सोशल मीडिया

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  • कोलकाता, 22 सितंबर। कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार के उस आदेश को पलट दिया है, जिसके तहत पश्चिम बंगाल में मुहर्रम में मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाई गई थी।
    इस बार 30 सितंबर को विजय दशमी और एक अक्टूबर को मुहर्रम का जुलूस निकलना है। इसी के चलते पश्चिम बंगाल सरकार ने 30 सितंबर को रात दस बजे के बाद मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाई थी। इससे पहले हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा कि वो हिंदुओं और मुसलमानों के बीच बंटवारे की लकीर न खींचे।
    हाईकोर्ट के फैसले के बाद ममता बनर्जी ने कहा, मैं पश्चिम बंगाल में दंगे या यहां की सभ्यता, परंपरा और शांति में दखल को बर्दाश्त नहीं करूंगी। लोकतंत्र में जनता की सर्वोपरि है।
    पूजा पंडालों में लाखों लोग जाते हैं। क्या आयोजक राम, रहीम, जेम्स और पॉल के नाम पर भेदभाव करते हैं। नहीं। क्या वो धर्म के नाम पर भेदभाव करते हैं, नहीं। हर किसी को अपनी मर्जी के मुताबिक पूजा करने का अधिकार है। अगर मैं एक मुस्लिम कार्यक्रम में जाती हूं, तो मुझ पर तुष्टीकरण का आरोप लगता है। अगर मैं हिंदू कार्यक्रम में जाती हूं तो हिंदुओं के तुष्टीकरण का। तुष्टीकरण के आरोप बेहद तकलीफ देह हैं।
    केंद्र सरकार लगातार एजेंसियों का लगातर हमारे खिलाफ गलत इस्तेमाल कर रही है। मैं रोज चंडीपाठ करती हूं। मैं अल्लाह की भी प्रार्थना करती हूं। मां दुर्गा और मां काली को भी पूजती हूं। हम कुरान, क्रिसमस, वेद, गीता सभी का सम्मान करते हैं।
    ये परंपरा हमें हमारे मां-बाप से मिली है। बंगाल में शांति स्थापित करने के लिए मैं जिम्मेदार हूं। जो ये शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, वो इसके लिए उत्तरदायी होंगे। हमने इस मुद्दे पर कहासुनी के जरिए लोगों से उनकी राय पूछी।
    मोहम्मद इस्लाम ने लिखा कि ये बात सभी जानते हैं कि कोई भी नेता हिंदू, मुसलमान से प्यार नहीं करता। वो सिर्फ वोट से प्यार करते हैं। कोई राजनीतिक पार्टी हिंदू हितेषी होने का ड्रामा करती है तो कोई मुस्लिम हितेषी होने का दिखावा। नेता सिर्फ आग में घी डालने का काम करते हैं।
    तनवीर लिखते हैं कि बंटवारे की लकीर की बात नहीं है। कट्टर संस्थाओं के लोग भीड़ का फायदा उठाकर माहौल खराब कर सकते हैं। दो जुलूस में भीड़ काफी हो जाएगी और शायद इस पर काबू पाना मुश्किल हो।
    प्रभात कुमार सिंह ने लिखा कि मैं ममता के फैसले से सहमत हूं। मुहर्रम और मूर्ति विसर्जन एक साथ होने पर कुछ लोगों को माहौल बिगाडऩे का मौका मिल जाएगा।
    शेखर रावल लिखते हैं कि जिसकी सोच ही संकीर्ण है और वैचारिक क्षमता सिर्फ जालीदार टोपी में खत्म हो जाती है। उसके बारे में क्या ही कहें।
    नाजनीन खान लिखती हैं कि ये बिलकुल सही बात नहीं है। अगर एक राज्य में विसर्जन और मुहर्रम साथ हो सकता है तो पश्चिम बंगाल में क्यों नहीं। इस तरह के फैसलों से हिंदू और मुस्लिम एक दूसरे के खिलाफ ही होंगे। फैजी मिर्जा ने लिखा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता का पाबंदी लगाना गलत है। उचित सुरक्षा के लिए बड़े कदम उठाएं। न कि किसी धर्म के कार्यक्रम को रोकें। (बीबीसी)

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  • चेन्नई में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और प्रसिद्ध अभिनेता कमल हासन की मुलाकात हुई है। हासन पिछले कई दिनों से राजनीतिक और अन्य मुद्दों पर टिप्पणियां करते रहे हैं और पिछले हफ्ते उन्होंने स्पष्ट भी कर दिया है कि वे राजनीति में उतरने वाले हैं। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक खुद उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को चेन्नई आमंत्रित किया था। सोशल मीडिया पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या कमल हासन 'आपÓ में शामिल होंगे या फिर अपनी कोई अलग पार्टी बनाकर उससे गठबंधन करेंगे। सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी के समर्थकों सहित अन्य लोगों ने इस मुलाकात का स्वागत किया है। अनिल आचार्य का ट्वीट है, अगर कमल हासन आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ते हैं तो इससे राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ राजनीति को बड़ी मजबूती मिलेगी। वहीं दूसरी तरफ भाजपा विरोधियों ने इस मुलाकात की तस्वीर शेयर करते हुए तंजभरे अंदाज में केजरीवाल को निशाना बनाया है। द फ्रस्ट्रेटिड इंडियन ने इस तस्वीर के साथ लिखा है, दशावतारम और 420 अवतारम। ट्विटर हैंडल नाइस- इंडियन पर टिप्पणी, ...आखिर वर्षों बाद चाची 420 को चाचा 420 मिल ही गए।
    मुहर्रम के दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की अनुमति न देने के पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले को कोलकाता हाईकोर्ट ने गुरुवार को खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया आज इस खबर की भी खूब चर्चा है। हाईकोर्ट के इस फैसले पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कोई उनकी गर्दन काट सकता है, मगर यह नहीं बता सकता कि उन्हें क्या करना है। इस बयान को शेयर करते हुए लोगों ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया है। ट्विटर पर अंकुर का कहना है, ममता बनर्जी कह रही हैं कि अगर कानून-प्रशासन के मोर्चे पर कोई गड़बड़ी होती है तो इसकी जिम्मेदार वे नहीं होंगी। अगर यही मामला है तो वे अपने पद से इस्तीफा क्यों नहीं देतीं?
    इन दोनों घटनाक्रमों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    सोनम महाजन- क्या अरविंद केजरीवाल कमल हासन से यह कहने के लिए मिले थे कि उनकी सभी फिल्मों के फ्री गोल्ड पास उन्हें चाहिए?
    अभिजीत- गुप्त सूत्रों से पता लगा है कि केजरीवाल ने कमल हासन को राजनीति में आने का न्योता दिया है और कमल हासन ने उन्हें सिनेमा में आने का।
    अभिषेक- कमल हासन और केजरीवाल की मीटिंग के बाद अब अगर कमल हासन आप में शामिल हो जाएं तो एक और सबूत मिल जाएगा कि कमल कीचड़ में ही खिलता है।
    ब्लू लेमन- ममता बनर्जी ने दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश का जवाब दिया है, कोई मुझे यह नहीं कह सकता कि मैं क्या करूं.... ममता बनर्जी को अब अदालत की मानहानि के आरोप में गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
    मोनिका अरोरा- ममता बनर्जी हमेशा याद रखें कि मां दुर्गा ने धर्म यानी कानून के शासन और न्याय की रक्षा के लिए महिषासुर राक्षस का वध किया था। (सत्याग्रह)

