राजनीति

  • नई दिल्ली, 22 सितंबर। सरकार शीतकालीन सत्र में महिला आरक्षण बिल लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक इस पर काफी लंबे समय से विचार चल रहा है। दरअसल इस बिल को लोकसभा में पास कराने की अपील के साथ सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी। इसके बाद बीजेपी ने कहा है कि उनकी सरकार इस बिल को पास कराने को लेकर प्रतिबद्ध है। बीजेपी का मानना है कि सोनिया गांधी चिट्ठी लिखकर बिल का क्रेडिट लेने की कोशिश कर रही हैं। बीजेपी के मुताबिक अगर सोनिया गांधी इस बिल को लेकर इतनी ही फिक्रमंद हैं तो अपने सहयोगियों- समाजवादी पार्टी और आरजेडी जैसी पार्टियों को चि_ी लिखें, जो इस बिल का विरोध करती आ रही हैं।
    कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि उन्हें लोकसभा में अपनी पार्टी के बहुमत का लाभ उठाते हुए महिला आरक्षण विधेयक को पारित करवाना चाहिए। यह विधेयक 9 मार्च, 2010 को कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के शासनकाल में राज्यसभा में पारित हो चुका है, लेकिन अभी इसको लोकसभा की मंजूरी मिलना बाकी है। सोनिया ने प्रधानमंत्री को इस बात का भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करेगी। उन्होंने इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
    सोनिया ने पीएम मोदी को भेजे पत्र में यह भी स्मरण कराया कि कांग्रेस और उनके दिवंगत नेता राजीव गांधी ने संविधान संशोधन विधेयकों के जरिये पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण के लिए पहली बार प्रावधान कर महिला सशक्तीकरण की दिशा में कदम उठाया था। (एनडीटीवी)

     

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  • नई दिल्ली/कोलकाता, 22 सितंबर। मूर्ति विसर्जन मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट से झटका लगने के बाद ममता सरकार अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगी। ममता सरकार हाईकोर्ट द्वारा पलटे गए फैसले के खिलाफ शुक्रवार को ही याचिका दायर कर सकती है।
    हाईकोर्ट ने मूर्ति विसर्जन पर राज्य सरकार का फैसला पलट दिया था। कोर्ट ने मुहर्रम के दिन मूर्ति विसर्जन से रोक को हटा दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पहले की तरह रात 12 बजे तक विसर्जन किया जा सकता है। पुलिस को इसके लिए व्यवस्था करनी होगी। हाईकोर्ट ने पुलिस से कहा है कि वह दोनों कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग रूट तैयार करें।
    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि प्रतिबंध लगाना सबसे आखिरी विकल्प है। कोर्ट ने कहा कि आखिरी विकल्प का इस्तेमाल सबसे पहले क्यों, सरकार को सिलसिलेवार तरीके से कदम उठाने होंगे।
    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि सरकार को प्रतिबंध लगाना तो सभी पर क्यों नहीं लगाया। सरकार बिना आधार अधिकार का इस्तेमाल कर रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार कैलेंडर को नहीं बदल सकती है, क्योंकि आप सत्ता में हैं इसलिए दो दिनों के लिए बलपूर्वक आस्था पर रोक नहीं लगा सकते हैं। सरकार को हर हालात के लिए तैयार रहना होगा।
    वहीं, सरकार के वकील ने कोर्ट में कहा कि क्या सरकार को कानून व्यवस्था का अधिकार नहीं है। वकील की ओर से कहा गया है कि अगर कानून व्यवस्था बिगड़ी तो किसकी जिम्मेदारी होगी।
    विसर्जन पर पाबंदी को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में ममता बनर्जी के खिलाफ याचिका दायर की गई थी। दरअसल, याचिका मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 23 अगस्त को किए गए ट्वीट को केंद्र में रखकर किया गया था। जिसमें दशमी के दिन 6 बजे तक ही विसर्जन की इजाजत दी गई थी, क्योंकि अगले दिन मुहर्रम है। लिहाजा, विसर्जन पर रोक लगा दी गई  थी और विसर्जन 2 तारीख से किए जाने के आदेश दिए गए थे। (आज तक)

     

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  • गुडग़ांव, 22 सितंबर। हरियाणा के गुडग़ांव में नवरात्र के मद्देनजर शिवसेना कार्यकर्ताओं ने मांस और चिकन की 500 से ज्यादा दुकानों को बंद करा दिया है। पार्टी के कार्यकर्ता पालम विहार में जमा हुए और सूरत नगर, अशोक विहार, सेक्टर पांच और नौ, पटौदी चौक, जैकबपुरा, सदर बाजार, खांडसा अनाज मंडी, बस स्टैंड, डीएलएफ क्षेत्र, सोहना और सेक्टर 14 बाजार में मांस की दुकानों को बंद करा दिया। शिवसेना की गुडग़ांव इकाई के महासचिव और प्रवक्ता ऋतु राज ने कहा कि उन्होंने मांस और चिकन की हर दुकान को नोटिस दिया था।
    उन्होंने कहा, इस बार हमने चिकन परोसने वाले रेस्तरां और अन्य फूड चेन्स को नोटिस नहीं दिया है, क्योंकि वहां यह खुले में नहीं दिखा है। अगर कोई निर्देशों का पालन नहीं करेगा तो वह परिणामों का सामना करेगा। शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने मांसहारी व्यंजन परोसने वाली अन्य खाद्य इकाइयों को नोटिस देकर नवरात्रि खत्म होने तक अपनी दुकानों को बंद करने को कहा।
    राज ने कहा, हमने मंगलवार को गुडग़ांव के उपायुक्त विनय प्रताप सिंह को ज्ञापन देकर अगले नौ दिनों तक कच्चे मांस की दुकानों को बंद करने की मांग की थी लेकिन प्रशासन ने गोश्त की दुकानों को बंद करने का आदेश नहीं दिया। पुलिस ने बताया,  हम मामले को देख रहे हैं। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने दुकानों को जबरन बंद कराया है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में शिकायत दर्ज कराए जाने का इंतजार कर रहे हैं। (एजेंसियां)

