विशेष रिपोर्ट

कलेक्टर की अनुमति बिना बेबस बीमार की जमीन औने-पौने दाम पर, कौंआझर के ग्रामीणोंं ने कहा-आपराधिक मामला दर्ज हो


उत्तरा विदानी
महासमुन्द, 8 अगस्त (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा जमीन खरीदी बिक्री मामले में रोज नए-नए खुलासे होने लगे हैं।  कौंआझर निवासी गणेशिया बाई  के कलेक्टर को दिए बयान के बाद यहां के ग्रामीण मंत्री पर आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग करने लगे हैं। उनका कहना है कि जमीन खरीदने वाले तो प्रदेश के मंत्री हैं और सरकारी जमीन को महज 16 हजार रुपये में खरीदना आपराधिक मामला है और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए। 
ज्ञात हो कि कलेक्टर को दिए बयान में  गणेशिया बाई ने कहा है कि तबीयत खराब थी तो उसे अपनी जमीन को औने-पौने दाम में बेचनी पड़ी। उसके पिता को मिली लगभग डेढ़ एकड़ सरकारी जमीन को मंत्रीजी ने 16 हजार रुपये में खरीदा। 
गांव वाले अब इस मामले में एकजुट हो रहे हैं और कहते हैं कि सरकारी जमीन को बेचने और खरीदने का हक किसी को नहीं है। इसे बेचने और खरीदाने वाले दोनों ही वाकिफ हैं और इसीलिए इस जमीन को खरीदते वक्त किसी ने भी कलेक्टर से अनुमति की जरूरत नहीं समझी। जलकी निवासी गेंद राम ध्रुव, गजानंद पटेल का कहना है कि महासमुन्द जिला शुरू से जमीन घोटाले को लेकर चर्चित रहा है। यदि इन मामलों की तह तक जाकर जांच हो तो कई नेता और मंत्री घेरे में आएंगे। 
इस मामले में गणेशिया बाई के अलावा उनके बयान लेने वाले तमाम आला अफसर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं लेकिन अब यह मामला केवल जमीन बेचने वाले और खरीदने वाले के बीच नहीं रह गया है जबकि उस क्षेत्र के ग्रामीणों के अलावा जिले भर के लोगों के लिए अहम मुद्दा बन गया है।
गणेशिया बाई ने जो शपथ पत्र कलेक्टर को दी है, वह सोशल मीडिया में  घूम रहा है। इधर कलेक्टर सहित एसडीएम, तहसीलदार, ऐरीगेशन, वन विभाग ने चुप्पी नहीं तोड़ी है। वहीं  चौक-चौराहों पर इस वक्त यही मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।  
गणेशिया बाई पिता धनसिंग सतनामी  के साथ ही  नाम न छापने की शर्त पर कौआझर के कुछ ग्रामीणों ने बताया कि गणेशिया के पिता को 0.57 हेक्टेयर मतलब लगभग डेढ़ एकड़ जमीन कृषि कार्य के लिए शासकीय पट्टे पर मिला था। गणेशियाबाई के पिता धनसिंग सतनामी ने कौंआझर निवासी हेमलाल दलाल के मार्फत कलेक्टर की बिना अनुमति के इस जमीन को बृजमोहन अग्रवाल को बेच दी थी।  इस मामले के लिए गणेशिया बाई को 22 मई 2017 को तहसील कार्यालय से नोटिस भी जारी की गई थी, जिसके जवाब में गणेशिया बाई ने कलेक्टर न्यायालय में 3 जुलाई 2017 को कलेक्टर न्यायालय में बयान दर्ज कराया था। वह अक्षरश: इस प्रकार है- ग्राम जलकी प.ह.नं. 05 रानिम पटेवा तहसील महासमुन्द में स्थित भूमि खं. नं. 809 रकबा 0.57 हेक्टेयर कृषि प्रयोजन के लिए शासकीय पट्टे पर प्रदत्त  की गई थी, जो कलेक्टर के बिना अनुमति के अंतरण के आयोग्य थी। आपके द्वारा छत्तीसगढ़ भू- राजस्व संहिता 1959 की धारा 165 (7-ख) का उल्लंघन कर बिना कलेक्टर की अनुमति प्राप्त किये आदित्य श्रीजन प्रा.लिमि के डायरेक्टर बृजमोहन अग्रवाल निवासी रामसागर पारा रायपुर के पास विक्रय किया था जो प्रथम दृष्टया विक्रय संहिता की धारा 165 (7-ख) का उल्लंघन है। मामले में 3 जुलाई 2017 को पेशी में उपस्थित होने कहा गया था। 
 तहसीलदार की नोटिस मिलने के बाद गणेशिया बाई  ने कलेक्टर न्यायालय में शपथ पत्र में कहा है कि उसके पिता धनसिंग को शासन से करीब 2 एकड़ जमीन मिली थी। जिसकी नोटिस मुझे प्राप्त हुई है। उक्त जमीन भर्री एवं दर्रा किस्म की है। मेरी तबीयत खराब होने के कारण मैंने इलाज के लिए उक्त जमीन को 16 हजार रुपये में कलेक्टर की बिना अनुमति बेच दी है जिसकी राशि मुझे रजिस्ट्री घर में मिली। मैंने स्वेच्छा से जमीन बेचा है। यदि शासन द्वारा इस जमीन का नामांतरण किया जाता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है। 
गणेशिया कौंआझर में अपने बेटे, बहू और पोतों के साथ रहती है। बेटा मजदूरी करता है।  गणेशिया बाई का मायका जलकी में है। गांव वालों के मुताबिक उसके  पिता धनसिंग को कमाने खाने के लिए शासकीय पट्टे पर उक्त जमीन दशकों पहले मिली थी। पिता के गुजर जाने के बाद वह जमीन गणेशिया के कब्जे में रही। गणेशिया  बताती है कि आज से 6-7 सात पूर्व मेरी तबीयत खराब हुई तो जलकी निवासी हेमलाल मेरे पास आया और उक्त जमीन का सौदा मेरे साथ 16 हजार रुपये में हुआ था। 
छत्तीसगढ़ ने हेमलाल का पक्ष लेने संपर्क की कोशिश की लेकिन नहीं हो सका। 


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