विशेष रिपोर्ट

बृजमोहन की जमीनों की गुत्थी उलझती चल रही




रोज नई जानकारियां भाजपा के नेता हक्काबक्का, हैरान

छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायपुर, 31 जुलाई। सरकार के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल अपनी पत्नी और पुत्र के फार्महाऊस की जमीन मामले में घिरते जा रहे हैं। यह प्रकरण राजनीति से परे राजस्व, वन और जल संसाधन विभाग की जमीन रिकॉर्ड से जुड़ा है, जिसका खंडन नहीं हो सकता है। श्री अग्रवाल के परिजनों की जमीन खरीद में एक के बाद एक अनियमितता के खुलासे के बाद के भाजपा के भीतर गहरी निराशा है और पार्टी नेता इस मामले में खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं। 
महासमुंद जिले के पर्यटन स्थल सिरपुर के समीप ग्राम जलकी में कृषि मंत्री श्री अग्रवाल की पत्नी श्रीमती सरिता अग्रवाल और पुत्र अभिषेक अग्रवाल के फार्महाऊस और रिसॉर्ट की जमीन को लेकर विवाद गहरा रहा है। रिसॉर्ट की करीब 10 एकड़ की जमीन जल संसाधन विभाग की मिल्कियत रही है, जिसे बाद में विभाग ने वृक्षा रोपण के लिए वन विभाग को दे दिया था। इस जमीन को स्थानीय किसान विष्णु साहू ने पहले दान दिया और राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं होने का फायदा उठाकर उसने कृषि मंत्री की पत्नी व पुत्र को बेच दिया। मामले के खुलासे के बाद जमीन वापसी के लिए जद्दोजहद चल रही है। 
महासमुंद कलेक्टर हिमशिखर गुप्ता ने इसको लेकर वन-राजस्व और जल संसाधन के विभाग के अधिकारियों की टीम बनाई थी। टीम ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट तौर पर कहा गया कि जमीन वापस लेने के लिए नामांतरण आदि की कार्रवाई करनी होगी। समिति के सदस्य और डीएफओ आलोक तिवारी ने 'छत्तीसगढ़Ó से चर्चा में कहा कि जल संसाधन विभाग को ही नामांतरण आदि के लिए कार्रवाई करनी होगी। इसके बाद ही वन विभाग का विषय आएगा।
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता पीके आनंद ने इस सिलसिले में राज्य शासन से मार्गदर्शन मांगा है। विभाग से जुड़े एक अफसर के मुताबिक जमीन वापसी के लिए विधिक परामर्श लिया जा रहा है। इसके बाद ही सिविल न्यायालय में वाद दायर करने की कार्रवाई की जाएगी। चूंकि विभाग के मुखिया खुद बृजमोहन अग्रवाल हैं, इसलिए कार्रवाई को लेकर विभागीय अफसर असमंजस में हैं। रिसॉर्ट की जमीन से परे फार्महाऊस की जमीन को लेकर भी एक नया विवाद सामने आया है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक फार्म हाऊस की करीब 13.9 हेक्टेयर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। इस जमीन पर कब्जा आदित्य सृजन प्रायवेट लिमिटेड की है। इस कंपनी के डायरेक्टर कृषि मंत्री की पत्नी श्रीमती सरिता अग्रवाल और अभिषेक अग्रवाल हैं।
यह भी बताया गया कि राजस्व विभाग ने जमीन वापसी के लिए प्रयासरत है। सरकारी जमीन के 15 टुकड़े हैं और कब्जा हटाने के लिए कंपनी के डायरेक्टरों को नोटिस जारी की गई थी। कंपनी की तरफ से दो कर्मचारी तहसीलदार की अदालत में पेश भी हुए। उन्होंने जमीन की अदला-बदली का प्रस्ताव दिया है। लेकिन जमीन की अदला-बदली नहीं हो सकती है। वजह यह है कि सरकारी जमीन के 9 टुकड़े में छोटे और बड़े झाड़ के जंगल हैं, जिसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। 
सरकारी जमीन से परे आदिवासियों के पट्टे की जमीन की खरीद का विवाद भी चल रहा है। यह मामला कलेक्टर के अदालत में हैं। तत्कालीन कलेक्टर उमेश अग्रवाल ने अपनी रिपोर्ट में यह उल्लेखित किया है कि उक्त जमीन की आदिवासियों की जमीन खरीदने से पहले कलेक्टर की अनुमति नहीं ली गई। यह एक और मामला गंभीर हो चला है। 
कुल मिलाकर राजस्व, वन विभाग और जल संसाधन विभाग से जुड़े जमीनों के अलग-अलग मामले के चलते कृषि मंत्री श्री अग्रवाल की मुश्किल कम नहीं हो रही है और मंगलवार से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में यह मामला गर्माने के आसार हैं। 
कल से विधानसभा, भाजपा बैकफुट में आई
कुछ दिन पहले तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल के परिजनों की जमीन गड़बड़ी पर मामले पर भाजपा ने चौतरफा हमला बोला था और आने वाले दिनों में इसे जोर-शोर से उठाने की तैयारी की थी। लेकिन कृषि मंत्री के परिजनों की जमीन खरीदी में अनियमितता का मामला सामने आने पर भाजपा नेताओं में बेचैनी है। पार्टी नेता सीधे तौर पर इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। 
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने 'छत्तीसगढ़Ó से चर्चा में कहा कि कृषि मंत्री ने जमीन खरीदी में किसी तरह की गड़बड़ी से इंकार किया है और उन्होंने प्रेस को दस्तावेज भी दिखाएं हैं। जमीन से जुड़े और किसी तरह के विवाद की जानकारी उन्हें नहीं है। उनकी कृषि मंत्री से चर्चा भी हुई थी। वे अभी प्रदेश से बाहर हैं और नए विवाद की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इस मामले में श्री अग्रवाल ही स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।   




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