इंटरव्यू

कभी नहीं कहूंगा कि मैं ही चौथी बार सीएम बनूंगा, मगर केंद्रीय नेतृत्व पूछेगा तो मैं इच्छा जरूर जाहिर करूंगा कि छत्तीसगढ़़ मुझे सबसे ज्यादा पसंद है...


5000 दिन

विशेष साक्षात्कार

सुनील कुमार

राज्य में तीसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में 14 अगस्त को 5 हजार दिन पूरा करने वाले डॉ. रमन सिंह से 'छत्तीसगढ़' ने उनके राजनीतिक जीवन से लेकर प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उनका कहना है कि सामान्यत: अपने बारे में निर्णय तो अभी तक उन्होंने नहीं लिया, पूरी राजनीतिक यात्रा में जो भी दायित्व केंद्रीय नेतृत्व ने दिया, उन्हीं का निर्वहन उन्होंने किया है। उनका कहना है- चौथी बार के बारे में भी कभी नहीं कहूंगा कि मैं ही मुख्यमंत्री बनूंगा। मगर जब केंद्रीय नेतृत्व पूछेगा तो मैं जरूर जाहिर करूंगा कि छत्तीसगढ़़ मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। राज्य की जिम्मेदारी और काम जो मैंने आगे बढ़ाया है, उसको करने की प्राथमिकता आज भी है, और कल भी रहेगी।

 

सवाल- 5000 दिन लगातार सरकार का मुखिया बने रहना दुनिया में कहीं भी लोकतंत्र में बहुत कम होता है। आपके लिए यह क्या मायने रखता है? कैसा लग रहा है? 
जवाब- 5 हजार दिन की यात्रा में जब पलटकर देखता हूं तो लगता है कि एक लंबा समय गुजर गया। लेकिन जनता का जो स्नेह, आशीर्वाद मिला और संगठन के लोगों का जो साथ मिला, तो लगता है कि यह समय जल्द बीत गया। जनता के आशीर्वाद के बदौलत इस लंबी यात्रा को आसानी के साथ पूरा करने में सफल रहा।


सवाल- पहली बार आपको कब लगा था कि आप मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं? 
जवाब- जब मैं दिल्ली से प्रदेश भाजपाध्यक्ष बनकर आया। विधानसभा के चुनाव में हम सबकी भागीदारी रही। चुनाव के नतीजे आने लगे, उस समय लोगों से बातचीत होती रहती थी, तब मुझे मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट नहीं किया गया था। छत्तीसगढ़ में किसी को मुख्यमंत्री के रूप प्रोजेक्ट नहीं करने का फैसला संगठन ने पहले ही ले लिया था। सबके मन में उत्सुकता थी कि पहले तो हमारी सरकार बने। जब जीतकर हमारे विधायक आए, चर्चा हुई, संगठन के वरिष्ठों से चर्चा हुई, राष्ट्रीय नेतृत्व से बात हुई, तब मुझे लगा कि मैं भी मुख्यमंत्री पद का एक संभावित प्रत्याशी हो सकता हूं।
मुझे अपने नाम के लिए तब भी दावा करने जैसा नहीं करना पड़ा। मैंने पहले तय भी नहीं किया था। जब केंद्रीय मंत्री के रूप में इस्तीफा देकर आया, मुझे कई लोगों ने कहा कि ये शर्त होनी चाहिए कि आप यदि दिल्ली की सरकार में मंत्री पद छोड़ रहे हैं तो आपको भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करें या आपको मुख्यमंत्री बनाया जाए। मैंने दोनों बातों से सहमति व्यक्त नहीं की थी। मुझे लगा कि स्वाभाविक रूप से विधायकों के बीच से जो आएगा वही मुख्यमंत्री बनेगा। 
एक अच्छी प्रक्रिया हुई और सबने मिलकर आम सहमति के साथ चुना। पहली बार से लेकर तीसरी बार तक कभी नौबत नहीं आई कि मुख्यमंत्री के लिए मतदान हो, संख्या गिनी जाए। करीब-करीब सौ फीसदी लोगों ने आम सहमति के साथ चुना।


सवाल- पहले दिन आपने यह सोचा था कि यह सफर तीन कार्यकाल का होगा?
जवाब- उस समय इस बात का बिल्कुल एहसास नहीं था। पांच साल का जो दायित्व मिला है, उसका बेहतर तरीके से क्रियान्वयन कर सकूं, यही एक लक्ष्य था।


