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  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    पिथौरा, 20 सितंबर। कल गिरना में एक ग्रामीण को पटक पटक के मारने वाले हाथियों का झुंड अब समीप के ग्राम बरेकेल एवम ठाकुरदिया खुर्द तक पहुच गए है है। हाथियों द्वारा ठाकुर दिया खुर्द के श्यामकुमार के खेत मे नया लग रहा धान खाने की भी खबर है।
    पिथौरा क्षेत्र में 2 वर्षो बाद आए हाथियों ने उत्पात मचाने प्रारम्भ कर दिया है।कल एक गर्मीन कि हत्या के बाद हथिईओ का दल पिथौरा मार्ग पर ठाकुर दिया खुर्द तक पहुच गया यहाँ खेतो से होते हुए बरेकेल पहाड़ी की ओर बढ़ गए।अभी मिली जानकारी के अनुसार बरेकेल पहाड़ी से हथिईओ का झुंड फिर से वापस निकल गया है।
    ओडिशा की ओर से आए 4 और हाथी
    गिरना जंगल मे डेरा जमाए हाथियों के अलावा ओडिशा सीमा से लगे सिंगारपुर के पास जोंक नदी पर करते 4  हाथियों को वहाँ के ग्रामीणों ने गिरना क्षेत्र के अपने साथियों को बताया। जिससे  क्षेत्र में दहशत   है। इन 4 हाथियों को मिलाकर अब इस जंगल में हाथियों की संख्या 9  हो गई है।
    खेतों को नुकसान हो रहा
    हाथियों के झुंड के क्षेत्र में भ्रमण से जनहानि के साथ अब धनहानि भी होने लगी है। हाथी जिस खेत से जा रहे हंै। उस खेत में फसल को रौंदते चल रहे हंै। चूंकि क्षेत्र में विगत दो दिनों से बारिश हो रही है लिहाजा हाथियों के आवागमन से सड़कें भी खराब होने लगी हंै।
    एक वनरक्षक  
    गिरना क्षेत्र में आधा दर्जन से अधिक हाथियों से ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए मात्र एक वन रक्षक तैनात है। ग्रामीणों के अनुसार उक्त वन रक्षक द्वारा ग्रामीणों को ही जंगल में हथियों का लोकेशन लेने भेजा जा रहा है।

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  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    पिथौरा, 19 सितंबर। क्षेत्र में भालू एवम तेंदुए की दहशत के बाद बीती रात  पिथौरा वन क्षेत्र में घुस आए हाथियों के एक झुंड ने गिरना जंगल में आज सुबह फुटू तोडऩे गए एक ग्रामीण को कुचल कर मार डाला जबकि कुछ ग्रामीणों के घायल होने की भी खबर है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कोई वन कर्मी या अधिकारी घटना स्थल नहीं पहुंच पाया है।  
    पिथौरा वन परिक्षेत्र में  आज अलसुबह ग्राम गिरना निवासी घासु बरिहा अपने कुछ साथियों के साथ जंगल से फुटू लेने गया था।   झाडिय़ों के पीछे  मौजदूर 5 हाथियों ने घासु एवम उसके साथियों को दौड़ाया। 
    इस दौरान  घासु हाथी की चपेट में आ गया  जबकि उसके साथी गांव की ओर भाग निकले। गांव जाकर घटना के बारे में बताया। ग्रामीणों ने फोन पर वन कर्मी एवम अधिकारियों को घटना की जानकारी दे दी। परन्तु दोपहर तक किसी भी वन कर्मी के घटना स्थल नहीं पहुंचे थे।  कुछ युवकों ने हौंसला जुटाया और घटनास्थल पहुंचे। जहां ग्रामीण बुरी तरह कुचल हुआ मिला।
    इधर  स्थानीय रेंजर एक बार फिर मुख्यालय से बाहर थे। वहीं दूसरी ओर गिरना एवम आसपास के ग्रामीण  हाथियों को खदेडऩे का प्रयास कर रहे हैं।
    हाथियों की संख्या पांच 
    हाथियों के हमले से बच कर वापस ग्राम पहुचे ग्रामीणों के अनुसार हाथियों की संख्या 5 है। इसके पूर्व भी 2 वर्ष पूर्व  इस क्षेत्र में हाथियों ने डेरा जमाए था उसके बाद आज प्रात: ग्रामीणों ने हाथियों को देखा। ज्ञात हो कि जिले के सिरपुर एवम बार अभ्यारण्य के आसपास भी हाथियों ने अपना कॉरिडोर बना कर डेरा जमाए हुए है। गिरना जंगल में पहुंचे हाथियों के ओडिशा की ओर से आने की बात जानकारी ग्रामीणों ने दी है। गिरना जंगल  ओडिशा के जंगलों से मिल हुआ है।

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  • बीती रात पिथौरा राजा सेवैय्या में देखा गया
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    पिथौरा, 15 सितंबर। नगर से मात्र तीन किमी दूर एक तेंदुए का लगातार दिखाई देना क्षेत्रवासियों में दहशत का कारण बना हुआ है। बीती रात राजा सेवैया स्कूल में युवकों का सामना तेंदुए से हुआ।  ज्ञात हो कि कोई तीन दिन पहले ही उक्त तेंदुए के राजा सेवैय्या में एक बछड़े का शिकार आमद की सूचना दी थी।  पदस्थ रेंजर के मुख्यालय के बाहर रहने से उक्त तेंदुए को जंगल की ओर खदेडऩे के कोई उपाय वन विभाग द्वारा नहीं किया गया।       
    मिली जानकारी के अनुसार बीती रात तकऱीबन 8 बजे कुछ युवक राजा सेवैया स्कूल के मैदान पर रात के समय टहल रहे थे, तभी उन्हें आसपास कुछ हलचल का एहसास हुआ। मोबाइल के टॉर्च पर देखने पर कुछ ही दूरी पर तेंदुआ दिखा। युवक भाग कर स्कूल परिसर में बने रसोई कमरे पर जाकर अंदर से दरवाजा बंद कर अपनी जान बचाई।  उसके बाद अपने साथियों को फोन लगाकर उनके आसपास तेंदुए होने की सूचना दी तथा मदद मांगी। तब टप्पा सेवैया के 15-20 युवक उन्हें लेने पहुँचे, उन्होंने भी तेंदुए को देखा। इससे कुछ वर्ष पहले गोपालपुर मार्ग पर खेत में झोपड़ी पर सो रहे किसान को अपना शिकार बनाया था तथा टेका ग्राम में शाम टीवी देखने पड़ोसी के घर जा रहे बच्चे को तेंदुआ उठाकर ले गया था।
    कुत्ते बन रहे शिकार
    इधर ग्रामीणों के अनुसार तेंदुआ लगभग सप्ताह भर से प्रतिदिन गांव के आसपास कामाक्ष्या मंदिर तक घूम रहा है। इस बीच उसने दो आवारा कुत्तों को भी अपना शिकार बनाया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे जब भी वन कार्यालय को घटना की जानकारी देने जाते हैं तब रेंजर मुख्यालय में नहीं मिलते।
    रात में ही की सर्चिंग-कुरैशी
    स्थानीय वन विभाग के डिप्टी रेंजर शकील कुरैशी ने इस प्रतिनिधि को बताया कि उन्हें इसकी सूचना मिलते ही सेवैय्या पहाड़ी की सर्चिंग की, परन्तु तेंदुआ नहीं दिखा। इसके बावजूद आसपास के गांवों में ग्रामीणों को सतर्क रहने हिदायत दी गई है।

