छत्तीसगढ़

  • भूपेश पर एक और जमीन घोटाले का आरोप, स्कूल की 30 एकड़ सरकारी जमीन हड़पी
    भूपेश पर एक और जमीन घोटाले का आरोप, स्कूल की 30 एकड़ सरकारी जमीन हड़पी

    जनता कांग्रेस ने हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच मांगी
    छत्तीसगढ़ संवाददाता
    रायपुर, 21 जुलाई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल पर करीब 30 एकड़ सरकारी जमीन हड़पने का मामला प्रकाश में आया है। जनता कांग्रेस के नेताओं ने इस सिलसिले में दस्तावेज जारी किए और आरोप लगाया कि भिलाई-चरौदा की यह जमीन स्कूल की थी, जिसे प्रदेश अध्यक्ष श्री बघेल के नाम कर दी गई। राज्य गठन के बाद राजस्व मंत्री बनते ही जमीन अपनी पत्नी के नाम करवा ली। जनता कांग्रेस के नेता पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष धर्मजीत सिंह ने कहा कि भूपेश बघेल परिवार की जमीन घोटाले के तमाम प्रकरणों की हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से की है। 
    पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष धर्मजीत सिंह, पूर्व मंत्री विधान मिश्रा और विधायक आरके राय ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर स्कूल की जमीन हथियाने का आरोप लगाया है। पूर्व मंत्री श्री मिश्रा ने बताया कि यह मामला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और स्थानीय विधायक भूपेश बघेल के निर्वाचन क्षेत्र का है। उन्होंने बताया कि भिलाई-चरौदा में ग्राम शिक्षा संघ की भिलाई के द्वारा स्कूल संचालित की जा रही थी। वर्ष-1980 के बाद उस स्कूल को साडा में शामिल कर शासकीय करण कर दिया गया। उस स्कूल की 29.90 एकड़ जमीन ग्राम शिक्षा समिति भिलाई के नाम पर दर्ज थी। 
    पूर्व मंत्री ने बताया कि उक्त जमीन 1998-199 में उक्त जमीन गोपनीय तरीके से भूपेश बघेल पिता नंदकुमार बघेल के नाम पर दर्ज कर दी गई। रिकॉर्ड में लिखा गया कि लोक अदालत के खंडपीठ के प्रकरण 36 अ और 94 के अनुसार रिकॉर्ड दुरूस्त किया गया। 
    (बाकी पेजï 5 पर)
    जबकि लोक अदालत आपसी विवादों का समझौते के तहत निपटारा करती है। सरकारी जमीन का लोक अदालत से कोई वास्ता नहीं है और राजस्व रिकॉर्ड में लोक अदालत के आदेश का उल्लेख नहीं किया गया।
    जनता कांग्रेस के नेताओं ने यह भी खुलासा किया कि राज्य गठन के बाद भूपेश बघेल ने राजस्व मंत्री बनने के बाद जमीन को बंटवारा बताकर अपनी पत्नी मुक्तेश्वरी बघेल के नाम स्थानांतरित करवा दी।  सरकारी जमीन के आबंटन के लिए सरकार की अनुमति जरुरी नहीं है। 
    जनता कांग्रेस के नेताओं ने यह भी बताया कि राज्य शासन, भिलाई नगर निगम और स्कूल प्रबंधन को यह नहीं मालूम की करोड़ों की सरकारी जमीन आखिर भूपेश बघेल के नाम पर कैसे हो गई? उन्होंने यह भी बताया कि भिलाई नगर निगम ने 9 जुलाई 1999 को संबंधित शाला समिति के पास एक पत्र भेजा। जिसमें यह लिखा था कि शाला समिति की 29.90 एकड़ जमीन का स्वामित्व अब नगर निगम के पास है। पत्र में यह भी लिखा था उक्त जमीन से होने वाली आय से स्कूल खर्च निकलेगा। ऐसा प्रतीत होता है कि भूपेश बघेल ने अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करते हुए करोड़ों की सरकारी जमीन अपने नाम करवा ली। 
    पूर्व मंत्री विधान मिश्रा ने यह भी कहा कि 7 जून 1998 को साडा भंग किया गया था। भंग होने के तीन माह बाद तहसीलदार से स्कूल की जमीन के नामांतरण की पुष्टि करवा ली गई। इस हेराफेरी में साडा की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। 

 

राजनीति

  • शंकर सिंह वाघेला के जाने से कांग्रेस को नुकसान तो बीजेपी को होगा फायदा!

