छत्तीसगढ़ » बेमेतरा

  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बेमेतरा, 22 सितंबर। दुर्ग-बेमेतरा मुख्य मार्ग का निर्माण एक तो बेहद धीमी गति से हो रहा है वहीं करोड़ों की लागत से बन रहे इस मुख्यमार्ग में देवरी से गब्दी  देवकर के बीच  हार्ड मुरुम की जगह मिट्टी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे इस सड़क की गुणवत्ता पर उंगलियां उठ रही हैं।
    ज्ञात हो कि यह मुख्य मार्ग दुर्ग बेमेतरा तक फोरलेन बनना है, जिसकी लागत करोड़ों-अरबों में है, जिसकी गुणवत्ता को देखना संबंधित अधिकारियों की ज्यादा जवाबदारी बनती है। लेकिन गुणवत्ताहीन सड़क की कहानी यहीं मुरूम की जगह मिट्टी तक खत्म नहीं होती है। इसकी बोल्डर मुरूम की थिंकनेस भी जांच का विषय है क्योंकि इसकी गहराई भी जिसमें बोल्डर गिट्टी डलता है, कम है।
    अभी जहां मुरूम की जगह मिट्टी डल रहा है, वह मुख्य मार्ग के धमधा देवकर शहर के बीच का स्थान है, जहां लोगों की नजर कम रहती है। वो तो दो दिनों की रूक रूककर हुई बारिश के कारण मिट्टी की परतें दिख गई। जिस पर चलते कई वाहन बुरी तरह फंसने लगे तथा दोपहिया वाहन सवार स्लीप होकर गिरने लगे, तब  मामला सामने आया।
     इसकी निर्माण की गति भी बेहद धीमी है, जिसके चलते आवागमन करने वाले वाहनों, दोपहिया वाहन चालकों व राहगीरों को खासे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

     

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  • वैज्ञानिकों ने किया फसल निरीक्षण 
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    थानखम्हरिया, 11 सितंबर। धान की फसल चौपट होने के बाद किसान इस उम्मीद में थे कि सोयाबीन की फसल से वे अपने नुकसान की भरपाई कर लेंगे, जैसे-तैसे उनका जीवनयापन हो जाएगा, परंतु पिछले कुछ दिनों से सोयाबीन की फसल में लग रही बीमारियों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। धान के बाद अब यह फसल भी खराब होने से किसान के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं।
    क्षेत्र की फसल का मुआयना करने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वैज्ञानिकों डॉ राजेन्द्र लाकपाले, डॉ एस बी गुप्ता की चार सदस्यीय टीम के साथ उपसंचालक कृषि, अनुविभागीय अधिकारी कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास विस्तार अधिकारी ने ग्रामों का दौरा कर फसल निरीक्षण किया तथा नमूना लिया। 
    सोयाबीन में लग रही बीमारी से एक ही रात में फसल नष्ट हो रही है। विल्ट और चारकोल राट बीमारी से ग्रसित फसल एक रात में ही चौपट हो रही है गडर बीटिल ( तना मक्खी ) फसल को चूस रहा है। शाम को लहलहाते पौधे की खुशी लिये किसान सुबह जब खेत आता है तो देखता है कि रात भर में ही किसी बीमारी ने उसकी पूरी खुशियाँ छीन ली है। 
    पिछले लगभग पंद्रह दिनों से यह सिलसिला चल रहा है। ग्राम गातापार, कोपेडबरी के किसानों ने बताया कि उनके खेतों में सूखे के कारण वानस्पतिक बढ़वार हो गया है जिससे पौधों में फल कम लग रहा है। पौधों की बाढ़ डेढ़ से दो फुट होने की बजाय तीन फुट तक हो गयी है। चालीस-पचास फल्लियों की जगह केवल तीन - चार फल्लियां ही लगी हैं। 
    टिपनी, बनरांका, गोपालपुर के किसानों ने बताया कि उनके खेतों में मोजेक नामक बीमारी का प्रकोप है जिसके प्रभाव से पहले पत्तियों की नसों में पीलापन आता है बाद में यह पत्तियों में फैल जाता है जिससे पत्तियाँ ऊपर की तरफ सिकुड़ कर खराब हो जाती हैं।
     ग्राम नवागांवकला, जेवरा, मटिया, खाती के किसानों ने बताया कि हमारी सोयाबीन फसल चारकोल राट बीमारी से ग्रसित है जिसमें तने के अंदरूनी भाग में काले रंग की धारियॉ बन जाती हैं और तना सूख जाता है। 
    ग्राम दर्री, पेण्डरीकला, श्यामपुर कांपा, खैरझिटीकला के किसानों ने भी बताया कि वे सोयाबीन में लगे विल्ट बीमारी से परेशान हैं जिसके कारण तने में गांठें बननी बंद हो गयी हैं और जड़ की ऊपरी छाल गल गयी है। 
     ग्राम हाड़ाहुली, ठेलका, बेलगांव, खपरी के किसानों ने बताया कि उनकी फसल में केंकर बीमारी से पत्तियों और तने में गहरे भूरे रंग का चकता दिखायी दे रहा है जिससे पौधे मर रहे हंै। पूरे तहसील में अमूनन इन बीमारियों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। अवर्षा के बाद रही सही कसर बिजली की अनापूर्ति ने कर दी है।
      सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तहसील में 6620 हेक्टेयर में सोयाबीन की फसल बोयी गयी है जिसमें लगभग 75 फीसदी फसल प्रभावित होने का अंदेशा है। सोयाबीन की किस्म जे एस 9305 अधिक प्रभावित है। जे एस 335 फलन में कमी तथा मोजेक से प्रभावित है। जे एस 9560 में 40 से 45 फासदी फसल का ही अनुमान है। 
    जानकारों ने बताया कि किसान केवल बीजोपचार तथा डीएपी खाद तक ही सीमित रह जाते हैं पोटाश खाद का उपयोग नहीं करते कल्चर का भी कम उपयोग करते हैं  जिससे पौधा कमजोर हो जाता है। फसल चक्र न अपनाने से मिट्टी में जैविक तत्व कम हो गये हैं जिसका दुष्परिणाम सामने है। भूमि का शोधन करने फसल चक्र अपनाना चाहिए तथा सोयाबीन के साथ ज्वार, मक्का, बाजरा की भी बुआई करनी चाहिये। 
    क्षेत्र की फसल का मुआयना करने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के वैज्ञानिकों डॉ राजेन्द्र लाकपाले, डॉ एस बी गुप्ता की चार सदस्यीय टीम के साथ उपसंचालक कृषि विनोद वर्मा, अनुविभागीय अधिकारी कृषि राजकुमार सोलंकी, वरिष्ठ कृषि विकास विस्तार अधिकारी ए डी दुबे ने अनेक ग्रामों का दौरा कर फसल निरीक्षण किया तथा नमूना लिया। बहरहाल किसान भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

