राजनीति

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Posted Date : 21-Nov-2017
  • गोरखपुर, 21 नवम्बर। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने पद्मावती फिल्म को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। नगर निकाय चुनाव के प्रचार में गोरखपुर पहुंचे सीएम योगी ने कहा कि दीपिका पादुकोण और संजय लीला भंसाली का सिर काटने वाले बयान देने वाले दोषी हैं।
    साथ ही सीएम ने कहा कि उतने ही जिम्मेदार संजय लीला भंसाली भी हैं। फिल्म के प्रसारण को लेकर सीएम ने कहा कि यूपी सरकार ने अपना पक्ष सेंसर बोर्ड और केंद्र को भेज दिया है।
    इस दौरान सीएम योगी ने कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल के कांग्रेस अध्यक्ष बनने से बीजेपी की राह आसान होगी। कांग्रेस वंशवादी पार्टी है, इसमें सोनिया के बाद अब राहुल अध्यक्ष बनेंगे। उन्होंने कहा कि राहुल के अध्यक्ष बनने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कांग्रेस मुक्त का नारा पूरा होगा।
    वहीं मुलायम सिंह यादव के राम और कृष्ण पर दिए बयान पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर मुलायम ने लोहिया को पढ़ा होता तो ऐसी टिप्पणी न करते। लोहिया ने सबसे अधिक भगवान का नाम लिया। वहीं नगर निकाय चुनाव पर बोले कि सफाई कर्मियों और पटरी दुकानदारों का शोषण खत्म होगा। (ईटीवी)

     

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Posted Date : 21-Nov-2017
  • गांधीनगर, 21 नवम्बर । हार्दिक पटेल के नेतृत्व वाले पाटीदार अनामत आंदोलन के सामने घुटने टेकते हुए कांग्रेस पार्टी ने सोमवार देर रात गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए अपनी दूसरी लिस्ट जारी कर दी। इस नई सूची में कुल 13 नाम हैं जिसमें सौराष्ट्र और कच्छ से नौ लोगों को टिकट दिया गया है। साथ ही चार विधानसभा सीटों से पहले घोषित प्रत्याशियों को बदला गया है। इन चार सीटों में पाटीदारों का गढ़ समझे जाने वाली सूरत की दो सीटें शामिल हैं। 
    जिन सीटों पर प्रत्याशी बदले गए हैं, उनमें सौराष्ट्र का जूनागढ़, सूरत के कामरेज और वरक्षा तथा भरूच शामिल हैं। सूरत के कामरेज और वरक्षा सीट पर हुआ बदलाव सबसे अहम माना जा रहा है। इन सीटों को लेकर हार्दिक पटेल के संगठन का सबसे ज्यादा विरोध था। कांग्रेस पार्टी ने भीखाभाई जोशी की जगह पर अमित थूम्मर को जूनागढ़, भरूच में किरन ठाकोर की जगह पर जयेश पटेल को टिकट दिया गया है। 
    इसके अलावा अशोक जीरावाला अब नीलेशक कुंबानी की जगह पर कामरेज से चुनाव लड़ेंगे। उधर, कांग्रेस ने प्रफुल्लभाई सी तोगडिय़ा की जगह पर वराछा से धीरुभाई गजेरा को अब अपना उम्मीदवार बनाया। कहा जा रहा था कि वराछा सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार घोषित करने पर हार्दिक पटेल और उनके संगठन ने कड़ी आपत्ति जताई थी और विरोध भी किया था। कांग्रेस ने पाटीदार नेता ललित वसोया को भी धोराजी से टिकट दिया है। 
    रविवार को कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिए 77 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की। लेकिन सूची सामने आते ही हार्दिक पटेल के समर्थक इसके विरोध में उतर आए। पीएएएस सदस्यों ने आरोप लगाया कि टिकट वितरण में उन्हें नजरअंदाज किया गया है। पाटीदारों के भारी विरोध के बाद माना जा रहा था कि कांग्रेस गुजरात में अपने उम्मीदवारों को बदल सकती है। 

    पीएएएस के नेता दिनेश बंभानिया ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने हमारी कोर कमेटी को विश्वास में लिए बिना ही पीएएएस सदस्यों के लिए टिकटों का ऐलान कर दिया। इसके बाद समिति ने कांग्रेस के उम्मीदवारों के विरोध की भी धमकी दी थी। पीएएएस के सदस्यों का यह भी कहना था कि कांग्रेस ने पाटीदार बहुल क्षेत्रों में कमजोर प्रत्याशियों को उतार दिया है। 
    कांग्रेस के टिकट बंटवारे से उपजे विवाद के बीच पाटीदार नेता हार्दिक पटेल गुजरात के महासमर में कांग्रेस और पाटीदारों के बीच हुई डील का आज खुलासा कर सकते हैं। हार्दिक पटेल के सोमवार के भावुक ट्वीट को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि कांग्रेस और उनके बीच समझौता अभी तक फाइनल नहीं हुआ है लेकिन वराछा में धीरु गजेरा को टिकट दिए जाने से पाटीदार समर्थकों में जश्न का माहौल है। (टाईम्स न्यूज)

     

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Posted Date : 21-Nov-2017
  • पटना, 21 नवम्बर। बिहार बीजेपी के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने एक विवादित बयान दिया है। सोमवार को ओबीसी समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उजियारपुर लोकसभा सीट से सांसद राय ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कठिन परिस्थितियों में देश का नेतृत्व कर रहे हैं। यह हमारे लिए गौरव की बात है। यदि उनके ऊपर कोई उंगली या हाथ उठाएगा तो उसे या तो तोड़ दिया जाएगा या काट दिया जाएगा। राय के इस विवादित बयान पर राजनीतिक गलियारे में आलोचना का दौर शुरू हो गया। विवाद बढ़ता देख राय ने अपना बयान वापस ले लिया। 
    पीएम मोदी की अब तक की यात्रा को याद करते हुए बिहार बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, जिनकी मां खाना परोसती थी और नरेंद्र मोदी को खाना खिलाने बैठी थी, उस थाली में मां को ना बेटा और बेटे को ना मां दिखाई देती थी। आज उस परिस्थिति से ऊपर गरीब का बेटा पीएम बना है। उसका स्वाभिमान होना चाहिए। एक-एक व्यक्ति को इसकी इज्जत करनी चाहिए।
    उन्होंने कहा, उनकी ओर (पीएम मोदी) उठने वाली उंगली को, उठने वाले हाथ को...हम सब मिलके या तो तोड़ देंगे, जरूरत पड़ी तो काट देंगे। इस कार्यक्रम के दौरान बिहार के उपमुख्यमंत्री और उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता सुशील मोदी भी मंच पर मौजूद थे। 
    उधर, विवाद बढऩे नित्यानंद राय ने सफाई दी है कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है। उन्होंने कहा कि हाथ काट देने की बात उन्होंने कहावत के रूप में कही थी। 
    राय ने कहा, मेरे कहने का मतलब था कि देश की आन और सुरक्षा पर सवाल उठाने वालों के साथ कड़ाई से निपटा जाएगा। इस बीच राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने बिहार बीजेपी अध्यक्ष के बयान की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि राजनीति में गंदे लोग आ गए हैं। 
    वैशाली के प्रभावशाली नेता राय ने दिसंबर 2016 में बीजेपी अध्यक्ष का पदभार संभाला था। वह हाजीपुर से विधायक भी रहे हैं। इसी कार्यक्रम में सुशील मोदी ने आरजेडी की आलोचना की और कहा कि उसने कानू समुदाय के लोगों को एक भी टिकट नहीं दिया था।  (टाईम्स न्यूज)