    गांधीनगर: गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और बापू के नाम से मशहूर शंकर सिंह वाघेला ने कल कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया. वाघेला का ये कदम कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि गुजरात में इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं और  कांग्रेस के पास गुजरात में कोई बड़ा चेहरा नहीं है.

    मैं अपने आप कांगेस को मेरी ओर से मुक्त करता हूं- वाघेला

    गांधीनगर में अपने 77वें जन्मदिन के मौके पर वाघेला ने समर्थकों का एक सम्मेलन बुलाकर कहा, ‘’मैं अपने आप कांगेस को मेरी ओर से मुक्त करता हूं. अपने गले में कोई झंडा नहीं लगाना. मैं कोई दल में शामिल नहीं होऊंगा.विपक्ष के नेता पद से इस्तीफा भेज रहा हूं.’’ कांग्रेस से वाघेला की नाराजगी पिछले लंबे समय से चल रही थी.

    खबरों के मुताबिक, वाघेला चाहते थे कि कांग्रेस उन्हें चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा बनाए लेकिन कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं हुई. वाघेला ने न सिर्फ पार्टी छोड़ी है बल्कि कांग्रेस के विनाशकाल की भविष्यवाणी भी कर दी. वाघेला ने कहा, ‘’पार्टी ने हमको 24 घंटे पहले निकाल दिया है. पता नहीं मैं क्या कहने वाला था. विनाशकाले विपरीत बुद्धि.’’

    कांग्रेस ने कहा, वाघेला पर नहीं की गई कोई कार्रवाई

    वाघेला के कांग्रेस पर लगाए गए इन आरोप के बाद कांग्रेस की तरफ से भी सफाई दी गई. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘’उनके खिलाफ न कोई कार्रवाई की और न निकाला गया है. पद छोड़ने का निर्णय उनका अपना है. वो चाहते थे उन्हें अध्यक्ष बनाया जाए.’’ कांग्रेस और वाघेला के बीच की खाई तब और बढ़ गई जब राष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस क्रॉस वोटिंग की बात सामने आयी.

    कांग्रेस ने क्रॉस वोटिंग के लिए वाघेला को जिम्मेदार माना!

    गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के 57 विधायक हैं, लेकिन मीरा कुमार को केवल 49 कांग्रेसी विधायकों के वोट मिले. इस क्रॉस वोटिंग के लिए वाघेला को जिम्मेदार माना गया. पार्टी छोड़ने के वाघेला के एलान के पहले कांग्रेस के नौ विधायकों ने उनके साथ गुप्त बैठक की. यही नहीं मंच पर भी कांग्रेस और एनसीपी के कई विधायक मौजूद थे.

    कांग्रेस की मुश्किल में बीजेपी का फायदा

    खबरों के मुताबिक अगले महीने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले 10 से 12 विधायक कांग्रेस को झटका दे सकते हैं. यानी कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं. कांग्रेस की इस मुश्किल में बीजेपी को अपना फायदा दिख रहा है.

    हालांकि वाघेला ने कांग्रेस छोड़ने के साथ ही ये एलान भी किया कि वो अब न बीजेपी में शामिल होंगे न किसी और दल में बल्कि राजनीति से ही संन्यास ले लेगें, लेकिन साथ ये भी कहा कि वो कभी रिटायर नहीं होंगे. वाघेला ने संन्यास तो लिया है पर भाषण में बता दिया है कि री एंट्री का रास्ता अभी खुला हुआ है. (एबीपी न्यूज़)

मनोरंजन

  • 'जब हैरी मेट सेजल' का ट्रेलर रिलीज, दिखी शाहरुख-अनुष्काए की जबरदस्त कैमे‍स्ट्री

     

