अंतरराष्ट्रीय

  • एक अमरीकी लड़का दुनिया का पहला बच्चा बन गया है जिसके दोनों हाथ प्रत्यारोपित किए गए हैं.
    प्रत्यारोपण करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि अब वह बच्चा बेसबॉल बैट आसानी से घूमा रहा है. 10 बरस के ज़ायन हार्वे को नए हाथ मिले हैं और उसके हौंसले को नई उड़ान.
    हाथ प्रत्यारोपित करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि यह विस्मित करने वाला है.
    ज़ायन अब लिख सकता है, खा सकता है, ख़ुद से कपड़े बदल सकता है और बैट भी पकड़ सकता है. ज़ायन को हाथ एक डोनर से मिला है.
    मेडिकल जांच से साबित हुआ है कि ज़ायन के मस्तिष्क ने उस हाथ को अपने हाथ की तरह स्वीकार किया है.
    फिलाडेल्फिया के चिल्ड्रन हॉस्पिटल में ज़ायन का इलाज चला था. डॉक्टर सांद्रा अमराल ज़ायन का इलाज करने वाले डॉक्टरों की टीम में शामिल थे.
    उन्होंने बीबीसी से कहा कि ज़ायन की स्थिति में लगातार तेज़ी से सुधार हो रहा है. उन्होंने कहा, "वह अब बैट घुमा सकता है और अपना नाम भी लिख पा रहा है. उसकी अनुभूति में लगातार सुधार हो रहा है और यह हमारे लिए विस्मित करने वाला है. अब वह अपने मां के गाल पर हाथ से थपकी दे सकता है." डॉक्टर अमराल ने कहा, "यह सबूत है कि उसके मस्तिष्क ने नए हाथों को स्वीकार कर लिया है." डॉक्टरों की टीम ने इस अभूतपूर्व कामयाब कहानी का 'मेडिकल नोट्स द लैन्सेंट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल' में छापा है.
    ज़ायन का जन्म दोनों हाथों के साथ हुआ था, लेकिन जब वह दो साल का था तो दोनों हाथ काटने पड़े थे.
    ज़ायन के ही शब्दों में, "जब मैं दो साल का था तो दोनों हाथ काटने पड़े थे क्योंकि मैं बीमार था."
    ज़ायन को जानलेवा इन्फ़ेक्शन हो गया था. डॉक्टरों को ज़ायन के दोनों हाथ काटने पड़े थे. ज़ायन की किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया था.
    दो साल डायलिसिस पर रहने के बाद चार साल की उम्र में ज़ायन की किडनी का प्रत्यारोपण हुआ. किडनी ज़ायन की मां से ली गई थी. इसके चार साल बाद ज़ायन को नया हाथ मिला.
    ज़ायन के हाथ की सर्जरी जून 2015 में की गई थी. यह अपने आप में एक बड़ा जोखिम था. हालांकि दोनों हाथों का प्रत्यारोपण की ये पहली घटना नहीं थी. 
    इससे पहले 1998 में भी हुआ था. यह सबसे कम उम्र में किया गया प्रत्यारोपण है. डॉक्टरों का कहना है ज़ायन उनके लिए मिसाल की तरह है. जिनमें नए अंगों का प्रत्यारोपण किया जाता है उन्हें जीवन भर एंटी-रिजेक्शन दवाई खानी पड़ती है और इन दवाइयों का बुरा साइड इफेक्ट होता है. इसका मतलब यह हुआ कि सर्जरी पर जोखिम का साया हमेशा बना रहता है. ज़ायन किडनी के लिए दवाई पहले से ही खा रहा है. 18 महीने बाद इसका मूल्यांकन किया जाएगा. हालांकि ज़ायन के मामले में मेडिकल टीम आश्वस्त है कि उसे इसका फ़ायदा होगा. (बीबीसी)