     

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  • कहा, विरोध पर लोकलाज के भय से हत्या कर दी
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बेमेतरा, 11 सितंबर।  सोनपुर के डबरी में मिली महिला की लाश मामले मेंं पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया । आरोपी ने पूछताछ में आरोपी ने महिला को बलात्कार की नीयत से पकडऩे और विरोध करने पर लोकलाज के भय से उसकी हत्या कर देने की बात स्वीकारी है। 
    पुलिस  के अनुसार  उदय राम साकिन सोनपुरी ने चौकी चंदनू हाजिर आकर सूचना दिया कि उसकी भांजी बहू मृतिका मेघा बाई उम्र 23 वर्ष साकिन सोनपुरी जो तड़के शौच के लिए  गांव के गौठान की तरफ गई थी।  वापस घर नही आने पर मैं एवं मेरा भांजा कुंजलाल कुर्रे आप-पास पता तलाश कर रहे थे तभी गांव के लोगों के द्वारा सुना कि गांव के गौठान के पास वाले पानी से भरे डबरी में किसी महिला का शव पड़ा हुआ है एवं मुंह कपड़े से ढंका हुआ है, उक्त कपड़े के आधार पर प्रार्थी उदय राम (पति) कुंजलाल कुर्रे ने मृतिका की पहचान की।
    उक्त प्रकरण में पुलिस अधीक्षक बेमेतरा धर्मेन्द्र गर्ग के द्वारा प्रकरण को गंभीरता से लेते हुये अज्ञात आरोपी की पतासाजी हेतु चौकी प्रभारी चंदनू एवं क्राईम ब्रांच बेमेतरा को निर्देशित किया गया। विवेचना के दौरान गांव वालों से पता चला कि गांव सोनपुरी के राम प्रसाद सोनवानी उर्फ बंगाली  की गतिविधि संदिग्ध होने की सूचना पर क्राईम ब्रांच, चंदनू पुलिस स्टाफ द्वारा रामप्रसाद उर्फ बंगाली जो गांव के नाले में छिपा था, को पकड़ा गया। 
    आरोपी को कब्जे में लेकर कड़ाई से पूछताछ करने पर बताया कि  10 सितंबर तड़के  महिला   दिशा मैदान के लिए अकेले जा रही थी ।  बदनीयति से पकडऩे पर उसके द्वारा मना करने व चिल्लाने पर, लोक-लाज के डर से मृतिका को गौठान के पास वाले पानी से भरे डबरी में उसी के कपड़े से सिर को बांध कर कीचड़ में दबाकर हत्या कर दिया। आरोपी को गिरफ्तार कर अग्रिम कार्यवाही की जा रही है।  