    बॉलीवुड सुपरस्‍टार शाहरुख खान और अनुष्‍का शर्मा की आगामी फिल्‍म 'जब हैरी मेट सेजल' का धमाकेदार ट्रेलर रिलीज हो गया है. इससे पहले फिल्‍म के चार मिनी ट्रेलर्स रिलीज किये गये थे जिसमें शाहरुख-अनुष्‍का की झलक देखने को मिली थी. लेकिन शुक्रवार को रिलीज किये गये इस ट्रेलर में इस फिल्‍म की असली कहानी की झलक दिख रही है. शाहरुख-अनुष्‍का की कैमेस्‍ट्री शानदार लग रही है और दोनों की एक्टिंग भी लाजवाब लग रही है. दोनों की खूबसूरत कैमेस्‍ट्री ने फैंस को इस फिल्‍म को लेकर पहले से और ज्‍यादा एक्‍साइटिड कर दिया है. 

    ट्रेलर की शुरुआत में शाहरुख खान गुजराती लोगों के एक ग्रुप को 'बाय-बाय' करते हुए काफी खुश नजर आ रहे हैं. लेकिन अगले ही पल अनुष्‍का, शाहरुख को बताती हुई नजर आ रही है कि उनकी सगाई की अंगूठी खो गई है. वहीं शाहरुख अनुष्‍का को खुद से दूर करने के कई ट्रिक ट्राई करते हुए नजर आ रहे हैं. शाहरुख पंजाबी और अनुष्‍का गुजराती बोलते हुए शानदार लग रहे हैं. लवस्‍टोरी पर बेस्‍ड इस फिल्‍म के 4 गाने रिलीज हो चुके हैं. फिल्‍म की शूटिंग कई खूबसूरत लोकेशंस पर हुई है जिसकी झलक ट्रेलर में भी देखी जा सकती है.

    इम्तियाज अली के निर्देशन में बन रही इस फिल्‍म में शाहरुख एक गाइड की भूमिका में नजर आयेंगे. शाहरुख और अनुष्‍का चौथी बार एकसाथ काम करते नजर आ रहे हैं. इससे पहले दोनों 'रब ने बना दी जोड़ी', 'जब तक है जान' और 'ए दिल है मुश्किल' में काम कर चुके हैं. फिल्‍म 4 अगस्‍त को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है. इसके अलावा शाहरुख, आनंद एल रॉय की फिल्‍म में नजर आनेवाले हैं. इस फिल्‍म में सलमान खान भी एक गाने में नजर आनेवाले हैं. हाल ही में दोनों सुपरस्‍टार्स की तस्‍वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. इस गाने को रेमो डिसूजा कोरियोग्राफ करेंगे. (प्रभात खबर)

स्थायी स्तंभ

खेल

  • बेरोजगारी की मार झेल रहे ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर, भारत में तलाश रहे नौकरी

    क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के साथ जारी भुगतान विवाद के कारण बेरोजगार हुए ऑस्ट्रेलियाई क्रिकटर अब भारतीय बाजार का रुख कर रहे हैं

    क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के साथ जारी भुगतान विवाद के कारण बेरोजगार हुए ऑस्ट्रेलियाई क्रिकटर अब भारतीय बाजार का रुख कर रहे हैं ताकि उन्हें कोई लुभावनी विज्ञापन डील मिल सके. आस्ट्रेलियाई क्रिकेटर संघ ( एसीए ) ने अपने जनरल मैनेजर टिम क्रूइकशेंक को भारत में संभावित निवेशकों से बात करने भेजा है जो ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों से करार करना चाहते हैं.

    टिम ने कहा, ‘ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों को भारत आना बहुत पसंद है. उनके भारत में बड़े फैन हैं. आईपीएल में भी उनके प्रशंसकों की संख्या कम नहीं है. मैं यहां भारतीय बाजार में संभावित साझेदारों से बात करने आया हूं. भारतीय निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है.’

    ऑस्ट्रेलिया के सभी टॉप क्रिकेटर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के सहमति पत्र के नियमों और शर्तों पर मानने से इनकार कर दिया है, जिसकी वजह से वह फिलहाल बेरोजगार हैं. इसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया ए ने दक्षिण अफ्रीका ए के साथ सीरीज खेलने के लिए दौरे पर जाने से भी इनकार कर दिया. दक्षिण अफ्रीका दौरे पर होने वाली इस ट्राई सीरीज में तीसरी टीम भारत की थी.

