राजनीति

  • पटना: बिहार में चल रहे राजनीतिक संकट में कयासों का दौर जारी है. बिहार कैबिनेट मीटिंग के बाद नीतीश, तेजस्वी और तेजप्रताप ने अलग से बैठक की जिससे नए कयासों को बल मिला है. हर कोई यही जानना चाहता हैं कि क्या उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव इस्तीफ़ा देंगे या नहीं. सब जानते हैं कि महागठबंधन का भविष्य उनके इस्तीफ़े पर निर्भर करता है. खबर आई थी कि तेजप्रताप और तेजस्वी ने कार्यालय जाना छोड़ दिया है और उनके विभागों की महत्वपूर्ण फाइलें उनके घर पर जा रही हैं.
    माना जाता है कि फिलहाल, तेजस्वी यादव के इस्तीफ़े के लिए कांग्रेस पार्टी को ज़िम्मा दिया गया है. बताया जाता है कि बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चौधरी इस मुद्दे पर मध्यस्थता की भूमिका में लालू और नीतीश से कई दौर की बातचीत कर चुके हैं. लेकिन कांग्रेस ने लालू यादव के घर पर 7 जुलाई को हुई सीबीआई छापेमारी को राजनीति से प्रेरित बताया था वहीं अब तेजस्वी के मुद्दे पर कह रही है कि राजद को अपना रुख नरम कर महागठबंधन के हित में निर्णय लेना चाहिए.
    कांग्रेस तेजस्वी का इस्तीफ़ा चाहती है लेकिन सार्वजनिक रूप से बोल नहीं सकती. क्योंकि खुद कांग्रेस में कई मिसाल हैं जहां नेता पर आरोप लगने के बावजूद वे सत्ता में पद पर बने रहे. कांग्रेस को मालूम है कि इस बार उनका वास्ता एक तरफ नीतीश कुमार से पड़ा है जो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करते और दूसरी तरफ लालू यादव हैं जो कई मामलों में आरोपी और चारा घोटाले के एक मामले में दोषी क़रार दिए जाने के बाद भी भ्रष्ट आचरण करने से परहेज नहीं करते.
    सुशील मोदी ने फिर लगाए आरोप  
    बीजेपी नेता सुशील मोदी आरजेडी परिवार पर हमला जारी रखे हुए हैं. उन्होंने कहा कि 2013-14 में 'मूंछ वाले' तेजस्वी यादव ने 13 बेनामी संपत्तियों का मालिकाना हक लिया. उन्होंने तेजस्वी यादव के उस बयान के जरिए भी हमला किया जिसमें उन्होंने कहा था कि मेरी मूंछ भी नहीं आई थी तब के केस सुशील मोदी उठा रहे हैं. लेकिन आज मोदी ने कहा कि ये मामले उनके मूंछ आ जाने के बाद है.
    उधर, राष्ट्रीय जनता दल का कहना है कि उनकी पार्टी ने पिछले हफ़्ते ये निर्णय ले लिया कि तेजस्वी के इस्तीफ़ा का सवाल नहीं है. अब जनता दल यूनाइटेड का कहना है कि उनकी पार्टी ने अब तक इस मुद्दे पर संयम से काम लेते हुए महागठबंधन धर्म निभाते हुए इस्तीफे की मांग नहीं की लेकिन ये अनिश्चित काल के लिए नहीं माना जा सकता. (एनडीटीवी)

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  • वालेटा (माल्टा) !   लीबिया के एक विमान को शुक्रवार को दो लोगों ने अगवा कर लिया, जिसमें 82 पुरुष, 28 महिलाएं और एक नवजात सहित 118 यात्री सवार थे। विमान के माल्टा अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतारे जाने के कुछ घंटों बाद सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सेबा से त्रिपोली जा रहे अफ्रीकियाह एयरवेज के विमान को शुक्रवार को दो लोगों ने अगवा कर लिया था। बताया गया था कि इस शख्स के पास हथगोला था।

    टाइम्स ऑफ माल्टा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, माल्टा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद सभी यात्रियों को रिहा करा लिया गया। विमान के यात्रियों ने अपराह्न 1.50 बजे (स्थानीय समयानुसार) के आसपास विमान से बाहर निकलना शुरू किया, जबकि दोनों अपहर्ता अपराह्न 3.40 बजे (स्थानीय समयानुसार) विमान से बाहर निकले और सैनिकों के समक्ष समर्पण कर दिया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, अपहर्ता ने चालक दल को बताया कि वह गद्दाफी समर्थक है और यदि उसकी मांगों को पूरा कर दिया गया तो वह 111 यात्रियों को रिहा कर देगा लेकिन चालक दल को रिहा नहीं करेगा।