     

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Posted Date : 21-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 21 नवम्बर । यह किसी को भी चौंका सकता है। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह एक तरफ गुजरात के विधानसभा चुनाव में व्यस्त हैं। दूसरी तरफ वे अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर तमिल और बंगाली जैसी भाषाएं भी सीख रहे हैं। शाह के नजदीकी सूत्रों के हवाले से खबर दी है।
    सूत्र बताते हैं कि शाह सिर्फ बंगाली-तमिल ही नहीं बल्कि असमिया और मणिपुरी जैसी पूर्वोत्तर की भाषाएं भी सीख रहे हैं। बीते एक साल में उन्होंने ऐसे कई राज्यों की भाषाएं सीखी हैं जहां उन्हें लगता है कि पार्टी का जनाधार बढ़ाया जा सकता है। इनमें तमिल और बंगाली जैसी भाषाओं में तो वे थोड़ा-बहुत संवाद भी करने लगे हैं। हालांकि अभी इन भाषाओं को धाराप्रवाह नहीं बोल पाते। लेकिन इसकी तरफ उनकी कोशिश लगातार जारी है।
    सूत्रों के मुताबिक शाह ऐसे नेता हैं जो एक लक्ष्य पूरा होने से पहले ही अपने लिए अगला तय कर लेते हैं। खुद तो सक्रिय रहते ही हैं पार्टी कार्यकर्ताओं को भी लगातार सक्रिय रखते हैं। यही उनकी रणनीति है। क्षेत्रीय भाषाओं को सीखकर वे इस रणनीति को और बेहतर तरीके से कार्यान्वित कर सकते हैं। और यही वे कर रहे हैं। उन्होंने इन भाषाओं को सीखने के लिए बाकायदा पेशेवर शिक्षक रखे हुए हैं और इनके साथ बैठने के लिए वे वक्त भी निकालते हैं।
    वैसे भाषाओं के प्रति शाह का प्रेम कोई नया नहीं है। बताया जाता है कि जब वे दो साल तक जेल में थे तो उन्होंने वहां भी 'शिष्ट हिंदी' सीखने का सिलसिला शुरू किया था। 
    और उसी 'सीख' का असर है कि वे आज गुजराती असर से मुक्त साफ-सुथरी हिंदी बोल पाते हैं। इतना ही नहीं भाषाओं के अलावा उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत और योगा में भी रुचि है। संगीत के तो वे छात्र भी रह चुके हैं और ये सभी चीजें उनके लिए मददगार साबित हो रही हैं।(टाईम्स आफ इंडिया)

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Posted Date : 21-Nov-2017
  • बर्लिन, 21 नवम्बर। जर्मनी में गठबंधन सरकार बनाने की कोशिश नाकाम होने से राजनीतिक संकट गहरा गया है। जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा है कि अल्पमत सरकार का नेतृत्व करने की बजाय वो चाहेंगी कि देश में दोबारा चुनाव कराए जाएं।
    मर्केल ने कहा कि हालांकि बातचीत बेनतीजा रही, लेकिन उन्हें अपने पद से इस्तीफा देने का कोई कारण नहीं दिख रहा। रविवार शाम उदारवादी फ्री डेमोक्रेट पार्टी (एफडीपी) ने बातचीत से बाहर जाने का फैसला किया था।
    जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वॉल्टर स्टाइनमायर ने सभी पक्षों यानी सभी राजनीतिक पार्टियों से अपील की है कि वे अपने फैसलों पर दोबारा विचार करें। उन्होंने पार्टियों से जर्मनी की भलाई के लिए समझौता करने की अपील की और कहा कि देश अभूतपूर्व स्थिति से गुजर रहा है।
    12 साल से जर्मनी की चांसलर रहीं एंगेला मर्केल के सामने ये अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है। मर्केल ने जर्मन टेलीविजन एआरडी को बताया कि जितना हमने सोचा था, नई सरकार बनाने का रास्ता उससे कहीं ज्यादा मुश्किल साबित हो रहा है।
    उन्होंने गठबंधन सरकार बनने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया, लेकिन कहा- मैं नहीं कहती कि ऐसा कभी नहीं होगा, लेकिन मैं इस बात को लेकर अभी स्पष्ट नहीं हूं। मुझे लगता है कि फिर से चुनाव कराना ही बेहतर होगा।
    जेडडीएफ को दिए एक इंटरव्यू में मर्केल ने कहा कि जर्मनी को एक स्थायी सरकारी की जरूरत है जिसे हर मामले में फैसला लेने के लिए बहुमत हासिल ना करना पड़े। मर्केल की पार्टी सीडीयू के कुछ लोगों को उम्मीद है कि सोशल डेमोक्रेट पार्टी (एसपीडी) के साथ मिल कर गठबंधन सरकार बनाना अब भी संभव है, लेकिन पार्टी ने बार-बार इस विकल्प से इंकार किया है।
    इससे पहले सोमवार को सोशल डेमोक्रेट पार्टी के नेता मार्टिन शुल्त्ज ने कहा था कि उनकी पार्टी फिर हाने वाले चुनावों से नहीं डरती। एसपीडी के साथ एक फिर से गठबंधन की संभावना  के बारे में मर्केल ने जेडडीएफ को दिए अपने इंटरव्यू में बताया कि वो राष्ट्रपति स्टाइनमायर और एसपीडी के नेताओं के बीच होने वाली 
    बातचीत का इंतजार कर रही हैं। उनका कहना है कि उनका इस्तीफा मांगना नए गठबंधन के लिए सकारात्मक शुरुआत नहीं होगी।
    जर्मनी में अगर दोबारा चुनाव कराने की नौबत आई तो इसके लिए राष्ट्रपति स्टाइनमायर को फैसला लेना होगा और इससे पहले एक लंबी प्रक्रिया अपनाई जाएगी जो कई महीने चल सकती है। लेकिन स्टाइनमायर फिर से चुनाव कराए जाने को अंतिम रास्ते के रूप में देख रहे हैं। सोमवार को एक छोटे भाषण में उन्होंने नेताओं से कहा कि उनकी भी एक जिम्मेदारी है जिसे वापस मतदाताओं को नहीं सौंपा जाना चाहिए।
    इसी साल सितंबर में हुए चुनाव में मर्केल की पार्टी ने चुनाव में जीत हासिल की थी जिसमें मुख्य पार्टियों के अलावा बाकी पार्टियों को भी वोट मिले जिसकी वजह से बहुमत सरकार नहीं बन पाई।
    गठबंधन सरकार बनाने के लिए एफडीपी, द ग्रीन और सीडीयू/ससएसयू के बीच बीते चार सप्ताह से बातचीत चल रही थी जो रविवार को बेनतीजा खत्म हो गई जब एफडीपी बातचीत से बाहर चली गई। एफडीपी नेता क्रिस्टीयन लिंडनर ने अपनी पार्टी के बचाव में कहा कि उन्होंने ये फैसला बिना सोचे समझे नहीं लिया है। (बीबीसी)