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  • ग्रामीणों का इंकार, कहा रुपयों की वापसी पर लगा रहा आरोप
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    पिथौरा, 4 सितंबर। ग्राम अमलीडीह निवासी उदयराम साहू ने ग्रामीणों द्वारा उनका हुक्का पानी बन्द कर देने की शिकायत स्थानीय पुलिस थाना में कई है। इधर अमलीडीह के ग्रामीणों ने पुलिस के सामने उदय के आरोपो को सिरे से नकार दिया है।
    अमलीडीह के उदयराम पिता उमाशंकर ने अपने ही ग्रामवासियों पर उसे ग्राम से बहिष्कृत करने का आरोप लगाया है।उमाशंकर के अनुसार ग्राम बहिस्कार के कारण उसके यहाँ कोई मजदूर तक काम करने नही आता जिससे उसकी 12 एकड़ जमीन पड़त में रह गयी है। तालाब में भी मुझे निस्तार के लिये मन किया जाता है। यह तक कि ग्राम में हुए कबड्डी खेल का निमंत्रण युवकों ने किया था। और उसका निमन्त्रण उसे भी दिया गया था। परंतु ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिलते ही उन्होंने युवकों को मुझसे निमन्त्रण पत्र वापस लेने भेज दिया। इन्ही युवकों के माध्यम से उसे ग्रामीण बहिस्कार की सूचना मिली।
    उदय के उक्त आवेदन के बाद स्थानीय पुलिस ने मामले की जांच में ग्रामीणों के बयान लिए। जिसमें किसी भी ग्रामीण ने बहिष्कार की बात नही की। बल्कि इस सामाजिक मामला बताया। ग्रामीणों के अनुसार उदय अपने समाज का अध्यक्ष था । इस दौरान उसने सामाजिक रुपयों की गड़बड़ी की थी। उसी रुपयों की वापसी की बात करने पर उसके द्वारा ऐसा आरोप लगाया जा रहा है।

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  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    पिथौरा/बसना, 2 सितंबर। बसना पुलिस ने आज दो वाहनों से 81 किलो गांजा बरामद कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। 
    पुलिस के अनुसार सूचना के आधार पर आज चेकिंग के दौरान ओडिशा की ओर से आ रही एक कार एवं स्कार्पियो से 81 किलो गांजा बरामद किया गया।
     आरोपियों अनूप कुशवाह मप्र, राजकुमार विश्वकर्मा उप्र, पिंकू बढ़ई कटनी, रामनंद कुशवाह मप्र एवं अंकित गुप्ता मप्र को गिरफ्तार किया गया। इन सभी से पूछताछ जारी है। 

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  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    महासमुन्द, 30 अगस्त। आज  जिले के सिरपुर इलाके के 42 गांवों के लगभग 3 हजार हाथी पीडि़त किसान एसडीएम दफ्तर के सामने धरने पर हैं। सुबह  12 बजे से ये जिला मुख्यालय पहुंचे हुए हैं। इनका कहना है कि उनके खेतों में पानी के कारण वैसे भी धान की फसल ठीक नहीं है। रहा सहा फसल भी हाथियों ने बर्बाद कर दिया। जिला प्रशासन के अलावा राज्य सरकार इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। 
    समाचार लिखे जाने तक किसानों का धरना स्थल में आना जारी था।  अब तक किसानों के समर्थन में महासमुन्द के किसी  भी राजनीतिक पार्टी ने आमद नहीं दी है। किसान इस बात का जिक्र  भी कर रहे हैं। किसानों   राज्य सरकार को कोसते हुए  कहा  है कि अब रमन सरकार और किसानों का लेन-देन समाप्त है। सरकार के पास किसानों के हित के लिए न तो कोई योजना है और न ही किसानों के प्रति कोई विचार है। लिहाजा कई सालों से महासमुन्द के गांवों में हाथियों का आतंक जारी है, किसान और ग्रामीण मारे जा रहे हैं और राज्य सरकार आंख मूंदे किसानों के मेहनत का आराम से लाभ उठा रही है। 
    मालूम हो कि पिछले 4 सालों से महासमुन्द का सिरपुर इलाका हाथियों के उपद्रव का शिकार होता आ रहा है। हाथियों के कारण किसानों के खेतों में खड़े फसलों को भारी नुकसान हुआ है और घरों तथा झोपडिय़ों में रखे अनाज को हाथियों ने अपना निाशाना बनाया है। वहीं ग्रामीणों की मौतें हुई हैं। इनसे निपटने किसानों ने तरह-तरह के नुस्खे अपनाये हैं लेकिन न तो हाथी यहां से भागे और न ही किसानों का फसल ही बचाया जा सका।  किसानों ने इससे पहले कई बार जिला प्रशासन तथा शासन की ओर ध्यान आकृष्ट किया है लेकिन अभी तक किसी भी तरह का कोई ठोस पहल किसानों के हित में नहीं हो सका है। 
    जानकारी के अनुसार हाथी प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से प्रति एकड़  9 हजार रुपये का मुआवजा  मिलता है जिसे 25 हजार करने की मांग की गई है।  किसानों के मुताबिक यहां एकत्र होने के दोपहर बाद इनका काफिला कलेक्टोरेट पहुंचेगा और मुख्यमंत्री के नाम यह ज्ञापन सौंपा जाएगा। 

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  • सभी रायपुर के, ओडिशा से घूमकर लौट रहे थे 

    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    पिथौरा, 20 अगस्त। आज सुबह सरायपाली के पास  एनएच 53 के किनारे  ग्राम भोथलडीह के पास एक ट्रक की ठोकर से कार सवार एक युवक की मौत हो गई जबकि चालक समेत 3 गंभीर रूप से जख्मी हैं। इन्हें रायपुर भेजा गया है। ये सभी रायपुर देवेन्द्र नगर निवासी हैं जो ओडिशा घूमने गए थे और रायपुर लौट रहे थे।
    पुलिस के अनुसार आर्टिका कार क्रमांक सीजी 04 एलआर 1112 भुवनेश्वर से रायपुर की ओर लौट रही थी कि भोथलडीह के पास आज सुबह 7 बजे तेज रफ्तार  ट्रक ने ठोकर मार दी। ग्रामीणों ने 108 एंबुलेंस बुलाकर युवकों को कार से बाहर निकाला तब तक एक युवक दम तोड़ चुका था। तीन युवकों को गंभीर हालत में रायपुर अस्पताल भेजा गया है। 
    मृतक का नाम कपिल पटेल पिता  भरत भाई पटेल देवेन्द्र नगर, रायपुर बताया गया है। वहीं घायलों में सुमीत बाफना पिता महेन्द्र बाफना, गंगाराम निषाद पिता मोहन निषाद और सन्नी (कार चालक) है। ये सभी घायल देवेन्द्र नगर और इसके आसपास के हैं। मिली जानकारी के अनुसार ये सभी ओडिशा घूमने गए थे और आज रायपुर लौट रहे थे। 

