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Posted Date : 21-Nov-2017
  • मुंबई, 21 नवम्बर । मुंबई के रहने वाले त्रिशनित अरोरा को पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था। जिससे उनका पूरा परिवार परेशान रहता था। लेकिन उनकी रुची ही उनकी सफलता बनी और आज वो महज 23 साल की उम्र में साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट बन चुके हैं। ह्यूमन ऑफ बॉम्बे के फेसबुक पेज पर उनकी इंस्पिरेशनल स्टोरी शेयर हुई थी। जिसमें बताया गया है कि कैसे वो स्कूल की पढ़ाई छोड़कर भी अपना मुकाम हासिल किया। 

    त्रिशनित अरोरा ने बताया है कि बचपन से ही उन्हें कम्प्यूटर में रूचि थी। वो हर समय वीडियो गेम खेला करते थे। देर तक कम्प्यूटर में बैठने पर उनके पिता को काफी टेंशन होती थी। वो रोज कम्प्यूटर का पासवर्ड चेंज किया करते थे। लेकिन त्रिशनित रोज पासवर्ड को क्रेक कर दिया करता था। लेकिन इस चीज को देखकर उनके पिता भी प्रभावित हो गए और नया कम्प्यूटर लाकर दे दिया। एक वक्त ऐसा आया जिससे उनकी जिंदगी बदल गई।
    एक दिन त्रिशनित की स्कूल प्रिंसिपल ने उनके माता-पिता को स्कूल बुलाकर कहा कि उनका बच्चा 8वीं में फेल हो गया है। जिसके बाद उनके माता-पिता ने पूछा आखिर वो करना चाहते हैं। जिसके बाद उन्होंने फैसला लिया कि वो कम्प्यूटर में ही अपना करियर बनाएंगे। जिसके बाद पिता के कहने पर उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और कम्प्यूटर की बारीकियों सीखने लगे। उन्नीस साल की उम्र में वो कम्प्यूटर फिक्सिंग और सॉफ्टवेयर क्लीनिंग करना सीख गए थे। जिसके बाद वो छोटे प्रोजेक्ट्स पर काम करने लगे। उनको पहला चेक 60 हजार रुपये का मिला था। जिसके बाद उन्होंने पैसे बचाकर खुद की कंपनी में खर्च करने का सोचा। आज जिसका नाम टीएसी सेक्यूरिटी सॉल्यूशन है। जो एक साइबर सिक्युरिटी कंपनी है। आठवीं फेल होने के बाद उन्होंने स्कूल से दूरी बना ली लेकिन उन्होंने 12वीं डिस्टेंस एज्यूकेशन से की और बीसीए कंप्लीट किया। लेकिन उससे पहले ही वो मुकाम हासिल कर चुके थे।

    जब त्रिशनित अरोरा 21 साल के थे तो उन्होंने अपनी कंपनी स्टार्ट की। त्रिशनित अब रिलायंस, सीबीआई, पंजाब पुलिस, एवन साइकिल जैसी कंपनियों को साइबर से जुड़ी सर्विसेज दे रहे हैं। वो हैकिंग पर किताबें भी लिख चुके हैं। 'हैकिंग टॉक विद त्रिशनित अरोड़ा' 'दि हैकिंग एरा' और 'हैकिंग विद स्मार्ट फोन्स' जैसी किताबें उन्होंने लिखी हैं। 
    उनकी मानें तो भारत में उनकी कंपनी के चार ऑफिस हैं और दुबई में भी एक ऑफिस है। करीब 40 फीसदी क्लाइंट्स इन्हीं ऑफिसेस से डील करते हैं। दुनियाभर में 50 फॉच्र्यून और 500 कंपनियां क्लाइंट हैं। त्रिशनित का सपना है कि वो बिलियन डॉलर सेक्यूरिटी कंपनी खड़ी करें। फोब्र्स की मानें तो भारत के अलावा, टीएसी दुबई से भी काम करता है, शुरुआती दावों के अनुसाल डोमेस्टिक मार्केट और मिडिल ईस्ट से 1 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया है।(एनडीटीवी)

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Posted Date : 21-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 21 नवम्बर । नोटबंदी ने देश की अर्थव्यस्था के साथ-साथ पेमेंट के तरीके को पूरी तरह से बदल कर रख दिया था। नोटबंदी के पीछे सरकार का एक तर्क देश को लेस कैश इकॉनॉमी बनाना भी था। डिजिटल ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए सरकार पिछले साल से कई कार्यक्रम चला रही है। इस दिशा में सरकार एक बड़ा फैसला ले सकती है, चेक बुक खत्म करने का। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य लेन-देन को पूरी तरह डिजिटल करने का है। 

    कन्फीड्रेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के सेक्रटरी जनरल प्रवीण खंडेवाल ने बताया था, इसकी पूरी संभावना है कि निकट भविष्य में सरकार डिजिटल ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए चेक बुक व्यवस्था को खत्म कर दे।
    खंडेवाल ने डिजिटल रथ की लॉन्चिंग पर इसकी जानकारी दी थी। सीएआईटी और मास्टरकार्ड मिलकर इस कार्यक्रम को चला रहे हैं, जिसका उद्देश्य ट्रेडर्स को डिजिटल ट्रांजैक्शंस के तरीके बताने के साथ-साथ कैशलेस इकॉनॉमी को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, सरकार करंसी नोटों की प्रिंटिंग पर 25 हजार रुपये खर्च करती है और नोटों की सुरक्षा और रखरखाव पर 6 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। दूसरी तरफ बैंक डेबिट कार्ड पेमेंट के लिए 1 प्रतिशत और क्रेडिट कार्ड के लिए 2 प्रतिशत चार्ज करते हैं। सरकार इस प्रक्रिया में बदलाव कर बैंकों को सीधे सब्सिडी पहुंचाना चाहती है।
    जिससे इस चार्ज को हटाया जा सके।
    चेक बुक बैन करने से कैशलेस इकॉनॉमी की दिशा में क्या फायदा होगा? अधिकतर व्यापारिक लेन-देन चेक के जरिए ही होता है। अभी 95 प्रतिशत ट्रांजैक्शंस कैश या चेक के जरिए होते हैं। नोटबंदी के बाद नकद लेन-देन में कमी आई और चेक बुक का उपयोग बढ़ गया। सरकार ने इस वित्त वर्ष के अंत तक 2.5 खरब डिजिटल ट्रांजैक्शंस का टारगेट रखा है। इस टारगेट को पूरा करने के लिए सरकार चेक बुक पर जल्द ही बैन लगा सकती है। (इकॉनॉमिक टाईम्स)

     