     

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Posted Date : 20-Nov-2017
  • गाजियाबाद, 20 नवम्बर। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के राम मंदिर आंदोलन को कमजोर करने के लिए समाजवादी पार्टी ने भगवान कृष्ण को आगे किया है। बेटे अखिलेश यादव की ओर से सैफई में भगवान कृष्ण की 50 फुट ऊंची प्रतिमा लगवाने के बाद अब मुलायम सिंह ने कृष्ण को पूरे देश का आराध्य बताया है। यही नहीं उन्होंने कृष्ण को राम के मुकाबले अधिक पूजनीय बताया। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि राम हमारे आदर्श हैं, लेकिन यह स्वीकार करना पड़ेगा कि श्रीकृष्ण ने समाज के हर तबके को समान माना और यही कारण है कि कृष्ण को पूरा देश समान रूप से पूजता है, जबकि राम सिर्फ उत्तर भारत में पूजे जाते हैं। 
    गाजियाबाद में एक वैवाहिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे मुलायम सिंह यादव ने कहा कि प्रदेश में शासन कर रही बीजेपी विकास नहीं, सिर्फ धर्म की राजनीति कर रही है। अयोध्या का राम मंदिर, दीपोत्सव और बनारस में आरती जैसे कार्यक्रम कराकर हिंदुओं को एकजुट किया जा रहा है। एसपी सरकार में किसानों ने तरक्की की और उनके लिए तमाम योजनाएं चलाई गईं। एसपी सरकार ने जो काम किए उसका एक हिस्सा भी बीजेपी पूरी तरह से शासन में आने के बाद नहीं कर पाई है। 
    राम और कृष्ण को लेकर मुलायम ने कहा, यादव समाज श्रीकृष्ण का वंशज है और कृष्ण की तरह सभी को समान मानता है। श्रीकृष्ण ने समाज के हर तबके को समान माना और यही कारण है कि कृष्ण को पूरा देश समान रूप से पूजता है, जबकि राम सिर्फ उत्तर भारत में पूजे जाते हैं। यही नहीं हिंदुस्तान के बाहर भी कृष्ण का नाम है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यादव समाज के कार्यक्रमों में सिर्फ यादवों का सम्मान नहीं, बल्कि हर तबके का सम्मान किया जाए। 
    सैफई में भगवान कृष्ण की प्रतिमा बनकर तैयार हो गई है और अखिलेश यादव वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले लालू यादव समेत अन्य विपक्षी नेताओं की मौजूदगी में इसका अनावरण करेंगे। पिछले छह महीने से बेहद गोपनीय तरीके से बनाई जा रही इस मूर्ति को योजनाबद्ध तरीके से बनाया जा रहा है। इसके लिए पैसा सैफई महोत्सव आयोजित करने वाली सैफई महोत्सव कमेटी ने दिया है। इसके अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव हैं और अखिलेश यादव सदस्य हैं। 
    निकाय चुनाव से पूर्व समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव रविवार को गाजियाबाद पहुंचे। मुलायम सिंह ने काफी देर तक मंच पर रहने के बावजूद एक बार भी निकाय चुनाव में सपा प्रत्याशियों को जिताने की अपील नहीं की। इससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही कि विधानसभा चुनाव के दौरान सपा नेताओं के बीच पैदा हुई दरार अब तक भरी नहीं है। मुलायम के इस मौन पर शहर में यह भी चर्चा रही कि चुप रहकर उन्होंने पार्टी नेताओं को कठोर संदेश दिया है। इतना ही नहीं, मंच पर मेयर प्रत्याशी को भी नहीं बुलाया गया और न ही पार्षद पद का कोई प्रत्याशी यहां नजर आया। यादव के चंद रिश्तेदार ही मंच और आसपास दिखाई दिए।  (नवभारत टाईम्स)

     

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Posted Date : 20-Nov-2017
  • अहमदाबाद, 20 नवम्बर । गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी तीसरी सूची जारी की है। बीजेपी ने तीसरी सूची में 28 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। जामनगर दक्षिण से पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आर सी फलदू को टिकट दिया गया है। बीजेपी ने राज्य की कुल 182 विधानसभा सीटों में से 134 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। बीजेपी की 48 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा अभी भी बाकी है।
    बीजेपी ने गुजरात विधानसभा चुनाव में आज अपनी तीसरी लिस्ट जारी की। बीजेपी ने 28 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया है। इनमें मोरबी कांति अमुतिया को टिकट दिया गया है, जबकि पाटीदार समुदाय अमुतिया का विरोध कर रही थी। इसके बावजूद बीजेपी ने उन्हें मैदान में उतारा है।
    पूर्व मंत्री सौरभ पटेल को भी टिकट दिया गया हैं, लेकिन उनकी सीट बदल दी गई है। सौरभ पटेल को वड़ोदरा शहर के अकोटा निर्वाचन क्षेत्र की जगह बोटाड विधानसभा सीट से उतारा जा गया है। गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री रमनलाल वोरा की सीट भी बदली गई है। उन्हें इदार विधानसभा सीट से डसाडा से मैदान में उतारा गया है, जबकि रमनलाल इदारा सीट से पांच बार से लगातार चुनाव जीत दर्ज करते आ रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सीट बदल दी गई है।
    बीजेपी ने तीसरी लिस्ट में मांडवी विधानसभा क्षेत्र से विरेन्द्रसिंह जाडेजा को मैदान में उतारा हैं। उनका सामना कांग्रेस के दिग्गज नेता शक्ति सिंह गोहिल से होगा। गुजरात चुनाव बीजेपी के लिए साख का सवाल बना हुआ है, यही वजह है कि बीजेपी अपना हर पासा सोच समझ कर डाल रही है। बीजेपी ने पहली लिस्ट 70 उम्मीदवारों और दूसरी में 36 उम्मीदवारों की सूची जारी की है।(आज तक)