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  • बिहार में भागलपुर के कहलगांव में करीब 389.31 करोड़ रुपये की लागत से बनी नहर (कुछ खबरों में इसे बांध बताया गया है) का एक हिस्सा ढह गया है। दिलचस्प बात है कि एक दिन बाद यानी बुधवार को ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों इसका उद्घाटन होने वाला था। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस नहर के निर्माण में घपला होने की बात कहते हुए बिहार में फैले भ्रष्टाचार पर कई तंजभरी टिप्पणियां की हैं। इस घटना के बहाने विरोधियों सहित अन्य लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निशाना बनाया है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के ट्विटर हैंडल पर टिप्पणी है, बकौल नीतीश सरकार पहले चूहे बिहार में बाढ़ लेकर आए, तो क्या अब 828 करोड़ रुपये का बांध घडिय़ालों ने थूथन से तोड़ दिया है? फेसबुक पर ईनामुल रब की चुटकी है, बांध ने कुर्सी कुमार से फीता कटवाने से इंकार कर दिया है....
    केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा कि अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सरकार जल्द ही आर्थिक पैकेज लाएगी। इसके साथ ही उन्होंने पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में राहत देने के लिए उत्पाद शुल्क में किसी तरह की कटौती से इनकार किया है। अरुण जेटली का यह बयान ऐसे समय में आया है जब जीडीपी, औद्योगिक उत्पादन और चालू खाते के घाटे जैसे अहम मोर्चों पर गिरते प्रदर्शन को लेकर मोदी सरकार विरोधियों के निशाने पर है। वित्त मंत्री के आज के बयानों को शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर भी लोगों ने उनकी आलोचना की है। ट्विटर पर हार्दिक रायगोर ने तंजभरे अंदाज में लिखा है, अरुण जेटली बहुत खास हैं। उन्हें विरासत में फलती-फूलती अर्थव्यवस्था मिली थी, लेकिन आज जब विश्व अर्थव्यवस्था ठीक-ठाक प्रदर्शन कर रही, जेटली भारतीय अर्थव्यस्था को बाकायदा जमीन पर ले आए हैं।Ó नीतेश पांडे की चुटकी है, अरुण जेटली जी अर्थव्यवस्था को अनर्थव्यवस्था बनाकर मानेंगे।
    सोशल मीडिया में इन दोनों खबरों पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    हश्मत आलम- बिहार में पगलाया विकास उद्घाटन से पहले ही बह गया नया बांध।
    विकास कत्याल- अभी तो सिर्फ भ्रष्टाचार सरकार का पानी का बांध टूटा है... नीतीश कुमारजी अभी बिहार की जनता के सब्र का बांध टूटना बाकी है।
    शकुनि मामा- बिहार में उद्घाटन से पहले नहर टूटना भी एक उपलब्धि है, क्योंकि यहां उद्घाटन समारोह में भी घपला हो सकता है।
    शरद चंद्र जोशी- बिहार में उद्घाटन से पहले ही बांध टूट गया है। इतने भ्रष्टाचार से धन इक_ा करने वाले आखिर इसका क्या करेंगे? भगवान इन्हें सद्बुद्धि दे या फिर दनादन ल_।
    मनोज वर्मा- अरुण जेटली ने कहा है कि कांग्रेस-सीपीएम अपने राज्यों में पेट्रोल पर टैक्स घटाएं... शिवराज सिंह क्या किसी पड़ोसी देश के राज्य के सीएम हैं?
    संजीव चौरसिया- पेट्रोल की कीमतें बढ़ेंगी, लेकिन महंगाई नहीं बढ़ेगी! भाई हम लोग कम पढ़े-लिखे लोग हैं, माननीय वित्तमंत्री बैरिस्टर अरुण जेटलीजी अर्थशास्त्र में एलएलबी किए हुए हैं! (सत्याग्रह)

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  • गुजरात में कांग्रेस का साथ छोड़ चुके पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह बाघेला ने आखिरकार तीसरा मोर्चा बना लिया है। मंगलवार को उन्होंने 'जन विकल्पÓ पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। जन विकल्प पार्टी को उनके समर्थकों ने बनाया है। हालांकि इसमें शामिल होने के मौके पर उन्होंने कहा कि वे खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे। जन विकल्प के गठन पर वाघेला का कहना था कि राज्य के लोग भाजपा और कांग्रेस से ऊब चुके हैं और विकल्प की तलाश कर रहे हैं। सोशल मीडिया में लोगों ने इस खबर को शेयर करते हुए अपने-अपने अंदाजे लगाए हैं कि इसका गुजरात विधानसभा चुनाव पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
    यहां एक बड़े तबके का कहना है कि जन विकल्प कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगा। पत्रकार शिवम विज ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए ट्वीट किया है, ... कांग्रेस एक बड़े वोट बैंक पर कब्जा जमाए बैठी है लेकिन चुनाव नहीं जीतती। कांग्रेस को यहां से हटाने की जरूरत है। कामरान शाहिद ने टिप्पणी की है, ऐसा लगता है कि जन विकल्प पार्टी अमित शाह की रणनीति है ताकि भाजपा विरोधी और धर्मनिरपेक्ष वोटों को बांट दिया जाए जिससे भाजपा की जीत आसान हो जाए। वहीं इस पार्टी के आज के कार्यक्रम पर दिगंत दिगंबर ने पूछा है, गुजरात में जन विकल्प पार्टी के कई पोस्टर और बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाए गए हैं... इनके पास विज्ञापन का बड़ा बजट है लेकिन यह सब पैसा आया कहां से?
    मुंबई के कई इलाकों में इस समय भारी बारिश हो रही है और मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों में भी इससे कोई राहत न मिलने की चेतावनी जारी की है। मुंबई में कई सड़कों पर पानी भरने से ट्रैफिक थम गया है और ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर हुई हैं। इसके साथ यहां एक बार फिर शहर के स्थानीय निकाय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को लोगों ने निशाने पर लिया है। प्रणाली दोषी का ट्वीट है, मुंबई में पिछले महीने हुई भारी बारिश से बीएमसी ने क्या सबक सीखा? कुछ नहीं! आज भी जगह-जगह पानी रुका हुआ है, बस किस्मत की बात यह है कि लोकल (ट्रेनें) अभी चालू है।
    इन दोनों घटनाक्रमों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    विशाल- विपक्षी पार्टियों के वोट काटने के लिए 2012 में केशुभाई पटेल थे तो 2018 में शंकर सिंह वाघेला हैं! यह असली गुजरात मॉडल है!
    किरण पटनायक- शंकर सिंह वाघेला का कहना है कि गुजरात की जनता भाजपा और कांग्रेस से ऊब चुकी है.... लेकिन आप जैसे दल-बदलुओं से भी ऊब चुकी हैं...
    अविनाश गोवारिकर- .. और 'कॉमन मैनÓ (मुंबई का) मानसून खत्म होने का इंतजार करते हुए।
    बिजॉय इदिचेरिया- मैं इंतजार में हूं कि आज की अफरा-तफरी के लिए बीएमसी मानसून, बादल, बारिश और मुंबई के लोगों को जिम्मेदार ठहराने की शुरुआत कब करता है।
    कविता कौशिक- मुंबई को बुनियादी ढांचे की जरूरत है। कुछ ही घंटों की बारिश में यहां हालात खराब हो जाते हैं, जन-जीवन थम जाता है। भगवान न करे यहां कभी कोई प्राकृतिक आपदा आए! हमें मूर्तियों की दरकार नहीं है। (सत्याग्रह)

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  • कुछ समय से शांत दिख रही शिव सेना अचानक फिर भाजपा पर हमलावर हो गई है। केंद्र और महाराष्ट्र में भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन की अहम भागीदार शिव सेना ने सोमवार को गठबंधन से अलग होने की चेतावनी दी है। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने एक के बाद एक कई ट्वीट करके कहा है कि शिव सेना जल्दी ही एनडीए गठबंधन में बने रहने पर फैसला करेगी। शिव सेना सांसद ने ट्विटर पर लिखा है कि उद्धव ठाकरे पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से खुश नहीं हैं और पार्टी इस मामले में सरकार के साथ नहीं है। सोशल मीडिया में शिव सेना की इस चेतावनी के अलग-अलग निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं। ट्विटर हैंडल लोन रेंजर पर टिप्पणी है, ऐसा लग रहा है कि शिव सेना एनडीए के डूबते जहाज को छोडऩे वाली पहली पार्टी होगी। उद्धव ठाकरे ने भांप लिया है कि भाजपा 2019 का चुनाव हारने वाली है।Ó वहीं भाजपा समर्थकों के साथ कुछ अन्य लोगों ने इस पर तंज किया है। ट्विटर हैंडल? पैन-कूल कहा गया है, शिव सेना को अब नई बहुओं वाली धमकी देना छोड़ देना चाहिए।
    साल 2002 के नरोदा गांव (नरोदा पाटिया के नजदीक) दंगा मामले में आरोपित गुजरात की पूर्व मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी आज सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही हैं। सोमवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस मामले में अहमदाबाद की विशेष अदालत में गवाही दी है। अपने बयान में उन्होंने कहा है कि 28 फरवरी, 2002 को नरोदा गांव में दंगे के दिन पूर्व मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी वहां मौजूद नहीं थीं। नरोदा गांव दंगा मामले में गवाही के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को विशेष अदालत ने पिछले हफ्ते समन जारी किया था। सोशल मीडिया पर भाजपा विरोधियों ने इस खबर को शेयर करते हुए पार्टी को जमकर निशाने पर लिया है। वहीं वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने पूछा है, मेरे कुछ सामान्य से सवाल हैं- माया कोडनानी ने नरोदा पाटिया मामले में कभी बतौर गवाह अमित शाह का नाम क्यों नहीं लिया था? और अमित शाह ने पहले गवाही क्यों नहीं दी थी? यह सब अभी क्यों हुआ?
    इन दोनों खबरों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    अंशुल सक्सेना- शिव सेना वर्षों तक विपक्ष में बैठी है, इसलिए महाराष्ट्र की सरकार में शामिल होने के बावजूद वह विपक्ष की तरह बर्ताव कर रही है।
    डॉ राधा मोहन अग्रवाल- शिव सेना जानती है कि भाजपा के साथ गठबंधन में उसे राजनैतिक रूप से कोई फायदा मिल नहीं रहा। लेकिन अब वह जनहित का बहाना बनाकर ही गठबंधन से निकल सकती है।
    चेतन- जितनी बार उत्तर कोरिया ने अमरीका को परमाणु हमले की धमकी दी है, उससे ज्यादा बार शिव सेना मोदी सरकार को छोडऩे की धमकी दी है।
    टेकनॉम्ड इक्युपमेंट्स- शिव सेना को धमकी देने के अलावा कुछ नहीं आता। कभी सिनेमा कलाकार को, कभी किसी गायक को, कभी बिहारी को तो कभी भाजपा को।
    शकुनि मामा- शिव सेना की भाजपा का साथ छोडऩे की धमकी हमेशा एक्सपायरी डेट के साथ क्यों आती है।
    विशाल- अमित शाह को हमेशा पता था कि माया कोडनानी उस दिन कहां थीं, फिर उन्होंने बयान देने में इतने साल क्यों लगाए?
    आलोक- सलमान खान के ड्राइवर ने जो काम उनके लिए किया था, अमित शाह ने वही काम माया कोडनानी के लिए किया है। (सत्याग्रह)