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  • नई दिल्ली, 21 सितंबर। दक्षिण के जाने-माने अभिनेता कमल हासन तमिलनाडु की राजनीति में उतरने की घोषणा कर चुके हैं।  वे इस सिलसिले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिलने वाले हैं। इसके बाद यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या वह केजरीवाल से हाथ मिलाना चाहते हैं? और क्या तमिलनाडु में आप की जमीन तैयार करने का जरिया बन सकते हैं।
    सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल से मुलाकात का आग्रह खुद कमल हासन की तरफ से किया गया है। इसके लिए केजरीवाल गुरुवार को ही चेन्नई जाने वाले हैं। दोनों के बीच इस सिलसिले में फोन पर बात हुई है। इसके बाद बताया जाता है कि दोपहर के भोजन पर उनके बीच तमिलनाडु की राजनीतिक संभावनाओं पर बातचीत होने वाली है। हालांकि अभी कोई यह बताने की स्थिति में नहीं है कि कमल के दिमाग में चल क्या रहा है।
    कुछ लोगों का मानना है कि कमल अपनी पार्टी बनाकर आप से गठबंधन कर सकते हैं। जबकि कुछ अन्य का मानना है कि केजरीवाल सीधे तौर पर अपनी पार्टी में शामिल होने के लिए कमल को राजी करने की कोशिश कर सकते हैं। अभी तक आप की तमिलनाडु में इकाई है जरूर लेकिन उसकी पहचान या उपस्थिति न के बराबर ही है। ऐसे में अगर आप को कमल हासन की मदद मिली तो दक्षिण में उसे बड़ी कामयाबी हाथ लग सकती है।
    वैसे यहां भी गौर करने लायक है कि कुछ समय पहले ही कमल ने केरल के मुख्यमंत्री और माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता पिनराई विजयन से मुलाकात की थी।
     उसके बाद उन्होंने कहा था कि वामपंथ और उसके कई विचारक उनके जीवन के आदर्श रहे हैं। तब भी उनके बारे में कई अटकलें लगाई गई थीं। और अब केजरीवाल से मुलाकात के बाद इसे लेकर संशय और गहरा गया है कि कमल किस रास्ते पर जाने वाले हैं।  (टाईम्स ऑफ इंडिया)

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  • लखनऊ, 20 सितंबर। कभी खुद को मुलायमवादी बताने वाले राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने साफ कह दिया है कि मुलायम सिंह यादव भी उन्हें फिर से पार्टी में बुलाएंगे तो वह नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह सपा में न हैं और न कभी जाएंगे। राजधानी लखनऊ में मंगलवार को एक फिल्म जेडी (जर्नलिज्म डिफाइन) के सिलसिले में आए अमर सिंह ने खुल कर स्पष्ट जवाब दिए। गोमतीनगर स्थित एक थिएटर में आयोजित पत्रकारवार्ता में अमर सिंह ने कहा कि वह अब सपा में नहीं जाएंगे। अगर मुलायम सिंह बुलाएं, तो भी वह नहीं जाएंगे।
    उन्होंने कहा कि मैं सपा में न हूं और न ही कभी होऊंगा। सपा में चल रहे अंतर्कलह को लेकर किए गए सवाल पर अमर सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी के अंदर चल रहे द्वंद्व में मेरी कोई भूमिका नहीं है। सपा के किसी भी धड़े से मेरा कोई मतलब नहीं है। जब मैं पार्टी में था, तो सारा दोष अंकल पर ही लगता था।
    उन्होंने कहा कि अब न नायक हूं और न ही खलनायक हूं। फिर कांटा क्यों लगा? मुलायम सिंह यादव की बात करते हुए अमर सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह ने मुझे दो बार पीछे का रास्ता दिखाया। उस दौरान नेताजी ने ही मुझसे कहा था कि पीछे के दरवाजे से आना। कहीं आजम, अखिलेश या रामगोपाल देख न लें।  (आईएएनएस)

     

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  • अहमदाबाद, 19 सितंबर। बागी कांग्रेस नेता शंकर सिंह वाघेला ने यहां मंगलवार को गुजरात में एक तीसरे मोर्चे के गठन की घोषणा की। एक संवाददाता सम्मलेन को संबोधित करते हुए वाघेला ने कहा, यह कहना मिथक है कि गुजरात में कोई वैकल्पिक राजनीतिक बल काम नहीं कर सकता।
    पिछले महीने कांग्रेस के खिलाफ विद्रोह करने वाले वाघेला ने कहा कि लोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस से उकता गए हैं और एक विकल्प के लिए बेताब हैं।
    कांग्रेस के पूर्व नेता शंकरसिंह वाघेला ने गुजरात विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान उनके साथ गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी और कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे। वाघेला के इस्तीफा देने के समय बीजेपी के बड़े नेताओं की मौजूदगी से उनके इस साल राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में वापसी के बारे में अटकलें शुरू हो गई थीं, जिस पर शंकर सिंह वाघेला ने आज तीसरे मोर्चे के गठन की बात कर विराम लगा दिया है।
    गुजरात राज्यसभा चुनाव के दौरान भी शंकर सिंह वाघेला ने सबको यह कहकर चौंका दिया था कि उन्होंने अहमद पटेल को वोट नहीं दिया। शंकर सिंह वाघेला ने कहा था कि कांग्रेस को वोट देने का मतलब ही नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुझे अहमद पटेल को वोट न देने का अफसोस है। (आईएएनएस)

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  •  मेरठ, 19 सितंबर । देश में वंशवाद की राजनीति से अब तक दूर रही बहुजन समाज पार्टी और उसकी प्रमुख मायावती ने भी लगता है इसी तरफ कदम बढ़ा दिया है। इस सोमवार को उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुई पार्टी की रैली के बाद बसपा के सूत्र और राजनीति के जानकार इस नतीजे पर पहुंचते दिख रहे हैं। मायावती ने इस रैली में अपने भतीजे आकाश को औपचारिक तौर पर राजनीति में लॉन्च कर दिया है।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद मायावती अपनी राजनीति, रणनीति और संभवत: पार्टी सगठन में भी बड़े बदलाव के मूड में हैं। बसपा सूत्रों के मुताबिक संभवत: इसी प्रक्रिया के तहत उन्होंने मेरठ रैली में बाकायदा मंच से न सिर्फ भतीजे आकाश को समर्थकों से रू-ब-रू कराया। बल्कि आकाश के पिता और अपने छोटे भाई आनंद को भी परिचित कराया। और यह पहली बार है जब सार्वजनिक मंच से मायावती ने इन पिता-पुत्र को इस तरह पेश किया है।
    यही नहीं करीब एक लाख समर्थकों की मौजूदगी (जैसा बसपा नेताओं का दावा है) वाली इस रैली के दौरान आनंद और आकाश को मंच पर मायावती के साथ जगह भी दी गई थी। हालांकि यूं तो बताया जाता है कि पिता-पुत्र की यह जोड़ी बीते कुछ महीने से लगातार दिल्ली और लखनऊ में होने वाली पार्टी की बैठकों में सक्रिय रूप से हिस्सा ले रही है। इनमें से आनंद को तो बीती 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती पर ही मायावती पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित कर चुकी हैं।
    वहीं लखनऊ में बीते दिनों हुई एक बैठक के दौरान आकाश को उन्होंने 'भविष्य के पार्टी पदाधिकारीÓ के रूप में वहां मौजूद नेताओं से परिचित कराया था। और पार्टी सूत्रों की मानें तो इसकी संभावना अधिक है कि मायावती आगे चलकर आकाश को अपने उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाएं। वे युवा हैं और सुशिक्षित भी। लंदन से उन्होंने मैनेजमेंट में पोस्टग्रेजुएशन किया है। ऐसे में बसपा समर्थकों के बीच उनकी अपील ज्यादा होगी ऐसा माना जा रहा है। (टाईम्स ऑफ इंडिया)