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Posted Date : 20-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 20 नवम्बर। वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रियरंजन दास मुंशी का सोमवार को निधन हो गया। वे साल 2008 से ही बीमार चल कहे थे और कोमा में थे। दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इस कांग्रेसी नेता ने अपनी अंतिम सांस ली। प्रियरंजन दासमुंशी को वर्ष 2008 में दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें उस वक्त अस्पताल में भर्ती कराया गया था जब उन्हें दिल के दौरे के साथ लकवा का अटैक पड़ा था।
    प्रियरंजन कांग्रेस के लोकप्रिय नेता के रूप में जाने जाते थे और उन्हें जब लकवा का दौरा पड़ा था तो वो बोल भी नहीं सकते थे। उनके मस्तिष्क में रक्त का स्त्राव भी नहीं हो पा रहा था, जिसके चलते उनके दिमाग पर भारी असर पड़ा था। खबरों के मुताबिक उनके शरीर के तंत्र ने काम करना बंद कर दिया था। हालांकि वह मशीन के सहारे सांस ले रहे थे, उनके गले से होते हुए पेट तक एक ट्रेचोस्टॉमी ट्यूब लगाई गई थी जिसके जरिए वह सांस ले रहे थे। वर्ष 2014 में जब भाजपा सत्ता में आई तो स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि प्रियरंजनजी के स्वास्थ्य पर खर्च होने वाली राशि का सरकार वहन करती रहेगी। वह काफी वर्षों तक सपोर्टिव केयर पर रहे। (जनसत्ता)

     

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Posted Date : 20-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 20 नवम्बर । देशभर से करीब 180 किसान संगठन सोमवार को दिल्ली में जुटे हैं। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले किसान संगठनों ने रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक विरोध मार्च शुरू किया है। इन किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य और कर्ज माफी की मांग है। 
    अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धावले ने कहा, हमारी मुख्य मांग सही कीमत आंकलन के साथ वैध हक के तौर पर पूर्ण लाभकारी कीमतें और उत्पादन लागत पर कम से कम 50 फीसदी का लाभ अनुपात पाना है। उन्होंने कहा, हम फौरन व्यापक कर्ज माफी सहित कर्ज से आजादी की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की कर्ज की समस्या के हल के लिए सांविधिक संस्थागत तंत्र स्थापित किए जाने की भी मांग की जाएगी।
    धावले ने कहा, यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि यदि वह चुने जाते हैं तो किसानों को अपनी फसलों के लिए अच्छी कीमतें मिलेंगी और स्वामाीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाएगा। एआईकेएससीसी के मुताबिक वर्तमान में लागत और आमदनी के बीच असंतुलन की वजह ईंधन, कीटनाशक, उर्वरक और यहां तक कि पानी सहित लागत की कीमतों में लगातार वृद्धि का होना है। इन चीजों का किसान सामना कर रहे हैं।
    अखिल भारतीय किसान सभा के नेता ने कहा कि कीमतों में घोर अन्याय किसानों को कर्ज में धकेल रहा है, वे आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे हैं और देश भर में बार-बार प्रदर्शन हो रहे हैं। किसानों की दुर्दशा के हल के लिए हम बड़ी तादाद में दिल्ली में किसान मुक्ति संसद में एकत्र हो रहे हैं। एआईकेएससीसी अपने प्रदर्शन के दौरान किसान मुक्ति संसद का आयोजन करेगी। दो मांगों के साथ सोमवार को एक मसौदा विधेयक भी पेश किया जाएगा और उस पर किसान संसद चर्चा कर उसे पारित करेगी।
    इस बीच, तमिलनाडु के किसानों ने कहा है कि वे लोग राष्ट्रीय राजधानी में तीसरे दौर का प्रदर्शन शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसानों के मीडिया संयोजक प्रेम कुमार ने कहा, देश के अन्य हिस्सों के किसानों से परामर्श करने के बाद हम एक बार फिर से दिल्ली में प्रदर्शन कर सकते हैं। (भाषा)

     

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Posted Date : 20-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 20 नवम्बर  कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अब कुछ ही दिन में, संभवत: 4 दिसंबर को आधिकारिक रूप से पार्टी प्रमुख बन जाएंगे। सोमवार को पार्टी की मौजूदा अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास 10, जनपथ पर हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा कर दी गई।
    घोषित कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव की अधिसूचना 1 दिसंबर को जारी होगी, और नामांकन पत्र भरने की अंतिम तारीख 4 दिसंबर तय की गई है। यदि एक से ज्यादा वैध नामांकन दाखिल किए जाते हैं, और चुनाव की नौबत आती है, तो मतदान 15 दिसंबर को होगा, तथा मतगणना 19 दिसंबर को करवाई जाएगी। लेकिन चूंकि माना जा रहा है कि राहुल गांधी के खिलाफ कोई भी नेता नामांकन पत्र दाखिल नहीं करेगा, सो 4 दिसंबर को ही उनका निर्विरोध चुना जाना तय है।
    कार्यसमिति की बैठक में अपने उद्घाटन भाषण में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर कई मुद्दों पर हमला बोला, जिनमें संसद के शीतकालीन सत्र को टाला जाना मुख्य रहा। सोनिया गांधी ने सत्र को आगे बढ़ाए जाने को अस्वस्थ संसदीय परम्परा करार दिया।

    कार्यसमिति की बैठक में पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात में विकास के अभाव की बात की, तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व बीजेपी प्रमुख अमित शाह की जोड़ी पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगाया। बैठक में पार्टी के अधिकतर सदस्यों गुजरात चुनाव को लेकर चर्चा की, तथा आशंका व्यक्त की कि मोदी-शाह की जोड़ी चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। कांग्रेस सदस्यों का कहना था वीवीपीएटी वाली ईवीएम मशीनों से छेडख़ानी नहीं की जा सके, इसके लिए पर्याप्त कदम उठाए जाने चाहिए।(एनडीटीवी)।

     

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Posted Date : 20-Nov-2017
  • मुंबई, 20 नवम्बर । महाराष्ट्र के जल संरक्षण मंत्री राम शिंदे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वीडियो में वह सड़क के किनारे पेशाब करते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद मंत्री अपने बचाव में उतरे हैं और उन्होंने सफाई दी है।
    यह घटना सोलापुर-बार्शी रोड की है जब मंत्री अपनी कार से यात्रा कर रहे थे। शिंदे एजेंसी को बताया कि वह सरकार के जलयुक्त शिविर स्कीम के लिए पिछले एक महीने से दौरा कर रहे थे और इसके चलते वह काफी बीमार महसूस कर रहे थे। इस वजह से उन्होंने खुले में शौच किया। 
    उन्होंने कहा कि वह पिछले महीने से सरकार की योजना को लेकर उच्च तापमान और निरंतर धूल में ट्रेवल कर रहे थे। इसके चलते मुझे बुखार हो गया और जब मुझे यात्रा के दौरान कोई टॉयलेट नहीं मिला तो मैंने खुले में पेशाब किया। 