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  • 36 रजिस्ट्री में गवाह जलकी के पूर्व सरपंच ने कहा
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    महासमुन्द, 11 अगस्त। जलकी के पूर्व सरपंच गजानंद पटेल का कहना है कि जमीन मंत्रीजी ने खरीदी है और मुझे इस मामले में जबरन फंसाया जा रहा है। अफवाह है कि मैंने सरकारी जमीन की खरीदी बिक्री की। मैं तो लगानी जमीन ही खरीदता रहा। लोग अफवाह उड़ा रहे हैं कि मेरे कई पॉली हाउस हैं और रात को जाकर कार्यालय में रजिस्ट्री करवाता था। 
    गजानंद पटेल के मुताबिक उसके स्वयं के अलावा गांव के कुछ अन्य किसानों के नाम कुल 6 पॉली हाउस हैं और उनकी गिनती के क्षेत्र के उन्नत व प्रभावशाली किसानों में होती है। उनका कहना है कि मैंने करीब एक एकड़ जमीन बेची है। जिस संबंध में कलेक्टर न्यायालय से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जिसका जवाब देने कल मैं महासमुन्द गया था। शासकीय पट्टे की जमीन बेचने का आरोप लगाकर कलेक्टर न्यायालय से नोटिस जारी किया गया था, जो गलत है। मैंने भूमि स्वामी हक की जमीन बेची है। मेरे जवाब से कलेक्टर नाराज हुए, यह सही नहीं है।
    ज्ञात हो कि कलेक्टर कोर्ट में जमीन खरीदी बिक्री की हो रही जांच के 50 प्रकरणों में से 36 रजिस्ट्री में गजानंद पटेल  के गवाह के रूप में हस्ताक्षर है। गांव के किसानों ने जमीन गजानंद के पास बेचना बताया है। कल गुरुवार को उसकी कलेक्टर के सामने  पेशी थी। आज उसके गांव लौटने के बाद दोपहर फोन पर छत्तीसगढ़ ने उससे बातचीत की।
    इधर जलकी के किसानों ने कलेक्टर को दिये अपने बयान में कहा है कि गजानंद अपने मार्शल वाहन में बैठाकर किसानों को गांव से महासमुन्द लेकर जाते थे और देर शाम अंधेरा होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री कराते थे। किसानों को बाजार दर के बहुत कम दाम देकर जमीन खरीदी किया करते थे।  इस तरह मंत्री को बेचे गये जमीन के 70 से 80 प्रतिशत जमीन का सूत्रधार गजानंद पटेल है। 
    जलकी स्थित मंत्री के रिसोर्ट और फार्म हाउस की जमीन खरीदी मामले के दौरान कल 10 अगस्त गुरुवार को गजानंद की पेशी थी।  
    गौरतलब है कि गजानंद पटेल सन 1994 से 1999 तक और 2004 से 2009 तक दो कार्यकाल जलकी के सरपंच थे। 2004 से 2009 के बीच ही ज्यादातर जमीनों की खरीदी बिक्री हुई है। मंत्री के परिजनों के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री हो रही थी। 
    इधर जलकी के किसानों ने कलेक्टर को दिये अपने बयान में कहा है कि गजानंद अपने  वाहन में बैठाकर किसानों को गांव से महासमुन्द लेकर आता था और देर शाम अंधेरा होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री कराते थे। किसानों को बाजार दर के बहुत कम दाम देकर जमीन खरीदी किया करता था। इस तरह मंत्री को बेचे गये जमीन के 70 से 80 प्रतिशत जमीन का सूत्रधार गजानंद पटेल है। 
    बताया जा रहा है कि पंचायतों को नक्शा, खसरा और बी वन संधारण की जिम्मेदारी दी गई थी। कुछ वर्ष पूर्व पहले तक पंचायतों में राजस्व रिकार्ड रखा जाता था जिसका श्री पटेल ने जमकर दुुरुपयोग किया और पंचायती राज व्यवस्था में दिए गए अधिकारों का खुल्लमखुल्ला धज्जियां उड़ाया और किसानों की काबिल काश्त जमीनें बिकवा दी। 
    मालूम हो कि मंत्री बृजमोहन के कृपा पात्र रहे इस गजानंद को दो साल पहले कृषक रत्न पुरस्कार मिला था तब भी लोगों में यह चर्चा थी कि गजानंद को मंत्री के लिए काम करने का पुरस्कार मिला है। 

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  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    महासमुन्द, 6 अगस्त। कल सिरपुर क्षेत्र के खिरसी गांव में मवेशी चराने गये अधेड़ की हाथी के पटकने से मौत के बाद आज पौने 12 बजे महासमुन्द जिला अस्पताल में पोस्ट मार्टम किया गया। मृतक का नाम दरबारू बरिहा बताया गया है। उनके अंतिम संस्कार के लिए वन विभाग ने 25 हजार रुपए तत्कालिक सहायता दी है। पोस्टमार्टम के दौरान मृतक के भाई उदय राम बरिहा, चंदर सिंह दामांद, जागेश्वर, पंचराम, सुधारू, रतन बरिहा के अलावा वन विभाग के कर्मचारी और सासंद प्रतिनिधि तथा जनपद सदस्य योगेश्वर चंद्राकर, सोमेश चंद्राकर, हुलास यादव तथा परमानंद भी उपस्थित थे। 
    मालूम हो कि कल मवेशी चराने गये दरबारू को हाथियों के झुंंड ने इस कदर पटक पटक कर मारा कि मौत के समय ही दरबारू का पैर उसके शरीर से अलग होकर दूर जा गिरा। ग्रामीण बताते हैं कि मरने के बाद भी हाथी दरबारू को बुरी तरह पटकते रहे। कल सिरपुर क्षेत्र के ग्रामीण खिरसाी निवासी दरबारू पिता हीरऊ बिंझवार 50 साल अपने मवेशी चराने गया था। जहां हाथी ने ग्रामीण पर हमला कर दिया जिससे उसकी घटना स्थल पर मौत हो गई। हाथियों के हमले के बाद से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है। कल ग्रामीणों ने इस मामले की 
    जानकारी वन विभाग को दी। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी घटना स्थल पर पहुंचे और मामले का जायजा लिया। वन विभाग ने भी बताया है कि हाथी ने सुकूलबाय बीट कक्ष क्रमांक 46 के पास ग्रामीण पर हमला कर दिया था और घटना स्थल पर ही उसकी लाश मिली है। 
    प्राप्त जानकारी अनुसार घटना कल 11 बजे के बाद की है। ग्राम खिरसाली के दरबारू पिता हिरऊ, तथा दो अन्य सहयोगी अपने मवेशियों को चराने के लिए सुकूलबाय बीट के कक्ष क्रमांक 46 में प्रवेश कर गये। इस क्षेत्र में बांस के जगंल में पहुंचे थे कि तभी अचानक हाथी चरवाहों की तरह दौड़ा। अचानक पहुंचे हाथी और उसके हमले से ग्रामीणों ने जान बचा कर वहां से भागने की कोशिश की तभी दरबारू दिर पड़ा और हाथी की पकड़ में आ गया। हाथी ने उसे अपने सुंड में पकड़ा औरपटक-पटक कर मार डाला। दरबारू के साथ मवेशी चराने गये दो अन्य ग्रामीण चरवाहे भाग निकलने में सफल रहे। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के लोग लगभग 3 बजे के करीब घटना स्थल पहुंच गये थे। 

