छत्तीसगढ़

  • कोरबा के यात्री की 40 मिनट तड़पने के बाद मौत

    राजेश अग्रवाल
    बिलासपुर(छत्तीसगढ़)। कहने को तो बिलासपुर रेलवे जोन के बिलासपुर तथा राजधानी रायपुर के स्टेशन को प्रथम श्रेणी का दर्जा हासिल है लेकिन इन दोनों स्थानों पर आपातकालीन चिकित्सा की बुरी हालत है। मौके पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाने के कारण कल बिलासपुर में कोरबा निवासी एक यात्री की 40 मिनट तक तड़पने के बाद मौत हो गई। एक अन्य यात्री को बिलासपुर स्टेशन से बीच रास्ते में उतरकर सिम्स पहुंचना पड़ा। रायपुर में तीन माह के भीतर एक कांग्रेस नेता सहित दो लोगों की मौत स्टेशन पर इलाज नहीं मिलने के कारण हो चुकी है।  
    ताजा घटना कल शाम की है। कोरबा निवासी शिव मोदी किसी काम से बिलासपुर आए थे। शाम को वे प्लेटफॉर्म नंबर तीन की सीढिय़ां चढ़ते हुए गिरकर बेहोश हो गए। उन्हें हार्ट अटैक आने की आशंका पर लोगों ने तुरंत उन्हें कृत्रिम सांस देने की कोशिश की और जूते मोजे खोलकर मालिश किया। इस बीच कुछ यात्रियों ने रेलवे हेल्पलाइन 182 में फोन किया। लेकिन वहां से कोई रिस्पांस नहीं मिला। इसके साथ ही संजीवनी एंबुलेंस 108 को भी फोन किया, लेकिन न तो वहां तत्काल डॉक्टर पहुंचे और न ही एम्बुलेंस की व्यवस्था हो सकी। 
    इस बीच जीआरपी और आरपीएफ को सूचना दी गई। आरपीएफ सिपाही वहां स्ट्रेचर लेकर आ गए ताकि उन्हें अस्पताल पहुंचाया जा सके, लेकिन बाहर एंबुलेंस ही नहीं थी। इस बीच मोदी के फोन नंबर से उनके एक परिचित बिलासपुर के सीताराम अग्रवाल को फोन लगाया गया। वे तुरंत स्टेशन पहुंचे। इस बीच संजीवनी एंबुलेंस आ गई थी, जिसमें मोदी को अपोलो पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। 
    जीआरपी के टीआई डीएस राजपूत ने इस बात की पुष्टि की है कि प्लेटफॉर्म में डॉक्टर नहीं होने और एबुंलेंस देर से पहुंची। यदि तत्काल इलाज मिलता तो संभवत: पीडि़त की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने बताया कि ऐसे कई मौके आए हैं जब हमें रेलवे के डॉक्टरों और एम्बुलेंस की तत्काल जरूरत पड़ती है, ताकि बीमार या दुर्घटनाग्रस्त यात्रियों को तत्काल इलाज मिल सके, पर यह सुविधा नहीं मिल पाती। 
    इधर रेलवे जोन के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी पीसी त्रिपाठी ने घटना से अनभिज्ञता जाहिर की। त्रिपाठी ने कहा कि सूचना मिलने पर जरूरतमंद यात्रियों को तत्काल चिकित्सा मुहैया कराई जाती है। हाल ही में एक नवजात और प्रसूता को भी रेलवे के डॉक्टरों ने इलाज मुहैया कराया था। मोदी के मामले में 182 से मदद क्यों नहीं मिली, यह वे मंडल के अधिकारियों से जानकारी लेंगे। 
    मालूम हो कि कुछ दिन पहले रायपुर स्टेशन पर कांग्रेस नेता चंद्रशेखर यादव की इलाज नहीं मिलने के कारण मौत हो गई थी। एक अन्य यात्री की भी इसके कुछ पहले मौत हो गई थी। बिलासपुर में कल ही राउरकेला जा रहे एक अन्य यात्री की तबियत खराब हो गई, उन्हें ट्रेन से उतारकर सिम्स पहुंचाया गया। 
    रेलवे जोनल मुख्यालय का प्लेटफॉर्म होने के कारण बिलासपुर में और राजधानी होने के कारण रायपुर में प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र खोलने की मांग की जाती है। रेलवे जोनल और मंडल सलाहकार समिति के सदस्यों ने कई बार यह मांग रेल प्रबंधन के सामने उठाई है, पर ध्यान नहीं दिया जाता। 
    मंडल सलाहकार समिति के सदस्य अभय नारायण राय का कहना है कि रेल मंत्री का गुणगान करते अधिकारी थकते नहीं कि वे रेलवे 
    को आधुनिक बना रहे हैं, लेकिन उन्हें यात्रियों की जान की परवाह नहीं है। बिलासपुर, रायपुर जैसे स्थानों पर यात्रियों के उपचार की सुविधाएं नहीं होना शर्मनाक है। रायपुर प्लेटफॉर्म पर प्राथमिक उपचार केन्द्र तथा बिलासपुर में एक सर्वसुविधायुक्त को रेलवे को तत्काल मंजूरी देनी चाहिए। 

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