    हालांकि एनसीपी ने कहा कि मंत्री को हाईवे पर कोई शौचालय नहीं मिला जो ये दर्शाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत अभियान विफल है। (एनडीटीवी)

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Posted Date : 20-Nov-2017
  • गुजरात से, 20 नवम्बर : अट्ठारह साल की काजल को जब मैं राहुल गांधी की तस्वीर दिखाती हूं तो वो पहले उन्हें हार्दिक पटेल बताती हैं। फिर गांववाले सही पहचान कराते हैं तो झेंप जाती हैं। काजल कहती हैं कि हमने हमेशा बीजेपी को ही देखा है, जबसे पैदा हुए हैं देखा है कि सब उनको वोट देते हैं, कांग्रेस को हम नहीं जानते। काजल का तेबली-काठवाड़ा गांव सुदूर नहीं है। अहमदाबाद जिले में है, शहर से कुछ 20 किलोमीटर दूर।
    पर गांव में एक भी शौचालय नहीं बना है, पक्की सड़क, पक्के मकान नहीं हैं और 100 में से 80 घरों में बिजली का कनेक्शन ही नहीं है। इसके बावजूद गांववाले बताते हैं कि उन्होंने हमेशा भारतीय जनता पार्टी को ही वोट दिया है।
    साल 1995 से गुजरात में बार-बार बीजेपी ने ही सरकार बनाई है। इन 22 वर्षों में से 13 साल नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। काजल की ही उम्र के विष्णु भी बीजेपी के शासन वाले गुजरात में ही पले बढ़े। उन्होंने भी एक ही सरकार देखी है।
    वो कांग्रेस या उसके युवा नेता के बारे में कुछ खास समझ नहीं बना पाए हैं। घर में पैसों की कमी और गांव से स्कूल की दूरी की वजह से काजल और विष्णु, दोनों आठवीं तक ही पढ़े हैं।
    विष्णु दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और काजल अब सिलाई सीखकर पैसे कमाना चाहती हैं। इस बार दोनों पहली बार वोट डालनेवाले हैं। काजल चाहती हैं कि उसके गांव में विकास हो। बिजली आ जाए ताकि लड़कियां हर वक्त आजादी से घूम-फिर सकें और शौचालय बन जाए जिससे खेतों का रुख ना करना पड़े।
    वो मानती है कि उनकी इन परेशानियों से सरकार को कोई सरोकार नहीं कि मोदीजी यहां कभी नहीं आएंगे, वो तो ऊपर से ही उड़ जाते हैं, नीचे आएं तो देख पाएं, पर साथ ही ये भी कहती हैं कि कोई विकल्प नहीं है।
    वो जब अपनी मासी के घर जाती हैं तो टीवी पर नरेंद्र मोदी के भाषण देखती हैं, मन की बात भी उन्होंने सुनी है, उनके लिए वही जाने-पहचाने नेता हैं। अहमदाबाद के नरोडा इलाके में जान-पहचान के अलावा एक और वजह है जो इस उम्र के युवा को बीजेपी से जोड़ती है। कुछ लड़कों से मुलाकात होती है तो परत दर परत अंदर की बात सामने आती है।
    सुभाष गढ़वी सरकारी नौकरी के लिए परीक्षा दे रहे हैं। कहते हैं कि आप ही बताइए अगर कोई ये कह दे कि हम राम मंदिर बनवा देंगे तो आप उसे वोट नहीं डालेंगी क्या?
    इनका कहना है कि मोटरबाइक लेकर मुस्लिम-बहुल इलाके से गुजरो तो अब भी संभल के निकलना पड़ता है। साल 2002 को चाहे 15 साल हो गए हों, झगड़ा कभी भी हो सकता है और सुरक्षा का मुद्दा राजनीति में प्रबल है, लेकिन जब मैं पूछती हूं कि सुरक्षित गुजरात में गुजरी अब तक की जिंदगी अच्छी है? तो सब एक साथ ना कह देते हैं।
    रोजगार की कमी इनकी सबसे बड़ी परेशानी है। आरोप लगाते हैं कि सरकार एमओयू पर हस्ताक्षर तो करती है पर जमीनी स्तर पर कंपनियां और उद्योग नहीं आते। कंपनियां आती भी हैं तो नौकरियां स्थानीय युवा को नहीं मिलतीं और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की वजह से ये ठगा महसूस करते हैं। धर्म राज जडेजा बीकॉम की पढ़ाई कर रहे हैं। अपने जीवन के 20 वर्षों में से कुछ उन्होंने कच्छ के जंगी गांव में बिताए और कुछ यहां शहर में।
    गांव में पवनचक्की लगाने के लिए उनकी पुश्तैनी जमीन में से आधी का अधिग्रहण हो गया। फिर वहां उद्योग भी लगे पर दो साल में ही बंद हो गए। नौकरी के नए अवसर वहां के नौजवानों को नहीं मिले।
    पानी की नहर निकाले जाने और नल लगवाने का वायदा भी पूरा नहीं हुआ। वो बताते हैं कि गांव में सप्ताह में एक बार ही पानी आता है। पर बात वही है। सिक्के के दोनों पहलू अजीब हैं, एक तरफ सरकार से नाराजगी और दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टी के साथ पहचान और सुरक्षा का एहसास।
    धर्म राज कहते हैं कि मोदी जी ने मन की बात में कहा था कि बिना इंटरव्यू के नौकरी मिलेगी पर यहां तो तीन-तीन इंटरव्यू के बाद भी नहीं मिल रही, लेकिन क्या करें।
    अहमदाबाद की ही एक दलित बस्ती में रहनेवाले जिग्नेश चंद्रपाल और उनके दोस्त इतने मुखर तो नहीं हैं पर बिना लाग-लपेट के कहते हैं कि विकास उनके समुदाय के गरीब लोगों के लिए नहीं हुआ है। बीजेपी के गुजरात में उनकी जिंदगी में उतनी ही मुश्किलें हैं जैसी दलित युवा की किसी और राज्य में होंगी।
    जिग्नेश कहते हैं कि बीजेपी हमें हिंदू का दर्जा तभी देती है जब चुनाव नजदीक होते हैं बाकि वक्त हम पिछड़े ही रहते हैं, स्कूल-कॉलेज में दाखिला तक मुश्किल है। हम एक स्कूल के अहाते में बैठ कर बात कर रहे हैं। वहां तक आनेवाली सड़क कच्ची है और इमारत में बिजली नहीं है।
    कमरों का हाल खस्ता है और इनकी शिकायत है कि टीचर आते भी कम हैं और पढ़ाते भी कम हैं। पर इसका मतलब ये नहीं कि ये सरकार बदलना चाहते हैं। राजनीति पर विश्वास कम है, पार्टी विशेष में फर्क नहीं दिखता। एक मायूसी और गुस्से के बीच झूलती हताशा है।
    अहमदाबाद से तीन घंटे की दूरी पर गोधरा शहर में 21 साल के खंड्वातिक सुहैल ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की है और नौकरी ढूंढ रहे हैं। गोधरा शहर तक आनेवाली सड़क तो चमचमाती है पर वहां दाखिल होते-होते टूटी-फूटी हो जाती है।
    उनका इलाका भी अहमदाबाद की दलित बस्ती जैसा ही दिखता है। बेरोजगारी यहां की बड़ी समस्या है। पास खड़े दोस्त गोरा सुहेल के मुताबिक गोधरा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर चुके हर तीन मर्दों में दो बेरोजगार हैं।
    इलाके में कोई बड़ी फैक्टरी भी नहीं है तो अधिकतम युवा अपने छोटे-मोटे व्यापार से ही गुजर-बसर कर रहे हैं। गोरा को अब युवा नेता राहुल गांधी से उम्मीद है। वे कहते हैं कि इतने साल एक पार्टी से उम्मीद रखी कुछ नहीं हुआ, राहुल गांधी ने कहा है कि वो बेरोजगारी मिटाएंगे, तो उन्हें एक मौका देकर देखना चाहिए। और इस चुनाव में अगर कोई बदलाव नहीं आया तो? तो हंस कर कहते हैं कि फिर देखेंगे, विकास तो पागल हो ही गया है। (बीबीसी)। 