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  • महेंद्र सिंह धोनी ने अपने क्रिकेट करियर में एक और मुकाम हासिल कर लिया है। चेन्नई के चेपक स्टेडियम में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए पहले वन डे में धोनी ने यह कीर्तिमान अपने नाम किया।
    फिर छाए महेंद्र सिंह धोनी, फैंस ने कहा- जाग गया बूढ़ा शेर
    शुरुआती खिलाडिय़ों के जल्दी आउट हो जाने के बाद धोनी मैदान पर आए और हमेशा की तरह टीम को मुश्किल दौर से बाहर निकाला, 88 गेंदों पर 79 रनों की उनकी पारी से जहां टीम इंडिया को संभलने का मौका मिला वहीं इस अर्धशतक के साथ उन्होंने अर्धशतकों का शतक भी पूरा किया।
    एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में यह उनका 66वां अर्धशतक है और खेल के सभी फॉर्मेट के लिहाज से 100वां। ये कमाल करने वाले धोनी चौथे भारतीय खिलाड़ी हैं। इससे पहले सचिन तेंडुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली ये कारनामा कर चुके हैं।
    धोनी के इस कमाल की सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा है। लोग उन्हें बधाइयां दे रहे हैं। गौरव कालरा ने ट्वीट करके बताया है कि 9 जुलाई के बाद यह पहला मौका है जब धोनी आउट हुए हैं। वहीं क्रिकेट एक्सपर्ट हर्षा भोगले ने ट्वीट करके चेन्नई और धोनी के रिश्ते को सराहा है।
    भुवनबम के अकाउंट से ट्वीट किया गया है कि मैं गर्व से अपने बच्चों को बताऊंगा कि मैं धोनी के युग में जिया। गब्बर नाम के ट्विटर अकाउंट से लिखा गया है कि हर 20 साल पर धोनी के ऊपर एक फिल्म बननी चाहिए। ताकि हर पीढ़ी देख सके। वहीं मोहित लिखते हैं कि चेन्नई के लिए धोनी सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि एक एहसास हैं। (बीबीसी)

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  • लगता है कि तमिलनाडु की राजनीति का फिल्मी सितारों से नाता अभी आगे भी बना रहने वाला है। बीते दिसंबर में जयललिता के निधन की वजह से खाली हुई यह जगह भरने के लिए वहां एक नहीं बल्कि दो फिल्मी हस्तियां तैयार दिख रही हैं। इनमें एक हैं- रजनीकांत और दूसरे हैं कमल हासन। रजनीकांत तो अब तक महज संकेत ही दे रहे थे लेकिन लगता है कमल हासन ने राजनीति में उतरने की पूरी तैयारी कर ली है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में साफ कर दिया है कि वे राजनीति में तो आएंगे, लेकिन किसी मौजूदा पार्टी में शामिल नहीं होंगे। इसके बाद अटकलें लग रही हैं कि हासन जल्दी ही नई राजनीतिक पार्टी बनाने वाले हैं।
    कमल हासन ने अपना राजनीतिक एजेंडा स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। सोशल मीडिया पर इस बात का जिक्र करते हुए कई लोगों ने उनके राजनीति में आने का स्वागत किया है। ट्विटर हैंडल भक्तजी पर पूछा गया है, क्या कमल हासन साऊथ के केजरीवाल बन पायेंगे? तमिलनाडु की राजनीति में कमल हासन और रजनीकांत की संभावित प्रतिद्वंदिता पर भी लोगों ने प्रतिक्रिया दी है। देव शाक का ट्वीट है, रजनीकांत ने अभी शुरुआत नहीं की है जबकि कमल हासन टीवी और सोशल मीडिया के जरिए लाइम लाइट में आ रहे हैं। लेकिन जब रजनीकांत बोलना शुरू करेंगे तो कमल हासन की सफाई हो जाएगी। 
    यहां कमल हासन के राजनीति में आने का विरोध करते हुए भी कई टिप्पणियां आई हैं। ट्विटर हैंडल नास्तिक कृष्ण पर प्रतिक्रिया है, कमल हासन राजनीति के लिए चिरंजीवी से भी बड़ी आपदा साबित होंगे।
    इस मुद्दे पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    चंद्रमोहन राव- कमल हासन ने 'मेरी राजनीतिÓ का टीजर कुछ दिन पहले रिलीज किया था। आज उन्होंने 'मैं राजनीतिक पार्टी बनाऊंगाÓ का ट्रेलर लॉन्च किया है। हालांकि पिक्चर रिलीज होने पर अभी-भी संदेह है।
    ड्रंक बैटमैन- कमल हासन राजनीति में आएंगे ...यह अमित शाह का मास्टर प्लान है....अब तमिलनाडु में 'कमलÓ खिलेगा!
    करिकलन- अगर रजनीकांत और कमल हासन अलग-अलग पार्टी बनाते हैं तो पक्केतौर पर इसका फायदा डीएमके को मिलेगा। मुझे कमल हासन पर शक है। क्या उन्हें स्टालिन ने यह काम सौंपा है?
    अभिषेक- जब कमल हासन ने ट्विटर ज्वाइन किया तो किसी ने कहा कि यहां 140 'कैरेक्टरÓ से ज्यादा नहीं होते। इस पर कमल हासन का जवाब था- मैं सब कैरेक्टर निभा लूंगा। (सत्याग्रह)