सवाल- आपने जब शुरुआत की, तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी, लेकिन उन दस से अधिक बरसों में भी आपने केंद्र के साथ बिना टकराहट के कैसे काम कर लिया? और क्या अब केंद्र में आपकी पार्टी की ही सरकार रहने से आपको अधिक सुविधा हो रही है?
जवाब- मुझे लगता था कि मुख्यमंत्री के नाते मेरा दायित्व राज्य का है और मुझे अपनी बातों को केंद्र सरकार के सामने रखना चाहिए। कई मामलों में मतभेद भी हुआ करते थे, बहुत सारी बातों में सहमति भी बनती थी। लेकिन गंभीर टकराव की स्थिति नहीं आई। तब छत्तीसगढ़ ने बेहतर प्रदर्शन किया और उनके सारे मापदंडों में हम खरे उतरे। इसलिए यूपीए की सरकार में भी सर्वश्रेष्ठ राज्य का अवार्ड मिला। कृषि, उद्योग, सामाज समेत कई क्षेत्रों में पुरस्कृत किया गया।

सवाल- अपने कार्यकाल में अब आपको सबसे अधिक तसल्ली किस काम से हुई है? किस योजना से या किस कामयाबी से? पीडीएस? नया रायपुर? रेल कॉरिडोर?
जबाव- सबसे बड़ी तसल्ली, साठ लाख गरीब परिवारों के लिए दो वक्त के भोजन की व्यवस्था। मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना, जिसे देश की सबसे बड़ी, सबसे बेहतर और सफल योजना बनाने में हम सफल रहे।
और जहां तक नई राजधानी का सवाल है, राजधानी का निर्माण आने वाले सौ बरसों की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाता है। हमने कम से कम 50 साल की कार्ययोजना बनाई है। मुझे लगता है कि एक बेहतर आकार में नई राजधानी का निर्माण हुआ। जिस प्रकार नया रायपुर विकसित हो रहा है, हम उम्मीद करते हैं कि आने वाली सदी में एक बेहतर राजधानी बनेगा। आज भी देश के लोग मानते हैं कि 21वीं सदी की यह बेहतरीन राजधानी है। अभी तो कुछ साल ही हुए हैं, जिस तरह से यह विकसित हो रही है, उस तरह की सोच किसी अन्य राज्य में देखने में नहीं आ रही है। हमने न केवल सोचा बल्कि अपनी सोच को साकार भी किया। निवेश आने लगे हैं। स्टेडियम बन गया, गॉर्डन, जंगल सफारी बना, सेक्रेटेरिएट आ गया, होटल, मॉल, व्यावसायिक कॉम्लेक्स, आवासीय परिसर तेजी से विकसित हो रहे हैं। हम एक ग्रीन कैपिटल के रूप में इसे विकसित कर रहे हैं।


सवाल- इसके अलावा और किन बातों को आप इस मौके पर सफलता में गिनेंगे? छत्तीसगढ़ की आपकी कुछ योजनाओं को बाकी प्रदेशों में भी लागू किया गया है? जैसे पीडीएस, या हमर छत्तीसगढ़...
जवाब- छोटा राज्य होने के बाद भी छत्तीसगढ़ ने देश में एक मॉडल विकसित किया है। हमने खुद की मेहनत से यह मॉडल तैयार किया। खाद्यान्न सुरक्षा कानून के रूप में हमने देश को एक बेहतर मॉडल दिया है। कौशल उन्नयन के लिए न केवल कानून बनाया वरन् क्रियान्वयन भी किया। सभी 27 जिलों में हमारे आजीविका कॉलेज काम कर रहे हैं। धान खरीदी में हमने जो सिस्टम तैयार कर क्रियान्वित किया है वह अपने आप में एक मॉडल है। आदिवासी इलाकों में विकास के लिए बस्तर और सरगुजा विकास प्राधिकरण का गठन ही नहीं किया वरन संभागस्तर पर उन इलाकों में बच्चों की शिक्षा के लिए उड़ान, प्रयास आदि योजनाओं का संचालन कर रहे हैं। दंतेवाड़ा में हमने एक एजुकेशन हब विकसित कर मॉडल बनाया है। जिन स्कूलों के भवन नक्सलियों द्वारा ध्वस्त कर दिए गए थे, उन स्कूलों को पोटाकेबिनों के माध्यम से फिर से शुरू कर शिक्षा-व्यवस्था को कमजोर नहीं पडऩे दिया गया। मुझे लगता है कि आदिवासी विकास के लिए छत्तीसगढ़ ने जो मॉडल विकसित किया है वह अपने आप में पूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी भी ने इसकी तारीफ की है। 