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  • पटना, 19 सितंबर। बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने नेता विपक्ष तेजस्वी यादव को अपना सरकारी बंगला खाली करने को कहा है। मोदी ने तेजस्वी से बंगला खाली करने के साथ यह ताकीद भी की है कि बंगला बिल्कुल सही हालत में होना चाहिए। तेजस्वी अपना बंगला खाली नहीं करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने सरकार से अपील भी की थी।
    तेजस्वी ने सरकार से अपील की थी कि उन्हें बतौर डेप्युटी सीएम 5, देशरत्ना मार्ग पर मिले बंगले में ही रहने की छूट दी जाए। नीतीश सरकार ने उनकी इस अपील को खारिज कर दिया। अब सुशील मोदी का कहना है, राज्य सरकार ने उनकी अपील नामंजूर कर दी है। तेजस्वी यादव जल्द से जल्द बंगला खाली कर दें। मुझे अपने कामकाज में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
    साथ ही बिहार के नए उप-मुख्यमंत्री ने कहा कहा है कि उन्हें बंगला बिल्कुल अच्छी हालत में चाहिए। अच्छी हालत का जिक्र करते हुए सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया कि इससे पहले आरजेडी के कुछ मंत्रियों से जो बंगले खाली करवाए गए उनके पंखे, बिजली के तार और टॉयलेट्स के साथ तोडफ़ोड़ की गई थी। 
    मोदी ने तेजस्वी पर तंज करते हुए यह भी कहा कि सरकारी प्रॉपर्टी से इतना मोह रखना कोई अच्छी बात नहीं है। मोदी ने आरजेडी के युवा नेता से कहा, आपकी अभी शादी नहीं हुई है और आपको तो वैसे भी आरजेडी नेताओं जैसे कांती सिंह, रघुनाथ झा ने आधा दर्जन से ज्यादा महंगी जमीन तोहफे में दी है। आपकी मां राबड़ी देवी के पास पटना में आरजेडी नेताओं द्वारा गिफ्ट किए 18 फ्लैट हैं।
    बीजेपी के सीनियर नेता सुशील कुमार मोदी इससे पहले लालू प्रसाद के परिवार पर आरोप लगा चुके हैं कि आरजेडी के शासन काल में उनको कई प्रॉपर्टी गिफ्ट में मिलीं। तेजस्वी को उनका सरकारी बंगला खाली करवाने का नोटिस मिला था। वह बंगला सुशील कुमार मोदी को दिया जाना है लेकिन तेजस्वी उसी में रहना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने पूर्ववर्ती गठबंधन में भी सीएम रहे नीतीश को मर्यादित भाषा में पत्र लिखा था। क्योंकि वहां से नीतीश के साथ-साथ तेजस्वी के पिता लालू यादव और मां राबड़ी देवी को मिला बंगला भी सड़क पार ही है। (पीटीआई)

     

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  • नई दिल्ली, 19 सितंबर । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार आज भले ही पेट्रोल, डीजल के दामों में बढ़ोतरी को जायज ठहरा रही हो, लेकिन 44 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसी मुद्दे पर इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ हल्ला बोला था।
    वाजपेयी पेट्रोल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन में बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे और अपना विरोध दर्ज किया था।
    न्यूयॉर्क टाईम्स के 12 नंवबर, 1973 को प्रकाशित अंक के मुताबिक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को संसद में विरोधी दलों के गुस्से का सामना करना पड़ा था। इस दिन संसद में छह सप्ताह तक चलने वाले शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई थी। दक्षिण और वामपंथी पार्टियों ने बढ़ी हुई कीमतों को रोकने में असर्मथता का आरोप लगाते हुए सरकार से इस्तीफे की मांग की थी। जन संघ के नेता अटल बिहारी वाजपेयी और दो अन्य सदस्य बैलगाड़ी से संसद पहुंचे थे। इनके अलावा कई अन्य साइकिल से संसद आए थे।  वे देश में पेट्रोल और डीजल की कमी में इंदिरा गांधी का बग्घी से यात्रा करने का विरोध कर रहे थे।
    इंदिरा गांधी इन दिनों लोगों के बीच पेट्रोल बचाने का संदेश देने के लिए बग्घी से यात्रा कर रही थीं। तेल का उत्पादन करने वाले मध्य-पूर्व देशों ने भारत को निर्यात होने वाले पेट्रोलियम पदार्थों में कटौती कर दी थी। जिसके बाद इंदिरा गांधी की सरकार ने तेल की कीमतों में 80 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी कर दी थी।
    1973 में तेल संकट तब आया था जब तेल निर्यात करने वाले देशों के संगठन यानी ओपेक ने दुनिया भर में तेल आपूर्ति में कटौती कर दी थी। अभी देश में पेट्रोल की कीमतें 80 रुपए के पार कर गई है। जिसपर केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे अल्फोंस ने पिछले दिनों कहा था कि जिनके पास कार और बाइक है वे ही पेट्रोल खरीद रहे हैं। जाहिर है, वे लोग भूखे नहीं मर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि जो लोग टैक्स दे सकते हैं, सरकार उनसे वसूली जरूर करेगी।
    उद्योग संगठन एसोचैम भी पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करने के पक्ष में है। एसोचैम द्वारा जारी नोट में कहा गया है कि जब कच्चे तेल की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल थी, तब देश में पेट्रोल 71.51 रुपये लीटर बेचा जा रहा था। अब कच्चे तेल की कीमत घटकर 53.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। उपभोक्ता तो यह पूछेंगे ही कि अगर बाजार से कीमतें निर्धारित होती हैं तो इसे 40 रुपये लीटर पर बेचा जाना चाहिए।
    वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता कहते हैं कि एक उपभोक्ता के लिहाज से देखें तो जो पैसा हम-आप प्रति लीटर दे रहे हैं, उसका करीब आधा पैसा सरकार के पास पहुंच रहा है। वो बताते हैं कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कर जरूर है, लेकिन उपभोक्ता जो पैसा चुकाते हैं और उसका आधा हिस्सा सरकार के पास पहुंचता है।
    ठाकुरता ने कहा कि सरकार को फायदा हो रहा है, लेकिन इसका बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। अर्थशास्त्रियों का मोटा-मोटी अनुमान है कि पिछले तीन साल में कम से कम पांच लाख करोड़ रुपए सरकार के पास इस तरह जमा हुए हैं। वो आगे कहते हैं कि ऐसी स्थिति में कोई सरकार इस मुनाफे का विरोध नहीं कर सकती है। चाहे सत्ता भाजपा के पास हो या कांग्रेस के पास। हालाँकि भाजपा का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से जुड़ी हुई हैं। भाजपा ने पेट्रोल कीमतों पर उठ रहे सवालों का जवाब सोशल मीडिया पर दिया है।
    भाजपा के ऑफिशियल ट्वीटर हैर्डं पर कीमतों की बढ़ोतरी पर तर्क भी पेश किए गए थे। धर्मेंद्र प्रधान ने पेट्रोल की बढ़ी कीमतों को लेकर कई ट्वीट्स किए। प्रधान ने लिखा कि जापान, स्विटजरलैंड, सिंगापुर, यूके, जर्मनी, फ्रांस समेत 68 देशों में भारत के मुकाबले पेट्रोल की कीमत ज्यादा है।
    ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से पेश किए गए, जिनका लब्बोलुआब ये कि पेट्रोल की कीमतें सिर्फ भारत में नहीं बढ़ रही हैं या भारत में पेट्रोल की कीमतें कम बढ़ रही हैं। (बीबीसी)