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  • नई दिल्ली, 15 सितंबर। राजस्थान में इतिहास 360 डिग्री पर घूमता सा नजर आ रहा है। हल्दीघाटी की लड़ाई को लेकर राजस्थान बोर्ड के स्कूल की किताबों में नया दावा होने की बात सामने आ रही है। खबरों में कहा जा रहा है कि किताब में हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप को जीता हुआ दिखाया गया है। पीटीआई के मुताबिक इन किताबों का पाठ्यक्रम इसी साल बदला गया है।
    हालाँकि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन बीएल चौधरी ने बताया कि किताब में कहीं भी सीधे-सीधे यह नहीं लिखा गया है कि युद्ध में महाराणा प्रताप ने अकबर को हराया।
    उन्होंने कहा, किताब की पृष्ठ संख्या 31 पर लिखा है....कुछ इतिहासकारों ने इसे परिणामविहीन अथवा अनिर्णित युद्ध की संज्ञा दी है। परिणाम की समीक्षा हेतु निम्नलिखित आधार विवेचनीय हैं। अकबर का उद्देश्य महाराणा प्रताप को जिंदा पकडऩा था और दूसरे वो मेवाड़ को मुगल साम्राज्य में मिलाना चाहता था और दोनों ही उद्देश्यों में वो विफल रहा। इससे साबित होता है कि अकबर की विजय नहीं होती है। अकबर की मानसिंह और आसिफ खां के प्रति नाराजगी थी जिसमें उनकी ड्योढ़ी बंद कर दी गई थी। मुगलों का मेवाड़ की सेना का पीछा न करना। ये ऐसे परिदृष्य हैं जो हल्दीघाटी का परिणाम प्रताप के पक्ष में लाकर खड़ा कर देते हैं। 
    अब तक इतिहास में ये पढ़ाया जाता रहा है कि उदयपुर के पास हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप और अकबर के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें अकबर ने जीत हासिल की थी।
    पीटीआई के अनुसार सोशल साइंस की इस नई किताब को 2017-18 में छात्रों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इस किताब के इस चैप्टर को लिखने वाले चंद्रशेखर शर्मा का दावा है कि ऐसे कई तथ्य हैं जो इस ओर इशारा करते हैं कि लड़ाई के नतीजे महाराणा प्रताप, मेवाड़ के राजपूत राजा के पक्ष में रहे।
    शर्मा इन दावों के बारे में कहते हैं, ये ऐसे परिदृश्य हैं जो हल्दीघाटी युद्ध के परिणाम प्रताप के पक्ष में लाकर खड़ा कर देते हैं। अकबर का लक्ष्य था कि महाराणा प्रताप को पकड़ा जाए और मुगल दरबार में पेश किया जाए या मार दिया जाए।
    इसका मकसद राजपूत राजा के साम्राज्य को मुगलों के अंतर्गत लाना था। लेकिन अकबर अपने किसी मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाया। ऐसे ऐतिहासिक सबूत हैं कि मुगल सेनाएं मेवाड़ को फतह करने में नाकामयाब रहीं और लड़ाई महाराणा प्रताप के पक्ष में रही।
    ऋषभ श्रीवास्तव इस पर तंज कसते हुए फेसबुक पर लिखते हैं, राजस्थान सरकार के मुताबिक महाराणा प्रताप ने अकबर को हराया था। तो ये क्यों नहीं लिखा जा सकता कि 1962 का युद्ध भारत ने जीता? देखा तो किसी ने नहीं था। कुंदन कुमार ने फेसबुक पर लिखा, महाराणा की सेना में आरएसएस और बीजेपी भी थी इसलिए ही तो अकबर की हार हुई।
    सईद सलमान ने लिखा, हल्दीघाटी के युद्ध में बच्चे कुछ यूं जवाब देंगे- 1576 से लेकर 2017 की शुरुआत तक अकबर विजयी रहा। लेकिन 2017 के मध्य में अकबर को धूल चटाते हुए प्रताप ने अपनी हार का बदला लिया और शानदार जीत हासिल की। आलोक मोहन लिखते हैं, लगभग 450 साल महाराणा ने अकबर को हराने में लगा दिए। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। (बीबीसी)

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  • मोदी सरकार की बहुचर्चित अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना का काम औपचारिक रूप से आज शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने मिलकर अहमदाबाद में आज इसकी आधारशिला रखी। शिंजो आबे अपनी दो दिन की भारत यात्रा के तहत बुधवार को अहमदाबाद पहुंचे थे और सोशल मीडिया पर उनकी इस यात्रा के साथ जापान के सहयोग से शुरू होने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना की चर्चा कल से ही चल रही है। भाजपा समर्थकों के साथ एक बड़े तबके ने इस परियोजना का स्वागत करते हुए भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में इसे मील का पत्थर बताया है। वहीं भारतीय रेल प्रणाली की खस्ता हालत का हवाला देते हुए लोगों ने बुलेट ट्रेन पर सवाल भी उठाए हैं। अलका मारिया जैकब का ट्वीट है, किसी ने भी बुलेट ट्रेन की मांग नहीं की थी। भारतीय होने के नाते हमें अपनी प्राथमिकताएं पता हैं। बुलेट ट्रेन तो लग्जरी है, फिलहाल हमें अपनी रेल व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत है।
    इस आयोजन को गुजरात विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए भी कई लोगों ने टिप्पणियां की हैं। ट्विटर पर कृष्णा कान्त राहुल का कहना है, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे को अभी तक पता नहीं चल पाया कि उनका इस्तेमाल बुलेट ट्रेन के लिए नहीं, बल्कि गुजरात चुनाव के लिए हो रहा है। फैजान उर रहमान की फेसबुक पर टिप्पणी है, भाजपा के स्टार प्रचार शिंजो आबे का गुजरात का तूफानी चुनावी दौरा। यूपी में चुनाव थे तो काशी को क्योटो बना रहे थे। अब गुजरात में चुनाव है तो बुलेट ट्रेन चला रहे हैं।
    आज हिंदी दिवस है। सोशल मीडिया में लोगों ने इस मौके पर बधाई संदेश देने के साथ-साथ हिंदी भाषा की चुनौतियों पर बात की है और खूब मजेदार अंदाज में की है। ट्विटर हैंडल फॉर-अमन पर टिप्पणी है, जिन्हें उनहत्तर, उन्यासी और नवासी में फर्क समझ आता है, उन सबको भी हिंदी दिवस की शुभकामनाएं। वहीं फेसबुक पर आशुतोष ने लिखा है, मातृभाषा में गालियां देने वाले ही हिंदी बचाएंगे।
    सोशल मीडिया में बुलेट की आधारशिला रखे जाने और हिंदी दिवस पर आईं कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    रमेश श्रीवत्स- बुलेट ट्रेन चलने के इंतजार में हूं। आईआरसीटीसी के पास सिर्फ पांच साल बचे हैं, इतने में वह सुनिश्चित कर ले कि टिकट बुक करने में लगने वाला समय, यात्रा में लगने वाले समय से कम हो जाए।
    अभिषेक दत्ता-बुलेट ट्रेन के चलते पांच साल बाद मुंबई-अहमदाबाद की दूरी दो घंटे में तय हो सकेगी। लेकिन कार से अंधेरी ईस्ट से अंधेरी वेस्ट तक जाने में तब भी ज्यादा समय लगेगा।
    संदीप गुप्ता- 1964: जापान (शिंकासेन) में दुनिया की पहली बुलेट ट्रेन का उद्घाटन। इस महीने यह 53 साल की हो गई है।
    शकुनि मामा- अच्छे दिनों की गोली देने को अंग्रेजी में बुलेट ट्रेन भी कह सकते हैं।
    इंजीनर्ड- मोदीजी ने अकेले ही जापान के प्रधानमंत्री को लोन और बुलेट ट्रेन के लिए तैयार कर लिया, लेकिन यहां हम 125 करोड़ लोग भारतीय प्रधानमंत्री को पटरियों की मरम्मत के लिए तैयार नहीं कर पा रहे हैं।
    ओम थानवी- जबरिया हिंदी थोपने वाले बुलेट ट्रेन को हिंदी में कब चलाएंगे?
    सुयश सुप्रभ- पहले हिंदी को बचाने की चिंता होती थी। अब खुद को बचाने की होती है। जान है तो जहान है।
    अनुग्रह मिश्रा- अंग्रेजी आती नहीं और हिन्दी जाती नहीं। (सत्याग्रह)

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  • जियोर्जिना रैनार्ड
    अमरीका, 14 सितंबर । अमरीका में रिपब्लिकन पार्टी के एक सांसद को इन दिनों सोशल मीडिया पर लोगों के तानों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल रिपलब्किन सांसद टेड क्रूज के ट्विटर अकाउंट से एक पॉर्नोग्रैफिक वीडियो को लाइक किया गया, जिसके बाद वो चर्चा में आ गए।
    टेड क्रूज वहीं सांसद हैं जिन्होंने कुछ वक्त पहले मास्टरबेशन यानी हस्तमैथुन पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन किया था। लोग अब सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना तो कर ही रहे हैं, साथ ही मजाक भी बना रहे हैं।
    सोमवार को उनके अकाउंट से सेक्सुअल पोस्ट्स के दो मिनट के एक वीडियो को लाइक किया गया। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि उस वक्त उनका ट्विटर अकाउंट कौन संभाल रहा था। पहले तो क्रूज ने इस घटना पर कोई बयान नहीं दिया। हां, उनके स्टाफ ने यह जरूर बता दिया था कि इस आपत्तिजनक ट्वीट को उनके अकाउंट से हटा दिया गया है।
    बाद में उन्होंने बताया कि यह स्टाफ से सम्बन्धित मसला था और इसके पीछे कोई गलत इरादा नहीं था। वीडियो को 40 मिनट बाद अनलाइक कर दिया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो गई थी। अगली सुबह तक टेड क्रूज सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे थे। उन पर चुटकुले और मीम्स बनाए जा रहे थे।
    चूंकि टेड क्रूज अपने रूढि़वादी विचारों के लिए जाने जाते हैं, इसलिए स्थिति और भी हास्यास्पद हो गई थी। बिली ने ट्वीट किया, ये सिर्फ एक ऐसी चीज है जिसमें मैं टेड क्रूज को समझ सकता हूं।
    एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा,आखिरकार टेड क्रूज ने हमें एक देश के तौर पर एकजुट कर ही दिया। टेड क्रूज 2016 में राष्ट्रपति पद की रेस में भी शामिल थे। (बीबीसी)