सवाल- आप प्रदेश को कहाँ से शुरू करके कहाँ तक लेकर आये हैं? छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था आज भी खनिज आधारित ही है, गैरखनिज उद्योगों या कारोबार की कमाई उतनी क्यों नहीं बढ़ पाई? 
जवाब- छत्तीसगढ़ की ताकत खनिज तो रही है। डीएमएफ (जिला खनिज फंड) आने के बाद हमें और शक्ति मिली है। लेकिन इसके अतिरिक्त जो संसाधन हैं वे भी मजबूत हैं, जो आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ को आर्थिक दृष्टि से और मजबूत करेंगे। उद्योग के क्षेत्र में हमने बेहतर नीतियां बनाई हैं। जीएसटी लगने के बाद सर्विस सेक्टर में बेहतर संभावना बनेगी। छत्तीसगढ़ आत्मनिर्भर राज्य के रूप में आगे बढ़ रहा है और अपने संसाधनों से राजस्व पैदा करने वाला छत्तीसगढ़ देश के एक नंबर के राज्यों में है। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार हिंदुस्तान में हम सामाजिक क्षेत्रों में सबसे ज्यादा खर्च कर रहे हैं। 
सवाल- छत्तीसगढ़ में किसानों की आत्महत्या खबरों में हैं, क्या सरकार की किसान-कल्याण की योजनाओं में कोई कमी है?
जवाब- यह कहा जाए कि किसान आत्महत्या का कारण उसकी किसानी, उसके उत्पादन से, उसके कर्ज से है, तो यह सही नहीं होगा। सारी रिपोर्टों के आधार पर कह सकता हूं कर्ज का ज्यादा असर नहीं हुआ है। सबसे ज्यादा आत्महत्या की प्रवृत्ति सम्पन्न जिलों में ही देखने को मिली है पलायन करने वाले जिलों से नहीं। इसका मतलब तो यह है कि हम बेहतर खेती कर रहे हैं, कर्ज भी ले रहे हैं। मगर ये नहीं कह सकते कि सबसे पिछड़े और सबसे ज्यादा पलायन करने वाला जो जिला है वहां आत्महत्या की दर बहुत कम है। 
ये आत्महत्या पारिवारिक कलह से होती है बीमारी से होती है अन्य कई कारण भी जुड़ जाते हैं। छत्तीसगढ़ की नब्बे फीसदी जनता तो किसान है उसकी पहचान किसान के रूप में है और इसलिए मरने वाले की पहचान किसान के रूप में ही की जाती है, आत्महत्या का कारण जो भी रहा हो। 
जो किसान लोन ले रहे हैं वे पटाते भी हैं। उनका कर्ज-भुगतान सबसे अच्छा है। छत्तीसगढ़ के लगभग 85 फीसदी किसान कर्ज पटाते हंै। जो कर्ज पटाते हैं वो जमीन भी लेते हैं। नए खेत लेते हैं, उसके बाद भी आत्महत्या कर रहे हैं। तो यह कारण नहीं है कि कर्ज की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं। बहुत ही कम किसान हंै जो इसके कारण आत्महत्या करते हैं। किसान आत्महत्या का मूल कारण अलग अध्ययन का विषय है कि किसके कारण यह प्रवृत्ति आती है। मुझे नहीं लगता कि छत्तीसगढ़ का किसान कर्ज के बोझ से दबा हुआ है। हम शून्य फीसदी ब्याज दर पर कर्ज दे रहे हैं। कर्ज की वजह से जो दबाब रहता है वह तो है नहीं छत्तीसगढ़ में। 