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Posted Date : 20-Nov-2017
  • शाइन जैकब, संजीव मुखर्जी और श्रेया जय
    नई दिल्ली, 20 नवम्बर  सरकार ने दिल्ली में वायु प्रदूषण रोकने की कोशिशें तेज कर दी हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने पिछले सप्ताह राजधानी में तय समय से पहले बीएस-6 ईंधन की व्यवस्था लागू करने की घोषणा की थी और अब वह बायोएथेनॉल संयंत्रों में पराली का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहा है। पराली जलने से निकलने वाला धुआं ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का मुख्य कारण है।
    सूत्रों के मुताबिक हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल), इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) जैसी तेल विपणन कंपनियां जल्दी ही देश में पराली संग्रहण केंद्र स्थापित करेंगी जिसका इस्तेमाल देश में बन रहे दूसरी पीढ़ी के 12 बायोएथेनॉल संयंत्रों में किया जाएगा। पेट्रोलियम मंत्रालय में बायोईंधन से जुड़े कार्यकारी समूह के अध्यक्ष वाई बी रामकृष्ण ने कहा, तेल विपणन कंपनियों को हर संयंत्र के लिए सालाना करीब 1.5 लाख टन बायो मास की जरूरत होगी। इसमें धान और गेहूं की पराली तथा बांस के डंठल शामिल हैं। ऐसे दो संयंत्र पंजाब और हरियाणा में बन रहे हैं।
    पराली साल में 15 से 30 दिन तक उपलब्ध रहती है, इसलिए ये कंपनियां इस दौरान इनका संग्रहण करेंगी। पराली जलाने से इस बार एनसीआर में प्रदूषण का व्यापक असर रहा जिसके कारण स्कूलों को बंद करना पड़ा और दिल्ली में भारी वाहनों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगानी पड़ी। खासकर पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में किसान धान की फसल काटने के बाद उसके अवशेष जला देते हैं।
    तेल विपणन कंपनियां बायोएथेनॉल संयंत्रों में पराली का इस्तेमाल करके इस समस्या का समाधान खोजने की कोशिश कर रही हैं। सरकारी कंपनियों के इस क्षेत्र में कम से कम 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की संभावना है। निजी क्षेत्र की कंपनियां भी 16 बायोएथेनॉल संयंत्र बनाने पर विचार कर रही हैं। इस तरह इस क्षेत्र में कुल 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। रामकृष्ण का कहना है कि इससे पराली जलाने की समस्या खत्म हो जाएगी क्योंकि इनमें से हर संयंत्र को रोजाना 500 टन बायो मास की जरूरत पड़ेगी। 
    पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि दिल्ली में 1 अप्रैल, 2018 से ही वाहनों के लिए बीएस-6 मानक लागू किया जाएगा। अनुमानों के मुताबिक बीएस-4 मानक वाले वाहन बीएस-6 ईंधन पर चलाए जाएं तो इससे 50 फीसदी कम प्रदूषण होगा। कुछ आकलनों के मुताबिक इन चार राज्यों में 3।4 करोड़ टन धान की पराली पैदा होती है। मशीनों से कटाई के कारण पराली पूरी तरह नहीं उखड़ती है जिससे किसानों को अवशेष जलाना पड़ता है। वे इसे सडऩे के लिए नहीं छोड़ सकते हैं क्योंकि उन्हें अगली फसल के लिए खेत तैयार करना पड़ता है। हालांकि उनके पास कटाई मशीन के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) जोडऩे का विकल्प है जो पराली को नीचे तक काटता है और फिर इसे काटकर मिट्टी में मिला देता है। इसकी लागत एक लाख से 1.25 लाख रुपये पड़ती है।
    कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पंजाब में करीब 7,500 स्वचालित कटाई मशीनें और 8500 ट्रैक्टर से चलने वाली कटाई मशीनें हैं जिन पर एसएमएस नहीं जुड़ा है। राज्य सरकार इन मशीनों पर 50 फीसदी यानी 50 हजार रुपये तक सब्सिडी देती है। लेकिन कई किसानों का कहना है कि अतिरिक्त मशीनों के कारण कटाई मशीन की क्षमता कम हो जाती है।
    नीति आयोग की एक मसौदा रिपोर्ट में कहा गया है कि पराली जलाने की समस्या के स्थायी समाधान के लिए करीब 11,500 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। एचपीसीएल ने 4, आईओसी और बीपीसीएल ने 3-3, मंगलूर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स और नुमालीगढ़ रिफाइनरी ने एक-एक बायोएथेनॉल संयंत्रों का खाका तैयार कर लिया है। सीएमसी बायोरिफाइनरीज, जैब इनोगी और केमपोलिस जैसी निजी कंपनियां भी इस कारोबार में हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय की योजना 2020-21 तक ईंधन में एथेनॉल की मात्रा मौजूदा 4.3 फीसदी से बढ़ाकर 8 से 10 फीसदी करने की है। दस फीसदी एथेनॉल मिश्रण के लिए भारत को करीब 4.5 अरब लीटर एथेनॉल की जरूरत होगी जिसकी कीमत 23 हजार करोड़ रुपये होगी।(बिजनेस स्टैंडर्ड)।

     

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Posted Date : 20-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 20 नवम्बर । जीएसटी के तहत 176 उत्पादों का रेट घटाने के बाद जीएसटी परिषद अब वॉशिंग मशीन समेत कई अन्य उत्पादों को सस्ता करने की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही आने वाले दिनों में कई और बदलाव जीएसटी में किए जाने के संकेत हैं।
    जीएसटी परिषद ने हाल ही में होटल में खाना सस्ता करने के साथ ही 175 से ज्यादा उत्पादों को 28 फीसदी टैक्स स्लैब से निकालकर 18 और 12 फीसदी के स्लैब में रखा है, लेकिन वॉशिंग मशीन समेत कई उत्पाद अभी भी 28 फीसदी की कैटेगरी में ही हैं।
    रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी परिषद आने वाले दिनों में वॉशिंग मशीन, फ्रिज और डिश वॉशर समेत कई अन्य सामान का रेट घटाकर उन्हें 28 फीसदी से निकाल कर सस्ता कर सकती है।
    इसके अलावा जीएसटी  टैक्स स्लैब में भी बदलाव किया जाना तय माना जा रहा है। जीएसटी परिषद के सदस्य और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा है कि जीएसटी के तहत आने वाले समय में सिर्फ दो टैक्स स्लैब रखे जाने पर विचार किया जा सकता है।
    कारोबारियों के लिए कई अहम बदलाव करने के साथ ही जीएसटी परिषद सीमेंट और पेंट को भी 28 फीसदी से  नीचे के टैक्स स्लैब में रखने पर विचार कर सकती है। फिलहाल इन दोनों उत्पादों को 28 फीसदी टैक्स स्लैब में रखा गया है। घर निर्माण और कई अहम निर्माण के कार्य में इनका इस्तेमाल होता है। ऐसे में परिषद इनका रेट कम करने पर भी विचार करेगी।
    जीएसटी परिषद पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के तहत लाने पर विचार कर सकती है। ऑयल मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी यह पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाने की अपील कर चुके हैं।
    खुद वित्त मंत्री अरुण जेटली  भी रियल इस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने की बात कह चुके है। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि रियल स्टेट को जल्द ही जीएसटी के तहत लाया जा सकता है। जिससे लोगों को बड़े स्तर पर फायदा मिलेगा।
    ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि जीएसटी की आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों में इस पर फैसला लिया जाना तय है। इससे आम लोगों को घर खरीदने में काफी सहूलियत होगी और उन्हें कई चार्ज भरने से मुक्ति मिलेगी।(टाईम्स आफ इंडिया)

     