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  • दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) छात्र संघ चुनाव के नतीजे आए हैं। यहां कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने जबरदस्त वापसी करते हुए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद पर कब्जा जमा लिया है। भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के लिए यह बड़ा झटका है क्योंकि पिछले चार साल से अध्यक्ष पद पर उसी का कब्जा था। हालांकि सचिव और संयुक्त सचिव पद पर उसी के प्रत्याशी जीते हैं। सोशल मीडिया में यह खबर भी ट्रेंड कर रही है। इस पर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का ट्वीट है, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव का संदेश- किसी भी मतदाता, खासकर युवा को हल्के में मत लीजिए। चाय/फोटोकॉपियों (प्रचार सामग्री की) पर बिना खर्च किए भी चुनाव जीता जा सकता है।
    नरेंद्र मोदी और शिंजो आबे कल अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला भी रखने वाले हैं। सोशल मीडिया में इस पर भी खूब मजेदार प्रतिक्रियाएं आई हैं। ट्विटर हैंडल राजस्थानी पर टिप्पणी है, शिंजो आबे भी सोच रहे होंगे कि जब इनके पास छह किलोमीटर चलने (रोड शो) के लिए छह घंटे का समय है तो फिर ये बुलेट ट्रेन क्यों मांग रहे हैं?
    इन दोनों मामलों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    शेखर गुप्ता- छात्र संघ (दिल्ली विवि) चुनाव के नतीजे बताते हैं कि भाजपा का अति-राष्ट्रवाद अब काम नहीं कर रहा है और ज्यादातर महत्वाकांक्षी और होशियार युवा उदारवाद को पसंद करते हैं।
    विजेंद्र सिंह- पिछले साल एबीवीपी ने नरेंद्र मोदी की वजह से डीयू चुनाव जीता था.... लेकिन इस बार (ऐसा लगता है कि) एबीवीपी को जलवायु परिवर्तन के चलते हार का सामना करना पड़ा है।
    जस ओबेरॉय- जो 'भक्तÓ कह रहे हैं कि दिल्ली छात्रसंघ के चुनाव का कोई मतलब नहीं है, वे यह ध्यान रखें कि अरुण जेटली ने आज तक कोई चुनाव जीता है तो वह दिल्ली विश्वविद्यालय का ही चुनाव है।
    अजय सराफ- शिंजो आबे के बहाने से मस्जिद (अहमदाबाद स्थित सिदी सईद मस्जिद) में भी जाना है (नरेंद्र मोदी को) मुस्लिम वोट लुभाना है या उल्लू बनाना है?
    कंगना रनौत- गुजरात विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बुलाए जाने के बाद पूरी संभावना है कि कश्मीर विधानसभा चुनाव में नवाज शरीफ को बुलाया जाएगा!
    अलादीन- अगर वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते तो उनका नाम होता- अबे ओए शिंजो! (सत्याग्रह)

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  • कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने माना है कि यूपीए-2 के कार्यकाल में 2012 के दौरान उनकी पार्टी में 'थोड़ा अहंकारÓ आ गया था। उनके मुताबिक इसके चलते कांग्रेस में संवाद की संस्कृति खत्म हो गई थी। राहुल गांधी इन दिनों दो हफ्ते की अमरीका यात्रा पर हैं और उन्होंने यह बयान कैलिफोर्निया की बर्कले यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ बातचीत के दौरान दिया। सोशल मीडिया में उनके इस बयान की काफी चर्चा है। फेसबुक पर अनुराग मुस्कान ने तंज किया है, कोयला, टूजी, टेट्रा ट्रक, सीडब्लूजी, आदर्श आदि घोटालों पर तो शर्म आनी चाहिए थी, लेकिन राहुल गांधी का कहना है कि 2012 तक कांग्रेस में घमंड आ गया था।
    कांग्रेस उपाध्यक्ष ने अपने इस संवाद कार्यक्रम में केंद्र सरकार पर भी जमकर निशाना साधा है और कहा है कि विभाजन और ध्रुवीकरण की राजनीति भारत के लोगों को अलग-थलग कर रही है। नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए उनका कहना था प्रधानमंत्री ने संसद को किनारे कर दिया है और सब फैसले खुद करते हैं, हालांकि इसके साथ ही राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए यह भी कहा कि मोदी उनसे अच्छे वक्ता हैं। सोशल मीडिया पर कांग्रेस उपाध्यक्ष के इन बयानों को अलग से शेयर करते हुए कई टिप्पणियां आई हैं। भाजपा की आलोचना पर पार्टी समर्थकों ने यहां राहुल के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
    प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी पर राहुल का कहना था कि अगर पार्टी चाहेगी तो 2019 में वे इसके लिए तैयार हैं। इस बयान पर भी सोशल मीडिया में खूब चुटकियां ली गई हैं। ट्विटर पर नितेश सिंह का कहना है, प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी को वोट देना ब्लू व्हेल गेम के भारतीय संस्करण का आखिरी टास्क होगा। ऋषी बाग्री का ट्वीट है, 1919 में मोती लाल नेहरू कांग्रेस अध्यक्ष बने थे और यह नेहरू-गांधी वंश की शुरुआत का संकेत था। राहुल गांधी 2019 में इसके खात्मे का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
    इसी कार्यक्रम में वंशवाद का बचाव करते हुए राहुल गांधी ने कहा है कि पूरा देश ही इस तरह चल रहा है। उन्होंने इसके लिए समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, डीएमके नेता स्टालिन से लेकर अभिनेता अभिषेक बच्चन तक के नाम गिनाए। सोशल मीडिया में इस मुद्दे पर भी कांग्रेस उपाध्यक्ष की भारी आलोचना हुई है। ट्विटर हैंडल बुडबक जेठा पर तंजभरी टिप्पणी है, वैसे राहुल गांधी पर वंशवाद से ज्यादा वंशबर्बाद करने का इल्जाम ज्यादा फिट बैठता है।
    राहुल गांधी के इन बयानों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    महेश हिरंभा- 2019 में प्रधानमंत्री बनने का दिवा-स्वप्न देखने से पहले राहुलजी को कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहिए। वे इस जिम्मेदारी से भाग क्यों रहे हैं?
    अभिषेक कुलश्रेष्ठ- राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा कर दी है कि सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अहंकारी हो गई थी।
    शकुनि मामा- कांग्रेस में 2012 में अहंकार आ गया था, लेकिन यह समझने की अकल 2014 के तीन साल बाद आई है।
    कीर्तीश भट्ट- जितना भाव बीजेपी राहुल गांधी को दे रही है, सुबह तक कांग्रेस को फिर 'घमंडÓ हो जाएगा।
    अक्षय कुमार- राहुल गांधी ने अमरीका में कहा कि हिंदुस्तान में वंशवाद ही चल सकता है... अब कांग्रेसियों को समझ लेना चाहिए कि उनका कुछ नहीं हो सकता।
    स्पार्कल सीकर- राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद संभालने के लिए तैयार हैं, यह अलग बात है कि देश तैयार नहीं है। (सत्याग्रह)