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  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बेमेतरा, 4 सितंबर। नेशनल हाईवे 30 पर टू लेन सड़क के किनारे कंट्रक्शन कम्पनी दिलीप बिल्डकान द्वारा पौधारोपण किया जा रहा है, लेकिन पौधारोपण के पश्चात पौधों की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा घेरा नहीं बनाए जाने से सवाल खड़े हो रहे हैं। मानसून नजदीक आने के बावजूद कंट्रक्शन कम्पनी एनएच में पौधारोपण को लेकर गंभीर नहीं था। मामला कलेक्टर कातिर्केया गोयल के संज्ञान में आने के बाद उनके निर्देश पर कम्पनी प्रबंधन द्वारा अगस्त माह में महावृक्षारोपण अभियान के साथ एनएच में पौधारोपण शुरू किया गया। प्रबंधन से प्राप्त जानकारी के अनुसार सिमगा से कवर्धा तक करीब 71 किमोमीटर क्षेत्र में 24 हजार पौधे रोपे जाएंगे।
    एनएच निर्माण के दौरान सड़क किनारे स्थित हजारों पेड़ों की बलि चढ़ाई गई जहां मानसून नजदीक आने के साथ कंट्रक्शन कम्पनी को पौधा रोपण करना था लेकिन एनएच प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। वहीं एनएच के स्थानीय सब इंजीनियर श्री कंवर ने मामला उच्च अधिकारियों पर डालकर पल्ला झाड़ लिया। बताना होगा कि टूलेन सड़क निर्माण के लिए जिले की सीमा के अंतर्गत कुल 1490 पेड़ काटे गए इन पेड़ों की कटाई वन विभाग ने कर नीलामी की थी।
    24 गांव में 1490 पेेड़ों को काटा गया
    260 करोड की लागत सिमगा से चिल्फी तक टूलेन सड़क के निर्माण में ग्राम तिरैया से कवर्धा मार्ग पर जिले की सीमा के अंतिम गांव अगरी, ओडिया तक 24 गांव में 1490 पेड़ काटे गए। इसके अलावा कवर्धा क्षेत्र में एक हजार से अधिक पेड़ काटे गए हैं, जिसमें बेमेतरा कलेक्टर कार्यालय से 1402 पेड़ों को काटने की अनुमति 9 सितम्बर 2014  88 पेड़ों की 13 जुलाई 2016 को दी गई. प्रभावति ग्रामों में तिवरैया, रांका, कठिया, पथर्रा, जेवरा, चोरभट्टी, बसनी, मटका, गुनरबोड़, कोबिया, बैजी, कारेसरा, लोलेसरा, गर्रा, सैगोना कन्हेरा, बेराखार, बेतर, ओडिय़ा, अगरी आदि गांव शामिल है।
    करना है, दस गुना पौधारोपण
    एनएच 30 के निर्माण के लिए पेड़ों को काटने की अनुमति कलेक्टर कार्यालय से प्रदान की गई। एनएच कंट्रक्शन कंपनी द्वारा निर्माण के लिए काटे गए पेड़ों से दस गुना पौधारोण करने की शर्त पर कलेक्टर कार्यालय से अनुमति प्रदान की गई। जहां भू राजस् सहिता की धारा 240, 241 के तहत पेड़ों को काटने की अनुमति प्रदान की गई। इसके अंतर्गत दस गुना पौधारोपण के साथ, संरक्षण के लिए सुरक्षा घेरा भी बनाना है अथा जिला प्रशासन से चिन्हांकित क्षेत्र को ग्रीन कारिडोर के रूप में विकसित करना भी शामिल है।
    पौधों की सुरक्षा व्यवस्था नहीं
    सिमगा से चिल्फी तक कंट्र्रक्शन द्वारा 24 हजार पौधे रोपने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 20 हजार पौधे रोपने का दावा किया जा रहा है लेकिन पौधों की सुरक्षा को लेकर लगाए जा रहे बास के ट्रीगार्ड नाकाफी साबित हो रहे है। जहां सुरक्षा घेरा नहीं होने की वजह से मवेशी व शरारती तत्व बास के ट्रीगार्ड को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के बगैर पौधारोपण औचित्यहीन साबित हो रहा है। कवर्धा मार्ग पर जिले के अंतिम गांव ओडिया तक निरीक्षण करने पर सैकड़ों ट्रीगार्ड गिरे हुए मिले। साथ ही पौधारोपण कर रहे लोगों द्वारा पौधा रोपने में कोताही बरती जा रही थी जहां पर्याप्त गहरा गड्ढा किए बगैर पौधे रोपे जा रहे हैं।

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  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बेमेतरा, 28 अगस्त। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आव्हान पर आज कांग्रेसियों ने जन आक्रोश रैली निकाली। तय समय से लगभग दो घंटे देर से शुरू इस कार्यक्रम में कांग्रेस ने प्रदेश में किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या, गौशाला में कमीशन के चलते गौ हत्या, प्रदेश में सूखा एवं बेरला कांड में निर्दोष कांग्रेसियों पर झूठे प्रकरण दर्ज करने का आरोप लगाते हुए सरकार पर जमकर हमला किया। 
    सभा में सांसद ताम्रध्वज साहू ने बारगांव बलात्कार मामले में जिला प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बेरला में मारने वाला पुलिस एफआईआर कराने वाला पुलिस और उसी पुलिस पर जांच का भी जिम्मा है तो हम निष्पक्षता की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। श्री साहू ने न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि इन पुलिस कर्मियों व अधिकारियों पर भी एफआईआर होनी चाहिए जिन्होंने कांग्रेसियों पर लाठी चलाई, उनसे मारपीट की। उन्होंने गौशाला और सूखे की स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
    पूर्व नेता प्रतिपक्ष रविन्द्र चौबे ने कहा दुष्कर्म पीडि़त की शिकायत पर कार्रवाई तथा गिरफ्तारी करने के बजाए बेरला थाना प्रभारी द्वारा एक लाख रुपये लेकर रिपोर्ट वापस लेकर दबाव बनाने वाले को शासन प्रशासन संरक्षण दे रहा है। ऐसे पुलिस अधिकारी को तत्काल बर्खास्त करने की मांग करते हुए श्री चौबे ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का का उनका प्रजातांत्रिक अधिकारी है। जब पुलिस ने सुनवाई नहीं की तो पीडि़त महिला के सम्मान में कांग्रेस ने धरना-प्रदर्शन किया। श्री चौबे ने सवाल किया कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं जो घर से निकलने में शर्म करती है आखिर क्या वजह थी कि उनको पत्थर लेकर सड़क पर उतरना पड़ा?