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Posted Date : 19-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 19 नवंबर। गुजरात चुनाव में बीजेपी के पाटीदार वोटबैंक को दरकाने की तैयारी में जुटी कांग्रेस के हाथ सफलता मिलती दिख रही है। गुजरात कांग्रेस और पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS) के नेताओं ने बैठक के बाद ऐलान कर दिया है कि उनके बीच आरक्षण सहित सारे मुद्दों पर सहमति हो गई है। हालांकि दोनों ने ही सहमति के बिंदुओं का जिक्र न करते हुए इसे बताने की जिम्मेदारी हार्दिक पटेल पर छोड़ी है। बैठक के बाद कांग्रेस और PAAS के नेताओं ने कहा है कि हार्दिक कल यानी सोमवार को राजकोट से पूरे फॉर्म्युले का ऐलान करेंगे। एक न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए हार्दिक पटेल ने भी स्वीकार किया है कि कांग्रेस के साथ सहमति बन गई है। हालांकि वह इस सवाल से मुकर गए कि राजकोट में कुछ ऐलान होने वाला है या नहीं। 

    अहमदाबाद में गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष भरतसिंह सोलंकी और PAAS नेताओं की बैठक हुई। बैठक के बाद सोलंकी ने कहा कि पिछली बैठक से जहां पर बात अटकी हुई थी उन बातों पर समझौता हो गया है। उन्होंने साफ कर दिया कि पाटीदार आंदोलन नेता हार्दिक पटेल, ओबीसी जॉइंट फोरम के नेता अल्पेश ठाकोर और दलित नेता जिग्नेश मेवाणी, तीनों में से किसी ने विधानसभा चुनावों में टिकट की मांग नहीं की है।  

    हालांकि सोलंकी ने एक संकेत देते हुए कहा कि भले ही किसी ने टिकट नहीं मांगा हो लेकिन कांग्रेस जनभावना को ध्यान रखते हुए टिकट मांगेगी। सोलंकी के बाद PAAS नेता और हार्दिक के सहयोगी दिनेश बामनिया ने भी कहा कि कांग्रेस ने उनकी मांगे मान ली हैं। उन्होंने कहा कि संवैधानिक दायरे में आरक्षण देने की हमारी मांग सबको स्वीकार है जिससे किसी के हित का नुकसान नहीं होगा। हालांकि दिनेश बामनिया ने भी इससे अधिक कोई जानकारी नहीं देते हुए कहा कि सीएम विजय रुपाणी की विधानसभा राजकोट से हार्दिक कल इस समझौते का ऐलान करेंगे। गौरतलब है कि बीजेपी ने सीएम विजय रुपाणी को राजकोट वेस्ट से उम्मीदवार बनाया है। 

    हालांकि कांग्रेस और PAAS समझौता होने की बात कह तो रहे हैं लेकिन फॉर्म्युले का कोई जिक्र नहीं किया जा रहा है। इससे पहले हार्दिक पटेल की अगुवाई में PAAS ने कांग्रेस को 24 घंटे का अल्टिमेटम देते हुए कहा था कि अगर उनके मुद्दों का हल नहीं निकला तो वे कांग्रेस के विरोध में उतरेंगे। PAAS ने धमकी दी थी कि अगर कांग्रेस कोई निर्णायक फॉर्म्युला देने में नाकाम रहती है तो वह उसके खिलाफ प्रदर्शन करेगी। 

    ऐसी खबरें थीं कि टिकट वितरण को लेकर पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS) और कांग्रेस के बीच गतिरोध है। बताया जा रहा था कि पाटीदार नेता अपने लिए 9 सीटों की मांग कर रहे हैं जबकि कांग्रेस सिर्फ 4 सीट देने को तैयार है। हालांकि रविवार को बैठक के बाद PAAS और कांग्रेस, दोनों ने ही इस बात को नकार दिया कि सीट को लेकर किसी तरह का गतिरोध था। इससे इस बात के भी संकेत मिल रहे हैं कि शायद सीटों को लेकर चल रहे गतिरोध का हल बैठक के दौरान निकाल लिया गया है। (नवभारतटाइम्स)

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Posted Date : 19-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 19 नवम्बर। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन को इस साल इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार मिलेगा। साल 2004 से 2014 के बीच देश का नेतृत्व करने और वैश्विक स्तर पर भारत का औहदा बढ़ाने के लिए उन्हें इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार दिया जाएगा।
    इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट के अनुसार, सिंह को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाली एक अंतरराष्ट्रीय ज्यूरी द्वारा पुरस्कार के लिए सर्वसम्मति से चुना गया। 
    मनमोहन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर और पीवी नरसिंह राव के प्रधानमंत्री काल में वित्त मंत्री भी रह चुके हैं। मनमोहन सिंह भारत के तीसरे ऐसे प्रधानमंत्री थे जिन्होंने पीएम के रूप में अपने दो कार्यकाल पूरे किए। (भाषा)

     