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Posted Date : 19-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 19 नवम्बर । भारतीय रिजर्व बैंक की आम जनता को अपनी पहलों व अन्य नियमों के बारे में जागरूक बनाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान की योजना है। प्रस्तावित अभियान हिंदी सहित कई भाषाओं में होगा।
    केंद्रीय बैंक के संचार विभाग ने इस बारे में विज्ञापन एजेंसियों से आवेदन मांगे हैं। बैंक के दस्तावेज के अनुसार यह अभियान हिंदी, पंजाबी, उर्दू, मराठी सहित 14 भाषाओं में होगा।
    अपने जागरूकता अभियान के तहत केंद्रीय बैंक समाचार पत्र, रेडियो व टीवी चैनल जैसे पारंपरिक माध्यमों के साथ साथ डिजिटल मीडिया जैसे नये माध्यमों पर भी ध्यान केंद्रित करना चाहता है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 18-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 18 नवम्बर। जीएसटी परिषद ने हाल ही में लगभग 200 उत्पादों की जीएसटी दरों में बदलाव किया था, जिसके बाद सरकार ने कंपनियों को पैकेट वाले उत्पादों पर न्यूनतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के मूल्य स्टीकर लगाने के लिए दिसंबर तक का समय दिया है। 
    केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने पिछले दिनों कहा था कि जीएसटी परिषद द्वारा 10 नवंबर को 200 सामानों पर टैक्स की दरों में किए गए बदलाव के बाद अब उसी हिसाब ने नया अधिकतम बिक्री मूल्य छपवाना होगा। पासवान ने कहा कि ऐसा नहीं करनेवालों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्पादकों को घटी हुई एमआरपी के साथ पुरानी एमआरपी को भी लगाना होगा, ताकि जीएसटी की दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों को दिया जा सके।
    1 जुलाई, 2017 से माल और सेवाकर (जीएसटी) के कार्यान्वयन के बाद पैकेट वाली कुछ वस्तुओं के खुदरा मूल्य में बदलाव की जरूरत महसूस हुई थी। उपभोक्ता मामलों, खाद्य व सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने निर्माताओं सहित अन्य संबद्ध इकाइयों को पैकेट-बंद वस्तुओं पर एमआरपी स्टीकर लगाने के लिए पहले 30 सितंबर तक का समय दिया था, जिसे अब बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2017 कर दिया गया है।
    इसके अनुसार जीएसटी की दरों में संशोधन को देखते हुए पासवान ने वैधानिक माप-तोल (डिब्बा-बंद वस्तुएं) नियम 2011 के नियम 6 के उपनियम (3) के तहत अतिरिक्त स्टीकर या मोहर या ऑनलाइन प्रिंटिंग के जरिए पैकेजिंग पूर्व वस्तुओं के घटे खुदरा मूल्य को घोषित करने की अनुमति दे दी है।  (भाषा)

     

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Posted Date : 18-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 18 नवम्बर। स्पेशल सेल ने 6.60 लाख रुपये के नकली नोटों के साथ मालदा (वेस्ट बंगाल) के एक शख्स को गिरफ्तार किया है। उसे नोटबंदी के बाद नकली नोटों की सप्लाई करने वाला सरगना बताया गया है। 
    आरोपी को गुरुवार सुबह करीब 6 बजे आनंद विहार आईएसबीटी के पास से गिरफ्तार किया गया।
    पुलिस ने बताया कि आरोपी का नाम काशिद (54) है। इससे पहले सेल ने पिछले महीने साढ़े 6 लाख रुपये के नकली नोटों के साथ जहीरुद्दीन और क्रांति को गिरफ्तार किया था। काशिद सेल के हत्थे चढऩे से रह गया था। इसके बाद वह कुछ वक्त के लिए अंडरग्राउंड हो गया था। अब वह फिर से इस धंधे में सक्रिय होने लगा था।
    पुलिस ने बताया कि 2 हजार रुपये के नोटों में नकली करंसी को मालदा और नेपाल से लगते भारत के बॉर्डर से लाया जा रहा था। माना जा रहा है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश और पाकिस्तान से करंसी आई है। इस बारे में सेल को पुख्ता जानकारियां मिली हैं। गिरफ्तार आरोपी इसी तरह के एक और मामले में भी वॉन्टेड था।
    पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार काशिद करीब 15 वर्षों से इस धंधे में सक्रिय है। पिछले महीने 2 लोगों के पकड़े जाने के बाद वह नकली नोटों को खपाने के लिए नए लोगों की तलाश में था। ऐसे ही कुछ लोगों को नकली नोट देने के लिए वह गुरुवार सुबह आनंद विहार आईएसबीटी पहुंचा था। इसी दौरान स्पेशल सेल की टीम ने उसे धर-दबोचा। (नवभारत टाईम्स)

     

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Posted Date : 16-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 16 नवम्बर। गैस सिलेंडर पर अब पांच रुपए का डिस्काउंट पाया जा सकता है। यह लाभ वही उपभोक्ता उठा पाएंगे, जो ऑनलाइन गैस बुक कराएंगे और उसका पेमेंट भी उसी के जरिए करेंगे। खास बात यह है कि यह डिस्काउंट न केवल सब्सिडी वाले सिलेंडर पर मिलेगा, बल्कि बगैर सब्सिडी वाले सिलेंडर पर भी यह मान्य होगा। तेल मंत्रालय ने इस बाबत अपने बयान में कहा था कि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अपने उपभोक्ताओं को छूट देगी। वे ऑनलाइन बुकिंग के वक्त नेट बैंकिंग और क्रेडिट कार्ड सरीखे विकल्पों के जरिए पेमेंट कर सकते हैं। मिले हुए डिस्काउंट की रकम उपभोक्ता की डिवाइस पर बिल के साथ नजर आएगी।
    नरेंद्र मोदी की सरकार ने नवंबर में बीते साल नोटबंदी की थी। तब से वह कैशलेस और डिजिटल इंडिया के नारे पर बढ़ रही है। सरकार ने इसी क्रम में गैस के ऑनलाइन पेमेंट पर डिस्काउंट देने का फैसला किया है, ताकि इंटरनेट और फोन से होने वाली गैस बुकिंग और पेमेंट को बढ़ावा मिले। बगैर सब्सिडी वाले सिलेंडर के दाम एक नवंबर को 93 रुपए बढ़े हैं। यानी अब यह 742 रुपए का हो गया है। आपको इसका ऑनलाइन पेमेंट करने पर पांच रुपए की छूट मिलेगी। यानी यह सिलेंडर 737 रुपए का पड़ेगा।
    वहीं, सब्सिडी वाले की कीमत तकरीबन 495 रुपए है, जिसका ऑनलाइन पेमेंट कर सीधे-सीधे पांच रुपए की बचत की जा सकती है। ऐसा डिस्काउंट न केवल गैस सिलेंडर पर मिलता है बल्कि पेट्रोल और डीजल पर भी मिलता है। राज्य की तेल कंपनियां 0.75 फीसद तक पेट्रोल-डीजल के ऑनलाइन पेमेंट पर छूट देती हैं।
    इन तरीकों से किया जा सकता है पेमेंट-डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, मोबाइल ऐप बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, इलेक्ट्रॉनिक वॉलेट्स। (जनसत्ता)

     

