संपादकीय

दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 30 अक्टूबर : सार्वजनिक परिवहन पर होने वाला घाटा दरअसल फायदा
दैनिक 'छत्तीसगढ़' का संपादकीय, 30 अक्टूबर : सार्वजनिक परिवहन पर होने वाला घाटा दरअसल फायदा
Date : 30-Oct-2019

दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने वहां की बसों में लड़कियों और महिलाओं का सफर मुफ्त कर दिया है। कुछ महीने पहले उसने दिल्ली मेट्रो को महिलाओं के लिए मुफ्त कर दिया था। इस बार की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार के सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि बस और मेट्रो मुसाफिरों में से महिलाएं 30 फीसदी से कम हैं। उन्होंने इसका यह मतलब बताया कि समाज में महिलाओं के काम करने के मौके कम हैं इसलिए उनकी आवाजाही भी कम होती है। इसका दूसरा मतलब यह भी निकलता है कि उनके लिए आवाजाही मुश्किल या महंगी है, इसलिए भी वे काम कम कर पाती हैं, पढ़-लिख कम पाती हैं। 

आंकड़े अपने-आपमें कई बार एक गलतफहमी भी पैदा करते हैं, इस मामले में भी हो सकता है कि महिलाओं का अनुपात मेट्रो-बसों में कम होने के पीछे एक वजह यह भी है कि वे देर रात अकेले सफर नहीं करतीं, और उस वक्त के मुसाफिरों ने तकरीबन सारे ही लोग पुरूष ही होते हैं। लेकिन ऐसी जो भी वजह हो, यह बात सही है कि महिलाओं के काम करने के मौके कम हैं, महिलाओं को सफर करना अधिक मुश्किल या महंगा पड़ता है, और मुफ्त स्थानीय सफर उनके आगे बढऩे में बहुत बड़ा हाथ बंटा सकता है। केजरीवाल ने यह भी कहा है कि मुफ्त सफर को बुजुर्गों और छात्र-छात्राओं तक भी बढ़ाया जा सकता है। 

केजरीवाल की इस घोषणा के तुरंत बाद दीवाली पर प्रदूषण के जो आंकड़े आए हैं, वे भयानक हैं। दिल्ली एक बार फिर भयानक प्रदूषण की शिकार है, और सबसे संपन्न तबके के लिए विदेशों में बने हुए घरेलू उपकरणों के इश्तहार दिल्ली के अखबारों में जो कि घर की हवा को छोटे बच्चों तक के लिए महफूज बना देने का दावा कर रहे हैं। लेकिन गिने-चुने लोगों को छोड़कर बाकी तमाम लोग तो सड़क-चौराहों और फुटपाथों के जानलेवा प्रदूषण में जीने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में पूरी दुनिया में हर समझदार महानगर का यह तजुर्बा है कि सार्वजनिक परिवहन अधिक आसानी से हासिल हो, अधिक सस्ता या मुफ्त हो, तो निजी गाडिय़ों का इस्तेमाल घटता है, और प्रदूषण भी। जो लोग महानगरों में स्थानीय यातायात को रियायती या मुफ्त करने के खिलाफ रहते हैं, वे इस बात को अनदेखा करते हैं कि निजी गाडिय़ों से, या टैक्सी-ऑटो के अधिक इस्तेमाल से जो प्रदूषण बढ़ता है, वह मुफ्त बस-मेट्रो से अधिक महंगा पड़ता है। 

दिल्ली सरकार की यह सोच और कार्रवाई कई मायनों में मायने रखती है। पहली बात तो यह कि चुनाव करीब आने की वजह से यह घोषणा हो रही हो ऐसा भी नहीं है क्योंकि इस सरकार ने आते ही बिजली-पानी को बहुत सस्ता किया था, स्कूलों को बेहतर बनाया था, और सस्ता या मुफ्त इलाज सबको मुहैया कराया था। इस सरकार के इस पहले और मौजूदा कार्यकाल में महिलाओं के लिए मुफ्त मेट्रो और मुफ्त बस उसी सिलसिले की एक कड़ी होने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम भी है। भारत एक ऐसा संघीय देश है जिसमें ढाई दर्जन के करीब प्रदेश हैं, और ये सब एक-दूसरे के तजुर्बों से सीख सकते हैं। ऐसा पहले भी होते रहा है कि किसी एक प्रदेश की कामयाबी से दूसरे प्रदेशों में उससे सीखा और अपना काम भी बेहतर किया। पूरे देश को बेहतर सार्वजनिक परिवहन की जरूरत है, और इसके साथ-साथ अगर वे प्रदेश महिलाओं को, बुजुर्गों और छात्र-छात्राओं को, बीमारों को मुफ्त स्थानीय सफर दे सकते हैं, तो उन्हें जरूर देना चाहिए। यह महज वोटों की खातिर दिया गया मुफ्त तोहफा नहीं है, यह पूरी की पूरी धरती को बचाने के लिए प्रदूषण घटाने का एक ऐसा तरीका है जिससे कि हर प्रदेश बाकी दुनिया को बचाने में भी मदद कर सकते हैं। 

भारत सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बात को जोर-शोर से उठाना चाहिए कि प्रदूषण को घटाने की किसी देश-प्रदेश की ऐसी कोशिशों के लिए लगने वाली लागत में बाकी संपन्न दुनिया को भी हाथ बंटाना चाहिए। कार्बन-उत्सर्जन के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कहीं-कहीं ऐसा तालमेल है भी कि इसे घटाने वाले देशों को बाकी देशों से किस तरह की मदद मिले, और औसत से अधिक कार्बन-उत्सर्जन करने वाले अमरीका जैसे देश किस तरह उसका बोझ उठाएं। इस बात को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक जोरों से उठाना चाहिए ताकि दुनिया भर के मंझले शहरों को भी सार्वजनिक यातायात में विकसित देशों से मदद मिल सके। केजरीवाल सरकार का महिलाओं के लिए मेट्रो-बस मुफ्त करने का फैसला ऐतिहासिक है, और हमारा मानना है कि आने वाले बरसों में सरकारों को यह मानना पड़ेगा कि सार्वजनिक परिवहन पर होने वाला घाटा दरअसल फायदा है। आखिर में यह बात भी लिखने लायक है कि दिल्ली की बसों के लिए केजरीवाल सरकार ने महिलाओं की हिफाजत के लिए वर्दीधारी मार्शल तैनात किए हैं, इससे भी इस कुख्यात शहर में महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा। 
-सुनील कुमार

Related Post

Comments