     

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  • शिवसेना बोली - गठबंधन पर जल्द लेंगे फैसला

    मुंबई, 18 सितम्बर: महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन फिर संकट में पड़ता दिख रहा है. बीजेपी के साथ रहना है या गठबंधन तोड़ना है इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी के सासदों और विधायकों के साथ एक बैठक की. शिवसेना नेता संजय राउत के मुताबिक पार्टी के सभी सांसदों और विधायकों ने ये फ़ैसला उद्धव ठाकरे पर छोड़ दिया और कहा कि वो जो भी फ़ैसला लेंगे वो उनके साथ हैं. राउत ने कहा कि बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर पार्टी फ़ैसले के काफ़ी क़रीब आ गई है. उन्होंने ये भी कहा कि बढ़ती महंगाई को लेकर लोगों में जिस तरह से हताशा बढ़ रही है वो काफ़ी चिंताजनक है.

    शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मुद्रास्फीति और तेल के बढ़ते दाम पर जोरदार निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रतिदिन 'अच्छे दिन' की 'हत्या' हो रही है. केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार में शामिल शिवसेना ने केंद्रीय मंत्री केजी अल्फोंस के पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्य में बढ़ोतरी संबंधी बयान की आलोचना करते हुए इसे 'बेहद गैर जिम्मेदाराना' बताया.  अल्फोंस ने शनिवार को कहा था कि 'जो पेट्रोल और डीजल के बढ़े मूल्यों को वहन कर रहें हैं, वह भूखे नहीं मर रहें हैं.' शिवसेना ने कहा, "कैबिनेट का यह नवरत्न पेट्रोलियम पदार्थो के बढ़े मूल्य का समर्थन कर रहा है क्योंकि उसे कभी भी अपने जेब से पैसे नहीं देने पड़ते. यह गरीबों के चेहरे पर थूकने जैसी बात है जिन्हें कांग्रेस के कार्यकाल में भी ऐसा अपमान नहीं सहना पड़ा था."

    पार्टी के मुखपत्र 'सामना' और 'दोपहर का सामना' में शिवसेना ने कड़े संपादकीय में लिखा कि यह बहुत आश्चर्यजनक है कि अल्फोंस अपने बयान को सही ठहराते हुए कह रहे हैं कि कैसे ईंधन के दाम बढ़ने के बाद भी लोग मर नहीं रहे हैं. संपादकीय में कहा गया है, "इनकी सुनो! बिना किसी राजनीतिक अनुभव वाले नौकरशाह से मंत्री बने इनमें ही शायद वह तमाम 'गुण' हैं जिनकी, बकौल अमित शाह, कांग्रेस में कमी है."

    सेना ने पूछा, "क्या वह भूल गए हैं कि संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ने के विरोध में राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी और धर्मेद्र प्रधान जैसे भाजपा नेताओं ने कैसे खाली सिलेंडरों के साथ सड़कों पर प्रदर्शन किए थे. अब जब वे सत्ता में आ गए हैं तो गरीबों का मजाक उड़ाया जा रहा है और अल्फोंस जैसे लोग मुद्रास्फीति को सही बता रहे हैं. यह सच में बहुत दुखद है."

    सामना के अनुसार, "महाराष्ट्र और भारत में कहीं भी किसानों की मौतों की बड़ी वजह ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी है. यहां लगातार बिजली नहीं रहने से समस्या बनी रहती है, जिस वजह से किसानों को डीजल से चलने वाले जेनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है और बाजार तक अपनी फसलों को पहुंचाने के लिए भी उन्हें बढ़े हुए वाहन मूल्य देने पड़ते हैं. कई किसान बढ़े मूल्य को चुका नहीं पाते और आत्महत्या कर लेते हैं."

    सामना ने ईंधन कीमतों की बढ़ोतरी पर हमला करते हुए कहा कि पेट्रोल, ईंधन और गैस मूल्यों में हुई वृद्धि से सामान्य लोग मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. संपादकीय में कहा गया है, "अच्छे दिन की रोजाना हत्या हो रही है." शिवसेना ने कहा, "लोगों के पास खाने के लिए अन्न नहीं है, किसान लगातार संकट में जी रहे हैं, मुद्रास्फीति और बेरोजगारी लोगों की चिंताओं को बढ़ा रही है. जब इन सब चीजों के बारे में महाराष्ट्र के एक उत्तेजित भाजपा विधायक पाशा पटेल से प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने सवाल पूछने वाले संवाददाता को धमकाया और उसे दिमागी इलाज कराने के लिए कहा." 