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  • बलात्कार में विफल हुआ तो जान ले ली
    सरायपाली कापूडोंगरी जंगल में मिली लाश की गुत्थी सुलझी
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    महासमुन्द, 5 अगस्त। महासमुन्द जिले के सरायपाली क्षेत्र के कापूडोंगरी जंगल में 31 जुलाई को मिली बच्ची हत्या की गुत्थी  पुलिस ने सुलझा ली है।  बच्ची की हत्या गांव में ही रहने वाले नाबालिग  ने करना स्वीकार किया है।  उसने हत्या के पीछे का कारण बच्ची से शारीरिक संबंध में असफल होना बताया है।  आज दोपहर  अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने पत्रकार वार्ता के दौरान इसका खुलासा किया। 
     मालूम हो कि थाना सरायपाली क्षेत्र के नयागांव कापूडोंगरी जंगल में बच्ची की लाश मिली थी।  बच्ची का शव अद्र्ध नग्न एंव छिन्न-भिन्न अवस्था में पड़ा हुआ था। बच्ची के सिर के बाल शव के कुछ दूर पर गुच्छे में पड़ा हुआ था एवं बायें हाथ की हड्डी टूटी  थी, शरीर में कीड़े लग गये थे। शव को देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि बच्ची की हत्या कर उसे छिपाने हेतु कापुडीह डोंगरी जंगल के पेड-पौधों के बीच छिपाया गया है। जांच के दौरान क्राईम ब्रांच की टीम को बताया गया कि ग्राम नवागांव डीपा पारा के आलेख रैतीया की नाबालिग पुत्री उम्र 11 वर्ष 29 जुलाई  दोपहर से लापता है। प्रार्थी अपनी पुत्री की तलाश कर रहे थे कि 31 जुलाई सोमवार को प्रात: 7 बजे कापूडोंगरी के जंगल में झाडिय़ों के बीच शव उसके पिता ने ही देखा। बच्ची के पिता ने बच्ची के शव को देखते ही उसे पहचान लिया था। 
     पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि प्रार्थी के घर के सामने गांव के डमरूधर चौधरी का खेत है। जिसमें डमरूधर चौधरी अपने पत्नी व नौकर मनोज साहू के साथ खेत में काम कर रहे थे। जिन्होंने प्रार्थी आलेख की बच्ची को उनकी बहन के साथ आंगन में खेलते हुए देखा था। इन्हीं लोगों ने पुलिस को बताया कि प्रार्थी के घर के सामने गली में गांव के नाबालिक लड़के को टहलते देखा है। पुलिस ने उस नाबालिग लड़के से पूछताछ शुरू की जो घटना के दिन मृतका के घर में पास टहल रहा था। कड़ाई से पूछताछ  में उसने अपराध करना स्वीकार किया। उसने बताया कि 29 जुलाई को प्रात: प्रतिदिन अनुसार वह बकरियों को  चराकर दोपहर को घर  आया।  इसके बाद फूटू तोडऩे घर के बाड़ी में गया। जहां से मृतका को अपने घर के आंगन में  देखा। उसे  शारीरिक संबंध की नीयत से कापूडोंगरी जंगल की ओर ले गया। 
     जंगल में  विरोध कर बच्ची ने उक्त संबंध में अपने माता-पिता को बता देने की बात कही। यह सुनकर नाबालिक आरोपी लड़का भय में आ गया और अपने कृत्य को छिपाने के उद्देश्य से बच्ची को जान से मारने हेतु गला दबा दिया।  इसके बावजूद  जीवित होने की शंका पर  पत्थर उठाकर उसके सिर पर पटक दिया। आरोपी को जब यह विश्वास हो गया कि बच्ची मर गई है, तब लाश को झाड़ी के नीचे छिपा दिया और  घर पहुंच गया। नाबालिक आरोपी से  हत्या में प्रयुक्त गमछा तथा पत्थर को घटनास्थल जंगल से बरामद किया गया है।

