सोशल मीडिया

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Posted Date : 21-Nov-2017
  • कांग्रेस ने राहुल गांधी को नेतृत्व सौंपने की अटकलों पर विराम लगा दिया है। सोमवार को पार्टी की कार्यकारी समिति ने राहुल गांधी को अगला अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया। इसके साथ अध्यक्ष पद की निर्वाचन प्रक्रिया का भी ऐलान कर दिया गया। इसके मुताबिक चुनाव की अधिसूचना एक दिसंबर को जारी होगी, जबकि चार दिसंबर तक नामांकन पत्र भरे जा सकेंगे। माना जा रहा है कि हाल के दशकों में कांग्रेस में जैसा होता आया है, इस बार भी चुनाव की औपचारिकता ही निभाई जाएगी, यानी राहुल गांधी का पार्टी अध्यक्ष बनना तय है। इस बात के जिक्र के साथ सोशल मीडिया में पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र का मजाक उड़ाते हुए कई टिप्पणियां आई हैं।
    द फ्रस्ट्रेटिड इंडियन का ट्वीट है, राहुल गांधी चुनाव करवाएंगे, राहुल गांधी और राहुल गांधी चुनाव लड़ेंगे... राहुल गांधी और दूसरे राहुल गांधी राहुल गांधी को वोट देंगे... 19 दिसंबर को राहुल गांधी घोषणा करेंगे कि राहुल गांधी कांग्रेस के नए अध्यक्ष हैं। भाजपा समर्थक कांग्रेस उपाध्यक्ष पर अक्सर यह तंज कसते हैं कि चुनाव में उनकी सक्रियता भाजपा के लिए हमेशा फायदेमंद साबित होती है। आज की खबर शेयर करते हुए भी ऐसी कई टिप्पणियां आई हैं। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा की टिप्पणी है, राहुल गांधीजी के कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की घोषणा पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जी और पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को बधाई।
    संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर चल रहे विवाद में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कूद पड़े हैं। सोमवार को भोपाल में एक कार्यक्रम में उन्होंने पद्मावती को राष्ट्रमाता कहा। उनका कहना था, ऐतिहासिक तथ्यों से खिलवाड़ कर अगर राष्ट्रमाता पद्मावती जी के सम्मान के खिलाफ जिस फिल्म में दृश्य दिखाए गए या बात कही गई है उस फिल्म का प्रदर्शन मध्य प्रदेश की धरती पर नहीं होने दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस घोषणा के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री का आभार जताया है तो वहीं इस पर सवाल भी उठाए गए हैं। फेसबुक पर आनंद हरिदास ने पूछा है, जिस फिल्म को अभी सेंसर बोर्ड से पास होना है, उसके पहले ही कोई राज्य सरकार उस पर पाबंदी कैसे लगा सकती है? यह 2017 है या 1317? शिवराज सिंह द्वारा पद्मावती को राष्ट्रमाता बताए जाने का भी यहां कई लोगों ने मजाक बनाया है।
    इन दोनों खबरों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    इंजीनियर सत्या- आखिरकार अब राहुल गांधी जीतेंगे...। कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव...
    शकुनि मामा- कांग्रेसी लोकतंत्र- गांधी परिवार के सदस्य का गांधी परिवार द्वारा गांधी परिवार के लिए चुनाव।
    रितिक राय- राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव कुछ इस तरह जीतेंगे।
    राहुल रौशन- राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाले हैं...कई काबिल विरोधियों के खिलाफ अपनी योग्यता साबित करने और जमीन पर भारी मेहनत करने के बाद उन्होंने खुद को इस पद के लायक बनाया है... मुझे उम्मीद है कि वे अब कुछ समय आराम करेंगे और इस उपलब्धि पर उत्सव मनाने के लिए विदेश जाएंगे।
    रूप मूर्ती- राहुल गांधी को चार दिसंबर को कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाएगा। बॉलीवुड भी इससे बेहतर मनोरंजन नहीं दे सकता।
    विनय द्विवेदी-बताओ अब गाय का क्या होगा? मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पद्मावती को राष्ट्रमाता घोषित कर दिया है।
    सुशील पांडे- शिवराज सिंह ने कहा है, राष्ट्रमाता पद्मावती की जय। अब कन्फ्यूजन हो रहा है कि भारत माता की जय करें या राष्ट्र माता की! (सत्याग्रह)

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Posted Date : 18-Nov-2017
  • आर्थिक मोर्चे पर पिछले कुछ समय से विरोधियों का निशाना बन रही मोदी सरकार के लिए आज का दिन बड़ी राहत लेकर आया। दुनिया की तीन सबसे बड़ी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों में से एक मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने शुक्रवार को 13 साल बाद भारत की क्रेडिट रेटिंग बीएए3 से बढ़ाकर बीएए2 कर दी है। यही नहीं, मूडीज ने भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में अपना आकलन 'सकारात्मक' से बढ़ाकर 'स्थिर' कर दिया है। यह खबर आने के बाद सोशल मीडिया पर मूडी लगातार ट्रेंड कर रहा है। यहां भाजपा समर्थकों ने भारी जोश के साथ यह खबर शेयर करते हुए केंद्र सरकार की तारीफ की है। इसके साथ कांग्रेस को निशाना भी बनाया गया है। ट्विटर हैंडल सत्यामारकिनी पर प्रतिक्रिया है, मूडी ने भारत की रेटिंग बढ़ा दी है और यहां कांग्रेस का मूड बिगड़ गया है।
    सोशल मीडिया में भाजपा के तमाम दिग्गज नेताओं की भी इस पर प्रतिक्रियाएं आई हैं। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के ट्विटर हैंडल पर टिप्पणी है, ... मूडी द्वारा रेटिंग बढ़ाया जाना मोदी सरकार की मेहनत और सुधार प्रक्रिया (देश की अर्थव्यवस्था में) को दिखाता है... कुछ ऐसी ही बात अरुण जेटली ने कही है, मूडी द्वारा रेटिंग बढ़ाना पिछले कुछ वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था में हुए ढांचागत सुधारों को मान्यता देना है। वहीं आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को जब-तब घेरने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने तंजभरा ट्वीट किया है, मूडी ने रेटिंग में जो बढ़ोत्तरी की है, हमें इस उपलक्ष्य में संसद के केंद्रीय कक्ष में आधी रात को एक उत्सव आयोजित करना चाहिए और स्टैंडर्ड और पूअर्स (एक और क्रेडिट एजेंसी जिसने पिछले दिनों भारत की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई थी) पर लानत भेजनी चाहिए।
    यहां कई लोगों ने मोदी सरकार की पीठ थपथपाते हुए जिक्र किया है कि अब से पहले सिर्फ अटलबिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार और पीवी नरसिम्हाराव की सरकार के दौरान मूडी ने क्रेडिट रेटिंग बढ़ाई थी। इसको लेकर ट्विटर हैंडल शकुनि अंकल पर तंजभरी प्रतिक्रिया है, 
    मोदीजी को खुश होना चाहिए या दुखी क्योंकि मूडी ने नरसिम्हाराव और बाजपेयी के समय भी रेटिंग बढ़ाई थी और फिर ये सरकारें बदल गई थीं।
    सोशल मीडिया में इस खबर पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं -
    अभिजीत मजूमदार- मूडी ने 14 वर्षों में पहली बार भारत की सॉवरेन रेटिंग बढ़ा दी है... रुपया डॉलर के मुकाबले 69 पैसे मजबूत हुआ है... अब यह तय करना मुश्किल है (विरोधियों के लिए) कि मोदी से नफरत की जाए या मूडी से।
    आतिफ- हर हर मूडी या हर हर मोदी... इनमें से कोई नहीं।
    नमो का जादू अब नहीं चल रहा इसलिए सारा ध्यान मूडी पर लगाया जा रहा है।
    दीपक राज- मूडी ने अपनी रेटिंग तब बढ़ाई है जब एक चायवाली प्रधानमंत्री है। इससे पहले तब बढ़ाई थी जब एक कवि प्रधानमंत्री था। और हां, इसके बीच में एक अर्थशास्त्री भी देश का प्रधानमंत्री रह चुका है!
    उमेश द्विवेदी- मूडी ने क्रेडिट रेटिंग बढ़ाई इधर भुखमरी में भारत का स्थान 100 वां पहुंचा ...जीते रहो। (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 17-Nov-2017
  • संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के विरोध में बवाल बढ़ता ही जा रहा है। उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार ने फिल्म के रिलीज होने से राज्य में कानून-व्यवस्था बिगडऩे की आशंका जताई है। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय को लिखे पत्र में राज्य के प्रधान सचिव (गृह) अरविंद कुमार ने कहा है कि सेंसर बोर्ड को जनता की राय को ध्यान में रखकर इस फिल्म पर फैसला करना चाहिए। उधर, इस फिल्म का विरोध कर रहे संगठन करणी सेना ने एक दिसंबर को फिल्म रिलीज होने पर पूरे देश में बंद की धमकी दी है। सोशल मीडिया पर आज ये तमाम खबरें शेयर की गई हैं। कट्टरपंथी लोगों द्वारा यहां भी फिल्म का लगातार विरोध चल रहा है लेकिन कई लोगों ने इसके समर्थन में भी प्रतिक्रियाएं दी हैं। माधवन नारायणन ने ट्वीट किया है, पद्मावती के खिलाफ वे लोग प्रदर्शन कर रहे हैं जिन्होंने 1987 में रूप कंवर के सती हो जाने का समर्थन किया था। ये पुरातनपंथी लोग संदिग्ध मूल्यों का बचाव कर रहे हैं। इस पूरे मामले पर करणी सेना को लेकर तंज करते हुए भी खूब टिप्पणियां आई हैं। फेसबुक पर कोमल सिंह लिखती हैं, पद्मावती के प्रचार का सारा पैसा करणी सेना को दिया जाना चाहिए और बेस्ट प्रचार एजेंसी का अवॉर्ड भी।
    पद्मावती में मुख्य भूमिका निभा रहीं दीपिका पादुकोण ने मंगलवार को कहा था कि यह फिल्म रिलीज होने से कोई नहीं रोक सकता। इसके जवाब में करणी सेना की तरफ से धमकी आई है कि संगठन के लोग दीपिका की नाक काट लेंगे। सोशल मीडिया में इस खबर का जिक्र करते हुए सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिखा खंडूजा का कहना है, करणी सेना दीपिका की नाक काटने की धमकी दे रही है और सरकार चुपचाप सब देख रही है...इन लोगों को जेल की सलाखों के पीछे क्यों नहीं भेजा जा सकता? इस खबर के बहाने मजेदार अंदाज में करणी सेना की खबर भी ली गई है। आदी ने ट्वीट किया है, दीपिका की नाक काटने की बात पर मैं करणी सेना के मुखिया की नाक काट दूंगा.. रणवीर सिंह की नाक क्यों नहीं काटते, वो थोड़ी लंबी भी है...
    इस पूरे मसले पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    गप्पिस्तान रेडियो-पद्मावती को लेकर रोष अभी ही चरम पर क्यों पहुंच गया। अभी तो दो हफ्ते बाकी हैं...क्या हर कोई मुफ्त में फिल्म देखने की कोशिश में लगा है?
    आलोक पुराणिक- डर अब मुझे यह है कि पद्मावती प्रसंग का नाट्य-रुपांतरण वारदात और सनसनी में (न्यूज चैनलों पर) भी ना दिखा दिया जाये।
    अमित तिवारी- दिक्कत ये है कि करणी सेना पद्मावती फिल्म को सिनेमा नहीं लीक हुई सीडी मान रही है..!
    अनुराग मुस्कान- रानी पद्मिनी के सम्मान की लड़ाई का दावा करने वाली करणी सेना ने कहा है कि अगर फिल्म पद्मावती रिलीज हुई तो वो फिल्म में रानी पद्मिनी की भूमिका निभा रही दीपिका पादुकोण की नाक काट लेंगे। मतलब सम्मान केवल रानी का है, महिला का नहीं?  (सत्याग्रह)

