विशेष रिपोर्ट

रायपुर समेत कई जगहों पर बेमौसम झमाझम बारिश, भारी ओले, फसल चौपट, घंटों बिजली बंद रही, किसान चिंतित, मुआवजे की मांग
रायपुर समेत कई जगहों पर बेमौसम झमाझम बारिश, भारी ओले, फसल चौपट, घंटों बिजली बंद रही, किसान चिंतित, मुआवजे की मांग
Date : 25-Feb-2020

रायपुर समेत कई जगहों पर बेमौसम झमाझम बारिश, भारी ओले, फसल चौपट, घंटों बिजली बंद रही, किसान चिंतित, मुआवजे की मांग

सरगुजा में डेढ़-दो फीट मोटी बर्फ की चादर

छत्तीसगढ़ संवाददाता

रायपुर/रामानुजगंज/महासमुंद/रायगढ़/बेमेतरा/कुम्हारी/नवापारा-राजिम, 25 फरवरी। मौसम का मिजाज बदलने के साथ ही प्रदेश में आजकल कई जगहों पर झमाझम बारिश हुई और जमकर ओले गिरे। इस दौरान घंटों बिजली बंद रही। बारिश, ओलावृष्टि से कई जगहों पर खेतों और मैदानों में डेढ़ से दो फीट मोटी बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। घरों की तस्वीर जम्मू-कश्मीर की पहाडिय़ों की जैसी दिखने लगी। कई घरों की छतों पर लगे खपरैल, सीमेंट शेड, प्लास्टिक के दरवाजे, कुर्सी, बाल्टी आदि सामान टूटकर तहस-नहस हो गए। दूसरे तरफ रबी धान, गेहूं, चना, मसूर, धनिया व अन्य दलहन-तिलहन, सब्जी के साथ हजारों एकड़ में लगी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रदेश में एक-दो दिन और कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ ओले गिर सकते हैं।

प्रदेश में पिछले 2-3 दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है और कहीं-कहीं बारिश के साथ जमकर ओले गिरने लगे हैं। सरगुजा संभाग के अंबिकापुर, कोरबा, मरवाही, पेंड्रा समेत कई जगहों पर कल झमाझम बारिश के साथ जमकर ओले बरसे। बीती शाम से रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर संभाग में झमाझम बारिश हुई और रायपुर आउटर क्षेत्र अमलेश्वर, रायपुरा, सेजबहार आसपास के गांवों में जमकर ओले गिरे। भारी बारिश और ओलावृष्टि से सभी तरह की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई मकान की छत क्षतिग्रस्त हुए हैं। यहां तक की अमलेश्वर के एक मकान का शेड टूटने से वहां बर्फ के साथ पानी भर गया। किसानों ने सरकार से ओलावृष्टि का सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है।

अंबिकापुर से मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार सुबह बलरामपुर-रामानुजगंज जिला में बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने जबरदस्त तबाही मचाई है। ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। क्षेत्रों में सडक़ों में डेढ़ से दो फीट मोटी बर्फ की चादर जमी हुई है। किसान अपनी फसल को लेकर काफी चिंतित हैं। ओलावृष्टि से कई घरों के पर छप्पर, सीट व दुकानों के बोर्ड भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सुबह 7 बजे के आसपास मौसम खराब हुआ और तेज हवा के साथ जमकर ओलावृष्टि हुई, जिससे क्षेत्र में सभी को नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि खासकर रामानुजगंज विकासखंड में हुई है। अन्य स्थानों पर भी ओलावृष्टि की खबर है। ओलावृष्टि से रामानुजगंज की सडक़ बर्फ की चादर से पटी हुई रही। वहीं खेतों में भी बर्फ की सफेद चादर बिछ गई। रामानुजगंज क्षेत्र के आरागाही, कंचनपुर,कमलपुर,देवगई, मिठगई सहित आसपास गांवों में भी बर्फ की मोटी मोटी चादर बिछ गई। ग्रामों में तबाही का नजारा तस्वीरों को देखकर लगाया जा सकता है।

किसानों ने प्रशासन से मुआवजा की मांग की है। जानकारों का मानना है कि बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि से ठंड वापस लौट कर आएगी लोगों को अभी ठंड से राहत नहीं मिलने वाली है। ओलावृष्टि के बाद प्रशासन की टीम उक्त गांव में क्षतिपूर्ति का आंकलन करने पहुंची हुई थी। बलरामपुर-रामानुजगंज जिला में जहां एक ओर जमकर ओलावृष्टि हुई तो वहीं सरगुजा के कई क्षेत्रों में सुबह 6  बजे गरज चमक के साथ मूसलाधार बारिश हुई।