    यह पूछने पर कि क्या इसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया टीम का भारत दौरा खतरे में पड़ सकता है, टिम ने उम्मीद जताई कि तब तक कोई समझौता हो जाएगा. उन्होंने कहा, ‘खिलाड़ी भारत और बांग्लादेश का दौरान करने को लेकर उत्सुक हैं. लेकिन जब तक एमओयू निष्पक्ष शर्तों पर साइन नहीं किया जाता वह दौरा नहीं कर पाएंगे. अगर भारत दौरा अगले हफ्ते होता तो मैं कहता कि ये गंभीर स्थिति है, लेकिन क्योंकि ये अक्टूबर में है तो हमें उम्मीद है कि तब तक कोई समाधान निकल आएगा.’ (india.com)

कारोबार

  • आसान नहीं है चिकन मोमोज में मिलावट

    अमनदीप सिंह

    नई दिल्ली. जिसे आप चिकन मोमोज या फिर मटन मोमोज समझकर खा रहे हैं कहीं उसमें कुत्ते का मीट तो नहीं है? जी हां, दिल्ली कैंट में मोमोज की दुकानों को बंद करा दिया गया है। कैंट बोर्ड के सीईओ का कहना है कि कंप्लेंट आ रही थी कि मोमोज वाले कुत्ते का मीट मिलाकर मोमोज बेच रहे थे। यह एक हैरान करने वाली खबर है। इसपर हमने दिल्ली के कई रेस्ट्रॉन्ट और बूचड़खानों के मालिकों से बात की और जाना कि क्या ऐसा करना संभव है?

    एक रेस्तरां ओनर ने बताया कि कुछ टाइम पहले ऐसा ही एक मामला गुड़गांव में भी सामने आया था। पॉश इलाकों से पालतू कुत्ते गायब हो रहे थे। ऐसे में स्थानीय लोगों को शक है कि अवैध बूचड़खानों के बंद होने के कारण इन कुत्तों को शिकार बनाया जा रहा है और मोमोज, बिरयानी और कबाब में कुत्तों के मीट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ओनर का कहना है कि ऐसा दिल्ली में भी हो सकता है। रोड साइड स्टॉल लगाने वाले मोमोज वाले ऐसा कर सकते हैं। ये वैसे भी अवैध रूप से चल रहे हैं। 20 रुपये में 8 पीस (चिकन) मोमोज के मिलते हैं। इसमें वो चिकन के पंजों के अलावा सोया का इस्तेमाल करते हैं। मुर्गा मंडियों में पंजों का रेट काफी सस्ता होता है। ऐसे में चिकन के नाम पर इनका यूज होता है। कुत्ते का मीट आम नहीं बिकता। न ही कोई दिल्ली में कोई बेच सकता है। ऐसे में यह काम छुपकर किया जाता होगा। कुत्ते के मीट को पकड़ पाना काफी मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए।

    वहीं एक बूचड़खाने के मालिक ने बताया कि मोमोज वाले मंडियों से ही पूरा माल उठाते हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में औसतन 70 हजार से ज्यादा मुर्गे दिल्ली में रोजाना काटे जाते हैं। इसमें बढ़िया क्वॉलिटी से लेकर बचा हुआ मांस सब बिक जाता है। बचे हुए मांस की कीमत काफी कम होती है। जिसका इस्तेमाल मोमोज या फिर कबाब में मिक्स करने के लिए किया जाता है। कुत्ते का मीट मिक्स करना कोई मुश्किल काम नहीं है। उन्होंने बताया कि कई बार विदेशी इंडिया में आकर कुत्ते के मीट की डिमांड करते हैं। इसको पूरा करने के लिए कुछ लोग आवारा कुत्तों का शिकार करते हैं। लेकिन दिल्ली में ऐसा होना काफी कठिन है। उन्होंने बताया कि लोगों से मिल रही शिकायतों को फूड अथॉरिटी को गंभीरता से लेना चाहिए। बार-बार कुत्ते का मीट का इस्तेमाल की शिकायतें मिल रही हैँ। इसके पीछे कौन लोग हैं इसका पता लगाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि कुत्ते का मांस ज्यादा दिन तक फ्रेश रहता है।