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Posted Date : 17-Nov-2017
  • किशोर उम्र के बच्चों में आत्महत्या की बढ़ती दर का क्या सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल से कोई संबंध है. अमेरिका में आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि इनके बीच रिश्ता हो सकता है.
    अमेरिका में आंकड़ें बताते हैं कि किशोर उम्र के बच्चों में आत्महत्या की दर दो दशक तक गिरने के बाद 2010 से 2015 के बीच बढ़ गयी. यह आंकड़े संघीय सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन यानी सीडीसी के हैं. आत्महत्या की दर क्यों बढ़ी यह अभी पता नहीं है. आंकड़ों का यह विश्लेषण इस सवाल का जवाब नहीं देता लेकिन इस ओर संकेत जरूर करता है कि सोशल मीडिया का बढ़ता इस्तेमाल इसकी एक वजह हो सकता है.
    रिसर्चरों के मुताबिक हाल में "साइबर बदमाशी" और ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट जिसमें "संपन्न" जीवन दिखता है, वह किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है और इन चीजों को आत्महत्या के लिए दोषी माना जा रहा है. 17 साल की काइतलिन हर्टी कोलोराडो हाई स्कूल की सीनियर छात्र है और उन्होंने पिछले महीने कई स्थानीय बच्चों के आत्महत्या की घटना के बाद जागरूकता के लिए अभियान चलाया है. काइतलिन का कहना है, "कई घंटों तक इंस्टाग्राम की फीड को देखने के बाद मुझे मेरे बारे में बहुत बुरा महसूस हुआ, मैं खुद को अलग थलग महसूस कर रही थी." क्लोए शिलिंग की उम्र भी 17 साल है उनका कहना है, "कोई भी उन बुरी बातों के बारे में सोशल मीडिया पोस्ट नहीं डालता जिससे वह गुजर रहा होता है." क्लोए शिलिंग ने भी किशोरों को इंटरनेट या सोशल मीडिया से एक महीने तक दूर रखने के इस अभियान में मदद की. अभियान में सैकड़ों किशोर उम्र के बच्चे शामिल हुए.
    रिसर्चरों ने 2009 से 2015 तक सीडीसी के आत्महत्या के रिपोर्टों को देखा और अमेरिकी हाई स्कूल के बच्चों की आदतों, रुचियों और व्यवहारों पर किये गये दो सर्वेक्षणों के नतीजों का भी अध्ययन किया. सर्वेक्षण में 13 से 18 साल की उम्र के करीब पांच लाख किशोर शामिल हुए. उनसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, टेलिविजन और दोस्तों के साथ बिताए वक्त के बारे में सवाल पूछे गये. इसके साथ ही उनसे मूड, निराशा की अवस्था और आत्महत्या के विचार के बारे में सवाल पूछे गये.
    रिसर्चरों ने उन परिस्थितियों का विश्लेषण नहीं किया जिनमें किशोरों ने आत्महत्या की थी. अमेरिकन फाउंडेशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन की चीफ मेडिकल अफसर डॉ क्रिस्टीन मौतिए ने बताया कि इस अध्ययन में मिले सबूतों के आधार पर दावा नहीं किया जा सकता कि किशोरों को आत्महत्या के लिए बहुत से कारण प्रभावित करते हैं. 

     

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Posted Date : 16-Nov-2017
  • गुजरात के युवा पाटीदार नेता हार्दिक पटेल लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। आज उनकी चार और वीडियो क्लिप सामने आई हैं। इनमें वे कथित तौर पर शराब पीते हुए और महिलाओं के साथ बैठे नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थकों ने ये कथित 'सेक्स' वीडियो शेयर करते हुए हार्दिक को जमकर निशाना बनाया है। वहीं एक तबके ने उनका यह कहकर बचाव किया है कि ये वीडियो सार्वजनिक करना उनके निजता के अधिकार का उल्लंघन है। वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष का ट्वीट है,...तो हार्दिक पटेल के पास निजता का अधिकार नहीं है लेकिन जय शाह के पास है? डार्लिंग ये है न्यू इंडिया। भाजपा पर तंज करते हुए आरिश कमर की टिप्पणी है, भाजपा ने विकास का मॉडल फेल होने के बाद चुनाव का नया, पांच 'सी' मॉडल आगे बढ़ाया है- कैश, सीडी, कोर्ट, चुनाव आयोग और सीबीआई।
    दिल्ली में वायु प्रदूषण की खराब होती हालत के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने एक विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि लोगों को अफरा-तफरी मचाने की जरूरत नहीं है क्योंकि दिल्ली में भोपाल गैस त्रासदी जैसे हालात नहीं हैं। सोशल मीडिया पर इस बयान को शेयर करते हुए लोगों ने केंद्रीय मंत्री की खूब लानत-मलानत की है। ट्विटर पर अरुण शाह का कहना है, डॉ. हर्षवर्धन पर स्मॉग का बुरा असर पड़ा है और उनका दिमाग फिर गया है तभी वे ऐसे बयान दे रहे हैं।
    सोशल मीडिया में इन दोनों खबरों पर आईं कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    दिनेश भारद्वाज- भाजपा गुजरात में हार्दिक पटेल की सीडी दिखाकर चुनाव जीतना चाहती है। अगर चुनाव जीतना है तो अपना काम दिखाओ, रोजगार दिखाओ, नए स्कूल-कॉलेज दिखाओ, नई फैक्टरी दिखाओ ....ये सीडी वाला खेल पुराना हो गया है।
    सनी देओल- मोदी जी के 24 घंटे बिजली वाले गुजरात मॉडल की पोल खुली... हार्दिक की सीडी में दिखा घोर अंधेरा।
    शकुनि मामा- अगर जनता चुनाव में विकास के ऊपर सेक्स सीडी को तरजीह देगी तो क्या यह भी भाजपा की उपलब्धि होगी?
    नीलिमा- हार्दिक पटेल ने मोदी से पूछा है कि अगर गुजरात विकसित है तो लोग आज भी सीडी क्यों इस्तेमाल कर रहे हैं, पेन ड्राइव क्यों नहीं?
    इमरान खान- हर्षवर्धन को मंत्री बनाना मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है। अगर वे डॉक्टरी ही करते रहते तो यह ज्यादा नुकसानदायक था।
    शैलेंद्र गिरी- हर्षवर्धन जी, क्या हम अब दिल्ली में भोपाल जैसी त्रासदी घटने का इंतजार कर रहे हैं? (सत्याग्रह)