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  • सोमवार को 21 गायों की मौत, गोड़मर्रा गौशाला सील
    आशीष मिश्रा 
    बेमेतरा, 22 अगस्त। जिले के गौशालाओं में भूख से गायों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को रानो में 6 व गोड़मर्रा में 15 गायों के उपचार के दौरान मरने की खबर है। सभी मृत गायों का पोस्टमार्टम कर गढ्ढों में दफाना दिया गया है।  पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का यह कहना है कि विगत पखवाड़े भर से मवेशियों को चारा को छोड़ पानी भी नसीब नहीं हुआ। घटना की गंभीरता को व्यक्त करता है एसडीएम साजा ने गोड़मर्रा गौशाला को सीलकर सभी मवेशियों को अन्य संचालित गौशालाओं में शिफ्ट कर दिया है। 
    गौशालाओं में लगातार मवेशियों की मौत को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। आज साजा एसडीएम के एस मंडावी ने तहसीलदार व अन्रू अधिकारियों की मौजूदगी में गोड़मर्रा के मूलचंद गौशालाओं को सील कर दिया है। खबर यह है कि रानो के गौशाला में अभी भी 15 गाय मरणासन्न अवस्था में है। लिहाजा अधिकारियों में सभी मवेशियों को अन्य संचालित गौशालायों में शिफ्ट कर दिया है। 
    ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी के अनुसार गोड़मर्रा में 635, राजपुर में 520 और रानो गौशाला में 400 गाय हंै, मयुरी गौशाला 2004 से व गोड़मर्रा गौ शाला 2015 से संचालित है। लगभग 1500 गायों को खाने के लिए महज 150 किलो चारा दिया जाता है। इन मौतों की तह में जाने से कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए है।
    गौशालाओं में हरे चारे की माकूल व्यवस्था नहीं है।  चारे के भंडारण की व्यवस्था भी नहीं है। गायों को ठूंस-ठूंस कर रखा गया है। बनाए गए क्षेत्रों में क्षमता से 5 से 6 गुना गायों को रखा गया है। साफ-सफाई का अभाव है। पोस्टमार्टम करने वाले पशुचिकित्सा विभाग को डॉ. हेमंत कु मार के अनुसार गायों के मौत की मुख्य वजह भूख व चारे का अभाव है। 
    डॉक्टरों का यह कथन भी चौकाने वाला है कि गायों को चारा व भोजन को दूर लगभग पखवाड़े भर से पीने को पानी भी नहीं मिला है। ग्रामीणों ने बताया कि रातभर, रानो व गोड़मर्रा के गौशालयों में कुछ मजदूर एवं  चालक नरहिंता यादव गौशाला की देखरेख करते है। मृत मवेशियों को ट्रेक्टर चालक नरहिंता यादव दफनाने के लिए ले जाता है। 
    हैरत की बात यह है कि मरने वाले गायों की गोड़मर्रा गौशाला के पीछे भी कब्रिस्तान में फेंक दिया जाता है। मौके पर सड़क किनारे गढ्ढों, खेत के  आसपास एवं भूसे में मृत गायों को दबा पाया गया। आरोपी हरीश वर्मा एवं उनके परिवार गौशाला की व्यवस्था देखने कभी कभार ही जाते थे, इधर गौशाला संचालक के खिलाफ परपोड़ी थाना में अपराध दर्ज कराया गया है। तीनों गौशाला के संचालक सदस्य हरीश वर्मा, रमेश यादव, लीलाराम साहू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, शेष आरोपी अभी भी फरार है। 
    अपने बेमेतरा प्रवास में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने गौशाला में व्याप्त अनिमितताओं की जांच एवं कार्रवाई हेतु आश्वासन दिया है। पशुपालन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने उपसंचालक एके सिंह सहित 9 अधिकारी एवं कर्मचारियों को निलंबित कर  कार्रवाई जरूर की है, लेकिन संबंधित विभाग, आयोग व प्रशासनिक अमला यदि नियमित रूप से निरीक्षण करते तो इस दर्दनाक हादसे को रोका जा सकता था।
    उल्लेखनीय है गोड़मर्रा निवासी नारद सिंह ने विगत एक वर्ष पूर्व एसडीएम धमधा, पशुपालन विभाग के संचालक एवं डॉक्टरों ने मिलकर शिकायत की थी कि गोड़मर्रा गौशाला में अनियमितता व्याप्त है, चारा पानी  के अभाव में आए दिन गाए भूख से मर रही हैं, गंडई के मोहम्मद खान ने सालेवारा, बकरकट्टा जंगलों में गायों के तस्करी की जानकारी संबंधी थानों में दी लेकिन समुचीत कार्रवाई के अभाव में गौशाला संचालक पशु संख्या के आधार पर शासन के लाखों फायदे का अनुदान लेता रहा। 
    विभाग सहित प्रशासनिक अमले ने प्राप्त शिकायतों को अनदेखी की। परिणती इस दर्दनाक घटना के रूप में सामने आई। गौशाला संचालनकर्ता एक तरह अनुदान की राशि हजम करते रहे, दूसरी ओर मृत गायों की खालों को 5 सौ रुपये एवं हड्डियों को कोरबा के व्यापारियों के पास बेचकर  कमाते रहे।
    बरहाल गौशालाओं में बड़े पैमानों में हुई  मौत को लेकर क्षेत्र में आक्रोश है। ग्रामीण संचालनकर्ताओं के साथ-साथ उन लोगों पर भी कार्रवाई की लगातार मांग कर रहे हंै, जिन्होंने निरीक्षण व अपनी तय जिम्मेदारी में कोताही बरती है एवं शिकायतों को अनदेखा किया है।  