    जानकारी के मुताबिक एशियाई देशों में मांस के अवैध कारोबार के लिए एक अनुमान है कि हर साल 20 लाख कुत्तों को मारा जा रहा है। वियतनाम में एक कुत्ता करीब 60 डॉलर में बिकता है। यहां कुत्ते का मांस बहुत खाया जाता है। पिछले कुछ सालों से पूरे एशिया में कुत्ते के मांस का अवैध कारोबार बढ़ कर करोड़ों डॉलर तक जा पहुंचा है। (नवभारत टाइम्स)

सेहत/फिटनेस

  • 95 फीसदी भारतीयों को मसूड़ों की बीमारी

    भारत में दांतों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता। हाल ही में किए गए एक अध्ययन से संकेत मिलता है कि लगभग 95 फीसदी भारतीयों को मसूड़ों की बीमारी है। 50 फीसदी लोग टूथब्रश का इस्तेमाल नहीं करते। 15 साल से कम उम्र के 70 फीसदी बच्चों के दांत खराब हो चुके हैं।

    खुद उपचार की प्रवृत्ति

    इंडियन मेडिकल असोसिएशन (आईएमए) के अनुसार, भारतीय लोग नियमित रूप से डेंटिस्ट के पास जाने की बजाय कुछ खाद्य और पेय पदार्थों का परहेज करके खुद उपचार ढूंढने की कोशिश करते रहते हैं। दांतों की सेंसिटिविटी एक और बड़ी समस्या है क्योंकि इस समस्या वाले मुश्किल से 4 फीसदी लोग ही डेंटिस्ट के पास परामर्श के लिए जाते हैं।

    तनाव का बुरा असर

    आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल ने कहा, 'तनाव का दांतों की सेहत पर बुरा असर होता है। तनाव के चलते कई लोग मदिरापान और धूम्रपान शुरू कर देते हैं, जिसका आगे चलकर दांतों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। जानकारी के आभाव में ग्रामीण इलाकों में दांतों की समस्या ज्यादा मिलती है। शहरों में जंक फूड और विपरित लाइफस्टाइल के कारण दांतों में समस्याएं पैदा हो जाती हैं। प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) भोजन में चीनी ज्यादा होने से भी नई पीढ़ी में विशेष रूप से दांत प्रभावित हो रहे हैं।'

    दूध की बोतल से नुकसान

    अग्रवाल ने कहा, 'दांतों में थोड़ी सी भी परेशानी को अनदेखी नहीं करना चाहिए और जितनी जल्दी हो सके, डेंटिस्ट से मिलना चाहिए। दांत दर्द, मसूड़ों से खून निकलना और दांतों में सेंसिटिविटी को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। दूध की बोतल का प्रयोग करने वाले शिशुओं के आगे के 4 दूध के दांत अक्सर खराब हो जाते हैं।' माताओं को हर फीड के बाद एक साफ कपड़े से बच्चों के मसूड़े और दांत पोंछने चाहिए। अगर अनदेखा छोड़ दिया जाए, तो टूथ इंफेक्शन से हार्ट प्रॉब्लम भी हो सकती हैं। (आईएएनएस)

