ख़ारिज किया तो ईरान बोला, 'कोई दूसरा रास्ता नहीं...'</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324254&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324254&path_article=1]]></link><description>अमेरिका ने ईरान के युद्ध ख़त्म करने वाले प्रस्ताव को अस्वीकार दिया है. इसके बाद ईरान ने कहा है कि अमेरिका के सामने 14 बिंदुओं वाले प्रस्ताव को मानने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है.

ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाग़र ग़ालिबाफ़ ने एक्स पर लिखा, ईरानी लोगों के अधिकारों को मानने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है, जैसा कि 14 बिंदुओं वाले प्रस्ताव में लिखा गया है.

उन्होंने लिखा, कोई और तरीका पूरी तरह बेकार होगा, लगातार नाकामियों के अलावा कुछ नहीं मिलेगा. जितनी देर वे टालेंगे, उतना ही अमेरिकी टैक्स देने वालों को अपनी जेब से ख़र्च करना पड़ेगा.

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जंग ख़त्म करने के लिए अमेरिका के प्रस्तावों पर ईरान के जवाब को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है.

ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, पाकिस्तान के ज़रिए भेजे गए ईरान के प्रस्ताव में कई मांगें शामिल थीं.

इन मांगों में तुरंत जंग ख़त्म करने, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और भविष्य में ईरान पर दोबारा हमला न करने की बात कही गई है.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778559106ownload_-_2026-05-12T094414.488.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324254&amp;path_article=1</guid><pubDate>12-May-2026 9:41 AM</pubDate></item><item><title>ब्रिटेन: लेबर पार्टी के 71 सांसदों ने पीएम स्टार्मर से मांगा इस्तीफ़ा</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324248&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324248&path_article=1]]></link><description>ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर पर इस्तीफ़े का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. पिछले हफ़्ते इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी के ख़राब प्रदर्शन के बाद स्टार्मर के इस्तीफ़े की मांग तेज़ हुई.

कुल 403 लेबर सांसदों में से 71 सांसद अब तक खुले तौर पर कह चुके हैं कि पीएम स्टार्मर को इस्तीफ़ा देना चाहिए या कम से कम यह बताना चाहिए कि इस्तीफ़ा कब देंगे.

गृह मंत्री शबाना महमूद ने कहा है कि प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर को अब साफ़-साफ़ बताना चाहिए कि वो कब इस्तीफ़ा देंगे.

लेकिन कैबिनेट (यानी मंत्रियों की टीम) में इस मुद्दे पर सबकी राय एक जैसी नहीं है. ज़्यादातर मंत्री चाहते हैं कि स्टार्मर अपने पद पर बने रहें.

लेबर पार्टी की बैकबेंच सांसद कैथरीन वेस्ट ने पहले स्टार्मर के ख़िलाफ़ लीडरशिप चैलेंज शुरू करने की बात कही. लेकिन बाद में उन्होंने क़दम पीछे खींच लिए.

हालांकि, कैथरीन ने साफ़ कहा है कि स्टार्मर को सितंबर तक पद छोड़ देना चाहिए.

गौरतलब है कि इससे पहले स्टार्मर ने कहा था कि वह संदेह करने वालों को ग़लत साबित करेंगे. उन्होंने माना कि उनकी सरकार से ग़लतियां हुईं, लेकिन दावा किया कि बड़े राजनीतिक फ़ैसले सही लिए गए.(bbc.com/hindi)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778556142ownload_-_2026-05-12T085445.006.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324248&amp;path_article=1</guid><pubDate>12-May-2026 8:52 AM</pubDate></item><item><title>हंतावायरस से प्रभावित क्रूज शिप से जर्मन यात्रियों को निकाला गया </title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324187&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324187&path_article=1]]></link><description>बर्लिन, 11 मई । जर्मनी के सार्वजनिक प्रसारक एआरडी ने सोमवार को अपनी समाचार वेबसाइट टैगेशचाउ पर बताया कि हंतावायरस के प्रकोप के बाद क्रूज शिप एमवी होंडियस से चार जर्मन यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, रविवार शाम को नीदरलैंड के आइंडहोवन में उतरने के बाद विशेषज्ञों ने उनका स्वागत किया और फिर उन्हें फ्रैंकफर्ट ले जाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, जांच के बाद यह यात्री अपने-अपने गृह राज्यों में क्वारंटाइन के लिए लौटेंगे। एक यात्री को बर्लिन के चैरिटे अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। चार यात्रियों के अलावा 65 वर्षीय एक जर्मन महिला को पहले ही ड्यूसेलडॉर्फ के एक अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है।

