छत्तीसगढ़ » सुकमा

Posted Date : 19-Nov-2017
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    दोरनापाल, 19 नवंबर। जिले सुकमा के चिंतागुफा इलाके में आज सुबह प्रेशर बम विस्फोट में सीआरपीएफ का एक घायल जवान बुरी  तरह जख्मी हो गया। इलाज के लिए रायपुर ले जाते उसकी मौत हो गई।  
     मिली जानकारी के अनुसार सीआरपीएफ 150 बटालियन के जवान सुबह 5 बजे सर्चिंग पर थे। उसी दौरान चिंतागुफा के पास नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर बम की चपेट में जवान आ गया। शहीद जवान के. वेंकटेश सीआरपीएफ 150 बटालियन की डी कम्पनी में हेडकांस्टेबल था। वह राजमहेन्द्री का निवासी था।

     

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Posted Date : 13-Nov-2017
  • कोंटा के 50 फीसदी बच्चे अब भी प्राथमिक शिक्षा से दूर
    दोरनापाल, 13 नवंबर।   दक्षिण बस्तर के सुकमा जिले में शिक्षा प्रत्येक बच्चों तक नही पहुंच पा रही क्योंकि स्थानीय अवधारणाएं और घरेलू काम की जिम्मेदारी इन बच्चों की शिक्षा पर रोढ़ा बनी हुई है । छत्तीसगढ़ की टीम को कोर्रापाड से लौटते वक्त रास्ते पर 8 साल का लड़का कलमु सिंगा स्कूली गणवेश में गाय चराते दिखा हाँथ में लाठी थी कांधे पर छाता दूसरे हाँथ में खाना, उसने बताया कि वह दूसरी तक पढ़ा जिसके बाद से उसकी शिक्षा पर पाबंदी लग गई क्योंकि एक घर से एक शिक्षित की अवधारणा यहां बनी हुई है। कोलाइगुड़ा के वंजाम गंगा और वेट्टी सोमा कहते हैं कि जब गांव में स्कूल ही नही तो कैसे पढ़ाएं, इससे बेहतर की काम काज में लगे ताकि भविष्य में काम मे परेशानी न हो। बिराभेटटी के नंदा कहते हैं कि मेरा एक बच्चा पोटाकेबिन में पढ़ रहा है दूसरे को भी भेज दूंगा तो घर के काम में सहयोग कौन करेगा। गांव में स्कूल होता तो जरूर भेजता।
     छत्तीसगढ़  ने मामले पर पूरे कोंटा ब्लॉक के हालातों की पड़ताल की तो पाया कि सिंगा ऐसा पहला बच्चा नही कोलाइगुड़ा की सरस्वती जग्गावरम के केसा और हंदा, बीराभेटटी का रमेश जैसे पूरे कोंटा ब्लाक में तकरीबन 10 हजार बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल नही जा पाते , इसमें 6 से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चे और युवक-युवती शामिल हैं । 
    वर्ष 2006 से अब तक ब्लॉक में 96 स्कूल बंद किये गए इस वजह को भी हालात का जिम्मेदार बताया जाता है । क्योंकि उनके गांव में स्कूल नहीं ,और घर के एक बच्चे को अनिवार्य तौर पर गांव में ही रहना होता है जिस वजह से हर घर का एक या अधिक बच्चा शिक्षा से वंचित रह जाता है । कम उम्र में नर्म कांधों पर जिम्मेदारियों का बोझ बड़ी संख्या में बच्चों के भविष्य पर अशिक्षा,अज्ञानता, के साथ कुसंगति भी आने लगती है जिससेे बच्चों के साथ साथ ज्यादातर युवतियाँ भी स्कूल नहीं जा पाती। क्षेत्र में जागरूकता का अभाव है । 
    बच्चों पर जिम्मेदारियों का बोझ
    विडम्बना है कि जिले में 47000 बच्चे स्कूल जाते हैं और 31000 बच्चे आश्रम पोटाकेबिन में हैं लेकिन कोंटा ब्लॉक में 50 प्रतिशत बच्चे भी शिक्षा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए। क्योंकि कोंटा ब्लॉक में आंचलिक क्षेत्रों में कम उम्र से ही इलाके में बच्चों के कंधे पर जिम्मेदारियों का बोझ डाल दिया जाता है। जब बच्चा 6 साल का हो जाता है तब से उसपर खेत देखने,लकड़ी लाने,पानी लाने,खाना पकाने,खेत जोताई, मेढ़ बांधने,धान कटाई,वनोपज, पशुपालन, शिकार, मजदूरी और परिवार का पेट पालने की जिम्मेदारियों का बोझ उम्र के साथ बढ़ता जाता है। 
    10-12 साल की उम्र में बच्चा लगभग सभी काम करता है और 15 वर्ष की उम्र से ही बच्चा पड़ोसी राज्य में मजदूरी करने निकल जाता है । इस तरह जो उम्र खेल कूद से शारीरिक विकास की होती है उस उम्र में बच्चे काम काज के मानसिक तनाव में शारीरिक और मानसिक विकास पूरी तरह नहीं हो पाता।
    कौन  जिम्मेदार
    जब  बात  आई कि प्राथमिक स्तर से बच्चों को शिक्षा से जोडऩे की जिम्मेदारी किनकी है और शिक्षा से वँचित रहने पर कौन कौन जिम्मेदार है । मिली जानकारी के अनुसार बच्चे की प्राथमिक शिक्षा के लिए सबसे पहली जिम्मेदारी उनके माता-पिता की होती है ज्यादातर इलाके में शिक्षा का अभाव है इस वजह से जिम्मेदारी ग्राम सभा ,शाला समिति,प्रधान पाठक , शिक्षा स्तर के अधिकारियों की भी बनती है कि गांव में अशिक्षित परिवार को शिक्षा हेतु जागरूक करें ताकि नई पीढ़ी शिक्षा से जुड़े । शिक्षा विभाग द्वारा इसको लेकर अभियान भी चलाये जाते है मगर धरातल तक अभियान नही पहुंचती। बावजूद जब गांव के बच्चे शिक्षा से किसी कारण वँचित रहे तो माता पिता समेत ये सभी भी जिम्मेदार होते हैं। 
    (रिपोर्ट मीडिया कलेक्टिव चाइल्ड राइट्स फेलोशिप के तहत )
    घर का काम भी जरूरी है । अकेले सब काम करना मुमकिन नही गांव में स्कूल होता भी तो कुछ साल पढ़ाकर काम मे लगाना पड़ता है । रोजगार के साधन नही हैं यहां इस वजह से घर के काम से तैयार कर आंध्र भेज देते है पैसे कमाने यहां सभी गांवों में ये हाल है । जब घर की जिम्मेदारी बच्चे के सर पर आ जाता है तो पढ़ाई छूट जाता है ।

