महासमुन्द

जमीन मंत्रीजी ने खरीदी, मुझे जबरन फंसाया जा रहा


36 रजिस्ट्री में गवाह जलकी के पूर्व सरपंच ने कहा
छत्तीसगढ़ संवाददाता
महासमुन्द, 11 अगस्त। जलकी के पूर्व सरपंच गजानंद पटेल का कहना है कि जमीन मंत्रीजी ने खरीदी है और मुझे इस मामले में जबरन फंसाया जा रहा है। अफवाह है कि मैंने सरकारी जमीन की खरीदी बिक्री की। मैं तो लगानी जमीन ही खरीदता रहा। लोग अफवाह उड़ा रहे हैं कि मेरे कई पॉली हाउस हैं और रात को जाकर कार्यालय में रजिस्ट्री करवाता था। 
गजानंद पटेल के मुताबिक उसके स्वयं के अलावा गांव के कुछ अन्य किसानों के नाम कुल 6 पॉली हाउस हैं और उनकी गिनती के क्षेत्र के उन्नत व प्रभावशाली किसानों में होती है। उनका कहना है कि मैंने करीब एक एकड़ जमीन बेची है। जिस संबंध में कलेक्टर न्यायालय से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जिसका जवाब देने कल मैं महासमुन्द गया था। शासकीय पट्टे की जमीन बेचने का आरोप लगाकर कलेक्टर न्यायालय से नोटिस जारी किया गया था, जो गलत है। मैंने भूमि स्वामी हक की जमीन बेची है। मेरे जवाब से कलेक्टर नाराज हुए, यह सही नहीं है।
ज्ञात हो कि कलेक्टर कोर्ट में जमीन खरीदी बिक्री की हो रही जांच के 50 प्रकरणों में से 36 रजिस्ट्री में गजानंद पटेल  के गवाह के रूप में हस्ताक्षर है। गांव के किसानों ने जमीन गजानंद के पास बेचना बताया है। कल गुरुवार को उसकी कलेक्टर के सामने  पेशी थी। आज उसके गांव लौटने के बाद दोपहर फोन पर छत्तीसगढ़ ने उससे बातचीत की।
इधर जलकी के किसानों ने कलेक्टर को दिये अपने बयान में कहा है कि गजानंद अपने मार्शल वाहन में बैठाकर किसानों को गांव से महासमुन्द लेकर जाते थे और देर शाम अंधेरा होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री कराते थे। किसानों को बाजार दर के बहुत कम दाम देकर जमीन खरीदी किया करते थे।  इस तरह मंत्री को बेचे गये जमीन के 70 से 80 प्रतिशत जमीन का सूत्रधार गजानंद पटेल है। 
जलकी स्थित मंत्री के रिसोर्ट और फार्म हाउस की जमीन खरीदी मामले के दौरान कल 10 अगस्त गुरुवार को गजानंद की पेशी थी।  
गौरतलब है कि गजानंद पटेल सन 1994 से 1999 तक और 2004 से 2009 तक दो कार्यकाल जलकी के सरपंच थे। 2004 से 2009 के बीच ही ज्यादातर जमीनों की खरीदी बिक्री हुई है। मंत्री के परिजनों के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री हो रही थी। 
इधर जलकी के किसानों ने कलेक्टर को दिये अपने बयान में कहा है कि गजानंद अपने  वाहन में बैठाकर किसानों को गांव से महासमुन्द लेकर आता था और देर शाम अंधेरा होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री कराते थे। किसानों को बाजार दर के बहुत कम दाम देकर जमीन खरीदी किया करता था। इस तरह मंत्री को बेचे गये जमीन के 70 से 80 प्रतिशत जमीन का सूत्रधार गजानंद पटेल है। 
बताया जा रहा है कि पंचायतों को नक्शा, खसरा और बी वन संधारण की जिम्मेदारी दी गई थी। कुछ वर्ष पूर्व पहले तक पंचायतों में राजस्व रिकार्ड रखा जाता था जिसका श्री पटेल ने जमकर दुुरुपयोग किया और पंचायती राज व्यवस्था में दिए गए अधिकारों का खुल्लमखुल्ला धज्जियां उड़ाया और किसानों की काबिल काश्त जमीनें बिकवा दी। 
मालूम हो कि मंत्री बृजमोहन के कृपा पात्र रहे इस गजानंद को दो साल पहले कृषक रत्न पुरस्कार मिला था तब भी लोगों में यह चर्चा थी कि गजानंद को मंत्री के लिए काम करने का पुरस्कार मिला है। 


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