    शिवसेना ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना में करोड़ों रुपए खर्च किए जाएंगे. अगर यह 30,000 से 40,000 करोड़ रुपए महंगाई से निपटने में लगाए जाते तो सभी लोगों को भला होता. सेना ने संपादकीय में लिखा है, "पटेल ने संवाददाता को पागल कहा और दिमागी इलाज कराने को कहा. जबकि, सच तो यह है कि बुलेट ट्रेन की तारीफें करने वाले पागल हैं और उन्हें दिमाग का इलाज करने वाले अस्पतालों में भर्ती कराए जाने की जरूरत है." (एनडीटीवी)

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  • नई दिल्ली/पटना, 18 सितंबर। महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ दोबारा से मिलकर बिहार में नई सरकार के गठन के फैसले के बाद से ही नीतीश कुमार से नाराज चल रहे जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव देश भर में उनके खिलाफ माहौल बनाने में जुटे हैं। इसी कड़ी में जदयू के शरद खेमे ने नीतीश कुमार को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाते हुए गुजरात से विधायक छोटू भाई वसावा को जनता दल यूनाइटेड का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया है।
    जदयू नेता अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि रविवार को दिल्ली के कांस्टीच्यूशन क्लब में जदयू की कार्यकारिणी की बैठक में यह फैसला किया गया। जिसमें 19 राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष शामिल हुए थे। हाल ही में गुजरात से राज्यसभा की तीन सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल को वसावा के वोट से ही जीत मिल सकी थी। अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी अध्यक्ष पद नियुक्ति को रद्द कर वसावा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी के उपाध्यक्ष के राजशेखरन की अध्यक्षता में हुई कार्यकारिणी की बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खेमे द्वारा महागठबंधन तोड़ कर भाजपा के साथ गठजोड़ करने सहित अन्य फैसलों को भी रद्द कर दिया गया। 
    बैठक में शरद यादव के अलावा, पूर्व मंत्री रमई राम, राज्यसभा सदस्य अली अनवर, पूर्व सांसद अर्जुन राय, पूर्व विधान पार्षद विजय वर्मा, पूर्व विधायक परवीन अमानुल्ला, सरोज बच्चन और उदय मांझी भी मौजूद थे। अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि बैठक में पार्टी नेता जावेद रजा द्वारा पेश संगठन संबंधी प्रस्ताव में नीतीश कुमार द्वारा पार्टी के चुनाव अधिकारी बनाये गये अनिल हेगड़े की नियुक्ति को रद्द करने के सुझाव को मंजूरी दी गयी। इसके साथ ही हेगड़े द्वारा की गयी पदाधिकारियों की नियुक्ति तुरंत रद्द हो गयी। उन्होंने बताया कि बैठक में देश भर से जुटे जदयू नेताओं ने नीतीश खेमे द्वारा भाजपा से गठजोड़ करने को जनादेश का अपमान बताते हुए इस फैसले को रद्द किया है। इसके अलावा हाल ही में नीतीश खेमे द्वारा जदयू पदाधिकारियों को पार्टी से निकालने के फैसले को भी निष्प्रभावी घोषित कर हटाये गये प्रदेश अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों को उनके पद पर बहाल कर दिया।
    शरद यादव की भविष्य की भूमिका के सवाल पर अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि कार्यकारिणी ने उन्हें समाजवादी विचारधारा वाले दलों को साझी विरासत अभियान के माध्यम से एक मंच पर लाकर भविष्य में महागठबंधन को प्रभावी स्वरूप में गठित करने की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने बताया कि कार्यकारिणी ने नीतीश खेमे के पार्टी विरोधी फैसलों की समीक्षा के लिये अनुशासन समिति का गठन किया है। तीन सदस्यीय इस समिति की अध्यक्षता वह स्वयं करेंगे। जबकि पार्टी के चुनाव चिह्न सहित अन्य मामलों से जुड़े विवादों पर भविष्य की रणनीति तय करने के लिये जदयू महासचिव जावेद रजा की अध्यक्षता में चुनाव विवाद समिति गठित की गयी है। 
    अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यकारिणी के फैसलों पर मंजूरी के लिये आगामी 8 अक्टूबर को दिल्ली में जदयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलायी गयी है। नीतीश कुमार सहित अन्य नेताओं के फैसलों को अनुशासनहीनता के दायरे में लाने के बारे में समिति की सिफारिशों पर अमल का फैसला राष्ट्रीय परिषद की बैठक में किया जायेगा। उन्होंने बताया कि कार्यकारिणी में पारित एक अन्य प्रस्ताव में संगठन की चुनाव प्रक्रिया अगले छह महीने में पूरा करने का फैसला किया गया। इसके लिये कार्यकारी अध्यक्ष वसावा से अगले साल मार्च तक संगठनात्मक चुनाव संपन्न कराने को कहा गया है। 
    वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की टीम शरद यादव के घर मध्य प्रदेश में जदयू की जड़ें जमाने की कोशिश में जुटी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में नीतीश कुमार अपनी पार्टी को खड़ा करना चाहते हैं, लेकिन घोषित तौर पर उनके निशाने पर शरद यादव नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में पार्टी के विस्तार का जिम्मा नीतीश ने अपने राष्ट्रीय महासचिव अखिलेश कटियार को सौंपा है। इसी कड़ी में अखिलेश कटियार इस समय मध्य प्रदेश के दौरे पर हैं। 
    भोपाल दौरे पर पहुंचे अखिलेश कटियार ने यहां पत्रकारों में बातचीत में शरद यादव से जुड़े सवाल पर कहा, शरदजी हमारे सम्मानित नेता हैं। उन्हें किसी ने पार्टी से निकाला नहीं हैं। उन्होंने खुद पार्टी छोड़ी है, लेकिन यह उन्होंने जरूर कहा कि अब शरद जी जदयू की ओर से राज्यसभा के सदस्य भी नहीं रहेंगे। अखिलेश कटियार गुजरात के पटेल समुदाय के नेता हार्दिक पटेल के भी करीबी बताये जाते है। वह इससे पहले मध्य प्रदेश में हार्दिक की रैलियां करवा चुके हैं। मंदसौर में हुए किसान गोलीकांड के बाद अखिलेश, हार्दिक को लेकर मंदसौर आये थे। माना जा रहा है कि अब वे उस युवा नेटवर्क को जदयू से जोडऩे का काम करेंगे।  (प्रभात खबर)

     