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Posted Date : 16-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 16 नवम्बर। रिलायंस समूह के प्रमुख उद्योगपति मुकेश अंबानी का परिवार एशिया का सबसे अमीर परिवार है उनके परिवार की नेटवर्थ 19 अरब डॉलर (तकरीबन 1241 अरब रुपये) से बढ़कर 44.8 अरब डॉलर ( लगभग 2926 अरब रुपये) हो गई है, उनके बाद दक्षिण कोरिया के सैमसंग कंपनी के ली परिवार का स्थान है। 
    फोब्र्स पत्रिका की एशिया के 50 सबसे अमीर परिवारों की सूची में यह बात कही गई है। दक्षिण कोरिया के ली परिवार की संपत्ति 11.2 अरब डॉलर यानी 731.36 अरब रुपये बढ़कर 40.8 अरब डॉलर (2664.95 अरब रुपये) हो गई है। इसकी वजह सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों के मूल्य में पिछले एक साल में 75 फीसदी का इजाफा होना है।
    इस सूची में हांगकांग का कॉक परिवार तीसरे स्थान पर है। उसकी संपत्ति 40.4 अरब डॉलर यानी 2638.83 अरब रुपये है। इस परिवार के पास एशिया की सबसे अमीर रियल एस्टेट कंपनी सन हुंग काई प्रॉपर्टीज का नियंत्रण है। थाईलैंड के चारोएन पोक्पहैंड समूह के प्रमुख चिआरावैनांट परिवार का इस सूची में चौथा स्थान है जिसकी कुल संपत्ति 36.6 अरब डॉलर यानी 2390.62 अरब रुपये है।
    अंबानी परिवार इस सूची में शामिल इकलौता भारतीय परिवार है जो शीर्ष दस में शामिल है। इसके अलावा इस सूची में 19.2 अरब डॉलर (1254.10 अरब रुपये) की संपत्ति के साथ प्रेमजी परिवार 11वें स्थान पर, 18.8 अरब डॉलर (1227.97 अरब रुपये) की संपत्ति के साथ हिंदुजा परिवार 12वें स्थान पर, 17.2 अरब डॉलर (1123.46 अरब रुपये) की संपत्ति के साथ मित्तल परिवार 14वें स्थान पर, 16.1 अरब डॉलर (1051.61 अरब रुपये) की संपत्ति के साथ मिस्त्री परिवार 16वें स्थान पर और 14.1 अरब डॉलर (920.98 अरब रुपये) की संपत्ति के साथ बिड़ला परिवार 19वें स्थान पर है। (एनडीटीवी)
     

     

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Posted Date : 16-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 16 नवम्बर। फ्रांस के लड़ाकू विमान राफेल की खरीद को लेकर शुरू हुए विवाद में फ्रांस के राजनयिक सूत्रों ने प्रतिक्रिया दी है। सौदे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर कई आरोप लगाए थे जिन्हें उन्होंने साफ खारिज किया। उन्होंने कहा है कि राफेल की खरीद का सौदा भारत के हित में है। सूत्रों ने कहा कि एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत बेहतरीन प्रदर्शन और प्रतियोगी दर की वजह से ही राफेल का चुनाव किया गया था। सूत्रों ने कांग्रेस के आरोपों को घरेलू राजनीति का मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि आरोप लगाते समय तथ्यों की जांच किए जाने की जरूरत है।
    राफेल विमान खरीदने के सौदे के तहत मिलिट्री एयरोस्पेस रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रोगाम के लिए फ्रांस की तरफ से 30 प्रतिशत रकम दिए जाने का वादा किया गया है। साथ ही भारत में राफेल के पुरजों के निर्माण के लिए 20 प्रतिशत रकम देने की प्रतिबद्धता जताई गई है। यह पूछे जाने पर कि क्या फ्रांस इस समझौते को आगे बढ़ाना चाहता है, सूत्रों ने कहा कि यह भारत पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका ध्यान 36 विमानों को समय पर भारत पहुंचाने पर है।
    इस बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सौदे को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को उन्होंने एक के बाद एक तीन ट्वीट किए। (बाकी पेजï 5 पर)
    उन्होंने एयरोस्पेस में कोई भी अनुभव नहीं होने के बावजूद रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को सौदे में शामिल करने को लेकर सरकार से सवाल किया।
    उधर, एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक डील में शामिल अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस लिमिटेड ने कहा है कि कांग्रेस अपने आरोप वापस ले नहीं तो वे पार्टी पर मुकदमा करेंगे। कंपनी की यह प्रतिक्रिया कांग्रेस के यह आरोप लगाने के बाद आई कि फ्रांस की कंपनी डसाल्ट एवियेशन ने उसकी भारतीय साझीदार कंपनी रिलायंस डिफेंस को गलत तरीके से चुना है। कांग्रेस ने यह आरोप भी लगाया था कि सरकार के इस सौदे से केवल एक इंडस्ट्रियल ग्रुप रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को फायदा हुआ है। उसके मुताबिक यूपीए के कार्यकाल में जो सौदा हुआ था उससे तीन गुना ज्यादा दामों पर विमान खरीदे जा रहे हैं। पार्टी ने कहा कि राष्ट्रहित और सुरक्षा से समझौता कर राफेल सौदा किया जा रहा है। उसने मोदी सरकार पर इस डील के जरिए घोर पूंजीवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया था। (डेक्कन क्रॉनिकल)

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Posted Date : 15-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 15 नवम्बर । दुनिया का सबसे बड़ा हीरा एक्सपर्ट की उम्मीदों के मुताबिक नहीं बिका, 163 कैरट के हीरे की कीमत जहां 317 करोड़ रुपये तक आंकी गई थी, वह सिर्फ 214 करोड़ रुपये में नीलाम हो गया। स्विटजरलैंड के जेनेवा में हीरे की नीलामी की गई, जहां उसे एक अज्ञात शख्स ने खरीद लिया।
    इस हीरे को आर्ट ऑफ ग्रिसोगोनो कहा जाता है। क्रिस्टी ऑटम ज्वेलरी ऑक्शन में इसे नीलाम किया गया। 
    क्रिस्टी इंटरनेशनल ज्वेल्स डिविजन के प्रमुख राहुल कडाकिया ने कहा है कि डी कलर के हीरे की ये रिकॉर्ड कीमत (214 करोड़) है। डी हीरे का सबसे उच्च ग्रेड है। इसका मतलब होता है कि स्टोन बिल्कुल रंगहीन और रेयर है। साल 2016 में अंगोला में मिले 404 कैरट के रफ रॉक से इस हीरे को तैयार किया गया था। (आजतक)

     

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Posted Date : 15-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 15 नवम्बर । सिक्के कारोबारियों के साथ-साथ बैंकों के लिए मुसीबत का सबब बनते दिख रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बीते जुलाई में एक अधिसूचना जारी कर बैंक में सिक्कों के रूप में जमा रकम की अधिकतम सीमा 1,000 रुपये तय कर दी थी। इसके बाद कारोबारियों के लिए सिक्के संभालने में दिक्कत पैदा हो गई। दूसरी ओर, बैंकों के पास नोटबंदी के बाद नकदी रखने के लिए जगह की भारी किल्लत है। बताया जाता है कि इस समस्या की बड़ी वजह 10 रुपये की सिक्कों की संख्या अधिक होना है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च, 2017 तक 5204 करोड़ रुपये 10 रुपये के सिक्कों के रूप में थे। इससे एक साल पहले यह आंकड़ा 3703 करोड़ रुपये था।(बिजनेस स्टैंडर्ड)

     