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Posted Date : 19-Nov-2017
  • डोपिंग प्रशंसकों के साथ धोखा - राज्यवर्धन
    नई दिल्ली, 19 नवम्बर । केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने रविवार को कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के अधीन है और वह अपने खिलाडिय़ों की जांच उसके अंतर्गत कराती है, तो सरकार को कोई परेशानी नहीं है। उनका यह बयान वाडा के शनिवार को दिए गए बयान के बाद आया है। वाडा ने अपने बयान में बीसीसीआई के उस दावे को गलत बताया था, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय डोपिंग एजेंसी को बोर्ड के क्रिकेट खिलाडिय़ों की डोप जांच कराने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि बीसीसीआई राष्ट्रीय खेल महासंघ के अधीन नहीं आता और उसका मौजूदा एंटी डोपिंग तंत्र वाडा के नियमों के अंतर्गत काम करता है।
    एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन के मौके पर राठौड़ ने कहा, हमारे लिए तीन लोग काफी अहम हैं-खिलाड़ी, कोच और प्रशंसक। जब डोपिंग होती है, तो प्रशंसकों के साथ धोखा होता है क्योंकि प्रशंसक खिलाडिय़ों को अपने आदर्श की तरह मानते हैं। उन्होंने कहा, डोपिंग से प्रशंसकों के विश्वास के साथ धोखा होता है, इसलिए घर खेल संघ के लिए यह जरूरी है कि वो इस बात को सुनिश्चित करे की खेल में धोखाधड़ी न हो। खेल मंत्री ने कहा, क्रिकेट इससे अछूता नहीं है। मैं इस बात से खुश हूं कि क्रिकेट बाहर की एजेंसी से डोप पर नियंत्रण रख रहा है, लेकिन जब पूरा देश नाडा पर भरोसा कर रहा है तो क्रिकेट खिलाडिय़ों को भी इस पर भरोसा करना चाहिए। ओलिंपिक के रजत पदक विजेता राठौड़ ने कहा, हालांकि, हमने वाडा पर सब कुछ छोड़ दिया है क्योंकि आईसीसी उसके अधीन है।
    उन्होंने कहा कि अगर खिलाडिय़ों की जांच वाडा करता है, तो मंत्रालय को किसी तरह की परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा, जब आईसीसी वाडा के अधीन है तो उसे उसके डोपिंग नियमों का पालन करना चाहिए और यह वाडा पर निर्भर करता है कि वह इस बात को आश्वस्त करें कि क्रिकेट खिलाडिय़ों का डोप टेस्ट हो। हमें इस बार से कोई शिकायत नहीं है। वाडा और बीसीसीआई के बीच इस समय काफी विवाद चल रहा है। वाडा को नाडा की अप्रैल की ऑडिट रिपोर्ट से पता चला था कि बीसीसीआई नाडा का पालन नहीं करता है और न ही वह क्रिकेट में डोपिंग रोधी कार्यक्रम को मानता है। बीसीसीआई ने साफ तौर पर वाडा की भारतीय क्रिकेट खिलाडिय़ों के डोप टेस्ट की मांग को ठुकरा दिया था। 
    वाडा के नियमों के मुताबिक खिलाडिय़ों को हर साल की तिमाही में आईसीसी को डोप टेस्ट के लिए अपनी जगह और समय बताना होगा और उन्हें हर दिन एक घंटे के लिए उपलब्ध रहना होगा। (आईएएनएस)

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Posted Date : 19-Nov-2017
  • भोपाल, 19 नवम्बर । किसानों के लेकर अधिकारियों की संवेदनहीनता का एक और उदाहरण मध्य प्रदेश में खुजनेर मंडी में देखने को मिली। जहां नाराज किसानों को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी राधेश्याम जुलानिया ने खेती छोड़कर मजदूरी करने या फिर सरपंच का चुनाव लडऩे की नसीहत दे डाली। दरअसल जुलानिया भावांतर योजना की समीक्षा करने पहुंचे थे। वहां जब उनसे किसानों ने अपनी परेशानी जाहिर की तो जुलानिया सरकार और सरकारी योजना की तारीफ करने में जुट गए।
    उन्होंने कहा कि भावांतर योजना में सरकार किसानों को इतना दे रही है और अगर ये भी कम पड़ रहा है तो नरेगा में मजदूर बन जाओ या पंचायत का चुनाव लड़कर सरपंच बन जाओ, क्योंकि सरपंची में आजकल ज्यादा कमाई हो रही है। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 19-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 19 नवम्बर । गुजरात विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को प्रमोशन मिलना तय माना जा रहा है। उन्हें 20 नवंबर यानी कल कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक है और इस बैठक में राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने पर फैसला लिया जाएगा। सुबह साढ़े दस बजे इस बाबत मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में यह बैठक होनी है। राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें लंबे वक्त से लग रही हैं और कई नेता उन्हें अध्यक्ष बनाने की वकालत कर चुके हैं। ऐसे में यह केवल औपचारिकता भर है जिस पर कल मुहर लगना लगभग तय माना जा रहा है।
    इन पांच वजहों से राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाना चाहिए....
    सूत्रों की माने तो 20 नवंबर को सीडब्ल्यूसी में विचार विमर्श के बाद आंतरिक चुनाव कार्यक्रम पर मुहर लगेगी। इसके बाद अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरे जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस के सेंट्रल इलेक्शन ऑथोरिटी ने जो प्रस्ताव रखा है उसके हिसाब से नामांकन की अंतिम तारीख 24 नवंबर हैं। राहुल के अलावा कोई और नामांकन नहीं आने पर इसी दिन मामला साफ हो जाएगा। राहुल गांधी के अलावा किसी और के भी नामांकन आने की स्थिति में नाम वापसी की अंतिम तारीख 1 दिसंबर है।
    अगर कोई और नामांकन करता भी है पर नाम वापस ले लेता है तो राहुल निर्विरोध चुन लिए जाएंगे। आठ दिसंबर को चुनाव होगा और वोटों की गिनती 11 दिसंबर को होगी। हालांकि इसकी संभावना न के बराबर है कि राहुल के खिलाफ कोई नामांकन दाखिल होगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अध्यक्ष पद के लिए राहुल के अकेले उम्मीदवार रहने की संभावना है।
    पार्टी नेताओं का कहना है कि वैसे अध्यक्ष पद के चुनाव के कार्यक्रम की मंजूरी के लिए सीडब्लयूसी की औपचारिक बैठक बुलाने की जरूरत नहीं है, लेकिन सोनिया गांधी ने पार्टी की निर्णय करने वाली सर्वोच्च संस्था की मंजूरी लेने का फैसला किया है। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 19-Nov-2017
  • आशीष चौहान
    अहमदाबाद, 19 नवम्बर । टिकट वितरण को लेकर पाटीदार अनामत आंदोलन समिति और कांग्रेस के बीच गतिरोध शनिवार को भी जारी रहा। पाटीदार नेता अपने लिए 9 सीटों की मांग कर रहे हैं जबकि कांग्रेस सिर्फ 4 सीट देने को तैयार है। 
    पीएएएस से जुड़े एक शीर्ष सूत्र ने बताया, हमने कांग्रेस के सामने 9 सीटों की मांग रखी है, खासकर अहमदाबाद, उत्तरी गुजरात और सौराष्ट्र में पाटीदारों के प्रभाव वाली सीटों की मांग की है। लेकिन कांग्रेस हमें 4 टिकट से ज्यादा देने को तैयार नहीं है। 
    एक पीएएएस नेता ने कहा, पार्टी ने पहले कहा था कि वह राज्य विधानसभा चुनाव में पाटीदारों के पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करेगी। हालांकि कथित सेक्स टेप विवाद के बाद कांग्रेस नेता हमें सिर्फ 4 टिकट ही देना चाहते हैं।
    पीएएएस के एक सदस्य ने कहा, इससे पीएएएस के भीतर ही मतभेद उभरेंगे क्योंकि वे सदस्य जिन्होंने तब भी संगठन का साथ दिया जब हार्दिक जेल में थे और लगातार बीजेपी का विरोध करते रहे, वे निराश होंगे।
    पीएएएस के प्रतिनिधि सीट शेयरिंग और कोटा मुद्दे पर कांग्रेस आलाकमान से बातचीत के लिए शुक्रवार को दिल्ली गए थे। हालांकि शुक्रवार देर शाम को पटेल नेताओं ने कांग्रेस को अंतिम फैसला लेने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। पाटीदारों ने धमकी दी थी अगर इस दौरान कांग्रेस कोटा फॉम्र्युला पर कोई अंतिम फैसला नहीं लेती है तो वे उसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करेंगे। 
    पाटीदार नेताओं ने शुक्रवार को कहा था कि गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भरतसिंह सोलंकी उनका फोन तक नहीं उठा रहे थे। हालांकि सोलंकी इन आरोपों के बावत कहा है कि एक के बाद एक कई बैठकों के दौर की वजह से दिल्ली में पाटीदार नेताओं से मुलाकात नहीं हो पाई। उन्होंने कहा, पीएएएस सदस्यों को कांग्रेस का टिकट दिए जाने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी। (टाईम्स न्यूज)