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  • पिछले साल की तरह इस साल भी खेतों में बूंद भर पानी नहीं
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    महासमुन्द, 5 अगस्त। हमारे खेतों का फसल लेकर पटवारी ने कृषि विभाग के डीडीए के सामने अनावारी रिपोर्ट बनाया। हमारे खाते से बिना हमसे पूछे सोसायटी ने फसल बीमा प्रीमियम काटा, जिला प्रशासन के आला अफसरों ने सूची में हमारे गांव के सभी 20 किसानों का नाम शामिल किया लेकिन बीमा कम्पनी इफको ने हमें फूटी कौड़ी नहीं दी। इस बार भी हम सूखे की चपेट में हैं। जानवरों, मनुष्यों और खेतों की बात तो दूर चिडिय़ों के पीने तक के लिए पानी नहीं है। ऐसे में हम अपने सोसायटी में फसल बीमा का प्रीमियम नहीं पटाना चाहते। हमारे लिए तो सोसायटी ही आरोपी है जिसने प्रीमियम भी काटा और बीमा का लाभ नहीं दिया। हमारा प्रीमियम का पैसा तो कम से कम हमें लौटा देता। यह कहना है ग्राम बोरियाझर के किसानों का। मालूम हो कि महासमुन्द जिले के झालखम्हरिया सोसायटी के बोरियाझर ग्राम को फसल बीमा इकाई बनाया गया था। तत्कालीन कलेक्टर ने ढूंढ-ढूंढ कर जिले के किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाया था फिर भी अधिकारियों की लापरवाही से बोरियाझर के किसानों को फसल बीमा का लाभ नहीं मिल पाया है। जबकि झालखम्हरिया सोसायटी के अन्य सभी गांवों के किसानों को बराबर फसल बीमा का लाभ मिला है। 
        सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015-16 में महासमुन्द जिले के 31 लाख 8 हजार 99 किसानों को 33 करोड़, 40 लाख, 45 हजार रुपए तथा वर्ष 2016-17 में मात्र 13 हजार 42 किसानों को 18 करोड़ 65 लाख 487 हजार रुपए फसल बीमा की राशि का भुगतान किया गया है। जिसमें झाल खम्हरिया सोसायटी के 124 किसानों को 1 करोड़ 19 लाख 11 हजार 168 रुपए की फीमा राशि जारी की गई लेकिन लापरवाही के कारण बोरियाझर का नाम छूट गया। गांव वालों के मुताबिक पिछले बार जब फसल बीमा की गतिविधियां शुरू हुई तो ग्राम पंचायत बोरियाझर को इकाई बनाया गया और पंचायत को 4-4 रेंडम में बांटा गया जिसमें गांव के पटवारी ने किसानों के सामने कृषि अधिकारी और राजस्व अधिकारी की उपस्थिति में उनके फसल का अनावरी रिपोर्ट बनाया था। 
        पिछले बार ग्राम पंचायत बोरियाझर के हरिराम, मानूबाई, परऊराम, कमलनारायाण, पुनीतराम, तीजबाई, योगमाया, लक्ष्मण, सगरीबाई, नोदिवन्द राम , अरूण, छबिराम, गौतम, निरंजनलाल, रोहित कुमार, ललित, तुलाराम, पवन, नेमीचंद, उगेश्वर, गोवर्धन रोहित कुमार, ललित, तुलाराम, पवन, नेमीचंद,  उगेश्वर, गोवर्धन, जनकराम, प्रमोद कुमार, श्याम कुमार, प्रमोद कुमार माधव, धर्मेन्द्र, धरमूराम, रोमगोपाल, सुशीला बाई, बिमला, ईश्वर, संतोष और मोतीलाल का नाम अल्पवर्षा से प्रभावित किसानों की सूची में था। इस पर पंचायवत को कोई भी किसान फसल बीमा नहीं कराना चाहता है। न तो वे सोसायटी में प्रीमियम कटवाना चाहते हैं और न 
    ही यह चाहते है कि सहकारी अथवा कोई भी बैंक उनसे जबरिया प्रीमियम की राशि जमा कराए। किसानों का कहना है कि पानी नहीं निगरने से किसानों के सामने विकराल स्थिति पैदा हो गई है। अनाज और पानी के लिए त्राहि-त्राहि की नौबत आ रही है। फसल में मवेशियों को छोडऩे का मन बनाया जा रहा है। चूंकि सोसयटी बीमा नहीं मिलने पर भी प्रीमियम की राशि नहीं लौटाती है इसलिए इस बार वे प्रीमियम नहीं पटायेंगे। हम कृषि, राजस्व आदि को नहीं जानते हम केवल उस बैंक को जानते हैं जो हमारा प्रीमियम हमें बगैर पूछे ही काट खाता है। बैंक या तो हमें बीमा राशि दे या फिर हमारा प्रीमियम वापस करे।         
    कल बोरियझर के किसान जनपद सदस्य योगेश्वर चन्द्राकर को साथ लेकर को आपरेटिव हेड प्रकाश बिंबे से मिलने महासमुन्द पहुंचे थे। सभी ने फोन कर श्री बिंबे को जनपद बुलाया। बातचीत में श्री बिंबे ने स्पष्ट किया कि किसानों का प्रीमियम काटने के लिए किसानों की अनुशंसा जरूरी नहीं है। रही बात बीमा राशि नहीं मिलने की तो वे डीडीए अथवा इफको से बात करें। हां उनका आवेदन मैं जरूर ले सकता हूं आगे पहुंचा दूंगा। पहले तो श्री बिंबे किसानों से कहते रहे कि बोरियाझर के किसानों को भी बीमा राशि दी गई है। इसके लिए उन्होंने फाइलें तलाशना शुरू कर दी। बाद में फोन कर एक कर्मचारी से सूची मंगाई लेकिन सूची पृष्ठ क्रमांक 4 में केवल इन किसानों का नाम मिला जबकि फसल बीमा की राशि की सूची में इस ग्राम पंचायत का नाम ही नदारत था। 
    0 प्रीमियम समिति ने काटा है तो समिति ही बीमा राशि दे, अथवा प्रीमियम लौटा दे-किसान
    0 राजस्व और डीडीए से पूछो, बीमा कम्पनी जाने-प्रकाश बिंबे
    0 मैने अधिकारियों और किसानों के सामने ही अनावरी रिपोर्ट बनाया था। झाल खम्हरिया सोसायटी में बोरियाझर पंचायत सहित 15 गांवों के 494 किसानों के 634.82 हेक्टेयर रकबे में धान का फसल बीमा था जिसमें से मात्र 124 किसानों को ही फसल बीमा का लाभ मिल पाया—झालखम्हरिया पटवारी  
    0 एवरेज नहीं आया होगा। क्या है अधिकारी और पटवारी मिलकर फसल का एवरेज निकालते हैं। एवरेज यदि कम होता है तो बीमा का लाभ उस इकाई को नहीं मिल पाता है। मेरे पास अभी फाइल नहीं है, फाइल देखकर ही पता चलेगा-सर्वेक्षण अधिकारी कृषि-यू.एस.तोमर।

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  • 4 माह पहले ओडीएफ घोषित हो चुका है जिला

    रजिंदर खनूजा
    पिथौरा, 31 जुलाई (छत्तीसगढ़)।  विगत चार माह पूर्व ही ओडी एफ घोषित किये गए महासमुंद जिले के पिथौरा विकास खण्ड का कई ग्राम ओडीएफ के लायक नहीं मिले। इस संबंध में जब जनपद के सीईओ से चर्चा की गई तब उन्होंने सभी शौचालय आगामी 2 से 3 दिनों में पूर्ण करने की बात कही।
     चार माह पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा घोषित कराए गए ओडीएफ के बाद भी इस विकास खण्ड में किसी भी ग्राम को ओडीएफ घोषित करने लायक सफाई या शौचालय की व्यवस्था नहीं हो पाई है। छत्तीसगढ़ ने शिकायतों के बाद ग्रामीण क्षेत्रो में ग्राम सरकडा का दौरा कर वहां प्रत्यक्ष ग्रामीणों के घर बन रहे शौचालय का निरीक्षण किया। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम में कोई 300 से अधिक घरों में शौचालय बनाये जाने थे परंतु रविवार तक कोई 200 घरों में ही शौचालय बन सके हंै। शेष ग्रामीण आज भी सड़क किनारे या खेतो के पास ही शौच के लिए जाते हंै।
    ग्राम में अगिन ठाकुर,धनित ठाकुर,नोहरू ठाकुर,कृष्णा,यशपाल,पीलादाउ,सुमेन्द,बिजली बै, जाम्बई, पतिराम,बेदराम यादव, सीताराम ठाकुर, रघुनाथ, गंगाधर यादव, योगेश, विश्वनाथ सहित अनेक मौजूद गामीणों ने बताया कि उन्हें शौचालय बनाने कहा गया था। उनके पास जितने रुपये थे उतना काम शौचालय हेतु स्वयम की मेहनत से कर लिया। परन्तु अब मेहनत के बाद निर्माण हेतु आवश्यक सामग्री क्रय करने हेतु उनके पास धनराशि नहीं है। 
    सरपंच से मांगने पर सरपंच का कहना है कि उसने अफसरों के मौखिक आदेश से दुकानों से निजी कर्ज पर हितग्राहियों को पूर्व में समान दिलाया था। उनके उधार अब तक चुकता नहीं हो पाया है। इसलिए अब दुकानदार भी उधार नहीं दे रहे हैं लिहाजा ग्राम के सैकड़ा से अधिक शौचालय आधे अधूरे पड़े है। बारिश की वजह से अधूरे पड़े शौचालय अब खण्डहर में तब्दील हो रहे हैं।
    विकासखण्ड के बड़े गांव भी वंचित
    पिथौरा विकास खण्ड के लगभग सभी ग्रामों में शौचालय आधे-अधूरे ही बने हैं।  घोषणा के चार माह बाद भी पहले की तरह शौचालय निर्माण की प्रगति देखने अब अफसर तो दूर कोई मैदानी कर्मी भी सुध लेने नहीं जाते।  
    2 से 3 दिन में पूर्ण करवा लेंगे-सीईओ 
    छत्तीसगढ़ द्वारा इस संबंध में स्थानीय सीईओ पी एल ध्रुवे से चर्चा करने पर उन्होंने विकास खंड के हजारों अधूरे शौचालयों को 2 3 दिन में पूर्ण करने की बात कही है। ज्ञात हो कि मामला मीडिया में आते ही आज सोमवार को सीईओ ग्राम सरकडा सुबह से पहुंच कर  कार्यवाई में जुट गए हंै। इसके पुर्व भी शौचालय निर्माण में गड़बड़ी की बात सामने आई थी।
     जब खल्लारी विधायक के गोद ग्राम में पंचायत द्वारा बनाये गए शौचालय पहली ही बारिश में गिरने लगे थे।  