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Posted Date : 14-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 14 नवम्बर । योग गुरु बाबा रामदेव  के पतंजलि ब्रांड की तरह ही अब ऑर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर श्री श्री तत्वा ब्रांड से रिटेल बाजार में अपनी पैठ बनाने की तैयारी कर ली है। इसके लिए कंपनी ने अगले दो साल में 1000 फ्रेंचाइजी स्टोर खोलने की योजना बनाई है। श्री श्री तत्वा के प्रबंध निदेशक अरविंद वर्चस्वी ने कहा, हमारे उत्पाद देशभर में फैले श्री श्री के समर्थकों के बीच पहले से ही मौजूद हैं। इसके अलावा 35 देशों में हमारे उत्पादों की भारी मांग है। अब हम देश के बाजार में आम लोगों तक फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिये अपने उत्पाद पहुंचाने की योजना पर काम कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य अगले दो साल में 1000 फ्रेंचाइजी स्टोर खोलने की है। 
    उन्होंने कहा, श्री श्री तत्वा मार्ट के तहत स्टोर खोले जाएंगे जहां हमारे सभी उत्पाद उपलब्ध होंगे। श्री श्री तत्वा वेलनेस प्लेस और श्री श्री तत्वा होम एंड हेल्थ में आयुर्वेदिक और एफएमसीजी (तेज खपत उपभोक्ता वस्तु) उत्पाद मुहैया कराए जाएंगे, जिसमें आयुर्वेदिक दवाइयां, खाद्य पदार्थ, अनाज, आर्गेनिक खाद्य पदार्थ, पर्सनल केयर उत्पाद, होम केयर उत्पाद और पूजा की सामग्री शामिल हैं। साथ ही कंपनी इन-हाउस आयुर्वेदिक वैद्य भी उपलब्ध कराएगी।
    वर्चस्वी ने कहा, श्री श्री तत्वा के पास उच्च अनुभवी आयुर्वेद वैदाचार्य हैं जो नाड़ी की पहचान में विशेषज्ञ हैं। वे इन फ्रेंचाइजी केंद्रों पर अपनी सेवाएं देंगे। कंपनी अपने उत्पादों के लिए कच्चे माल के चयन में साफ-सफाई और सुरक्षा मानकों का बेहद ध्यान रखती है। उन्होंने कहा, हम जल्द ही कई शहरों में नए फ्रेंचाइजी स्टोर खोलने की आशा रखते है और हमारे सभी उत्पाद और सेवाओं को ग्राहकों को एक छत के नीचे मुहैया कराए जाएंगे।(आईएनएस)

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Posted Date : 13-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 13 नवम्बर। पीएफ यानी ईपीएफ का मतलब है एंप्लॉयी प्रॉविडेंट फंड, हिन्दी में कहें तो कर्मचारी भविष्य निधि। यह किसी भी नौकरीपेशा व्यक्ति का वह खाता है जिसमें वह खुद और उसका नियोक्ता एक निश्चित रकम (वाया नियोक्ता) ईपीएफओ में आपके नाम से खुले एक निश्चित खाते में जमा करवाते हैं। इसमें आपका नियोक्ता आपकी सैलरी से कुछ निश्चित रकम काटकर (मौजूदा समय में 12 फीसदी) पीएफ ऑफिस में जमा करा देता है। यह तय रकम सरकार द्वारा निर्धारित होती है और इस तय रकम में नियोक्ता भी अपना हिस्सा (हमारी सीटीसी का हिस्सा) जोड़कर जमा कराता है।
    पीएफ पर मिल रहे ये पांच फायदे...
    1. पिछले ही साल ईपीएफओ ने अपने इस फैसले को वापस ले लिया था कि निष्क्रिय पड़े खातों पर ब्याज नहीं मिलेगा, यानी अब आपको अपने पीएफ खाते पर तब भी ब्याज मिलेगा जब वह 3 साल से अधिक समय तक निष्क्रिय पड़ा रहा हो। छत्तीस महीनों तक लगातार यदि आपके पीएफ खाते से न पैसा निकाला गया और न ही इसमें डाला गया तो भी मौजूदा रकम पर ब्याज मिलता रहेगा। वैसे वित्तीय मामलों के जानकार कहते हैं कि भले ही ब्याज मिलता रहे लेकिन इसे सक्रिय पीएफ खाते में ट्रांसफर करवा लेना चाहिए या निकाल लेना चाहिए क्योंकि मौजूदा नियमों के मुताबिक पांच साल से अधिक समय इस निष्क्रिय खाते के लगातार निष्क्रिय ही बने रहने पर इसे निकाले पर टैक्स देना होगा।
    2. क्या आपको पता है कि पीएफ खाते से आपको बाई डिफॉल्ट बीमा भी मिलता है। ईडीएलआई योजना के तहत आपके पीएफ खात पर 6 लाख रुपये तक इंश्योरेंस मिलेगा। यह योजना एम्प्लॉयमेंट डिपोजिट लिंक्ड इंश्योरेंस (ईडीएलआई) है। 
    3. एक और जरूरी बात। दस साल तक लगातार पीएफ खाता मेंटेन करने पर जीवन भर की एंप्लॉयी पेंशन स्कीम का लाभ मिलेगा। यानी, 10 साल तक लगातार ऐसी नौकरी (नौकरियों) में रहने जहां से आपके पीएफ खाते में पैसा जमा होता रहा, आपको एम्प्लॉयी पेंशन स्कीम 1995 के तहत एक हजार रुपये की पेंशन रिटायरमेंट के बाद मिलती रहेगी।
    4. आधार से लिंक आपके यूएएन नंबर के जरिए आप अपने एक से अधिक पीएफ खातों (यदि जॉब चेंज करते रहे हैं तो) को लिंक कर सकते हैं। नौकरी बदलने पर पीएफ का पैसा ट्रांसफर करना अब आसान हो गया है। नई नौकरी जॉइन करने पर ईपीएफ के पैसे को क्लेम करने के लिए अलग से फॉर्म-13 भरने की जरूरत अब नहीं। अब यह अपने आप हो जाएगा। ईपीएफओ ने एक नया फॉर्म पेश किया है, फॉर्म 11 जोकि फॉर्म 13 की जगह पर इस्तेमाल होगा। यह ऑटो ट्रांसफर के सभी मामलों में इस्तेमाल होगा।
    5. अब बात करते हैं विदड्रॉल की। पीएफ से पैसा निकालना है तो आप इन परिस्थितियों में एक निश्चित रकम निकाल सकते हैं - मकान खरीदने या बनाने के लिए, मकान की रीपेमेंट के लिए, बीमारी में, उच्च शिक्षा के लिए, शादी आदि के लिए। इन फायदों का इस्तेमाल करने के लिए आपको ईपीएफओ का एक खास समय तक सदस्य होना चाहिए। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 13-Nov-2017
  • नई दिल्ली: केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में शरीया के सिद्धांतों पर चलने बैंकिंग व्यवस्था शुरू करने के प्रस्ताव पर आगे कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्णय लिया है. आरबीआई ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गये एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है. रिजर्व बैंक ने कहा है कि सभी लोगों के सामने बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं के समान अवसर पर विचार किये जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है.
    दरअसल इस्लामिक बैंकिंग में बैंक पैसे के ट्रस्ट्री की भूमिका में होता है और बैंक में जो लोग पैसे जमा करवाते है वे जब मर्जी यहां से पैसा निकाल सकते हैं. लेकिन एक बात यह भी है कि इस बैकिंग प्रणाली में सेविंग्स बैंक अकाउंट पर ब्याज नहीं दिया जाता. यानी आपके जमा के पैसे पर बैंक आपको ब्याज नहीं देगा. इस्लामिक कानून में  लोन देने और लोन लेने वाले दोनों ही पार्टियों पर समान रिस्क होता है और यदि पैसा डूबता है इसकी जिम्मेदारी दोनों पर मानी जाती बताई जाती है.इसके अलावा इस्लामिक बैंकिंग में शराब, जुआ जैसे गलत समझे जाने वाले धंधों में निवेश करने की अनुमति नहीं है.