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Posted Date : 15-Nov-2017
  • आखिरकार आज फैसला हो ही गया कि रसगुल्ला मूल रूप से बंगाल की मिठाई है। हालांकि एक लंबे अरसे से बंगाल के साथ-साथ ओडिशा यह दावा करता रहा है। दोनों राज्यों के बीच का यह विवाद 2015 में चेन्नई स्थित बौद्धिक संपदा कार्यालय में पहुंचा था। संस्थान ने मंगलवार को इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल के हक में फैसला सुनाया है। इसके साथ ही अब रसगुल्ले के लिए पश्चिम बंगाल को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग मिलने का रास्ता साफ हो गया है। यह टैग प्रमाणित करता है कि सबंधित वस्तु मूल रूप से किस राज्य की है। इस खबर की शुरुआती सूचना पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक ट्वीट के जरिए दी थी, जहां उन्होंने लिखा है, हम सबके लिए मीठी खबर। हम बहुत खुश हैं और हमें बहुत गर्व हो रहा है कि बंगाल को रसगुल्ले के लिए जीआई टैग मिल गया है।
    ममता बनर्जी के इस ट्वीट के बाद कुछ ही देर में न्यूज चैनलों और वेबसाइटों पर यह खबर आ गई और इसके साथ सोशल मीडिया में रसगुल्लों की तस्वीरों के साथ इस पर चर्चा भी शुरू हो गई। एक मजेदार ट्वीट में इसे बंगालियों के लिए 1971 (बांग्लादेश मुक्ति संग्राम) के बाद सबसे बड़ी जीत बताया गया है। आज विश्व डायबिटीज दिवस भी है। इससे खबर को जोड़ते हुए ट्विटर हैंडल दयंगबिगमाउथ पर टिप्पणी है, पश्चिम बंगाल को विश्व डायबिटीज दिवस पर रसगुल्ले का जीआई टैग मिला है। यानी कि मिठास भी इस फैसले का बहिष्कार कर रही है।
    देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन था और इस बहाने उनके नाम से जुड़े कई टॉपिक्स पर सोशल मीडिया में बहस चल रही है। इसके साथ ही यहां लोगों ने बाल दिवस के शुभकामना संदेश भी पोस्ट किए हैं। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर तंज करते हुए कई टिप्पणियां आई हैं।
    सोशल मीडिया में इन घटनाक्रमों पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    शकुनि मामा- बंगाली तो घोषित हो गया, लेकिन रसगुल्ला कम्युनिस्ट है या राष्ट्रवादी, यह बाद में बताया जाएगा।
    अपोलिना डे-...रसगुल्ला कहां से आया है इससे क्या फर्क पड़ता है... इसे आखिरकार जाना तो मुंह में ही है।
    लता मंगेशकर- नमस्कार। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरूजी की आज जयंती है। मैं पंडितजी की याद को प्रणाम करती हूं।
    यूएन भद्रलोग बंगाली- अभी तक किसी उदारवादी ने नहीं कहा- किसान मर रहे हैं और हम यहां रसगुल्ले की उत्पत्ति के बारे में बहस कर रहे हैं।
    देबरति- ममता बनर्जी, 14 नवंबर को रसगुल्ला दिवस घोषित कर दीजिए प्लीज!
    हर्ष गोयनका- हम भाषा को लेकर लड़ते हैं, धर्म, गाय और जाति पर भी लड़ते हैं। बतौर राष्ट्र हमारे बीच में नदियों के पानी और बीफ से लेकर रसगुल्ले तक पर लड़ाई होती है... अब अगला मुद्दा क्या है?
    नरेंद्र मोदी- आप सभी को बाल दिवस की बधाई। बच्चों से मेरा खास नाता है। बचपन में मैं भी बच्चा था...
    पीएचडी इन बक*- कहते हैं, बच्चे भगवान का रूप होते हैं, शायद इसलिए कांग्रेसी राहुल गांधी को भगवान मानते हैं। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 14-Nov-2017
  • नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने जम्मू-कश्मीर स्थित वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आने वाले लोगों की संख्या सीमित कर दी है। अब रोजाना केवल 50 हजार लोग ही दर्शन कर सकेंगे। एनजीटी ने कहा है कि मंदिर का मौजूदा ढांचा 50 हजार से ज्यादा लोगों का भार नहीं उठा सकता और ज्यादा भीड़ से वहां नुकसान पहुंच सकता है। इस खबर पर सोशल मीडिया में कई लोगों ने एनजीटी को आड़े हाथों लिया है और इसे हिंदू धर्म के खिलाफ बताया है। ट्विटर हैंडल गप्पिस्थानरेडियो पर सवाल उठाया गया है, नवरात्रि के समय वैष्णो देवी (मंदिर) में क्या होता है? तब 50 हजार की सीमा लागू नहीं होगी। कटरा फट पड़ेगा अगर वहां तीर्थ यात्रियों को रोका गया। क्या एनजीटी में कोई व्यवहारिक व्यक्ति नहीं है? हालांकि इस फैसले का समर्थन करने वालों की भी यहां कमी नहीं है। मनोज कुमार का ट्वीट है, जो लोग कभी वैष्णो देवी के दर्शन करने नहीं गए, वे ही एनजीटी के निर्देशों का विरोध कर रहे हैं। वहां पैदल यात्रियों, खच्चर और बैटरी से चलने वाली कारों के चक्कर में भारी अफरा-तफरी मची रहती है।
    गुजरात के युवा नेता और पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति के प्रमुख हार्दिक पटेल का एक कथित सेक्स वीडियो भी आज सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसके बहाने भाजपा समर्थकों ने हार्दिक को कटघरे में खड़ा किया है। वहीं दूसरी तरफ एक बड़े तबके ने इस युवा नेता का बचाव इस तर्क के आधार पर किया है कि यह सहमति से सेक्स का मामला है और अगर वीडियो सही है तो इसमें हार्दिक की निजता का उल्लंघन हुआ है। वरिष्ठ टीवी पत्रकार अजित अंजुम ने फेसबुक पर लिखा है, चाहे हार्दिक पटेल हों या कोई और, मेरी राय हमेशा यही रहेगी जब तक सीडी वाली लड़की शिकायत न करे, तब तक यह निजी मामला है।
    सोशल मीडिया में इन दोनों खबरों पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    राजाराम एम- धार्मिक स्वतंत्रता के लिहाज से वैष्णो देवी में भक्तों की संख्या को सीमित करने का एनजीटी का फैसला असंवैधानिक है। लोगों को ऐसे गैरकानूनी फैसलों की अनदेखी करनी चाहिए!
    अभिषेक मिश्रा- मां वैष्णो देवी के बजाय यह दिल्ली पर ध्यान देने का वक्त है, लेकिन इस मामले में एनजीटी असफल हो गया है।
    चुस्की चाबू- चलो बुलावा आया है। एक दिन में वैष्णो देवी ने सिर्फ 50 हजार को बुलाया है।
    कंवल चड्ढा- भाजपा ने गुजरात में हार्दिक पटेल की एक सेक्स सीडी रिलीज की है। भारत की हवा के मुकाबले राजनीति ज्यादा प्रदूषित हो गई है।
    हार्दिक पंड्या- तो हार्दिक पटेल की सेक्स लाइफ है। लेकिन यह मुद्दा क्यों है और इसका हार्दिक के राजनीतिक करियर से क्या संबंध है? (सत्याग्रह)

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Posted Date : 14-Nov-2017
  • दुष्यंत कुमार
    सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की उपेक्षा करने का आरोप लगाया जा रहा है। एक वीडियो के आधार पर यह दावा किया गया है। बीती छह नवंबर का यह वीडियो तमिलनाडु के एक आईएएस अधिकारी की बेटी की शादी का है। कहा जा रहा है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 'राष्ट्रपति राम नाथ कोविंदÓ भी शरीक हुए थे। नीचे वीडियो के स्क्रीनशॉट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और 'राष्ट्रपति राम नाथ कोविंदÓ को देखा जा सकता है।
    सरकार और लोकतांत्रिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए खास प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। यह एक तरह का औपचारिक शिष्टाचार होता है। राष्ट्रपति जहां भी होते हैं, उन्हें प्रोटोकॉल के तहत सबसे पहले प्राथमिकता दी जाती है। अगर साथ में प्रधानमंत्री हों, तो भी प्रोटोकॉल के तहत पहले राष्ट्रपति को ही प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि वे देश के सर्वोच्च पदाधिकारी हैं। वहीं, वीडियो में नरेंद्र मोदी को ज्यादा प्राथमिकता मिलती दिख रही है।
    यह वीडियो छह नवंबर का है। इसकी असली कहानी बताने से पहले आपको राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की एक और तस्वीर दिखाते हैं। यह तस्वीर भी छह नवंबर की ही है, लेकिन तमिलनाडु की नहीं है, देखें।
    इस तस्वीर में राष्ट्रपति कोविंद के साथ रमन सिंह दिख रहे हैं। रमन सिंह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री नहीं हैं। वे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं। छह नवंबर को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद छत्तीसगढ़ के गिरौधपुरी में एक सामुदायिक भवन के भूमि पूजन में गए हुए थे। ऊपर जो तस्वीर आपने देखी वह उसी समय की है और राष्ट्रपति की आधिकारिक वेबसाइट से निकाली गई है। उनके फेसबुक पेज पर भी यही जानकारी दी गई है। यानी यह तो साफ है कि तमिलनाडु की शादी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जो व्यक्ति थे वे राष्ट्रपति कोविंद नहीं थे। 
    वे कौन थे, यह जानने के लिए न्यूज एजेंसी एएनआई का यह वीडियो देखा जाना चाहिए। वीडियो देखने से पहले पीएम मोदी के साथ दिख रहे व्यक्ति की वेश-भूषा याद रखने की जरूरत है, पहचान के लिए।
    इस वीडियो के शुरुआती एक-दो सेकंड में वही शख्स पीएम मोदी के पीछे दिखाई दे रहा है। यह व्यक्ति तमिलनाडु के गवर्नर बनवारी लाल हैं। छह नवंबर को प्रधानमंत्री के तमिलनाडु दौरे के दौरान वे उनके साथ ही रहे। प्रधानमंत्री के कई कार्यक्रम थे और गवर्नर बनवारी लाल उनके साथ हर जगह गए। इन सभी में उन्होंने वही कपड़े पहने हुए थे जो उन्होंने शादी वाले वीडियो में पहने हुए थे।
    ऊपर की इन दोनों तस्वीरों में राज्यपाल बनवारी लाल को प्रधानमंत्री मोदी के साथ देखा जा सकता है। यानी यह दावा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति की उपेक्षा की, झूठा है। (सत्याग्रह)

     