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  • कांगे्रस ने कालिख पोती 

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    दुर्ग, 19 अगस्त। धमधा विकासखंड के दुर्ग गंडई रोड पर स्थित ग्राम राजपुर के शगुन गौशाला के संचालक भाजपा नेता एवं जामुल नगर पालिका उपाध्यक्ष हरीश वर्मा को आज दुर्ग न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इस दौरान अदालत परिसर में युवा कांगे्रसियों ने हरीश के चेहरे पर कालिख पोत दी और ऑयल भी फेंका। ज्ञात हो कि दो दिन अवकाश होने के कारण आज दोपहर बाद एसडीएम कार्यालय में प्रस्तुत किया गया। दूसरी ओर शेष बचे गायों को कवर्धा, बेमेतरा, बालोद की गौशाला में शिफ्ट कर इस गौशाला की मान्यता रद्द करने की लगभग तैयारी पूर्ण हो चुकी है। ज्ञात हो कि कल कई गायों की लाशें एक ईंट भट्ठे में ट्रैक्टर ट्राली में छिपाकर रखी मिलीं जिसे दफन करने की तैयारी की जा रही थी। जिसे ग्रामीणों ने पकड़ा और मामला सामने आया।
    इधर 3 पशु चिकित्सक डा. नम्रता शारदा, डा. अर्चना जैन और डा. वसून संत ने 13 गायों का पोस्टमार्टम किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गायों की मौत की वजह भूख, प्यास से होना बताया गया है। 
    यह कार्रवाई गौशाला संचालक द्वारा गायों की ठीक से देखभाल न कर क्रूरतापूर्ण व्यवहार करने और यहां के गायों की लगातार मौत होने की घटना के कारण की जा रही है। संचालक हरीश वर्मा के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम का अपराध कायम कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। अभी तक 30 गायों की मौत होने की जानकारी दी गई है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि यहां लगभग 200 से अधिक गायों की मौत हो चुकी है। (बाकी पेजï 5 पर)
    गायों की मौत को छुपाने के लिए जेसीबी के सहारे दफन कर दिया गया है। आक्रोशित ग्रामीणों ने धमधा थाने के समक्ष उग्र प्रदर्शन भी किया था। 
    जांच में  गायों की देखभाल व पोषण के लिए 95 लाख से अधिक अनुदान मिलने के बाद भी ठीक से देखभाल नहीं किए जाने को लेकर ग्रामीणों सहित अन्य भी आक्रोशित है। छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल पटेल एवं सचिव एसके पाणिग्राही ने व्यवस्था का निरीक्षण किया। सचिव श्री पाणिग्राही ने इसकी रिपोर्ट भी तैयार कर ली है। शीघ्र ही मान्यता रद्द करने का निर्णय आ सकता है। 
    विशेषर पटेल पटेल का कहना था कि ऐसे मामलों में मान्यता रद्द करने की एक प्रक्रिया है। गौशाला में निरीक्षण के दौरान कई खामियां पाई गई हंै। इस तरह की खामियां प्रदेश की किसी भी गौशाला में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 
    इस संबंध में गौशाला संचालक एवं जामुल नगर पालिका के उपाध्यक्ष हरीश वर्मा का कहना था कि इस महीने की 15 तारीख को क्षेत्र में तेज बारिश के कारण गौशाला की 90 फीट लंबी दीवार गिर गई थी। इससे चोट लगने से पिछले तीन दिनों में 26 गायों की मौत हो गई है। वहीं कुछ गाय बेहोश हैं, जिनका इलाज किया जा रहा है।
    ज्ञात हो कि दुर्ग जिले के राजपुर गांव में बनी शगुन गौशाला के मेन गेट पर 'कमलÓ बना हुआ है, जहां सैकड़ों गायें मौत के कगार पर खड़ी हैं। यहां की गायें बेहद कमजोर हैं, पसलियां साफ दिखाई देती हैं। पिछले हफ्ते भर में मौत की शिकार हुई कई गायों के अवशेष भी पड़े हैं। 

