विशेष रिपोर्ट

महासमुन्द,  अपनों के पास पहुंचने बेसब्र हो रहे मजदूर, कहा-अब बहुत हुआ साहब, जाने दीजिए
महासमुन्द, अपनों के पास पहुंचने बेसब्र हो रहे मजदूर, कहा-अब बहुत हुआ साहब, जाने दीजिए
23-Apr-2020

बाहर का खतरा टलते ही फौरन भेजने की व्यवस्था करेंगे-कलेक्टर 
‘छत्तीसगढ़’ संवाददाता
महासमुन्द, 23 अप्रैल।
कल शाम ‘छत्तीसगढ़’ अखबार के जिला कार्यालय महासमुन्द में गांजर छात्रावास में क्वांरटीन एक व्यक्ति ने अपने मोबाइल नंबर से बात की। उसने ‘छत्तीसगढ़’ को बताया कि मैं घर वापस लौटना चाहता हूं। पिछले पंद्रह दिनों से बागबाहरा के एक शिविर में हूं। सुरेन्द्र सिंह बोल रहा हूं। उत्तरप्रदेश के जिला फरीदाबाद का रहने वाला हूं। ओडिशा काम करने गया था। लौटते समय यहां रोक लिया गया है। अब और कितने दिनों तक रखा जाएगा हमें। उत्तरप्रदेश में मेरा परिवार मेरा रास्ता देख रहा है। बच्चे रो रहे हैं। आपका नंबर एक युवक से मिला। आप मुझे गांव भिजवा दीजिए। अब मैं नहीं रह सकता। रह-रहकर सासें तेज हो जाती है। मुझे बीपी है। यहां शिविर में सभी को अपने घर जाना है, ज्यादा दिनों तक क्यों रखा जा रहा है हमें? 

कलेक्टर से इस संबंध में तत्काल ‘छत्तीसगढ़’ ने बात की तो वे कहते हैं कि बाहर अभी खतरा टला नहीं है। जाना सभी चाहते हैं अपने परिवार के पास लेकिन उन्हें हम सही सलामत उनके परिवारों को सौंपना चाहते हैं। जैसे ही माहौल ठीक होगा और ऊपर से आदेश आएगा, हम उन्हें घरों के लिए रवाना कर देंगे। 

कलेक्टर की बातें मोबाइल से सुरेन्द्र को बता दी गई। उन्हें समझाया गया कि रास्ते में यदि संक्रमण हो जाएं तो परिवार से मिलना तो दूर, वो आपका चेहरा भी नहीं देख पाएंगे। इसलिए माहौल ठीक होते तक यहीं रुकिए, आप हमारे मेहमान हैं। काफी टेंशन में थे सुरेन्द्र। आधे घंटे तक बातचीत के बाद बमुश्किल शिविर में रहने के लिए तैयार हुआ। बच्चों की तरह रोने लगा। फिर उसने कहा...तो ठीक है न..डॉक्टरों से कहिए कि हमसे मिलने आएं तो बीपी की दवाईयां साथ लेकर आएं। 

उनकी परेशानियां सुनकर कलेक्टर ने अपने अधिकारियों को सचेत कर दिया है कि किसी भी तरह की परेशानी मुसाफिरों को न हो। वैसे भी बातचीत में सुरेन्द्र ने इस बात का जिक्र जरूर किया कि उन्हें समय पर नाश्ता, खाना, पानी, साबुन, तेल सब कुछ मिल रहा है। अफसरों के अलावा कई लोग कुछ न कुछ आकर दे जाते हैं। ...लेकिन हमें अपने घर जाना है। यहां जिंदा तो हैं लेकिन जिंदगी गांवों में है। जल्दी भिजवा दीजिए। 

ज्ञात हो कि महासमुन्द जिला स्तर पर अब तक हुई कोरोना पड़ताल में 3 हजार 646 अंतरराज्यीय व 72 अंतरराष्ट्रीय यात्रियों का स्वास्थ्य परीक्षण कर होम क्वारंटीन किया जा चुका है। इसी क्रम में 47 व 22 जांच नमूने जोड़ कर कुल भेजे गए 69 प्रकरणों में 44 के ऋणात्मक परिणामों के अलावा 24 की रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। वहीं एक सैंपल पहले ही निरस्त किया जा चुका है। सुबह से रात और फिर रात से सुबह, चौबीसों घंटे जिले में लगतार जारी है कोविड नियंत्रण रोकथाम। जहां, जिला कलेक्टर सुनील कुमार जैन के निर्देशन में प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का संयुक्त दल कोरोना पर पैनी निगाह बनाई हुई हैं। 

हालांकि स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में अब तक करोना से संक्रमित एक भी प्रकरण नहीं पाया गया है। लेकिन होम क्वारंटीन किए जा रहे प्रकरणों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। प्राप्त अद्यतन जानकारी के मुताबिक दो मुख्य भागों में बांट कर कोरोना संदिग्ध प्रकरणों की पड़ताल की जा रही है। जिसमें पहले वे लोग आते हैं जिन्होंने हाल ही में देश के भीतर ही अलग-अलग राज्यों में यात्रा की है। इनका आंकड़ा तीन हजार छह सौ छियालीस तक आ पहुंचा है। वहीं, विदेश यात्रा कर लौटे लोगों में बहत्तर संक्रमण संदिग्ध प्रकरणों को जोड़ कर जिले में अब तक कुल तीन हजार सात सौ अठ्ठारह लोग शंका के घेरे में रखे जा चुके हैं। 

सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरके परदल ने बताया कि इनमें से कुल छब्बीस सौ चैरान्नबे लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अठ्ठाइईस दिन के होम क्वारंटीन की अवधि को पूरा कर लिया है और किसी में भी कोरोना से संक्रमित होने के लक्षण सामने नहीं आने से वे सुरक्षित समझे जा रहे हैं। कुल एक हजार नौ संदिग्ध मरीज ऐसे हैं, जिनके क्वारंटीन के दिन अभी भरे नहीं। ऐसे में वे अब भी संक्रमण के संदेही कटघरे में बने हुए हैं। बहरहाल, शेष बचे होम क्वारंटीन प्रकरणों की नियमित रूप निगरानी जारी है। साथ ही क्वारंटीन केंद्र और अत्याधुनिक उपकरणों से लैस कोविड अस्पताल की सुविधाओं में भी कोरोना से निपटने के लिए पुख्ता इंतेजाम कर लिए गए हैं। जैसे ही हालात सुधरेंगे, सभी को घरों की ओर रवाना कर दिया जाएगा। 
 

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