     

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Posted Date : 18-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 18 नवम्बर । गुजरात चुनाव अपने चरम पर हैं। ऐसे में पार्टियों में गठबंधन, सहयोग और जोड़-तोड़ के बीच उम्मीदवारों के नाम की भी घोषणा की जा रही है। शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीवारों की पहली लिस्ट जारी की। लेकिन ये लिस्ट जारी होते ही पार्टी में कई लोग नाराज हो गए हैं। कई नेता टिकट न मिलने से बेहद खफा हो गए हैं।
    नाराजगी इस हद तक बढ़ गई की उन्होंने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाघानी को तत्काल प्रभाव से अपने इस्तीफे तक सौंप दिए। लेकिन इसी के तुरंत बाद नाराज पार्टी नेताओं को मनाने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मोर्चा संभाल लिया। अमित शाह शुक्रवार देर रात गुजरात भाजपा के दफ्तर में डैमेज कंट्रोल की हर मुमिकन कोशिश करते रहे। हालांकि उनकी कोशि किस हद तक सफल हुई है इस बारे में अभी जानकारी नहीं है। पहली सूची आने के बाद शाम तक ही पार्टी में इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया था। इनमें अंकलेश्वर विधानसभा सीट पर भाई ने ही अपने भाई के टिकट का विरोध किया।
    टिकट का ऐलान होने के बाद भरुच जिला पंचायत के सदस्य वल्लभ पटेल ने पार्टी से इस्तीफा दिया। इस्तीफा देने वाले वल्लभ पटेल, ईश्वर पटेल के सगे भाई हैं। अंकलेश्वर सीट से वल्लभ पटेल ने भी टिकट की मांग की थी। दशरथ पुवार ने जिला भाजपा के महामंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। वडोदरा में भी दिनेश पटेल को टिकट दिए जाने से पार्टी में बगावत होने लगी। पादरी जिला पंचायत और तहसील पंचायत के नेता कमलेश पटेल ने इस्तीफा दिया है। वहीं वडोदरा जिला महामंत्री चैतन्य सिंह झाला ने भी पार्टी को इस्तीफा दे दिया।
    हाल ही में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए भोलाभाई गोहिल भी नाराज हैं और वो इस बारे में आज जीतु वाघानी से मुलाकात करेंगे। उन्होंने जसदण सीट से टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। जबकि वो इस सीट से कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं। इतना ही नहीं गोहिल ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की थी, लेकिन इस सीट से भरत बोगरा को टिकट दिया गया।(पंजाब केसरी)

     

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Posted Date : 18-Nov-2017
  • पटना, 18 नवम्बर । जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव को चुनाव आयोग ने झटका दिया है। चुनाव आयोग ने फैसला किया है कि जेडीयू में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समर्थन वाले समूह के पास पार्टी के चिह्न तीर का अधिकार होगा। खबर के मुताबिक शुक्रवार को चुनाव आयोग ने नीतीश कुमार वाले जेडीयू को चुनाव चिह्न तीर का दावेदार माना। आयोग ने पार्टी संगठन, विधानसभा और विधान परिषद में विधायकों के समर्थन के आधार पर नीतीश कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया। मामले में दोनों तरफ से लिखित और मौखिक सबूत दिए गए थे। आयोग के फैसले में कहा गया, नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले समूह ने विधानसभा के साथ-साथ पार्टी की राष्ट्रीय परिषद में भी भारी बहुमत के साथ समर्थन दिखाया।
    इस मामले में गुजरात के नेता और शरद यादव के गुट के सदस्य छोटूभाई वसावा ने आवेदन कर उनके समूह के असली जेडीयू होने का दावा किया था। लेकिन चुनाव आयोग ने इसे भी खारिज कर दिया। इस मामले में नीतीश कुमार और उनके लोग प्रतिवादी थे। चुनाव आयोग का फैसला शरद यादव और उनके लोगों के लिए झटका है। गुजरात विधानसभा चुनाव को देखते हुए चुनाव आयोग ने इस मामले की तुरंत सुनवाई की। दोनों ही समूह चुनाव लडऩा चाहते हैं और पार्टी के चिह्न पर दावा कर रहे हैं। उन्होंने आयोग से जल्दी फैसला लेने की अपील की थी।
    इस साल जुलाई में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस से गठबंधन तोड़ लिया था। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से हाथ मिलाकर सरकार बना ली थी। तब से जेडीयू शरद यादव और नीतीश कुमार के रूप में दो धड़ों में बंट गया था। सितंबर में आयोग ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर शरद यादव के दावे को लेकर किए गए आवेदन पर कहा था कि उनके पास पर्याप्त समर्थन नहीं है।(लाइवमिंट)

     

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