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  • लंदन। बीते गुरुवार को पूर्वी लंदन में पांच लोगों पर तेजाब फेंकने की घटनाओं के बाद एसिड से संबंधित कड़े कानून की मांग तेज हो गई है। इन मांगों में एसिड की बिक्री पर पाबंदी की मांग भी शामिल है।
    पुलिस के मुताबिक एसिड फेंके जाने की घटनाओं में साल 2012 की तुलना में दो गुना वृद्धि हुई है और ऐसी घटनाएं ज्यादातर लंदन में हुई हैं। एसिड अटैक के लिए पहले से ही इंग्लैंड में उम्र कैद की सजा का प्रावधान है। गृहमंत्री एम्बर रड ने संडे टाईम्स ने कहा कि वो चाहती हैं एसिड अटैक के दोषियों को इस कानून की ताकत का एहसास हो।
    राजनेता और एसिड अटैक से पीडि़त लोग इन हमलों में शामिल लोगों को और कठोर दंड देने की मांग कर रहे हैं। एसिड अटैक में शामिल लोगों के खिलाफ मामले में मौजूदा कानून की समीक्षा की जाएगी और इस बात पर विचार किया जाएगा कि एसिड अटैक के पीडि़तों को कैसे मदद प्रदान की जा सकती है। इसके अलावा किसी के पास एसिड बरामद होने या फिर किसी की मदद से हमले करने के इरादे साबित होने की स्थिति में चार साल तक कैद की सजा हो सकती है। नेशनल पुलिस चीफ कौंसिल (एनपीसीसी) का कहना है कि छह महीने के दौरान इंग्लैंड और वेल्स में 400 से अधिक एसिड अटैक किए गए हैं। एम्बर रड ने एसिड अटैक से प्रभावित लोगों के बारे में कहा कि एसिड अटैक एक भयानक अपराध हैं। इसमें पीडि़तों पर शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि इस तरह के हमलों को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।
    एम्बर रड ने कहा है कि एसिड अटैक से संबंधित कानून पहले से ही काफी सख्त है। कई मामलों में एसिड अटैक के दोषी उम्र कैद तक की सजा काट रहे हैं, लेकिन हम अपनी जवाबदेही को और बेहतर कर सकते हैं और इसे करेंगे। इंग्लैंड में मौजूदा कानून के तहत अगर पुलिस किसी ऐसे व्यक्ति को रोकती है जिसके पास एसिड है तो पुलिस को यह साबित करना पड़ता है कि एसिड का उपयोग गलत उद्देश्यों के लिए किया जाना था।
    एसिड अटैक की एक पीडि़त केटी पाइपर कहती हैं कि इन हमलों के पीडि़तों को ताउम्र इसके दुष्परिणामों को झेलना पड़ता है। ऐसे हमलों में शामिल लोगों को इतने कड़े दंड मिलने चाहिए कि उनके अंदर डर पैदा हो। स्कार्स, बन्र्स और हीलिंग मेडिकल जर्नल में छपे एक खत में उन्होंने लिखा है कि मुझे हमेशा ऑपरेशन और थेरेपी से गुजरना पड़ता है। एसिड अटैक के पीडि़तों की ऐसी स्थिति हो जाती है जैसे कि वो उम्रकैद झेल रहे हों। (बीबीसी)

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  • कनाडा। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो शनिवार को एक नन्हे जस्टिन ट्रूडो से मिले। नन्हे जस्टिन एक सीरियाई शरणार्थी की संतान हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री का धन्यवाद करने के लिए अपने बेटे का नाम उनके नाम पर रख दिया था। कनाडा ने गृहयुद्ध प्रभावित सीरिया के इस परिवार को शरण दी है। ढाई साल के नन्हे जस्टिन का पूरा नाम जस्टिन ट्रूडो एडम बिलान है। 
    (बाकी पेजï 5 पर)
    शनिवार को कैलगरी स्टैम्पीड ब्रेकफास्ट के दौरान जब नन्हे जस्टिन प्रधानमंत्री जस्टिन से मिले तो वो चैन से सो रहे थे।
    नन्हे जस्टिन का जन्म मई में कैलगरी में हुआ था। युद्धग्रस्त सीरिया को छोड़ कर कई महीनों पहले उनके माता-पिता यहां आकर बस गए थे। वो मूल रूप से सीरिया की राजधानी दमिश्क के निवासी थे।
    बीते साल फरवरी में वो मॉन्ट्रियल आए थे। प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सीरियाई शरणार्थियों से मिलने एयरपोर्ट आते हैं, लेकिन किसी कारण वो मॉन्ट्रियल नहीं आ सके थे। लेकिन नन्हे जस्टिन के माता-पिता मोहम्मद और आरफा बिलान को लगा कि उन्हें प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करने के लिए कुछ करना चाहिए, तो उन्होंने अपने नए जन्मे बच्चे का नाम उनके नाम पर रख दिया।
    नवंबर 2015 से जनवरी 2017 के बीच 40 हजार से अधिक सीरियाई शरणार्थियों को कनाडा ने पनाह दी है। इनमें से करीब एक हजार शरणार्थी कैलगरी में बस गए हैं। इस साल जनवरी में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सात मुस्लिम बहुल देशों से आने वाले शरणार्थियों पर रोक लगा दी थी। उस वक्त कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने युद्ध और चरमपंथ से भाग रहे लोगों की मदद करने की अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
    फरवरी में ओंटेरियो में प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करने के लिए एक अन्य सीरियाई दंपत्ति ने भी अपने बेटे का नाम जस्टिन रखा था। (बीबीसी)