अधिकारियों ने बताया कि वह एक अन्य यात्री के संपर्क में आई थीं, जिसकी जहाज पर वायरस से मृत्यु हो गई थी, लेकिन अभी तक उसमें संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, लौटने वाले किसी भी यात्री में लक्षण नहीं दिखे। इस बीच, हंतावायरस से प्रभावित क्रूज शिप एमवी होंडियस से निकाले गए बीस ब्रिटिश नागरिकों को उत्तर-पश्चिम इंग्लैंड के एक अस्पताल में अलग रखा गया है, क्योंकि अधिकारियों ने प्रकोप की रोकथाम और निगरानी को तेज कर दिया है। यात्री दिन में पहले मैनचेस्टर में उतरे और फिर उन्हें बस से मर्सीसाइड के विरल स्थित एरोवे पार्क अस्पताल ले जाया गया, जहां वे 72 घंटों तक चिकित्सा निगरानी में रहेंगे। ब्रिटिश सरकार ने कहा कि एमवी होंडियस से लौटने वाले सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को कुल 45 दिनों के लिए पृथक रखा जाएगा और उनकी निगरानी की जाएगी। उन व्यक्तियों के लिए भी आगे की जांच चल रही है जो पुष्ट या संदिग्ध मामलों के संपर्क में आए हो सकते हैं। -(आईएएनएस)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778486005t.JPG" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324187&amp;path_article=1</guid><pubDate>11-May-2026 1:23 PM</pubDate></item><item><title>काठमांडू में उतरते वक्त टर्किश एयरलाइंस के विमान में आग लगी, सभी यात्री सुरक्षित</title><link>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324177&amp;path_article=1</link><link><![CDATA[https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324177&path_article=1]]></link><description>(शिरीष बी प्रधान)

काठमांडू, 11 मई। नेपाल के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते समय टर्किश एयरलाइंस के एक विमान में आग लग गई। इस दुर्घटना में किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है, लेकिन घटना के बाद हवाई अड्डा का परिचालन करीब दो घंटे के लिए बंद करना पड़ा। हवाई अड्डे के अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि विमान में 277 यात्री और चालक दल के 11 सदस्य सवार थे और सभी सुरक्षित हैं।

यह घटना सुबह छह बजकर 36 मिनट पर हुई। इस्तांबुल से आ रही टर्किश एयरलाइंस की उड़ान टीके 726 में हवाई अड्डे पर उतरते समय पिछले पहिये में आग लग गई।

घटना के बाद हवाई अड्डे का परिचालन रोक दिया गया और आग पर काबू पाने के लिए दमकल गाड़ियां तुरंत मौके पर भेजी गईं।

अधिकारियों ने बताया कि विमान से सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

सुबह साढ़े आठ बजे के बाद सामान्य उड़ान सेवाएं फिर से शुरू हो गईं।

समाचार पत्र द हिमालयन टाइम्स के अनुसार, विमान में पार्थिव देह और सामान भी था। आग लगने की घटना के बाद विमान मुख्य रनवे पर रुक गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाएं बाधित हुईं।

अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है।

टर्किश एयरलाइंस इस्तांबुल से नेपाल के लिए सप्ताह में पांच उड़ानें संचालित करती है। काठमांडू का त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नेपाल को 17 देशों के 40 से अधिक गंतव्यों से जोड़ता है।(भाषा)
</description><enclosure url="https://www.dailychhattisgarh.com/uploads/article/1778483051ownload_-_2026-05-11T123629.174.jpg" length="" type="image/jpeg"/><guid>https://www.dailychhattisgarh.com/article-details.php?article=324177&amp;path_article=1</guid><pubDate>11-May-2026 12:34 PM</pubDate></item></channel></rss>