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  • घटना घुचापाली की
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    बागबाहरा, 31 जुलाई। बागबाहरा के समीपस्थ ग्राम घुचापाली में आज सुबह 10 बजे स्कूल में पहुंचीं बच्चियां अचानक एक के बाद बेहोश होकर गिरने लगीं। स्कूल परिसर में 11 बच्चियों के बेहोश होने से हड़कंप मच गया। उनकी हालत देख तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा लाया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा के डॉ. नागेश पटेल ने बताया कि उपचार जारी है, सभी बच्चों की स्थिति सामान्य है।
    शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला घुचापाली की प्रधानपाठक रेवती सिंग के अनुसार सुबह स्कूल के लिए पहुंची सुनीता बिंझवार पिता उत्तम बिंझवार अचानक शाला परिसर में बेहोश होकर गिर गई जिसे उठाने गई अन्य बालिका नीलम साहू पिता मोहन साहू, ऋ तु साहू पिता भूषण साहू भी बेहोश हो गईं। लगभग 11 बालिकायें नीलम पिता शिव साहू, निमेश्वरी साहू पिता राजकुमार, खेमीन कुलदीप पिता बनऊ कुलदीप, लीला निर्मलकर पिता सोनू राम, दामिनी निषाद पिता अशोक निषाद, सावित्री  श्रीवास पिता महेश श्रीवास, संगीता चन्द्राकर पिता अशवंत चन्द्राकर, निशा ध्रुव पिता पुरेस ध्रुव बेहोश हे गईं। ये सभी छात्राएं 11 से 13 वर्ष की हैं। वे 7वीं एवं 8वीं में अध्ययनरत हैं। बच्चों की हालत देख तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा लाया गया, यहां उनका प्राथमिक उपचार किया जा रहा है।

     

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  • बांध का 75 फीसदी पानी मंत्री को, लामबंद हो रहे किसान
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    महासमुन्द, 31 जुलाई। कल छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल के जलकी स्थित रिसोर्ट में तोडफ़ोड़ की घटना भले ही अफवाह निकली  है लेकिन एक नई बात भी सामने आई है कि जलकी के 200 एकड़ जमीन में श्री अग्रवाल ने फार्म हाऊस और रिसोर्ट बनाया है जिसमेंं से केवल 65 एकड़ जमीन ही लगानी की है। 
    उनके रिसोर्ट के ठीक सामने छपोराडीह की जमीन पर किसानों के लिए सरकार ने बांध बनवाया है जिसे फैंसिंग तार में दो भागों में बांटकर उसके एक हिस्से का पानी मंत्री के रिसोर्ट को सप्लाई होता था पर मामला सरेआम होने के बाद बांध के बीच से फैंसिंग तार को हटा लिया गया है। बांध के जिस हिस्से से मंत्री के रिसोर्ट और फार्म हाउस को पानी जाता है उस हिस्से में अभी भी 13 फीट पानी है और जो किसानों के हिस्से में है, उस हिस्से में केवल 5 फीट पानी भरा हुआ है। बांध को दो हिस्से में बांटने के लिए फैंसिंग तार का घेरा  है और बांध के पीछे नीचे के हिस्से में फार्म हाऊस  है। यहां काम करने वाले एक कर्मचारी के अनुसार जिला प्रशासन के सिंचाई विभाग द्वारा फार्म हाऊस के आसपास एक निजी बांध भी बनाया जा रहा है। 
    छपारोडीह और जलकी दौरे के दौरान एक बात जो स्पष्ट रूप से सामने आई है वह यह है कि कल यहां मंत्री के फार्म हाउस में किसी ने भी तोडफ़ोड़ नहीं की है। वहीं मंत्री श्री अग्रवाल के फार्म हाऊस में छपोराडीह गांव में बने बांध का पानी उपयोग में लाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ को मिली जानकारी के अनुसार रिसोर्ट और फार्म हाउस को पानी देने के नाम से किसानों के लिए निर्मित छपोरा बांध को श्री अग्रवाल ने दो हिस्से में बांट कर फैंसिंग तार लगवा दी थी जिसे खबर में आते ही हटा दिया है। श्री अग्रवाल के रिसोर्ट में डेम के पानी आने की छानबीन की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं। छपोराडेम से अब भी श्री अग्रवाल के दो सौ एकड़ के रिसोर्ट में पानी पहुंच रहा है। 
    वर्तमान  में रिसोर्ट के तरफ अभी भी 13 फीट पानी है वहीं डेम की ओर लगभग 5 फीट पानी है। इसके अलावा ग्रामीणों तथा रिसोर्ट में काम करने वालों के मुताबिक महासमुन्द सिंचाई विभाग द्वारा मंत्री के रिसोर्ट के लिए एक निजी डेम का निर्माण हो रहा है। रिसोर्ट के आस पास बड़े बड़े टंकी की तरह गड्ढे बनाये गये हंै। पूरे इलाके को बड़ी ही व्यवस्थित ढंग से सजाया गया है ताकि रिसोर्ट की खुबसूरती हमेशा बनी रहे। 
     ग्रामीणों के मुताबिक छपोराडीह के डेम से लगभग 300 किसानों की जमीन की सिंचाई हो सकती है लेकिन डेम को इस तरह से दो भागों में बांट कर मंत्री के रिसोर्ट में पानी पहुंचाया जा रहा है जिसकी वजह से किसानों के खेतों  में खड़ी धान की खरीफ फसल सूखने के कगार पर हंै। 
    छपोराडीह सरपंच संतोष साहू, मनहरण साहू सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि करीब 5 साल पहले मंत्री श्री अग्रवाल के कर्मचारी वन विभाग के सेनहा प्लांट में कब्जा करने के लिए जेसीबी से पेड़ों को उखड़वा रहे थे। लेकिन ग्रामीणों के विरोध करने पर मंत्री के मैनेजर अर्जुन सिंह ने जेसीबी चलवाना बंद कर दिया। ग्रामीणों को पहले इस बात की जानकारी नहीं थी कि फ ार्म हाऊस में विभिन्न फसलों की सिंचाई के लिए छपोराडीह जलाशय के कैचमेंट एरिया पर किए जा रहे स्टॉपडेमनुमा बंधान शासकीय है या निजी निर्माण है। क्योंकि इस निर्माण कार्य में स्वयं जल संसाधन विभाग, वन विभाग एवं लोक निर्माण विभाग के ही अफसर जुटे थे। पड़ोस के ग्राम जलकी में सरकारी जमीन की अवैध खरीदी का खुलासा होते ही छपोराडीह जलाशय में लगाए गए फैंसिंग को जेसीबी से उखाडऩे के बाद ग्रामीणों को जानकारी हुई कि यह जमीन शासकीय है। 
     ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन ग्राम जलकी में की गई जमीन खरीदी की रजिस्ट्री शून्य करने की कार्रवाई कर रहा है। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार यह फ ेार्म हाऊस 200 एकड़ में ग्राम जोगीडीपा तक विस्तृत है। ग्रामीण हीरालाल निषाद, देवसिंग साहू, भगवानी साहू, झड़ीराम ध्रुव सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि छपोराडीह जलाशय की नहर जर्जर होने के कारण कमांड क्षेत्र के पूरे 154 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई नहीं होती। इसके चलते गांव के किसान इस साल एग्रीमेंट नहीं करा पाए हैं। नहर मरम्मत कर जलाशय का पानी किसानों के खेतों तक पहुंचाने के बजाय मंत्री के आदेश पर शासकीय कर्मचारी फार्म हाउस तक पानी पहुंचाने के लिए बंधान बना रहे थे। आलम यह है कि बांध के कैचमेंट एरिया की ओर अधिक गहरा होने से 13 फ ीट पानी भरा है और नहर के गेट के पास मात्र 5  फ ीट पानी है। सीधे अर्थों में कैचमेंट एरिया की ओर ढलान बनाया गया है ताकि इसका पूरा फायदा मंत्री को मिले। 
     ग्रामीणों का आरोप है कि मंत्रीजी के फार्म हाउस के कारण पहुंच मार्ग बाधित है और आसपास गांवों में आने जाने के लिए उन्हें दो तीन किमी का सफर अधिक करना पड़ता है। इस गांव पहुंचे छत्तीसगढ़ ने देखा कि फार्म हाउस के बाहरी गेट में हरे रंग का दरवाजा लगा है  और यह फार्म हाउस 2-3 किमी का घेरा पार करने के बाद पगडंडियों से होकर पीछे के रास्ते से जाया जाता है लेकिन अभी वहां केवल उनके स्टाफ ही जा सकते हैं और बाकियों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। फ ार्म हाउस में जलाशय का पानी खींचने के लिए लिफ्ट एरिगेशन बनने का भी कार्य शुरू हो चुका है। 
    अब इस मामले में जिले भर के राजनीतिक पार्टी के नेता सक्रिय हो गए हंै। जोगी कांग्रेस और कांग्रेस  के लोग मंत्री को विधानसभा में घेरने की तैयारी कर रहे हैं।
    कल छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष शेख छोटे मियां भी मामले की जांच के लिए पहुंचे थे। वहीं जिला वनोपज के अध्यक्ष विनोद चन्द्राकर पूर्व विधायक अग्नि चन्द्राकर भी यहां पहुंचे थे।  ग्रामीणों  के अनुसार कल रविवार की सुबह वनोपज संघ के जिलाध्यक्ष एवं किसान कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री विनोद चंद्राकर ग्रामीणों के बुलावे पर ग्रामीण कब्जा स्थल पहुंचे थे। कल रविवार को इस मसले को लेकर पूरे गांव में काम बंद था। श्री चंद्राकर ने बांध को कब्जा मुक्त करने सहित काबिल काश्त की जमीन को ग्रामीणों को वापस दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष करने का ऐलान भी किया है। 
    इधर कांग्रेस का कहना है कि इस मामले को प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल तक पहुंचाने के बाद छपारेाडीह की सरकारी जमीन पर फार्म हाऊस बनाने के मामले की शिकायत जिला प्रशासन से करेंगे। इस जलाशय को मत्स्याखेट के लिए लीज पर लेने वाले जय गरगस आदिवासी मछुआरा समिति के अध्यक्ष गैंदराम ध्रुव ने बताया कि जलाशय के बीच में फैंसिंग पोल के साथ जाली लगने पर मछली मारने में हुई दिक्कत के बाद उसने जनपद पंचायत में इसकी शिकायत की थी। लेकिन जनपद द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। बहरहाल भूपेश बघेल के आज-कल में छपोराडीह पहुंचने की खबर है और इस मामले में जिला प्रशासन के आला अफसर कुछ भी बोलने के पक्ष में नहीं हैं। 