     

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Posted Date : 12-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 12 नवम्बर । भारत में ऑनलाइन फ्री कॉन्डोम स्टोर से सिर्फ 69 दिनों में 9.56 लाख कॉन्डोम ऑर्डर किए गए हैं। एड्स हेल्थकेयर फाउंडेशन की ओर से 28 अप्रैल को फ्री कॉन्डोम स्टोर को शुरू किया गया था। इस स्टोर से लोग फोन या ईमेल भेजकर कॉन्डोम मंगा सकते हैं। आइए जानते हैं पूरा मामला...
    भारत के गर्भनिरोधक बाजार में कॉन्डोम का शेयर सिर्फ 5 फीसदी है। यानी बहुत कम लोग कॉन्डोम का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन फ्री कॉन्डोम स्टोर डाटा एक नए रुझान की ओर इशारा कर रहा है।
    हालांकि करीब 10 लाख में 5.14 लाख कॉन्डोम कम्यूनिटी और एनजीओ की ओर से ऑर्डर किए गए, जबकि आम लोगों ने सिर्फ 4.41 लाख कॉन्डोम ऑर्डर किया।
    आम लोगों में दिल्ली और कर्नाटक के लोगों की संख्या काफी अधिक रही। एड्स हेल्थकेयर फाउंडेशन ने हिन्दुस्तान लैटेक्स लिमिटेड के साथ मिलकर स्पेशल ब्रांड का कॉन्डोम बनाने का फैसला किया था।
    रिपोर्ट के मुताबिक, फाउंडेशन के इंडिया प्रोग्राम डायरेक्टर वी सैम प्रसाद ने कहा है कि उन्होंने सोचा था, 10 लाख कॉन्डोम दिसंबर तक चलेगा। लेकिन यह जुलाई के पहले हफ्ते में ही खत्म हो गया। कॉन्डोम के लिए नए ऑर्डर दे दिए गए हैं।
    जानकारों के मुताबिक, ऑनलाइन स्टोर से लोगों ने अधिक कॉन्डोम इसलिए ऑर्डर किए क्योंकि उन्हें दुकानों पर जाकर कॉन्डोम खरीदने में शर्मिंदगी होती है। (टाईम्स आफ इंडिया)

     

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Posted Date : 11-Nov-2017
  • गुड्स एंड सर्विसेस टैक्‍स (जीएसटी) काउंसिल ने शुक्रवार को 211 आइटम्स पर टैक्स स्लैब में कमी कर दी है. इसमें सबसे ज्‍यादा चर्चा रेस्‍टोरेंट में खाने पर टैक्‍स में कटौती को लेकर है. अब रेस्‍टोरेंट में 18 की जगह 5 पर्सेंट टैक्‍स लगेगा. दरअसल कांउसिल का कहना है कि रेस्‍टोरेंट इनपुट टैक्‍स क्रेडिट (आईटीसी) का बेनिफिट कस्‍टमर्स को नहीं दे रहे थे. इस लिए इनपुट टैक्‍स क्रेडिट को वापस ले लिया गया है. वहीं, रेस्तरां मालिक काउंसिल के इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं.  

    10% तक बढ़ सकते हैं मैन्‍यू प्राइस

    इनपुट टैक्‍स क्रेडिट के वापस लेने से नाराज कई रेस्‍टोरेंट के मालिक मैन्‍यू प्राइस में 10 प्रतिशत तक का इजाफा करने का प्‍लान कर रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो कस्‍टमर्स को जीएसटी के घटे स्‍लैब का फायदा नहीं मिल पाएगा. हालांकि जब तक ऐसा रोस्‍टोरेंट मालिक ऐसा निर्णय नहीं लेते, तब तक के लिए कस्‍टमर्स को इसका फायदा मिलेगा.

    कैसे मिलेगा फायदा

    अभी तक नॉन एसी रेस्‍टोरेंट्स में खाने पर 12% और एसी रेसटोरेंट्स में खाने में 18% का जीएसटी देना होता था. सरकार ने इनपुट टैक्‍स क्रेडिट को वापस ले लिया. ऐसे में अब एसी या नॉन एसी रेस्‍टोरेंट में खाने पर 5% जीएसटी देना होगा.

    क्‍या है जीएसटी काउंसिल

    जीएसटी काउंसिल गुड्स एंड सर्विसेस टैक्‍स के रिव्‍यू के लिए बनाया गया है। इसमें केंद्र और राज्‍य के रिप्रेजेंटेटिव शामिल हैं। ये काउंसिल जीएसटी के होने वाले सुधार और दिक्‍कतों पर चर्चा करती है.

    178 उत्पादों पर टैक्स कम किया

    वित्त मंत्री ने बताया कि 228 उत्पादों में से 178 में टैक्स दर 28 से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है. डिटर्जेंट, मार्बल फ्लोरिंग और टॉयलेट के कुछ सामानों पर जीएसटी दर 28 से घटाकर 18 प्रतिशत की गई है. मार्बल समेत कुछ उत्पादों को 28 से 12 प्रतिशत के दायरे में लाया गया है. 13 उत्पादों पर जीएसटी 18 से 12 प्रतिशत कर दिया गया है. वहीं 6 उत्पादों को 18 से सीधे 5 फीसदी पर लाया गया है. 8 उत्पादों पर 12 से 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि 6 उत्पादों को जीएसटी फ्री कर दिया गया है.

    15 नवंबर से नया टैक्स स्लैब

    नई टैक्स दरें 15 नवंबर से प्रभावी होंगी. जेटली ने भी माना कि जिन वस्तुओं को 28 से 18 प्रतिशत के टैक्स स्लैब में लाया गया है, वे पहले ही उसी स्लैब में होनी चाहिए थी. जीएसटी की नई दरों से सरकार को तकरीबन 20 हजार करोड़ रुपये का घाटा होगा.