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  • इंग्लैंड, 13 सितंबर। एक लड़का और लड़की डेट करते हैं। कुछ समय बाद लड़की रिश्ता तोड़ लेती है। इसके बाद लड़का शहर में एक पियानो सेंटर खोलता है और एलान करता है कि जब तक लड़की उसकी जिंदगी में वापस नहीं आएगी, वो रोज पियानो बजाता रहेगा।
    यह किसी रोमैंटिक फिल्म का प्लॉट नहीं बल्कि इंग्लैंड के ब्रिस्टल शहर की सच्चाई है। ल्यूक हॉवर्ड एक संगीतकार हैं और उन्होंने शहर के कॉलेज ग्रीन में यह पियानो सेंटर शुरू किया है। उनका कहना है कि वह तब तक लगातार पियानो बजाते रहेंगे जब तक उनकी एक्स गर्लफ्रेंड उन्हें च्ूसरा मौका देने को तैयार नहीं हो जाती, 34 साल के ल्यूक ने चार महीने पुराना रिश्ता टूटने के बाद अपना ये मिशन बीते शनिवार की सुबह शुरू किया।
    उन्होंने ब्रिस्टल पोस्ट से बातचीत में कहा, अगर किसी बुरी वजह से हमारा ब्रेकअप हुआ होता तो मैं ऐसा नहीं करता। लेकिन इस वक्त मेरे जहन में एक यही चीज है जो मैं कर सकता हूं। ल्यूक का कहना है कि वो कुछ ऐसा करना चाहते थे जिसे उनकी एक्स गर्लफ्रेंड नोटिस करे।
    उन्होंने बताया, मैं उसे बताना चाहता हूं कि मैं उससे कितना प्यार करता हूं। मैं चाहता हूं कि वो मेरा प्यार देखे और फिर फैसला करे कि उसे मेरी जिंदगी में रहना है या नहीं। मुझे पता है कि मेरी जगह पर कोई और होता तो वो उसे मनाने के लिए फूल भेजता, मैसेज करता या चि_ियां लिखता, लेकिन इससे चीजें और खराब ही होती हैं।
    सोशल मीडिया पर ल्यूक के इस अनोखे फैसले को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। किसी को यह बेहद रोमैंटिक लग रहा है तो किसी को कुछ ज्यादा ही अजीब।
    एक फेसबुक यूजर ने लिखा, आज भी ऐसे लोग दुनिया में हैं...बेहद रोमैंटिक! किसी ने कहा, अगर आप किसी से प्यार करते हैं तो आप उसे वापस पाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। शाबाश!
    एक महिला ने ट्विटर पर लिखा, महिलाओं को भी पुरुषों को छोडऩे का अधिकार है। मीडिया भी इस स्टॉकिंग वाले बर्ताव को रोमैंटिक बनाकर पेश करना बंद करे। वहीं कुछ लोगों का ल्यूक का यह काम किसी पीआर स्टंट से ज्यादा कुछ नहीं लग रहा है। चूंकि उन्होंने अपने इस अभियान का प्रसार सोशल मीडिया पर भी किया था इसलिए लोगों को लग रहा है कि उनका मकसद पब्लिसिटी पाना है।
    फिलहाल ल्यूक के सोशल मीडिया अकाउंट्स डिऐक्टिवेट हैं। वैसे, आपको ल्यूक का यह काम कैसा लगा? रोमैंटिक, स्टॉकिंग या पब्लिसिटी स्टंट? (बीबीसी)

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  • फर्जी बाबाओं से जुड़े विवाद लगातार उजागर होने के बाद हिंदू संतों की शीर्ष संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) ने सख्त रुख अख्तियार किया है। उसकी ओर से रविवार को 14 फर्जी बाबाओं की सूची जारी कर इनके बारे में न सिर्फ आम जनता तो सचेत किया गया बल्कि सरकार से भी इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है। सोशल मीडिया पर आम लोगों ने एबीएपी के इस कदम का स्वागत किया है। आलोक तिवारी ने ट्वीट कर सुझाव दिया है, ....अब बाकी अन्य समुदायों को भी ऐसी सूची जारी करनी चाहिए। वहीं फेसबुक पर सोम प्रभ ने सवाल उठाया है, सिर्फ 14 फर्जी बाबा की लिस्ट बाकी जो राजनीतिक दलों की सेवा में हैं और कारोबारी बाबा हैं उनका क्या होगा? सांप्रदायिक भाषण देने वाले साधु और साध्वियों की भी कोई सूची बने...।
    भारतीय जनता पार्टी ने जाने-माने इतिहासकार रामचंद्र गुहा को लीगल नोटिस भेजकर अपने बयान के लिए माफी मांगने को कहा है। सत्याग्रह की सहयोगी वेबसाइट स्क्रोलडॉटइन को दिए एक इंटरव्यू में रामचंद्र गुहा चर्चित पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या में संघ परिवार का हाथ होने की संभावना जताई थी। भाजपा ने कहा है कि अगर उन्होंने तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी नहीं मांगी तो उनके खिलाफ दीवानी और फौजदारी के तहत अदालती कार्रवाई की जाएगी। इस खबर के चलते रामचंद्र गुहा सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं और भाजपा समर्थकों ने उनकी खूब आलोचना की है। वहीं इस मामले पर कृष्णा ने ट्वीट कर पूछा है, सिर्फ रामचंद्र गुहा को निशाना क्यों बनाया गया है?... कई पत्रकारों और चैनलों ने जोर-जोर से यही बात कही है।
    इन दोनों खबरों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    दिग्विजय सिंह- मैं सम्माननीय अखाड़ा परिषद से पूछना चाहता हूं। क्या मनु स्मृति में किसी भगवा वस्त्र पहनने वाले को व्यापार करने की स्वीकृति है?
    आलोक पुराणिक- अखाड़ा परिषद ने फर्जी बाबाओं की घोषणा की है। लगे हाथ प्रमाणिक बाबागिरी का कोर्स भी घोषित कर देती। बाबाओं का स्किल इंडिया हो जाता।
    टी विद देव- अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 14 फर्जी बाबाओं की सूची जारी की है लेकिन इसमें राहुल 'बाबाÓ का नाम शामिल क्यों नहीं है?
    अनिल कुमार सिंह- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता आरोप लगाने की स्वतंत्रता (बिना सबूत के) से अलग है और यह बात रामचंद्र गुहा जैसे बुद्धिजीवियों पर भी लागू होती है।
    नितिन सुदर्शन- रामचंद्र गुहा, आपकी बात में कुछ भी गलत नहीं था। अब हम चाह रहे हैं कि आप इसके पक्ष में सबूत पेश करें या माफी मांगें।
    रोहित शर्मा- गौरी लंकेश की हत्या के मामले में रामचंद्र गुहा की कमाल की पड़ताल देखते हुए रॉ ने उनसे संपर्क किया है और अपना एजेंट बनने का प्रस्ताव दिया है। (सत्याग्रह)

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  • देश के प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में संपन्न हुए छात्र संघ चुनावों में लेफ़्ट ने जीत दर्ज़ की है.
    आईसा, एसएफआई और डीएसएफ़ के गठबंधन वाले पैनल यूनाइटेड लेफ़्ट ने चारों सीटों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया है.
    पीटीआई की ख़बर के मुताबिक अध्यक्ष पद पर यूनाइटेड लेफ़्ट की उम्मीदवार गीता कुमारी ने जीत दर्ज़ की है.
    इस बार के चुनावों की सबसे ख़ास बात यह रही कि सभी दलों ने अध्यक्ष पद के लिए महिला उम्मीदवारों को ही खड़ा किया था.
    एबीवीपी की जीत की अफ़वाह
    वैसे देर रात अफ़वाह उड़ी कि एबीवीपी ने चुनाव जीत लिया है. जिसके बाद कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट करके बधाई भी दे दी. लेकिन जब पता चला कि यह महज़ अफ़वाह है तो उहोंने ट्वीट हटा दिया लेकिन तब तक लोगों की नज़रें उस पर पड़ चुकी थीं.
    ट्वीट डिलीट कर दिया गया था लेकिन तब तक स्क्रीन शॉट लिए जा चुके थे.
    रिज़ल्ट आने के बाद से ही ट्विटर पर #UnitedLeft ट्रेंड कर रहा है. छात्र एक-दूसरे को बधाई तो दे ही रहे हैं साथ ही कई मज़ेदार कमेंट्स भी कर रहे हैं.
    दुष्यंत लिखते हैं कि एकबार फिर जेएनयू छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी हार गई. टैंक काम नहीं आए...सरकार को कुछ फ़ाइटर प्लेन रख देने चाहिए और हो सके तो कुछ सबमरीन भी कैंपस में रखवा देने चाहिए.
    मीणा लिखते हैं उन्होंने सीटें कम कर दीं, टैंक रखवा दिए, छात्र ग़ायब हो गए. सबकुछ हो गया फिर भी एबीवीपी हार गई.
    शेहला रशीद ने भी ट्वीट किया है और अमित शाह पर निशाना साधा है.
    एक बार फिर वही राग...
    चुनाव नहीं जीता तो क्या हुआ, दिल तो जीता. छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी की हार हुई है लेकिन उनसे जुड़े लोगों का कहना है कि हम भले ही चुनाव जीतने में कामयाब नहीं हुए लेकिन हमने लोगों का दिल ज़रूर जीता है.
    अक्षय गोयल लिखते हैं कि बदलाव की लहर चलाने में कामयाब रहे.
    अमन ने भी कुछ ऐसा ही ट्वीट किया है.
    एक अन्य ट्वीट में लेफ़्ट के एक साथ लड़ने को टारगेट किया गया है.बीबीसी

