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बिलासपुर, सरकारी बदली पर आबकारी में तबादले का लम्बा खेल, करोड़ों के आरोप से घिरे बाबू की फिर वहीं पोस्टिंग
बिलासपुर, सरकारी बदली पर आबकारी में तबादले का लम्बा खेल, करोड़ों के आरोप से घिरे बाबू की फिर वहीं पोस्टिंग
Date : 13-Jun-2019

सरकारी बदली पर आबकारी में तबादले का लम्बा खेल, करोड़ों के आरोप से घिरे बाबू की फिर वहीं पोस्टिंग

एसीबी ने पिछले साल पकड़ी थी 5 करोड़ की अवैध कमाई

प्लेसमेंट कर्मचारियों ने बताया था अपने साथियों की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार 

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 13 जून।
आबकारी विभाग के जिस बाबू के खिलाफ़ करोड़ों रुपये की अवैध कमाई के आरोप में एंटी करप्शन ब्यूरो ने छापामार कार्रवाई की थी उसे फिर बिलासपुर में पदस्थ कर दिया गया है। कुछ दिन पहले ही आबकारी उपायुक्त ने आयुक्त को रायपुर पत्र लिखकर उसे यहां पदस्थ नहीं करने को लेकर आगाह भी किया था। इसके बावजूद आरोपों से घिरे बाबू को यहां स्थानांतरित कर दिया गया है। 

आबकारी विभाग में मनचाही जगह पर पोस्टिंग का लम्बा खेल चल रहा है। इस खेल में लिप्त लोगों पर सत्ता बदलने का भी असर नहीं हुआ है। 12 जून को आबकारी विभाग के अवर सचिव मरियानुस तिग्गा ने लिपिक दिनेश कुमार दुबे को बिलासपुर स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया है। पूर्ववर्ती सरकार में आबकारी विभाग के मंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले बिलासपुर के सहायक आयुक्त आबकारी कार्यालय के सहायक ग्रेड- दो बाबू दिनेश कुमार दुबे की अवैध कमाई की लम्बी चौड़ी शिकायत प्रधानमंत्री से लेकर विभागीय मंत्री व अधिकारियों को तथा एंटी करप्शन ब्यूरो को की गई थी। शिकायत में उसके द्वारा की जा रही अवैध वसूली के तरीकों का खुलासा किया गया था बल्कि यह भी बताया गया था कि उनके दबाव के चलते कई प्लेसमेंट कर्मचारियों को आत्महत्या के लिए भी मजबूर होना पड़ रहा है। 

एंटी करप्शन ब्यूरो के तत्कालीन उप पुलिस अधीक्षक अजितेश सिंह ने शिकायतों और उसके साथ मिले दस्तावेजों की जांच की। सही पाये जाने पर बीते साल 12 अप्रैल को उसके ठिकानों पर छापा मारा था। यह पाया गया कि उसने 9 साल की नौकरी में वेतन के रूप में केवल 20 लाख रुपये आहरित किये जबकि उसकी मौजूदा सम्पत्ति 5 करोड़ रुपये से अधिक है। छापेमारी के बाद एसीबी ने उसके खिलाफ़ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा, 13 (1 ई) और 13 (2) के तहत अपराध कायम किया। एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में बाबू के पास से कुदुदंड में 1200 वर्ग फ़ीट का एक दो मंजिला मकान, एक वर्ग फ़ीट का एक मकान, गंगा नगर में एक आलीशान बंगला, भारती नगर में दो हजार वर्गफ़ीट का मकान, पत्नी के नाम पर चकरभाठा में दो एकड़ जमीन, एसबीआई में चार संयुक्त खाते मिले जिनमें दस लाख रुपए जमा हैं। बाबू दुबे की बेटी यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई के दस्तावेज भी हाथ में आये। 

मस्तूरी के पास ग्राम पाराघाट निवासी बाबू दिनेश कुमार दुबे ने  2009 से आबकारी विभाग में लिपिक पद में नौकरी शुरू की थी।  इस हिसाब से 9 साल में वेतन 20 लाख रुपए होता है लेकिन एसीबी ने पाया कि उसके पास लगभग 5 करोड़ की संपत्ति है।

शराब दुकान के कर्मचारियों ने दुबे के खिलाफ़ शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाये थे। उन्होंने दुबे को पांच करोड़ नहीं बल्कि 11 करोड़ का आसामी बताया था। सन् 2017 में उसके बैंक खाते का विवरण देते हुए शिकायत हुई। यह बताया गया कि तीन महीने में उसने शासकीय दुकानों से दो करोड़ रुपये से अधिक वसूली की। उसने अपने बेटे-बेटी के नाम पर रिकरिंग खाता खोल रखा है, जिसमें 10 हजार रुपये हर माह जमा होते हैं। नोटबंदी के दौरान कर्मचारियों और भृत्यों के खाते में उसने पांच लाख रुपये से अधिक जमा कराये। फर्जी परमिट देकर लाखों रुपये लेना और शासन को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने की शिकायत  भी उसके खिलाफ है। 

इसके अलावा ट्रांसपोर्टरों से लाखों रुपये की रिश्वत तथा कमीशन का आरोप भी कर्मचारियों ने दुबे पर लगाया। शिकायत यह भी थी कि एक भाजपा कार्यकर्ता के साथ सरकारी वाहनों में बैठकर दुबे यह वसूली करता है। 

एक अन्य शिकायत में कर्मचारियों ने दुबे के साथ-साथ तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी एल.एल. ध्रुव के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की मांग की थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि उन पर दुकान बंद होने और खुलने से पहले अधिक दाम पर शराब बेचने के लिए दबाव डाला जाता है। ऐसा नहीं करने पर नौकरी से निकालने और जेल भेजने की धमकी दी जाती है। प्लेसमेंट कर्मचारियों ने कहा था कि इनके दबाव के चलते कई कर्मचारी आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने इन दोनों अधिकारियों, कर्मचारियों को हटाने की मांग की थी। 

दुबे को फिर बिलासपुर में पदस्थ किये जाने की जानकारी मिलने पर सहायक आयुक्त कार्यालय के सभी अधिकारी कर्मचारियों ने सहायक आयुक्त को ज्ञापन देकर दुबे को यहां पदस्थ नहीं करने की मांग रखी। इस पर बीते 24 मई को सहायक आयुक्त ने आयुक्त को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई के लिए अनुशंसा सहित लिखा। कर्मचारियों, प्लेसमेंट कर्मचारियों और आबकारी विभाग के बिलासपुर में पदस्थ प्रभारी अधिकारी के विरोध के बावजूद भ्रष्टाचार, अवैध वसूली की गंभीर शिकायतों से घिरे लिपिक दुबे को यहां पदस्थ कर दिया गया है, जिससे मालूम होता है कि आबकारी विभाग में तबादले का लम्बा खेल शुरू हो चुका है। 

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