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Posted Date : 13-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 13 नवम्बर। दक्षिण भारतीय अभिनेता प्रकाश राज ने रविवार को किसी राजनीतिक दल से नहीं जुडऩे की बात कही है। उन्होंने अभिनेताओं के राजनीतिक पार्टियों से जुडऩे को भी गलत बताया है।
    प्रकाश राज ने ये बयान ऐसे समय पर दिया है जब कमल हासन ने राजनीति में उतरने की घोषणा कर दी है। कमल हासन ने हाल ही में कहा है कि वो राजनीति में आकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं ताकि जनता के बीच फैले भ्रष्टाचार और साम्प्रदायिकता को खत्म कर सकें।
    वहीं, तमिल सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता रजनीकांत के भी राजनीति में उतरने के आसार नजर आ रहे हैं। इस बारे में चेन्नई में आठ साल बाद अपने फैन्स के लिए आयोजित चार दिन के दरबार के आखिरी दिन उन्होनें कहा कि सही समय का इंतजार करें। इससे पहले भी उन्होंने इसी सम्मेलन में कहा था कि ईश्वर ने चाहा तो वो राजनीति में उतर सकते हैं।
    प्रकाश राज ने कहा है कि किसी अभिनेता का नेता बनना मेरे देश का दुर्भाग्य है। मैं किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ रहा हूं। मैं अभिनेताओं के राजनीति में आने को सही नहीं मानता क्योंकि वे अभिनेता हैं और उनके प्रशंसक हैं। उन्हें अपने प्रशंसकों के प्रति जिम्मेदारी का पता होना चाहिए।
    प्रकाश राज इससे पहले कमल हासन का समर्थन कर चुके हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि धर्म, संस्कृति और नैतिकता के नाम डर फैलाना आतंकवाद नहीं है तो फिर असल में ये है क्या?...सिर्फ पूछ रहा हूं।
    प्रकाश राज ने ट्वीट में आगे लिखा कि अगर नैतिकता के नाम पर मेरे देश की सड़कों पर जोड़ों को गाली देना और धमकाना आतंकित करना नहीं है... अगर कानून हाथ में लेना 
    और लोगों को गौहत्या के शक में मार डालना आतंकित करना नहीं है... अगर गालियों के साथ ट्रोल करना, धमकी देना आतंकित करना नहीं तो असल में क्या है?
    जाने-माने अभिनेता प्रकाश राज का ये ट्वीट ऐसे मौके पर आया है जब कमल हासन के एक लेख पर बहस चल रही थी। अपने लेख में कमल हासन ने लिखा था कि अब सत्यमेव जयते से लोगों का विश्वास उठ गया है। सत्य की ही जीत होती थी, लेकिन अब ताकत की ही जीत होती है ऐसा बन गया है। इससे लोग अमानवीय हो गए हैं।
    तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा के बीच संगम द्रविड़ आंदोलन के दौर का है। तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो अब तक तीन फिल्म स्टार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ चुके हैं।
    तमिल राजनीति में अब तक कई बड़े नाम सिनेमा और कला क्षेत्रों से आ चुके हैं। इनमें सीएन अन्नादुरई, एम.करुणानिधि, एमजीआर और जयललिता शामिल हैं। और बीते चार दशकों तक इन नामों ने तमिल राजनीति पर राज किया है। जयललिता से लेकर एमजीआर और करुणानिधि की राजनीतिक सफलता में सिनेमा का खासा योगदान रहा है।
    उधर सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रकाश राज के बयान पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। ट्विटर यूजर शांतनु नामदेव कहते हैं कि प्रकाश राज ने जो कहा है वह सही है। एक अभिनेता नेता क्यों बनना चाहता है। क्योंकि उसके फैंस हर जगह हैं। उनके प्रशंसक उनकी एक्टिंग की वजह से हैं ना कि उनकी राजनीतिक विचारधारा की वजह से।
    वहीं, ट्विटर यूजर नूर इफाह प्रकाश राज से सिनेमाई पर्दे पर राजनेताओं के रोल करते रहने की मांग कर रही हैं। नूर कहती हैं कि सर, आप प्लीज स्क्रीन पर राजनेताओं की शानदार एक्टिंग करते रहिए और कभी भी राजनीति जैसे गंदे पेशे को मत अपनाएं।
    ट्विटर यूजर प्रदीप सेठी कहते हैं कि अभिनेताओं का नेता बनना देश का दुर्भाग्य है ...क्या प्रकाश राज कमल हासन पर निशाना साध रहे हैं।
    ट्विटर यूजर प्रशांत मिश्र ने इस मुद्दे पर कमेंट करते गुए लिखा है कि प्रकाशराज अभिव्यक्ति की आजादी इस देश में इतनी है कि इस देश से कई बांग्लादेश और पाकिस्तान बन सकते हैं। (बीबीसी)

     

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Posted Date : 11-Nov-2017
  • वस्तु और सेवाकर (जीएसटी) काउंसिल ने उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को गुवाहाटी में आयोजित बैठक में 177 वस्तुओं को 28 फीसदी वाले जीएसटी स्लैब से बाहर कर दिया गया है। अब इन पर 18 फीसदी कर लगेगा। सोशल मीडिया पर दोपहर से इस बैठक के नतीजों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि एक बार जीएसटी से जुड़ी यह घोषणा होने के बाद यहां भाजपा और कांग्रेस समर्थक भिड़ते हुए दिखे। कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि जीएसटी काउंसिल ने पार्टी के दबाव में यह फैसला किया है। रचित सेठ का ट्वीट है, यह कांग्रेस की बड़ी जीत है...मोदी का अहंकार झुक गया है। इसके साथ ही यहां कई लोगों का कहना है कि यह फैसला गुजरात चुनाव के मद्देनजर लिया गया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले दिनों भाजपा पर हमला करते हुए जीएसटी को- गब्बर सिंह टैक्स नाम दिया था। आज इस बात का जिक्र करते हुए भी कुछ मजेदार टिप्पणियां आई हैं। पत्रकार पंकज पचौरी का ट्वीट है, जीएसटी काउंसिल की ताजा मीटिंग के बाद गब्बर सिंह टैक्स का नाम बदलकर रब्बर सिंह टैक्स कर देना चाहिए। यह लचीला है।
    आज मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती है और कर्नाटक में पिछले दो-तीन साल की तरह एक बार फिर इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 18वीं सदी के इस शासक को कन्नड़ अस्मिता का प्रतीक मानती है और इस मौके पर सरकारी कार्यक्रम आयोजित करती है। वहीं भाजपा यह कहकर इस कार्यक्रम का विरोध करती रही है कि टीपू सुल्तान एक अत्याचारी शासक था जिसने जबर्दस्ती लाखों हिंदुओं का धर्मांतरण करवाया था। कर्नाटक में भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों के सदस्यों ने आज कई जगह विरोध प्रदर्शन किए हैं और इस दौरान इनकी गिरफ्तारी भी हुई है। सोशल मीडिया पर इन खबरों की चर्चा तो है ही साथ ही यहां टीपू जयंती लगातार ट्रेंड कर रहा है।
    भाजपा और कांग्रेस समर्थकों के बीच जारी बहस के साथ सोशल मीडिया में इस मुद्दे पर कुछ सुलझी हुई टिप्पणियां भी आई हैं। प्रसिद्ध इतिहासकार इरफान हबीब का ट्वीट है, यह दुख की बात है कि राजनीति ने टीपू सुल्तान को एक विभाजनकारी ऐतिहासिक किरदार बना दिया। अट्ठारहवीं शताब्दी के कई शासकों की तरह वे भी लोकतांत्रिक नहीं थे और दमन करने में शामिल रहे लेकिन वे सांप्रदायिक-कट्टरपंथी नहीं थे, जैसा कि उन्हें बताया जा रहा है... ऐतिहासिक किरदारों से जुड़े आयोजन भी राजनीति से प्रेरित हैं। इस बहस के बहाने मुकेश विज ने राजनेताओं पर तंज किया है, टीपू सुल्तान उतना बड़ा तानाशाह कभी नहीं हो सकता जितने हमारे आज के नेता हैं!
    इन दोनों घटनाक्रमों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    सुभाष एन सुभाष- इसका (जीएसटी काउंसिल के ताजा फैसले का) मतलब है कि जीएसटी में खामियां भरी हैं। जीएसटी काउंसिल के पास वस्तुओं की कीमतें बढ़ाने का अधिकार है। इस बात की कोई निश्चितता नहीं है कि गुजरात इलेक्शन के बाद कीमतें फिर नहीं बढ़ाई जाएंगी।
    उजागीर यादव- चार महीने में 40 बदलाव। मतलब बिना सोचे-समझे जीएसटी लागू किया गया था...यह वही नोटबंदी वाला किस्सा है।
    अनूप चठोथ- कर्नाटक में कांग्रेस सरकार जिस चमक-दमक के साथ टीपू सुल्तान का जन्मदिन मना रही है, खुद टीपू सुल्तान ने कभी अपना जन्मदिन इस तरह नहीं मनाया होगा। हालांकि टीपू को चुनाव और तुष्टिकरण की चिंता भी तो नहीं करनी थी।
    रोफल क्रिटिक- भाजपा को प्रदूषण की नहीं, पद्मावती और टीपू सुल्तान की चिंता है।
    अब्दुल कादिर जाफरी- अगर टीपू सुल्तान देशभक्त नहीं थे तो निश्चित रूप से झांसी की रानी समेत अंग्रेजों से लड़ते हुए मारे गए तमाम राजे-रजवाड़े देशभक्त नहीं थे... असल में ये लोग सिर्फ अपना राजपाट बचाने के लिए लड़ रहे थे। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 11-Nov-2017
  • कुलदीप मिश्र