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  • मुंबई। बॉलीवुड के मिस्टर पर्फेक्शनिस्ट आमिर खान की मोस्ट अवेटेड मूवी 'दंगल' रिलीज हो चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दंगल देशभर में करीब 4300 स्क्रीन्स पर रिलीज की गई है। हालांकि यूएस-कनाडा में दंगल दो दिन पहले ही रिलीज की जा चुकी है और फिल्म का फर्स्ट डे कलेक्शन भी बेहतरीन रहा है। ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने दंगल के फर्स्ट डे कलेक्शन को लेकर ट्वीट किया है। इसके मुताबिक फिल्म ने यूएस, यूएई और यूके समेत ओवरसीज में करीब 11.41 करोड़ की कमाई की है। इंडिया में कर सकती है 400 करोड़ की कमाई...

     
     

    ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा के मुताबिक, अच्छी ओपनिंग की बदौलत यह फिल्म इंडिया में 400 करोड़ रुपए तक की कमाई कर सकती है। एक और ट्रेड एनालिस्ट अमूल मोहन के मुताबिक, फिल्म की शानदार ओपनिंग से लगता है कि यह ‘सुल्तान’ की कमाई को पीछे छोड़ देगी। बता दें कि इससे पहले आमिर की गजनी इंडिया में 100 करोड़ क्लब, 3 इडियट्स ने 300 करोड़ क्लब और पीके ने 400 करोड़ क्लब में एंट्री ली थी।
     
    भारत में फर्स्ट डे कमा सकती है 30 करोड़...
    ओवरसीज में दंगल करीब 1000 स्क्रीन्स पर रिलीज की गई। यूएस और कनाडा में फिल्म बुधवार को ही रिलीज हो गई थी। एक अनुमान के मुताबिक भारत में फिल्म का फर्स्ट डे बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 25 से 30 करोड़ रुपए तक हो सकता है। हालांकि अभी इसके आंकड़े नहीं आए हैं। इससे पहले आमिर की फिल्म 'पीके' भी 2014 में दिसंबर में ही रिलीज हुई थी। 'पीके' ने वर्ल्डवाइड करीब 735 करोड़ रुपए की कमाई की है। बता दें कि दंगल हरियाणवी पहलवान महावीर सिंह फोगाट की बायोपिक है। इसमें महावीर सिंह अपनी बेटियों को इंटरनेशनल लेवल का रेसलर बनाते हैं।

     

     

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रायपुर : भौगोलिक दृष्टि से छत्तीसगढ़ के अत्यधिक दुर्गम इलाके में स्थित अबूझमाड़ क्षेत्र के 44 स्कूली बच्चों को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के वायदे के अनुरूप राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण का सुनहरा मौका मिला है। नारायणपुर जिले में अबूझमाड़ क्षेत्र के विकासखंड मुख्यालय ओरछा के शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल के इन बच्चों का अध्ययन दल आज सवेरे रायपुर पहुंचा, जहां वे कालीबाड़ी स्थित आदर्श पोस्ट मेट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास परिसर में कुछ देर के लिए ठहरे थे। पहली दिल्ली यात्रा की खुशी उनके चेहरों पर साफ झलक रही थी। इनमें कुमारी बबीता नाग, कुमारी फूलमती गोटा, श्री मनोज कुमार पोडियाम, रैनूराम बड्डे, राजकुमार कश्यप, राजूराम उसेंडी ने कहा कि शासन की पहल पर हमें देश की राजधानी जाने का मौका मिला है। यहां अध्ययन भ्रमण से हमें देश के धरोहरों सहित ज्ञान-विज्ञान की जानकारी मिलेगी। उन्होंने प्रसन्नता जाहिर करते हुए बताया कि वे 18 नवम्बर तक 10 दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम में पहली बार रेल गाड़ी में बैठेंगे और देश की राजधानी दिल्ली भ्रमण कर देखेंगे। भ्रमण दल में शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल ओरछ