    - वंजाम भीमा,  बिराभेटटी

    बच्चे को स्कूल भेजने की प्राथमिक जिम्मेदारी उनके माता पिता की होती है । सरकार बच्चों को शिक्षा से जोडऩे का पूरा प्रयास कर रही है और जिला प्रशासन व्यवस्था को और बेहतर बनाने का , प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोडऩे सभी के सहयोग की आवश्यकता है । इस उम्र में बच्चों का शारीरिक विकास और मानसिक विकास होता है । परिजनों में जागरूकता का अभाव है ग्राम सभा ,समिति को इस हेतु प्रयास करनी चाहिए । शिविर के माध्यम से हम जागरूकता का प्रयास कर रहे हैं । यदि कोई कर्मचारी शिक्षा को लेकर लापरवाही करता है तो ग्राम सभा को वेतन रोकने का अधिकार है और मुझे शिकायत करें कार्यवाही होगी ।    
    -जयप्रकाश मौर्य, कलेक्टर ,सुकमा

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Posted Date : 01-Oct-2017
  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    दोरनापाल, 1 अक्टूबर। सुकमा जिले के दोरनापाल से 11 किमी दूर पोलमल्ली के पास चल रहे सड़क निर्माण के दौरान पेड़ के नीचे से एक के बाद एक कुल 3 प्रेशर आईईडी बरामद की गई । जिसके बाद इलाके में तलाशी ली गई । तलाशी के दौरान मीले आईईडी को सकुशल ब्लास्ट कर निष्क्रिय कर बड़ी घटना को टाला गया। इस दौरान रास्ते में कुछ समय के लिए आवागमन को भी रोक दिया गया ताकि कोई हताहत न हो । 
     ज्ञात हो कि बीते दिनों शुरू हुए सड़क निर्माण के बाद से लगातार नक्सली निर्माण को रोकने आईईडी लगाने लगे हंै। शुक्रवार सुबह 11 बजे पोलमपल्ली के पास से उस वक्त आईईडी बरामद हुई जब जवान पेड़ के नीचे आराम करने जा रहे थे कि अचानक जवान की नजर प्रेशर पॉइन्ट पर पड़ी और तत्काल बम निरोधक दल को बुलवाकर आईईडी निष्क्रिय किया गया और एक के बाद एक 3 आईईडी निष्क्रिय किये गए। पूरी कार्यवाही जिला पुलिस और सीआरपीएफ की थी। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर पेंटा से 10 किलो का आईईडी बरामद किया गया जिसे सीआरपीएफ 150 वीं बटालियन के कमांडेंट जमाल खान के मौजूदगी में निष्क्रिय किया गया।
    जोखिम में कछुआ गति से निर्माण
    ज्ञात हो कि जगरगुंडा मार्ग पर सड़क के काम शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 85 आईईडी बरामद किए जा चुके हैं। इस जोखिम के बीच सैकड़ों जवान अपनी जान दांव पर लगा सड़क निर्माण को सुरक्षा दे रहे हैं मगर ठेकेदार द्वारा काम मे ढील देकर कछुआ गति से सड़क का निर्माण किया जा रहा है। ये वही सड़क है जिसकी सुरक्षा में लगे 25 जवान बुरकापाल हमले में शहीद हो गए थे जिसके बाद से सीआरपीएफ ने सड़क निर्माण को सुरक्षा देने से इंकार कर दिया था जिसके बाद से निर्माण कार्य प्रभावित रहा। लम्बे दिनों बाद जब संयुक्त पुलिस फोर्स ने दोबारा सड़क को सुरक्षा दी तो धीमी गति से निर्माण चल रही है ज्ञात हो कि रोजाना इस सड़क पर मात्र 20 से 25 मीटर काम हो रहा है जबकि एनएच 30 पर रोजाना 200 मीटर का काम होता है ।
    सड़क सुरक्षा के जवान फिर निशाने पर 
    एक बार फिर सड़क काम के दौरान मौत का सामान वहां से मिला जहां जवान, मजदूर और स्थानीय ग्रामीण आमतौर पर दोपहर के वक्त आराम करते हैं । जैसे ही कुछ जवान आराम करने पेड़ के नीचे पहुंचे उनमें से एक जवान की नजर प्रेशर ट्रिगर पर पड़ी उस वक्त कुछ ग्रामीण भी उसी जगह लकड़ी रख आराम का इंतजाम भी कर रहे थे। सीआरपीएफ 223 की बीडीएफ टीम ने बम होने की पुष्टि की फिर खुदाई कर आईईडी की पहचान की गई नक्सलियों ने आईईडी सड़क सुरक्षा टीम को निशाना बनाने के लिए लगा रखा था कि जैसे ही जवानों की टुकड़ी पेड़ के नीचे बैठे वैसे ही जवानों को बड़ा नुकसान हो पर जवान की सतर्कता से घटना टल गयी। ये इलाके में पहली घटना नहीं है बुर्कापाल हमले के बाद तीसरी बार सड़क सुरक्षा टीम को निशाना बनाने नक्सलियों ने आईईडी लगाया है । बुर्कापाल हमले की खास वजह भी सड़क का काम रोकना था।
    आईईडी की नई तकनीक अपना रहे 
    बीते महीनों में पाया गया कि माओवादियों ने आईईडी लगाने की तकनीक में काफी बदलाव किया है । भेज्जी हमले के कुछ दिन पहले की सोशल रिपोर्ट के अनुसार नक्सलियों के पास आईईडी का मटेरियल बारूद खत्म होना बताया गया था कुछ ही दिनों में फिर से बड़ी संख्या में आईईडी लगने फिर शुरू हुए । जिसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि आईईडी ज्यादा तर बरामद या निष्क्रिय साबित हुए और अब आधुनिक और नई तकनीक का सहारा ले रहे हैं । बीते दिनों मिले पाइप की प्रेशर बम का प्रेशर पॉइंट एक सिरिंज के पिछले हिस्से की तरह था जिसपर पैर रखते ही एक नही 3 आईईडी एक साथ ब्लास्ट हो सकते थे और बड़ी संख्या में जवानों को नुकसान हो सकता था।