सामान्य ज्ञान

  • भारत में कहवा उत्पादन

    कहवा या कॉफ़ी का पौधा भारत में 18वीं शताब्दी में ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा लाया गया था। सन् 1798 में तैलीचेरी के निकट यह प्रयोगात्मक रूप से बोया गया, किन्तु सन् 1830 से ही इसे पैदा किया जाने लगा। भारत में विश्व के उत्पादन का केवल 4.5 प्रतिशत कहवा ही पैदा होता है, किन्तु इसका स्वाद उत्तम होने के कारण विश्व के बाज़ारों में इसका मूल्य अधिक मिलता है। भारतीय कहवा को मधुर कहवा कहा जाता है। कहवा उत्पादन में लगभग 6 लाख व्यक्ति लगे हुए हैं।   कहवा भारत की एक महत्वपूर्ण बगनी फसल है। इस फसल की उत्पत्ति अबीसीनिया में माना जाता है। भारत में इसका उत्पादन चिकमंगलूर (कर्नाटक) से शुरू हुआ। मक्का के एक फकीर बाबा बुदान साहिब ने 17वीं शताब्दी में भारतीयों को कहवा से परिचित कराया। कर्नाटक, केर और तमिलनाडु इसके प्रमुख उत्पादक हैं। ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और मध्य प्रदेश अन्य कहवा उत्पादक राज्य हैं।
     भारत में कहवा की दो प्रजातियां मुख्य रूप से उगाई जाती हैं- अरबिका  और रोबुस्टा । अरबिका का उत्पादन 900 मीटर से 1200 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तथा रोबुस्टा का उत्पादन लगभग 150 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होता है। कहवा के उत्पादन में जलवायविक एवं पर्यावरणीय कारक- वर्षा, तापमान और उच्चता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 180 सेंटीमीटर से 200 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा के साथ उष्ण एवं आर्द्र जलवायु उपयुक्त मानी जाती है। इसकी कृषि के लिए तापमान 15 डिग्री सेंटीग्रेड से 30  डिग्री  सेंटीग्रेड के बीच होना चाहिए। इसके अतिरिक्त कहवा की कृषि के लिए मिट्टी में लोहा एवं चूना की पर्याप्त मात्रा का होना आवश्यक होता है।
     भारत में अरेबिका किस्म का कहवा पैदा किया जाता है जो आरम्भ में यमन से लाया गया था। इस किस्म के कहवे की विश्व भर में अधिक मांग है। इसकी कृषि की शुरुआत बाबा बुदन की पहाडिय़ों से हुई और आज भी नीलगिरि पहाड़ी के चारों ओर संकेंद्रित है। कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु कहवा के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। भारत में अरेबिका कहवे की तुलना में रोबेस्टा कहवे का उत्पादन अधिक होता है।
    गोवर्धन
    गोवर्धन एक प्रख्यात मुगल चित्रकार थे, जो शाही सेवारत एक हिंदू चित्रकार भवानी दास के पुत्र थे। उनकी कलाकृतियां अकबर, जहांगीर और शाहजहां के शासनकाल की हैं। आज भी मौजूद उनकी कई कलाकृतियां उन्हें गहरे व ऐंद्रिक रंगों और कोमल रेखांकनों के प्रति लगाव रखने वाले महान सक्षम चित्रकार के रूप में स्थापित करने के लिए पर्याप्त है।  ब्रिटिश संग्रहालय में रखे बाबरनामा के चित्रकारों में से गोवर्धन भी एक थे। भारत के रामपुर स्थित रजा पुस्तकालय में संगृहित कलाकृति गुलाबपाशी की सभा, तिथियांकन 1615, उन्हीं की रचना है। कई अमेरिकी और यूरोपीय संग्रहालयों में सुरक्षित जहांगीर अलबमों में उनके द्वारा बनाए गए रूपांकन मौजूद हैं। गिने-चुने मुगल चित्रकारों ने ही भारत की विविध मानव आकृतियों को इतनी अंतर्दृष्टिï से उकेरा है।
    त्रिकाया
    त्रिकाया एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है तीन कायाएं या शरीर। महायान बौद्घ धर्म में बुद्घ के तीन शरीर के रूप में धर्मकाया -(शाश्वत नियमों की काया), अप्रकटित रूप और परमज्ञान की चरम स्थिति, संभोग काया -(भोग की काया), स्वर्गिक रूप और निर्माण काया (परिवर्तन की काया), सांसारिक रूप- जिसमें बुद्घ ने स्वयं को सांसारिक बोधिसत्व के रूप में प्रकट किया अर्थात एक सांसारिक राजा, एक चित्र या कमल जैसी कोई प्राकृतिक वस्तु के रूप में बताया गया है।  त्रिकाया की अवधारणा केवल ऐतिहासिक बुद्घ गौतम पर ही नहीं, बल्कि सभी बुद्घों पर लागू होती है।

     

अंग्रेज़ी

फोटो गैलरी