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  • मेरठ, 18 सितंबर। बीएसपी प्रमुख मायावती ने सोमवार को मेरठ की रैली में बीजेपी पर बड़े आरोप लगाए। मायावती ने कहा कि ईवीएम को लेकर हमारे आरोपों से लोगों का ध्यान हटाने और सियासी फायदे के लिए सहारनपुर में जातिय दंगे कराए गए। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने सहारनपुर में मामूली विवाद को जातीय संघर्ष में बदल दिया।
    मायावती ने कहा कि यूपी के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ईवीएम में गड़बड़ी करके चुनाव जीती है। बीएसपी कार्यकर्ताओं ने ईवीएम के खिलाफ यूपी के जिला मुख्यालयों पर 11 अप्रैल को धरना प्रदर्शन भी किया। उन्होंने कहा कि ईवीएम के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट गए, तो बीजेपी ने इससे ध्यान हटाने के लिए एक सोची समझी साजिश के तहत सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलित-राजपूत के बीच दंगा कर दिया।
    मायावती ने कहा कि बीजेपी ने दलित मतों में सेंध लगाने की मंशा से दंगा कराया है। उन्होंने कहा कि दंगे के बाद दलितों के आंशू पोछने के नाम पर दलितों के बीच में आकर बीजेपी नेता बड़े बड़े भाषण देंगे और दलितों की सहानुभूति पाएंगे।
    मायावती ने कहा कि सहारनपुर में दलितों का शोषण हुआ। उन्होंने कहा 18 जुलाई को राज्य सभा में उन्हें इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष ने बोलने नही दिया  है। उन्होंने कहा कि इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ है। यही वजह है कि मैने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया।
    उन्होंने कहा कि बीजेपी ने सहारनपुर में मामूली विवाद को जातीय संघर्ष करा दिया। भाजपा ने इस घटना को इस मंशा से किया कि घटना के बाद  मायावती आएगी तो भाषण देंगी और मेरे रहते हुए खूनी संघष हो जाएगा। मायावती ने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि दलितों के साथ साथ मेरी हत्या भी कर दी जाएगी। मायावती ने कहा इसके बाद बीजेपी के लोग फिर आरएसएस से जुड़े रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाया। (आज तक)

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  • कोलकाता, 17 सितंबर (जनसत्ता)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और उससे जुड़े संगठनों (बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद) को चेतावनी दी है कि वह दुर्गा पूजा के दौरान माहौल बिगाडऩे की कोशिश ना करें। ममता ने कहा है कि यह आग से खेलने के तरह होगा। दरअसल, एक दिन पहले ही वीएचपी ने कहा था कि वे लोग पूरे राज्य में शस्त्र पूजन का कार्यक्रम करेंगे। ऐसे कार्यक्रमों पर ममता ने पुलिस से रोक लगाने के लिए कह रखा है। पिछले महीने ही ममता ने पुलिस को आदेश दिया था कि राज्य में कहीं पर भी बिजोय दशमी नहीं होनी चाहिए।
    ममता ने कहा कि उनकी सरकार ने विजयादशमी त्योहार मनाने पर कोई रोक नहीं लगाई है। उन्होंने कहा, कुछ संगठन गलत सूचना फैला रहे हैं कि हम पूजा पंडालों और घरों में विजयादशमी के उत्सव को रोक रहे हैं। उन्होंने कहा, हमने कहा था कि एक अक्टूबर को एकादशी के दिन प्रतिमा विसर्जन नहीं होगा। मुहर्रम मुस्लिम समुदाय के शोक मनाने का अवसर होता है जो उसी दिन पड़ रहा है। प्रतिमा विसर्जन दो से चार अक्टूबर तक चलेगा।
    उन्होंने कहा, महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाएंगी और विजयादशमी का त्योहार पहले की तरह मनाया जाएगा। जिन लोगों को बंगाल में दुर्गापूजा और काली पूजा के बारे में जानकारी नहीं है, वे इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं। ममता ने कहा कि उनकी सरकार आगामी दुर्गापूजा त्योहार के दौरान शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए संकल्पबद्ध है।
    उन्होंने कहा कि आरएसएस, विहिप और बजरंग दल को शांति भंग नहीं करनी चाहिए और आग से नहीं खेलना चाहिए। उन्होंने कहा कि बंगाल में दुर्गापूजा पारंपरिक रूप से सौहार्द के साथ मनाई जाती है, जहां लाखों लोग सड़कों पर इस उत्सव को मनाते हैं।
    उन्होंने कहा, अगर कोई शांति भंग करने का प्रयास करता है, तो प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा। ममता ने कहा, भाजपा को सीबीआई, ईडी का इस्तेमाल करके और दंगे कराकर राजनीति नहीं करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस ने हाल में राज्य के एक स्थान पर सांप्रदायिक गड़बड़ी फैलाने के भाजपा के एक प्रयास को विफल कर दिया और इसके दो सदस्यों को गिरफ्तार किया।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका प्रशासन राज्य में हथियारों के साथ प्रतिमा विसर्जन जुलूस की अनुमति नहीं देगा। ममता ने कहा, यह अवैध है और इस तरह के जुलूस बंगाल की परम्परा में नहीं रहे हैं और हम ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे। उन्होंने कहा, अगर इस तरह का जुलूस निकालने का प्रयास किया जाता है तो प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के सदस्यों से भी मुहर्रम के जुलूस शांतिपूर्वक निकालने की अपील की।

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  • इंदौर, 17 सितंबर। वरिष्ठ नेता अमर सिंह ने कहा कि वे बीजेपी में शामिल होने की किसी पेशकश से इंकार नहीं करेंगे लेकिन उन्होंने बीजेपी से जुडऩे के लिए कोई प्रार्थना पत्र भी नहीं दिया है।
    समाजवादी पार्टी से निष्कासित सिंह ने इंदौर में एक फिल्म के विशेष शो में शामिल होने के दौरान कहा, बीजेपी बहुत बड़ा दल है। मैं यह नहीं कहूंगा कि यदि मुझे अवसर मिलेगा, तो मैं बीजेपी में नहीं जाऊंगा। लेकिन मुझे यह अवसर दे कौन रहा है। मैंने यह अवसर हासिल करने के लिए कोई प्रार्थना पत्र भी नहीं दिया है।
    अमर सिंह ने एक सवाल पर कहा कि उन्हें यदि मोदी में कोई बुराई दिखाई देगी, तो वे उनकी आलोचना भी करेंगे। लेकिन इस तथ्य को कौन नकार सकता है कि प्रधानमंत्री की मां और उनके नजदीकी रिश्तेदार आज भी आम नागरिकों की तरह जीवन-यापन करते हैं और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराते हैं।
    अमर सिंह ने मोदी सरकार के विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि फिलहाल केवल विरोध के नाम पर विरोध की राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा, जीएसटी की शुरुआत के लिए संसद में बुलाए गए विशेष सत्र से कांग्रेस महज इसलिए गायब रही, क्योंकि नई कर प्रणाली के बारे में मोदी घोषणा कर रहे थे। इन दिनों इस तरह की राजनीति का जो स्वरूप देखने को मिल रहा है, वह बहुत क्रूर और निष्ठुर है।
    उन्होंने बागी जेडीयू नेता शरद यादव पर निशाना साधते हुए कहा, यादव पहले यह बताएं कि अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री काल में जब वे एनडीए के संयोजक थे, तब उन्हें देश में सांप्रदायिकता क्यों नहीं नजर आ रही थी। इन दिनों देश की सियासत में सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता एक मजाक बनकर रह गई है। (भाषा)