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Posted Date : 22-Sep-2017
  • गोलापल्ली मुठभेड़ के बाद बरामद दस्तावेज से खुलासा
    संगठन में भर्ती में भी भारी कमी
    सतीश चाण्डक
    सुकमा, 22 सितंबर (छत्तीसगढ़)। ये साल नक्सलियों के लिए काफी नुकसानदायक रहा। नक्सली बैठक में हर साल नुकसान-फायदे के आंकड़ा रखते हंै। कुछ माह पूर्व गोलापल्ली इलाके में हुई मुठभेड़ के बाद इसके दस्तावेज बरामद हुए। जिसमें कई अहम जानकारियां पुलिस के हाथ लगीं। खासकर उसमें यह लिखा गया था कि इस साल जुलाई 16 से जुलाई 17 तक करीब 90 नक्सली मारे गए। साथ ही संगठन में भर्ती होने वालो में भी कमी आई। इधर खबर की पुष्टि करते हुए एसपी अभिषेक मीना ने कहा कि नक्सलियों से बरामद दस्तावेज-साहित्य में यही जानकारी मिली है। उन्हें काफी नुकसान हुआ है।
    पुलिस  के मुताबिक कुछ माह पूर्व जिले के गोलापल्ली इलाके में मुठभेड़ हुई थी। जिसमें प्लाटून सदस्य दीपक और गोलापल्ली एरिया एलओएस माड़वी पोदिया मारे गऐ थे। वहां सर्चिंग करने पर बहुत सारे दस्तावेज और साहित्य बरामद हुए। जो  गोंडी में लिखे हुए थे। इससे पुलिस को कई जानकारियां हाथ लगीं। बताया जाता है कि इस दस्तावेज के अनुसार  इस साल अगस्त के अंतिम दिनों या फिर सितम्बर के शुरूआती दिनों में नक्सलियों की बैठक होने वाली थी जिसके लिए यह जानकारी बनाई गई थी।
    इस दस्तावेज के अनुसार  जुलाई 2016 से जुलाई 2017 तक नक्सलियों के करीब 90 लोग मारे गऐ। जिसमें तोंडेमरका में काफी बड़ा नुकसान हुआ था। वही पुलिस की मानें तो पापाराव ने भी अक्सर बैठकों में तोंडेमरका का जिक्र किया है जिसमें करीब 45 नक्सली मारे जाने की बात कही। लेकिन मुठभेड़ के बाद  अपने पर्चों और पोस्टर में नुकसान होने से इंकार किया है। जबकि कुछ और साहित्य में 45 लोग ही मारे जाने की बात कही गई।
    वही  दस्तावेज में नक्सली संगठन में भर्ती को लेकर भी लिखा गया है। दक्षिण बस्तर सुकमा जिले से मात्र 77 लोग भर्ती हुए।  पहले यहां से करीब 300 लोग भर्ती हुआ करते थे। वहीं बाकी जगहों  े दरभा से 12, पश्चिम बस्तर से 52 भर्ती हुए।  पूरे बस्तर से 500 लोग भर्ती हुआ करते थे जो अब 140 पर आ गया।
    बरामद दस्तावेज से मिली जानकारी - अभिषेक मीना 
    पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीना ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि गोलापल्ली मुठभेड़ से साहित्य बरामद हुआ है। जिसमें नक्सलियों के 90 लोग मारे जाने की जानकारी लिखी हुई है। वही भर्ती में भी भारी कमी आई है। 
    सुकमा जिले से जहां 300 नक्सली हर साल भर्ती हुआ करते थे इस साल मात्र 77 नक्सली भर्ती हुए। वही उन्होंने कहा कि पुलिस लगातार आपरेशन कर रही है। साथ ही तोंडेमरका में नक्सलियों को काफी नुकसान हुआ है। वही पुलिस ग्रामीणों के साथ बैठकें कर रही है जिसके कारण नक्सली संगठन से लोग कम जुड़ रहे हैं। वही उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने कई जानकारियां छुपाने की कोशिश की है। जारी पर्चों व पोस्टरों में उन्होंने 45 नक्सली ही मारे जाने की जानकारी दी, जबकि हाथ से लिखे इस साहित्य में 90 लोगों की जानकारी दी गई है।  

     

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Posted Date : 21-Sep-2017

  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    सुकमा, 21 सितंबर। आज सुबह पोलमपल्ली के पिडमेल इलाके में मुठभेड़ में इनामी नक्सली मारा गया। जबकि 4 नक्सली भाग गए। मारे गए नक्सली का शव बरामद कर लिया गया है। उसकी पहचान मिलीशिया एरिया कमांडर हिड़मा के रुप में की गई  है। इस पर करीब एक लाख का इनाम था। 
    एसपी अभिषेक मीना ने बताया कि कल रात में पोलमपल्ली इलाके से जिला पुलिस बल और एसटीएफ की संयुक्त पार्टी ऑपरेशन पर निकली थी।  पोलमपली से पिडमेल की तरफ निकली पार्टी जब वापस लौट रही थी। तब  सुबह करीब 8 बजे नक्सलियों ने फायरिंग करनी शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई की गई। करीब 20 मिनट तक रुक-रुक कर फायरिंग होती रही। मुठभेड़ के बाद एरिया सर्चिंग करने पर एक नक्सली का शव, एक एयरगन, एक  कट्टा, एक भरमार और  नक्सल सामग्री बरामद की गई। सूत्रों के अनुसार यह आईडी और बम लगाने का काम करता था। वहीं भागे नक्सलियों में डिप्टी कमांडर वेट्टी मल्ला भी था। 

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Posted Date : 20-Sep-2017
  • एसपी ने की रिहा करने की अपील, जन-अदालत लगाए जाने की खबर
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    दोरनापाल, 20 सितंबर। सुकमा के चिंतागुफा से बुर्कापाल हमले के ठीक बाद आत्मसमर्पित पण्डा के परिजनों को नक्सलियों ने शुक्रवार को चिंतागुफा के उपसरपंच, मुखिया समेत आठ लोगों का अपहरण कर लिया। बताया जाता है कि पिछले तीन दिनो से इन सभी को जंगलो में रखा गया। कुछ माह पूर्व पंडा ने पुलिस के समक्ष आत्म समर्पण कर दिया था जिससे नक्सली नाराज थे यही वजह मानी जा रही है । इधर पंडा ने भी पतासाजी करनी शुरू कर दी साथ ही बरबरा राव से बात भी की । वहीं एसपी अभिषेक मीणा ने खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि उन लोगों का पुलिस से कोई लेनादेना नहीं है, उन्हें छोड़ दे।
    जानकारी के मुताबिक आत्मसमर्पित नक्सली पंडा   चिंतागुुफा का निवासी है । शुक्रवार को पोडिय़ामी पंडा की पत्नी पोडिय़ामी मुये, पुत्र पोडिय़ामी कोसा, पोडिय़ामी राजा को नक्सली अपने साथ जंगल में ले गए। वहीं दूसरे दिन शनिवार को कवासी मंगा, कवासी सोना, कवासी नंदा ये तीनों गांव के मुखिया है। साथ ही उपसरपंच तिरमणी सेठिया का अगवा कर नक्सली उन सभी आठ लोगों को जंगल की और ले गए। जिनका आज तक पता नहीं चल पाया।
    सूत्रों से जानकारी मिली है कि नक्सली आज चिंतागुुुफा से करीब 18 किमी. दूर तुमालपाड़ में जन अदालत लगाया गया है । लेकिन वहां क्या हुआ है इसकी जानकारी नहीं है। ज्ञात हो कि नक्सली इससे पहले 2016 में पण्डा की पत्नी मुये और भाई कोमल को ले जाकर मारपीट की।
    मीडिया के माध्यम से लगाई गुहार 
    पण्डा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि मेरे परिवार का कोई कसूर नहीं है। उनके साथ पहले भी मारपीट हुई है । वे गांव में सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं उनका पुलिस से कोई भी लेना देना नही है। इस संर्दभ में मैंने हैदराबाद के बरबरा राव से चर्चा की थी। उन्होंने भी आश्वासन दिया था कि शाम तक छोड़ दिया जाएगा। लेकिन अभी तक नहीं छोड़ा गया, अब चिंता होने लगी है।  मेरे परिवार और गांव वालों का कोई कसूर नहीं है । मीडिया के माध्यम से नक्सलियों से अपील करता हूं कि उन्हें छोड़ दे।
    नक्सली छोड़ दें-एसपी
    पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने चर्चा करते हुए बताया कि उन आठ लोगों का पुलिस से कोई संर्पक नहीं था। दरअसल पुलिस लगातार ग्रामीणों से संर्पक कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ रही है यही वजह है कि नक्सली अब ऐसी हरकते कर रहे हैं । इस कृत्य से नक्सलियों का दोहरा चेहरा सामने आया है । एक तरफ नक्सली जनता के हक के लिए लडऩे का झूठा प्रचार कर करते हैं । महिला अधिकारों, महिलाओं के सम्मान की बात करते हंै । वहीं रात में आकर घरों से जबरन ग्रामीणों और महिलाओं को जबरन ले गए हैं। ये नक्सलियों का दोहरा चेहरा का उजागर हुआ है । नक्सल संगठन को छोड़ कर शांतिपूर्वक जीवन यापन करने वाले पोडिय़ामी पण्डा के परिजन भी शामिल है । नक्सली उन लोगों को छोड़ दे उनका पुलिस से कोई संपर्क नहीं है । 