    अहमदाबाद, 11 नवम्बर । सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिये राजनीतिक लामबंदी अब तक कांग्रेस की विशिष्टता नहीं थी। यह जनमत को प्रभावित करने वाला वह उर्वर मैदान था, जिस पर पहला हल भाजपा ने 2014 के आम चुनावों से पहले चलाया था और लंबे समय तक ऐसा लगता रहा कि कांग्रेस उस कौशल को साध ही नहीं पाई है, लेकिन इस बार के गुजरात विधानसभा चुनावों में हालात ऐसे नहीं हैं।
    इस चुनाव में कांग्रेस का नारा- विकास गांडो थयो छे यानी विकास पागल हो गया है, दिल्ली तक चर्चित हो गया है। भाजपा ने हूं छूं विकास, हूं छूं गुजरात नारे के साथ अपने पछाड़ खाते कैंपेन को स्थिर किया है और अब मुकाबला कर रही है।
    गुजरात का इंटरनेट युद्ध इस बार दिलचस्प है, जहां दोनों तरफ तेज-तर्रार नौजवानों की फौजें एक-दूसरे के प्रचार की हवा निकालने में लगी हुई हैं।
    अहमदाबाद के सत्यम मॉल की तीसरी मंजिल पर गुजरात कांग्रेस आईटी सेल का दफ्तर है। आईटी सेल के प्रमुख रोहन गुप्ता हैं। प्रदेश में आईटी सेल के आठ उपाध्यक्ष हैं। इन्हीं में से एक हैं हीरेन बैंकर।
    कांग्रेस के आईटी दफ्तर में करीब 10-12 नौजवान काम कर रहे हैं, जिनसे बात करने की इजाजत हमें नहीं मिली। हीरेन अभी एक वीडियो देख रहे हैं, जिसमें दो लोग गुजरात की अस्मिता पर तर्क-वितर्क कर रहे हैं और फिर एक तीसरा व्यक्ति उन्हें अपनी दलीलों से यह समझाने की कोशिश करता है कि गुजरात की अस्मिता गुजरातियों से है, भाजपा से नहीं और लोगों ने विकास किया है, किसी सरकार ने नहीं।
    हीरेन बैंकर इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियर हैं और अभी गुजरात यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई भी कर रहे हैं। वह चार साल से कांग्रेस आईटी टीम से जुड़े हैं।
    हीरेन बताते हैं कि अहमदाबाद में 20-25 पेशेवर लोग कांग्रेस आईटी सेल के लिए काम करते हैं। इसके अलावा हर जिले में करीब 250 पदाधिकारी बनाए गए हैं। उनका दावा है कि पूरे गुजरात में करीब बीस हजार वॉलंटियर उनके लिए काम कर रहे हैं। वह बताते हैं कि करीब हजार लोग ट्विटर पर सक्रिय हैं जो किसी ट्रेंड की शुरुआत करते हैं। उसे हमारे वॉलंटियर्स फॉलो करते हैं।
    हीरेन बताते हैं कि विकास गांडो थयो छे के बाद उनकी टीम ने ऐसे ही दो और कटाक्षपूर्ण अभियान चलाए। एक, मारा हाड़ा छेतरी गया, यानी मेरा साला मुझे मूर्ख बना गया। (बाकी पेजï 5 पर)
    दूसरा, जो जो छेतराता नहीं यानी कहीं कोई आपको ठग न ले।
    स्मार्ट फोन क्रांति के बाद चुनाव प्रचार में नारों की भूमिका अब असंदिग्ध रूप से महत्वपूर्ण हो गई है। गुजरात में कांग्रेस ने पहले कांग्रेस आवे छे, नवसर्जन लावे छे अभियान चलाया और अब खुश रहे गुजरात अभियान चला रही है।
    हीरेन का दावा है कि उनकी पार्टी ने गुजरात भर में करीब 40 हजार व्हॉट्सएप ग्रुप बनाए हैं। कई ग्रुप पेशे के हिसाब से बंटे हुए हैं। वह बताते हैं, यापारियों के ग्रुप में हम जीएसटी के नुकसान से जुड़ी बातें भेजते हैं। छात्रों तक बेरोजगारी की समस्या पहुंचाने की कोशिश रहती है।
    हीरेन कुछ उदाहरणों से बताते हैं कि वह भाजपा के सोशल मीडिया प्रचार को कैसे काउंटर करते हैं। वह बताते हैं, भाजपा ने धन्यवाद नरेंद्रभाई कैंपेन चलाया था, जिसके जवाब में कांग्रेस ने धन्यवाद मोटाभाई कैंपेन चलाया। हम लोगों ने लिखना शुरू किया कि पेट्रोल 80 रुपये पहुंच गया, धन्यवाद मोटाभाई। इतने लोग बेरोजगार हो गए, धन्यवाद मोटाभाई।
    हीरेन का कहना है कि भाजपा ने गरजे गुजरात नाम से एक कैंपेन शुरू किया, जिसके जवाब कांग्रेस ने जो गरजते हैं, वे बरसते नहीं से दिया। हीरेन कहते हैं, इसके बाद उन्होंने न सिर्फ अपना कैंपेन वापस ले लिया बल्कि उसे अपना मानने से भी इंकार कर दिया।
    हीरेन बताते हैं कि इसी तरह भाजपा के कैंपेन अडिख़म गुजरात का भी हमने काउंटर किया। वह बताते हैं, हमने लिखा कि जब वो आपके पास आए पूछने के लिए तो आप अपने सवाल पर अडिख़म रहना। वे कोई और बात करेंगे तो आप 30 लाख बेरोजगार की बात पर अडिख़म रहना। वो किसी योजना की बात करें तो आप सरकारी अस्पताल की बात पर अडिख़म रहना।
    कुछ अधिक कोशिशों के बाद भाजपा के प्रदेश आईटी और सोशल मीडिया संयोजक पंकज शुक्ला से एक सड़क पर ही मुलाकात हुई। उन्होंने दफ्तर दिखाने और उसकी तस्वीरें भेजने से भी इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि दो दिन बाद उनके राष्ट्रीय आईटी प्रमुख अमित मालवीय आ रहे हैं, तभी मीडिया हमारे आईटी सेल की तस्वीरें ले सकेगा।
    पंकज शुक्ला का परिवार दो पीढ़ी पहले उत्तर प्रदेश के फैजाबाद से आकर यहां बस गया था। पंकज संख्या के स्तर पर बहुत साफगोई से बात नहीं करते, लेकिन कहते हैं कि भाजपा कैडर आधारित पार्टी है और पूरे गुजरात में सोशल मीडिया पर भी उनका कैडर सक्रिय है। उनका कहना है कि 15-20 लोगों की टीम कंटेंट बनाती है, जिसे उनके कार्यकर्ता जिले, जोन, मंडल और विधानसभाओं और पोलिंग बूथ तक के स्तर तक बने व्हॉट्सऐप ग्रुपों तक पहुंचाते हैं।
    वह कहते हैं, बूथ बूथ तक, हर व्यक्ति के मोबाइल पर भाजपा का साहित्य और हमारी सरकार की उपलब्धियां याद दिलाने का काम हो रहा है। पंकज का कहना है कि विकास गांडो थयो छे अब पुरानी बात हो चुकी है।
    उन्होंने कहा, यह सवाल दो महीने पहले आप मुझसे पूछते तो कुछ प्रतिशत वैध होता। लेकिन अब सोशल मीडिया पर हम बहुत अच्छी स्थिति में हैं और हावी हो गए हैं। आप किसी तीसरे आदमी से भी पूछ लीजिए।
    गरजे गुजरात वाले नारे पर पंकज कहते हैं कि यह कैंपेन कभी भाजपा का था ही नहीं। वह कहते हैं, झूठ बोलना और जोर से बोलना कांग्रेस की परंपरा रही है। हमारा ऐसा कोई कैंपेन था ही नहीं। टाउनहॉल के कार्यक्रम हमने अडिख़म गुजरात के नारे के साथ किए और वे बहुत अच्छी तरह चले। अब हमारा अभियान हूं छूं विकास, हूं छूं गुजरात है और हर व्यक्ति इससे खुद को जोड़कर देखता है।
    पंकज स्वीकार नहीं करते कि डेढ़ दो महीने पहले भी कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कोई बढ़त बनाई थी। वह कहते हैं, प्रयास किया था कांग्रेस ने। प्रिंट मीडिया और इधर उधर थोड़ा छपवाकर हवा बनाने का प्रयास किया था। लेकिन ऐसी कोई हवा नहीं बनी थी। और वह डेढ़-दो महीने पहले की बात है।
    भाजपा के पंकज और कांग्रेस के हीरेन दोनों मानते हैं कि बीते चुनावों में फेसबुक की भूमिका सबसे अहम होती थी, लेकिन अब घर घर में व्हॉट्सऐप पहुंच गया है और उसकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। हालांकि दोनों ही पार्टी के आईटी प्रमुखों ने सोशल मीडिया कैंपेनिंग का बजट पूछने पर गोल-मोल जवाब दिए।
    संदीप पंड्या भी गुजरात कांग्रेस के आईटी उपाध्यक्षों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि उनके नेता अब खुद लग गए हैं और इससे कार्यकर्ताओं में उत्साह है।
    वह बताते हैं, सूरत में एक सभा थी उनकी, 75 हजार लोग थे। वहां राहुल गांधी को जय सरदार जय पाटीदार बोलना था। लेकिन उसके साथ वह एक कदम आगे बढ़कर जय भवानी, भाजपा जवा नी (जय भवानी, भाजपा जाएगी) भी बोल गए। इतनी मजबूत टीम है उनकी। इससे हम लोगों का उत्साह भी बढ़ा रहता है।
    जाते जाते संदीप पंड्या ने एक और बात कही। बोले कि चुनाव नतीजे चाहे जो हों, गुजरात कांग्रेस में ऐसा आत्मविश्वास पहले कभी नहीं था और गुजरात भाजपा में ऐसी असुरक्षा कभी नहीं थी।(बीबीसी)

     

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Posted Date : 10-Nov-2017
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति और बिगड़ती जा रही है और सोशल मीडिया पर आम लोगों से लेकर बड़ी-बड़ी हस्तियां तक इसको लेकर जारी चर्चा में शामिल हैं। राजधानी में धुंध के अलावा हवा में तैरने वाले सूक्ष्म कणों - पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) की मात्रा तय सीमा से कई गुना ज्यादा बढ़ गई है। गुरुवार को हवा में पीएम-10 की मात्रा 1136, जबकि पीएम 2.5 की मात्रा 760 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गई। इसे देखते हुए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने कई निर्देश जारी किए हैं और इस खबर को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया है।