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  • नई दिल्ली, 17 सितंबर। कर्नाटक के सेंट्रल जेल में अनियमितताओं का भंडाफोड़ करने वाली पूर्व डीआईजी डी रूपा को शनिवार को राष्ट्रपति पदक से नवाजा गया। उन्होंने जेल में बंद एआईएडीएमके नेता वीके शशिकला को मिल रही वीआईपी सुविधाओं का भी खुलासा किया था।
    राज्यपाल वजूभाई वाला ने राजभवन में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और गृह मंत्री रामलिंगा रेड्डी की मौजूदगी में विशिष्ट सेवा के लिए उन्हें पुरस्कार से नवाजा। विशिष्ट सेवा के लिए चयनित अन्य पुलिस पदाधिकारियों को भी राष्ट्रपति पदक दिया गया।
    तत्कालीन जेल डीआईजी डी रूपा ने जुलाई में पुलिस महानिदेशक को एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें कहा गया कि आय से अधिक संपत्ति मामले में प्रपन्ना अग्रहर केंद्रीय कारागार में बंद शशिकला को विशेष सुविधाएं दी जाती हैं और इस तरह की चर्चा है कि इसमें दो करोड़ रुपयों का लेन-देन हुआ है।
    इसके बाद मामले में सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप होने के कारण रूपा और डीजी दोनों का तबादला कर दिया गया और मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए।(भाषा)

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  • अतुल पुरोहित

    भोपाल, 17 सितंबर (छत्तीसगढ़)। मध्यप्रदेश की राजधानी में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के दौरे के बाद प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। शाह ने कांग्रेस की तीन संसदीय सीटों में सेंध लगाने का जिम्मा पार्टी के मुखिया को सौंपा है। जिसके बाद भाजपा काफी सक्रिय हो गई है और सिंधिया के गढ़ में भी सभाएं करना शुरू कर दी हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और गुना से कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी लोकसभा चुनाव से पहले अपने लोकसभा क्षेत्र का प्रचार करने के लिए कमर कसली है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने लोकसभा क्षेत्र में हुए विकास यात्रा की फोटो शेयर करना शुरू कर दिया है।
    वह सोशल मीडिया पर अपने क्षेत्र के विकास का प्रचार कर मतदाताओं में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं। उनके इस कदम को राजनीति के कुछ पंडित भाजपा की सेंधमारी का नतीजा बता रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सिंधिया विधानसभा चुनाव के साथ ही लोकसभा चुनाव के लिए पूरी तैयारी से मैदान में उतरे हैं। ऐसे में वह सोशल मीडिया से लेकर सभी माध्यमों का सहारा ले रहे हैं। 
    हाल ही में सोशल साइट इंस्टाग्राम पर अशोकनगर के चंदेरी में उनके द्वारा किए गए विकास की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। सिंधिया ने ट्वीट कर लिखा है कि आने वाले कुछ महीनों के लिए मैं आपको अपने लोकसभा क्षेत्र में हुए विकास की यात्रा फोटो स्टोरी के द्वारा करवाउंगा। सिंधिया के इस कदम से अब देखना होगा कि भाजपा सिंधिया को पछाडऩे के लिए क्या कदम उठाएगी।
    आज के आधुनिक दौर में सोशल मीडिया की अहम् भूमिका है। सोशल मीडिया की ताकत भाजपा बखूबी जानती है और हाल ही के चुनाव में इसका जमकर इस्तेमाल भी किया गया था। लेकिन कांग्रेस इस कड़ी में कमजोर रही है। इसी राह पर अब सिंधिया भी चल रहे हैं। सिंधिया फेसबुक और ट्विटर पर लोगों से सीधे संवाद करते रहे हैं। अब इंस्टाग्राम पर भी सिंधिया विकास की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं।

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  • नई दिल्ली, 15 सितंबर। आने वाले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपने 282 में से करीब 100 सांसदों का टिकट काट सकती है। सूत्रों के हवाले से डीएनए में प्रकाशित खबर के मुताबिक ये सब वे सांसद हो सकते हैं जो उम्र और प्रदर्शन के मानकों पर खरे नहीं पाए जाएंगे। बताते हैं कि पार्टी में शीर्ष स्तर पर इस तरह की आकलन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
    पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चुनाव में उम्मीदवारों के लिए सबसे बड़ी कसौटी होगी उनके जीतने की संभावना। जाहिर तौर पर मौजूदा सांसदों का संसद और संसदीय क्षेत्रों में अब तक का प्रदर्शन उनकी इस संभावना को मजबूती देगा या उसे कमजोर करेगा। लिहाजा उनका प्रदर्शन दूसरी बड़ी कसौटी होगी। खास तौर पर मौजूदा सांसदों को फिर टिकट दिए जाने के मामले में। क्योंकि पार्टी अब सिर्फ ऐसे लोगों को मौका देने के मूड में है जो प्रदर्शन कर सकें।
    सूत्र बताते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने मंत्रिमंडल के लिए उपयुक्त प्रतिभावान मंत्री ढूंढने में जिस तरह मशक्कत करनी पड़ी उससे भी यही राय बनी है कि अगली बार उन्हीं को तवज़्जो दी जाए जो बड़ी जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हों। और मौजूदा सांसदों के मामले में उनकी क्षमताओं का आकलन जाहिर तौर पर इस बार के उनके प्रदर्शन के आधार पर ही होगा। ऐसे में इस मापदंड का असर 30-40 फीसदी सांसदों पर पडऩा करीब-करीब तय है।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में महज 15 कैबिनेट मंत्री ऐसे हैं जो लोकसभा चुनाव जीतकर आए हैं। जबकि 18 मंत्री राज्य सभा के सदस्य हैं। इस महीने के शुरू में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में प्रधानमंत्री ने दो ऐसे पूर्व अफसरों- पूर्व राजनयिक हरदीप सिंह पुरी और केरल के पूर्व आईएएस अलफॉन्स कन्नथनम को मंत्री बनाया जो किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। इससे यह संकेत गया कि पार्टी के भीतर 'प्रतिभाओं की कमीÓ हो गई है।
    लिहाजा अगली बार ऐसी असहज स्थितियों का सामना न करना पड़े इसके लिए अभी से तैयारी शुरू की गई है। इसी तैयारी के तहत राज्यों में पार्टी के प्रभारी महासचिवों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे मौजूदा सांसदों के प्रदर्शन का आकलन कर पार्टी अध्यक्ष को रिपोर्ट दें। एक बार अच्छा-बुरा प्रदर्शन करने वाले सांसदों की सूची हाथ में आ गई तो पार्टी नेतृत्व को अन्य योग्य उम्मीदवारों की तलाश और उनके बारे में समय से फैसला करने में आसानी हो जाएगी।  (सत्याग्रह ब्यूरो)