     

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Posted Date : 18-Sep-2017
  • शव, हथियार समेत सामान बरामद
    छत्तीसगढ़ संवाददाता 
    दोरनापाल, 18 सितंबर। रविवार को पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में पुलिस ने दो वर्दीधारी नक्सलियों को ढेर कर दिया। मुठभेड़ गोलापल्ली थाना इलाके के रसातोंग के जंगलों में हुई। घटनास्थल से पुलिस ने भरमार बंदूक, 12 बोर की बंदूक, पि_ू समेत भारी संख्या में नक्सली सामग्री बरामद की है।
       रविवार शाम रसातोंग के जंगलों में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस नक्सलियों पर दबाव बनाने लगातार यहां एंटी नक्सल ऑपरेशन चला रही है। पुलिस के अनुसार  मुखबिर की सूचना पर डीआरजी टीम ने रसातोंग के जंगल में नक्सलियों को घेर लिया। जिस पर नक्सलियों ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग की। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। करीब आधे घंटे तक दोनों ओर से फायरिंग होती रही। इसके बाद नक्सली जंगल का फायदा उठाकर वहां से फरार हो गए।
    शव समेत हथियार, सामग्री बरामद
    ऑपरेशन में पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है जिसमें 2 शव समेत हथियार एवं नक्सल सामग्री बरामद हुई। शव की शिनाख्ती भी पुलिस ने कर ली है। पुलिस के अनुसार पहले मृत नक्सली की पहचान माड़वी पोदीया बुर्कलंका एलओएस सदस्य बताया जा रहा है जिस पर 1 लाख का इनाम था। वहीं दूसरे की पहचान दीपक के तौर पर हुई जो लंबे समय से एलओएस से जुड़ा था। इसपर 5 लाख का इनाम बताया जा रहा है। 
    मुठभेड़ के बाद पुलिस ने जब वहां सर्चिंग की तो 2 वर्दीधारी नक्सलियों का शव मिला। साथ ही भारी मात्रा में नक्सली सामान, 2 भरमार बंदूक, वायरलेस सेट और पि_ू बरामद हुआ। पुलिस ने नक्सलियों के शव और मौके पर मिले सामान को गोलापल्ली लेकर आ गई है। नक्सलियों की शिनाख्त की जा चुकी है।
    नक्सली बैठक की सूचना पर निकली पुलिस
    रसातोंग धुर नक्सल प्रभावित इलाका है। जहां पुलिस को माओवादी लीडरों द्वारा मीटिंग लिए जाने की सूचना मिली थी। डीआरजी की टीम ऑपरेशन पर सुबह 11 बजे गोलापल्ली से 10 किमी दूर निकली। जब टीम वहां पहुंची तक तक मीटिंग हो चुकी थी जिसके बाद 5 किमी आगे सर्च पर बढ़ी तो नक्सलियों का कैम्प नजर आया जिसमें 30-35 माओवादी मौजूद थे। इतने में ही नक्सलियों ने गोली बारी शुरू कर दी। डीआरजी ने जवाबी कार्रवाई की जिसमें सर्च पर 2 माओवादियों के शव बरामद हुए। पुलिस के अनुसार घटनास्थल पर तलाशी के दौरान जगह जगह खून के धब्बे जवानों ने देखे जिससे कम से कम 3 से 4 नक्सलियों के मारे जाने की भी आशंका जताई जा रही है। 
    ऑपरेशन में शामिल जवानों को किया जाएगा पुरस्कृत-एसपी
    पुलिस को सूचना मिली थी कि नक्सली रसातोंग के आस पास बैठक ले रहे हैं जिसकी पुख्ता सूचना पर डीआरजी सर्च पर निकली थी। आधे घण्टे चली मुठभेड़ में जवानों ने 2 नक्सलियों को मार गिराया जिनपर लाखों का इनाम भी था। जवानों को जल्द इनाम देकर पुरस्कृत किया जाएगा।
    अभिषेक मीणा, एसपी सुकमा

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Posted Date : 15-Sep-2017
  • 10 साल बाद भेज्जी मार्ग पर लौटी बिजली
    अमन सिंह भदौरिया 