सवाल- अब कार्यकाल का आखिरी बरस शुरू होने को है, ऐसे कौन से काम रहे जिनको ना कर पाने का आपको मलाल है, या रहेगा? 
जवाब- काम के नाते कोई मुख्यमंत्री संतुष्ट तो हो सकता नहीं। पर हमने जो यात्रा 2003 से शुरू की और आज 2017 तक पहुंचे हैं, इस यात्रा में हमारा लक्ष्य था कि पूरे छत्तीसगढ़ में शांति हो, इससे कुछ कदम पीछे रह गए। लेकिन भविष्य में शतप्रतिशत सफलता बिल्कुल तय है, इसके लिए हम तैयार हैं।


सवाल- हिंदुस्तान की राजनीति में ऐसा कम ही होता है कि किसी इतनी बड़ी पार्टी में तीन-तीन कार्यकाल बिना किसी घरेलू राजनीतिक चुनौती के निकल पाए, आपके सामने ऐसी चुनौती नहीं आई? या पार्टी ने आपका कोई बेहतर विकल्प नहीं पाया? 
जवाब- देखिये, महात्वाकांक्षा सबके अंदर रहती है। जो भी राजनीतिक क्षेत्र में काम करते हैं उनके अंदर एक सोच और नेतृत्व करने की कल्पना रहती है। लेकिन छत्तीसगढ़ में इस बात का मुझे सौभाग्य मिला कि सत्ता और संगठन में बेहतर तालमेल और केंद्रीय नेतृत्व ने जितना छत्तीसगढ़ को देखा, जो समझा और जो जवाबदारी दी, और जो बेहतर तालमेल बना रहा, उससे तीसरी बार भी नेतृत्व करने का अवसर मिला। इसे देखते हुए मैं कह सकता हूं कि हमारे संगठन की खूबी है कि वह ऐसे बड़े निर्णय ले सकता है।


सवाल- तीन कार्यकाल के मुख्यमंत्री के बाद क्या? चौथे बार के मुख्यमंत्री? या केंद्र सरकार में कोई भूमिका? या फिर पार्टी में भूमिका? आपकी निजी पसंद क्या होगी?
जबाव- सामान्यत: अपने बारे में निर्णय तो अभी तक मैंने नहीं लिया अपनी पूरी राजनीतिक यात्रा में। केंद्रीय नेतृत्व से जो दायित्व मिला, उन्हीं का निर्वहन मैंने किया। चाहे केंद्र में मंत्री बनने की भूमिका रही हो या फिर प्रदेश अध्यक्ष बनने की भूमिका अथवा मुख्यमंत्री बनाने की भूमिका। चौथी बार के बारे में भी कभी नहीं कहूंगा कि मैं ही मुख्यमंत्री बनूंगा। मगर ये कहता हूं कि मुझसे जब केंद्रीय नेतृत्व पूछेगा तो मैं इच्छा जरूर जाहिर करूंगा कि छत्तीसगढ़़ मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। दिल्ली की राजनीति में बड़े-बड़े नेता बहुत हैं। राज्य की जिम्मेदारी और काम जो मैंने आगे बढ़ाया है, उसको करने की प्राथमिकता आज भी है, और कल भी रहेगी।


सवाल- आप विधानसभा चुनावों के अलावा लोकसभा के चुनाव, पंचायत-म्युनिसिपल के चुनाव तीन-तीन बार जितवा चुके हैं, ऐसा कैसे हो पाया? और क्या इस कामयाबी को आगे निभा पाना मुश्किल नहीं होगा? 
जबाव- हर चुनाव, नई चुनौती को लेकर आता है, नये मुद्दों को लेकर आता है। मुझे नहीं लगता कि पिछले चुनाव हों या इस चुनाव की तुलना हो, या फिर निकाय, पंचायत, समितियों के हो, विधानसभा के हों या फिर लोकसभा के चुनाव हों, इन सभी चुनावों की अपने अपने समय के अनुसार अपनी-अपनी आवश्यकताएं होती हैं। चौथी बार जब हम चुनाव मैदान में जा रहे हैं तब मैं यह कह सकता हूं कि छत्तीसगढ़ की जनता ने जो बात रखी थी जिस विश्वास को लेकर चुनाव के मैदान में रखा था, आज हम आत्मविश्वास के साथ कह सकते हैं कि चलिए यह काम हमने पूरा किया, हमने यह वादा किया था इसे पूरा किया, और आज एक विकसित छत्तीसगढ़ आपको दिया है। चौथी बार हम मजबूती के साथ दावा करेंगे कि केंद्र में नरेन्द्र मोदीजी की मजबूत सरकार है, छत्तीसगढ़ के लिए यह सुनहरा अवसर है। जब केंद्र में यूपीए की सरकार थी तब तो छत्तीसगढ़ को हमने बेहतर किया और अब ये सुनहरा मौका हमारे सामने है कि हम और बेहतर छत्तीसगढ़ बना सकते हैं। चौथी बार भी भाजपा को अवसर मिलेगा तो छत्तीसगढ़ एक लंबी छलांग के लिए तैयार है। इस बार हम इस तैयारी के साथ इस चुनाव मैदान में जाएंगे। 