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  • भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ऐलान किया है कि 'अच्छे दिनÓ लाने का भाजपा का वादा अमल में आ चुका है। उन्होंने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है, साल 2014 से भाजपा ने सभी चुनावों में जीत हासिल की है। कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में लोगों ने गर्मजोशी से पार्टी को जनादेश दिया है। ये बातें साबित करती हैं कि लोग अच्छे दिन महसूस भी कर रहे हैं। अमित शाह का आगे कहना था कि लोगों द्वारा दिए गए बहुमत से बढ़कर इसका कोई सबूत नहीं है।
    भाजपा समर्थकों ने जहां सोशल मीडिया पर इस खबर को उत्साह के साथ शेयर किया है, वहीं विरोधियों और आम लोगों ने इस पर तंज कसते हुए टिप्पणियां की हैं। ट्विटर पर भूपेश कोली का कहना है, अच्छे दिन तो सिर्फ राजनीतिक पार्टियों के आए हैं जिनकी संपत्ति 300 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। आम आदमी को तो अब हर चीज पर टैक्स देना पड़ रहा है। फेसबुक पर मानवेंद्र कुमार ने पूछा है, यह समझ नहीं आ रहा कि अच्छे दिन भाजपा वालों के लिए हैं या आम जनता के लिए।
    कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह अपने एक ट्वीट के चलते आज सोशल मीडिया पर लोगों का निशाना बने हैं। शुक्रवार को उन्होंने अपने अकाउंट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बना एक मेमे रीट्वीट किया है जिसमें अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन पर चुटकी ली गई है। भाजपा समर्थकों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस महासचिव की खूब लानत-मलानत की है। इस पर शाहिद सिद्दीकी का ट्वीट है, जब आपके पास दिग्विजय सिंह जैसे दोस्त हों तो दुश्मनों की जरूरत नहीं होती....
    सोशल मीडिया में इन दोनों मसलों पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं- 
    सौरभ- मैं ज्यादा टैक्स दे रहा हूं, सब्जियों पर ज्यादा खर्च कर रहा हूं, पेट्रोल और किराने पर ज्यादा खर्च कर रहा हूं... कोई बताए कि किस कोण से अच्छे दिन आए हैं।
    रविंद्र त्यागी- अमित शाह का कहना है कि चुनाव जीतना ही अच्छे दिन हैं...अब समझ लीजिए कि किसके अच्छे दिन का वादा था।
    सिद्धार्थ- आठ सितंबर। क्या कमाल की तारीख है! आज संगीत से जुड़ी दो महान हस्तियों का जन्मदिन है- आशा भोसले और भूपेंद्र हजारिका। 
    शकुनि मामा- इस माहौल में अच्छे दिन आने की बात तभी कही जा सकती है, जब सच्चे दिन चले गए हों।
    फहीम अहमद- आज अमित शाह ने कहा कि अच्छे दिन आ चुके है अगर ये अच्छे दिन हैं तो बुरे दिन बहुत बेहतर थे।
    दीप सांखला- अमित शाह बता रहे हैं कि मोदीजी ने अच्छे दिन भोगवाने का नहीं, अनुभूत करवाने का वादा किया था।
    जुबीना अहमद- प्रधानमंत्री जनता द्वारा चुनकर आये हैं... वहीं दिग्विजय सिंह ने उन्हें गाली देकर बता दिया है कि अब कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं बचा।
    सफर- राहुल बाबा के साथ-साथ दिग्विजय सिंह भी 'कांग्रेस मुक्त भारत' अभियान में अपना पूरा योगदान दे रहे हैं। (सत्याग्रह)

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  • नई दिल्ली, 8 सितंबर। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों के सभी जिलों में गोहत्या रोकने के नाम पर हिंसा करने वालों पर लगाम कसने के लिए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को नोडल अफसर के तौर पर तैनात करने का आदेश दिया है।
    एक याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमिताव रॉय और एएम खानविलकर ने कहा कि ये नोडल अफसर इस पर नजर रखेंगे कि कथित गोरक्षक कानून अपने हाथ में ना लें और उनके खिलाफ जल्द मामला दर्ज किया जाए।
    ज्यादातर लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। विशाल प्रधान लिखते हैं कि यह एक बहुत अच्छा फैसला है और इस पर कार्यवाही भी होनी चाहिए। 
    अदालत का कहना है कि गोरक्षा के नाम पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर पहरा देने वालों के संबंध में राज्य सरकारों ने क्या कदम उठाए हैं, इसके बारे में अदालत को जानकारी दी जाए।
    अकबर अली ने कहा कि फैसला बिल्कुल सही है लेकिन फैसला आने में देर हुई है। हालांकि बहुत से लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने गौ-हत्याओं को भी रोकने की बात कही है। राहुल सैने ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट को गौ-तस्करों पर भी लगाम कसनी चाहिए। वहीं सैफ लिखते हैं कि कानून को अपने हाथ में लेने का हक किसी को नहीं है। अभिषेक राणा लिखते हैं कि सुप्रीम कोर्ट को गौ हत्या पर भी रोक लगानी चाहिए। गायों की तस्करी को भी रोकना चाहिए।  (बीबीसी)

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  • केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में सबसे बढिय़ा प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों में शुमार पीयूष गोयल ने अभी तीन दिन पहले ही रेल मंत्रालय का काम संभाला है, लेकिन आज बारह घंटों के भीतर एक के बाद एक तीन रेल हादसों ने उनका 'स्वागतÓ कर दिया। पहली घटना उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले की है जहां ओबरा के पास हावड़ा-जबलपुर शक्तिपुंज एक्सप्रेस के सात डिब्बे पटरी से उतर गए। ऐसी ही दूसरी घटना नई दिल्ली स्टेशन के पास हुई है। यहां रांची एक्सप्रेस के दो डिब्बे पटरी से उतरने की खबर है। वहीं महाराष्ट्र में खंडाला के पास एक मालगाड़ी के भी कुछ डिब्बे पटरी से उतरे हैं। सोशल मीडिया पर इन तीनों घटनाओं के जिक्र के साथ भारतीय रेलवे की सुरक्षा स्थिति पर चिंता जताते हुए ढेरों प्रतिक्रियाएं आई हैं।
    इन दुर्घटनाओं के बहाने यहां नए रेलमंत्री पीयूष गोयल पर भी कई तंजभरी टिप्पणियां आई हैं। कार्टूनिस्ट मंजुल का ट्वीट है, भारतीय रेल ने अपने नए मंत्री का स्वागत समारोह शुरू कर दिया है। फुरकान पटेल की चुटकी है, छह घंटे में दो हादसे-पीयूष गोयल ने तो रेल दुर्घटनाओं को बिजली की गति प्रदान कर दी है।
    सोशल मीडिया पर गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में आज भी आक्रोश जताते हुए प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। यहां कल एक ट्विटर यूजर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल हुआ था जिसमें गौरी की हत्या के संदर्भ में लिखा गया था, एक कुतिया कुत्ते की मौत क्या मरी सारे पिल्ले एक सुर में बिलबिला रहे हैं। इस यूजर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फॉलो करते हैं और इस वजह से सोशल मीडिया पर उनकी लानत-मलानत चल रही है। इसी के विरोध में आज ट्विटर पर ब्लॉकनरेंद्रमोदी टॉपिक ट्रेंड कर रहा है। यहां कई यूजर्स ने नरेंद्र मोदी को ब्लॉक करते हुए इसका स्क्रीन शॉट ट्वीट किया है। रवि पारेख का इस टॉपिक पर ट्वीट है, यह कितनी शर्मनाक बात है कि नरेंद्र मोदी उन लोगों को फॉलो करते हैं जिन्हें बात तक करने की तमीज नहीं है।
    इन दोनों मामलों पर सोशल मीडिया पर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं- 
    अमित तिवारी- ट्रेनें इतनी फिसल क्यों रही हैं...? पटरी की जगह नेताओं की जबान लगी है क्या!
    इंडियन पीपल- भाजपा के शासन में भारतीय रेल दिन-ब-दिन तरक्की कर रही है। पहले हफ्ते-दस हफ्ते में एकाध बार ट्रेन पटरी से उतरती थी, अब तो दिन में दो-दो बार उतर रही हैं।
    सतीश आचार्य- कर्नाटक में कानून-प्रशासन की हालत।
    टिटो एंटनी- मेरे ख्याल से ये दुर्घटनाएं सुनियोजित हैं ताकि लोगों को यकीन दिलाया जा सके कि भारतीय रेलवे सक्षम नहीं है और इस तरह इसके निजीकरण को जायज ठहराया जा सके।
    शकुनि मामा- मंत्री बदलने के बजाय अगर हम मंत्रालय का नाम बेपटरी मंत्रालय रख दें तो सब झंझट खत्म हो जाएगा।
    आजाद हिन्द सेना-पीयूष गोयल ने कह दिया है कि वो सुरेश प्रभु के काम को आगे बढ़ाएंगे। आज की दो रेल दुर्घटनाओं से इनका काम शुरू हो गया है।
    शिवराज पल्लेड- नरेंद्र मोदी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक करने का मतलब है- फासीवाद, आक्रामक राष्ट्रवाद और संप्रदायवाद को ब्लॉक करना।
    अंकित लाल- माफ कीजिए लेकिन मैं नरेंद्र मोदी को ब्लॉक नहीं करूंगा। मैं आवाज उठाउंगा और सुनिश्चित करूंगा कि मेरी आवाज सुनी जाए। (सत्याग्रह)