    दोरनापाल,  15 सितंबर (छत्तीसगढ़ संवाददाता )। सुकमा जिले के अंतर्गत बारूदी सड़क के नाम से मशहूर एक मात्र भेज्जी सड़क में पंडित दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना कारगर साबित हो रही है। जिन घरों में शाम होते ही अंधेरा छा जाया करता था आज बिजली का बल्ब घरों को रौशन कर रहे हैं। मंगलवार को भेज्जी के गोरखा गांव में बिजली की शुरुआत की गई। इस इलाके में बिजली 10 साल बाद लौटी है जिसकी खुशी ग्रामीणों ने जाहिर की। ये कवायद माओवादियों द्वारा विरोध तोडफ़ोड़ के बावजूद प्रशासन गांवों में बिजली पहुंचाने प्रयासरत है ।
     दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना पर बीते डेढ़ वर्षों से सुकमा के अलग इलाकों में काम जारी है जिसमे दोरनापाल जगरगुंडा मेढवाई क्षेत्र,भेज्जी इंजराम इसके अलावा भी प्रयास किया गया पर कुछ जगहों पर खंभे तोड़ दिए गए जिसके बाद से काम बंद हो गया । उक्त इलाका इस लिए महत्वपूर्ण है कि इन इलाकों में सलवाजुड़ुम के बाद से कई इलाके प्रभावित हुए जिसके बाद से सरकार की योजनाएं आदिवासी सुदूर गांवो तक नही पहुंच पाई और धीरे धीरे सरकार के प्रति विश्वास कम होता चला गया जिसके बाद प्रदेश सरकार ग्रामीणों को मूलभूत योजनाओं से दोबारा जोडऩे का प्रयास कर रही है ।
    पुलिस हाउसिंग कर रही बिजली विस्तार
    गौरतलब है इलाका प्रभावित होने के चलते कोई भी ठेकेदार जल्दी यहां काम नही करना चाहता इस वजह से सड़क का काम पुलिस हाउसिंग के माध्यम से किया गया था । उसी प्रकार केंद्रीय गृहमंत्री  राजनाथ सिंह ने यह काम पुलिस को सौंपा था जिसके तहत दोरनापाल से जगरगुंडा और इंजराम से भेज्जी के गांवों में बिजली पहुंचाई जा रही है । मिली जानकारी के अनुसार भेज्जी तक बिजली के लाइन का विस्तार कर दिया गया है और वहीं जगरगुंडा मार्ग पर कांकेरलंका से आगे काम जारी है । फिलहाल सड़क से लगे गांवों को बिजली से जोड़ा जा रहा है धीरे धीरे अंदर के गांवों को भी बिजली से जोडऩे का प्रयास किया जाएगा । 
    116 गांव आजादी के बाद से प्रभावित
    सुकमा के सुदूर इलाको में आज भी लगभग 120 गांव आजादी के बाद से विद्युत की योजना से वंचित हैं । सड़क से 5 किलोमीटर के बाद के गांवों को प्रशासन ने पहुंचविहीन घोषित कर रखा है और बताया गया कि माओवादी संगठन सरकार की योजनाओं का विरोध करता है जिस वजह से बिजली के पुराने पोल भी तोड़ दिए गए । विद्युत विभाग से मिले दस्तावेजों के अनुसार 116 गांव आजादी के बाद से अविद्युतीकृत हैं । जबकि की गई पड़ताल के अनुसार लगभग 150 गांवों तक बिजली नही पहुँची । प्रदेश सरकार द्वारा की गई घोषणा के अनुसार 30 -30 गांवों को विद्युतीकरण हेतु स्वीकृति मिल रही है और जिले के अंतिम गांवों को बिजली से रौशन किया जाएगा ।
    रौशन होगा भेज्जी-जगरगुंडा  - एएसपी
    इस सम्बंध में सुकमा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नक्सल ऑप्स जितेंद्र शुक्ला ने बताया कि भेज्जी इंजराम व जगरगुंडा सड़क पर बिजली का काम पुलिस को सौंपा गया था भेज्जी का काम लगभग पूरा हो चुका है वहीं जगरगुंडा मार्ग पर कांकेरलंका के आगे काम शुरू है।
     इस वर्ष के अंत तक भेज्जी- जगरगुंडा के रास्ते मे आने वाले सभी गांव रौशन हो चुके होंगे।
    एक नजर आंकड़ों पर -
     कुल गांव         375
    विद्युतीकृत            -189
    2007 से प्रभावित।        - 70
    आजादी से प्रभावित          -116
    बिजली के स्वीकृत गांव        - 31
    स्वीकृत राशि -     12,17,15,360

     

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Posted Date : 02-Sep-2017
  • बचेली, 2 सितंबर। शराब के नशे में एक सहायक आरक्षक ने एनएमडीसी कर्मी के उपर बाईक चढ़ाकर उसको घायल कर दिया। घटना शुक्रवार की है। एनएमडीसी पुराना शॉपिंग सेंटर के पीछे बचेली पुलिस थाने में पदस्थ सहायक आरक्षक भुनेश्वर शर्मा ने वहॉ जमकर शराब पी। साथ ही वहां शराब पीकर पड़े एनएमडीसी कर्मचारी एसके मंडल को रास्ते से हटने का कहा पर मंडल हिलने की अवस्था में भी नही था। जिसके बाद सहायक आरक्षक ने जमीन पर पड़े कर्मचारी एसके मंडल पर उपर से अपनी बाईक को चार-पांच बार चढ़ा दी। 
    बताया यह जा रहा है कि आसपास के लोगो ने जब उसे रोका तो आरक्षक उन्हें गाली देने लगा।  वार्ड क्रं. 13 के पार्षद फिरोज नवाब ने  घायल एनएमडीसी कर्मचारी को अस्पताल पहुॅंचा जहॉ उसकी स्थिति सामान्य बताया जा रहा है। वही बचेली थाना प्रभारी सौरभ सिंह ने कहा कि सहायक आरक्षक की इस हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाएगी। 

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Posted Date : 27-Aug-2017
  • अधीक्षिका घर ले गई थी डॉक्टर को सुबह दिखाया
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    सुकमा, 27 अगस्त।  जिले में अध्यनरत आश्रम, छात्रावास व पोटाकेबिनों में अध्यनरत बच्चों के मौतों का सिलसिला नहीं थम रहा है। बीते एक सप्ताह में यह तीसरी मौत हुई है। छात्रा की तबीयत रात से खराब थी और आश्रम अधीक्षिका  डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय उसे घर ले गई जहां तबयित बिगडऩे पर आज सुबह डाक्टर के पाल ले जाया गया था। इधर वाहन चालक के शव घर तक ले जाने से  मना करने पर परिजन कावड़ पर लाश ले गए।
    इस संबंध में आश्रम अधीक्षिका हेमलता मरकाम ने बताया कि सब कुछ अचानक हुआ है। निवास लेकर गई थी अगर ज्यादा खराब होता तो उसे डॉक्टर के पास ले जाती। सहायक आयुक्त रामटेके ने  बताया कि रात में पूजा की तबियत खराब हुई थी। उसे सुबह गादीरास में भर्ती कराया गया। वहां से सुकमा लाया जा रहा था तो रास्ते में ही बच्ची ने दम तोड़ा दी। अगर किसी भी प्रकार की लापरवाही बरती गई तो कार्रवाई जरूर होगी। बच्चों के मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी।  
    मिली जानकारी के अनुसार कल रात करीब 9 बजे कन्या आश्रम गोन्दपल्ली की छात्रा पूजा पोडिय़ामी उम्र 10 वर्ष कक्षा पांचवी की छात्रा की तबियत अचानक खराब हुई। रात में चार-पांच बार दस्त हुआ। तो अधीक्षिका हेमलता मरकाम अपने घर गादीरास ले गई। सुबह जब और चार-पांच बार दस्त हुआ तो  डॉक्टर के पास सुबह करीब 7 बजे ले गई। स्थिति खराब देखकर डॉक्टर एसके देवांगन के साथ जिला अस्पताल लाया जा रहा था कि रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। जिला अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया।
    वाहन चालक ने किया मना, तो परिजन 
    कांवड़ में ले गए  शव
    छात्रा पूजा पोडिय़ामी नक्सल प्रभावित कोंडरे के पदामीपारा निवासी थी। उसके परिजनों को मौत के बादसूचित किया गया। शव को घर भेज दिया गया।  पीएम भी नहीं कराया गया।  
    मृत छात्रा का निवास गादीरास से करीब 9 किमी  दूर  है। जब शव को वापस उसके घर भेजा जा रहा था तब वाहन चालक ने कोंडरे से आगे जाने के लिए मना कर दिया। पूजा के परिजनों के अनुसार  वाहन चालक से घर तक ले जाने की बात हुई थी। लेकिन वो कोंडरे में ही छोड़ कर चला गया। परिजनों और चालक में काफी बहस भी हुई कि  आगे रास्ता थोड़ा खराब है लेकिन इतना भी नहीं कि वाहन ना जा सके। उसके बाद उसके परिजन कांवड़ में शव को  घर ले गए। 
    पहले हो चुकी दो मौतें  
    इससे पहले गादीरास पोटाकेबिन का छात्र बंशी यादव की मौत भी दस्त व बुखार से हुई थी। गुरूवार को इसकी तबियल खराब हुई थी उसके बाद उसे जिला अस्पताल दिखाया गया फिर बेहतर इलाज के लिए जगदलपुर भेजा गया लेकिन रास्ते में ही मौत हो गई। 
    वहीं 24 अगस्त को केरोतोंग स्थित कन्या आश्रम की छात्रा गंगी की भी मौत दस्त से बताई जा रही है। हालाकि बाद में पीएम में सिर पर चोट और खून जमा होने का मामला सामने आया था। ज्ञात हो कि बीते एक सप्ताह के भीतर यह तीसरी मौत हुई है।  
    इधर कोंटा विधायक कवासी लखमा ने दूरभाष पर चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षामंत्री सिर्फ दावे ही करते हैं। आश्रम, छात्रावास पोटाकेबिन खोलकर भूल गए है। कोई व्यवस्था नहीं है। न तो मेडिकल सुविधा और न ही अन्य सुविधा। लगातार हो रही बच्चों की मौत को लेकर शिक्षामंत्री से बात करूंगा। 