उठाव नहीं, हजारों क्विंटल धान भीगा

महासमुंद में मौसम में बदलाव की जानकारी होने के बाद भी खुले में रखा धान को भीगने से नहीं बच पाया। हजारों क्विंटल धान बारिश से भीग गया। वहीं खेतों में खड़े दलहन तिलहन और गेहूं का फसल भी इस बेमौसन बारिश से तबाह हुआ है। रविवार की रात से लेकर अब तक रह रहकर बारिश जाारी है। बीती रात तो जमकर बारिश हुई और ओले भी पड़े। समितियां प्रशासन से जल्द उठाव की मांग कर रही है लेकिन उठाव की रफ्तार धीमी है। इससे पहले हुई बारिश से कई च्ंिटल धान भीगा था। इससे समितियों को अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ा। समितियों के कर्मचारी बारिश में ऊपर का धान भीगने से तो बचा लेते हैं लेकिन नीचे रखे धान को भीगने से नहीं बचा पाते। अभी भी 127 केंद्रों में 34 लाख क्विंटल धान खुले में पड़ा है। इस मामले में डीएमओ संतोष पाठक का कहना है कि उठाव चल रहा है। समितियों से संग्रहण केंद्रों के लिए ट्रांसपोर्टर उठाव कर रहे हैं।

 रायगढ़ जिले के सारंगढ़ व पुसौर ब्लॉक में समिति प्रबंधकों की लापरवाही के चलते खुले मैदान में रखा हुआ सैकड़ो क्विंटल धान भीग गया। इसके बचाव के लिए कोई प्रबंध नहीं किया गया था। बारिश के आसार दो दिन पहले से ही दिख रहे थे। जिला कलेक्टर ने भी इस संबंध में सभी समिति प्रबंधकों को अपनी-अपनी समिति में रखे गए धान को ढंक कर रखने के निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन लापरवाही के चलते अलग-अलग ढेरी में रखा गया धान बारिश में भीग गया। खाद्य अधिकारी बताते हैं कि इस वर्ष 20 फरवरी तक

40 लाख 2 हजार से अधिक च्ंिटल धान खरीदा गया है और यह खरीदी पिछले वर्ष की तुलना में 2 लाख क्विंटल अधिक है। बातचीत के दौरान उन्होंने बेमौसम बारिश से धान भीगने से इंकार करते हुए कहा कि सभी समिति प्रबंधकों को पहले से ही निर्देश दिए गए थे कि पानी से बचाने के लिए कैंप कव्हर लगाकर रखें ताकि खुले मैदान में रखे गए धान को नुकसान नहीं पहुंचे, लेकिन इसके बाद भी रायगढ़ जिले के सारंगढ़ व पुसौर ब्लॉक के अधिकांश इलाकों में समिति प्रबंधन की लापरवाही से सैकड़ों च्ंिटल धान बारिश में भीगता रहा।

भारी नुकसान, किसानों की मुसीबत बढ़ी 

बेमेतरा में रबी फसलों पर मौसम का बुरा असर पड़ा है। रविवार रात से बारिश, तेज हवाओं और ओले गिरने की वजह से किसान परेशान हैं। चना, मसूर, धनिया करायत एवं गेहूं अलसी की फसल खराब होने की जानकारी सामने आ रही है। जल्दी पकने वाली फसल बोने वाले के किसानों की फसल खेतों में तैयार हो चुकी थी, मगर अचानक बदले मौसम ने मुसीबतें बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 25 फरवरी तक मौसम के हालात कुछ ऐसे ही रहने वाले हैं। कलेक्टर शिव अनंत तयाल ने बताया कि सर्वे करवा कर किसानों को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान कलेक्टर से मिलने पहुंचे। सभी ने फसल खराब होने के संबंध में उन्हें जानकारी दी। फिलहाल, कृषि विभाग की तरफ से कोई खास मदद किसानों की नहीं की जा रही। बेमेतरा जिले में वर्तमान में लगभग पौने 3 लाख एकड़ में दलहन और तिलहन की फसल बोई गई है। वर्ष बड़े पैमाने पर गेहूं का रकबा बढ़ा है, लेकिन, ओलावृष्टि के कारण खेतों में लहलहाती खड़ी फसलें पूरी तरह से मिट्टी में मिल गई है।

