विशेष रिपोर्ट

महासमुंद तहसील की192 स्कूलों के 1 लाख जाति प्रमाणपत्र आवेदन कबाड़ में


2014 से बंडल ज्यों के त्यों पड़े, अब शिक्षक-पालक ढूंढ रहे अपनी फाइलें 
उत्तरा विदानी
महासमुन्द, 3 अगस्त (छत्तीसगढ़)। राज्य शासन के निर्देश पर स्कूली बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने के काम को किस तरह किया जा रहा है, इसका ताजा उदाहरण महासमुन्द के तहसील कार्यालय में देखने को मिला। यहां 192 स्कूलों के लगभग एक लाख बच्चों का आवेदन कबाड़ की तरह पड़े हुए हैं। स्कूलों से मंगाई गई फाइलों का टैग भी खोला नहीं गया है। वर्ष 2014 से अब तक फाइलें धूल खाती हुई, गंदगी, चूहों और दीमकों के बीच पड़ी हुई हैं। इसका पता तब चला जब पालकों की शिकायत पर 'छत्तीसगढ़Ó वहां पहुंचा जहां बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया चल रही थी।  
जाति-प्रमाणपत्र बनाने का दायित्व जिस अधिकारी पर है उसका कहना था- मेरे सहयोगी नहीं है। अकेले यह काम नहीं संभलता, अपने अधिकारी को वाकिफ कराया था और स्टाफ की मांग की थी। 
इधर कलेक्टर हिमशिखर गुप्ता  कहते हैं कि  इस विभाग से जानकारी दी गई है कि 28 हजार बच्चों को जाति प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। बच्चों का जाति प्रमाणपत्र यदि रोका गया है तो शीघ्र ही जांच के बाद निर्देश कर जारी किया जाएगा। 
महासमुन्द तहसील में शहर सहित विकास खंड के तमाम  192 स्कूलों के बच्चों का जाति प्रमाणपत्र बनने आवेदन पहुंचा है। वर्ष 2014 से अब तक तीन साल गुजर चुके हैं लेकिन प्रमाणपत्र बन ही नहीं  रहा है। वैसे  महासमुन्द कलेक्टर के हिसाब से पिछले साल 28 हजार बच्चों का जाति प्रमाणपत्र जारी हो चुका है लेकिन अब भी हजारों पालकों सहित शिक्षक भी इससे परेशान हैं। थक हारकर कई पालक अफसरों से गुहार लगाकर खाली हाथ जा चुके हैं लेकिन यहां पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को फाइलें ही नहीं मिली। 
तहसीलदार एसडीएम जैसे जिम्मेदार अधिकारी जवाब  देते हैं कि स्कूलों के तमाम बच्चों का जाति प्रमाणपत्र जारी हो चुका है। पालकों की शिकायत पर पालकों के साथ 'छत्तीसगढ़' सबसे पहले उन स्कूलों में पहुंचा जहां से बच्चों का आवेदन गया था। स्कूलों में किन-किन कक्षाओं के बच्चों ने कब-कब आवेदन किया है तथा उन आवेेदनों को कब तहसील में जमा किया है इसकी सूची मौजूद है। 
उसी आधार पर तहसील स्थित लोक सेवा केन्द्र पहुंचने पर पता चला कि यह काम एसडीएम आफिस की एक मैडम करती हैं। पहले दिन दोपहर डेढ़ बजे थे तो मैडम लंच पर थी। पता चला वे शाम 4 बजे तक लौंटेंगी तो सारे पालक वापस घरों को लौट आये। दूसरे दिन भी मैडम एसडीएम के पास उनकी कुर्सी के पास खड़ी दफ्तर का काम निपटा रही थी। सो लंबे समय इंतजार के बाद भी उनसे मुलाकात नहीं हुई। 
तीसरे दिन 5 स्कूलों ने अपने-अपने शिक्षकों को तैनात किया तो वे भी पालकों के साथ एसडीएम दफ्तर पहुंचे। मैडम ने बताया कि यह काम तहसीदार कक्ष के ऊपरी माले में हाल में चल रहा है। वहां पहुंचते डेढ़ बज चुका था और एक पुट्ठे पर लंच टाईम लिखकर दरवाजे पर टांग दिया गया था। लिहाजा सभी लौट आये। 
चौथे दिन बेमुद्दत इंतजार के बाद उस कक्ष में एक अफसर दाखिल हुए। उन्होंने कहा कि कल आप लोग आ जाइये आपका काम हो जाएगा। पांचवें दिन सभी वापस वहीं पहुंचे तो साहब रजिस्टर खोलकर कुछ लिखने में व्यस्त थे। देखते ही बोले-वो फाइलें देख रहे हैं न, उसी में होगी आपके स्कूल की फाइलें, खुद देख लें। कुछ देर वे खुद भी साथ में तलाशते रहे। वहां फाइलों का अंबार पड़ा था। कई बंडलें तो खोली नहीं गई थी। सैकड़ों ऐसे प्रमाणपत्र थे जिसे बन जाने के बाद भी स्कूलों को जारी नहीं किया गया था। 
 पालकों तथा शिक्षकों को स्कूलों के नाम पते ढूंढते-ढूंढते शाम हो चली लेकिन उन्हें फाइलें नहीं मिली। छठवें दिन सारे पालकों और शिक्षकों को फाइलें ढूंढने के कार्य में लगाकर साहब अंदर बाहर होते रहे और दिन भर फाइलें ढूंढने के बाद महज एक-दो स्कूलों की फाइलें मिली तो साहब का फरमान हुआ कि अपने स्कूल के बच्चों के लिए जो फार्मेट में दे रहा हूं उसे  भरें फिर हफ्ते 10 दिन बाद जाति प्रमाण पत्र जारी होगा। बहरहाल दो चार स्कूलों के शिक्षक और पालक खुद जमीन पर बैठकर कबाड़ से अपने बच्चों के जाति आय प्रमाण पत्र के आवेदन निकाल रहे हैं। 
जिले के तत्कालीन कलेक्टर ने एक मुहिम चलाकर जिले के तमाम स्कूली बच्चों के जाति प्रमाणपत्र बनवाने के निर्देश अपने मातहत अधिकारियों को दिये थे। कलेक्टर के आदेश पाते ही तमाम स्कूलों ने अपने विद्यार्थियों से आवेदन भरकर मंगाये थे। हो सकता है उनमें खामियां भी रही हों लेकिन विभाग ने न तो स्कूल को इसकी जानकारी दी और न ही पालकों को। अत: पालक रोज स्कूल का चक्कर लगाने लगे तो पांच छ: स्कूल ने खुद ही इसमें रुचि ली और तब जाकर पता चला कि उनके स्कूल से पहुंची फाइलें किस तरह पड़ी हुई हैं। 
महासमुन्द तहसील से वर्ष 2015-16 में 94 हजार 6 सौ आवेदनों के विरूध्द 28 हजार बच्चों का जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया।  एसडीएम, तहसीलदार कह रहे हंै कि जिन स्कूलों से आवेदन आये हैं, सभी को प्रमाणपत्र जारी हो चुका है। उन स्कूलों के जिन बच्चों को प्रमाणपत्र जारी नहीं किया है पर कहते हैं कि बाकियों का तभी बनेगा जब शिक्षक और पालक यहां आकर फाइलें ढूंढे और प्रमाणपत्र पर खाली पड़े स्थान को भरें। 


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