     

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Posted Date : 26-Aug-2017
  • इलाज के लिए जगदलपुर ले जाते रास्ते में दम तोड़ा
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    सुकमा, 26 अगस्त। जिले में एक और आदिवासी छात्र की मौत हो गई। पोटाकेबिन में अध्ययनरत छात्र को दो दिन से बुखार आ रहा था। बेहतर इलाज के लिए जगदलपुर रेफर किया गया लेकिन रास्ते में ही छात्र ने दम तोड़ दिया। 
    पोटाकेबिन गादीरास में पहली का छात्र बंशी (5 साल) पिता रामू सोनाकुकानार के राउत पारा निवासी था। गुरुवार को बंशी यादव को तेज बुखार आया। पोटाकेबिन अधीक्षक ने इलाज के लिए गादीरास के डॉक्टर को दिखाया। जहां डॉक्टर ने दवाई दी, लेकिन दूसरे दिन शुक्रवार को सुबह बंशी ने उल्टी की तो अधीक्षक ने तत्काल बंशी को गादीरास अस्पताल ले गया, वहां से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दौरान उसके पिता रामू को सूचना दी गई और वो भी जिला अस्पताल आ गया।
    जिला अस्पताल में दिनभर इलाज चला। गुलकोज एवं ब्लड चढ़ाया गया। हालात गंभीर देखकर उसे शाम करीब 4 बजे बेहतर इलाज के लिए जगदलपुर रेफर किया गया, लेकिन वहां पहुंचने से पहले डिमरापाल में ही बंशी ने दम तोड़ दिया। रात में ही शव को उसके घर भेज दिया गया। 
    नहीं हुआ पीएम 
    बंशी का शव देर रात को उसके घर भेज दिया गया। उसका पीएम नहीं हुआ। अधीक्षक ने बताया कि पीएम के लिए पिता ने मना किया और लिखित में भी दिया कि पीएम नहीं करना है। वहीं उसके पिता रामू ने बताया कि मैंने पीएम के लिए मना किया था। उस वक्त मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।
    समय पर इलाज कराया गया
    पोटाकेबिन अधीक्षक चेरपा ने बताया कि बुखार आने पर तत्काल गादीरास अस्पताल लेकर गया। वहां इलाज किया गया। उसके बाद जिला अस्पताल और फिर जगदलपुर ले जाया गया लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।
    नहीं था मलेरिया
    गादीरास के डॉक्टर एसके देवांगन ने बताया कि बंशी को बुखार था। मलेरिया चेकअप कराया गया लेकिन नहीं निकला। इसलिए जिला अस्पताल भेजा गया। 
    कल मिली थी सूचना 
    पिता रामू ने बताया कि कितने दिन से तबियत खराब थी वो नहीं पता लेकिन कल सुबह सूचना मिली तो मैं जिला अस्पताल गया। उसके बाद जगदलपुर भेजा गया लेकिन मेरा बेटा नहीं बच पाया। 
    बंशी के घर पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी राजेन्द्र ठाकुर ने बताया कि बच्चे को बुखार आ रहा था। उसका इलाज पहले गादीरास, सुकमा फिर जगदलपुर भेजा गया। कल खुद वहां जाकर मैंने बच्चे को देखा था और डॉक्टर से बात की थी। इलाज सही समय पर शुरू हो गया था। 
    उसी पोटाकेबिन में दो दर्जन बुखार पीडि़त
    उसी पोटाकेबिन में वायरल, सर्दी से करीब दो दर्जन बच्चे पीडि़त हैं। डॉक्टर ने वहां केम्प लगा रखा है। डॉक्टर की माने तो मौसम के कारण इतने ज्यादा बच्चे प्रभावित हैं। सबका चेकअप किया जा रहा है।

