विशेष रिपोर्ट

कोरिया में ऐतिहासिक-प्राकृतिक दर्शनीय स्थलों की भरमार, विश्व पर्यटन दिवस आज
कोरिया में ऐतिहासिक-प्राकृतिक दर्शनीय स्थलों की भरमार, विश्व पर्यटन दिवस आज
Date : 27-Sep-2019

कोरिया में ऐतिहासिक-प्राकृतिक दर्शनीय स्थलों की भरमार, विश्व पर्यटन दिवस आज

चन्द्रकांत पारगीर
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बैकुंठपुर, 27  सितंबर।
कोरिया जिला प्रकृति की गोद में बसा छग प्रदेश के उत्तरी पश्चिमी क्षेत्र में स्थित एक छोटा व आदिवासी बाहुल्य जिला है। यहां वनों की सघनाता ज्यादा है इसके साथ ही यहां ऐतिहासिक महत्व के स्थलों की भरमार होने के साथ ही कई प्राकृतिक दर्शनीय स्थल है। जिसके चलते कोरिया जिले में पर्यटन की अपार संभावना है लेकिन इस दिशा में समुचित प्रयास नहीं किये गये। यदि उचित प्रयास किया जाता है तो कोरिया जिले को प्रदेश के पर्यटन नक्शे में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकेगा। 

जिला गठन होने के पश्चात दो दशक से ज्यादा हो गया। वहीं छग राज्य स्थापना हुए दो दशक होने को है लेकिन कोरिया जिले के प्राकृतिक व दर्शनीय स्थलों की पहचान आज जिले में ही सिमटी है तथा कई ऐतिहासिक महत्व के धरोहर उपेक्षित पड़े हुए हैं। जिनमें खडगवां में कोटेश्वर महादेव, जनकपुर में बिखरे पड़े सतीगेट, सोनहत के बदरा स्थित रॉक पेंटिंग, पटना स्थित देवगढ़धाम, रामगढ स्थित गांगीरानी मंदिर, सोनहत का जोगीमठ सहित कई स्थान शामिल हंै। 

जानकारी के अनुसार कोरिया जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में से एक अमृत धारा जल प्रपात है। इसके अलावा भी कई अन्य प्रमुख दर्शनीय व प्राकृतिक स्थल है जिसे पहचान दिलाने की जरूरत है, प्रशासनिक उपेक्षा के कारण अमृतधारा जल प्रपात के अलावा जिले के अन्य दर्शनीय व ऐतिहासिक महत्व के दर्शनीय स्थलों की लगातार उपेक्षा की जा रही है। यही कारण है कि कई महत्वपूर्ण स्थल अपनी पहचान जिले में ही नहीं बना सके। पर्यटन विकास के नाम पर सिर्फ अमृतधारा जल प्रपात स्थल का ही विकास कराया गया। जिसकी पहचान आज जिले के अलावा बाहर भी है। यहां पर हसदो नदी का पानी करीब 100 फीट से ज्यादा उचाई से गिरता है जो मनमोहक नजारा प्रस्तुत करता है। यहां पर सबसे ज्यादा सैलानी पिकनिक मनाने के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा गौर घाट जल प्रपात भी जिले के प्रमुख जल प्रपातों में से एक है जहां का नजारा भी सुन्दर है लेकिन यहां पर प्रशासन द्वारा किसी तरह की सुरक्षात्मक व्यवस्था नहीं बनाई है जिसके चलते यहां पर कई घटनाएं हो चुकी हैं तथा पहुंच मार्ग भी सही नहीं है। फिर भी यहां सैलानियों की भीड़ प्रतिवर्ष जुटती है। यदि इस जल प्रपात स्थल तक पहुंच मार्ग के साथ अन्य आवश्यक सुविधाएं तथा सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं तो यह भी एक रमणीय स्थल है। जहां पर पहुंच कर प्रकृति के सुन्दर नजारे के साथ प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है। 

कई जलप्रपातों को पहचान की जरूरत
कोरिया जिले में अमृतधारा जल प्रपात गौर घाट जल प्रपात के अलावा भी कई सुन्दर जल प्रपात स्थित है जिनके बारे में पूरे जिले के लोगों को ही जानकारी नहीं है केवल क्षेत्रीय स्तर तक ही इनकी पहचान बनी हुई है। ऐसे जल प्रपात को पहचान दिलाने की दिशा में कार्य करने की जरूरत है। 

जानकारी के अनुसार भरतपुर जनपद क्षेत्र में एक प्रमुख जल प्रपात रमदहा जल प्रपात है जो अपनी सुन्दरता के लिए क्षेत्र में प्रसिद्ध है लेकिन यहां पर आवश्यक सुविधाओं का अभाव बना हुआ है साथ ही प्रचार प्रसार के अभाव मेें इस जल प्रपात के बारे में जिले के कई क्षेत्रों के लोगों केा जानकारी ही नहीं है। रमदहा जल प्रपात जिले का एक सुन्दर जल प्रपात है जिसका नजारा काफी मनमोहक है। इसके अलावा सोनहत जनपद पंचायत क्षेत्र में बनिया वाटर फॉल प्रकृति के गोद में बसा हुआ है। घने वनों के बीच में कल कल बहती नदियां उंचाई से गिरते हुए सुन्दर जल प्रपात का नजारा बनाता है। यह भी गुमनामी के दौर से गुजर रहा है। इसके इलावा भी भरतपुर व सोनहत जनपद क्षेत्र में कई गुमनाम जलप्रपात है जिन्हे पहचान दिलाने की जरूरत है।