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  • बसना, 29 जुलाई। बसना विकासखंड के ग्राम पंचायत पलसापाली बी के ग्रामीणों ने कल शौचालय निर्माण को लेकर जनपद पंचायत का घेराव किया। सीईओ श्री वर्मा ने सात दिनों के भीतर जांच कर कार्रवाई करने के बाद आश्वासन के बाद घेराव खत्म हुआ। 
    ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पलसापाली बी में बनाए गए शौचालय गुणवत्ताहीन है। उन्हें शासन द्वारा उन्हें शौचालय निर्माण के लिए खर्च किए गए रकम भी अब तक नहीं मिले है। ग्रामीणों ने कल दोपहर छत्तीसगढ़ जोगी कांग्रेस के प्रदेश सचिव अनामिका पाल के नेतृत्व में इस मुद्दे को लेकर जनपद पंचायत दफ्तर का घेराव कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। उन्होंने 7 दिन का समय मांगते हुए जांच-पड़ताल कर कार्रवाई की बात कही है। 
    ग्रामीणों का कहना है कि यदि इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। 

     

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  • वर्ष 2007-08 से रखा था किसानों को बांटने
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    महासमुन्द, 29 जुलाई। वृहत्ताकार सेवा सहकारी समिति मर्यादित पिटियाझर शाखा में लगभग 10 लाख रुपये का खाद बारिश में भीगकर बर्बाद हो चुका है।  बताया जा रहा है कि यह 2007-08 का खाद है जिसे यहां किसानों के लिए भंडारण करके रखा गया था। अधिकारियों की लापरवाही के चलते न तो इसे किसानों को बांटा जा सका और न ही कम्पनी को वापस किया गया। इससे साल-दर-साल सोसायटी को ब्याज पटाना पड़ा और आखिकार बारिश में भीगकर सारा खाद खराब हो गया। 
     वृहत्ताकार सेवा सहकारी समिति मर्यादित पिटियाझर शाखा में बरबाद हुए खाद में यूरिया, सुपर फास्फेट, डीएपी, ईफको, सुफला, जिंक सल्फेट, हाईजिंक, नीम प्लस, मल्टी प्लस, नीम रत्न, नीम सोना, एग्रोमोन, पीएसबी कल्चर की 2961 बोरी खाद शामिल है। बरबाद हुए खाद की  कीमत 10 लाख रुपए के लगभग बताई जा रही है। 
    नोडल अधिकारी प्रकाश बिंबे ने इस मामले में  कहा है कि मुझे इसकी जानकारी मिली है पर कितनी मात्रा में नुकसान हुआ है, इसकी जानकारी नहीं मिली है,आदमी भेजकर जानकारी मंगवाता हंू। वृहत्ताकार सेवा सहकारी समिति मर्यादित पिटियाझर के प्रभारी श्री सिन्हा का कहना है कि गोदाम में विगत कुछ वर्षों से ये खाद रखे हुए थे जो भीगकर पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। इसकी जानकारी मंैने आधिकारियों को दे दी है। यह खाद 2007-08 है। 
    किसान मोर्चा जिला उपाध्यक्ष एवम् जनपद सदस्य योगेश्वर चंद्राकर ने अपने क्षेत्र के एक मात्र वृहत्तकार सेवा सहकारी समिति मर्यादित पिटियाझर सोसायटी प क्र 497 का निरीक्षण नवनिर्वाचित अध्यक्ष वीरेन्द्र चंद्राकर के साथ किया। इस दौरान वहाँ स्थिति देखकर इन्होंने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही से न केवल किसानों का नुकसान किया बल्कि सोसायटी को भी कर्ज के बोझ से लाद दिया है। अत: ऐसे लापरवाह अधिकारियों के कारण सरकार को भी बदनामी का सामना करना पड़ता है। 
    योगेश्वर चन्द्राकर ने कलेक्टर हिमशिखर गुप्ता से मुलाकात कर ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करने की मांग की है और कहा है कि एक ओर सरकार खाद की कालाबाजारी एवम् उपलब्धता सुनिश्चित करने निमकोटेड और अन्य उपाय अपना रही है। वहीं उनके अधिकारी  समुचित और सुरक्षित भण्डारण न करके  लापरवाही पूर्वक लाखों रुपए बर्बाद कर देते हैं। योगेश चंद्राकर के मुताबिक खराब धान की कीमत अप्रैल से जून 2017 तक के प्राप्त डाटा के अनुसार 2961 बोरी जिसकी कीमत लगभग 10 लाख रुपए है। इसका ब्याज भी हर वर्ष सोसायटी को देना पड़ रहा है।  