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  • बेरला में लाठीचार्ज के बाद तनाव कायम, 40 हिरासत में
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बेमेतरा,  17 अगस्त। बेरला में बुधवार को लाठीचार्ज की घटना के बाद आज भी वहां तनाव की स्थिति रही। पुलिस 40 ग्रामीणों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। जिनमें नाबालिग भी शामिल हैं। बेरला टीआई को हटा दिया गया है। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने गुरुवार को पीडि़ता से मिलने पहुंचे। 
    बुधवार को हुए पथराव के बाद गंभीर रूप से घायल हुए दो पुलिस जवान को रायपुर रिफर किया गया है वहीं बेमेतरा टीआई श्री मारकंडे को भिलाई रिफर किया गया है। आज प्रशासन ने बेरला में सभी दुकानें बंद रखी हैं। वहीं पुलिस बल भी मौजूद है।
    बुधवार रात को बेमेतरा ग्रामीण युवा कांग्रेस अध्यक्ष गुलजार अली को बेमेतरा से  बेरला लाकर पूछताछ की जा रही है।  प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल, पूर्व अध्यक्ष एवं विधायक धनेंद्र साहू, पूर्व नेता प्रतिपक्ष रविन्द्र चौबे, दुर्ग लोकसभा सांसद ताम्रध्वज साहू, राज्यसभा सदस्य छाया वर्मा, पूर्व मंत्री मो. अकबर, दुर्ग विधायक अरुण वोरा, 
    पूर्व मंत्री अमितेष शुक्ल, प्रदेश उपाध्यक्ष बदरूद्दीन कुरैशी, पूर्व विधायक डॉ. शिवकुमार डहरिया,  सहित हजारों कार्यकर्ता बेरला ब्लॉक मुख्यालय में पुलिस लाठीचार्ज से घायल हुए पीडि़त लोगो, से मिलने एवं घटना स्थल का मुआयना करने पहुंचे। 
    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि घटना स्थल में कलेक्टर और एसपी नहीं पहुंचे हैं। शासन गंभीर नहीं है, निराकरण करना नहीं चाहती। आरोपी के खिलाफ  कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। बारगांव में शराब भ_ी के चलते गांव में असंतोष फैल रही है। गांववासियों पर धारा 307 लगायी गयी है। शासन और भाजपा सरकार अघोषित आपातकालीन पैदा कर गांव वासियों पर बर्बरता बरस रही है। 
    ज्ञात हो कि बुधवार को सामूहिक बलात्कार के आरोपियों को पुलिस संरक्षण का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के आव्हान पर बेरला में आयोजित धरना प्रदर्शन के बाद कांग्रेसी तो चले गए किंतु आक्रोशित ग्रामीणों का पुलिस से टकराव और पुलिस पर पथराव से दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गायत्री सिंह व टीआई भी शामिल है।
     ग्रामीणों ने जबरदस्त हंगामा किया। टीआई और एसडीओपी को घेर लिया, जहां से निकालने के चक्कर में पुलिस लाठीचार्ज से आक्रोशित ग्रामीण महिला-पुरूषों ने पुलिस वालों की जबरदस्त पिटाई की जिससे दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।
    बेरला की महिला एसडीओपी अनामिका जैन को कलेक्टर कार्तिकेय गोयल भीड़ से बचाकर किसी तरह अपनी कार में बैठाकर लेकर गए। स्थिति नाजुक होने की सूचना पर आईजी दीपांशु काबरा भारी पुलिस बल के साथ बेरला पहुंचे। तब जाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया। पुलिस ने फ्लैग मार्च किया और धारा 144 लागू कर दिया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। 
    मिली जानकारी के अनुसार पिछले एक सप्ताह पहले ग्राम बारगांव स्थित फार्महाउस में एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और महिला के साथ रहे दो युवकों की बेदम पिटाई की गई थी। कांग्रेस का आरोप है कि इस मामले में बेरला पुलिस ने महज एक के खिलाफ  376 की कार्रवाई की जबकि मुख्य आरोपी जो आदतन अपराधी है उसके सहित अन्य लोागों पर मामूली धारा लगाकर केवल खाना पूर्ति की कार्रवाई की गई।
     इस बात को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश था। जिसे लेकर कांग्रेस कमेटी का तहसील कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया था जिसमें बारगांव व मुड़पार के ग्रामीण जिसमें महिलाएं भी शामिल थीं। भारी संख्या में उपस्थित थे। दोपहर दो बजे कांग्रेस ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। लगभग तीन हजार की भीड़ वहां इकठ्ठी हो गई और एसडीओपी अनामिका जैन तथा टीआई प्रेम साहू से आरोपियों के उपर कार्रवाई नहीं करने के संबंध में आरोप लगाने लगे। स्थिति बिगड़ते देखकर कांग्रेसी वहां से चले गए। 
    एसडीओपी व टीआई आक्रोशित भीड़ को देखते हुए पंजीयन कार्यालय के अंदर चले गए और कुंडी लगा दिया। भीड़ बाहर नारेबाजी करने लगी । इसी बीच दो गाडिय़ों में 15-20 जवान मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण करने की दृष्टि से लाठीचार्ज कर ग्रामीणों को खदेडऩे का प्रयास किया और एसडीओपी को बाहर लाए किन्तु इससे स्थिति बिगड़ गई। ग्रामीण पुलिस के उपर पथराव करने लगे। महिला एसडीओपी किसी तरह एक दुकान के भीतर चली गई और बाहर से शटर को गिरा दिया। भीड़ यहां शटर पर पत्थर बरसाती रही। पथराव से पुलिस के 16 अधिकारी कर्मचारी एएसपी गायत्री सिंह, बेमेतरा टीआई डीके मारकंडे, बेरला टीआई प्रेम साहू सहित दर्जन भर से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घटना के बाद दुर्ग रेंज के आईजी दीपांशु काबरा मौके पर पहुंच गए। बेरला को छावनी में तब्दील कर किया गया।