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Posted Date : 10-Nov-2017
  • गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स, यानी GST की सर्वाधिक दर 28 फीसदी के तहत अब तक आने वाली लगभग 220 वस्तुओं में से अब सिर्फ 50 वस्तुओं पर ही यह दर लागू होगी, और शेष वस्तुओं को कम टैक्स वाली स्लैबों में डाल दिया गया है. दरअसल, व्यापारियों तथा छोटे व्यवसायियों की शिकायत थी कि इसी साल 1 जुलाई से लागू किए गए नए राष्ट्रव्यापी टैक्स की वजह से उनकी टैक्स देनदारी और प्रशासनिक खर्च बढ़ गया है, और इसी वजह से यह फैसला किया गया है.
    GST दरों में क्या- क्या बदलाव हुए जानें
    GST काउंसिल में GST नेटवर्क के पैनल के प्रमुख सुशील मोदी ने कहा कि रोज़मर्रा के इस्तेमाल की शैम्पू, डियोडरेंट, टूथपेस्ट, शेविंग क्रीम, आफ्टरशेव लोशन, जूतों की पॉलिश, चॉकलेट, च्यूइंग गम तथा पोषक पेय पदार्थ जैसी वस्तुएं अब सस्ती हो जाएंगी.
    GST काउंसिल की 23वीं बैठक में उन सुझावों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है, जो असम के वित्तमंत्री हिमांता विश्व शर्मा के नेतृत्व वाले एक पैनल ने की हैं. एयरकंडीशन्ड रेस्तरांओं में परोसे जाने वाले भोजन पर भी GST को 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी करने पर फैसला इसी बैठक में किया जा सकता है.
    काउंसिल हर माह तीन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अनिवार्यता की भी समीक्षा कर रही है, ताकि रिटर्न फाइल किए जाने की प्रक्रिया को टैक्सपेयर-फ्रेंडली बनाया जा सके.
    वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इसी सप्ताह संकेत दिया था कि 28 फीसदी वाले स्लैब से कुछ वस्तुओं को हटाया जा सकता है. उन्होंने यहां तक कहा था कि कुछ वस्तुओं को इस स्लैब में रखा ही नहीं जाना चाहिए था. उन्होंने कहा था, "हम धीरे-धीरे उन्हें निचले स्लैब पर लाते रहे हैं... हमारा मानना है कि जब आपका राजस्व कलेक्शन बेअसर होने लगे, हमें उसमें काट-छांट करनी ही चाहिए, और इसी तरीके पर काउंसिल अब तक चलती रही है... जहां तक काउंसिल का सवाल है, मैं इसी को भविष्य के लिए गाइडलाइन भी मानता हूं..."
    जिस वक्त 1 जुलाई को नई टैक्स व्यवस्था लागू हुई थी, उसी वक्त से GST काउंसिल की बैठक हर माह होती रही है, और अब तक 100 से ज़्यादा बार टैक्स की दरों में बदलाव किया जा सका है. GST के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर चार अलग-अलग स्लैबों - 5, 12, 18 तथा 28 फीसदी - के हिसाब से कर लगाया जाता है.
    GST काउंसिल की आज हो रही बैठक सरकार द्वारा GST को लागू किए जाने की कड़ी आलोचना के बीच हो रही है. आज़ादी के बाद सबसे बड़े कर सुधार के रूप में प्रचारित किए गए GST को लेकर विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि इसे लागू किए जाने के समय और तरीके की वजह से छोटे व्यापारियों तथा व्यवसायों की कमर टूट गई है.
    पुदुच्चेरी के मुख्यमंत्री वी नारायणसामी, पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल तथा कर्नाटक के कृषिमंत्री कृष्णबायरे गौड़ा सहित कई कांग्रेस नेताओं ने गुवाहाटी के उस होटल के बाहर विरोध-प्रदर्शनों का नेतृत्व किया, जहां GST काउंसिल की बैठक हो रही है, तथा आरोप लगाया कि सिर्फ पांच राज्यों को छोड़कर शेष सभी को GST शुरू किए जाने के बाद राजस्व का घाटा हुआ है.
    कांग्रेस ने BJP के नेतृत्व वाली सरकार पर उनकी चेतावनियों को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया है, और यह भी कहा है कि सरकार अब समीक्षा के लिए केवल इसलिए तैयार हो गई है, क्योंकि अगले महीने गुजरात में अहम विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां छोटा व्यापारी नई टैक्स व्यवस्था से नाराज़ है.
    कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात में धुआंधार अभियान के तहत GST को 'गब्बर सिंह टैक्स' की संज्ञा दी थी और राज्य के व्यापारियों से आग्रह किया था कि वे इस बार के चुनाव में BJP को खारिज कर दें, जो पिछले 22 साल से राज्य में सत्तासीन है. कांग्रेस नेता ने कहा था नोटबंदी और GST 'दो टॉरपीडो' हैं, जिन्होंने 'अर्थव्यवस्था को नष्ट' कर दिया है.
    उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात में की अपनी जनसभाओं में नोटबंदी और GST से होने वाले दीर्घावधि फायदों पर ज़ोर दिया, और कहा कि जो इन दोनों कदमों का विरोध कर रहे हैं, वे भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी लड़ाई को कमज़ोर कर रहे हैं.

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Posted Date : 10-Nov-2017
  • नई दिल्ली/गुवाहाटी, 10 नवम्बर । गुवाहाटी में चल रही जीएसटी काउंसिल की बैठक का आज दूसरा दिन है। बैठक के बाद आम लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि शैंपू से लेकर फर्नीचर तक 200 चीजों के दाम सस्ते हो सकते हैं। बिहार के उप मुख्यमंत्री और जीएसटी काउंसिल के सदस्य सुशील मोदी के मुताबिक, 28 फीसदी टैक्स के दायरे में आनेवाली ज्यादातर चीजों पर टैक्स घटाया जाएगा। इनमें रोजमर्रा के इस्तेमाल में आनेवाली कई चीजें शामिल हैं। इस कदम से न सिर्फ आम लोगों को राहत मिलेगी बल्कि कारोबारियों को भी आसानी होगी क्योंकि जीएसटी को लेकर व्यापारी वर्ग काफी परेशान है, खासकर गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस इसे लेकर लगातार बीजेपी को घेर रही है।
    जीएसटी स्लैब में बदलाव संभव, आम आदमी को मिल सकती है राहत...
    28 फीसदी टैक्स स्लैब की 80 फीसदी चीजें सस्ती हो सकती हैं, 28 फीसदी टैक्स स्लैब में अभी 227 आइटम, 80 फीसदी आइटम 12-18 फीसदी के टैक्स स्लैब में आ सकते हैं, मेकअप, इलेक्ट्रिक बल्ब पर टैक्स घट सकता है, रेस्टोरेंट में खाना भी सस्ता हो सकता है, जीएसटी परिषद ले सकती है और भी बड़े फैसले
    बेनामी संपत्ति पर ऐक्शन के खाके पर विचार, रीयल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार, रीयल एस्टेट के दायरे में आने से घर खरीदना सस्ता, टैक्स स्लैब घटाने पर फैसला, कंपोजिशन स्कीम की सीमा 1.5 करोड़ हो सकती है। 
    इस बैठक को मीडिया की पहुंच से दूर रखा गया था। आज बैठक समाप्त होने के बाद इसके बारे में औपचारिक जानकारी दी जाएगी। राज्य के वित्त मंत्री हेमंत बिस्व सर्मा ने बैठक की तैयारियों का जायजा लेने के बाद सोमवार को संवाददाताओं से कहा था जीएसटी की इस 23वीं बैठक में लघु उद्योगों पर इसके प्रभाव,छोटे व्यापारियों को छूट और अधिकतम खुदरा मूल्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी है। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 08-Nov-2017
  • फैसल मोहम्मद अली