    इससे पहले, माल्टा के प्रधानमंत्री जोसेफ मस्कट ने ट्वीट कर इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "सेबा से त्रिपोली जा रहे अफ्रीकियाह एयरवेज के विमान को माल्टा की ओर मोड़ दिया गया और इसे यहां उतारा गया। वैकल्पिक सुरक्षा एवं आपात अभियान के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।"

    उन्होंने कहा, "इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि विमान में 111 यात्री सवार हैं जिनमें से 82 पुरुष और 28 महिलाएं और एक नवजात हैं।"

    समाचार एजेंसी लाना के मुताबिक, लीबिया की संयुक्त राष्ट्र समर्थित सरकार ने विमान का अपहरण होने और इसे माल्टा में उतारे जाने की पुष्टि की थी।

    'टाइम्स ऑफ माल्टा' के मुताबिक, विमान के उतारे जाने के बाद 45 मिनट तक इंजन चालू था। माल्टा अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे आने वाली अन्य सभी उड़ान सेवाएं रद्द कर दी गईं या उनकी दिशा बदल दी गई।

    भूमध्य द्वीप माल्टा लीबिया तट से लगभग 500 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।

    माल्टा में विमान अपहरण की पिछली बड़ी वारदात 23 नवंबर, 1985 को हुई थी, जब इजिप्ट एयर बोइंग 737 विमान को भी इस द्वीप देश की ओर मोड़ दिया गया था।

    24 घंटे तक चले बंधक संकट का अंत 62 लोगों की मौत के साथ हुआ था। इस दौरान, मिस्र के कमांडो तथा अपहर्ताओं के बीच भीषण झड़प हुई थी। तीन में से केवल एक अपहर्ता ही जिंदा पकड़ा जा सका, जिसे बाद में सजा दी गई।

    वहीं, 43 साल पहले इराक से माल्टा जा रहे एक जंबोजेट बोईंग 747 विमान को फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने अगवा कर लिया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री डोम मिंटोफ ने अपहर्ताओं से सौदेबाजी कर विमान में मौजूद 247 यात्रियों तथा आठ विमान परिचारिकाओं को रिहा करा लिया था।

    ईंधन के बदले यात्रियों व विमान परिचारिकाओं को रिहा कराया गया था। विमान बाद में माल्टा से रवाना हो गया अंतत: अपहर्ताओं ने समर्पण कर दिया था।

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  • संयुक्त राष्ट्र।  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने फिलीस्तीन में अवैध इजरायली बस्तियों को खत्म करने और वहां जारी अन्य गतिविधियों को तुरंत समाप्त करने संबंधी प्रस्ताव आज पारित कर दिया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अमेरिका ने इस प्रस्ताव पर वीटो करने से मना कर दिया और उसने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

    इस प्रस्ताव में इजरायल से पूर्वी येरूशलम समेत फिलीस्तीन के इलाके को खाली कर वहां चल रही अन्य गतिविधियों को तुरंत समाप्त करने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव पर 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में आज मतदान हुआ जिसमें अमेरिका ने हिस्सा नहीं लिया।

    प्रस्ताव के पक्ष में कुछ 14 वोट पड़े जबकि एक सदस्य के तौर पर अमेरिका ने वोट नहीं दिया। मिस्र ने इस प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया था लेकिन इजरायल ने ट्रंप से इस मामले में हस्तक्षेप करने को कहा जिसके बाद इस प्रस्ताव को वापस ले लिया गया था।

    लेकिन मलेशिया, न्यूजीलैंड, सेनेगल और वेनेजुएला ने दोबारा इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। गौरतलब है कि अमेरिका इस मामले में परंपरागत तौर पर इजरायल का समर्थन कर उसे अब तक संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई से बचाता आया है लेकिन इस बार उसने ऐसा नहीं किया। 

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  • मास्को।  रूस की सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने आज कहा कि रूस ने कभी हथियारों की दौड़ में शामिल होने की शुरूआत नहीं की और न ही भविष्य में ऐसा करेगा। आरआइए संवाद समिति ने रूस की सरकार के हवाले से आज इस बात की जानकारी दी।

    इससे पहले आज रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परमाणु हथियारों में विस्तार करने की योजना वाले बयान पर कहा कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।  ट्रंप ने अमेरिका के परमाणु हथियारों की क्षमता में विस्तार करने को लेकर कहा कि यह हथियारों की एक दौड़ है और संयुक्त राज्य अमेरिका इसमें विजयी होगा। 

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