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Posted Date : 20-Aug-2017
  • राष्ट्रीय राजमार्ग-30 निर्माण की कछुआ चाल 
    अमन सिंह भदौरिया
    सुकमा, 20 अगस्त (छत्तीसगढ़)। सुकमा जिले का नेशनल हाइवे 30 इन दिनों बदहाल है और लगातार हो रही बारिश के चलते आमजीवन प्रभावित हो रहा है । बीते 6 घंटे तक दोरनापाल से मिसमा के बीच 100 से अधिक गाडिय़ां फंसी रही जिस वजह से घंटो यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी वहीं लंबे समय से चल रहा काम अब तक 50 प्रतिशत भी पूरा नही हो पाया जबकि सुकमा से कोंटा की दूरी मात्र 78 किलोमीटर है । 
     सुकमा से कोंटा मार्ग अब तलक 50 प्रतिशत भी पूरा करवाने में नाकाम रही है । बारिश की वजह से जगह-जगह गाडिय़ां फंस रही है तो ठेकेदार द्वारा भी मार्ग की बहाली के लिए किसी तरह की व्यवस्था नही की जा रही है । सुबह 7 बजे से लगे जाम को दोरनापाल पुलिस द्वारा बहाल किया गया ।
    ज्ञात हो कि 2007 में एनएच 30 के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने राशि जारी की थी । जिसके बाद से कागजी प्रक्रिया शुरू कर दिया गया था आज करीब 10 साल पूरा होने को हैं लेकिन अब तक एनएच 30 का निर्माण का स्तर मात्र 23 किलोमीटर तक का ही रहा है  सुकमा से दोरनापाल के बीच 10 किलोमीटर में दिक्कतें आ रही है वहीं  दोरनापाल से कोंटा तक का सफर बड़ा ही पीड़ादायक हैं । कोंटा इंजराम के बीच टांस-टॉय द्वारा विगत सत्र में नदी से निकाले गए रेत के ढेर को पड़ोसी राज्य तेलंगाना में बेच दिया गया था जिसके बाद से कोंटा की ओर से कार्य की गति शून्य हो गयी । इनदिनों कोंटा दोरनापाल मार्ग दलदली हो चुका है ।
    गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के बदहाल होने की वजह से आवागमन जहां प्रभावित रहता है वहीं मुश्किलों के बीच यात्री स्वास्थ्य-चिकित्सा, व अन्य जरूरी काम को लेकर इसी रास्ते से यात्री बसों व टैक्सियों से कोंटा या तेलंगाना पहुंचता है वहीं प्रशासनिक स्तर के उच्च से निम्न स्तर के अधिकारी इन सभी झमेलों से बचकर सुकमा से मोटू होते हुए कोंटा जाना पसंद करते है । ज्ञात हो कि सुकमा से मोटू मार्ग सुगम है सुकमा से मलकानगिरी 28 कि.मी. वहां से कालीमेला 42 कि.मी. कालीमेला से मोटू लगभग 90 किमी कुल 160 किमी का सफर है मोटू से चार पहिया वाहन नदी पार कराने के सुविधा भी इनदिनों कोंटा में उपलब्ध है जिस वजह से प्रशासनिक अधिकारी इसी रास्ते से आवागमन करते हैं । पर यात्री बसों में जाने वाले आमलोगों को ये सुविधा उपलब्ध नही है ।
     हमने कई बार आईना दिखाया पर आईना नही देखना चाहती सरकार। सड़कों का जाल बहोत दूर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अब तक 50 प्रतिशत का नही हुआ। अब सरकार की इच्छा शक्ति खत्म हो चुकी है 22 अगस्त को दोरनापाल में कांग्रेस द्वारा एनएच 30 को लेकर आंदोलन करेगी जब मुख्यमंत्री का सुकमा आगमन होता है तब कार्य गति रातों रात बढ़ जाती है फिर खत्म हेलीकॉप्टर छोड़ सड़क के रास्ते से अगर अभी  प्रदेश के मुखिया सुकमा से कोंटा चल कर देखें तब पता चलेगा कि सुकमा करवटें बदल रहा है या झटके खा रहा है।
    -कवासी लखमा, विधायक कोंटा                    
                               

     

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Posted Date : 31-Jul-2017
  • पदस्थ डॉक्टर पिछले डेढ़ साल से नहीं आया, दवाईयां कालातीत
    सतीश चाण्डक 
    सुकमा, 31 जुलाई (छत्तीसगढ़)। प्रदेश सरकार जहां बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा करती है लेकिन हकीकत उन दावों से लाखों मील दूर है। सुकमा जिले का एक स्वास्थ्य केन्द्र गोरली जहां आसपास के लगभग एक दर्जन गांव के ग्रामीण इलाज कराने आते है। उन सभी गांवों की जनसंख्या लगभग ढाई हजार है और उनका इलाज एकमात्र ड्रेसर करता है। क्योंकि वहा पदस्थ डाक्टर पिछले डेढ़ साल से गायब है। हैरत की बात है कि यह ड्रेसर  चार से पांच प्रसव भी करा चुका है। उस अस्पताल की अधिकांश आवश्यक दवाएं एक्सपायर हो चुकी हैं। इधर अधिकारी व्यवस्था सुधारने की बात कह रहे हैं। 
    जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी. दूर स्थित गोरली पंचायत जहा स्वास्थ्य सेवाए बदहाल है। उस गांव की जनसंख्या लगभग 250 है लेकिन आसपास के करीब एक दर्जन छोटे-मोटे गांवो की जनसंख्या मिलाकर करीब ढाई हजार है। लेकिन इस इलाके का सबसे बड़ा स्वास्थ्य केन्द्र गोरली में ही स्थित है। बकायदा यहा भवन बना हुआ है। और भवन भी व्यवस्थित है। कुछ साल पहले ये इलाका नक्सल प्रभावित था लेकिन पिछले कुछ सालो से यहा नक्सल गतिविधिया कम है। गांव में पचास सीटर आश्रम भी संचालित है। 
    ढाई साल से डाक्टर गायब 
    यहा पदस्थ आरएमए डाक्टर नितिन मानिकपुरी पिछले डेढ़ साल से गायब है। वहा पर मौजूद ड्रेसर व गांव वालों ने बताया कि वो काफी समय से यहा नहीं आ रहे हंै। वो ब्लाक मुख्यालय में ही रहते हैं। जबकि यहां क्वाटर भी बने हुए है। इससे पहले पदस्थ डाक्टर यहा रहकर इलाज करते थे। वहां रखा रजिस्टर जिसमें हर दिन करीब दस से पन्द्रह मरीजों का पंजीयन किया जाता है। और उनका बकायदा इलाज भी किया जाता है। ये इलाज डाक्टर की गैरमौजूदगी में ड्रेसर करता है। 
    आवश्यक दवाई भी हुई एक्सपायर 
    स्वास्थ्य केन्द्र गोरली में रखे दवाईयों के बक्से जिसमें अधिकांश दवाईयां एकस्पायर हो चुकी हैं। बच्चों को दी जाने वाली उल्टी, दस्त की दवा और ग्लूकोस भी एक्सपायर हो चुका है। वही सांप काटने की दवा भी नहीं है। क्योंकि यह इलाका जंगल और पहाड़ी से घिरा हुआ है। और सांप काटने के मामले भी ज्यादा आते है। लेकिन उन्हें रिफर कर दिया जाता है। इसके अलावा टिटनेस भी एक्सपायर हो चुका है। 
    पिछले कई सालों से अपनी सेवाएं दे रहा ड्रेसर 
    यहा एकमात्र पदस्थ कांकेर निवासी ड्रेसर सुरेश सोढ़ी जो इस नक्सल प्रभावित इलाके में पिछले 2002 से अपनी लगातार सेवाए दे रहा है। पिछले ढाई सालों से ये मरीजों का इलाज कर रहा है। जब ये अवकाश पर कांकेर जाते है तो यह स्वास्थ्य केन्द्र बंद रहता है। इन्होंने बताया कि डाक्टर की गैरमौजूदगी में यहां इलाज करना मजबूरी हो जाता है। क्योंकि आवागमन के साधन नहीं होने के कारण दूर-दराज से ग्रामीण पैदल चलकर आते हैं। 
    यहां नेटर्वक नहीं, बहुत होती है परेशानी 
    ग्रामीणों ने बताया कि यहा पहले डाक्टर पदस्थ थे लेकिन डेढ़ साल से कोई डाक्टर नहीं है। साथ ही अंदरूनी इलाका होने के कारण यहां फोन की सुविधा भी नहीं है। इसलिए ड्रेसर से इलाज कराना हमारी मजबूरी है। साथ ही आवागमन के साधन नहीं है। इसलिए बहुत परेशानी होती है। ऐसा नहीं है कि इस बात की जानकारी विभाग के अधिकारियों को नहंी है। लेकिन कोई व्यवस्था सुधारने का प्रयास नहीं करता। 
    व्यवस्था सुधारने का किया जा रहा प्रयास 
    सीएमएचओ विरेन्द्र ठाकुर ने चर्चा में कहा कि काफी जगहों पर अव्यवस्था है। लेकिन जल्द ही व्यवस्था सुधारने का प्रयास किया जा रहा है। उस स्वास्थ्य केन्द्र में डाक्टर को पदस्थ किया जाएगा। और ग्रमाीणों को सुविधाएं देने का प्रयास विभाग हरसंभव कर रहा है। 