मुख्यालय के निकट सीता गुफा गुमनाम
कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर के निकट रामायण काल के समय का एक प्राचीन गुफा स्थित है जिसे सीता गुफा के नाम से जाना जाता है स्थानीय लेाग इस स्थल को समुंदई के नाम से जाते है। जानकारी के अनुसार समुंदई जिला मुख्यालय बैकुण्ठपुर से कुछ ही किमी की दूरी पर सोनहत मार्ग पर स्थित शिवघाट की ऊंची पहाड़ी में घने जंगलों के बीच में स्थित है। जिला मुख्यालय के निकट होने के बाद भी ऐतिहासिक महत्व का यह स्थल अपेक्षा के कारण विकसित नहीं हो सका है जिसके चलते यहां क्षेत्र के लोगों के अलावा जिले के दूर दराज के पर्यटक नहीं पहुंचते। यहां तक पहुंचने के लिए सडक़ भी नहीं बन पाया है। 

जानकारी के अनुसार बैकुंठपुर से सोनहत मार्ग पर शिवघाट के उपरी गांव पहाड़पारा से समुंदई क्षेत्र पहुंचा जा सकता है। लेकिन सोनहत जनपद के ग्राम पहाडपारा के बाद सुव्यवस्थित मार्ग नहीं होने के कारण जंगलों के बीच पैदल ही जाना पड़ता है। घने जंगलों के बीच पहाड़ी की चोटी पर स्थित एक विशाल चट्टान को काटकर गुफा बना गया है जहां भगवान शिव की आराधना की जाती है। विभिन्न खास अवसरों पर गुफा के अंदर जवारा बोने के साथ साथ भजन कीर्तन भी होता है। 

मान्यता है कि भगवान राम सीता अपने वनवास के दौरान समुंदई क्षेत्र में कुछ दिनों तक इसी गुफा में रूके थे। चट्टानों को काटकर बनाई गयी गुफा में एक साथ करीब 15-20 लोगों के बैठने की जगह है। घने वनों के बीच गुफा के निकट की वर्तमान में सुन्दर जल प्रपात भी दिखाई देता है जो करीब  150 फीट से अधिक ऊंचाई से गिरता है। इसके नीचे एक और जल प्रपात है। क्षेत्र के कई लोग यहां पिकनिक मनाने आते हैं तथा विभिन्न त्यौहार के दौरान पूजा अर्चना करने आस पास के दर्जनों गांव के ग्रामीण पैदल पहुंचते हैं। 

हरचौका स्थित पुरातात्विक महत्व का स्थल 
 कोरिया जिले के भरतपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत हरचौका में मवई नदी जो कि छग व मप्र की सीमा को विभाजित करती है। नदी के तट पर ही चट्टानों को तरासकर गुफा बनाई गयी है जिसमें प्रत्येक दिशा में शिवलिंग है। बताया जाता है कि भगवान राम वन गमन के दौरान यहॉ पर कुछ दिनों के लिए रूके थे और शिवलिंग बनाकर पूजा अर्चना करते थे। इसके अलावा मान्यता यह भी है महाभारत काल में पांडव भाई भी अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र में आये थे। एक पुजारी द्वारा गुफा के पास ही मवई नदी के तट पर स्थित चट्टान से रेत को साफ कर विशालकाय पैर का पंजा शिला में दिखाते हुए बताते है कि यह भीम का पंजा है। ऐसे ऐतिहासिक महत्व के स्थल को भी संवारने की जरूरत है तथा पहचान दिलाने की दिशा में कार्य करने की जरूरत है।   

घाघरा मंदिर का अस्तित्व खतरे में 
कोरिया जिले के भरतपुर जनपद क्षेत्र अंतर्गत एक ऐतिहासिक महत्व का मंदिर ग्राम घाघरा में स्थित है जिसे घाघरा मंदिर के नाम से पहचाना जाता है जो बेहद प्राचीन मंदिर है लेकिन देख रेख के अभाव में मंदिर का अस्तित्व खतरे में पड गया है। जानकारी के अनुसार 15 वी शताब्दी में ग्राम घाघरा स्थित प्राचीन घाघरा मंदिर की स्थापना की गयी थी। जिसमें शिवलिंग स्थापित है। वर्तमान में प्राचीन घाघरा मंदिर जीर्ण शीर्ण हालत में पहुॅच गया है। यदि अब भी मंदिर के अस्तित्व केा बचाने की दिशा में ध्यान नही दिया गया तो जिले का सबसे पुराने मंदिरों में से एक घाघरा मंदिर का अस्तित्व मिट जोयगा। 

कई दर्शनीय व ऐतिहासिक महत्व के स्थल 
कोरिया जिले में  ऐतिासिक महत्व के स्थलों के साथ दर्शनीय स्थलों की कमी नही है। चांग देवी का मंदिर, नीलकंठ धाम, बौद्ध स्थल के साथ कई दर्शनीय स्थल है जिनके बारे में सिर्फ क्षेत्र के लेागों केा ही इसकी जानकारी है जिले के अन्य क्षेत्र के लोगो को जानकारी नही है। वही कोरिया जिले में क्षेत्रफल की दृष्टी से प्रदेश का सबसे बडा राष्टीय उद्यान गुरू घासीदास राष्टीय उद्यान सोनहत जनपद क्षेत्र में स्थित है। जो घने जंगलों से घिरा हुआ है यहॉ दर्जनों प्रकार के  वन जीव जंतु निवास करते है तथा कई बहुमूल्य पेड पौधों के अलावा जडी बुटी पाये जाते है।

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