रायपुर

राज्य के दो आईएएस की नौकरी केन्द्र ने खत्म की


स्वच्छ भारत अभियान 

छत्तीसगढ़ संवाददाता 
रायपुर, 11 अगस्त।  केंद्र सरकार ने खराब सर्विस रिकॉर्ड के चलते प्रमुख सचिव अजय पाल सिंह और बाबूलाल अग्रवाल को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी है। अग्रवाल फिलहाल निलंबित हैं और उनके खिलाफ सीबीआई जांच चल रही है। दोनों के अलावा मप्र कैडर के अफसर एमके सिंह को भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। श्री सिंह 85 बैच के अफसर हैं। 
बताया गया कि केंद्र सरकार ने राज्य की छानबीन समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोनों ही अफसरों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। मुख्य सचिव  विवेक ढांड की अध्यक्षता में आईएएस अफसरों के सर्विस रिकॉर्ड का परीक्षण करने के लिए समिति बनाई गई थी। समिति में केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मप्र कैडर के अफसर बीआर नायडू भी थे। कहा जा रहा है कि समिति ने क रीब आधा दर्जन अफसरों को वॉच लिस्ट में रखने की सिफारिश की थी,  लेकिन केंद्र सरकार ने कड़ी कार्रवाई कर श्री अजय पाल सिंह और बाबूलाल अग्रवाल को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के आदेश दिए हैं। दोनों ही अफसरों को  तीन माह के वेतन देकर सेवानिवृत्ति का आदेश दिया गया है। भाप्रसे के वर्ष-86 बैच के अफसर अजय पाल सिंह भी एक बार निलंबित हो चुके हैं। 
उन्होंने पर्यटन सचिव के पद पर रहते विभागीय मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगाए थे। वर्ष-06 में श्री सिंह पहले अफसर थे, जिन्हें सचिव पद पर रहते हुए निलंबित किया गया था। इसके अलावा उनके खिलाफ कई तरह की शिकायतें थी। इन्हीं शिकायतों के चलते उनकी पदोन्नति  रूक गई थी। वे अपर मुख्य सचिव के पद पर पदोन्नत होने से वंचित रह गए। वे वर्तमान में जन शिकायत निवारण विभाग के प्रमुख सचिव पद पर थे। वे माटीकला बोर्ड में एमडी के पद पर रहे हैं। श्री अजय पाल सिंह को राजस्व मंडल में सदस्य नियुक्त किया गया, लेकिन बाद में अलग-अलग तरह की शिकायतों के चलते वहां से हटाया गया था।  
भाप्रसे के वर्ष-88 बैच के अफसर बाबूलाल अग्रवाल के खिलाफ कई तरह की जांच चल रही है। वे पुराने प्रकरण को निपटाने के लिए सीबीआई अफसरों को रिश्वत देने की कोशिश करने के मामले में गिरफ्तार भी हुए थे और  उन्हेें निलंबित किया गया। इससे पहले प्रमुख सचिव श्री अग्रवाल के घर-दफ्तर में आयकर टीम ने कार्रवाई की थी। उन्हें निलंबित भी किया गया था। बाद में वे बहाल भी हो गए। उनके खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने  आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया था। बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई थी। वे सेवा अवधि के दौरान दो बार निलंबित हो चुके हैं। स्वास्थ्य सचिव के पद पर रहते हुए विभाग में कई तरह के घोटाले हुए थे। इसकी जांच सीबीआई में भी चल रही है। इसके छींटे श्री अग्रवाल पर पड़े थे।

 


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