    दीपावली के आसपास पंजाब और हरियाणा के किसान अपने खेतों में फसलों के बचे अवशेष में आग लगाते हैं और दिल्ली की हवा प्रदूषित होने के लिए इसको भी जिम्मेदार माना जाता है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस समस्या से निपटने के लिए दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने की पहल की थी लेकिन इस पर इनके बीच कोई सहमति नहीं बन पाई। सोशल मीडिया में इसकी भी चर्चा है। पत्रकार शिवम विज ने ट्विटर पर कहा है कि मोदी, केजरीवाल, खट्टर और अमरिंदर सिंह, ये सभी प्रदूषण को लेकर अपनी-अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़े हुए हैं....और जब अदालत कुछ करती है तो हम न्यायिक सक्रियता पर आपत्ति जताने लगते हैं।
    हालांकि इस बीच यहां सबसे ज्यादा चर्चा ऑड-ईवन की है। वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन योजना को दोबारा लागू करने का फैसला किया है। दिल्ली की सड़कों पर वाहनों की संख्या नियंत्रित करने के लिए यह योजना 13 से 17 नवंबर तक लागू रहेगी। आम लोगों ने जहां इसका स्वागत किया है वहीं सोशल मीडिया में इसको लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का ट्वीट है, प्रदूषण से निपटने के लिए ऑड-ईवन योजना को फिर से लागू करना भारत में प्रचलित प्रतीकवाद का उदाहरण है। मरीज यहां कैंसर से मर रहा हैं और उसे बैंडेड लगाई जा रही है! कुछ लोगों ने इस योजना को देर से लागू करने पर भी सवाल उठाए हैं। ट्विटर हैंडल वनटिपवनहैंड पर तंजभरी टिप्पणी है, अरविंद केजरीवाल सही मायने में इंजीनियर हैं। सिर्फ इंजीनियर ही पूरे सेमेस्टर भर सोता है और परीक्षा के सिर्फ एक दिन पहले पढ़ाई शुरू करता है।
    सोशल मीडिया में इस मुद्दे पर आईं कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    शकुनि मामा- दिल्ली में वायु प्रदूषण खत्म होना मुश्किल है क्योंकि केजरीवाल सोचते हैं - ऑड डे पर कारें प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं और ईवन डे पर किसान!
    जगदीश ओझा- दिल्ली के मुख्यमंत्री सबको साथ लेकर चलते है। अरविंद केजरीवाल पहले अकेले खांसा करते थे, लेकिन अब पूरी दिल्ली उनके साथ खांस रही है।
    मनोज कुमार- पक्केतौर पर नहीं कहा जा सकता कि वायु प्रदूषण नियंत्रित करने में ऑड-ईवन का कोई असर पड़ेगा। लेकिन इससे हवा को साफ-स्वच्छ रखने के प्रति हमारी जिम्मेदारी का एहसास और योगदान जरूर बढ़ जाता है।
    कुमार कुणाल- मनोज तिवारी मास्क बांट रहे हैं, अरविंद केजरीवाल ऑड-ईवन लागू कर रहे हैं। ये सब मौसमी मेंढक हैं। सिर्फ मौसम में टर्राते हैं। मौसम खत्म होते ही शीत निद्रा में चले जाएंगे, फिर इन्हें अगले मौसम का ही इंतजार रहेगा।
    ब्लू लेमन- प्यारे दिल्ली वालो, कृपया ध्यान दें। सांस लेने के लिए ऑड डे पर बाएं फेंफड़े का इस्तेमाल करें और ईवन डे पर दाएं फेंफड़े का...- अरविंद केजरीवाल। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 09-Nov-2017
  • बीते कई दिनों से ऐसा लग रहा था कि सोशल मीडिया यूजर आज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। आज नोटबंदी की वर्षगांठ है और सुबह से ही इस मुद्दे पर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जैसा कि पहले से घोषित था, कांग्रेस इसे काला दिन के तौर पर मना रही है और भाजपा काला धन विरोधी दिवस के रूप में। सोशल मीडिया पर इन दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच नोटबंदी के फायदे-नुकसान को लेकर तीखी बहसबाजी हो रही है। इस बहस में आम लोगों ने भी हिस्सेदारी की है और नोटबंदी की आलोचना में यहां एक से बढ़कर एक मजेदार टिप्पणियां आई हैं। ट्विटर हैंडल सरलसंपत पर चुटकी है, जो लोग आज नोटबन्दी के फायदे बता रहे हैं, उनके लिए नोटबन्दी उस बवासीर रोग की तरह था जिससे पीड़ा तो होती थी पर दिखा नहीं सकते थे।
    दिल्ली सहित उत्तर भारत में फैले स्मॉग पर सोशल मीडिया में लगातार चिंता जताई जा रही है और आज इसे नोटबंदी से जोड़ते हुए लोगों ने टिप्पणियां की हैं। सायंतन घोष का तंज है, मित्रों, यह स्मॉग नहीं है बल्कि उस काले धन का अवशेष है जिसे पिछले साल इक_ा किया गया था और जिसमें आग लगाई गई थी।। सो इसे खींचिए और आनंद लीजिए। पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया है, काला दिन और काला धन विरोधी दिवस भूल जाइए। सभी नेता एकजुट हों और राष्ट्रीय राजधानी में वायु आपातकाल घोषित करें... मुझे सांस लेने का अपना अधिकार वापस चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने ट्वीट के जरिए एक दिलचस्प मांग की है, नोटबंदी की वर्षगांठ पर मैं पूरी ईमानदारी यह चाहता हूं- 1000 का नोट वापस ले आइए। अगर हमारे पास 2000, 500 और 200 रुपये के नोट हैं तो फिर इसमें क्या दिक्कत है...
    नोटबंदी पर केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का एक बयान भी सोशल मीडिया में चर्चा में है। उन्होंने नोटबंदी के फायदे गिनाते हुए कहा है कि इससे देह व्यापार में कमी आई है। फेसबुक और ट्विटर पर इस बयान को शेयर करते हुए लोगों ने कानून मंत्री और भाजपा को घेरा है। फेसबुक पर दिलीप खान ने लिखा है, रविशंकर प्रसाद ने नोटबंदी से देह व्यापार में कमी आई है वाला बयान देकर बढ़त बना ली है। अब संबित पात्रा कहीं नोटबंदी को ग्लोबल वॉर्मिंग कम करने वाला कदम न बता दें।
    नोटबंदी की वर्षगांठ और रविशंकर प्रसाद के बयान पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    डॉ आनंद राय- अगर नोटबन्दी से लोग खुश होते तो जश्न सरकार नहीं, लोग मना रहे होते! समझे मित्रों?
    अमित तिवारी- नोटबंदी से हमें क्या सीख मिलती है?
    यही कि आंख में मोतियाबिंद हो तो किडनी ट्रांसप्लांट करवा लेना चाहिए!
    मिहिर रे- अमरीकी लोग 9/11 याद रखते हैं, भारतीय 8/11 याद रखेंगे।
    हेमंत- रविशंकर प्रसाद के देह व्यापार वाले बयान पर राहुल गांधी सरकार भी मान रही है कि कारोबार में कमी आई है।
    अरविंद गुणशेखर- कानून मंत्री के मुताबिक नोटबंदी के कारण देहव्यापार में कमी आई है! इस सरकार का एक और लक्ष्य, एक और उपलब्धि। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 08-Nov-2017
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) दिल्ली में वायु गुणवत्ता का स्तर सबसे निचले दर्जे पर पहुंचने के बाद भारतीय चिकित्सा संस्थान (आईएमए) ने इस स्थिति को जनस्वास्थ्य के लिए आपातकाल घोषित कर दिया है। इसे देखते हुए दिल्ली सरकार द्वारा स्कूलों की प्रायमरी तक की कक्षाएं बुधवार को बंद करने का निर्देश जारी किया गया है। वहीं राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने भी इसे इमर्जेंसी जैसी हालत बताई है और उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वे वायु प्रदूषण को रोकने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दें। इन हालात की सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा है और चिंता जताते हुए यहां कई प्रतिक्रियाएं आई हैं। माणक गुप्ता का ट्वीट है, मेरे ईएनटी स्पेशलिस्ट ने कहा है- अगर स्मॉग ऐसे ही जारी रहा तो हम कुछ वर्षों में सिलिकोसिस से मर जाएंगे। यह युद्ध जैसी स्थिति है। कुछ कीजिए या मरने को तैयार रहिए।
    वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट करके सवाल उठाया है, क्या कोई भी सरकार, केंद्र या राज्य (सरकार) वायु की गुणवत्ता को प्राथमिकता बनाएगी? आम आदमी पार्टी ने कोशिश की थी लेकिन वह असफल हो गई; क्या अब कोई और इस चुनौती का मुकाबला करेगा? इस खबर के बहाने यहां राजनीतिक छींटाकसी भी चल रही है। फेसबुक पर श्रीधर वेंकटरमण की चुटकी है, केंद्र सरकार के लिए दिल्ली का स्मॉग फायदेमंद है। अब कम से कम उसके पास यह बहाना तो है कि देश में जो चल रहा है वह उसे दिखाई नहीं पड़ रहा।
    नोटबंदी को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की लगातार आलोचना कर रहे हैं। सोमवार को उन्होंने नोटबंदी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की बहुत बड़ी भूल बताया था। अब खबर है कि उन्होंने आठ नवंबर, 2016 को भारतीय लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था का काला दिन बताया है। पूर्व प्रधानमंत्री ने ये बातें अहमदाबाद के व्यापारियों के साथ एक संवाद के दौरान कहीं और इस खबर के चलते फेसबुक और ट्विटर पर मनमोहन सिंह लगातार ट्रेंड कर रहे हैं। इस बयान के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री ने भाजपा को कटघरे में खड़ा करते हुए और भी बातें कही हैं जिन्हें सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया है। दूसरी तरफ यहां भाजपा समर्थकों ने उन पर खूब निशाना भी साधा है। ट्विटर हैंडल संदीप घोष पर प्रतिक्रिया है, बतौर अर्थशास्त्री नोटबंदी और जीएसटी पर हमला मनमोहन सिंह का हक है। लेकिन बतौर पूर्व प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार पर उनकी चुप्पी बहरा कर देने वाली है।
    दिल्ली में वायु प्रदूषण की बिगड़ी स्थिति और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयानों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    सागर- दिल्ली में मिस्टर इंडिया को अपनी घड़ी की जरूरत नहीं है। यहां वैसे भी कोई कुछ नहीं देख पा रहा है।
    समीर अब्बास- 1960 के दशक और 2017 के दिल्ली का खतरनाक अंतर देखिए...हमने इन 67 वर्षों में अपने महान शहर की क्या हालत कर दी है।
    इनजीनियस- एक दिल्ली वाला- तू जानता है, मेरा बाप कौन है?
    दूसरा दिल्ली वाला- पहले ये बता तू कौन है... कुछ दिख नहीं रहा!
    गब्बर- उम्मीद की जाए कि इस स्मॉग से कम से कम दिल्ली के डेंगू मच्छर तो मारे ही जाएं।
    गप्पिस्तान रेडियो- दिल्ली में स्मॉग है... फिर लोग पूछते हैं कि पीएम मोदी हिमाचल प्रदेश में प्रचार के लिए इतना वक्त क्यों बिता रहे हैं।
    समर अनार्य- मनमोहन सिंह- नोटबंदी विचारहीन कदम, संगठित लूट।
    मोदी जी सीखिए कि सभ्य, संसदीय भाषा में किसी को डाकू और उसकी सरकार को सूट बूट वाली लुटेरी सरकार कैसे कहा जाता है!
    अशोक पाई- इस बात में कोई दोराय नहीं कि मनमोहन सिंह महान प्रधानमंत्री थे। लेकिन उनके कार्यकाल में खुद उनकी पार्टी के सदस्यों, यहां तक कि सोनिया गांधी ने भी उनके लिए कभी सम्मान नहीं दिखाया...अब उनके लिए अचानक इतना प्यार और सम्मान क्यों उमड़ रहा है। क्या इसलिए कि कांग्रेस में उनके कद का कोई नेता नहीं है? ...आप सब अवसरवादी हैं और यह पार्टी मनमोहन सिंह की विरासत रखने की हकदार नहीं है। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 07-Nov-2017
  • नोटबंदी की वर्षगांठ के मौके पर सरकार कालाधन-विरोधी दिवस मनाने की तैयारी रही है। लेकिन इससे दो दिन पहले ही पनामा पेपर्स की तरह पैराडाइज पेपर्स नाम से लीक हुए 1.34 करोड़ वित्तीय दस्तावेज उसके लिए मुश्किल का सबब बन सकते हैं। इसमें कई उद्योगपतियों, बड़ी हस्तियों और दूसरी पार्टियों के साथ भाजपा नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं। तमाम न्यूज चैनलों और वेबसाइटों ने इस खबर को काफी तवज्जो दी है और सोशल मीडिया में भी इसकी खूब चर्चा है। ट्विटर पर पैराडाइजपेपर्स कल रात से ही ट्रेंड कर रहा है।
    इन दस्तावेजों में नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा और भाजपा सांसद आरके सिन्हा का नाम है और इन दोनों को लेकर सोशल मीडिया में कई प्रतिक्रियाएं आई हैं। दिलीप मंडल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए फेसबुक पर लिखा है, पापा यशवंत सिन्हा ने बेटा जयंत सिन्हा की नौकरी खाने का इंतजाम कर लिया है। केंद्र में इस समय अपराधी-ब्लैकमेलरों की सरकार है। फाइल सबकी बनी हुई है। इस बार जयंत सिन्हा की फाइल खोल दी गई है, इन दोनों नेताओं का बिहार-झारखंड से ताल्लुक है और इस पर अमितेश कुमार की टिप्पणी है, बिहारी भाई लोग आप पूरे भारत के साथ कंधे से कंधा मिल कर चल रहे हैं, बधाई हो... गुलजार हुसैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है, ... इसे कहते हैं - न खाऊंगा, न खाने दूंगा।
    इस मामले से जुड़ी एक और दिलचस्प खबर भी यहां चर्चा में है। दरअसल जब पत्रकारों ने आरके सिन्हा से इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी तो उन्होंने कागज पर लिखकर बताया कि इस समय उनका मौनव्रत चल रहा है। इस पर मोहम्मद सिबतैन ने तंज किया है, न खाऊंगा, न खाने दूंगा की अपार सफलता के बाद न बोलूंगा, न बोलने दूंगा! पैराडाइज पेपर्स में अमिताभ बच्चन का नाम भी आया है और सोशल मीडिया पर इसका जिक्र करते हुए उनके खिलाफ कई टिप्पणियां की गई हैं। सोहम वागले का ट्वीट है, अमिताभ बच्चन का नाम पनामा पेपर में था और अब पैराडाइज पेपर में भी है। क्या यह मजाक नहीं है कि वे जीएसटी के विज्ञापनों में आते हैं और लोगों को टैक्स देने के लिए कहते हैं।
    इस खबर पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    सागर- पनामा पेपर हों या पैराडाइज पेपर, कोई इनको तवज्जो नहीं देता। भारतीय लोग सिर्फ आईआईटी एंट्रेंस के पेपर को सीरियसली लेते हैं।
    हिस्टरी ऑफ इंडिया- पनामा पेपर और पैराडाइज पेपर, दोनों में शामिल होने वाला पहला भारतीय बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमिताभ बच्चन को जीएसटी का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त करते हुए (2017)।
    सुयश सुप्रभ- पैराडाइज पेपर में जिन भारतीयों का नाम आएगा, उन्हें मोदी बोल्ड इंडिया का ब्रांड एंबेसडर बना देंगे। जनता मिमियाती रह जाएगी।
    अनन्या सैकिया- भाजपा के मंत्री जयंत सिन्हा और सांसद आरके सिन्हा का नाम पैराडाइज पेपर्स में है और सरकार आठ नवंबर को काला धन विरोधी दिवस मनाएगी... यह तो बिलकुल जायज नहीं है।
    सतीश जायसवाल- आरके सिन्हा ने करारा जवाब दिया है...ऐसे लोग ही देश चला रहे हैं। अब तो सीबीआई भी सात दिन तक इनका मुंह नहीं खुलवा सकती। (सत्याग्रह)