     

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  • नई दिल्ली, 14 सितंबर। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के 46 मदरसों को मिलने वाली सरकारी मदद पर रोक लगा दी है। यह निर्णय जिला अधिकारी, जिला स्कूल निरीक्षक (डीआईओएस) और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। सरकार का कहना है कि जांच में ये मदरसे तय मानकों पर खरे नहीं उतर सके। ये मदरसे फैजाबाद, जौनपुर, कानपुर, कुशीनगर, मऊ और कन्नौज के हैं।
    उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अनुसार उसे पहले शिकायत मिली थी कि कई मदरसों में तय मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है। दो महीने पहले इन शिकायतों की जांच में उनके खातों में कई गड़बडिय़ां पाई गईं। विभाग के मुताबिक यह भी पाया गया कि कई जगह शिक्षकों को तय से कम राशि दी जा रही है। उसका कहना है कि कई मदरसे भवन के तय मानकों पर खरे नहीं उतरे तो कई जगह केवल कागजों में पढ़ाई हो रही थी।
    इससे पहले अखिलेश यादव सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद आजम खान ने भी 46 मदरसों के अनुदान पर रोक लगाते हुए उसकी उनकी जांच के आदेश दिए थे। राज्य में अभी सरकार 560 मदरसों को अनुदान सहायता देती है। इस राशि से मदरसों का रख-रखाव होता है और शिक्षकों का वेतन दिया जाता है। अब से कुछ हफ्ते पहले मौजूदा योगी सरकार मदरसों से संबंधित कई नियम बदल चुकी है। इसके तहत राज्य के सभी मदरसों के लिए अपने संस्थान के नाम समेत सभी प्रमुख जानकारियों को हिंदी में लिखना अनिवार्य कर दिया था। (सत्याग्रह)

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  • लखनऊ, 13 सितंबर. बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने पड़ोसी देश म्यांमा में अशान्ति व हिंसा के कारण भारत में शरणार्थी बनकर पनाह लेने वाले हजारों अत्यन्त गरीब और असहाय रोहिंग्या मुसलमान परिवारों के प्रति संवेदना एवं सहानुभूति व्यक्त करते हुए भारत सरकार से कहा कि उनके प्रति मानवता एवं इंसानियत के नाते सख्त रवैया नहीं अपनाना चाहिए और न ही राज्यों को इसके लिए मजबूर किया जाना चाहिए।
    मायावती ने एक बयान में कहा कि म्यांमा के सीमावर्ती राज्य में अशान्ति के कारण लाखों रोहिंग्या मुसलमानों ने बंगलादेश में शरण ली है तथा कई हजार भारत के विभिन्न राज्यों में भी शरणार्थी बनकर रह रहे हैं। उनके प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार का रवैया पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
    उन्होंने कहा कि भारत सरकार को इन शरणार्थियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपना चाहिये जैसा कि भारत की परम्परा रही है। साथ ही, म्यांमा एवं बांगलादेश की सरकार से वार्ता करके रोहिंग्या मुसलमानों के मामले को सुलझाने का प्रयास करना चाहिये ताकि उनका पलायन रुक सके।
    गृह मंत्रालय कह चुका है कि वह रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में शरण नहीं देगा, बल्कि उन्हें वापस लौटा देगा। इसके साथ ही भारत-म्यांमार सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है। सीमा पर सरकार ने रेड अलर्ट जारी किया है। रोहिंग्या समुदाय 12वीं सदी के शुरुआती दशक में म्यांमार के रखाइन इलाके में आकर बस तो गया, लेकिन स्थानीय बौद्ध बहुसंख्यक समुदाय ने उन्हें आज तक नहीं अपनाया है। साल 2012 में रखाइन में कुछ सुरक्षाकर्मियों की हत्या के बाद रोहिंग्या और सुरक्षाकर्मियों के बीच व्यापक हिंसा भड़क गई। तब से म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हिंसा जारी है। रोहिंग्या और म्यांमार के सुरक्षा बल एक-दूसरे पर अत्याचार करने का आरोप लगा रहे हैं। ताजा मामला 25 अगस्त को हुआ, जिसमें रोहिंग्या मुसलमानों ने पुलिस वालों पर हमला कर दिया। इस लड़ाई में कई पुलिस वाले घायल हुए, इस हिंसा से म्यांमार के हालात और भी खराब हो गए। (एजेंसियां)

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  • लखनऊ, 13 सितंबर। यूपी के महोबा जिले में पुलिस ने दुष्कर्म के बाद गर्भवती हुई एक नाबालिग छात्रा के मामले में स्थानीय भाजपा नेता को उसकी मां के साथ मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया।
    पुलिस ने बताया कि चरखारी कस्बे के राजकीय इंटर कॉलेज में आठवीं क्लास में पढऩे वाली एक नाबालिग छात्रा को उसकी सहेली की मदद से स्थानीय भाजपा मंडल इकाई के उपाध्यक्ष हेमू राजा ने महोबा ले जाकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो क्लिप बना ली।
    दुष्कर्म के बाद आरोपी ने उस क्लिप को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर पीडि़ता के साथ पांच महीने तक संबंध बनाए, जिससे पीडि़ता गर्भवती हो गई।
    एसपी ने बताया कि छात्रा ने सोमवार को अपनी मां के साथ उनके ऑफिस में आकर पूरी आपबीती सुनाई, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी भाजपा नेता और उसकी मां के खिलाफ मामला दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पीडि़ता को मेडिकल के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है।  (आईएएनएस)

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