सरकार तुरंत राहत की घोषणा करें

बीते दो दिनों में हुई ओलावृष्टि , बारिश व तेज हवाओं से रबी फसल चना , गेहूं , धनिया व सब्जियों की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। लगभग पखवाड़े भर पहले हुई असमय बारिश से सभी रबी फसलों को बेहद क्षति हुई थी। बची कसर कल के ओलावृष्टि ने पूरी कर दी। तेज हवाओं से जहां गेहूं की फसल पूरी तरह गिर गई है जिससे गेहूं के पूरी तरह पकने की संभावना समाप्त हो गई है। गेहूं के दाने में काले धब्बे पडऩे की भी आशंका है। बड़े आकार के ओले व तेज बारिश होने से चने व सब्जियों की खेती में काफी मात्रा में पानी जमा हो गया है। जिससे पौधे की मरने की पूरी संभावना है। इस अनायास बारिश व ओले ने सब्जियों की फसलों को पूरी तरह चौपट कर दिया है।  इससे आने वाले दिनों में सब्जियों के दाम काफी तेज होने की भी आशंका है। अक्टूबर के महीने में कटाई हो चुके कम अवधि के धान के फरवरी तक नहीं बिकने से हलकान किसानों को अब रबी फसल में आ रही अनायास प्राकृतिक विपदाओं ने तोड़ कर रख दिया है। लगातार तो तीन मर्तबे हुई बारिश के बाद अब ओलावृष्टि से हुई तबाही का तत्काल आकलन कर यदि सरकार राहत की घोषणा तत्काल नहीं करती तो हालात बद से बदतर होने की आशंका है।

सडक़ किनारे लगे पेड़ धराशायी

नवापारा-राजिम में सोमवार को पूरे दिन की तेज धूप के बाद रात लगभग साढ़े आठ बजे तेज आंधी-तूफान के साथ ओले की बारिश हुई। तेज आंधी-तूफान के कारण सडक़ के किनारे लगे हुए पेड़ धराशायी हो गए। इससे कई स्थानों पर बिजली के तार टूटे और शहर में बिजली गुल रही। कई क्षेत्रों में पेड़ों के गिरने, टीन शेड उडऩे के अलावा अन्य नुकसान की बातें सामने आई हैं। ग्राम बसनी के सरपंच आशीष मिश्रा ने बताया कि इस असामयिक बारिश ने किसानो की कमर तोड़ दी है। फड़ल कटने की स्थिति में इस प्रकार की ओलावृष्टि से फसल को भारी नुकसान हुआ है। ग्राम मटका के किसान जितेन्द्र यदु ने कहा कि किसानों को इस ओलावृष्टि से भारी क्षति हुई है। सरकार से किसानों ने मुआवजे की मांग की है। गौरतलब है कि सोमवार को दिन में तेज धूप के बीच रह रहकर घिर आ रहे बादलों को देख बारिश होने की आशंका जाहिर की जा रही थी। रात 8 .30 बजे अचानक तेज हवा के साथ ओले की बारिश शुरू हो गई। हालांकि थोड़ी ही देर में यह समाप्त हो गया। कुछ देर के लिए हुए आंधी-तूफान ने कहर बरसाया। आंधी-तूफान के कारण जहां बिजली गुल रही वहीं जनजीवन भी काफी प्रभावित रहा।

टमाटर व अन्य सब्जी फसल चौपट 

कुम्हारी में बीती रात हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों के चेहरे पर चिंताओं की लकीरें खींच दी हैं।  सोमवार को हुए भारी ओलावृष्टि की वजह से कुम्हारी के आसपास के गांवों के खेतों में लगी फसल लगभग नष्ट हो गई है। खेतों में लगी गेंहूँ , चना और तिवरा की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। ग्राम परसदा के किसान कोमल साहू ने बताया कि सबसे ज्यादा नुकसान चने के पेड़ों को हुआ है। जिंसमे कीड़े लगने की संभावना सबसे ज्यादा है। ठीक उसी तरह गेंहूँ की फसल में बालियां भी टूटकर गिर गई है जो कि एक बड़ा नुकसान है।  मनीषा फार्म्स के लक्ष्मीकांत चौहान ने बताया कि इस पानी और ओलावृष्टि से  सब्जियों में टमाटर की फसल तो पूरी तरह खत्म हो गई  साथ ही धनिया , प्याज़ और पत्तागोभी को भी बहुत नुकसान हुआ है। अगर यही स्थिति रही तो खेती सहित सब्जिय़ां पूरी तरह नष्ट हो जाएंगी जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा।

भारी बारिश, ओले गिरने की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक सबसे अधिक बारिश सराईपाली में 76.4 मिमी हुई। बसना में 60.0 मिमी, पिथौरा-52.0 मिमी, माना-48.8 मिमी, आरंग-46.8 मिमी, रायपुर-43.6 मिमी, बागबाहरा-42.0 मिमी, रायपुर सिटी-38.5 मिमी, धमधा-36.8 मिमी व लाभांडी में 35.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा संभाग के  और कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश रिकॉर्ड की गई। बस्तर संभाग में आज बदली-बारिश के साथ ओले गिरने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा का कहना है कि दक्षिण बिहार के ऊपर एक चक्रवाती घेरा 1.5 किलोमीटर पर स्थित है तथा यहां से एक द्रोणिका छत्तीसगढ़ होते हुए तेलंगाना तक गई है। इसके प्रभाव से पूरे छत्तीसगढ़ में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। प्रदेश के उत्तर-पूर्व के जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना आज भी बनी हुई है। बाकी जिलों में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है।

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