     

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  • आशीष मिश्रा
    बेमेतरा, 6 अगस्त। जिले में हरियाली लाने के नाम पर हर साल शासन-प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन पकाने हजारों पेड़ों की बलि चढ़ाई जा रही है। 
    ज्ञात हो कि वर्ष 2005-06 में राज्य सरकार ने पहल करते हुए मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए समूहों को गैस कनेक्शन का वितरण किया था, लेकिन इन स्वसहायता समूहों को गैस सिलेंडर का कोटा बच्चों की दर्ज संख्या के अनुपात में सिलेंडरों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होने के कारण योजना फेल हो गई है और समूहों द्वारा कुछ दिनों के उपयोग के बाद गैस से खाना पकाना बंद कर दिया है। 
    इस संबंध में ए.के. भार्गव जिला शिक्षा अधिकारी बेमेतरा का कहना है कि आने वाली परेशानियों के संबंध मेें कलेक्टर से चर्चा करने के बाद पायलट प्रोजेक्ट के तहत एलपीजी से मध्यान्ह भोजन पकाने कि व्यवस्था सुनिश्चित करने प्रयास किया जाएगा। 
    जिले के प्रायमरी, मीडिल स्कूलों में प्रतिदिन एक लाख से अधिक स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए मध्यान्ह भोजन बनाया जाता है। ऐसी स्थिति में भोजन पकाने के लिए कई क्विंटल लकड़ी की जरूरत पड़ती है। गैस सिलेंडर उलब्ध नहीं होने की वजह से लकड़ी की जरूरत को पूरा करने के लिए समूह व पंचायतों द्वारा शहरी व ग्रामीण अंचल में अंधाधुंध पेड़ों की कटाई की जा रही है। 
    गैस से मध्यान्ह भोजन पकाने में आ रही व्यवहारिक परेशानी के संबंध में समूह के पदाधिकारियों ने बताया कि एलपीजी गैस से खाना पकाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिसे बताने के बाद भी ध्यान नहीं दिया जाता। परिणाम स्वरूप कुछ दिनों से योजना फे ल हो गई है। 
    व्यवहारिक परेशानियों को निराकरण होने पर समूह गैस से खाना पकाने को तैयार है। गैस से खाना पकाने पर सबसे पहले गैस सिलेंडर समय पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। सिलेंडरों के परिवहन पर आने वाले व्यय को तय करने के साथ सिलेंडरों को छोटों बच्चों की संख्या के अनुपात में दिया जाना चाहिए। 
    जिले में 743 प्रायमरी व 387 मीडिल स्कूल संचालित हैं। जहां करीब 650 समूहों द्वारा मध्यान्ह भोजन का संचालन किया जा रहा है। प्रायमरी स्कूल के प्रत्येक बच्चे के भोजन के लिए 4.58 रुपये व मीडिल स्कू ल के लिए 6.13 रुपये भुगतान समूह को करने निर्धारित है। इसके अलावा बीपीएल दर  सोसायटी से आवश्यकतानुसार चावल का आबंटन मिलता है। गैस से खाना पर प्रत्येक दिन प्रायमरी स्कूल में 20 पैसा व मीडिल में 30 पैसा प्रत्येक बच्चे के हिसाब से दिया जाता है।

     