सवाल- इस चुनाव में ऐसा कौन सा अकेला ऐसा मुद्दा रहेगा जिससे आप कह सकें कि आप हमें वोट दो?
जबाव- इस बार सबसे बड़ा मुद्दा यही रहेगा कि मोदीजी के नेतृत्व में देश में जबरदस्त परिवर्तन हो रहा और इस परिवर्तन में हमारी छत्तीसगढ़ की भागीदारी कैसी हो? इसलिए हम न केवल लोकसभा की 11 की 11 सीटों की बात करते हैं बल्कि छत्तीसगढ़ में भी हमने लक्ष्य रखा है 65 प्लस। एक बड़े लक्ष्य को लेकर काम कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि दिल्ली के वातावरण का असर मिलेगा। पहले डॉ. रमन या फिर भाजपा अकेले लड़ते थे, दिल्ली में हमारी सरकार नहीं थी, अब एक और एक दो नहीं, ग्यारह की स्थिति बनेगी। इसलिए हम बेहतर और आरामदायक स्थिति में रहेंगे, इस चुनाव में।


सवाल- राष्ट्रीय परिस्थितियों और मुद्दों को लेकर राज्य का चुनाव लडऩा, क्या आपको नहीं लगता है कि राज्य का कोई मजबूत मुद्दा आपके हाथ नहीं है जिसे लेकर वोट मांग सकें।
जवाब- हमारा मुद्दा बहुत स्पष्ट है। विकास के मुद्दे पर ही हम चुनाव में जाएंगे। हमें 2003 में कैसा छत्तीसगढ़ मिला था और आज कैसा है? जब मुझे नेतृत्व करने का मौका मिला तो 16 जिले थे। आज छत्तीसगढ़ में 11 नए जिले बन गए, 27 जिले हो गए। नए विकासखंड बने, नई तहसीलें बन गईं। छत्तीसगढ़ को मजबूत बनाने के लिए हमने अलग-अलग हिसाब से नए संभागों का निर्माण किया। चारों संभागों में नए मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज हो गए, आईआईटी आ गया, आईआईएम, ट्रिपल आईटी, लॉ यूनिवर्सिटी, आ गए। आज 170 से ज्यादा आईटीआई खुल गए। एक बड़ा परिवर्तन आ गया। बीस हजार करोड़ की सड़कों का निर्माण अभी चल रहा है। बेहतर रोड कनेक्टिविटी हम दे रहे हैं। बेहतर जीवन देने के लिए सिस्टम विकसित किए हैं। कुल मिलाकर लोगों ने जिस विकसित छत्तीसगढ़ की कल्पना की थी उस कल्पना के विकास में हम आगे बढ़े हैं।


सवाल- आप हर बरस महीने-डेढ़ महीने के जनसंपर्क अभियान पर प्रदेश के गांव-गांव तक पहुंचते हैं, क्या इससे आपको बाकी साल भर कामकाज सुधारने का मौका मिलता है?
जवाब- लोक सुराज से पूरे सरकार की गतिविधियों का, सभी विभागों के क्रियान्वयन का एक प्रकार से निचोड़ सामने आता है। गांव की सच्चाई से सीधे साक्षात्कार होने का मौका मिलता है। तब हमको समझ में आता है कि हम रायपुर में बैठकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और क्रियान्वयन में कहीं गड़बड़ी है, चूक हो रही है तो उसे कैसे सुधारा जा सकता है। और यह आंख खोलने वाला रहता है। नई योजनाओं का जन्म भी ग्राम सुराज में हुआ, शहर सुराज, लोक सुराज म


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