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  • कर्नाटक की चर्चित पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या का मामला  सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा में बना हुआ है। यहां आम लोगों से लेकर तमाम जानेमाने पत्रकारों और शख्सियतों ने इस घटना पर रोष जताया है और गौरी को श्रद्धांजलि दी है। वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता का ट्वीट है, बिना साहस के पत्रकारिता कुछ भी नहीं है। बिना असहमति के लोकतंत्र कुछ भी नहीं है। गौरी लंकेश आपके भीतर दोनों बातें कूट-कूटकर भरी थीं... आप हमें प्रेरणा देती रहेंगे। राजदीप सरदेसाई ने गौरी को श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट किया है, असहमति को गोलियों से दबाने वाले तुम लोग कायर हो। तुम्हारी गोलियां हत्या तो कर सकती हैं लेकिन ये साहसी लोगों को अपने इरादे से डिगा नहीं पाएंगी।
    55 साल की गौरी लंकेश को दक्षिणपंथ के खिलाफ उनके रुख के चलते जाना जाता था। कल उनकी हत्या के बाद दक्षिणपंथी रवैया रखने वाले कुछ लोगों ने इसे जायज ठहराते हुए सोशल मीडिया पर टिप्पणियां की थीं। इनके खिलाफ भी आक्रोश जताते हुए यहां प्रतिक्रियाएं दर्ज हुई हैं। स्टैंडअप कॉमेडियन और अभिनेता वीर दास ने लिखा है, इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा क्या थी, लेकिन अगर आप उसकी हत्या पर खुशी मना रहे हैं तो अपने प्रोफाइल से प्राउड और हिंदू जैसे शब्द हटा लीजिए। कल निखिल दधीच नाम के ऐसे ही एक ट्विटर अकाउंट से इस हत्या के बारे में लिखा गया था, एक कुतिया कुत्ते की मौत क्या मरी सारे पिल्ले एक सुर में बिलबिला रहे हैं। चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अकाउंट को फॉलो करते हैं इसलिए सोशल मीडिया पर इस ट्वीट के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लोगों ने उनकी खूब लानत-मलानत की है। फेसबुक पर विजय शंकर ने तंज किया है, मोदीजी आपको भी फॉलो करेंगे, बस आप अपना स्तर दधीच के स्तर से मिला लीजिए।
    पूरे देश में कई जगह पत्रकारों ने गौरी लंकेश की हत्या के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। दिल्ली के प्रेस क्लब में भी राष्ट्रीय स्तर के जाने-माने पत्रकारों ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाई है। सोशल मीडिया पर इस आयोजन की भी खूब चर्चा है। हालांकि यहां कुछ राजनेता भी पहुंचे थे और इस पर कई पत्रकारों ने आपत्ति जताते हुए टिप्पणियां की हैं। राहुल देव ने ट्वीट किया है, बेहतर होता गौरी लंकेश की शोक सभा में पत्रकार ही बोलते। राजनीतिक व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देनी हो तो उपस्थिति से दें। राजनीतिक भाषण न दें।
    इस हत्याकांड पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं- 
    ओम थानवी- वे गलतफहमी में हैं जो सोचते हैं कि एक को मारेंगे तो सौ डर जाएंगे। आततायी दौर में जो बोलता है, जान-हथेली पर लेकर चलता है। गौरी लंकेश के ट्वीट गवाह हैं। वे अंत तक निडर रहीं। डरपोक तो कायर हत्यारे निकले।
    अभिषेक मिश्रा- गौरी लंकेश के बहाने लोग स्वयं को चमकाने में लग गये हैं मोदीजी तो केरल में मर रहे स्वयंसेवकों पर भी कुछ नहीं बोलते तो गौरी लंकेश पर क्यों बोलेंगे।
    अमित तिवारी- लिखने-पढऩे-पूछने वाले मार दिए जाएंगे, तब काबुल से ढाका तक सब एक जैसे हो जाएंगे अखण्ड भारत...!
    आशीष प्रदीप- बेशक मुझे नहीं पता कि गौरी लंकेश को किसने मारा, पर मुझे यह साफ दिख रहा है कि उनके मरने पर खुश कौन है। (सत्याग्रह)

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  • आज शिक्षक दिवस है और सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने-अपने शिक्षकों के प्रति आभार जताते हुए कई पोस्ट लिखी हैं। वहीं इसके साथ यहां खूब मजेदार टिप्पणियां भी आई हैं, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई लोगों ने चुटकी ली है। ट्विटर पर फयाज याबगो का कहना है, मोदी ने अडवानी को शिक्षक दिवस पर शुभकामनाएं दी हैं। उम्मीद है कि आने वाले कुछ वर्षों में योगी यही काम मोदी के साथ करेंगे।
    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ भी अब मेट्रो ट्रेन वाले शहरों में शुमार हो गई है। मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ, राज्यपाल राम नाइक और अन्य लोगों की मौजूदगी में लखनऊ मेट्रो के पहले चरण का उद्घाटन हुआ है। हालांकि लखनऊ मेट्रो के पहले चरण के तहत साढ़े आठ किलोमीटर के इस खंड पर ट्रेनों का परीक्षण पिछले साल दिसंबर में शुरू हुआ था और इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने हरी झंडी दिखाई थी। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के समर्थकों और अन्य लोगों ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को जमकर ट्रोल किया है। इनका कहना है कि यह परियोजना पिछली सरकार की उपलब्धि है और आदित्यनाथ जबर्दस्ती इसका श्रेय ले रहे हैं। ट्विटर पर जय प्रकाश यादव की चुटकी है, सुना है कुछ नए जुमलेबाज फिर से मेट्रो को हरी झंडी दिखा रहे हैं। यह तो वही बात हो गई - राम नाम जपना, पराया काम अपना....
    वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मेट्रो उद्घाटन से जुड़ी अपनी तस्वीरें ट्विटर पर साझा करते हुए तंज किया है, इंजन तो पहले ही चल दिया था...डिब्बे तो पीछे आने ही थे। हालांकि यहां भाजपा समर्थक भी पीछे नहीं हैं। इनका तर्क है कि मेट्रो परियोजना को मोदी सरकार ने मंजूरी दी थी सो इसका श्रेय भाजपा को मिलना चाहिए।
    शिक्षक दिवस और लखनऊ मेट्रो के उद्घाटन पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं-
    अंजू प्रसाद- शिक्षक दिवस पर मोदीजी के उन गुरूजी को विशेष बधाई जिन्होंने मोदीजी को चाय बेचने के अलावा जुमलेबाजी की ट्रेनिंग दी।
    सीमा चतुर्वेदी- मोदी के गुरू अडवानी ने शिक्षक दिवस पर प्रार्थना की है- जैसा शिष्य मुझको मिला, वैसा दुश्मनों को भी ना मिले।
    दुष्यंत- क्या श्री नरेंद्र मोदी शिक्षक दिवस के पावन अवसर पर अपने उन शिक्षकों के नाम बताएंगे जिन्होंने उन्हें ग्रेजुएशन में पढ़ाया है? और क्या ऐसा ही श्रीमती स्मृति ईरानी करेंगी?
    कंचन श्रीवास्तव- लखनऊ मेट्रो के उद्घाटन के दिन समाजवादी पार्टी ने मास्टर-स्ट्रोक खेला है। यह बताता है कि क्यों उत्तर प्रदेश भारतीय राजनीति का केंद्र है।
    आरजे राघव- पहले - मुस्कुराइए आप लखनऊ में हैं।
    अब- खींसें निपोरिए, आप मेट्रो लखनऊ में भी हैं
    सुशील बागी- कोई बताएगा कि लखनऊ मेट्रो की सवारी पहले गाय करेगी या इंसान?
    स्निग्धा पर्ली जैन- योगी आदित्यनाथ ने पांच महीने में मेट्रो चलवा दी। उम्मीद है कि वे अगले पांच महीनों में बुलेट ट्रेन भी चलवा देंगे। (सत्याग्रह)

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