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    छत्तीसगढ़ संवाददाता

     बेमेतरा, 28 जुलाई। षडय़ंत्र रच कर अपात्र कृषकों के नाम पर लोन निकालने वाले एजेंट सहित 5 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार प्राथी सुशील कुमार मोहंती  साकिन ब्रांच मैनेजर ग्रामीण बैंक शाखा कोदवा के द्वारा तत्कालीन ग्रामीण बैंक शाखा कोदवा के ब्रांच मैनेजर राजेश शर्मा एवं केशियर प्रकाश रेड्डी व बहल सिंह वर्मा ग्राम ओटेबंध थाना बेमेतरा के खिलाफ आपस में षडय़ंत्र रच कर अपात्र कृषकों के नाम पर बैंक ऋण स्वीकृत कर धोखाधड़ी कर नजायज लाभ अर्जित  कर बैंक को लगभग एक करोड़ चालीस लाख रूपयें की हानि पहुंचाने की लिखित शिकायत   पर साजा थाने में प्रकरण दर्ज किया गया था। 
    विवेचना के दौराना पूछताछ करने पर ग्रामीण बैंक शाखा कोदवा में वित्तीय वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में ग्राम ओटेबंध के कृषकों को दिये गये कृषि ऋण के संबंध में बैंक के द्वारा कृषि ऋण के 131 प्रकरणों का मिलान भुइंया कार्यक्रम में किये जाने पर भिन्नता पाया गई जिसका जांच कराया गया। कृषकों के छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक शाखा कोदवा तह. साजा में किसान क्रेडिट कार्ड खातो में फर्जी लोन आहरण कर धोखाधड़ी तथा जलासाजी का आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया। 
    उक्त शाखा में प्रबंधक के तौर पर जून 2014 से 16.05.2017 तक मैनेजर राजेश शर्मा एवं केशियर प्रकाश रेड्डी उक्त शाखा में  6.07.2011 से 01.06.2015 तक केशियर के पद पर पदस्थ थे।  राजेश शर्मा एवं  प्रकाश रेड्डी के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक शाखा कोदवा तह.साजा वित्तीय वर्ष 2014-5 एवं 2015-6 में ग्राम ओटेबंद के कृषकों को दिये गये कृषि ऋण   के संबंध में बैंक के द्वारा कृषि ऋण के 131 प्रकरणों में संलग्न राजस्व अभिलेखों का मिलान भुईया कार्यक्रम में किये जाने पर भिन्नता पाई गई थी। 
    ऋण प्रकरणों में जमीन अन्य के नाम पर या भूमि स्वामी मौजूद नही पाये गये तथा कुछ में जमीन कम पाये गये जिसकी जांच सत्यापन करने का निवेदन श्रीमान अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बेमेतरा को किया गया था, जिनके द्वारा जांच अधिकारी नियुक्त कर ऋणी कृषकों के राजस्व अभिलेखों की जांच कराई गई, जिसकी जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। 
    प्रथम दृष्टिया बैंक में ऋण प्रकरणो में प्रस्तुत राजस्व अभिलेखों की दर्शित भूमि एवं उसमें दर्ज खसरा नंबर व भूमि का रकबा राजस्व अभिलेखों में भिन्न पाया गया। इस प्रकार भूमि संबंधी दस्तावेंजों की कूटरचना कर बैंक में प्रस्तुत कर अप्रात्र लोगों के नाम पर ऋण स्वीकृत कर ऋण की राशि आहरित कर ग्रामीण बैंक कोदवा को 01करोड़ 40लाख रूपये का हानि पुहंचाया। उक्त प्रकरण के दो आरोपी 01.ग्रामीण बैंक शाखा कोदवा के ब्रांच मैनेजर राजेश शर्मा को अपने ससुराल भोपाल म.प्र., 02.ग्रामीण बैंक शाखा कोदवा के केशियर प्रकाश रेड्डी को उनके न्यू दिनदयाल कालोनी खम्हरिया चौकी जेवरा सिरसा थाना फुलगांव जिला दुर्ग से गिरफ्तार किया गया था। 
    पिछले 25-26 दिनों से फरार चल रहे आरोपी बहल सिंह वर्मा को क्राईम ब्राच व साजा पुलिस द्वारा जिला दंतेवाड़ा के गीदम से  26 जुलाई को गिरफ्तार कर पूछताछ करने पर आरोपी बहल सिंह वर्मा द्वारा बताया कि विधान सभा चुनाव के समय उसके पास ओटेबंद के मतदाताओं की सूची थी । उस सूची के व्यक्तियों के नाम से फर्जी पहचान प्रमाण पत्र बनाकर एवं अपने पिता के नाम से ऋण पुस्तिका का उपयोग करते हुये किसानों का फर्जी ऋण पुस्तिका, छगनलाल वर्मा द्वारा बनाया गया था,उन फर्जी दस्तावेजो में बहल सिंह वर्मा व छगन वर्मा के द्वारा जाली हस्ताक्षर किये गये।
     ये सभी दस्तावेज बैंक मैनेजर के पास लेजाकर देने पर वह फर्जी तरीके से लोन स्वीकृत करता था, आरोपी बहल सिंह वर्मा द्वारा बताया गया कि बैक मैनेजर फर्जी दस्तावेज आने पर अपने बेटे चाकेन्द्र वर्मा एवं रेखराज वर्मा तथा धरसीवा जिला रायपुर के छगनलाल वर्मा व नांदघट के सुरेद्र कुमार साहु को अपराध में संलिप्त होना बताया। जिसके आधार पर धरसीवा से छगनलाल वर्मा एवं नांदघट से सुरेद्र कुमार साहु को गिरफ्तार किया गया। छगनलाल वर्मा से 05 नग कम्प्यूटर, 02 प्रिंटर, 01 लेमिलेशन मशीन, 01 नग लेपटाप व सुरेंद्र कुमार साहु से 01 नग कम्प्यूटर, 01 नग लेपटाप, 01 नग स्केनर, 01 नग प्रिंटर जब्त किया गया।    

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