     

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  • छत्तीसगढ़ संवाददाता 
    महासमुन्द, 26 जुलाई। छत्तीसगढ़ में शराब ठेकेदारी बंद होने के बाद से क्षेत्र में लगातार ओडिशा, मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़ से लगे सीमावर्ती प्रदेशों से अवैध शराब की खेपें आ रही है। कल भी क्राईम पुलिस ने अवैध रूप से शराब का परिवहन कर रहे दो लोगों को 19 पेटी शराब के साथ गिरफ्तार किया है। ये शराब मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ में सप्लाई की जा रही थी जिसे ग्राम घोड़ारी में पकड़ा गया है। बिना नंबर की कार में लदी इस खेप को मुखबीर की सूचना पर महासमुन्द पुलिस ने पकड़ा है। इस तरह इस बात का खुलासा भी हो गया है कि पुलिस की सतत निगरानी के बाद भी शराब कोचिये अनेक  तरह से शराब का अवैध परिवहन कर रहे हंै। 
    गौरतलब है कि महासमुन्द पुलिस अधीक्षक नेहा चम्पावत ने जिले के पुलिस सहित क्राईम को इस ओर कार्रवाई करने के लिए लगा रखी है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार दो युवक कार में नदी मोड़ घोड़ारी की ओर आ रहे थे। क्राईम पुलिस ने कार को रोक कर उसकी तलाशी ली तो उसमें 19 पेटी शराब मिल। जिसमें 9 पेटी अंग्रेजी गोवा और 28 पेटी देशी शराब शराब शामिल हैं। इनमें मध्य प्रदेश का सील लगा हुआ है। गिरफ्तार आरोपी संजीव मिश्रा पिता राम प्रवेश मिश्रा  20 साल राम नगर भिलाई, आनंद केरकेट्टा पिता फ्रांसिस केरकेट्टा 24 साल कातुलबोड़ मोहन नगर दुर्ग हैं। आरोपियों ने पुलिस को जानकारी दी है कि वे यह शराब बालघाट मध्यप्रदेश से लेकर आ रहे हंै और इसे बसना बिहारी ढाबा के पास किसी व्यक्ति को देना था। उक्त दोनों आरोपी बसना के अज्ञात आरोपी तक शराब पहुंचा पाते, इससे पहले पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों से जब्त शराब की कीमत 70 हजार बताई जा रही है। दोनों आरोपियों पर सिटी कोतवाली ने आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की है। 

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  • बसना, 26 जुलाई। पत्नी से विवाद के बाद युवक ने जहर खाकर जान दे दी। घटना कल शाम की है। मिली जानकारी के अनुसार ग्राम सुखापाली निवासी प्रकाश महिलांगे बसना में अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहता था। कल शाम पत्नी से किसी बात को लेकर विवाद हो गया और तैस में आकर प्रकाश ने जहर सेवन कर लिया। इधर परिजनों ने मृतक की पत्नी और ससुर पर हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। 

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  • छत्तीसगढ़ संवाददाता
    महासमुन्द, 21 जुलाई। शहर की एक दिव्यांग लड़की को घर छोडऩे के बहाने रिक्शे वाले द्वारा घर में बंधक बनाकर 7 जुलाई से 18 जुलाई तक शारीरिक उत्पीडऩ का मामला प्रकाश में आया है। कोतवाली पुलिस इस मामले में आरोपी युवक के खिलाफ  मामला दर्ज कर तलाश कर रही है। 
    पुलिस से प्राप्त जानकारी अनुसार स्थानीय पिटियाझर निवासी सुनील सतनामी दिव्यांग लड़की को घर छोड़ देने की बात करते हुए उसे रिक्शे में बैठाकर अपने घर ले गया और दिव्यांग लड़की का हाथ-पैर और मुंह दबाकर उससे लगातार 12 दिनों तक बलात्कार करता रहा। आसपास के लोगों को रिक्शे वाले सुनील की गतिविधियों में अचानक हुए बदलाव को देखते हुए उस पर शंका हुई तो पूछताछ शुरू कर दी। आरोपी ने पड़ोसियों के संदेह होने के बाद से भयभीत हो गया और आधी रात को दिव्यांग लड़की को चौराहे पर छोड़कर भाग निकला। लोगों की मदद से लड़की को घर पहुंचाया गया। जहां घटना की जानकारी उसने परिजनों दी। परिजनों ने सिटी कोतवाली पहुंचकर मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई है। 
    दिव्यांग लड़की ने पुलिस को बताया है कि वह अपने घर से दिव्यांग पेंशन लेने निकली थी। पेंशन लेने के बाद वह एक व्यक्ति को रिक्शा बुलाने की बात कही तो वहां सुनील सतनामी रिक्शा वाला आया और उसे रिक्शे में बिठाकर घर ले जाने का बहाना बनाते हुए अपने घर ले गया। घर पहुंचने पर लड़की ने उससे पूछा कि तुम मुझे यहां क्यों लाये हो तो उसने उसके मुंह में कपड़ा बांध दिया और उसे उठाकर अपने घर के भीतर ले गया। आरोपी पर आरोप है कि  7 जुलाई से 18 जुलाई की रात्रि तक उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद से आरोपी युवक फरार है जिसकी तलाश सिटी कोतवाली कर रही है। 

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  • छत्तीसगढ़ संवाददाता

    पिथौरा, 13 जुलाई। नगर से 8 किमी दूर ठाकुर दिया कला के पास एक युवक ने पेड़ पर फांसी लगा  ली। घटना के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है।
     ठाकुरदिया कला खार में अज्ञात युवक की पेड़ पर फांसी लटके जाने की सूचना पर तेंदुकोना पुलिस घटनास्थल पहुंची। ग्रामीणों  ने मृतक की शिनाख्त वेदराम पिता भोलाराम ध्रुव ग्राम पटपर पाली थाना पिथौरा के रूप में की । मृतक कल 12 जुलाई  को अपने ससुराल कोटदादर आया था। ससुराल में कुछ देर रहने के बाद  घर जाने के लिए निकल गया था। उसके बाद आज सुबह उसकी लाश फांसी पर झूलती मिली। 

     

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