  •  रायपुर : भौगोलिक दृष्टि से छत्तीसगढ़ के अत्यधिक दुर्गम इलाके में स्थित अबूझमाड़ क्षेत्र के 44 स्कूली बच्चों को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के वायदे के अनुरूप राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण का सुनहरा मौका मिला है। नारायणपुर जिले में अबूझमाड़ क्षेत्र के विकासखंड मुख्यालय ओरछा के शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल के इन बच्चों का अध्ययन दल आज सवेरे रायपुर पहुंचा, जहां वे कालीबाड़ी स्थित आदर्श पोस्ट मेट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास परिसर में कुछ देर के लिए ठहरे थे। पहली दिल्ली यात्रा की खुशी उनके चेहरों पर साफ झलक रही थी। इनमें कुमारी बबीता नाग, कुमारी फूलमती गोटा, श्री मनोज कुमार पोडियाम, रैनूराम बड्डे, राजकुमार कश्यप, राजूराम उसेंडी ने कहा कि शासन की पहल पर हमें देश की राजधानी जाने का मौका मिला है। यहां अध्ययन भ्रमण से हमें देश के धरोहरों सहित ज्ञान-विज्ञान की जानकारी मिलेगी।     उन्होंने प्रसन्नता जाहिर करते हुए बताया कि वे 18 नवम्बर तक 10 दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम में पहली बार रेल गाड़ी में बैठेंगे और देश की राजधानी दिल्ली भ्रमण कर देखेंगे। भ्रमण दल में शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल ओरछा के कक्षा 11वीं में अध्ययनरत 21 बालकों और 23 बालिकाओं सहित 44 विद्यार्थी, सात शिक्षक, पर्यवेक्षक तथा अधिकारी और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल है। यह दल आज दोपहर 12.30 बजे रेलवे स्टेशन रायपुर से सम्पर्क क्रांति एक्सप्रेस द्वारा दिल्ली के लिए रवाना हो गया है। अपने दिल्ली प्रवास के दौरान राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री आदि महत्वपूर्ण व्यक्तियों से भेंट के दौरान स्मृति चिन्ह भेंट करने नारायणपुर जिले की कला-संस्कृति को अभिव्यक्त करते कई धातु शिल्प भी साथ ले गए हैं।      राज्य के अबुझमाड़िया जनजाति के विद्यार्थी इस भ्रमण कार्यक्रम के माध्यम से देश के ऐतिहासिक धरोहर और ज्ञान-विज्ञान सहित विकास गतिविधियों से परिचित हो सकेंगे। इस दौरान भ्रमण दल द्वारा देश की राजधानी दिल्ली में संसद भवन, लालकिला, कुतुम्ब् मीनार, राजघाट, इंडिया गेट, राजपथ, तारामंडल, विज्ञान भवन , लोटस मंदिर, अक्षर धाम, हुमायु का मकबरा, खेलगांव, नार्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक, बिरला मयूजियंम, मेट्रो रेल, अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा, थल सेना, वायु सेना, नौसेना मुख्यालय, हैदराबाद हॉउस, अलग-अलग देशों के राजदूत का कार्यालय, मीडिया प्रबंधन संस्थान, उच्चतम न्यायालय तथा राष्ट्रीय बुक ट्रस्ट आदि का भ्रमण कर अवलोकन किया जाएगा। उसके अलावा भ्रमण दल के अबूझमाड़िया विद्यार्थियों द्वारा देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, महानिदेशक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, तीनों सेनाओं के प्रमुख पदाधिकारी, सुप्रीम कोर्ट के पदाधिकारी तथा राजदूत आदि महत्वपूर्ण व्यक्तियों से सौजन्य मुलाकात भी की जाएगी।  यात्रा के दौरान विभिन्न स्थल, व्यक्ति, संरचना, निर्माण, नीतियां इत्यादि के प्रत्यक्ष अवलोकन करने के उपरांत ये विद्यार्थी राष्ट्र निर्माण तथा अबूझमाड़ क्षेत्र की सर्वांगीण प्रगति में सहायक होंगे। इस दौरान विद्यार्थीगण इतिहास संविधान, कार्यपालिका, न्यायपालिका, आर्किटेक्चर, वैज्ञानिक प्रगति, परिवहन के सुलभ एवं द्रुतगामी साधन से परिचित होंगे। संचार माध्यमो का जीवन में प्रभाव से अवगत होंगे। राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय सम्बन्ध की समझ तथा ज्ञान-विज्ञान से परिचित होंगे। उल्लेखनीय है कि अबूझमाड़ लगभग 4975 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ 36 ग्राम पंचायतों का 237 ग्राम में छोटे छोटे बसाहटो में विस्तृत क्षेत्र है जंहा लगभग 4000 परिवार विशेष पिछड़ी जनजाति के अबुझमाड़िया पाये जाते है। इसमें से लगभग 200 गांव आबाद है जो ओरछा जनपद के अंतर्गत समाहित है। कुल 199 गांव में पेयजल की सुविधा एवं 47 गांव विधुतिकृत किये जा चुके हैं।     अबूझमाड़ के स्कूली बच्चे दिल्ली के लिए रवाना : शैक्षणिक भ्रमण पर पहली बार देखेंगे राष्ट्रीय राजधानी को         Chhattisgarh Article       3 Total विशेष रिपोर्ट

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  • पठानकोट रिपोर्टिंग मामला, NDTV पर 24 घंटे का बैन

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  • भोपाल : भोपाल सेंट्रल जेल से कथित तौर पर फरार आठ कैदियों के एनकाउंटर के मामले में अब मध्य प्रदेश सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं...

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