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Posted Date : 07-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 7 नवम्बर । पिछले कुछ समय में हॉलीवुड समेत बॉलीवुड की कई एक्ट्रेस अपने साथ हुए सेक्सुअल हैरासमेंट की घटनाओं का खुलासा कर चुकी हैं और अब इस कड़ी में नया नाम आया है एक्ट्रेस स्वरा भास्कर का, जिन्होंने अपने साथ भी हुई एक ऐसी ही घटना का खुलासा किया है। एक इंटरव्यू में स्वरा भास्कर ने इस मामले पर अपनी राय रखते हुए बताया, जिस तरह एक फिल्म का सेट चलता है, वह बहुत रूढि़वादी होता है, जहां कुछ लोग आदेश देते हैं और बाकी उसका पालन करते हैं। ऐसी जगह सेक्सुअल हैरासमेंट के लिए बेहद अनुकूल होती हैं क्योंकि यहां पीडि़त को आसानी से चुप कराया जा सकता है।
    स्वरा भास्कर ने अपने इस इंटरव्यू में खुलासा किया है कि कैसे उनसे भी एक फिल्म में रोल दिए जाने के बदले सेक्सुअल फेवर मांगे गए थे और ऐसा करने से मना करने पर उन्हें कुछ फिल्मों से निकाला गया। स्वरा भास्कर ने फिल्म सेट्स पर सुरक्षा की कमी पर भी बात की।
     स्वरा भास्कर ने अपने साथ हुई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा, हम 56 दिन के लिए एक दूर-दराज के इलाके में शूटिंग कर रहे थे और मैं इंडस्ट्री में अभी काफी नई थी। इस फिल्म के डायरेक्टर ने मुझे मैसेज कर और डिनर के लिए इनवाइट कर के परेशान कर दिया था। वह पूरे दिन मेरा पीछा करता था और रातभर मुझे फोन करता था। मुझे एक सीन पर चर्चा करने के लिए होटल में डायरेक्टर के कमरे में जाने को कहा गया और वहां जाकर मैंने उसे शराब पीते हुए देखा। पहले ही हफ्ते में वह प्यार और सेक्स की बातें करने लगा और एक रात वह शराब पीकर मेरे कमरे में आया (बाकी पेजï 5 पर)

    और मुझे गले लगाने को कहने लगा। यह डरावना था...
    स्वरा ने बताया, मैं बहुत छोटी और अकेली थी। मैं पैकअप के बाद लाइट बंद कर के अपना मेकअप हटाती थी, ताकि वह समझे कि मैं सो गई हूं। स्वरा ने कहा कि उस डायरेक्टर को उन्होंने यह भी बताया कि उनके इस तरह के व्यवहार से वह कितना परेशान हो रही हैं लेकिन इसके बाद भी वह नहीं माना। स्वरा ने कहा, आखिरकार मैंने एक्सक्यूटिव प्रोड्यूसर को कहा कि मेरे साथ हर वक्त कोई न कोई होना चाहिए। स्वरा ने कहा कि इस तरह के शोषण से बचने का एक ही तरीका है, भले ही रोल आपके हाथ से चले जाए लेकिन आप उनकी शर्तों के आगे झुकें न। (मुंबई मिरर)

     