    नई दिल्ली, 8 नवम्बर । पेशे से इंजीनियर रहे आमिर जैदी का बरसों पुराना सपना और चार साल की दौड़-धूप सार्थक होने की कगार पर पहुंची ही थी कि आठ नवंबर, 2016 की तारीख आ गई।
    हसरत मोहानी, चंद्रशेखर आजाद और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के शहर उन्नाव में लॉन्च होने वाले आमिर जैदी के हाउसिंग प्रोजेक्ट के बारे में कभी हर रोज 10-15 लोग पूछताछ के लिए आते थे, लेकिन उस दिन के बाद से करीब दो-तीन माह तक तो कोई फटका भी नहीं।
    जैदी को उम्मीद है कि उनका प्रोजेक्ट जनवरी तक शायद शुरू हो जाए, करीब साल भर से ज्यादा की देरी से! कानपुर से सटे उन्नाव से तकरीबन 483 किलोमीटर से दूर उत्तर प्रदेश के ही दूसरे शहर नोएडा में कम से कम दो लाख फ्लैट ऐसे हैं जिनका कोई खरीदार नहीं।
    आमिर जैदी कहते हैं कि 500 और 1000 रुपयों के नोट पर बैन के ऐलान के बाद सबसे पहले तो लोग बैंकों में पैसा जमा कराने में लग गये, उसके बाद मुझे लगता है कि इन्वेस्टमेंट करने में एक हिचकिचाहट भी है। शायद टैक्स के मामलों को लेकर परेशान किए जाने का डर लोगों में कहीं से समा गया है।
    अमेडस नाम की कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक अनिर्बान साहा कहते हैं कि रियल स्टेट को इन्वेस्टमेंट रिटर्न के लिए सबसे बेहतर क्षेत्र माना जाता था लेकिन स्थिति अब वो नहीं रही। रियल स्टेट अब सबसे अधिक मुनाफा कमाने वाला क्षेत्र नहीं रहा इसलिए उसका फर्क पड़ा है।
    अनिर्बान साहा बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि दूसरे लोगों के पास आमदनी का वो हिस्सा जो खर्च के लिए उपलब्ध होता है उसका बड़ा हिस्सा कैश में हुआ करता था अब वो अनुपात बिगड़ गया है।
    नोटबंदी से रियल स्टेट में कैश लेन-देन की जो गुंजाइश होती थी उससे फर्क तो पड़ा है, प्रॉपटी डीलर रमेश जोशी अनिर्बान की बात से सहमत दिखते हैं और साथ ही कहते हैं लेकिन इसकी वजह से रियल स्टेट पर जब भी ब्लैक मनी की बात होती थी तो उंगली भी उठती थी।
    रमेश जोशी के मुताबिक पहले रियल स्टेट में कई तरह के रेट होते थे- जैसे प्रशासन के जरिये खास क्षेत्रों के लिए तय की गई कीमत, और, फिर बाजार का भाव, और दोनों में काफी फर्क हुआ करता था, कई मामलों में तो सरकारी तय कीमत की तिगुनी-चौगनी। चूंकि अब कैश के लेन-देन होने की गुंजाइश पहले के बनिस्बत कम हुई है तो दोनों के फर्क में कमी आई है।
    हालांकि इस गिरती कीमत को लोग खरीदारों के लिए फायदे का सौदा बता रहे हैं, कुछ का ये मानना है कि निवेश के इरादे से प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोग अब उसे पहले की तरह फायदे का सौदा नहीं मानते। बाजार से जुड़े लोगों का कहना है कि अब ज्यादातर घर या फ्लैट वही लोग खरीद रहे हैं, जिन्हें उसमें रहना होता है।
    जाहिर है इससे रियल इस्टेट सेक्टर में पैसा पहले की तरह नहीं आ रहा है और जब पैसे नहीं लगेंगे तो क्षेत्र का विकास या तो रुक जाएगा और कम से कम धीमा तो पड़ेगा ही। यहां ये बात याद रखने की जरूरत है कि रियल इस्टेट में साल 2013-14 के आसपास से पहले से ही धीमापन देखने को मिल रहा था।
    तबसे जारी अर्थव्यवस्था में सुस्ती ने दूसरे क्षेत्रों की तरह रियल इस्टेट पर भी अपनी काली छाया फैला दी थी। साथ ही बिल्डरों ने खरीदारों से पैसे लेकर दूसरे नए प्रोजेक्ट्स में लगा दिए थे जिसका नतीजा ये हुआ खरीदारों में भरोसे की कमी।
    एक तरफ जहां बिल्डरों को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो मकान की किश्त और किराया एक साथ भर रहे हैं क्यों कि उनके बिल्डर ने उन्हें वक्त पर फ्लैट नहीं दिए।
    तीस हजारी और दिल्ली हाई कोर्ट में वकालत करने वाले शिव नाथ ने 2012 में दो कमरों का एक फ्लैट गाजियाबाद के एक तैयार हो रहे प्रोजेक्ट में लगाया, उन्हें घर की चाभी 2016 में मिलनी थी लेकिन अब जबकि साल 2017 खत्म होने को है उन्हें नहीं मालूम कि अपने घर में रहने का उनका सपना कब पूरा होगा!
    शिव नाथ कहते हैं कि फिलहाल तो मुझे जिस फ्लैट में रह रहा हूं उसके किराये के अलावा खरीदे गये फ्लैट की किस्त भी चुकानी पड़ रही है। जिसने मेरी माली हालत पस्त कर दी है।
    तो क्या सरकारी और बिल्डर के रेट के फर्क में कमी आने से काला धन को रोकने में सफलता हासिल हुई है जो नोटबंदी के लिए सरकार के कई कथित उद्देश्यों में से एक था?
    नाम न बताने की शर्त पर दिल्ली से बाहर के एक खरीदार कहते हैं कि बिल्डरों के पास नकदी खपाने के अभी भी बहुत से रास्ते खुले हैं, इसलिए ये नहीं कहा जा सकता कि बिना हिसाब की नकदी आना बंद हो गया है। 
    जी नहीं, कैश का लेन-देन अब भी जारी है। आप बिल्डर के पास जाएं और उससे कहें कि आपके पास अतिरिक्त कैश है तो वो आपकी बुकिंग बैक डेट में करके बाकी का पैसा कैश में ले लेगा।
    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के रियल इस्टेट में ठेकेदार का काम करनेवाले जितेंद्र कुमार कहते हैं, सुधार के नाम पर ये बर्बादी है।
    सरकार को समझना होगा कि इस क्षेत्र के लिए कैश जरूरी है, जितेंद्र कुमार अपनी बात समझाने के लिए कहते हैं कि आखिर मजदूरों को या कंस्ट्रक्शन में काम आनेवाले माल जैसे सरिया, रेत वगैरह की खरीद के लिए कैश की जरूरत है।
    वो कहते हैं कि ये असंगठित क्षेत्र है जिसका बड़ा हिस्सा मजदूरों के सहारे काम करता है और उसके पास कहां बैंक खाता, कहां पेटीएम?
    कुमार कहते हैं, च्पहले मेरे पास खुद 100 के आसपास मजदूर काम किया करते थे लेकिन अब मुश्किल से 15-20 बचे हैं, बाकी सब गांव जाकर बैठ गए हैं। मजदूर को काम खत्म होते ही शाम को कैश चाहिए, अगर आप उससे बैंक खाते या चेक देने की बात भर भी कर लें तो वो दूसरे दिन सामान लेकर गायब हो जाता है।
    रियल इस्टेट से जुड़े लोगों का कहना है कि नोटबंदी की मार के बाद जो रही सही कमी रह गई थी वो जीएसटी ने पूरी कर दी है। हालांकि रियल इस्टेट पर जीएसटी नहीं लगा है लेकिन बिल्डिंग में इस्तेमाल होने वाली चीजो पर ये लागू है।
    इस क्षेत्र में एक बड़ा वर्ग उतना पढ़ा लिखा नहीं है और उसके लिए इन कागजातों को भरना इतना आसाना नहीं, दूसरे जीएसटी ने हर चीज की कीमत बढ़ा दी है जिससे लागत में बढ़त हो रही है।
    वो कहते हैं, घर बनेगा तब तो लोगों को मिलेगा ना।(बीबीसी)

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