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Posted Date : 27-Jul-2017
  • अब तक बिजली नहीं, बड़ेगुरबा-जंगनपाल के लोगों में नाराजगी

    सतीश चाण्डक
    सुकमा, 27 जुलाई (छत्तीसगढ़)।  जिले का बड़ेगुरबा और जंगनपाल बिजली की आस लगाए बैठा है। पिछले सात माह से बिजली के पोल लग चुके हैं। उस पोल पर तार भी खींच दी गई, टांसफार्मर अभी तक  िनहीं लगा है। जनवरी में विद्युतीकरण होने की बात विभाग कर रहा था लेकिन अभी तक कार्यपूर्ण नहीं हुआ। जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली शुरू करने के एवज में कंपनी के लोग  पैसे भी वसूले । वही कंपनी में काम में लगे मजदूरों का भुगतान भी नहीं हुआ है। 
    राष्ट्रीय राजमार्ग 30 से महज 6 किमी. दूर स्थित बड़े गुरबे गांव जहां करीब 1800 की जनसंख्या है। वही पास के बोदारस पंचायत जहां करीब 100 घर है। इस इलाके में सिर्फ ये दो पंचायतें ही हंै जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची। इन दोनों गांवों में आदिवासी समुदाय के लोग निवासरत है। दोनों गांवो में राजीवगांधी विद्युतीकरण योजना के अन्तर्गत विगत कई महीनों से गांव में विद्युत पोल लग चुके हंै। उन पोल पर तार भी खींच दिए गए। लेकिन टांसफार्मर अभी तक नहीं लगा। हालांकि दो माह पहले गांव में टांसफार्मर लाकर रख दिए गए। विद्युतीकरण कर रहेे कंपनी के लोगों ने कहा था कि मार्च माह के अंतिम दिनों में गांव में बिजली शुरू कर दी जाऐगी। लेकिन वर्तमान में अभी तक नहंी हुआ।  
    बिजली शुरू करने के एवज में लिए पैसे 
    ग्रामीणों का आरोप है कि  कुछ माह पहले विद्युतीकरण करने वाली कंपनी का मेनेजर गांव के ग्रामीणों से बिजली कनेक्शन के नाम पर पैसा वसूल लिए। किसी  से 100 तो कही से 250 इस तरह गांव से करीब पचास हजार तक वसूल लिए।  एक सप्ताह के भीतर बिजली कनेक्शन देने की बात कही गई। जानकारी के अभाव में ग्रामीणों ने पैसे दे दिए। जबकि नियम के मुताबिक ग्रामीणों को कनेक्शन के एवज में कोई पैसा नहीं देना है। 
    मजदूरी का पैसा भी बकाया 
    ग्रामीणों ने बताया कि गांव में राजीव गांधी विद्युतीकरण का कार्य शुरू हुआ। जिसमें रोजगार के लिए ग्रामीणों ने मजदूरी की। गांव में पोल लगाना, तार खिंचवाना, टांसफार्मर लगाना ऐसे कई कार्य दो माह किए। लेकिन उन मजदूरों का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है।   जब कंपनी के लोगों से संपर्क किया गया तो पैसे देने की बात कही गई है। 
    तकलीफ  होती है जब दूसरे गांवों को रोशन देखते हंै - आयताराम 
    सरपंच पति आयताराम मण्डावी ने चर्चा में बताया कि जब ग्रामीण  दूसरे गांवों, ब्लाक, या जिला मुख्यालय जाते हंै। और यहा लाईट, फंखे, टीवी देखते तो बहुत तकलीफ  होती है। हमारे गांव में ही यह सुविधा आने में देरी क्यों हो रही है। जब तक गांव में खंम्बे नहीं लगे थे तब उम्मीद नहीं थी। लेकिन अब सब कुछ हो गया और देरी हो रही है उसमें काफी दुख लग रहा है। 

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Posted Date : 21-Jul-2017
  • दोरनापाल। लगातार हुई बारिश ने बस्तर को प्रभावित किया है। राष्ट्रीय राजमार्ग- इंद्रावती पुल, मलकानगिरी पुल समेत अंदरूनी इलाकों का कटाव बना रहा नदी नाले उफान पर रहे। वहीं शबरी जो दो राज्यों (छत्तीसगढ़-ओडिशा) के बीच से होकर गुजरती है। के सरहदी इलाकों में आने वाले ओडिशा के खेतों में नदी का पानी लबालब भर झीलनुमा आकार ले चुका है।  ओडिशा के आदिवासी  मछली पकड़ रहे हंै। टीन की बनी छोटी से नाव जिसका वजन मात्र 10-12 किलो होगा से जाल में फंसी हुई मछलियों को निकालने में लगे हुए थे। बारिश में इन आदिवासियों का पेट से लेकर गुज़ारे तक का जुगाड़ हो रहा है।  ये तश्वीर ओडिशा के पोडिय़ा की है। तस्वीर / छत्तीसगढ़  / अमन सिंह भदौरिया 

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Posted Date : 21-Jul-2017
  • अब मलकानगिरी में चल रहा इलाज 
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    सुकमा, 21 जुलाई। जानकारी का अभाव कहें या फिर अंधविश्वास। लेकिन यह सच है कि एक बाप ने अपने तीन महीने के बच्चे के साथ वो किया जो कभी सोच नहीं सकते। किसी बीमारी से बच्चे का पेट फूला और बुखार आने लगा तो बाप ने झाड़ फूंक कर बच्चे के पेट को जख्मी कर दिया। हालात गंभीर हुई तो मलकानगिरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। 
    जानकारी के मुताबिक सुकमा जिले के पोंगाभेज्जी गाँव जो घोर नक्सल प्रभावित है। वहां का निवासी कोसा पदामी ने कल अपने तीन महीने का बच्चा राजेश को जिला अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया। उसके बाद मलकानगिरी जिला अस्पताल में अपने तीन महीने के बच्चे को भर्ती कराया। बताया कि कुछ दिनों से उसके तीन महीने का बच्चा राजेश पदामी का पेट फूल रहा था। जानकारी का अभाव या फिर अंधविश्वास के चलते कोसा ने अपने बेटे राजेश के पेट में छेद नुमा जख्म दे दिए। वो भी एक दो नहीं काफी छेद किए। जिसके कारण बच्चे की हालत गंभीर हो गई। उसके बाद उस बच्चे को सीमावर्ती राज्य ओडिशा के मलकानगिरी जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसका इलाज चल रहा है।

     

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