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Posted Date : 07-Nov-2017
  • नई दिल्ली, 7 नवम्बर । सोशल मीडिया पर कोई शादी की फोटो पोस्ट करता है तो उसे बधाईयां मिलती हैं। लेकिन, क्या हो अगर फोटो पोस्ट करने के बाद लोग बधाईयों की जगह तंज कसने लगे तो, ऐसा ही हुआ बांग्लादेश के क्रिकेटर के साथ। बांग्लादेश के उभरते हुए खिलाड़ी और शानदार गेंदबाज तस्कीन अहमद ने 22 साल की उम्र में शादी कर ली। तस्कीन की फैन फोलॉअर्स ज्यादा है। वो खास कर लड़कियों में ज्यादा फेमस हैं। उनकी क्यूटनेस के लिए लड़कियां कई बार उन्हें प्रपोज भी चुकी हैं। लेकिन जैसे ही तस्कीन ने शादी की तो लोगों ने अपना गुस्सा निकाल दिया। 

    किसी ने दुल्हन के लुक पर तंज कसा तो किसी ने पिशाच बोल दिया।
    साउथ अफ्रीका दौरा खत्म करने के बाद जैसे ही तस्कीन बांग्लादेश लौटे तो उन्होंने साबिया नाइमा से निकाह कर लिया। उनका काफी समय से अफैयर चल रहा था। जैसे ही अचानक तस्कीन ने यह खबर फैन्स को सुनाई तो लोगों में गुस्सा उतर आया। किसी ने तस्कीन को क्रिकेट पर फोकस करने के लिए कहा तो किसी ने उनकी पत्नी को लेकर नाखुशी जाहिर की। 
    बधाईयों से ज्यादा ऐसे कमेंट्स देखने के बाद तस्कीन भी इस बात से नाराज हैं। बांग्लादेश में तस्कीन को काफी पसंद किया जाता है, क्योंकि कम उम्र में ही उन्होंने टीम को जीत दिलाई है। बाइस साल की उम्र में शादी करने के फैसले को फैन्स ने गलत माना और कमेंट करना शुरू कर दिया। (एनडीटीवी)

     

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Posted Date : 06-Nov-2017
  • टेक्सस, 6 नवम्बर । अमरीका के टेक्सस प्रांत के एक छोटे कस्बे में एक बंदूकधारी ने रविवार को चर्च में हो रही प्रार्थना सभा पर गोलियां चलाई हैं। पुलिस के मुताबिक इस हमले में 26 लोग मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं।
    ये हमला सदरलैंड स्प्रिंग्स के विलसन काउंटी इलाके में फस्र्ट बाप्टिस्ट चर्च पर हुआ है। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक हमलावर स्थानीय समयानुसार सुबह 11.30 बजे चर्च में घुसा और गोलीबारी शुरू कर दी।
    पुलिस ने मीडिया को बताया है कि हमले में कई लोग हताहत हुए हैं। हमलावर को भी मार दिया गया है। इलाके से सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में चर्च का बाहरी इलाका पुलिस घेराबंदी में दिख रहा है। केसैट-12 के रिपोर्टर के मुताबिक घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए कई हेलिकॉप्टर बुलाए गए हैं। 
    एफबीआई के एजेंट मौके पर पहुंच गए हैं। प्रांत के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने कहा कि इस घृणित कार्य से जिन सभी लोगों को नुकसान हुआ है हमारी संवेदनाएं उनके साथ हैं। हम पुलिस का शुक्रिया अदा करते हैं।
    ग्रेग ने कहा कि टेक्सस के इतिहास में यह सबसे भयावह गोलीबारी है। टेक्सस में जनसुरक्षा डिपार्टमेंट के क्षेत्रीय निदेशक फ्रीमैन मार्टिन ने कहा कि मारे गए लोगों की उम्र पांच से 72 साल तक है।
    प्रशासन का कहना है कि कम से कम 20 लोग जख्मी हुए हैं जिन्हें हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। मार्टिन ने कहा कि संदिग्ध हमलावर एक गोरा युवा है जिसकी उम्र 20 से 30 के बीच है। उन्होंने कहा कि वो काले कपड़ों में था।
    जापान यात्रा पर गए अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया कि भगवान सदरलैंड स्प्रिंग्स, टेक्सस के लोगों का साथ दे। एफबीआई और पुलिस मौके पर है। मैं जापान से घटना पर नजर रखे हुए हूं।
    मार्टिन ने कहा कि उसने चर्च में घुसने से पहले ही गोलीबारी शुरू कर दी थी। स्थानीय लोगों ने संदिग्ध की राइफल को पकड़ लिया था और फिर उसको निशाने पर लिया। बंदूकधारी इस बीच वहां से एक गाड़ी से भागने लगा, लेकिन स्थानीय लोगों ने भी पीछा किया।
    इसी क्रम में कार पर उसका नियंत्रण नहीं रहा और हादसे की शिकार हो गई। पुलिस ने संदिग्ध को कार में मरा पाया। मार्टिन का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि संदिग्ध की मौत खुद की गोली से हुई है या स्थानीय लोगों की गोलीबारी से।
    अमरीकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बंदूकधारी की पहचान 26 साल के डेविन पी केली के रूप में हुई है। हालांकि पुलिस ने अभी संदिग्ध की पहचान की पुष्टि नहीं की है।(बीबीसी)

     

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Posted Date : 06-Nov-2017
  • लंदन, 6 नवम्बर । ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्डस में इस सप्ताहांत बहस के लिए पेश किए जाने वाले कानून के अंतर्गत बच्चों को सोशल मीडिया पर शोषण से बचाने के लिए 13 साल से कम उम्र के बच्चों के फेसबुक और ट्विटर से जुडऩे पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। सरकार का डेटा प्रोटेक्शन विधेयक कानूनी रूप से उस उम्र को सम्मिलित करेगा, जिसमें बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खाते बनाने की इजाजत होगी।
    इस प्रस्ताव को शायद दूसरी पार्टी के सदस्यों का समर्थन प्राप्त न हो। यह कदम गृह सचिव अम्बर रुड के इस हफ्ते अमरीका में इंटरनेट दिग्गजों के अधिकारियों से होने वाली मुलाकात से पहले आया है। रुड ने रविवार को द सन में लिखा है,बाल यौन शोषण को रोकने के लिए सोशल मीडिया के दिग्गजों को अधिक कार्य करने चाहिए। शोषण रोकने के लिए तेजी से और अधिक कार्य करना कंपनियों का नैतिक कत्र्तव्य है।
    उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्रौद्योगिकी ने बाल यौन शोषण को खोजना बेहद आसान बना दिया है। मैंने पूर्ण अत्यावश्यकता के साथ ऑनलाइन हो रहे बाल यौन शोषण से निपटने के लिए इंटरनेट कंपनियों को आगे आने के लिए कहा है। उन्होंने आगे कहा कि हमें इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए आपकी तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों की आवश्यकता है। यह आपकी नैतिक जिम्मेदारी है।
    बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, नए सरकारी आंकड़े यह दर्शाते हैं कि 2013 एवं 2017 के बीच कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भेजे गए और प्रौद्योगिकी कंपनी के सर्वरों पर पहचान की गई अभद्र फोटो की संख्या में 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बीबीसी ने सरकारी आंकड़ों के हवाले से बताया कि हर महीने ब्रिटेन में बच्चों की अश्लील तस्वीरों के अपराध में 400 से अधिक गिरफ्तारियां होती हैं और करीब 500 बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण से बचाया जाता है।(द टेलीग्राफ)

     

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Posted Date : 06-Nov-2017
  • रशिया, 6 नवम्बर । खूबसूरत दिखने के लिए लड़कियां न जानें क्या-क्या करती हैं। कुछ तो प्लास्टिक सर्जरी तक करा लेती हैं। लेकिन एक लड़की बिना किसी सर्जरी या मेकअप के इतनी खूबसूरत लगती है कि लोग उसे रियल बार्बी डॉल बुलाते हैं। सोशल मीडिया पर उनकी फोटोज काफी चर्चा में हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर वो अपनी फोटो अपलोड किया करती हैं। इस लड़की का नाम है एनजेलिका केनोवा। जो रशिया में रहती है और अब मशहूर मॉडल बन चुकी है। लेकिन उनके घर वाले उनको बाहर निकलने नहीं देते, क्योंकि जब भी वो बाहर निकलती हैं तो लड़के उनको बुरी नजर से देखते हैं। उनके माता-पिता को एनजेलिका को बाहर निकालना अच्छा नहीं लगता।
    26 साल की मॉडल एनजेलिका के कई फैन्स हैं। उनके फेसबुक पेज पर 40 हजार लोग उन्हें फॉलो कर रहे हैं वहीं इंस्टाग्राम पर उनको 94 हजार लोग फॉलो करते हैं। इंस्टाग्राम पर उन्होंने अपने पेज को प्राइवेट रखा है। यानी कोई अंजान व्यक्ति उनकी फोटो नहीं देख सकता है। उनकी फोटो पर कई लोग कमेंट कर उनकी तारीफ करते हैं।
    लोगों से बचाने के लिए उनकी मां काफी सक्रिय हैं। एनजेलिका को जो भी चीज चाहिए होती है, उनकी मां बाहर से सामान लाती हैं। छोटी से छोटी चीज के लिए भी एनजेलिका बाहर नहीं निकलती। एंजिलिका का कहना है कि लोगों की यह सोच है कि मुझे एक तरह से कैद में रखा जाता है, पर ये कहना गलत होगा। उनका कहना है कि मेरे मां-बाप मेरी ज्यादा केयर करते हैं। एक मॉडल की तरह मुझे बाहरी दुनिया की ज्यादा समझ नहीं है।
    एनजेलिका को बार्बी डॉल के कपड़े पहनने का काफी शौक है। वो बार्बी के कपड़े पहनकर ही फोटो क्लिक करती हैं। सोशल मीडिया पर भी उनको काफी पसंद किया जाता है। यही नहीं उनको सॉफ्ट टॉयज के साथ खेलना काफी पसंद है। उनके पास सॉफ्ट टॉयज का शानदार कलेक्शन भी है।(एनडीटीवी)

     

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