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ऑडिट से खुलासा,सौ ग्राम पंचायतों में लाखों की गड़बड़ी


ग्राम पंचायतों में हर वर्ष होने वाले ऑडिट में पंचायत विभाग को लगभग 100 ग्राम पंचायतों में गंभीर अनियमितता मिली है इसके लिए पंचायत को खर्च की गई राशि का ब्यौरा देने को कहा गया है। वहीं पंचायत विभाग ने फरमान जारी किया है कि जिन ग्राम पंचायत का ऑडिट नही हो पाया है वे 31 दिसम्बर 2016 तक ऑडिट करवाएं अन्यथा पंचायत सचिव को निलंबित किया जा सकता है। क्रय नियम का पालन नहीं किया जाना, शासन की गाईड लाईन के अनुसार कार्य नहीं होना व अन्य फिजूल खर्चे जैसी अनियमितता सामने आई है।
गौरतलब है कि जिले में 645 ग्राम पंचायतें हैं जिनका सालाना आय-व्यय व अन्य कार्यों में की गई खर्च का ऑडिट किया जाता है। इस वर्ष अब तक 90 फीसदी ग्राम पंचायतो की ऑडिट हो चुकी है जिसमें करीब 100 पंचायतों में कई प्रकार की गड़बड़ी सामने आई है और शासन पालन प्रतिवेदन लेकर सिर्फ खानापूर्ति में ही जुटा है। क्रय-विक्रय संबंधित कोटेशन भी पंचायत नहीं लगाती है। साथ-साथ निर्धारित राशि से भी ज्यादा खर्च की जाती है। कई पंचायत पदाधिकारियों ने बताया कि कई शासकीय आयोजन पर किए खर्च में भी ऑडिट आपत्ति आती है जिसे हमें किसी तरह समायोजन करना पड़ता है। वहीं पंचायत विभाग द्वारा 31 दिसम्बर को जिले में ऑडिट पूर्ण कर लेने का लक्ष्य रखा गया है।
कर वसूली पर जोर
जिला पंचायत द्वारा ग्राम पंचायतों में कर वसूली पर विशेष जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2012-13 से लेकर वर्ष 2015-16 तक लगभग 5 करोड़ 80 लाख रूपए से भी अधिक की वसूली की जा चुकी है जिसमें सम्पत्ति, प्रकाश, बाजार पशु, पंजी, भवन किराया व अन्य खर्च शामिल है। यह भी समस्या सामने आ रही है कि लोग कर देने से आनाकानी कर रहे हैं। हालांकि वसूल की गई राशि पंचायत खाते में ही जमा करना होता है जो गांव के विकास में खर्च की जाती है।
ये हैं नियम
पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 29 के तहत सभी ग्राम पंचायतों में वर्षवार ऑडिट की जाती है। वर्तमान में पंचायत विभाग द्वारा आंतरिक ऑडिट की जाती है। गंभीर आपत्ति पर पालन प्रतिवेदन सहित कई अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। छोटी-मोटी गड़बड़ी पर पंचायत स्तर में भी निराकरण करवाने का प्रावधान है। मूल अंकेक्षण भी शासन के निर्देशानुसार किया जाता है।
प्रशिक्षण की जरुरत
ग्राम पंचायतों के सचिवों को ऑडिट व अन्य क्रियाकलापों से संबंधित अभी और भी प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। अनियमितता पाए जाने पर पालन प्रतिवेदन लिया जाता है।
जे पी मौर्य
सीईओ जिला पंचायत
4 नोटिस के बाद कार्रवाई

ऑडिट का मुख्य उद्देश्य अभिलेख को दुरुस्त करना होता है, गड़बड़ी पर लगातार चार नोटिस देने के बाद ही शासन के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाती है।
अशोक धीरही
जिला अधिकारी अंकेक्षण
नियमानुसार कार्य

पंचायत राज अधिनियम के अनुसार ही कार्य करवाए जाते हैं। सभी प्रकार के दस्तावेज सचिव के जिम्मे में रहते हैं। पंचायत के सभी कार्यों का मूल्यांकन सत्यापन होता है। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं होती है।
राजकुमार पटेल
सरपंच, खाड़ा (बिल्हा)
बैठक में निराकरण
ऑडिट आपत्ति जब
 गंभीर होती है तब ग्रामसभा व पंचायत की बैठक आयोजित कर निराकरण किया जाता है। फिर पालन प्रतिवेदन जनपद में जमा कर दिया जाता है।


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