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नोटबंदी अनैतिक, लोगों की संपत्ति की चोरी : फोर्ब्स




फोर्ब्स पत्रिका के एडिटर-इन-चीफ स्टीव फोर्ब्स ने भारत के नोटबंदी अभियान को अनैतिक करार देते हुए कहा है कि यह लोगों की संपत्ति की चोरी के समान है। पत्रिका ने कहा है कि बीते आठ नवंबर को 500 रुपये तथा 1,000 रुपये के नोटों को अमान्य करार देने से भारत की अर्थव्यवस्था व भविष्य में होने वाले निवेश को नुकसान पहुंचा है तथा सरकार के अधिकाधिक नियंत्रण से आम आदमी की निजता को आघात पहुंचा है।

फोर्ब्स ने कहा, "भारत ने एक ऐसी अप्रत्याशित घटना को बढ़ावा दिया है, जो न केवल उसकी अर्थव्यवस्था और पहले से गरीब करोड़ों नागरिकों को तबाह कर रहा है, बल्कि उसकी अनैतिकता को भी बढ़ा रहा है।"

नोटबंदी से पूरे देश में नकदी की अप्रत्याशित कमी हो गई है, जिसके कारण करोड़ों लोगों को अपने पैसे निकालने के लिए एटीएम के बाहर घंटों कतार में खड़ा होना पड़ रहा है।

पत्रिका ने कहा, "बिना किसी चेतावनी के भारत ने अचानक देश की 85 फीसदी करेंसी को अवैध घोषित कर दिया। इस फैसले से हैरान देशवासियों को बैंकों में पुराने नोट जमा करने और उन्हें बदलकर नए नोट लेने के लिए केवल कुछ सप्ताह का वक्त दिया।"

फोर्ब्स ने इशारा किया कि संसाधन का निर्माण सरकार नहीं लोग करते हैं।

पत्रिका के मुताबिक, "भारत ने जो भी किया वह गैरकानूनी और लोगों की संपत्ति की व्यापक तौर पर चोरी है। लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार द्वारा यह हैरान करने वाला कदम है।"

फोर्ब्स ने नोटबंदी की तुलना सन् 1975-77 के आपातकाल के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नसबंदी के कदम से की।




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